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पूर्व मुख्य सचिव के अभियान का निकला दम

  • नहीं रुकी पीएफ की लूट, नोटिस मिलने के बाद वेण्डर जमा करा रहे पीएफ
  • दावे अपने-अपने, एजेंसी संचालक बोले जमा किया पीएफ, कर्मचारियों ने कहा नहीं मिला
  • केजीएमयू पहुंचे पीएफ के असिस्टेंट कमिश्नर को रजिस्ट्रार ने दी खातों की जानकारी

rahul copyबिजनेस लिंक ब्यूरो

लखनऊ। सूबे के तत्कालीन मुख्य सचिव राहुल भटनागर के अभियान का दम टूट रहा है। बीते अप्रैल माह में विभिन्न विभागों में तैनात आउटसोॄसग, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भविष्य निधि की सुविधा दिलाने के लिये प्रारम्भ किया गया व्यापक अभियान कागजों में ही कैद होकर रह गया है। स्वास्थ्य विभाग, वाणिज्य कर विभाग, सूचना विभाग सहित अन्य कई विभागों में आउटसोॢसंग के तहत मैनपावर आपूॢत करने वाले वेण्डरों की मनमानी बदस्तूर जारी है।

ताजा मामला केजीएमयू में तैनात आउटसोॢसंग कर्मचारियों के पीएफ का है। केजीएमयू में आउटसोॢसंग के तहत तैनात कर्मचारियों के पीएफ घपले की शिकायत संयुक्त आउटसोॢसंग कर्मचारी संघ ने असिस्टेंट कमिश्नर से की थी। इस पर बीते दिनों असिस्टेंट कमिश्नर गौतम दीक्षित ने वीसी डॉ. एमएलवी भट्ट व रजिस्ट्रार से मुलाकात की। रजिस्ट्रार उमेश मिश्र ने कर्मचारियों के अकाउंट का ब्योरा दिखाया। आउटसोॢसंग के कर्मचारियों को पीएफ न मिलने के मामले में रजिस्ट्रार ने केजीएमयू में लगी मेसर्स अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्यूनिकेशन, अरुणोदय सिक्योरिटी, स्पार्टा सिक्योरिटी एंड एम्प्लाइज, ओमेक्स सिक्योरिटी सॢवसेज, पैंथर्स सिक्योरिटी गार्ड्स सॢवसेज, मिश्रा सिक्योरिटी सॢवसेज और केके मैनपावर लि0 को नोटिस देकर एक हफ्ते में पीएफ से संबंधित ब्योरा तलब किया था।

नोटिस मिलने के बाद इन एजेंसी संचालकों ने एक हफ्ते में करीब एक करोड़ रुपये जमा कराये। इसमें जनवरी से लेकर जून तक का पीएफ शामिल है। रजिस्ट्रार ने एजेंसियों से कहा है जल्द से जल्द कार्यरत आउटसोॢसंग कर्मचारियों का पीएफ नंबर ऑनलाइन करके अकाउंट को आधार कार्ड से लिंक कराये। केजीएमयू रजिस्ट्रार के मुताबिक नोटिस के बाद आउटसोॢसंग एजेंसियों ने कर्मचारियों के पीएफ के एक करोड़ रुपये जमा कराये हैं। केजीएमयू के वीसी एमएलबी भटï्ट ने बताया कि आउटसोॢसंग कर्मचारियों के मामले में पीएफ के असिस्टेंट कमिश्नर आए थे। उन्हें सभी कर्मचारियों के अकाउंट की जानकारी दी गई है।

यहां सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नोटिस के बाद ही आउटसोॢसंग एजेन्सियां पीएफ का पैसा क्यों जमा कराती हैं। नियमत: इसे प्रत्येक माह कर्मचारियों के पीएफ खातों में जमा होना चाहिये। आखिर प्रदेश की राजकीय मैनपावर आउटसाॢसंग एजेंसी उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम प्रबंध तंत्र और विभागीय जिम्मेदार इन वेण्डरों की करतूतों पर लगाम क्यों नहीं लग पा रहे हैं। यह हाल तब है जब तत्कालीन मुख्य सचिव ने अभियान चलाकर सभी कॢमयों का पीएफ समय से दिलाने के हालही में निर्देश दिये थे। लगता है इस व्यवस्था के तहत रखे गये कर्मचारियों का नसीब ही खराब है और योगी सरकार ने भी पूर्ववती सरकार की तरह पीएफ की लूट करने वालों को छूट दे रखी है।

बोले कर्मचारी, नहीं मिला पीएफ
केजीएसयू में कार्यरत आउटसोॢसंग कर्मचारियों सुखविंदर सिंह, विक्की, ज्योति, पिंटू, लाल, दीपक शर्मा, अजय सिंह और पंकज ने बताया कि किसी भी कर्मचारी को अभी तक पीएफ नहीं मिला है। एजेसिंयां गलत तरीके से दस्तावेज तैयार कर पीएफ के करोड़ों रुपये का गबन करना चाहती हैं। कर्मचारियों ने कहा कि अगर पीएफ मामले की सही से जांच नहीं हुई तो आउटसोॢसंग कर्मचारी संघ बड़ा आंदोलन करेगी।

यह था व्यापक अभियान
बीते अप्रैल माह में तत्कालीन मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न हुई क्षेत्रीय समिति ईपीएफ की बैठक में आउटसोॄसग, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमित ईपीएफ जमा कराने के लिये व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिये गये थे। योजना बनी, कि ऐसे कर्मचारी जिनका ईपीएफ नहीं कटता है, अभियान चलाकर जून माह तक कर्मचारी नामांकन योजना-2017 के तहत ऐसे कर्मचारियों का नामांकन कराया जाय। ऐसे सभी कर्मचारी जिन्हें पीएफ का लाभ नहीं मिल रहा है, सभी को जून माह तक विशेष अभियान चलाकर लाभ दिलाया जाय। साथ ही नई तैनाती पाने वाले कर्मचारियों के लिए भी ईपीएफ अनिवार्य किया जाय।

वेण्डर समय से जमा नहीं कराते ईपीएफ
बेरोजगारों को राहत देने के नाम पर तत्कालीन सपा सरकार ने उप्र लघु उद्योग निगम को राजकीय मैनपावर आउट सोॄसग एजेन्सी नामित किया। पर, विभिन्न विभागों, निगमों व संस्थानों में जनशक्तियों की आपूॢत करने वाली निगम की अधिकृत वेण्डर ईपीएफ और ईएसआई समय पर जमा नहीं कर रही हैं। बावजूद इसके राजकीय आउट सोॄसग एजेंसी के जिम्मेदार वेण्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाने में नाकाम हैं। इस बाबत पूंछने पर लघु उद्योग निगम के उप मुख्य प्रबंधक मैनपावर अजय शर्मा ने अपना पल्ला झाड़ लिया।

पंजीकरण में सुस्ती बरकरार
तत्कालीन मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय, उप क्षेत्रीय कार्यालयों लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर, बरेली, आगरा, मेरठ अथवा ईपीएफओ की वेबसाइट से समन्वय स्थापित कर अपने-अपनेे विभागों के अधीनस्थ कार्यालयों, संगठनों में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी, संविदा, आउटसोॄसग के माध्यम से नियोजित कर्मचारियों को भविष्य निधि एवं पेशन लाभ प्रदान करने की कार्यवाही प्राथमिकता से कराई जाय। मुख्य सचिव ने प्रदेश के विभिन्न विभागों में ऐसे कर्मचारियों को पीएफ और पेंशन की सुविधा देने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिये हैं।

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