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	<title>Business Link &#187; उत्तराखंड</title>
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		<title>मौनी अमावस्या पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Jan 2022 13:08:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या होती है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। मौनी अमावस्या सभी अमावस्याओं में काफी महत्वपूर्ण होती है। हिंदू धर्म में माघ मास का विशेष महत्व होता है। इस महीने में स्नान, दान किया जाता &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या होती है। मौनी अमावस्या को माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। मौनी अमावस्या सभी अमावस्याओं में काफी महत्वपूर्ण होती है। हिंदू धर्म में माघ मास का विशेष महत्व होता है।</p>
<p>इस महीने में स्नान, दान किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा- अर्चाना करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस साल मौनी अमावस्या 1 फरवरी 2022 को है। अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या और मंगलवार को पड़ने के कारण इसे भौमी अमावस्या भी कहा जाता है।</p>
<p><strong>स्नान- दान का शुभ मुहूर्त, शुभ योग और महत्व</strong><br />
अमावस्या तिथि प्रारम्भ &#8211; जनवरी 31, 2022 को दोपहर 02:18 बजे<br />
अमावस्या तिथि समाप्त &#8211; फरवरी 01, 2022 को सुबह 11:15 बजे<br />
मौनी अमावस्‍या पर स्‍नान और दान- फरवरी 01 को सुबह 11.15 बजे तक</p>
<p>वैसे तो अमावस्या तिथि 31 जनवरी को दोपहर बाद से शुरू हो रही है जिससे इस दिन पितरों का श्राद्ध आदि किया जा सकता है। वहीं, स्नान और दान 1 फरवरी को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। 1 फरवरी 2022 को अमावस्या तिथि के दिन महोदय और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं, जिस कारण इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है।</p>
<p>यह योग काफी पुण्यदायक हैं ऐसे में इस दिन किसी पवित्र स्थल और नदियों में जाकर स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति को सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही इस साल मौनी अमावस्या पर धनु राशि में सूर्य, मंगल और शुक्र का गोचर होगा। मकर राशि में चंद्रमा, शनि और सूर्य देव संचरण करेंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, मौनी अमावस्या पर 27 साल बाद मकर राशि में शनि देव और सूर्य देव गोचर करेंगे।</p>
<p><strong>मौनी अमावस्या का महत्व</strong><br />
मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का विशेष महत्व होता है। मौन व्रत का अर्थ खुद के अंतर्मन में झांकना, ध्यान करना और भगवान की भक्ति में खो जाने से है। धार्मिक मान्यता है कि मौन व्रत रखने से आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। इसके अलावा इस दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कर्म भी किए जाते हैं।</p>
<p><strong>गंगा नदी में स्नान महत्वपूर्ण</strong><br />
धार्मिक मान्याताओं के मुताबिक, मौनी अमावस्या के दिन गंगा नदी का पानी अमृत बन जाता है। ऐसे में इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं। साथ ही मृत्यु के बाद मोक्ष की भी प्राप्ति होती है।</p>
<p><strong>किस तरह करें स्नान</strong><br />
इस दिन स्नान करने से पहले संकल्प लें। सबसे पहले पानी को अपने सिर पर लगाएं और प्रणाम करें। इसके बाद स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। फिर पानी में काले तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। इस दिन स्नान के बाद तिल, तिल के लड्डू या कंबल का दान करना काफी शुभ माना जाता है। इस दिन दान करने से व्यक्ति की कुंडली में मौजूद सभी दोष खत्म हो जाते हैं।</p>
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		<title>पुलिसिया बर्बरता के बाद सहमे छात्र</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Jan 2022 17:54:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में अंदर से ताला बंद कर डर-सहमे, दुबके हुए हैं। पुलिस ने जिस क्रूरता से कमरों से छात्रों को बाहर घसीटकर पीटा था, उस मंजर को याद कर छात्रों की रूह कांप जाती है।</p>
<p>छोटा बघाड़ा मिश्रा लॉज में रहने वाले बिहार के विनीत यादव ने बताया कि टीजीटी-पीजीटी की तैयारी करते हैं। मंगलवार शाम वह कमरे में थे। अचानक बाहर शोरगुल मचा। हम डर गए। लगभग आठ-दस पुलिस वाले आए और कमरे का दरवाजा लाठी और बूटों से पीटकर तोड़ने लगे। खिड़कियों के कांच तोड़ दिए। कुछ कमरों का दरवाजा तोड़ दिया और छात्रों को बर्बर तरीके से पीटा। चीख पुकार सुनकर तख्त को दरवाजे से सटाकर हम लोग चुपचाप नीचे छिपे रहे।</p>
<p>आधे घंटे सन्नाटा पसरा रहने के बाद साथियों से फोन पर पता किया और चुपचाप सहपाठी के साथ माघ मेला क्षेत्र में निकल गए। रात भर मेले में घूमते रहे। हम लोग सुबह भी कमरे पर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। शाम को जब साथियों से पता चला कि एसएसपी आए थे और उन्होंने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि किसी छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा। तब हम लोग कमरे पर आए।</p>
<p>इसी लॉज में एसएससी की तैयारी करने वाले जौनपुर निवासी राजेश ने बताया कि जो छात्र प्रदर्शन में शामिल थे। वह तो पहले ही भाग चुके थे। कमरे में तो वहीं छात्र थे, जिनका आंदोलन से कोई लेना देना नहीं था। लेकिन पुलिस ने बेगुनाह छात्रों को पीटा। लॉज में कई छात्र इंटर की पढ़ाई करने वाले हैं। पुलिस ने उनको भी नहीं बख्शा है।</p>
<p>बिहार के कैमूर जिले के विनोद कुमार ने बताया छात्र अपनी बात जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे थे। आखिर छात्र अपनी बात किस तरह जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाएं। हम यहां पढ़ने के लिए आए हैं। उपद्रव करने नहीं आए हैं। लेकिन पुलिस ने छात्रों के साथ उपद्रवियों सा सलूक किया। जो छात्र आसपास के जिलों के रहने वाले हैं। वह घर चले गए हैं। जो दूरदराज के हैं, वही छात्र रुके हुए हैं।</p>
<p>लॉज के कमरों में रुके हुए छात्र बाहर जरा सी भी आहट पर सहम उठते हैं। वह कमरे से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इन छात्रों का कहना है कि घर दूर होने और शहर में दूसरा कोई ठिकाना न होने के कारण लॉज में रुकने की मजबूरी है। वरना इस माहौल में वह भी ताला बंद कर चले जाते और माहौल सामान्य होने पर ही लौटते।</p>
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		<title>भारत की नई पहचान बनेगी ‘योगी की फिल्म सिटी&#8217;</title>
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		<pubDate>Sun, 20 Sep 2020 19:24:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[नौएडा, ग्रेटर नौएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे फिल्म सिटी स्थापना के प्रयास तेज फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियों में खुशी की लहर, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे अवसर, होगा क्षेत्रीय विकास प्रोत्साहित होगा निवेश, सृजित होंगे नए रोजगार अवसर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>नौएडा, ग्रेटर नौएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे फिल्म सिटी स्थापना के प्रयास तेज</strong></li>
<li><strong>फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियों में खुशी की लहर, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार</strong></li>
