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	<title>Business Link &#187; admin</title>
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	<description>Breaking News</description>
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		<title>दिमाग स्वस्थ रहेे इसके लिए दिये गये विशेष टिप्स</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2019 08:29:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>

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		<description><![CDATA[इनरव्हील क्लब ऑफ लखनऊ बारादरी की ओर से ब्रेन जिम कार्यक्रम किया गया बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। शरीर के सभी अंगों का संचालन करने में दिमाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दिमाग शरीर के अत्यंत महत्वपूर्ण अंगों में से एक होता है। मगर तनाव, डिप्रेशन, बढ़ती उम्र आदि जैसे कई कारणों की वजह से दिमाग की &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>इनरव्हील क्लब ऑफ लखनऊ बारादरी की ओर से ब्रेन जिम कार्यक्रम किया गया</strong></span></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong><br />
<strong>लखनऊ।</strong> शरीर के सभी अंगों का संचालन करने में दिमाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दिमाग शरीर के अत्यंत महत्वपूर्ण अंगों में से एक होता है। मगर तनाव, डिप्रेशन, बढ़ती उम्र आदि जैसे कई कारणों की वजह से दिमाग की क्षमता कम होती जाती है।</p>
<p>आपका लाइफस्टाइल और खाना- पीना भी आपके दिमाग को प्रभावित करता है। जिनमें से कुछ प्रभाव अच्छे होते हैं तो कुछ हानिकारक। ऐसे में दिमाग के स्वास्थ्य का ख्याल रखना काफी जरुरी होता है जिससे दिमाग की कार्यक्षमता कम ना हों।</p>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">दिमाग के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए आपको क्या- क्या आदतें अपनानी चाहिए और किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। ये बातें बीते शुक्रवार को होटल सिलवेट में आयोजित बे्रन जिम वर्कशॉप में ज्योति गांधी ने कही।</span></strong></p></blockquote>
<p>इनरव्हील क्लब ऑफ लखनऊ बारादरी की ओर से आयोजित ब्रेन जिम कार्यक्रम में क्लब की सैकड़ों सदस्यों ने दिमाग को बेहतर और स्वस्थ्य बनाने की तमाम ट्रिक सीखी और जागरूकता कार्यक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की।</p>
<p>इनरव्हील क्लब की अध्यक्ष ममता कुमार, क्लब की डिस्ट्रिक चेयरमैन रीता भार्गव, सचिव दीपिका गुरनानी, दीपाली गोयल, सुषमा गर्ग, बीना गोपाल, रितु जैन समेत कई महिला सदस्य मौजूद रही।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/1.jpg"><img class="alignnone  wp-image-21143" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/1.jpg" alt="1" width="833" height="464" /></a></p>
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		<title>भवन सामग्री सस्ती फिर भी कम हुई डिमांड</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2019 08:22:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। दबे पांव आई मंदी का असर घर बनाने वाले सामान मौरंग, गिट्टी, सीमेंट और सरिया पर भी पड़ा है। लोगों की खरीद क्षमता कम होने से भवन समाग्री की डिमांड बेहद कम हो गई है, जबकि इस सीजन में लोग घरों का निर्माण, फिनिशिंग आमतौर पर ज्यादा कराते हैं। बाजार में मांग न होने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> दबे पांव आई मंदी का असर घर बनाने वाले सामान मौरंग, गिट्टी, सीमेंट और सरिया पर भी पड़ा है। लोगों की खरीद क्षमता कम होने से भवन समाग्री की डिमांड बेहद कम हो गई है, जबकि इस सीजन में लोग घरों का निर्माण, फिनिशिंग आमतौर पर ज्यादा कराते हैं। बाजार में मांग न होने से करीब दो हजार ट्रक खड़े हो गए हैं। इससे ट्रकों के चालक पिछले करीब 20 दिन से घर में बैठे हैं। ट्रक मालिक भी किस्त आदि को लेकर परेशान हैं।</p>
<p>मांग न होने से मौरंग, गिट्टी, सीमेंट, सरिया के भाव भी कम हो गए हैं लेकिन दूसरी चीजों में महंगाई इतनी है कि आम आदमी फिलहाल घर बनवाने की सोच नहीं पा रहा है। उप्र गिट्टी मौरंग ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीप अवस्थी की माने तो पहले मौरंग और गिट्टी के भाव तेज थे। इसके चलते मांग कम थी।</p>
<p>अब भाव गिरने के बाद भी बाजार बैठ गया है। मांग बिल्कुल नहीं है। हालत यह है कि लोड ट्रक खड़े हैं लेकिन उन्हें लेने वाला कोई नहीं है। एसोसिएशन ने शासन से मांग है कि यूपी में कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू कराएं ताकि बाजार में कुछ सुधार हो सके। उन्होंने बताया कि राजधानी के आसपास करीब १० हजार ट्रक ड्राइवर प्रतिदिन माल ढोते थे। अब यह संख्या तीन से चार हजार के आसपास ही रह गई है। बाकी चालक अपने घर चले गए।</p>
