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	<title>Business Link &#187; निगमों से</title>
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	<description>Breaking News</description>
	<lastBuildDate>Sat, 15 Apr 2023 02:02:46 +0000</lastBuildDate>
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		<title>24 साल बाद भी फाइलों में अटकी एलिवेटेड रोड, सेतु निगम ने भेजी रिपोर्ट</title>
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		<pubDate>Thu, 17 Feb 2022 13:36:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[आगरा एक्सप्रेस-वे]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम]]></category>
		<category><![CDATA[एलिवेटेड रोड]]></category>
		<category><![CDATA[कालीदास मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[नितिन गडकरी]]></category>
		<category><![CDATA[राजनाथ सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[राजाजीपुरम]]></category>
		<category><![CDATA[लोक निर्माण विभाग]]></category>
		<category><![CDATA[लोहिया पथ]]></category>
		<category><![CDATA[हैदर कैनाल]]></category>

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		<description><![CDATA[राजाजीपुरम से कालीदास मार्ग के बीच हैदर कैनाल पर बननी थी एलिवेटेड रोड जाम से परेशान राजधानीवासियों को मिलनी थी राहत, पर नहीं मिली 1697 करोड़ रुपये में हैदर कैनाल एलिवेटेड प्रोजेक्ट होना था शुरू 1998 में निजी कंपनी ने इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार की 2021 नवंबर में सर्वे रिपोर्ट शासन में भेज चुका &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li style="text-align: left"><strong><img class="  wp-image-22223 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2022/02/haider-canal.jpg" alt="haider canal" width="403" height="302" /></strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>राजाजीपुरम से कालीदास मार्ग के बीच हैदर कैनाल पर बननी थी एलिवेटेड रोड</strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>जाम से परेशान राजधानीवासियों को मिलनी थी राहत, पर नहीं मिली</strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>1697 करोड़ रुपये में हैदर कैनाल एलिवेटेड प्रोजेक्ट होना था शुरू</strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>1998 में निजी कंपनी ने इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार की</strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>2021 नवंबर में सर्वे रिपोर्ट शासन में भेज चुका है सेतु निगम</strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>14 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव कई बार किया गया तैयार</strong></li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजाजीपुरम से कालीदास मार्ग तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड 24 साल बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया है। गाजीउद्दीन हैदर कैनाल पर करीब 14 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव कई बार तैयार किया गया, लेकिन शासन स्तर पर प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। इसके चलते लाखों राजधानीवासियों को रोजाना भीषण जाम से जूझना पड़ता है।</p>
<p>लोक निर्माण विभाग के जानकारों की मानें तो हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने से आगरा एक्सप्रेस-वे और लोहिया पथ आपस में जुड़ जाएंगे। साथ ही अवध चौराहे, मवैया, चारबाग व हजरतगंज में लगने वाला ट्रैफिक जाम नहीं लगेगा। समस्या से निजात दिलाने के लिए केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 27 सितम्बर 2021 को सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने 13 नवम्बर 2021 को शासन को सर्वे रिपोर्ट भी सौंप दी, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ सकी।</p>