<li><strong>स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे अवसर, होगा क्षेत्रीय विकास</strong></li>
<li><strong>प्रोत्साहित होगा निवेश, सृजित होंगे नए रोजगार अवसर</strong></li>
<li><strong>उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को मिलेगा विशेष लाभ</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/Madhur-Bhandarkar.jpg"><img class="  wp-image-21997 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/Madhur-Bhandarkar.jpg" alt="Madhur-Bhandarkar" width="516" height="287" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> देश की सबसे खूबसूरत फिल्म सिटी का पता, अब उत्तर प्रदेश होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी की स्थापना केे निर्देश दिए हैं। इससे फिल्म निर्माताओं को एक बेहतर विकल्प मिलेगा। स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर मिलेंगे। निवेश प्रोत्साहित होगा। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह फिल्म सिटी भारत की नई पहचान बनेगी। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।</p>
<p>फिल्म सिटी की स्थापना के इस निर्णय पर देश के विख्यात फिल्मकारों, निर्माताओं और लोकगायकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है। फिल्म सिटी के निर्माण से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों की स्थानीय प्रतिभाओं को नए अवसर मिलेंगे। स्थानीय भाषाओं में फिल्म निर्माण हो सकेगा। भोजपुरी को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस निर्णय से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों में खुशी की लहर है।</p>
<p>बीते दिनों मेरठ मण्डल की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नौएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण एवं यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में किसी एक प्राधिकरण में फिल्म सिटी के निर्माण के लिए भूमि के विकल्पों के साथ यथाशीघ्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश को एक अच्छी फिल्म सिटी की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश यह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है। प्रदेश में एक बेहतरीन फिल्म सिटी बनाई जाएगी। यह फिल्म सिटी फिल्म निर्माताओं को एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराएगी। साथ ही, रोजगार सृजन की दृष्टि से भी यह एक अत्यंत उपयोगी प्रयास होगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस निर्णय के बाद से ही कई फिल्मी हस्तियों ने खुशी जाहिर करते हुए प्रशंसा की है। अभिनेत्री कंगना रनोट, लोक गायिका मालिनी अवस्थी, पटकथा लेकर मनोज मुंतशिर, भजन गायक अनूप जलोटा तथा हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी तथा खूबसूरत फिल्म सिटी की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी है।</p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/malini.jpg"><img class="  wp-image-21998 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/malini.jpg" alt="malini" width="119" height="140" /></a>खासकर महिलाओं को मिलेंगे नए अवसर: मालिनी अवस्थी</strong><br />
विख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने ‘सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास, खुसरो, रैदास, निराला, महादेवी वर्मा, फिराक और जिगर की धरती उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण का स्वागत करते हुए कहा, उत्तर प्रदेश ने हिन्दी—उर्दू को आकार दिया है। मदर इण्डिया, गंगा जमुना से लेकर लगान तक फिल्मों में दिखाएं जाने वाले गांवों की परिकल्पना में उत्तर प्रदेश के गांव को ही दिखाया गया है। उन्होंने कहा, इस फिल्म सिटी के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाएं विशेषकर महिलाओं को नए अवसर मिलेंगे। देश में अभी जैसे मुम्बई है, वैसा ही विकल्प उत्तर प्रदेश में होने से सभी को नए अवसर मिलेंगे।</p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/madhur.jpg"><img class="  wp-image-21999 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/madhur.jpg" alt="madhur" width="95" height="127" /></a>मुख्यमंत्री से मिले फ़िल्म निर्माता मधुर भंडारकर</strong><br />
विख्यात फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सम्भावनाओं की इस पहल पर बहुत खुशी जाहिर की है। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, फिल्म सिटी का विकास मुख्यमंत्री का विजन है। यह प्रयास अच्छा है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से इडस्ट्री में ख़ुशी की नई लहर है। यहां बेहतर व्यवस्था से फिल्म से जुड़े लोग अपने प्रोजेक्ट पूरे कर सकेंगे। फिल्म निर्माताओं को एक विकल्प मिलेगा। मुख्यमंत्री ने मधुर भंडारकर को राममंदिर के प्रसाद के तौर पर प्रभु श्रीराम का सिक्का, रामचरित मानस, तुलसी माला और भव्य दिव्य कुम्भ की कॉफी टेबल बुक भेंट स्वरूप दी।</p>
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		<title>उनके लिए जन्मदिन भी रोज जैसा ही एक दिन, नाथ पंथ में दीक्षित योगी नहीं रखते पूर्वजन्म से नाता</title>
		<link>http://businesslinknews.com/for-him-birthday-is-the-same-day-as-everyday-dixit-yogi-in-nath-cult-does-not-have-relationship-with-past-birth/</link>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2020 20:34:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[गोरक्षपीठाधीश्वर]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>

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		<description><![CDATA[48 के हुए गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ। गोरक्षपीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 48 साल के हो गये। उनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तर प्रदेश अब उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ। उनके पिता आनन्द सिंह बिष्ट वन विभाग में रेंजर थे। माता सावित्री देवी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>48 के हुए गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</strong></li>
</ul>
<figure id="attachment_21287" style="width: 67px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/girish-ji.jpeg"><img class="  wp-image-21287" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/girish-ji.jpeg" alt="girish ji" width="67" height="98" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>गिरीश पांडेय</strong></figcaption></figure>
<p><strong>लखनऊ।</strong> गोरक्षपीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 48 साल के हो गये। उनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तर प्रदेश अब उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव में हुआ। उनके पिता आनन्द सिंह बिष्ट वन विभाग में रेंजर थे। माता सावित्री देवी सामान्य गृहिणी थीं।</p>
<p>हालांकि वह नाथ पंथ में दीक्षित हैं। माना जाता है कि दीक्षा के बाद सन्यासी का पुर्नजन्म होता है। लिहाजा उसका पहले के जन्म से कोई नाता नहीं होता। ऐसे में योगीजी खुद अपना जन्म दिन नहीं मनाते। अलबत्ता उनके लाखों प्रशंसक उन्हें शुभकामनाएं जरूर देते हैं। पर उनके लिए यह कभी कोई खास दिन नहीं रहा। इस दिन भी उनकी दिनचर्या रुटीन की ही रहा करती रही है। बतौर सांसद और अब मुख्यमंत्री के रूप में भी।</p>