<p>कारोबारी परमजीत सलूजा ने बताया कि इस मौसम में घर आदि की फिनिशिंग का काम ज्यादा होता है। इसके चलते मौरंग आदि की मांग ज्यादा रहती है लेकिन इस बार स्थिति उलट है। भाव भी कम हो गए हैं लेकिन मांग नहीं निकल रही है। इसके चलते भाव और गिरावट आई है। मोटी मौरंग 5000 रुपये की सौ फीट बिक रही है।</p>
<p>महीन मौरंग भी 7000 से 6500 रुपये सौ फीट आ गई है। कारोबारी संजय गुप्ता ने बताया कि गिट्टी के भाव भी कम हुए हैं। 4400-4500 रुपये में बिकने वाली गिट्टी 4000-4200 रुपये में मिल रही है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/Bulding.jpg"><img class="alignnone  wp-image-21139" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/Bulding.jpg" alt="Bulding" width="832" height="510" /></a></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>सीमेंट कारोबारी निखिलेश दुबे ने बताया कि मौजूदा समय में सीमेंट के भाव भी कम हो गए हैं। 380 रुपये प्रति पैकेट वाली सीमेंट 365 रुपये में आ गई है।</strong></span></p></blockquote>
<p>मांग में 20 से 25 फीसदी की गिरावट आई है। सरिया और लोहा व्यापारी की माने तो सरिया की मांग इस समय 15-20 फीसदी घटी है। भाव भी इस समय सबसे कम हैं। 42-43 रुपये किलो बिकने वाली सरिया के भाव सात से आठ रुपये प्रति किलो कम हुए हैं। आमतौर पर प्रतिदिन दो से ढ़ाई हजार टन सरिया की खपत रहती है, जो गिरकर काफी कम हो गयी है।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>अगले वित्त वर्ष से भरना होगा दोगुना गृहकर</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2019 08:19:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[दोगुना तक बढ़ जाएगा हाउस टैक्स, अगले साल से लागू होंगी नई दरें लखनऊ। गृहकर की दरें अगले साल अप्रैल से दो गुना तक बढ़ जाएंगी। हाउस टैक्स के साथ ही लखनऊवासियों को वाटर टैक्स भी अधिक देना होगा, क्योंकि हाउस टैक्स के आधार पर ही वाटर टैक्स तय किया जाता है। नई दरों के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>दोगुना तक बढ़ जाएगा हाउस टैक्स, अगले साल से लागू होंगी नई दरें</strong></span></h3>
</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> गृहकर की दरें अगले साल अप्रैल से दो गुना तक बढ़ जाएंगी। हाउस टैक्स के साथ ही लखनऊवासियों को वाटर टैक्स भी अधिक देना होगा, क्योंकि हाउस टैक्स के आधार पर ही वाटर टैक्स तय किया जाता है। नई दरों के तहत वसूली अगले साल अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष 2020-21 में की जाएगी। इसको लेकर तैयारी शुरू हो गई।</p>
<p>बढ़ोतरी 100 फीसदी तक किए जाने की तैयारी है। दरों का प्रकाशन कराकर उन पर आपत्तियां आमंत्रित करने का काम भी पूरा कर लिया गया है। आपत्तियों की सुनवाई कर उनका जवाब भी भेज दिया गया है।</p>
<p>इसके साथ ही आपत्तियों की सुनवाई का प्रकाशन भी जल्द ही समाचार पत्रों में कराया जाएगा। उसको लेकर नगर आयुक्त की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। टैक्स बढ़ोतरी को लेकर काफी शासन- प्रशासन का दबाव है। पहले जेएनएनयूआरएम और अब अमृत मिशन में भी निकायों पर आय में बढ़ोतरी का दबाव है।</p>
<p>आपको बता दें कि नगर निगम में क्षेत्र के हिसाब से हाउस टैक्स निर्धारण की दरें तय हैं। ये दरें (कच्चे मकान व प्लॉट को छोड़कर) प्रति वर्ग फीट के हिसाब से 1.25 रुपये से 2.50 रुपये तक हैं। टैक्स निर्धारण करने के लिए मकान के एरिया को पहले टैक्स रेट पर उसे 12 महीने से गुणा कर देते हैं। जो परिणाम आता है, वह उस मकान का वार्षिक किराया मूल्यांकन (एआरवी) हो जाता है।</p>
<p>जो वार्षिक किराया मूल्यांकन बनता है, उसका 15 प्रतिशत हाउस टैक्स होता है। टैक्स गणना को लेकर मकान के क्षेत्रफल में बालकनी, किचन, बाथरूम, कॉरिडोर, स्टोर, पोर्टिको के एरिया में छूट भी दी जाती है।</p>
<p>इसके साथ ही मकान जितना पुराना होता है, उस आधार पर एआरवी में छूट दी जाती है। गृहकर की दरें इलाके के हिसाब से तय की जाती हैं। किसी का मकान हजरतगंज में तो उस इलाके में गृहकर की दर अधिक है। वहीं उतनी ही चौड़ी रोड पर किसी का घर तेलीबाग, फैजुल्लागंज या शहीद भगत सिंह वार्ड की कॉलोनी में तो उसकी गृहकर दरें कम है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg"><img class="alignnone wp-image-11217 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg" alt="nagar-nigam-lucknow" width="835" height="464" /></a></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>एआरवी पर 12.5 फीसद लगता है जलकर</strong></span></p>
<p>जलकल विभाग की ओर से अभी शहर में वाटर मीटर नहीं लगाए गए हैं और न ही वाटर टैक्स वसूली को लेकर खर्च के आधार पर दरें लागू हैं। अभी वाटर टैक्स की गणना नगर निगम द्वारा लगाए जाने वाले गृहकर के आधार की जाती है।</p>