<p><strong>पहले चरण में राजाजीपुरम से सदर तक बननी थी सड़क</strong><br />
राजधानी में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए करीब 24 साल पहले गाजीउद्दीन हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। पहले चरण में राजाजीपुरम से सदर क्रॉसिंग तक 7.41 किलोमीटर की एलिवेटेड सड़क बनाने का प्रस्ताव था। इसकी चौड़ाई 45 मीटर रखी जानी थी। बीच में डिवाइडर भी बनना था। दोनों किनारों पर तीन-तीन मीटर का फुटपाथ भी बनाना तय हुआ था। तब इसकी अनुमानित लागत करीब 534 करोड़ रुपये थी।</p>
<p><strong>वर्ष 1998 में तैयार हुई थी फिजिबिलिटी रिपोर्ट</strong><br />
एक निजी कंपनी ने वर्ष 1998 में इस एलिवेटेड रोड ​की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की ​थी। अगले साल 1999 में संशोधित रिपोर्ट भी तैयार हुई, लेकिन आपत्तियों और भारी भरकम खर्च के कारण योजना रोक दी गई। इसके बाद 24 जुलाई 2019 को यातायात सुधार के लिए शासन स्तर पर बैठक हुई, जिसमें एलडीए को 1697 करोड़ रुपये में हैदर कैनाल एलीवेटेड प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने का निर्देश दिया गया, लेकिन इस बार भी कुछ नहीं हुआ। तब से इलाके के लोग सिर्फ इंतजार में हैं।</p>
<p><strong>राजाजीपुरम से गोमती तक जाती है कैनाल</strong><br />
राजाजीपुरम से गोमती तक जाने वाली हैदर कैनाल 14 किमी लम्बी है। इसकी चौड़ाई 40 से 70 मीटर है। घनी आबादी में राजाजीपुरम से गोल्फ क्लब चौराहे तक नाले की लंबाई 8.26 किमी है। लाल बहादुर शास्त्री मार्ग से पुराना किला क्रॉसिंग तक नाले पर 840 मीटर पर निर्माण भी करवाया गया है।</p>
<p style="text-align: center"><strong>बड़े इलाके को मिलती ट्रैफिक जाम से राहत</strong><br />
राजाजीपुरम से हजरतगंज पहुंचने में 30 मिनट से अधिक समय लगता है। पिछले कई वर्षों से हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनाने की मांग की जा रही है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। इससे वाहन चालकों को काफी दिक्कत होती है। हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बनने से इन समस्याओं से निजात मिल जाती।<br />
<strong>करण गहलौत, राजाजीपुरम</strong></p>
<p style="text-align: center">राजाजीपुरम बड़ी रिहायशी कॉलोनी है, लेकिन संकरे रास्तों के कारण वाहन चालकों को गोमतीनगर, चिनहट पहुंचने में 40-45 मिनट तक लग जाता है। यदि हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड बन जाये तो लोगों को काफी राहत मिलेगी।<br />
<strong>ऋषभ गुप्ता, राजाजीपुरम</strong></p>
<blockquote><p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2022/02/yogesh_pawar.jpg"><img class="  wp-image-22222 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2022/02/yogesh_pawar.jpg" alt="yogesh_pawar" width="82" height="107" /></a></strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजाजीपुरम से हैदर कैनाल के ऊपर एलिवेटेड रोड बनाने के लिए सर्वे रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग को भेजी गई है। इस पर करीब 770 करोड़ रुपये की लागत आयेगी। बजट को मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया जाएगा।<br />
<strong>योगेश पावर, प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम</strong></p></blockquote>
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		</item>
		<item>
		<title>यूपीसीडा की सार्थक पहल, उद्यमियों को बिना कार्यालय गये मिलेंगी 24 सेवायें </title>
		<link>http://businesslinknews.com/meaningful-initiative-of-upsida-entrepreneurs-will-get-24-services-without-going-to-office/</link>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2020 13:11:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[ऑनलाइन सेवायें]]></category>
		<category><![CDATA[औद्योगिक मंत्री]]></category>