<p>इस बार तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने ट्वीटर के माध्यम से लिखा है कि ‘‘यूपी के मेहनती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जन्मदिन की शुभकामनाएं। उनके नेतृत्व में राज्य हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है। राज्य के लोगों के जीवन में बड़ा सुधार आया है। भगवान उन्हें लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन दे।</p>
<p>उधर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने गुरू ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को याद करते हुए लिखा है कि ‘‘गगन मंडल मैं ऊंधा कूबा तहां अमृत का बासा। सगुरा होइ सु भरि-भरि पीवै निगुरा जाइ पियासा। गोरखबानी शिवावतारी गुरु श्री गोरक्षनाथ जी के चरणों में सादर प्रणाम। महायोगी गुरु श्री गोरक्षनाथ जी अपनी कृपा से समस्त संसार को अभिसिंचित करें, सबका कल्याण करें।</p>
<p>मालूम हो कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर स्थित गोरक्षपीठ के महन्त भी हैं। इन्होंने 19 मार्च 2017 को प्रदेश के विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद यूपी के 21वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।</p>
<p>सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम कई रिकॉर्ड हैं। मसलन जब वह पहली बार सांसद बने तो सबसे कम उम्र के सांसद थे। अपने समय में वह देश के उन चुनिंदा सांसदों में थे जो सर्वाधिक सत्र अटेंड करते थे। फेम इंडिया के हालिया सर्वे में उनको प्रधानमंत्री के बाद देश के सर्वाधिक लोकप्रिय लोगों में रखा गया। इसके पहले भी इंडिया टूडे ने अपने सर्वे में उनको देश के सबसे रसूखदार लोगों में शामिल किया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी अगुआई में लगभग हर क्षेत्र में रिकॉर्ड बने हैं।</p>
<p>दरअसल वह विजनरी हैं। अपने विजन को अमली जामा पहनाने के लिए वह दिन-रात मेहनत करते हैं। उनकी डिक्सनरी में में ना नाम का शब्द है ही नहीं। लिहाजा वह हर चुनौती को अवसर मानते हैं। और चुनौती मिलते ही उसे अवसर में बदलने के लिए पूरी ताकत से जी जान से जुट जाते हैं। कोरोना का अभूतपूर्व संकट भी इसका अपवाद नहीं रहा।</p>
<p>उनके लिए राजधर्म सर्वोपरि रहा है। हाल ही में अपने पिता के अंतिम संस्कार में जाने की बजाय प्रदेश की 23 करोड़ जनता के व्यापक हित को सर्वोपरि रखा। वह मिथक तोडऩे में यकीन रखते हैं। बार-बार नोएडा जाकर उन्होंने इसे साबित भी किया। इसी तरह जिस अयोध्या और राम मंदिर के नाम से कई मुख्यमंत्रियों को करंट लगता था, उससे उन्होंने अपने लगाव को मुख्यमंत्री बनने के बाद भी जारी रखा। अयोध्या का नियमित दौरा इसका सबूत है।</p>
<p>प्रकृति के प्रति उनका अनुराग अनुपम है। यह उनको अपने विरासत और परिवेश से मिला है। इसकी वजह शायद प्राकृतिक रूप से बेहद संपन्न देवभूमि उत्तराखंड से उनका ताल्लुक और वन विभाग में नौकरी (रेंजर) करने वाले स्वर्गीय पिता हैं। इस प्रेम का विस्तार बच्चों, जानवरों और गायों तक हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके निर्देश एवं निजी रुचि से हर साल पौधरोपण का रिकॉर्ड बना। गोरखनाथ मंदिर परिसर की हरियाली में और इजाफा हुआ।</p>
<p>‘योगी आदित्यनाथ ने 1998 से 2017 तक गोरखपुर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व किया। वह ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के उत्तराधिकारी और योग्य गुरु के योग्तम गुरु हैं।</p>
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		<title>जीएसटी निरीक्षक संघ की मांग, किये जाये अंतर आयुक्तालय तबादले</title>
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		<pubDate>Wed, 20 May 2020 20:30:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<category><![CDATA[अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतीय केन्द्रीय जीएसटी निरीक्षक संघ]]></category>
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		<category><![CDATA[भारत सरकार]]></category>

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		<description><![CDATA[वैश्विक कोरोना संकट के चलते केन्द्रीय जीएसटी एवं कस्टम्स विभाग के निरीक्षकों ने की मांग, पुुन: बहाल किये जाये अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। केन्द्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद केन्द्रीय जीएसटी एवं कस्टम्स विभाग में जीएसटी एवं कस्टम्स निरीक्षकों को जेनुइन ग्राउंड्स पर भी गृह राज्य में स्थानान्तरण की सुविधा नहीं दी जा रही &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>वैश्विक कोरोना संकट के चलते केन्द्रीय जीएसटी एवं कस्टम्स विभाग के निरीक्षकों ने की मांग, पुुन: बहाल किये जाये अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/Untitled-1-copy.jpg"><img class="  wp-image-21424 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/Untitled-1-copy.jpg" alt="Untitled-1 copy" width="452" height="254" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> केन्द्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद केन्द्रीय जीएसटी एवं कस्टम्स विभाग में जीएसटी एवं कस्टम्स निरीक्षकों को जेनुइन ग्राउंड्स पर भी गृह राज्य में स्थानान्तरण की सुविधा नहीं दी जा रही है। कोरोना महामारी के चलते केंद्र और राज्य की सरकारें मजदूरों और कामगारों की घर वापसी के लिए विशेष रेलगाडिय़ां, छात्रों के लिए स्पेशल बसें और मिशन वंदे भारत के तहत विशेष हवाईजहाज भेजकर घर वापसी करवा रही है।</p>
<p>जीएसटी एवं कस्टम्स निरीक्षकों ने संघ के माध्यम से अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण जैसी संवर्ग कल्याणकारी योजना पुन: चालू करने की गुहार लगायी है। केन्द्रीय जीएसटी एवं कस्टम्स विभाग में निरीक्षकों के लिए अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण (आईसीटी) की सुविधा कुछ समय पहले बंद कर दी गयी थी, जबकि विभाग के अन्य सभी संवर्गों को ये सुविधा अभी भी दी जा रही है।</p>
<p>ज्ञात हो कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय, भारत सरकार, ने कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर सभी केन्द्र सरकार के विभागों को कई कल्याणकारी जीओ जारी किये गए हैं जो पति और पत्नी की एक स्थान पर तैनाती, ऐसे कर्मचारी जिनके बच्चे मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम हैं तथा ऐसे कर्मचारी जो स्वयं दिव्यांग हैं, के लिए उनकी इच्छानुकूल तैनाती आदि का निर्देश देते हैं। एक अन्य जीओ में कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय द्वारा सभी सरकारी विभागों को यह निर्देश दिया गया है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के स्थानांतरण का आवेदन तुरंत उनके इच्छित स्थान के लिए फॉरवर्ड किया जाये तथा जनहित के किसी भी बाध्यकारी आधार के बिना न रोका जाये, और यदि रोका जाता है तो उन कारणों को एक माह के अन्दर लिखित में दर्ज करके संबंधित मंत्रालय को सूचित किया जाये। परन्तु, इस विभाग में भारत सरकार के भी इन सभी निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।</p>
