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युवा बनवा रहे डीएल, उम्रदराज बिना लाइसेंस चला रहे वाहन

आरटीओ कार्यालय में नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की उमड़ रही भीड़ 

रोजाना लाइसेंस रिनुअल कराने वालों की संख्या में महज दस

आरटीओ, एआरटीओ कार्यालय में रोजाना बनते हैं करीब 400 डीएलRto (1)

लखनऊ। राजधानी के आरटीओ और एआरटीओ दफ्तर में जहां रोजाना ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की भीड़ उमड़ती है तो वहीं लाइसेंस रिनुअल कराने वालों की संख्या बहुत कम रहती है। राजधानी के आरटीओ और एआरटीओ कार्यालय में पहली बार लाइसेंस बनवाने वालों की भीड़ रोज रहती है, लेकिन इसकी तुलना में लाइसेंस रिनुअल कराने वालों की संख्या नदारद रहती है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो आरटीओ ऑफिस में रोजाना 400 से अधिक लोग लाइसेंस बनवाने पहुंच रहे हैं। वहीं लाइसेंस रिनुअल कराने वालों की संख्या रोजाना आठ से दस ही रहती है। रिनुअल करवाने वालों में भी दो पहिया वाहन चालकों की ही संख्या अधिक रहती है। अधिकांश लोग तो लाइसेंस का रिनुअल कराने तब पहुंचते हैं जब आरटीओ या ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग होती है। चेकिंग के दौरान उन्हें पता चलता है कि उनका लाइसेंस निरस्त हो गया है। जिसके बाद फिर वे लाइसेंस रिनुअल कराने आरटीओ ऑफिस पहुंचते हैं। दरअसल, शहर की सड़कों पर अधेड़ वाहन चालक यमदूत बन कर घूम रहे हैं। एक्सपायरी लाइसेंस रखने वाले ये वाहन चालक अनफिट भी हैं। लाइसेंस रिनुअल कराने की बजाय वह पुराना लाइसेंस लेकर ही सड़क पर वाहन चला रहे हैं। इनमें भी चार पहिया चालकों की संख्या अधिक है जो लाइसेंस को रिनुअल कराने में अधिक रूचि नहीं रखते हैं। आरटीओ कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार लोगों में लाइसेंस रिनुअल के प्रति जागरुकता नहीं है। एक बार लाइसेंस बनवाने के बाद लोग इसे भी लाइफटाइम के लिए समझने लगते हैं, जबकि लाइसेंस जारी करने के दिन से लेकर उसकी वैधता खत्म होने तक की तिथि स्पष्ट लिखी रहती है।

पहली बार 20 वर्ष का बनता है डीएल
मालूम हो कि 18 साल की उम्र में लाइसेंस बनवाने पर आरटीओ ऑफिस से करीब 20 वर्ष के लिए लाइसेंस इशू किया जाता है। इसके बाद वाहन चालक का लाइसेंस 5-5 साल के लिए रिनुअल किया जाता है। 20 साल बाद वाहन चालक की उम्र करीब 38 साल हो जाती है। ऐसे में लाइसेंस रिनुअल कराने के लिए किसी एक एमबीबीएस डॉक्टर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेकर आरटीओ कार्यालय में जमा करना होता है। किसी भी सरकारी हॉस्पिटल से यह फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाया जा सकता है। उसके बाद आरटीओ कार्यालय से लाइसेंस इशू कर दिया जाता है।

जनवरी में रिनुअल हुए 44 लाइसेंस
आरटीओ कार्यालय में बीते जनवरी महीने में नए लाइसेंस 12000 बनाए गए, जबकि बीते दिसंबर में यह आंकड़ा 11000 रहा। वहीं जनवरी में डीएल रिनुअल कराने वालों की संख्या क्रमश: 44 और दिसंबर में मात्र 36 ही रही। ऐसे में यह आंकड़े खुद नए लाइसेंस और रिनुअल कराए जा रहे लाइसेंस की हकीकत बयां कर रहे हैं।

हफ्ते भर पहले पहुंचेगा एसएमएस
आरटीओ कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में जल्द ही एनआईसी से वार्ता कर सारथी फोर में सुविधा डेवलप की जाएगी, जिससे लोगों को समय से लाइसेंस रिनुअल की जानकारी मिल सके। जिस व्यक्ति का लाइसेंस रिनुअल होना होगा, उसे एक हफ्ते पहले ही उसके मोबाइल नंबर पर एसएमएस भेजने की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा। इससे लाइसेंस रिनुअल कराने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।

फैक्ट फाइल

18 वर्ष की उम्र में बनता है लाइसेंस
20 वर्ष के लिए पहली बार किया जाता है जारी
फिर 5- 5 वर्ष के लिए किया जाता है रिनुअल
400 लोग रोजाना नए लाइसेंस बनवाने पहुंच रहे
8 से 10 लोग रोजाना लाइसेंस रिनुअल कराने पहुंच रहे

लाइसेंस को लोग एक जरूरी प्रपत्र समझ कर एक बार उसे बनवा लेते हैं। उसके बाद इस तरफ वे ध्यान नहीं देते हैं, जबकि लाइसेंस पर वैधता तिथि अंकित रहती है। लाइसेंस रिनुअल में बहुत अधिक परेशानी नहीं उठानी पड़ती। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है।

राघवेंद्र सिंह, एआरटीओ प्रशासन

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