<p>हाउस टैक्स के लिए जो एआरवी (एनुअल रेंटल वैल्यू) निकाली जाती है उसी पर जलकल विभाग 12.5 प्रतिशत की दर से वाटर टैक्स लेता है। इसमें पानी के उपयोग को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में जब हाउस टैक्स की दरें बढ़ेंगी तो मकानों की एआरवी बढ़ेगी और उससे वाटर टैक्स भी बढ़ जाएगा।</p>
<blockquote><p><span style="color: #0000ff;"><strong>गृहकर की नई दरें अगले साल अप्रैल से लागू होंगी। जो आपत्तियां आई थीं उनका जवाब भेज दिया गया है। नगर निगम अधिनियम के तहत हर दो साल में गृहकर की दरें नगर निगम पुनरीक्षित कर सकता है। पिछली बार 2010 में गृहकर की दरें पुनरीक्षित हुईं थीं अब 2019 में की जा रही हैं। </strong></span></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>अशोक सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी</strong></span></p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>घोटाले की तैयारी में अग्निशमन!</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2019 08:16:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>

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		<description><![CDATA[दो साल पहले आयी 103 चेचिस हो गयी कबाड़ 83 नई चेचिस के लिए फिर मिल गया करोड़ों का बजट कबाड़ हुई चेचिस पर खर्च किए गये थे 20 करोड़ बर्बाद क्या कबाड़ हो चुकी गाडिय़ां अब बुझाएंगी आग धीरेन्द्र अस्थाना लखनऊ। आम लोगों की गाढ़ी कमाई से जुटाया गया राजस्व किस तरह प्रदेश में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<ul>
<li><strong>दो साल पहले आयी 103 चेचिस हो गयी कबाड़</strong></li>
<li><strong>83 नई चेचिस के लिए फिर मिल गया करोड़ों का बजट </strong></li>
<li><strong>कबाड़ हुई चेचिस पर खर्च किए गये थे 20 करोड़ बर्बाद </strong></li>
<li><strong>क्या कबाड़ हो चुकी गाडिय़ां अब बुझाएंगी आग</strong></li>
</ul>
</blockquote>
<p><strong>धीरेन्द्र अस्थाना</strong><br />
<strong>लखनऊ।</strong> आम लोगों की गाढ़ी कमाई से जुटाया गया राजस्व किस तरह प्रदेश में बर्बाद किया जा रहा है, इसकी बानगी किसी से छिपी हुई नहीं है। आम लोगों और सरकारी हानि रोकने का जिम्मा जिस पर है, वो ऐसा काम करें तो जाहिर है शर्म तो आयेगी।</p>
<p>आपको बता दें कि बीते साल बिजनेस लिंक ने ३ से ९ सितम्बर के अंक में जिस खबर से आपको रू-ब-रू करवाया था, उसकी धज्जियां जमकर उड़ाई जा रही हैं। सरकार में बैठे मंत्री से लेकर अधिकारी सबकी आंखों पर काली पट्टïी तो बंधी नहीं है, जो उन्हें बर्बाद होते राजस्व की चिंता न हो, लेकिन फिर भी ऐसा हो रहा है।</p>
<p>आपको बता दें कि पिछले साल आग पर काबू पाने के लिए जो फायर टेंडर बनवाए जाने थे, उनकी सैकड़ो चेचिस अब भी फायर स्टेशनों पर धूल फांक रही है। इन १०३ चेचिस पर २० करोड़ खर्च किए गये थे। लेकिन अग्निशमन विभाग इनको काम पर लगाने में असमर्थ रहा, नतीजा यह चेचिस जंग लगकर खराब होने की कगार पर आ खड़ी है।</p>
<p>लेकिन मजे की बात तो ये है कि अग्निशमन मुख्यालय ने शासन को नया प्रस्ताव भेजकर ८३ नई चेचिस खरीदने के लिए १० करोड़ फिर पास करा लिये। विभागीय लोग खुद इस बात को लेकर असमंजस में है।</p>
<p>कबाड़ और कंडम हो चुकी 103 चेचिसों के फायर टेंडर बनवाकर अब अग्निशमन विभाग आग पर काबू पाएगा। दो साल से राजधानी के फायर स्टेशनों में खड़े- खड़े कंडम हो चुकीं यह चेचिस दो साल पहले 20 करोड़ रुपये खर्च कर मंगवाई गई थीं। जिन्हें 2018 के फायर सीजन में ही सूबे के सभी फायर स्टेशनों में भेजनी थीं।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/aag.jpg"><img class="alignnone wp-image-21133 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/aag.jpg" alt="aag" width="838" height="696" /></a></p>
<p>पर मुख्यालय के अधिकारियों ने इन चेचिसों में फायर टेंडर बनवाने के बजाए बीते वित्तीय वर्ष में 83 और चेचिस खरीदने के लिए शासन से 10 करोड़ रुपये और पास करा लिए थे। जब बिजनेस लिंक ने खबर को प्रमुखता से छापा था तब से विभागीय अधिकारियों की नींद टूटी हुई थी, जिसके बाद आलाधिकारी जागे और ई- टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। टेंडर करके इन कंडम गाडिय़ों को आग बुझाने लायक बनाया जाएगा। लेकिन अब देखना ये है कि आखिर इस काम में विभाग कितना सफल हो पाता है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>क्या होती रहेगी राजस्व की बर्बादी</strong></span></p>