<p>विभाग में बहुत सारे निरीक्षक ऐसे भी हैं जो अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण (आईसीटी) बंद होने के कारण कई वर्षों से अपने जीवनसाथी से अलग रहने पर मजबूर हैं। कई निरीक्षक अपने बूढ़े और कैंसर, टीबी जैसे घातक रोगों से पीडि़त माता-पिता की एकल संतान है और उनसे दूर रहने के लिए बाध्य हैं। कुछ निरीक्षक ऐसे भी हैं जिनके बच्चे मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम हैं, कुछ निरीक्षक तो स्वयं दिव्यांग हैं और कुछ घातक रोगों से पीडि़त हैं, परन्तु विभाग इनको भी गृह राज्य में तैनाती नहीं देता। गृह राज्य से सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात होने के कारण अविवाहित महिला निरीक्षकों के विवाह की परेशानी घरवालों को बेहाल किये है।</p>
<p>अखिल भारतीय केन्द्रीय जीएसटी निरीक्षक संघ के महासचिव अनुभूति चटर्जी एवं अध्यक्ष अखिल सोनी ने विभाग के सीबीआईसी बोर्ड, नई दिल्ली को लिखे गए एक पत्र के माध्यम से यह बताया कि विभाग में अपने गृह राज्य से बाहर तैनात निरीक्षक अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण बंद होने के कारण पहले से ही मानसिक तनाव में थे, परन्तु अब कोरोना काल में उनके मानसिक स्वास्थ्य में कई गुना गिरावट आने लगी है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और परिणाम स्वरुप कर संग्रह पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। आईसीटी लम्बे समय से इस विभाग की सुस्थापित संवर्ग कल्याणकारी योजना रही है और विभाग के अन्य सभी संवर्गों के लिए ये अभी भी चालू है परन्तु केवल निरीक्षक वर्ग के लिए अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है जिससे निरीक्षक वर्ग स्वयं को उत्पीडि़त महसूस करते हैं।</p>
<p>अखिल भारतीय केन्द्रीय जीएसटी निरीक्षक संघ ने विभाग में निरीक्षक वर्ग के लिए अंतर आयुक्तालय स्थानांतरण को पुन: चालू करने की मांग की है। संघ की स्थानीय लखनऊ इकाई के महासचिव अभिजात श्रीवास्तव ने इस मांग का समर्थन किया है। संघ की चेन्नई इकाई के महासचिव मनोज कुमार यादव, उड़ीसा इकाई के महासचिव चिरंतन राय, पुणे इकाई के महासचिव सुशांत त्यागी, सूरत-दमन इकाई के महासचिव नवीन पंडित तथा जबलपुर इकाई के अध्यक्ष अंशु शर्मा आदि ने भी संघ की इस न्यायोचित मांग का समर्थन किया है।</p>
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		<title>दूर होंगी रिअल स्टेट की समस्यायें, छोटे शहरों में विकसित होंगे प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क</title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2020 11:17:06 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[औद्योगिक नीति में होगा 25 एकड़ की भूमि पर प्राइवेट औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रावधान : सतीश महाना औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने क्रेडाई सदस्यों से वेबिनार के तहत की चर्चा बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। कोराना महामारी से प्रभावित हुये रिअल इस्टेट कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिये उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास &#8230;]]></description>
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<li><strong>औद्योगिक नीति में होगा 25 एकड़ की भूमि पर प्राइवेट औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रावधान : सतीश महाना </strong></li>
<li><strong>औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने क्रेडाई सदस्यों से वेबिनार के तहत की चर्चा</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> कोराना महामारी से प्रभावित हुये रिअल इस्टेट कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिये उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने रिअल स्टेट उद्यमियों के समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये एक समिति का गठन किया है। यह समिति एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी और इसके आधार पर कार्यवाही सुनश्चित होगी। औद्योगिक विकास मंत्री ने बताया छोटे शहरों में भी प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए शीघ्र ही औद्योगिक नीति में प्राविधान भी किया जायेगा। इससे 25 एकड़ की भूमि पर प्राइवेट औद्योगिक पार्क विकसित किया जा सकेगा।</p>
<p>कंफेडेरशन आफ रिअल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन आफ इण्डिया, क्रेडाई के सदस्यों से वेबिनार के तहत चर्चा करते हुये औद्योगिक विकास मंत्री ने उद्यमियों को आवश्वत किया कि उनके द्वारा जो भी प्रस्ताव एवं सुझाव दिये गये हैं, उस पर जल्द ही निर्णय लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि रिअल स्टेट कारोबारियों से ली जाने वाली ब्याज की दर को कम करने पर विचार किया जायेगा। साथ ही प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली को उद्यमियों के सुविधानुसार और अधिक सुगम बनाया जायेगा। इसके अतिरिक्त उद्यमियों की विद्युत बिल से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिये प्रदेश के उर्जा मंत्री से आग्रह किया जायेगा।</p>
<p>इस दौरान क्रेडाई के यूपी चैप्टर के अध्यक्ष रमन दीप सिंह ने बरेली जनपद में बंद रबर फैक्ट्री की निष्प्रयोज्य भूमि को औद्योगिक पार्क के लिए निजी डवलपर्स को आवंटित करने का अनुरोध किया। इसके अलाव संगठन के पदाधिकारियों ने लॉक-डाउन खत्म होने के बाद प्राधिकरण से संबंधित सभी बकाया राशि बिना किसी ब्याज के एक साल के लिए बढ़ाये जाने, सभी स्वीकृतियों का सत्यापन एक वर्ष के लिए स्थगित रखने, लीज रेंट को लीज डीड के अनुसार वसूली करने तथा लॉकडाउन अवधि के लिए विद्युत शुल्क वास्तविक खपत के अनुसार लिये जाने आदि मुद्दो पर चर्चा की और शीघ्र इसके समाधान का आग्रह किया। साथ ही प्रोजेक्ट के निर्माण की अवधि को बढ़ाये जाने की अपेक्षा भी की गई। वेबिनार में विभागीय अधिकारियों के अलावा क्रेडाई के एनसीआर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्यमियों सहित एटीएस लिमिटेड के सीएमडी गीताम्बर आनन्द, अर्फोडेबल हाउसिंग कमेटी के चेयरमैन मनोज गौड़ तथा सुशान्त गुप्ता आदि लोगों ने भी हिस्सा लिया।</p>
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		<title>CM योगी बने ढाल, कोरोना का &#8216;जीवन और जीविका&#8217; पर प्रहार नाकाम</title>
		<link>http://businesslinknews.com/cm-yogi-becomes-shield-coronas-attack-on-life-and-livelihood-fails/</link>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2020 21:51:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[लखनऊ। घर वापसी का हर अवसर खुशनुमा होता है, और जब वापसी कोरोना कहर के दरम्यान हो, सुरक्षित हो, सरलतापूर्वक हो, तो खुशी का अहसास, पुनः ज़िंदगी मिलने के बराबर हो जाता है। शायद तभी उ.प्र. के प्रवासी श्रमिकों/कामगारों को लेकर गुजरात से एक रेलगाड़ी जब उन्नाव के रेलवे स्टेशन पहुंचती है तो उससे उतरने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21179" style="width: 111px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50.jpeg"><img class="  wp-image-21179" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50.jpeg" alt="C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50" width="111" height="185" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>प्रणय विक्रम सिंह </strong></figcaption></figure>
<p><strong> लखनऊ।</strong> घर वापसी का हर अवसर खुशनुमा होता है, और जब वापसी कोरोना कहर के दरम्यान हो, सुरक्षित हो, सरलतापूर्वक हो, तो खुशी का अहसास, पुनः ज़िंदगी मिलने के बराबर हो जाता है। शायद तभी उ.प्र. के प्रवासी श्रमिकों/कामगारों को लेकर गुजरात से एक रेलगाड़ी जब उन्नाव के रेलवे स्टेशन पहुंचती है तो उससे उतरने वाले हर इंसान के चेहरे पर कयामत को फतह करने वाला गुरूर और माँ की गोद में मिलने वाला सुकून दिखाई पड़ रहा था। खुशी का आलम कुछ यूं था मानों बरसों की साधना के बाद मनचाहा वरदान मिल गया हो। सारे गिले-शिकवे, दर्द-तकलीफ, भर्राई आवाज में “योगी जी जिंदाबाद” के भावुक स्वर में गुम हो गए।</p>