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		<description><![CDATA[उद्यमियों को आनलाइन सेवाओं की विशेषताओं से अवगत कराकर औद्योगिक मंत्री ने दिये उनके प्रश्नों के उत्तर एक पोर्टल से उद्यमियों को मिलेंगी अतिरिक्त सेवाएं, जिससे होगा राज्य में नए आर्थिक अवसरों का सृजन होगा यह सुविधायें उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद को बढ़ाने के लिए दे सकती हैं तीव्र औद्योगिक विकास को &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>उद्यमियों को आनलाइन सेवाओं की विशेषताओं से अवगत कराकर औद्योगिक मंत्री ने दिये उनके प्रश्नों के उत्तर</strong></li>
<li><strong>एक पोर्टल से उद्यमियों को मिलेंगी अतिरिक्त सेवाएं, जिससे होगा राज्य में नए आर्थिक अवसरों का सृजन होगा</strong></li>
<li><strong>यह सुविधायें उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद को बढ़ाने के लिए दे सकती हैं तीव्र औद्योगिक विकास को गति</strong></li>
<li><strong>यूपीसीडा ऑनलाइन सिंगल विण्डो पोर्टल के माध्यम से 2500 उद्योगपतियों को भूमि आवंटन और भवन योजना से सम्बंधित स्वीकृतियां प्रदान की</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों के कुशल संचालन के लिये औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण की 21 नवीन ऑनलाइन सेवाओं का शुभारम्भ किया।निवेश मित्र सिंगल विण्डो पोर्टल के माध्यम से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत उपलब्ध कराई जा रही कुल 146 ऑनलाइन सेवाओं के साथ निवेश मित्र देश के सिंगल विण्डो पोर्टल्स में से एक है। निवेश मित्र में शीघ्र ही नवीन ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली जोड़ी जाएगी।<span class="Apple-converted-space"> </span></p>
<p>उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा प्रारंभ की गई 21 नई सेवाओं में सभी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। जैसे, नए उत्पादों को सम्मलित करने हेतु आवेदन, परियोजना परिवर्तन हेतु आवेदन, लीज<span class="Apple-converted-space">  </span>डीड निष्पादन एवं पंजीकरण हेतु आवेदन, निस्तारीकरण के उपरांत भूखंड की बहाली हेतु आवेदन, आवंटी की मृत्यु के बाद कानूनी उत्तराधिकारी की मान्यता प्राप्त करने हेतु आवेदन, आवंटी फर्म कंपनी के पुनर्गठन अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन, भूखण्ड हस्तांतरण हेतु आवेदन, अतिरिक्त इकाई की स्थापना हेतु आवेदन, भूखंड को किरायेदारी पर देने हेतु आवेदन, परियोजना की स्थापना के लिए<span class="Apple-converted-space">  </span>समयविस्तरण हेतु आवेदन, वित्तीय संस्थान के पक्ष में गिरवी रखने की अनुमति हेतु आवेदन, वित्तीय संस्थान के पक्ष में दूसरा प्रभार के निर्माण की अनुमति हेतु आवेदन, संयुक्त बंधक की अनुमति हेतु आवेदन, वित्तीय संस्था को लीज डीड का हस्तांतरण हेतु आवेदन, उत्पादन शुरू करने के लिए प्रमाण पत्र जारी कराने हेतु आवेदन, भूखंड के समर्पण और वापसी योग्य राशि की वापसी हेतु आवेदन, बकाया भुगतान की जानकारी हेतु आवेदन, पूर्ण भुगतान पश्चात अदेयतन प्रमाण पत्र जारी कराने हेतु आवेदन, आवंटी को पट्टाविलेख सौपने का आवेदन, आरक्षित धनराशि का ऑनलाइन भुगतान और देय राशि का ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाओं के लिये ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।<span class="Apple-converted-space"> </span></p>
<p>उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री ने उद्वघाटन के दौरान कहा, कोविड-19 की चुनौतियों और इसके परिणामस्वरूप लॉकडाउन के कारण उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक इकाइयों को फिर से शुरू करने और नए उद्योगों की स्थापना के लिये निवेश आकर्षण के उद्देश्य से राज्य में उद्यमों को विभिन्न स्वीकृतियां जारी करने में मानव हस्तक्षेप को और कम करने के लिए भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण अपनाया है। उद्वघाटन सत्र के अवसर पर प्रदेश के लगभग सीआईआई के 80 उद्यमियों को आनलाइन कान्फे्रंस के माध्यम से सम्पर्क स्थापित करते हुए इन सेवाओं की विशेषताओं से अवगत कराया गया व उनके प्रश्नों का उत्तर दिया गया।</p>