<p>जनता के धन की गाढ़ी कमाई क्या शासन में बैठे अधिकारी ऐसे ही बर्बाद करते रहेंगे? यदि समय रहते इस पर सरकार ने विचार नहीं किया तो आम लोग सरकार को राजस्व देने की भला कैसे सोचेंगे। यदि सरकार और शासन ने समय रहते इस पर विचार नहीं किया तो प्रदेश के राजस्व का नुकसान ऐसे ही होता रहेगा।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>10-15 साल होती है एक दमकल की लाइफ</strong></span></p>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक अग्निशमन विभाग में फायर टेंडर की लाइफ 10- 15 साल होती है। क्योंकि गाडिय़ों में इतना अधिक भार लदा होता है कि जिसके कारण इस समय सीमा के बाद वह खुद ब खुद चलने में दिक्कत करने लगती हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>टेंडर बनाने में लगता है महीना</strong></span></p>
<p>उ एक विभागीय विशेषज्ञ की माने तो किसी भी ठेका कंपनी को तीन से चार फायर टेंडर को पूरा करने में अनुमानित समय महीना भर आराम से लगता है। यदि अभी टेंडर दिया जाता है तो ठेका देने में ही दो से तीन महीना लग जाता है। इसके बाद कंपनी फाइनल होने के बाद कार्य शुरू हो पायेगा। इतने समय में तो न केवल पुरानी बल्कि नयी चेचिस को भी जंग लग सकती है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>फाइल फैक्ट</strong></span></p>
<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>एक अप्रैल से 30 जून 2018 के बीच फायर टेंडर का रूप देकर सूबे के 342 फायर स्टेशनों को भेजा जाना था</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>फायर सीजन में होते हैं साल के 45 फ ीसद अग्निकांड, फायर टेंडर और स्टाफ की कमी के कारण समय से नहीं बुझ पाती आग</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>राजधानी के चौक, आलमबाग, बीकेटी और पीजीआई समेत अन्य फायर स्टेशनों में धूल और जंग खा रहीं फायर टेंडर की चेसिस</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>जाम हैं इंजन, खराब हो चुकी बैट्री, पाइप और टूट चुकी है बॉडी भी</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>क्या कहते हैं जिम्मेदार</strong></span></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>शासन के निर्देश पर फायर स्टेशनों में खड़ी 103 चेचिसों से फायर टेंडर बनवाने के लिए ई- टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही इन चेचिसों के फायर टेंडर बनवाकर इन गाडिय़ों को सूबे के सभी फायर स्टेशनों में भेजा जाएगा। </strong></span><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>विश्वजीत महापात्रा, डीजी फायर</strong></span></p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>बंद कमरे की पोल खोलेगा &#8216;चरमसुख&#8217;</title>
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		<pubDate>Mon, 02 Sep 2019 08:08:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[मनोरंजन]]></category>

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		<description><![CDATA[बिजनेस लिंक ब्यूरो नई दिल्ली। चरमसुख क्या है&#8230; एक मर्द या स्त्री को चरमसुख की प्राप्ति के लिए क्या- क्या गुल खिलाने पड़ते है, इसकी बानगी देखने को मिल रही है उल्लू पर आयी चरमसुख की वेबसीरीज में। जिसके अभी कई एपिसोड रिलीज किये जाने हैं। हाल ही में इसका पहला एपिसोड आया है, जिसका &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> चरमसुख क्या है&#8230; एक मर्द या स्त्री को चरमसुख की प्राप्ति के लिए क्या- क्या गुल खिलाने पड़ते है, इसकी बानगी देखने को मिल रही है उल्लू पर आयी चरमसुख की वेबसीरीज में। जिसके अभी कई एपिसोड रिलीज किये जाने हैं।</p>
<p>हाल ही में इसका पहला एपिसोड आया है, जिसका नाम है मॉम एंड डॉटर। इस एपिसोड में एक लड़का अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रिलेशन में आता है, लेकिन उसका क्रस उसकी मॉम में रहता है और वो जब इसके लिए तैयार होती है तो वो लड़का उसके साथ भी रिलेशन में आ जाता है।</p>
<blockquote>
<h3><span style="color: #ff0000;">इस वेबसीरीज के माध्यम से ये बताने का प्रयास भी किया गया है कि कलयुग में कैसे- कैसे किस्से पर्दे के पीछे छिपे होते हैं। आज बंद कमरे के पीछे क्या खेल खेले जा रहे हैं। जिसके बारे में आम लोगों को पता तक नहीं है। </span></h3>
</blockquote>
<p>एक दौर हुआ करता था जब यूथ की प्राब्लम पर चर्चा होती थी, लेकिन आज के समय में आपाधापी के दौर में समाज के सामने उन समस्याओं पर कोई चर्चा नहीं होती है। ऐसे में वेबसीरीज के माध्यम से उन समस्याओं को उल्लू के दर्शकों के बीच रखा गया है, जिस पर बात करने से आज लोग कतराते हैं।</p>
<p>आपको बता दें कि उल्लू समाज में फैली तमाम बुराईयों को पर्दे के माध्यम से लगातार दर्शानें का प्रयास कर रहा है। हालांकि मनोरंजन के माध्यम से उल्लू ने तमाम सामाजिक मुद्दों को अपने ओटीटी प्लेटफार्म पर लाकर उनका आईना अपने दर्शकों को दिखाया है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/ullu-charmsukh.jpg"><img class="alignnone wp-image-21128 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/ullu-charmsukh-1024x576.jpg" alt="ullu-charmsukh" width="833" height="469" /></a></p>