<p>दीगर है कि मार्च के आखिरी हफ्ते से प्रवासी श्रमिकों को दिल्ली से वापस लाने का जो सिलसिला यूपी सरकार की निगेहबानी में शुरू हुआ था वह लगातार जारी है। अब तक कई सूबों से रेलगाड़ियों और बसों के जरिए करीब आठ लाख श्रमिक उ.प्र. वापस लौट चुके हैं। उम्मीद है कि लगभग 20 लाख प्रवासी कामगार इस दौरान अपने घरों को लौटेंगे। ऐसे अभूतपूर्व कार्य को अंजाम दे कर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने देश के अन्य सूबों की सरकारों के सम्मुख एक नजीर स्थापित कर दी है। खैर, अपने सूबे के बाशिंदों को मुसीबत से निकाल कर योगी ने एक जिम्मेदार अभिभावक होने का फर्ज तो निभाया है लेकिन अगला सवाल प्रवासी श्रमिकों के रोजगार का है।</p>
<p>गौरतलब है कि कोरोना के कारण तेजी से बदल रही सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां, संभावित महामारी “बेरोजगारी” के विकराल स्वरूप में आने की मुनादी कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने &#8216;जान और जहान&#8217; दोनों को सुरक्षित रखने की अपील की थी। &#8216;जहान&#8217; स्वयं में विस्तृत अर्थों को समेटे हुए है। जहान की सुरक्षा का समेकित अर्थ &#8216;सामाजिक जीवन&#8217; की गतिविधियों का सहज संपादन भी है। लिहाज़ा प्रश्न उदित होता है कि लाखों की संख्या में जो श्रमिक अन्य प्रांतों से अपने गांव और कस्बों में वापस आए हैं, वह रोजगार के अभाव में अपनी व अपने कुटुंब की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कैसे करेंगे? कैसे सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन संभव होगा?</p>
<p>आखिर 23 करोड़ की आबादी वाले उ.प्र. में कोरोना जनित बेरोजगारी की मनहूस काली रात में रोजगार का खुशनुमा उजाला कैसे फैलेगा? क्या अनुद्योग के भंवर में रोजगार की कश्ती डूब जायेगी? ऐसा कतई नहीं है। समस्या में भी संभावना खोजने में विशेषज्ञ मुख्यमंत्री योगी के पास रोजगार के लिए असीम संभावनाओं के अनेक पिटारे हैं। आगामी 03 से 06 महीनों के भीतर कम से कम 20 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजन की ठोस कार्ययोजना विभिन्न विभागों द्वारा तैयार कर ली गई है।</p>
<p>MSME, ODOP, NRLM, मनरेगा, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास मिशन, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और खादी ग्रामोद्योग आदि के माध्यम से लाखों रोजगारों के सृजन की रूपरेखा को टीम-11 के द्वारा धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इसी क्रम में प्रवासी श्रमिक/कामगार, जो उत्तर प्रदेश वापस लाए जा रहे हैं, बाकायदा उन सभी की स्क्रीनिंग कर उनके हुनर, स्किल का भी लेखा-जोखा जनपदवार-ग्रामवार तैयार किया जा रहा है ताकि इसी के अनुसार उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा सके।</p>
<p>“जीवन और जीविका” का यह समर, पूरी व्यवस्था को “स्वदेशी” दिशा की तरफ मोड़ते हुए कुटीर उद्योगों के क्षेत्र को बड़ी उम्मीद से देख रहा है। यही नहीं गोवंश के जरिए गो आधारित जैविक खेती, गो मूत्र और गोबर से बनने वाले उत्पा<img class="  wp-image-21309 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/charbaag-1.jpg" alt="charbaag 1" width="411" height="277" />दों और फूलों से बनने वाले इत्र, अगरबत्ती और उसके बचे हिस्से से कंपोस्ट की संभावनाएं, रोजगार के नए आयाम विकसित करने का माध्यम बनने जा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश को रेडिमेड गारमेंट का हब बनाने की कार्य योजना पूरी तरह से तैयार हो चुकी है।</p>
<p>योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि, &#8220;रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र की मोदी सरकार ने रिवल्विंग फंड में जो बढ़ोतरी की है, उससे महिला स्वयंसेवी समूहों की विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए रोजगार सृजित किया जाएंगे। उससे महिला स्वयंसेवी समूहों को विभिन्न गतिविधियों जैसे सिलाई, अचार, मसाला बनाना इत्यादि के तहत रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे।&#8221; यही नहीं महिलाएं जिन सामग्रियों का निर्माण करेंगी, उन्हें राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने में सरकार पूरा सहयोग करेगी। देखा जाए तो, कोविड-19 कालखण्ड में &#8216;स्थानीय से राष्ट्रीय&#8217; की यात्रा का परिवहन पथ बनी ODOP योजना बहुत बड़ी संख्या में रोजगार सृजन का माध्यम बनने जा रही है। वहीं, दुग्ध समितियां तथा पौध नर्सरी भी प्रवासी कामगारों, श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने का बड़ा माध्यम बनेंगी।</p>
<p>ध्यातव्य है कि, उत्तर प्रदेश में नए कृषि सुधारों ने, “कृषक उत्थान” की बहुआयामी संभावनाओं की रूपरेखा तैयार कर दी है। यह नए संशोधन, उप्र कृषि उपज विपणन अधिनियम के दायरे से 46 कृषि वस्तुओं को मुक्ति प्रदान करते हुए, इन वस्तुओं को किसानों से सीधे खरीद की अनुमति प्रदान करते हैं। उ.प्र. किसानों से सीधी खरीद, मौजूदा वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज को नई निजी मंडी के रूप में निर्दिष्ट करने और निजी मंडियां स्थापित करने की भी सुविधा प्रदान करने वाला राज्य बन गया है। सुधारों की यह श्रंखला अब किसानों को स्थानीय एपीएमसी (मंडियों) की दया पर आश्रित रहने से मुक्ति प्रदान करती है क्योंकि उनके पास राज्य के किसी भी बाजार में अपने उत्पाद बेचने के लिए एकल लाइसेंस है।</p>
<p>यह निर्णय असमय काल-कवलित होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और बिचौलियों के हाथों निर्धन कृषकों की प्रणालीगत लूट को समाप्त करने हेतु पूर्णतः सक्षम है। यह, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने में भी मदद करेगा जो अधिक रोजगार उत्पन्न करेगा। सुधारों की इस श्रंखला में श्रम कानूनों को शिथिल कर योगी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश व्यापार के लिए खुला है। श्रम कानूनों के निलंबन से उद्योग और विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। अब नए लघु एवं मझोले उद्योगों के विकसित होने की प्रबलता बढ़ गई है।</p>
<p>यहां एक बात और काबिल-ए-गौर है कि कोराना संक्रमण के मध्य, हजारों औद्योगिक कम्पनियों का चीन से मोह भंग हो गया है। उसमें चीन की हठधर्मी नीतियों का भी बड़ा योगदान है साथ ही वैश्विक औद्योगिक जगत, अब किसी एक स्थान के बजाए अनेक स्थानों पर निवेश कर कोरोना जैसे किसी भी अप्रत्याशित जोखिम के प्रभाव को कम करना चाहता है। इस “संक्रमण और संभावना” के संधिकाल पर योगी सरकार का बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने हेतु “विशेष पैकेज” तैयार करना, उ.प्र. को “औद्योगिक निवेश” का बड़ा हब बनाने जा रहा है। जो असीमित और गुणवत्तापरक राजगार का बड़ा जरिया बनेगा।</p>
<p>यही नहीं मुख्यमंत्री शिक्षुता (अप्रेन्टिसशिप) प्रोत्साहन योजना के तहत युवाओं को उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ-साथ ₹2500 का मासिक प्रशिक्षण भत्ता प्रदान की जाने की व्यवस्था की गई है। विदित हो कि एक वर्ष में एक लाख युवाओं को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के तहत 02 लाख युवाओं को जोड़े जाने की संभावनाओं को तलाशा गया है। रोजगार अथवा स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन के लिए युवाओं को ‘युवा हब’ के माध्यम से भी ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी द्वारा दिए गए हैं।</p>
