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9 तरह के कर नहीं वसूल रहे नगर निकाय!

लखनऊ। नगर निकायों की आमदनी बढ़ाने के लिए उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड (यूपीबीडीएमएफआर) ने पिछले साल जनवरी में ही सरकार को अपनी संस्तुतियां सौंपी थीं। इनमें मौजूदा कर व्यवस्था में सुधार के साथ ही करीब 9 तरह के कर लगाने की सिफारिश की गई है। बोर्ड के अनुमान के मुताबिक इन करों की वसूली से नगर निकायों की आय में सालाना 3500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।

इन करों का प्रावधान नगर निगम अधिनियम 1959 में भी है। इसके बावजूद प्रदेश के नगर निकायों में इनकी वसूली नहीं होती है। नौकरशाही की उदासीनता का आलम यह है कि बोर्ड की संस्तुतियों पर करीब डेढ़ साल बाद भी अमल नहीं हो सका है। सत्ता संभालने के बाद से योगी सरकार का राजस्व वसूली पर काफी जोर रहा है।

खास तौर से नगर निकायों की माली हालत सुधारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार आय के स्रोत बढ़ाने और नए स्रोत तलाशने पर जोर देते रहे हैं। इसी कड़ी में उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन बोर्ड के सदस्यों ने नगर निकायों की आय बढ़ाने के लिए कई राज्यों का भ्रमण करने के बाद जनवरी 2018 में ही अपनी संस्तुतियां सरकार को सौंपी थीं।

इसमें कई ऐसे कर लगाने की सिफारिश की गई है, जो देश के 15 बड़े राज्यों में लागू हैं। इनमें से कुछ कर नगर निगमों से संबंधित हैं, तो कुछ कर के नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में वसूले जाने का प्रावधान है।

ये 9 कर लगाने की संस्तुति

नगर निगम सीमा क्षेत्र में उतरने वाले हेलीकॉप्टर से कर, व्यापार एवं व्यवसाय कर, योजनाओं के लिए ली जाने वाली भूमि के मूल्य वृद्धि पर परिवृद्धि कर

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नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत

निजी संस्थानों की सफाई पर लगने वाला कर, शौचालयों व मलजनित गंदगी के निस्तारण पर सफाई कर, निकाय सीमा में चलने वाले सभी तरह के इंजन चालित वाहनों पर कर

सुधार कर

निकायों की सीमा में ऐसे व्यापार पर भी कर जिन्हें निकायों की सेवाओं का विशेष लाभ मिल रहा हो। ऐसी आजीविका या व्यावसायिक संस्थाओं से भी कर लिया जाए, जो वेतन और फीस का भुगतान करते हैं।

15 राज्यों में वसूले जाते हैं ये कर

मध्य प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, असम, केरल, मेघालय, त्रिपुरा व सिक्किम।

ये ठंडे बस्ते में…

  • 10 प्रतिशत तक स्थानीय निकाय मनोरंजन कर की वसूली के लिए कानून बनाएं।
  • निजी वाहनों पर 5 प्रतिशत व व्यावसायिक वाहनों पर 60 प्रतिशत स्थानीय निकाय वाहन कर लगाएं।
  • नगर निकाय सीमा क्षेत्र में खाली भूमि कर लगाएं।
  • संपत्ति कर के मौजूदा ढांचा में सुधार करें।
  • संपत्ति कर के भुगतान की प्रक्रिया को और सरल बनाएं।
  • संपत्ति कर का दायरा बढ़ाकर शत-प्रतिशत घरों को कर के दायरे में लाएं।
  • कर वसूली न करने वाले 57 निकायों में भी कर वसूली शुरू कराएं।
  • मासिक किराया दरों को हर दो साल में पुनरीक्षित करें।

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