<blockquote><p><span style="color: #0000ff;">वेबसीरीज के कई एपिसोड है। हर वीक एक एपिसोड रिलीज किया जाएगा। इस सीरीज में एक वर्जिन लड़की की पीड़ा को दर्शाया गया है। हर एपिसोड एक नई कहानी के साथ होगा। उम्मीद करती हूं कि उल्लू के दर्शकों को ये सीरीज जरूर पसंद आयेगी। </span></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पूजा बट्ट, मार्केटिंग हेड, उल्लू डिजीटल प्रा. लि.</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;">यूथ जनरेशन की समस्याओं को उठाना था, क्योंकि आज के समय में सबका माइंड सेट होता है कि वो अपने साथी के साथ अच्छा और सुखद जीवन व्यतीत करेंगे, लेकिन उनके साथ होता इसका उल्टा है। कई बार यूथ को जीवन में इतने सारे झटके मिलते हैं कि वे निराश हो जाते हैं। इन्हीं सब मुद्दों पर आधारित है चरमसुख। </span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">आंशू धालीवाल, क्रिएटिव डायरेक्टर</span></strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>कागजों में स्पॉट फाइन शहर में गंदगी की भरमार</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:56:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[बाजारों में चलना था विशेष अभियान, सड़क पर पान मसाला थूकने वालों पर नहीं होता कोई एक्शन खुले आम लोग सड़क पर ही पॉलीथिन व अन्य कूड़ा भी फेंक रहे हैं लखनऊ। नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के लिए भले ही कई योजनाएं बनाई जा रही हों लेकिन हकीकत यह है कि &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>बाजारों में चलना था विशेष अभियान, सड़क पर पान मसाला थूकने वालों पर नहीं होता कोई एक्शन</strong></span></h3>
</li>
<li>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>खुले आम लोग सड़क पर ही पॉलीथिन व अन्य कूड़ा भी फेंक रहे हैं</strong></span></h3>
</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के लिए भले ही कई योजनाएं बनाई जा रही हों लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक एक भी योजनाएं सफल होती नजर नहीं आ रही है। ऐसे ही एक कवायद हुई थी स्पॉट फाइन को लेकर।</p>
<p>इस योजना के अंतर्गत सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी करने वालों से मौके पर ही जुर्माना वसूल किया जाना था लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक स्पॉट फाइन की स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p>नगर निगम प्रशासन की ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण 19 के दौरान स्पॉट फाइन का खाका तो खींचा गया था, लेकिन वो भी कागजों तक ही सिमट कर रह गया। इसके अंतर्गत सड़क पर पान मसाला थूकने वालों से जुर्माना वसूल किया जाना था, वो अब तक संभव नहीं हो सका है। चौंकाने वाली बात ये है कि अभी तक एक व्यक्ति पर भी इस बिंदु पर जुर्माना नहीं हुआ है। यही स्थिति सड़क पर कूड़ा फेंकने वालों की भी है। निगम प्रशासन की ओर से इस दिशा में भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>जोनल को दी गयी थी जिम्मेदारी</strong></span></h3>
<p>स्पॉट फाइन की जिम्मेदारी जोनल अधिकारियों को दी गई थी। जिम्मेदार अधिकारियों ने इस व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया। दो से तीन जोन में तो कुछ रफ्तार पकड़ी गई लेकिन बाद में स्थिति कागजों में ही सिमट कर रह गई।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg"><img class="alignnone wp-image-11217 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg" alt="nagar-nigam-lucknow" width="833" height="463" /></a></p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000;">1 हजार तक जुर्माना</span></strong></h3>
<p>निगम प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया था कि सड़क पर गंदगी फैलाने और पान मसाला थूकने वालों से 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक जुर्माना वसूल किया जाएगा। लेकिन ये संभव ही नहीं हो सका।</p>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">नए सिरे से स्पॉट फाइन व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। इस बार हर सप्ताह स्पॉट फाइन के आंकड़े की समीक्षा की जाएगी।</span></strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त</span></strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>महंगा होगा तेजस का खाना, कोटा व पास अमान्य</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:53:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। लखनऊ से दिल्ली के बीच दौडऩे वाली तेजस एक्सप्रेस में यात्रियों को परोसा जाने वाला खाना शताब्दी व राजधानी एक्सप्रेस से स्वादिष्ट होगा। हालांकि इसके लिए भुगतान भी अधिक करना होगा। सेमी हाईस्पीड ट्रेनों में सबसे महंगी कैटरिंग तेजस एक्सप्रेस की होगी। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी की माने तो चेयरकार में साढ़े तीन &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> लखनऊ से दिल्ली के बीच दौडऩे वाली तेजस एक्सप्रेस में यात्रियों को परोसा जाने वाला खाना शताब्दी व राजधानी एक्सप्रेस से स्वादिष्ट होगा। हालांकि इसके लिए भुगतान भी अधिक करना होगा। सेमी हाईस्पीड ट्रेनों में सबसे महंगी कैटरिंग तेजस एक्सप्रेस की होगी।</p>