<p>उपरोक्त विवरणों की बुनियाद पुख्ता तरीके से इस बात की तस्दीक करती है कि यूपी में हर हाथ में काम का स्वप्न अधूरा नहीं रहेगा। बल्कि उ.प्र. सरकार का नियोजन और उसके सापेक्ष सक्रियता, यह बता रही है कि द्वापर युग के बाद फिर एक “राजयोगी” का परिश्रम, पाण्डव रूपी जनता को “रोजगार रूपी पथ” के माध्यम से बेरोजगारी के “लाक्षागृह” की आग से अवश्य बचा लेगा।</p>
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		<title>कोरोनामिक्स: उम्मीद का नया अर्थशास्त्र</title>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2020 21:11:08 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[कोरोना महामारी केवल कुछ समय के लिए अर्थशास्त्र की दशा को बदलने नहीं जा रही है, कोरोना नया इकोनोमिक्स बनाने जा रही है कोरोनामिक्स। यह कोरोनामिक्स अर्थव्यवस्था पर तब तक शासन करेगा जब तक कि इसके लिए दवा न विकसित हो जाए हो और लोगों के दिल में जैविक युद्ध की आशंका न खत्म हो &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21163" style="width: 152px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg"><img class="  wp-image-21163" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg" alt="B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB" width="152" height="231" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>पंकज जायसवाल</strong></figcaption></figure>
<p>कोरोना महामारी केवल कुछ समय के लिए अर्थशास्त्र की दशा को बदलने नहीं जा रही है, कोरोना नया इकोनोमिक्स बनाने जा रही है कोरोनामिक्स। यह कोरोनामिक्स अर्थव्यवस्था पर तब तक शासन करेगा जब तक कि इसके लिए दवा न विकसित हो जाए हो और लोगों के दिल में जैविक युद्ध की आशंका न खत्म हो जाए। इस कोरोनामिक्स को जानने के लिए आइए कोरोना महामारी के कुछ तथ्य पर चर्चा करते हैं । आज आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री नहीं के बराबर है, इसलिए जीडीपी लगभग शून्य और विकास नकारात्मक है। लगभग सभी व्यवसाय आवश्यक सामान के उद्योग को छोड़कर सकल हानि का सामना कर रहे हैं। आपूर्ति श्रृंखला अंतिम छोर तक प्रभावित है।</p>
<p>विश्व बैंक ने भी कह दिया कि जीडीपी भारत और संपूर्ण एशिया के लिए शून्य होगा। अगले साल की विकास दर 1.8 प्रतिशत आंकी गई और यदि 7 प्रतिशत की विकास दर चाहिए तो लगातार तीन वर्ष तक 8.5 प्रतिशत की उच्च विकास दर चाहिए होंगे। दुनिया भर में 160 करोड़ लोगों के बेरोजगारी का अनुमान लगाया जा रहा है। भारत में 11 करोड़ एमएसएमई प्रभावित हैं। सभी सरकारी लक्ष्य और रेटिंग समाप्त हो गए हैं। सभी बजट आवंटन पूरे नहीं किए जा पा रहे हैं सारा फोकस स्वास्थ्य इन्फ्रा पर आ गया है। भारत में प्रति दिन नुकसान 4.5 बिलियन डॉलर हो गया है और लॉकडाउन एक में जहाँ उच्च स्तर के बिजनेस एविएशन और हॉस्पिटैलिटी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं तो अंतिम स्तर पर नाई और सैलून बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालाँकि ये तथ्य हमें नकारात्मक संकेत देते हैं लेकिन फिर भी, भारत के लिए बहुत सारी उम्मीदें और सकारात्मक संकेत हैं।</p>
<p>शेष विश्व की तुलना में भारत में आबादी के आकार और जटिल संरचना के अनुपात में प्रसार और मृत्यु की दर धीमी है। हालांकि संक्रमण का सम्पूर्ण स्तर पर परीक्षण और मापन नहीं हो पाया है तिस पर भी मृत्यु औसत दर से बहुत कम और नियंत्रण में है, शेष विश्व के मुकाबले। भारत में परीक्षण की कमी के कारण एक बड़ी आबादी बड़े पैमाने पर संक्रमण से अनजान हैं, टेस्ट नहीं हो पा रहें हैं लेकिन लगभग हर शहरी मृत्यु रिकॉर्ड में हैं और फिर भी कोरोना से मृत्यु बहुत कम है, कारण भारतीयों की प्रतिरक्षा प्रणाली अच्छी तरह से लड़ रही है।</p>
<p>अर्थव्यवस्था और समाज के लिए, यह उछाल लेकर वापसी करने का समय है विशेषकर उनके लिए जो विकास की दौड़ से वंचित और पिछड़ गए थे। इस संकट ने नए नेतृत्व विकास को उभरने के लिए भी एक जगह बनाई है, यह व्यक्तिगत स्तर पर भी लागू है और वैश्विक स्तर पर भी। पृथ्वी और अर्थव्यवस्था दोनों रीसेट मोड में हैं, यह परिवर्तन विकास की दौड़ में पिछड़ गए और वंचित रह गए आबादी को अधिक संभावना देगी, यह उनके लिए अवसर हो सकता है। कौशल के विकेंद्रीकरण से क़स्बे के स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और पूरे भारत में समान गति और स्तर से विकास संभव होगा और आर्थिक तानाबाना मजबूत होगा। नौकरी से निकाल दिए गए लोग स्वरोजगार शुरू करेंगे और वे सलाहकार पेशेवरों जैसे की सीए,अधिवक्ताओं और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए अवसर पैदा करेंगे।</p>
<p>बैंक और वित्तीय संस्थान और ऋण देने के लिए मजबूर होंगी, क्योंकि इस अवधि के दौरान ऋण वितरण नहीं हो पाया है। सरकार एमएसएमई और प्रभावित क्षेत्र को कई पैकेज देगी। सरकारी खरीद और व्यय में वृद्धि होगी। भारत विश्व में पुनः आउटसोर्सिंग हब हो सकता है। आउटसोर्सिंग के लिए लिस्टिंग पहले से ही इस प्रक्रिया में है जिसमें कौन सा काम काम घर से और कौन सा हाइब्रिड सिस्टम में हो सकता है इसपर मंथन चालू हो गया है, यह बदलाव ऑपरेटिंग लागत को कम करेगा और लाभ बढ़ाएगा। लॉकडाउन में घटे वेतन और आय ने बचत की आदत और फालतू खर्चों में कमी की आदत डाल दी है।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर, खरीदार पहले से ही भारत से चीनी मिट्टी के बरतन, घर, फैशन और जीवन शैली के सामानों की खरीददारी कर रहें हैं और अब यह गति बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकल्प के रूप में भारत कच्चे माल और निर्मित वस्तुओं के आपूर्तिकर्ता के रूप में कई व्यापार चैनलों में प्रवेश कर सकता है। बदलती विश्व अर्थगति और नई अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला मॉडल में, भारत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत चीन से निकल रहे और लगभग एक हजार विदेशी निर्माताओं को भारत में उत्पादन संयत्र को स्थानांतरित करने के लिए आमंत्रित करने में लगा है। वे भारत को चीन के विकल्प के रूप में देख भी रहें हैं। कथित तौर पर, कम से कम 300 कंपनिया पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा और कपड़ा सहित कई क्षेत्रों में उत्पादन के लिए भारत सरकार के साथ बात कर रहीं हैं।</p>
<p>विनिर्माण सुविधाओं के वृद्धि होने पर आसपास ढांचागत विकास , स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। इस वर्ष, सरकार 300 से अधिक उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने का सोच रही है, और ऐसे देशों को चिन्हित कर रही है जो करीब 1000 वस्तुओं की आपूर्ति के लिए चीन से इतर सोच रहें हैं । महामारी ने उपभोक्ता मनोविज्ञान में भी बदलाव किया है, और यह बाजार के प्रति, विशेष रूप से चीन और उसके उत्पादों के प्रति एक परिवर्तित व्यवहार सामने लायेगा । इससे कोई इनकार नहीं कर रहा है कि, महामारी को देखते हुए, आपूर्ति श्रृंखला पर सबसे बड़ी मार पड़ी है और भारत को इस वैश्विक शून्य को भरने के लिए छलांग लगाने से पहले अपनी निर्भरता को चीन पर से काफी कम करना होगा क्यों कि लंबे समय से, चीन विभिन्न वस्तुवों के लिए भारत की आयात सूची में सबसे ऊपर है।</p>
