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लो अब कूड़े के लिए हाय-हाय

  • 55 फीसदी घरों से नहीं उठ रहा है कूड़ाsnagar (2)
  • मार्च 2017 में ईकोग्रीन कंपनी ने काम शुरू किया
  • 2010 से मार्च 2017 तक ज्योति इनवायरोटेक का रहा कार्यकाल
  • कई इलाकों में पटरी से उतरी घरों से कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था
  • सड़कों से गायब हो चुकी है कूड़ा कलेक्शन वाहन, जनता परेशान

बिजनेस लिंक ब्यूरो
लखनऊ। शहर में एक बार फिर से घरों से कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। आलम यह है कि पूरे शहर में आधे से अधिक घरों से कूड़ा कलेक्शन का काम किया ही नहीं जा रहा है, जबकि आधे से अधिक घरों में रहने वाले लोगों को फिलहाल घरों से कूड़ा कलेक्शन का इंतजार है। हाल में ही आयोजित सदन में इस मामले को लेकर पार्षदों ने खासा विरोध दर्ज कराया था। लेकिन सदन खत्म होने के बाद भी वहां मुद्दा गर्म होने के बाद, अधिकारियों को फटकार के बाद भी कूड़े की उठान जस की तस पड़ी हुई है। शहर के तकरीबन सभी वार्डों में कूड़े की उठान की समस्या आम है, जबकि कुछ ऐसे भी जलभराव वाले इलाके है, जहां बरसात के बाद महामारी फैलने के हालात बने हुए है। लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक शहर के कई रिहायशी इलाकों से भी कई दिनों से कूड़ा उठाने में लापरवाही बरती जा रही है।
आपको बता दे कि बीते एक अप्रैल से कूड़ा कलेक्शन की नई व्यवस्था लागू की गई। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जोन के 5 वार्ड चिन्हित किए गए। पहले इन वार्डो में शत प्रतिशत घरों से कूड़ा उठान की व्यवस्था को मजबूत किया जाना था। इसके बाद दूसरे चरण में फिर पांच से सात वार्ड लिए जाने थे। नई व्यवस्था तो लागू हुई, लेकिन चयनित पांच वार्डो में से शत प्रतिशत कूड़ा कलेक्शन नहीं किया जा सका। जिसके बाद पार्षदों ने निगम प्रशासन से इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। लगातार बदहाल हो रही कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए मेयर ने चेतावनी भी जारी की, लेकिन इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला। हालात तो तब और खराब होते है जब शहरवासियों को कूड़े की उठान का चार्ज भी माहवारी देना होता है, वहां पर भी ये समस्या आम है। क्षेत्रीय लोगों का तो यहां तक कहना है कि प्राइवेट एजेंसियों को काम देने से नगर निगम ये समझता है कि उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गयी है, लेकिन वास्तविकता तो यहीं है कि नगर निगम व एजेंसी के लोगों की मिलीभगत के चलते न तो कूड़ा उठता है और न ही साफ- सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है, जिसका नतीजा ये है कि हम खुद ही जानते है कि हमारा शहर और हम कितने स्मार्ट हो रहे है।

भुगतान ना होने से स्थिति खराब
ईकोग्रीन कंपनी के सूत्रों का कहना है कि एक साल में टिपिंग फीस करीब 38 करोड़ हुई है। इसमें से निगम की ओर से सिर्फ 12 करोड़ का ही भुगतान किया गया है। आलम यह है कि दिसंबर 2017 से निगम की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया है। करीब 30 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। हो सकता है कि इस भुगतान के न होने के चलते कंपनी ने उठान में रूचि कम की हो।

हमारी तरफ से पूरा प्रयास किया जा रहा है कि जल्द से जल्द शत प्रतिशत घरों से कूड़ा कलेक्शन का कार्य किया जाए। जिससे जनता को राहत मिल सके और लोगों को सुविधाओं का लाभ घर बैठे मिल सके।
संयुक्ता भाटिया, महापौर

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