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पहचान और विरासत का संघर्ष गोरखालैंड

भारतीय गोरखा परिसंघ के दो दिवसीय राज्य सम्मेलन में उठी गोरखालैण्ड की आवाज

गोरखा समुदाय को मिले ओबीसी का दर्जा: मुनीष

गोरखालैंड की मांग का राजा बुंदेला ने किया समर्थन

बिजनेस लिंक ब्यूरो

Gorkhaलखनऊ। राष्ट्रीय स्तर पर गोरखा समुदाय की आवाज बुलंद करने वाले भारतीय गोरखा परिसंघ ने गोरखालैंड की मांग करते हुये कहा, यह गोरखा समुदाय की संस्कृति, साहित्य और विरासत को बचाये रखने की लड़ाई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुख्मान मोक्तान ने गोरखालैंड की स्थापना और उत्तर प्रदेश में गोरखा समाज को लोगों को ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग की। राष्ट्रीय वरिष्ठï उपाध्यक्ष मुनीष तमांग ने उत्तर प्रदेश में आॢथक, सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े गोरखा समाज को उचित सम्मान मिलने की आवाज बुलंद की।

राजधानी में संपन्न हुये दो दिवसीय सम्मेलन में मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असम, उत्तराखण्ड और पंजाब कार्यकारिणी के पदाधिकारी शामिल हुये। वहीं सूबे के आगरा, बनारस, सोनभद्र, कानपुर, गोरखपुर और इलाहाबाद सहित अन्य जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर समाज की वर्तमान स्थिति और आवश्यकता पर चर्चा की। इस दौरान उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव विमल सिंह राना ने कहा कि गोरखा को ओबीसी का दर्जा और गोरखालैंड मिलना चाहिये। यह सिर्फ जमीन की लड़ाई नहीं, बल्कि गोरखा समाज के पहचान और विरासत की लड़ाई है।

उत्तर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रमेश सिंह क्षेत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में गोरखा समुदाय के लोग पीढिय़ों से निवास कर रहे हैं। लगातार देश के प्रति समॢपत होने के बावजूद दोयम दर्जे का दंश झेलने को विवश हैं। वहीं असम के महासचिव लागपा लामा ने कहा, असम में तमाम समस्यायें हैं जो गोरखा समाज को दोयम दर्जे के नागरिक होने के लिये मजबूर करती हैं। उन्होंने कहा जबकि सुगौली संधि-1917 के अनुसार गोरखा अपने भूभाग, संस्कृति, साहित्य व विरासत के साथ भारतवर्ष में शामिल हुये थे।

राष्ट्रीय महासचिव भूपेन्द्र अधिकारी ने भारतीय गोरखा परिसंघ को समाज की संस्थाओं में मुख्य संस्था के रूप में स्वीकार करते हुये गोरखा समुदाय के हितों और विकास की आवाज को मजबूती से उठाने का आवाहन किया। गोरखा लगातार अपने हक की लड़ाई के लिये आवाज उठा रहा है, आवश्यकता और संगठित होकर आवाज उठाने की है। वहीं बीबी पौडेल ने कहा, यह संघर्ष संस्कृति साहित्य व विरासत का है।

इनका मिला समर्थन

बुन्देलखण्ड राज्य गठन की मांग करने वाले राजा बुंदेला ने गोरखा समुदाय की मांग का समर्थन करते हुये कहा आज संविधान में बदलाव की जरूरत है। पृथक राज्यों से देश का विकास होगा। पूरे देश में करीब सवा करोड़ गोरखा हैं, ऐसे में अलग गोरखालैंड मिलना ही चाहिये। नैशनल फेडरेशन फॉर न्यू स्टेट के बैनर तले अधिवक्ता पी निरूप, विदर्भ की मांग करने वाले रवि सान्याल और पूर्वांचल की मांग करने वाले पंकज जायसवाल ने एकजुट होकर गोरखा लैंड की मांग को जायज ठहराया।

गोरखा समाज की प्रमुख मांगें

भारतीय गोरखा परिसंघ ने राज्य तथा केन्द्रीय सूची में गोरखाओं को ओबीसी में शामिल करने, भाषीय अल्पसंख्यक सुरक्षा, गोरखा समाज की विभूतियों का सरकार व विभिन्न निकाय में चयन, गोरखा चैनल सहित विशेष आरक्षण की मांग की। आयोजन के पहले दिन नेशनल काउंसिल की मीटिंग में गोरखा समाज की बेहतरी और उनके साथ हो रही उपेक्षा पर चर्चा हुई।

हमारी प्रमुख मांग है कि समुदाय के लोगों के लिये गोरखालैंड की स्थापना हो और उत्तर प्रदेश में गोरखा समुदाय के लोगों को ओबीसी का दर्जा दिया जाय।
सुख्यान मोक्तान, राष्ट्रीय अध्यक्ष

आज के समय में संविधान में बदलाव की जरूरत है। पृथक राज्यों से देश का विकास होगा। पूरे देश में करीब सवा करोड़ गोरखा हैं, ऐसे में अलग गोरखालैंड मिलना ही चाहिये।
राजा बुंदेला, समाजसेवी

उत्तर प्रदेश में आॢथक, सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े गोरखा समाज को उचित सम्मान मिलना चाहिये।
मुनीष तमांग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष

गोरखा समाज के लोगों को ओबीसी का दर्जा और निकाय चुनाव में भागीदारी भी मिलनी चाहिये। परिसंघ इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल चुका है।
विमल सिंह राना, प्रदेश महासचिव

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