<p>कोरोना काल के बाद कैसे सेक्टरों के विकास पहले से स्थापित कई नकारात्मकताओं को प्रतिस्थापित करेंगे और पूर्व निर्मित विकास के अंतर को भरेंगे । इस दौर के बाद एग्रो इकोनॉमी ही विश्व स्तर पर लीड करेगी, इस दौर में लोगों ने आवश्यक खाद्य पदार्थों, प्रिवेंटिव स्वास्थ्य बाजार (आयुर्वेद, योग और होमियोपैथ) को महसूस किया है और यह इस सेगमेंट के लिए एक अवसर होगा। आर्थिक गतिविधियों के विकेंद्रीकरण से माइक्रो सेक्टर बढ़ेगा और नए और पहले से अधिक मजबूत आर्थिक ताने-बाने का निर्माण होगा। हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक सेक्टर में वृद्धि होगी। एविएशन हॉस्पिटैलिटी एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर प्रभावित होगा जहां भीड़ ज्यादे होती है लेकिन पोजिटिव यह है की लोग मनोरंजन के अन्य माध्यमों की ओर रुख करेंगे और उद्योग उस ओर बढ़ेगा। हां, एविएशन और हाई-क्लास हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को कोरोना के बाद संभलने और पुनः पूर्व आकार लेने में समय लगेगा।</p>
<p>यह भी स्पष्ट है की विश्व स्तर पर बदल रही गतिशीलता में चीन पर निर्भरता शायद खत्म हो रही है, आशंका है की उसका दबदबा खत्म करने या कोरोना के दंड के रूप में चीन पर परमाणु बम से हमला हो जाए या चीन को तोड़ने के लिए साइलेंट हमला हो या शीत युद्ध जैसी परिस्थितियां हो जाए, हालाँकि ये सब अतिवाद संभावनाएं हैं फिर भी दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्था की लिस्ट बदलेगी और कुछ नए देश आयंगे और पुराने जायेंगे । संयुक्त राष्ट्र और डब्ल्यूएचओ की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी<br />
उपरोक्त सभी सकारात्मक आशाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। एमएसएमई से सरकारी खरीद को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए और इसमें से भी 50 प्रतिशत माइक्रो सेक्टर से खरीदना चाहिए। एमएसएमई को तीन-भाग सूक्ष्म, लघु और मध्यम में अलग-अलग तीन प्रकोष्ठ के नेतृत्व में विभाजित करना चाहिए ताकि माइक्रो के साथ न्याय हो सके।</p>
<p>सरकार को अंतिम स्तर पर बिक्री संभव बनाने और खपत बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। बैंक के लाभ की समीक्षा की आवश्यकता है और बैंक ब्याज और बैंक शुल्क में कमी इस समय की मांग है। कम ब्याज दर के साथ अधिस्थगन की अवधि और सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ाए जाने चाहिए । बजट की बात करें तो कोरोना के कारण अधिकांश बजट आवंटन बदल जायेगा और यह अब मानव संसाधन के बचाव, विकास एवं स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विकास पर स्थानांतरित हो जाएगा। पारित किए गए सभी बजट और सरकारी खर्चों की समीक्षा, पुनर्गणना और फिर से नवीन आवंटन किया जाना चाहिए क्यूँ की इस कोरोना ने बजट के खर्चों की प्राथमिकता और उनकी अवधि मटेरियल रूप से बदल दी है।</p>
<p><span lang="HI">व्यक्तिगत स्तर पर भी हमारे पास करने को कई चीजें हैं और अवसर भी हैं ।</span> <span lang="HI">हम अपने लंबे समय से लंबित स्वास्थ्य योजना को पूरा कर सकते हैं।</span> <span lang="HI">हम उन सभी कार्यों को पूरा कर सकते हैं जो कार्यालय जाने या काम में व्यस्त रहने के कारण टालते आये थे।</span> <span lang="HI">अब हम व्यय पुनर्गठन और लागत में कमी को संभव कर सकते हैं ।</span> <span lang="HI">मध्यम वर्ग कोरोना के बहाने ही भव्य और अनावश्यक खर्च को कम कर सकता है। लगातार लॉकडाउन ने हमें अनुशासन सीखा दिया है हम लॉकडाउन के दिशानिर्देशों और कोरोना के बाद आने वाले आर्थिक पर्यावरण के अनुसार काम का पुनर्गठन कर सकते हैं।</span> <span lang="HI">इस कोरोनामिक्स से लड़ने के लिए हमें अपने</span> <span lang="HI">व्यावसायिक रणनीति में</span> <span lang="HI">सभी सीमाओं</span>, <span lang="HI">शर्म</span> <span lang="HI">और अहंकार</span> <span lang="HI">को भी खोलना चाहिए</span> <span lang="HI">।</span> <span lang="HI">कोरोनामिक्स के इन अनुप्रयोगों  से हम अर्थव्यवस्था और मानव जीवन के दुश्मन कोविड </span>19 <span lang="HI">को हरा सकते हैं।</span></p>
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		<title>कोरोना के कारण चख नहीं पाए आमों का स्वाद</title>
		<link>http://businesslinknews.com/the-taste-of-mangoes-did-not-taste-due-to-corona/</link>
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		<pubDate>Sat, 09 May 2020 13:58:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
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		<description><![CDATA[दक्षिण भारतीय आम की किस्में के साथ दशहरी भी देने लगी है दस्तक लखनऊ&#124; उत्तर भारतीय आमों का सीजन अभी शुरू नहीं हुआ, लेकिन दक्षिण भारतीय आम आकर अपना पैर जमाने लगे हैं&#124; ऐसा आमतौर पर हर साल होता है कि आंध्र प्रदेश का बंगनापल्ली जिसे सफेदा भी कहते हैं मार्केट में मार्च अप्रैल मे ही आने &#8230;]]></description>
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<li><strong>दक्षिण भारतीय आम की किस्में के साथ दशहरी भी देने लगी है दस्तक</strong></li>
</ul>
<figure id="attachment_21327" style="width: 142px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/shailendra-ranjan.jpg"><img class="  wp-image-21327" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/shailendra-ranjan.jpg" alt="shailendra ranjan" width="142" height="142" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>डॉ. शैलेंद्र राजन</strong></figcaption></figure>
<p><strong>लखनऊ| </strong>उत्तर भारतीय आमों का सीजन अभी शुरू नहीं हुआ, लेकिन दक्षिण भारतीय आम आकर अपना पैर जमाने लगे हैं| ऐसा आमतौर पर हर साल होता है कि आंध्र प्रदेश का बंगनापल्ली जिसे सफेदा भी कहते हैं मार्केट में मार्च अप्रैल मे ही आने लगता है और मिल्क शेक और दूसरे व्यंजनों में लोग इसका इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं | अधिक लाभ कमाने के चक्कर में दक्षिण भारत के किसान इसे बहुत जल्दी तोड़ देते हैं और गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते हैं| फलस्वरूप, फलों को खाने के बजाय आम के स्वाद का स्वाद लेने के लिए लोग इसे मिल्कशेक और दूसरे व्यंजनों में मिलाकर प्रयोग में लाते हैं, धीरे-धीरे समय के साथ सफेदा आम भी गुणवत्ता वाला हो जाता है| देखने में तो आकर्षक है और फलों के टिकाऊ होने के कारण काफी दिनों तक रखा जा सकता है|</p>
<p style="font-weight: 400">इस वर्ष कोरोना के कारण उत्तर भारतीय बाजारों में आम की मांग कम तो थी ही, साथ ही साथ दक्षिण भारत के बागों में आम की पैदावार भी कम थी| आंध्र प्रदेश में तो कई स्थानो पर कुल उत्पादन का केवल 25% ही आम था| इन दोनों कारणों से उत्तर भारतीयों को दक्षिण भारतीय आमों को ठीक से चखने का मौका नहीं मिला| कोरोना वायरस के डर के मारे आम खाने की किसको फुर्सत थी| अब थोड़ा लोग संभले हैं तो आम भी अपने पैर बाज़ार मे जमाने लगा है| कुछ ही दिनों में आम के ठेले गलियों में दिखने लगेंगे|</p>
<p style="font-weight: 400">बंगनापल्ली के अतिरिक्त, मार्केट में बहुत ही आकर्षक लाल रंग के कारण स्वर्णरेखा आम की भी काफी मांग रहती है| देखने में यह आम खूबसूरत है परंतु स्वाद रंग रूप के अनुरूप नहीं होता है| यह आम लखनऊ और दिल्ली के मार्केट में काफी मात्रा में आ चुका है| आंध्र प्रदेश तथा उड़ीसा के दक्षिणी भारत भागों से स्वर्णरेखा और बंगापल्ली दोनों की ही आवक उत्तर भारत के मार्केट में हर साल लगभग तय है| उत्तर भारतीयों को दशहरी के मुकाबले दूर से दर्जे का स्वाद रखने वाले इन आमों को खाकर ही काम चलाना पड़ता है|</p>