<p>​इस दौरान अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टण्डन ने कहा कि निवेश मित्र के साथ उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण की सेवाओं के एकीकरण से उद्यमियों को एक ही पोर्टल से अतिरिक्त सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी। इससे राज्य में नए आर्थिक अवसरों का सृजन होगा और उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को बढ़ाने के लिए तीव्र औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि जिला, मण्डल और राज्य स्तर के उद्योग बंधु में उद्योगों के प्रकरणों के त्वरित समाधान को सुनिश्चित करने के लिए एक नई ऑनलाइन शिकायत निवारण सुविधा को जल्द ही निवेश मित्र पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा। ​ये नई सेवाएं उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, यूपीसीडा द्वारा राज्य में अपने औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित या स्थापित किए जाने वाले उद्यमों और उद्योगों को प्रदान की जाती हैं।</p>
<p>प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने बताया प्राधिकरण की 21 नई सेवाओं को सम्मिलित करने के साथ अब 20 विभागों द्वारा निवेश मित्र के माध्यम से प्रदान की जा रही ऑनलाइन सेवाओं की कुल संख्या 146 हो गई है, जिसके फलस्वरूप निवेश मित्र देश की सबसे बड़ी और व्यापक विण्डो प्रणालियों में से एक बन गई हैं।</p>
<p>यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनिल गर्ग ने बताया कि यूपीसीडा द्वारा अब तक 21 नवीन सेवाओं के अतिरिक्त ऑनलाइन सिंगल विण्डो पोर्टल निवेश मित्र के माध्यम से 2500 उद्योगपतियों को भूमि आवंटन और भवन योजना से सम्बंधित स्वीकृतियां प्रदान की हैं, जिनके लिए उद्यमियों एक बार भी प्राधिकरण के कार्यालय नहीं आना पड़ा। उन्होंने बताया कि सुदृढ़ जीआईएस टैगिंग से प्राधिकरण के सभी औद्योगिक क्षेत्रों का सचित्र विवरण पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में यूपीसीडा की कुल 24 आनलाइन सेवायें निवेश मित्र के माध्यम से उद्यमियों के उपयोगार्थ उपलब्ध हैं।</p>
<p>उद्योग बंधु की अधिशासी निदेशक एवं सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास नीना शर्मा ने कहा, फरवरी 2018 में निवेश मित्र के उन्नत संस्करण के शुभारम्भ के बाद से अब तक निवेश मित्र सिंगल विण्डो पोर्टल के माध्यम से कुल 1,26,191 (75 प्रतिशत्)<span class="Apple-converted-space">  </span>स्वीकृतियां जारी की गई है, जब कि कुल 73 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं द्वारा इस ऑनलाइन सुविधा को ‘संतोषजनक’ माना गया है।</p>
<p>ज्ञात हो कि राज्य की निवेश प्रोत्साहन संस्था-उद्योग बंधु निवेश मित्र के संचालन व प्रबंधन हेतु नोडल एजेंसी है। निवेश मित्र में एकीकृत 21 नई सेवाओं को यूपीसीडा की एजेंसी ई. एण्ड वाई. द्वारा तैयार किया गया है, जिसे प्रदेश की संस्था निवेश मित्र (उद्योगबन्धु) एवं एनआईसी विभाग द्वारा अपने स्तर से सघन परीक्षण एवं पोर्टल से एकीकृत किये जाने हेतु महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।<span class="Apple-converted-space"> </span></p>
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		<title>अगले वित्त वर्ष से भरना होगा दोगुना गृहकर</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2019 08:19:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[दोगुना तक बढ़ जाएगा हाउस टैक्स, अगले साल से लागू होंगी नई दरें लखनऊ। गृहकर की दरें अगले साल अप्रैल से दो गुना तक बढ़ जाएंगी। हाउस टैक्स के साथ ही लखनऊवासियों को वाटर टैक्स भी अधिक देना होगा, क्योंकि हाउस टैक्स के आधार पर ही वाटर टैक्स तय किया जाता है। नई दरों के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>दोगुना तक बढ़ जाएगा हाउस टैक्स, अगले साल से लागू होंगी नई दरें</strong></span></h3>