<p>रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी की माने तो चेयरकार में साढ़े तीन सौ रुपये से अधिक व एग्जीक्यूटिव में करीब चार सौ रुपये कैटरिंग शुल्क वसूला जाएगा। इस पर अभी मंथन चल रहा है। दिल्ली में बीते गुरुवार को रेलवे बोर्ड व आईआरसीटीसी अधिकारियों के बीच ट्रेन में कैटरिंग, किराये, मेंटेनेंस, ऑपरेशन, सेफ्टी- सिक्योरिटी पर विचार-विमर्श हुआ।</p>
<p>देश की पहली सेमी हाईस्पीड निजी ट्रेन तेजस रेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ट्रेनों में शुमार है। सितम्बर से इसे पटरी पर लाने की तैयारी है। लखनऊ से सुबह चलकर यह ट्रेन दोपहर में दिल्ली पहुंचेगी। इस दौरान यात्रियों को नाश्ता दिया जाएगा। दिल्ली से ट्रेन शाम 4.30 बजे चलकर रात 10.45 बजे लखनऊ पहुंचेगी। ऐसे में यात्रियों को शाम की चाय के साथ नाश्ता और रात का खाना परोसा जाएगा। इसमें स्थानीय खान-पान को शामिल करने पर विचार हो रहा है।</p>
<p>खाने की गुणवत्ता बेहतर होगी, इसके लिए भुगतान अधिक करना पड़ेगा। बता दें कि ट्रेन में फलैक्सी फेयर लगेगा, जिसका किराया शताब्दी की तरह बढ़ेगा। इसमें यात्रियों को दिए जाने वाले न्यूजपेपर व पीने के पानी की बोतल की कीमत शामिल रहेगी। वहीं, डिनर में दस तरह के आइटम होंगे, जिसमें सूप, साइड डिश, मेन कोर्स, डाइजेस्टिव फूड (म_ा-छाछ वगैरह) व मिष्ठान प्रमुख होंगे।</p>
<p>लखनऊ से दिल्ली जाते समय कानपुर से खान-पान की सेवाएं मिल सकती हैं। वापसी में दिल्ली के बेस किचन से खाने का सामान आएगा।आपको बता दें कि पहली तेजस एक्सप्रेस मुंबई से गोवा के बीच 24 मई, 2017 को शुरू हुई थी। यह 552 किमी की दूरी 8.30 घंटे में पूरी करती है।</p>
<p>दूसरी तेजस चेन्नई एगमोर से मदुरई के बीच 2 मार्च को शुरू हुई और यह 497 किमी की दूरी महज छह घंटे में पूरी करती है। जानकारी के अनुसार तेजस के रैक को जांचने दिल्ली की टीम आएगी। हालांकि, इसके गुरुवार को आने की संभावनाएं जताई जा रही थीं। ट्रेन का रैक काफी समय पहले ही लखनऊ आ चुका है और गोमतीनगर स्टेशन की न्यू वॉशिंग पिट पर खड़ा है। इसे आईआरसीटीसी को हैंडओवर किया जाना है। ऐसे में रैक की गहन जांच को टीम आ रही है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/tejas-train.jpg"><img class="alignnone wp-image-21123 size-full" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/tejas-train.jpg" alt="tejas train" width="960" height="540" /></a></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>कोटा व पास अमान्य</strong></span></h3>
<p>तेजस में सभी तरह के कोटा एवं पास अमान्य रहेंगे। यहां तक रेलकर्मियों का ड्यूटी पास भी इसमें अमान्य रहेगा। ट्रेन शुरू होने से पूर्व ही आईआरसीटीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि तेजस में किसी भी तरह का कोटा मान्य नहीं होगा। जबकि अन्य ट्रेनों में विकलांग कोटा, सीनियर सिटीजन कोटा, वीआईपी कोटा आदि मान्य होते हैं।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>काउंटर से खरीद सकेंगे टिकट</strong></span></h3>
<p>लखनऊ- दिल्ली और मुंबई- अहमदाबाद के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस का टिकट सिस्टम भी हवाई जहाज जैसा होगा। इसमें आप पहले से रिजर्वेशन कराने की बजाए सीधे स्टेशन पहुंचकर &#8216;तुरंत आओ, तुरंत टिकट पाओÓ की तर्ज पर करंट काउंटर से टिकट लेकर ट्रेन में बैठ सकेंगे। हालांकि विमानों की तर्ज पर ही डायनामिक प्राइसिंग लागू होने से इस ट्रेन का सफर अन्य के मुकाबले थोड़ा महंगा साबित हो सकता है। स्टेशनों पर करंट टिकट काउंटर खोलने की जिम्मेदारी भी आईआरसीटीसी की ही होगी।</p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>लखनऊ मेट्रो के अगले चरण के काम पर लगा ब्रेक</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:49:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। एलएमआरसी के लिए मुसीबतें दिनों- दिन बढ़ती जा रही है। आगरा और कानपुर मेट्रो को प्राथमिकता पर तेजी से पूरा करने में जुटी मशीनरी लखनऊ मेट्रो के विस्तार पर काम तेज नहीं कर पा रही है। जहां संशोधित डीपीआर पिछले आठ महीने से प्रदेश सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रही &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> एलएमआरसी के लिए मुसीबतें दिनों- दिन बढ़ती जा रही है। आगरा और कानपुर मेट्रो को प्राथमिकता पर तेजी से पूरा करने में जुटी मशीनरी लखनऊ मेट्रो के विस्तार पर काम तेज नहीं कर पा रही है। जहां संशोधित डीपीआर पिछले आठ महीने से प्रदेश सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रही है। वहीं अभी तक बसंतकुंज में डिपो बनाने के लिए मेट्रो को जमीन एलडीए से नहीं मिल सकी है।</p>
