Home / Breaking News / शहर में बिकी पॉलीथीन तो नपेंगे अफसर

शहर में बिकी पॉलीथीन तो नपेंगे अफसर

  • सख्ती का हवाला देकर मोटी कीमत वसूल रहे दुकानदार, नगर विकास विभाग की हीलाहवाली के बाद एक्शन में गृह विभाग
  • 31 अगस्त की डेडलाइन तय की, कमिश्नर संग अफसरों से मांगी रिपोर्ट, पॉलीथीन बनाने और बेचने वाले व्यापारियों के नाम बताने को भी कहा

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश के बावजूद प्रदेश मे पॉलीथीन की बिक्री और उसके इस्तेमाल पर प्रभावी रोक नहीं लगने पर अब अफसरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। करीब एक वर्ष से प्रदेश को पॉलीथीन मुक्त बनाने की जिम्मेदारी नगर विकास विभाग को दी थी जिसमें वह नाकाम साबित हुआ है।

यही वजह है कि अब इसकी कमान गृह विभाग ने संभाल ली है। गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने अफसरों को अल्टीमेटम दिया कि अगर 31 अगस्त के बाद से राजधानी में पॉलीथीन का इस्तेमाल होता पाया गया तो संबंधित अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अपर मुख्य सचिव ने उन दुकानदारों की लिस्ट भी मांगी है जो प्रतिबंधित प्लास्टिक बेच रहे हैं।

उन्होंने डीएम और एसएसपी को निर्देश दिए है कि संबंधित व्यापार मंडल को लिखित रूप से प्लास्टिक के प्रतिबंध से अवगत कराकर उनकी सहमति ले ली जाए कि इनके क्षेत्र में किसी भी सदस्य द्वारा प्रतिबंधित प्लास्टिक नहीं बेचा जा रहा है। इसके अलावा संबंधित जनप्रतिनिधि को भी इस सूचना से अवगत करा दिया जाए। तमाम सख्ती के बाद भी मोटी रकम वसूल कर दुकानदार पॉलीथीन बेच रहे है।

बताते चलें कि विगत 15 जुलाई 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने प्रदेश में पूरी तरह से पॉलीथीन पर प्रतिबंध का आदेश दिया था। इसके तहत किसी भी व्यक्ति के पास या किसी विके्रता के पास अगर पॉलीथीन बैग पाया जाता है तो उसको जब्त करके उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी थी।

poly

इसके अलावा पॉलीथीन बनाने या बेचने पर एक वर्ष कैद या फिर एक लाख रुपया जुर्माना का प्रावधान किया गया था। पॉलीथीन को व्यक्तिगत तौर पर रखने पर एक हजार से 10 हजार, दुकान या फैक्ट्री वालों पर 10 हजार से एक लाख रुपये जुर्माने का नियम था।

नगर निगम का अभियान भी फेल

राज्य सरकार द्वारा पॉलीथीन पर बैन का फैसला लिये जाने के बाद लखनऊ नगर निगम ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मदद से कई बार अभियान तो चलाया पर यह प्रभावी साबित नहीं हो सका। तमाम दुकानदारों और आम जनता से जुर्माना वसूलने के बावजूद प्रतिबंधित प्लास्टिक की बिक्री जारी रही। इस बीच तमाम विभागों ने अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर अभियान से दूरी बना ली। हाल ही में बड़ा मंगल के अवसर पर भी नगर निगम ने थोड़ी सक्रियता दिखाई पर फिर से मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

ये होंगे जिम्मेदार

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि 31 अगस्त के बाद यदि किसी भी क्षेत्र में प्रतिबंधित प्लास्टिक बेचे जाने की सूचना मिली तो संबंधित थानाध्यक्ष, नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी, वाणिज्य कर के क्षेत्रीय अधिकारी एवं संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट व सीओ को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

50 माइक्रॉन से पतली पर बैन

प्रदेश में पतली पॉलीथीन यानी 50 माइक्रॉन से पतली पॉलीथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। इससे पहले वर्ष 2000 में 20 माइक्रॉन से पतली पॉलीथीन पर ही प्रतिबंध था, जिसे बढ़ाकर 50 माइक्रॉन कर दिया गया था। इसके अलावा पॉलीथीन, प्लास्टिक व थर्मोकोल में चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध की घोषणा की गयी थी।

 फैक्ट फाइल

  • 15 जुलाई 2018 को कैबिनेट ने दी थी पॉलीथीन पर बैन लगाने की मंजूरी
  • 15 जुलाई 2018 से 50 माइक्रोन तक की पतली पॉलीथीन पर लगना था बैन
  • 15 अगस्त 2018 से प्लास्टिक व थर्मोकोल के कप-प्लेट व ग्लास पर बैन
  • 02 अक्टूबर 2018 से सभी प्रकार के डिस्पोजेबल पॉलीबैग पर भी लगा प्रतिबंध
  • 09 जून को नगर विकास विभाग ने फिर से अभियान चलाने का किया था ऐलान

About admin

Check Also

nagar-nigam-lucknow

कागजों में स्पॉट फाइन शहर में गंदगी की भरमार

बाजारों में चलना था विशेष अभियान, सड़क पर पान मसाला थूकने वालों पर नहीं होता कोई …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>