</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> गृहकर की दरें अगले साल अप्रैल से दो गुना तक बढ़ जाएंगी। हाउस टैक्स के साथ ही लखनऊवासियों को वाटर टैक्स भी अधिक देना होगा, क्योंकि हाउस टैक्स के आधार पर ही वाटर टैक्स तय किया जाता है। नई दरों के तहत वसूली अगले साल अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष 2020-21 में की जाएगी। इसको लेकर तैयारी शुरू हो गई।</p>
<p>बढ़ोतरी 100 फीसदी तक किए जाने की तैयारी है। दरों का प्रकाशन कराकर उन पर आपत्तियां आमंत्रित करने का काम भी पूरा कर लिया गया है। आपत्तियों की सुनवाई कर उनका जवाब भी भेज दिया गया है।</p>
<p>इसके साथ ही आपत्तियों की सुनवाई का प्रकाशन भी जल्द ही समाचार पत्रों में कराया जाएगा। उसको लेकर नगर आयुक्त की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। टैक्स बढ़ोतरी को लेकर काफी शासन- प्रशासन का दबाव है। पहले जेएनएनयूआरएम और अब अमृत मिशन में भी निकायों पर आय में बढ़ोतरी का दबाव है।</p>
<p>आपको बता दें कि नगर निगम में क्षेत्र के हिसाब से हाउस टैक्स निर्धारण की दरें तय हैं। ये दरें (कच्चे मकान व प्लॉट को छोड़कर) प्रति वर्ग फीट के हिसाब से 1.25 रुपये से 2.50 रुपये तक हैं। टैक्स निर्धारण करने के लिए मकान के एरिया को पहले टैक्स रेट पर उसे 12 महीने से गुणा कर देते हैं। जो परिणाम आता है, वह उस मकान का वार्षिक किराया मूल्यांकन (एआरवी) हो जाता है।</p>
<p>जो वार्षिक किराया मूल्यांकन बनता है, उसका 15 प्रतिशत हाउस टैक्स होता है। टैक्स गणना को लेकर मकान के क्षेत्रफल में बालकनी, किचन, बाथरूम, कॉरिडोर, स्टोर, पोर्टिको के एरिया में छूट भी दी जाती है।</p>
<p>इसके साथ ही मकान जितना पुराना होता है, उस आधार पर एआरवी में छूट दी जाती है। गृहकर की दरें इलाके के हिसाब से तय की जाती हैं। किसी का मकान हजरतगंज में तो उस इलाके में गृहकर की दर अधिक है। वहीं उतनी ही चौड़ी रोड पर किसी का घर तेलीबाग, फैजुल्लागंज या शहीद भगत सिंह वार्ड की कॉलोनी में तो उसकी गृहकर दरें कम है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg"><img class="alignnone wp-image-11217 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg" alt="nagar-nigam-lucknow" width="835" height="464" /></a></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>एआरवी पर 12.5 फीसद लगता है जलकर</strong></span></p>
<p>जलकल विभाग की ओर से अभी शहर में वाटर मीटर नहीं लगाए गए हैं और न ही वाटर टैक्स वसूली को लेकर खर्च के आधार पर दरें लागू हैं। अभी वाटर टैक्स की गणना नगर निगम द्वारा लगाए जाने वाले गृहकर के आधार की जाती है।</p>
<p>हाउस टैक्स के लिए जो एआरवी (एनुअल रेंटल वैल्यू) निकाली जाती है उसी पर जलकल विभाग 12.5 प्रतिशत की दर से वाटर टैक्स लेता है। इसमें पानी के उपयोग को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में जब हाउस टैक्स की दरें बढ़ेंगी तो मकानों की एआरवी बढ़ेगी और उससे वाटर टैक्स भी बढ़ जाएगा।</p>
<blockquote><p><span style="color: #0000ff;"><strong>गृहकर की नई दरें अगले साल अप्रैल से लागू होंगी। जो आपत्तियां आई थीं उनका जवाब भेज दिया गया है। नगर निगम अधिनियम के तहत हर दो साल में गृहकर की दरें नगर निगम पुनरीक्षित कर सकता है। पिछली बार 2010 में गृहकर की दरें पुनरीक्षित हुईं थीं अब 2019 में की जा रही हैं। </strong></span></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>अशोक सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी</strong></span></p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		<title>कागजों में स्पॉट फाइन शहर में गंदगी की भरमार</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:56:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[बाजारों में चलना था विशेष अभियान, सड़क पर पान मसाला थूकने वालों पर नहीं होता कोई एक्शन खुले आम लोग सड़क पर ही पॉलीथिन व अन्य कूड़ा भी फेंक रहे हैं लखनऊ। नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के लिए भले ही कई योजनाएं बनाई जा रही हों लेकिन हकीकत यह है कि &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>बाजारों में चलना था विशेष अभियान, सड़क पर पान मसाला थूकने वालों पर नहीं होता कोई एक्शन</strong></span></h3>
