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समीक्षा-समीक्षा खेल रहीं सरकारें

  • हाल-ए-यूपीडीपीएल, सपा सरकार में 40 एकड़ भूमि इलेक्ट्रानिक्स कॉरपोरेशन को बेचने का लिया था निर्णय
  • भूमि को निजी क्षेत्र में बेचने की होगी समीक्षा, मंत्रिमण्डल दवा बनाने व न बनाने पर भी करेगा निर्णय

updpl copyबिजनेस लिंक ब्यूरो

लखनऊ। राज्य सरकार की इकलौती दवा निर्माता कंपनी उत्तर प्रदेश ड्रग्स एवं फार्मास्युटिकल कम्पनी, यूपीडीपीएल की बदहाली दूर होने का नाम नहीं ले रही है। यूपीडीपीएल की यह बीमारी आज की नहीं, बल्कि कई वर्षों पुरानी है। सूबे में भाजपा, सपा और बसपा की सरकारें आती-जाती रही। पर, यूपीडीपीएल की इस बीमारी को दूर करने वाला इलाज कोई न दिला सका। विभिन्न राज्य सरकारे कंपनी की बदहाली दूर करने के लिये समीक्षा- समीक्षा खेलती रही। वर्तमान योगी सरकार भी उसी राह पर है।

बीते दिनों योगी मंत्रिमण्डल ने यूपीडीपीएल की 40 एकड़ भूमि को इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन को बेचने तथा कम्पनी में प्रतिवर्ष 50 करोड़ की दवा बनाने वाले सपा सरकार के निर्णय की समीक्षा करने का मन बनाया है। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग नया प्रस्ताव बना रह है। नये प्रस्ताव में भूमि को इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन के अलावा निजी क्षेत्र में बेचने की रिपोर्ट बनायी जा रही है। इसके अलावा कम्पनी में दवा बनाने के लिए होने वाले व्यय तथा दवा बनाने का काम बंद करने पर कर्मचारियों के समायोजन व कम्पनी की नयी भूमिका पर भी रिपोर्ट बनायी जा रही है। स्वास्य विभाग नये प्रस्ताव को न्याय, वित्त, सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो व उद्यम विभाग से संस्तुति लेने के बाद मंत्रिमण्डल के समक्ष भेजेगा। मंत्रिमण्डल के निर्णय के बाद ही कम्पनी का भविष्य तय होगा।

बता दें कि यूपीडीपीएल के संकट के बादल छटने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्य विभाग में चल रहे कमीशनबाजी के कारण आठ वर्ष पूर्व बसपा सरकार में कम्पनी में दवा बनाने का काम बंद कर दिया गया था, जिससे अब तक कर्मचारियों को लगभग 3७ माह का वेतन नहीं मिल सका है। सपा सरकार ने दवा बनाने का काम शुरू कराया लेकिन कम्पनी की आॢथक स्थित में खास सुधार नहीं हुआ। कर्मचारियों के प्रयास से सपा सरकार ने 30 मार्च 2016 को कम्पनी के पुनर्गठन का प्रस्ताव पास किया जिसमें कम्पनी में प्रतिवर्ष 50 करोड़ की दवा बनाने तथा कम्पनी की 40 एकड़ भूमि इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन को बेचकर कर्मचारियों के बकाया भुगतानों की व्यवस्था का प्रावधान किया गया।

तत्कालीन राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार, भूमि बेचने पर मिलने वाले धन से अवकाश प्राप्त व कार्यरत कर्मचारियों के बकाये का भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा जो कर्मचारी वीआरएस लेना चाहते हैं उनको भी भुगतान किया जाएगा। इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन ने सर्किल रेट 4500 वर्ग मीटर की दर से भूमि खरीदने पर सहमति व्यक्त की थी। इससे कम्पनी को 72 करोड़ रुपये मिलता। कारपोरेशन व कम्पनी के बीच हुए करार में कारपोरेशन ने पहले चरण में 54 करोड़ रुपये देने की बात कही थी। अधिकारियों की हीलाहवाली के कारण सपा सरकार के निर्णय को एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी लागू नहीं किया जा सका। भाजपा की सरकार बनने पर यह मामला स्वास्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के सामने आया। मंत्री के आदेश पर भूमि बेचने के निर्णय को रोक दिया गया।

मंत्री का कहना था कि यदि निजी क्षेत्र में भूमि बेचने से कम्पनी को अधिक धन मिले तो भूमि को निजी क्षेत्र में बेचा जाए। मंत्री ने स्वास्य विभाग के प्रमुख सचिव अरूण कुमार सिन्हा को नया प्रस्ताव बनाने को कहा। नये प्रस्ताव में भूमि को निजी क्षेत्र व इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन को बेचने की रिपोर्ट बनायी जा रही है। इसके अलावा कम्पनी में दवा बनाने का काम शुरू करने में होने वाले व्यय तथा दवा बनाने का काम बंद करने पर कर्मचारियों के समायोजन पर रिपोर्ट बनायी जा रही है।

यूपीडीपीएल रिटार्यड कर्मचारी संघ के संयोजक अशोक शर्मा का कहना है कि कम्पनी से अवकाश प्राप्त 160 कर्मियों को कई माह के बकाये वेतन व अन्य मदों का भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में आॢथक तंगी के कारण कई अवकाश प्राप्त कर्मी पुत्रियों का विवाह नहीं कर पा रहे हैं। कई अवकाश प्राप्त कर्मी धन अभाव में अपना व परिवार के सदस्यों का इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। कई अवकाश प्राप्त कॢमयों के परिवार के सदस्यों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया है। कम्पनी में धन न होने के कारण कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है। शासन के निर्देश पर स्वास्य विभाग ने पूर्व में कम्पनी में दवा बनाने के लिए पांच करोड़ रुपये एडवांस दिया था। सारा धन वेतन व अन्य मदों में खर्च हो गया। शासन ने कम्पनी में दवा बनाने काम भी बंद करवा दिया है। कर्मचारी नेता कई दिनों से वेतन के लिए शासन के अधिकारियों के पास चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अधिकारी किसी भी मद से वेतन देने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों व अवकाश प्राप्तकर्मियों में रोष व्याप्त है। कर्मचारियों का रोष कभी भी आन्दोलन का रूप ले सकता है।

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