<p>मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि 2018 के अंत में ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की बनाई संशोधित डीपीआर को प्रदेश सरकार को भेज दिया गया था। इसके बाद से अभी तक इसका परीक्षण प्रदेश सरकार कर रही है। प्रदेश सरकार को ही स्वीकृति के लिए इस डीपीआर को केंद्र सरकार को भेजना है।</p>
<p>केंद्र सरकार को डीपीआर भेजने के लिए प्रदेश सरकार में कई बार संपर्क किया गया है। आवास विभाग को भी इस बारे में अवगत अलग-अलग बैठकों में कराया गया है। इसके बाद भी अभी कोई प्रगति लखनऊ के दूसरे रूट ब्लूलाइन पर नहीं हो सकी है। इसमें मेट्रो को 13 किमी में चारबाग से बसंतकुंज पुराने लखनऊ को जोड़ते हुए मेट्रो दौड़ानी है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>क्या सरकार की इच्छाशक्ति की कमी&#8230;</strong></span></h3>
<p>अखिलेश यादव की सरकार में जिस मेट्रो ने तमाम रिकार्ड कायम किये, अब वहीं मेट्रो अगले चरण के लिए आगे ही नहीं बढ़ पा रही। जिससे न केवल एलएमआरसी पर सवाल उठ रहे है, बल्कि पूरी भूमिका प्रदेश सरकार निभा रही है। योगी सरकार की लापरवाही की वजह से लखनऊ में ब्लू लाइन मेट्रो का निर्र्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/lucknow_metro_1504496294.jpg"><img class="alignnone wp-image-2280 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/lucknow_metro_1504496294.jpg" alt="lucknow_metro_1504496294" width="832" height="647" /></a></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>डिपो की जमीन देने पर काम शुरू</strong></span></h3>
<p>एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह ने बीते गुरुवार को बुलाई इंजीनियर्स और अर्जन विभाग के अधिकारियों की बैठक में बसंतकुंज में मेट्रो को दी जाने वाली जमीन पर भी जानकारी ली। वीसी का कहना है कि इंजीनियर्स और अर्जन विभाग को लखनऊ मेट्रो के साथ समन्वय कर जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए कहा गया है। यह काम शीघ्र हमारी टीम पूरा कराएगी।</p>
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		<title>जनगणना के प्री टेस्ट में नगर निगम फिसड्डी</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:46:56 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। जनगणना 2020-21 की तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश में शुरू हुए प्री टेस्ट में लखनऊ नगर निगम की सुस्त रफ्तार पर जनगणना महानिदेशालय ने सख्त नाराजगी जतायी है। नौबत यहंा तक आ गयी कि जनगणना निदेशक नरेन्द्र शंकर पाण्डेय को इस बारे में प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन जितेन्द्र कुमार को पत्र &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> जनगणना 2020-21 की तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश में शुरू हुए प्री टेस्ट में लखनऊ नगर निगम की सुस्त रफ्तार पर जनगणना महानिदेशालय ने सख्त नाराजगी जतायी है। नौबत यहंा तक आ गयी कि जनगणना निदेशक नरेन्द्र शंकर पाण्डेय को इस बारे में प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन जितेन्द्र कुमार को पत्र लिखना पड़ा।</p>
<p>12 अगस्त से शुरू हुआ प्री टेस्ट का यह काम हाथरस के सासनी और महोबा के चरखारी जैसे ग्रामीण इलाकों में ठीक ढंग से चल रहा है, मगर सरकार की नाक के नीचे लखनऊ नगर निगम में यह काम रफ्तार नहीं पकड़ सका है। जनगणना निदेशालय के अफसरों के साथ लखनऊ जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों की तीन बैठकें हो चुकी हैं, पर काम ठीक ढंग से शुरू ही नहीं हो पाया है।</p>
<p>जनगणना निदेशालय के अफसर जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा से भी मिल चुके हैं। इस प्री टेस्ट के तहत 4 सितम्बर तक घरों की सूची बनाने का काम पूरा किया जाना है। जनगणना निदेशालय के अफसर इस बात को लेकर खासे नाराज हैं कि लखनऊ नगर निगम चयनित वार्डों में प्रगणक और सुपरवाइजर के पदों पर कभी किसी की ड्यूटी लगा रहा है तो कभी किसी की।</p>