</li>
<li>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>खुले आम लोग सड़क पर ही पॉलीथिन व अन्य कूड़ा भी फेंक रहे हैं</strong></span></h3>
</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के लिए भले ही कई योजनाएं बनाई जा रही हों लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक एक भी योजनाएं सफल होती नजर नहीं आ रही है। ऐसे ही एक कवायद हुई थी स्पॉट फाइन को लेकर।</p>
<p>इस योजना के अंतर्गत सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी करने वालों से मौके पर ही जुर्माना वसूल किया जाना था लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक स्पॉट फाइन की स्थिति जस की तस बनी हुई है।</p>
<p>नगर निगम प्रशासन की ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण 19 के दौरान स्पॉट फाइन का खाका तो खींचा गया था, लेकिन वो भी कागजों तक ही सिमट कर रह गया। इसके अंतर्गत सड़क पर पान मसाला थूकने वालों से जुर्माना वसूल किया जाना था, वो अब तक संभव नहीं हो सका है। चौंकाने वाली बात ये है कि अभी तक एक व्यक्ति पर भी इस बिंदु पर जुर्माना नहीं हुआ है। यही स्थिति सड़क पर कूड़ा फेंकने वालों की भी है। निगम प्रशासन की ओर से इस दिशा में भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>जोनल को दी गयी थी जिम्मेदारी</strong></span></h3>
<p>स्पॉट फाइन की जिम्मेदारी जोनल अधिकारियों को दी गई थी। जिम्मेदार अधिकारियों ने इस व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया। दो से तीन जोन में तो कुछ रफ्तार पकड़ी गई लेकिन बाद में स्थिति कागजों में ही सिमट कर रह गई।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg"><img class="alignnone wp-image-11217 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg" alt="nagar-nigam-lucknow" width="833" height="463" /></a></p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000;">1 हजार तक जुर्माना</span></strong></h3>
<p>निगम प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया था कि सड़क पर गंदगी फैलाने और पान मसाला थूकने वालों से 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक जुर्माना वसूल किया जाएगा। लेकिन ये संभव ही नहीं हो सका।</p>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">नए सिरे से स्पॉट फाइन व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। इस बार हर सप्ताह स्पॉट फाइन के आंकड़े की समीक्षा की जाएगी।</span></strong><br />
<strong><span style="color: #ff0000;">डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त</span></strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		<title>लखनऊ मेट्रो के अगले चरण के काम पर लगा ब्रेक</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:49:26 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। एलएमआरसी के लिए मुसीबतें दिनों- दिन बढ़ती जा रही है। आगरा और कानपुर मेट्रो को प्राथमिकता पर तेजी से पूरा करने में जुटी मशीनरी लखनऊ मेट्रो के विस्तार पर काम तेज नहीं कर पा रही है। जहां संशोधित डीपीआर पिछले आठ महीने से प्रदेश सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रही &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> एलएमआरसी के लिए मुसीबतें दिनों- दिन बढ़ती जा रही है। आगरा और कानपुर मेट्रो को प्राथमिकता पर तेजी से पूरा करने में जुटी मशीनरी लखनऊ मेट्रो के विस्तार पर काम तेज नहीं कर पा रही है। जहां संशोधित डीपीआर पिछले आठ महीने से प्रदेश सरकार की स्वीकृति का इंतजार कर रही है। वहीं अभी तक बसंतकुंज में डिपो बनाने के लिए मेट्रो को जमीन एलडीए से नहीं मिल सकी है।</p>