<p style="font-weight: 400">दशहरी, जिसका उत्तर भारत में ही दबदबा नहीं वरन इसे कई दक्षिण भारतीय किसानों ने भी उगाना शुरू कर दिया है| आंध्र प्रदेश में दशहरी की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है| संस्थान से हजारों पौधे किसानों को वहां पर उपलब्ध कराएं हें | हालांकि, दशहरी का असली रंग रूप वहां देखने को नहीं मिलता है लेकिन फिर भी दशहरी का स्वाद तो दशहरी का ही है| आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य स्थानों पर दशहरी उगाने का मुख्य कारण इस किस्म की कई खासियत है| यद्यपि यहां पर दशहरी का आकार लखनऊ के मुकाबले बहुत छोटा होता है परंतु स्वाद में काफी समानता एवं लोगों में बढ़ती इसकी लोकप्रियता के कारण किसानो ने नए बागों में लगाना प्रारंभ कर दिया है| दशहरी  की उपज इन प्रदेशों में काफी अच्छी है जिसके कारण किसान उससे संतुष्ट है|</p>
<p style="font-weight: 400">आंध्र प्रदेश में उत्पादित दशहरी पकने लगी है और उसका दिल्ली मार्केट लखनऊ के फलों से पहले आ जाना स्वाभाविक है| आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा एवं गुजरात के बहुत से क्षेत्रों में दशहरी का उत्पादन होना शुरू हो गया है और यह सभी स्थान मार्केट में मई के पहले पखवाड़े में ही दशहरी उपलब्ध कराने की सामर्थ रखते हैं| आमतौर पर मलिहाबाद के किसान इस बात से आशंकित रहते हैं कि दशहरी उनके बाजार पर कब्जा ना जमाले| दक्षिण भारत का दशहरी उनके लिए एक अच्छा प्लेटफार्म तैयार करने की कोशिश कर रहा है| उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त कई प्रेदेशों में दशहरी के पैदा होने पर लोग उसके स्वाद से परिचित हो चुके हैं| इसका लाभ उत्तर भारत के असली दशहरी उत्पादकों को मिल सकता है, क्योंकि जब बेहतरीन दशहरी उत्तर भारत से वहां पहुंचेगा तो उसको वहाँ के बाज़ार में पैर जमाने में कोई कठिनाई नहीं होगी|</p>
<p style="font-weight: 400">अभी तक देखा गया है कि दक्षिण भारतीय किसमें ही उत्तर भारत में ज्यादा लाभ कम आती हैं| सीजन के शुरुआत में मार्केट में आए आम को महंगे दाम पर भी खरीदने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती है| ऐसा इसलिए है क्योंकि लगभग 1 साल बाद आम चखने का मौका कोई नहीं छोड़ना चाहता| जैसे ही उत्तर भारत के बागों में आम तैयार हो जाता है दक्षिण भारतीय क़िस्मों का फल आना बंद हो जाता हैं और कई बार ऐसा उनकी फसल खत्म हो जाने के कारण भी होता है|</p>
<p style="text-align: right"><strong><em>लेखक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा लखनऊ के निदेशक हैं।</em></strong></p>
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		<title>इंडिया इकनोमिक डायरी : भारतीय अर्थव्यवथा का बारीक अध्ययन</title>
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		<pubDate>Sat, 09 May 2020 12:55:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[इंडिया इकनोमिक डायरी]]></category>
		<category><![CDATA[सीए पंकज जायसवाल]]></category>

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		<description><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवथा का बारीक अध्ययन : इंडिया इकनोमिक डायरी प्रस्तुत पुस्तक इंडिया इकनोमिक डायरी आॢथक विषयों के विशेषज्ञ और कालान्तार में भारतीय अर्थव्यवथा का बारीकी से अध्ययन करने वाले सीए पंकज जायसवाल की लेखन यात्रा के विभिन्न आयामों और समय-समय पर लिखे गये ब्लाग एवं देश के शीर्ष समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों का संग्रह &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भारतीय अर्थव्यवथा का बारीक अध्ययन : इंडिया इकनोमिक डायरी</strong></p>
<figure id="attachment_21163" style="width: 112px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg"><img class="  wp-image-21163" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg" alt="B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB" width="112" height="170" /></a><figcaption class="wp-caption-text">सीए पंकज जायसवाल</figcaption></figure>
<p>प्रस्तुत पुस्तक इंडिया इकनोमिक डायरी आॢथक विषयों के विशेषज्ञ और कालान्तार में भारतीय अर्थव्यवथा का बारीकी से अध्ययन करने वाले सीए पंकज जायसवाल की लेखन यात्रा के विभिन्न आयामों और समय-समय पर लिखे गये ब्लाग एवं देश के शीर्ष समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों का संग्रह है। विख्यात अर्थशास्त्री तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अब तक के कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न विषयों पर तथ्यसहित कई लेख मिलेंगे, जो तर्कसंगत हैं।</p>
<p>लेखक ने इन दोनों ही कालखण्डों में विभिन्न विषयों पर समभाव से तथ्यपरक लेखन कार्य किया है। समग्र भाव से लेखक का मानना है अन्य कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों से अलग भारत की अर्थव्यवस्था के सम्बन्ध में मनमोहन सिंह द्वारा उठाये गए कदम महत्वपूर्ण और मील के पत्थर साबित हुये, उनके बाद आये नरेन्द्र मोदी ने क्रांतिकारी सुधारात्मक कदम उठाये जिसके संबंध में कोई सोच नहीं सकता। सदिच्छा और दूरगामी परिणाम को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उठाये गए कदम की मीमांसा आगे आने वाला भविष्य इतिहास के रूप में करेगा, लेकिन जो साहसिक कदम नोटबंदी, जीएसटी, डिफेंस में मेक इन इंडिया और बहुत सारे कानूनों के निरस्तीकरण के साथ उन्होंने उठाया है वह एक साहसिक व्यक्तित्व का काम है।</p>
<p>वर्तमान में विद्वान इनके समर्थन और विरोध में लिख रहें हैं किन्तु विपक्ष में लिखने वाले लेखकों ने ना तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ<a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/pankaj-ji.jpg"><img class="  wp-image-21320 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/pankaj-ji.jpg" alt="pankaj ji" width="120" height="191" /></a> न्याय किया और ना वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ कर रहे हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जो बात कही वह इनके अलावा वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी लागू होती है, इन दोनों का मूल्यांकन आगे आने वाली सदियां करेंगी।</p>
<p>यह पुस्तक तत्कालीन घटनाओं पर प्रतिक्रियास्वरूप लिखी गई लेखों का संग्रह स्वतंत्र आॢथक चिंतन एवं लेखन है। विभिन्न समय पर देश के प्रतिष्ठिïत समाचार पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं को याद करते हुये लेखक बताते हैं कि लेख प्रकाशित होने के दौरान जब कभी एक पक्ष की समालोचना होती थी, तो वह पक्ष बोलता था की लगता है दूसरे तरफ वाले हो और ठीक इसी तरह जब दूसरे पक्ष की बात होती थी तो वह भी ऐसा ही बोलता था। बस, इन्हीं दोनों धाराओं के बीच रास्ता बनाते हुए सच लिखता चला गया। हां, कोशिश यही रही की समालोचना और रचनात्मक टिप्पणी ही करूं। पाठक भी इसे ऐसे ही लें और कहीं किसी के खिलाफ कुछ लगे, तो उसे मेरे व्यंग्य शैली का हिस्सा माने&#8230; इससे ज्यादा कुछ नहीं।</p>
<p>इंडिया इकनोमिक डायरी पुस्तक में लेखक के आॢथक विषयों से संबंधित प्रमुख 100 लेखों का संग्रह बनाया गया है। प्रकाशकों की योजना इस पुस्तक को तीन भागों में प्रकाशित करने की है। प्रस्तुत पुस्तक भाग प्रथम है और आशा है कि यह पुस्तक पाठकों को भारत के अर्थ दर्शन और करीब से समझने में पूर्ण सहायता करेगी और स्वतंत्र दृष्टि से पाठक प्रमुख भारतीय आॢथक घटनाओं की विवेचना कर पाएंगे।</p>
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