<p>चार सितम्बर के बाद 30 सितम्बर तक जनसंख्या की गिनती की जानी है। चरखारी में इस काम के लिए 274 गणना ब्लाक बनाये गये हैं, जबकि सासनी में 367 ब्लाक बने हैं। वहीं लखनऊ नगर निगम क्षेत्र के तीन वार्ड लिये गये हैं, जिनमें कुल 184 गणना ब्लाक बनाये गये हैं। इनमें अम्बेडकर नगर वार्ड में 100 प्रगणक ब्लाक बनाये गये हैं। इसी तरह इब्राहिमपुर वार्ड प्रथम में 42 और लाल बहादुर शास्त्री वार्ड प्रथम में भी 42 ब्लाक बने हैं।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/01_05_2013-11census.jpg"><img class="alignnone wp-image-21118 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/01_05_2013-11census.jpg" alt="01_05_2013-11census" width="837" height="557" /></a></p>
<p>लखनऊ नगर निगम में जनगणना प्री टेस्ट का काम अपर नगर आयुक्त राकेश यादव देख रहे हैं। उनका कहना है कि इन तीनों वार्डों में प्रगणक और सुरवाइजरों की तैनाती कर दी गयी है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन तीन वार्डों में जनगणना प्री टेस्ट का काम विलम्ब से 16 अगस्त से शुरू हो सका है। मगर अभी तक हुए काम की कोई समीक्षा नहीं हो सकी है। लखनऊ जिला प्रशासन भी जनगणना महानिदेशालय की शिकायत पर अब सतर्क हुआ है।</p>
<p>जिला जनगणना अधिकारी चूंकि जिलाधिकारी होते हैं, इसलिए उनके प्रतिनिधि के तौर पर यह काम अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रगणकों व सुरवाइजरों की तैनाती हो चुकी है। अगले दो दिन सुरवाइजरों की एक ट्रेङ्क्षनग होनी है, उसके बाद पूरा स्टाफ फील्ड में उतार दिया जाएगा।</p>
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		<title>छोटी सी गलती ने करायी उप मुख्यमंत्री की किरकिरी</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:39:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>

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		<description><![CDATA[योगी कैबिनेट की नयी टीम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को ऐसा विभाग आवंटित कर दिया गया जिसे खुद सरकार ने समाप्त कर समायोजित कर दिया है गलती पर किसी मंत्री या विपक्ष ने नहीं किया कटाक्ष, सचिवालय प्रशासन की बड़ी चूक के चलते ऐसा हुआ बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>योगी कैबिनेट की नयी टीम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को ऐसा विभाग आवंटित कर दिया गया जिसे खुद सरकार ने समाप्त कर समायोजित कर दिया है</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>गलती पर किसी मंत्री या विपक्ष ने नहीं किया कटाक्ष, सचिवालय प्रशासन की बड़ी चूक के चलते ऐसा हुआ</strong></span></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विस्तार के बाद मंत्रिमंडल में शामिल नये मंत्रियों को विभाग आवंटित करने के साथ ही कई मंत्रियों के विभाग बदले गए है। जिसमे केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य में जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया है। लेकिन योगी सरकार की एक छोटी सी कमी के चलते काफी किरकिरी झेलनी पड़ रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को ऐसा विभाग आवंटित कर दिया गया जिसको खुद सरकार ने समाप्त किया है।</p>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">योगी सरकार के मंत्रिमंडल के विभाग बटवारे में हुई बड़ी चुक करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को मनोरंजन कर विभाग आवंटन कर दिया गया, जिसे खुद योगी सरकार ने जीएसटी लागू होने के बाद समाप्त किया था।</span></strong></p></blockquote>
<p>2017 में योगी सरकार जब सत्ता में आई थी तो उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को अन्य विभागों के साथ मनोरंजन कर विभाग भी आवंटित किया गया था। प्रदेश में 1 जुलाई 2017 को जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद मनोरंजन कर को जीएसटी में समाहित कर दिया गया था, जिसके बाद इस विभाग को समाप्त कर दिया गया था।</p>
<p>आपको बता दे कि योगी सरकार ने 24 अप्रैल 2018 को मनोरंजन कर विभाग का विलय वाणिज्य कर विभाग में कर दिया। विलय में मनोरंजन कर निरीक्षकों को छोड़कर अधिकारियों व कर्मचारियों को वाणिज्य कर विभाग में मर्ज कर दिया गया।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/nwavjnymrhqgewd0tvbehd9kstxjz7y0-.jpg"><img class="alignnone wp-image-21114 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/nwavjnymrhqgewd0tvbehd9kstxjz7y0-.jpg" alt="nwavjnymrhqgewd0tvbehd9kstxjz7y0-" width="828" height="497" /></a></p>
<p>9 मार्च 2019 को निरीक्षकों को भी वाणिज्य कर विभाग में निरीक्षक के पद पर मर्ज कर दिया गया था।जिसके बाद मनोरंजन कर विभाग का अस्तित्व खत्म हो गया। इसके बाद भी विभाग को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को आवंटित करना सचिवालय प्रशासन की बड़ी चूक को दर्शाता है।</p>
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