<p>मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि 2018 के अंत में ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की बनाई संशोधित डीपीआर को प्रदेश सरकार को भेज दिया गया था। इसके बाद से अभी तक इसका परीक्षण प्रदेश सरकार कर रही है। प्रदेश सरकार को ही स्वीकृति के लिए इस डीपीआर को केंद्र सरकार को भेजना है।</p>
<p>केंद्र सरकार को डीपीआर भेजने के लिए प्रदेश सरकार में कई बार संपर्क किया गया है। आवास विभाग को भी इस बारे में अवगत अलग-अलग बैठकों में कराया गया है। इसके बाद भी अभी कोई प्रगति लखनऊ के दूसरे रूट ब्लूलाइन पर नहीं हो सकी है। इसमें मेट्रो को 13 किमी में चारबाग से बसंतकुंज पुराने लखनऊ को जोड़ते हुए मेट्रो दौड़ानी है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>क्या सरकार की इच्छाशक्ति की कमी&#8230;</strong></span></h3>
<p>अखिलेश यादव की सरकार में जिस मेट्रो ने तमाम रिकार्ड कायम किये, अब वहीं मेट्रो अगले चरण के लिए आगे ही नहीं बढ़ पा रही। जिससे न केवल एलएमआरसी पर सवाल उठ रहे है, बल्कि पूरी भूमिका प्रदेश सरकार निभा रही है। योगी सरकार की लापरवाही की वजह से लखनऊ में ब्लू लाइन मेट्रो का निर्र्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/lucknow_metro_1504496294.jpg"><img class="alignnone wp-image-2280 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/lucknow_metro_1504496294.jpg" alt="lucknow_metro_1504496294" width="832" height="647" /></a></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>डिपो की जमीन देने पर काम शुरू</strong></span></h3>
<p>एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह ने बीते गुरुवार को बुलाई इंजीनियर्स और अर्जन विभाग के अधिकारियों की बैठक में बसंतकुंज में मेट्रो को दी जाने वाली जमीन पर भी जानकारी ली। वीसी का कहना है कि इंजीनियर्स और अर्जन विभाग को लखनऊ मेट्रो के साथ समन्वय कर जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए कहा गया है। यह काम शीघ्र हमारी टीम पूरा कराएगी।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>जनगणना के प्री टेस्ट में नगर निगम फिसड्डी</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Aug 2019 07:46:56 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। जनगणना 2020-21 की तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश में शुरू हुए प्री टेस्ट में लखनऊ नगर निगम की सुस्त रफ्तार पर जनगणना महानिदेशालय ने सख्त नाराजगी जतायी है। नौबत यहंा तक आ गयी कि जनगणना निदेशक नरेन्द्र शंकर पाण्डेय को इस बारे में प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन जितेन्द्र कुमार को पत्र &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> जनगणना 2020-21 की तैयारियों के तहत उत्तर प्रदेश में शुरू हुए प्री टेस्ट में लखनऊ नगर निगम की सुस्त रफ्तार पर जनगणना महानिदेशालय ने सख्त नाराजगी जतायी है। नौबत यहंा तक आ गयी कि जनगणना निदेशक नरेन्द्र शंकर पाण्डेय को इस बारे में प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन जितेन्द्र कुमार को पत्र लिखना पड़ा।</p>
<p>12 अगस्त से शुरू हुआ प्री टेस्ट का यह काम हाथरस के सासनी और महोबा के चरखारी जैसे ग्रामीण इलाकों में ठीक ढंग से चल रहा है, मगर सरकार की नाक के नीचे लखनऊ नगर निगम में यह काम रफ्तार नहीं पकड़ सका है। जनगणना निदेशालय के अफसरों के साथ लखनऊ जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों की तीन बैठकें हो चुकी हैं, पर काम ठीक ढंग से शुरू ही नहीं हो पाया है।</p>
<p>जनगणना निदेशालय के अफसर जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा से भी मिल चुके हैं। इस प्री टेस्ट के तहत 4 सितम्बर तक घरों की सूची बनाने का काम पूरा किया जाना है। जनगणना निदेशालय के अफसर इस बात को लेकर खासे नाराज हैं कि लखनऊ नगर निगम चयनित वार्डों में प्रगणक और सुपरवाइजर के पदों पर कभी किसी की ड्यूटी लगा रहा है तो कभी किसी की।</p>
<p>चार सितम्बर के बाद 30 सितम्बर तक जनसंख्या की गिनती की जानी है। चरखारी में इस काम के लिए 274 गणना ब्लाक बनाये गये हैं, जबकि सासनी में 367 ब्लाक बने हैं। वहीं लखनऊ नगर निगम क्षेत्र के तीन वार्ड लिये गये हैं, जिनमें कुल 184 गणना ब्लाक बनाये गये हैं। इनमें अम्बेडकर नगर वार्ड में 100 प्रगणक ब्लाक बनाये गये हैं। इसी तरह इब्राहिमपुर वार्ड प्रथम में 42 और लाल बहादुर शास्त्री वार्ड प्रथम में भी 42 ब्लाक बने हैं।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/01_05_2013-11census.jpg"><img class="alignnone wp-image-21118 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/01_05_2013-11census.jpg" alt="01_05_2013-11census" width="837" height="557" /></a></p>
<p>लखनऊ नगर निगम में जनगणना प्री टेस्ट का काम अपर नगर आयुक्त राकेश यादव देख रहे हैं। उनका कहना है कि इन तीनों वार्डों में प्रगणक और सुरवाइजरों की तैनाती कर दी गयी है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन तीन वार्डों में जनगणना प्री टेस्ट का काम विलम्ब से 16 अगस्त से शुरू हो सका है। मगर अभी तक हुए काम की कोई समीक्षा नहीं हो सकी है। लखनऊ जिला प्रशासन भी जनगणना महानिदेशालय की शिकायत पर अब सतर्क हुआ है।</p>
<p>जिला जनगणना अधिकारी चूंकि जिलाधिकारी होते हैं, इसलिए उनके प्रतिनिधि के तौर पर यह काम अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रगणकों व सुरवाइजरों की तैनाती हो चुकी है। अगले दो दिन सुरवाइजरों की एक ट्रेङ्क्षनग होनी है, उसके बाद पूरा स्टाफ फील्ड में उतार दिया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>लखनऊ से होगी अधिक बिजली कटौती की निगरानी</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 08:50:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। प्रदेश के ऐसे फीडर और उपकेंद्र जिनसे क्षेत्र में तय शेड्यूल से कम बिजली सप्लाई की जा रही है, उनकी मॉनीटरिंग शक्ति भवन मुख्यालय से होगी। क्षेत्रों के अभियंता अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। इन पर अब सीधे शक्तिभवन मुख्यालय से निगरानी की जा रही है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने बताया कि शक्तिभवन &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/green-urja-copy.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-17457" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/green-urja-copy.jpg" alt="green urja copy" width="630" height="472" /></a></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> प्रदेश के ऐसे फीडर और उपकेंद्र जिनसे क्षेत्र में तय शेड्यूल से कम बिजली सप्लाई की जा रही है, उनकी मॉनीटरिंग शक्ति भवन मुख्यालय से होगी। क्षेत्रों के अभियंता अब ऐसा नहीं कर पाएंगे। इन पर अब सीधे शक्तिभवन मुख्यालय से निगरानी की जा रही है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने बताया कि शक्तिभवन मुख्यालय से ऐसे फीडर और सब-स्टेशनों की समीक्षा की जा रही है, जिन फीडरों पर बिजली आपूॢत शेड्यूल से तीन घंटे से कम रही हो। इसके लिए वहां तैनात अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। अफसरों को निर्देशित किया गया है कि यदि इन फीडरों या उपकेंद्रों पर ट्रांसमिशन-वितरण या किसी अन्य तरह की समस्या है तो उसे तत्काल दुरुस्त कराएं। प्रमुख सचिव ने कहा कि जिन फीडरों पर ट्रिपिंग अधिक है वहां तय शेड्यूल से अधिक बिजली देकर संतुलित किया जाए। कृषि फीडरों के लिए 10 घंटे बिजली आपूॢत करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव ने कहा कि अगले माह में उमस और तेज धूप के कारण गर्मी रहेगी जिससे बिजली की मांग भी अधिक रहेगी। इसलिए तैयारी रखें कि आपूर्ति सामान्य रहे और ट्रिपिंग अधिक न हो। डिस्कॉम स्तर पर संबंधित प्रबंध निदेशक लगातार निगरानी करें और समीक्षा करें। रोस्टर या तय शेड्यूल से कम बिजली देने पर उन्होंने साफ तौर पर नाराजगी जाहिर की। कहा कि मरम्मत या किसी भी अन्य कारण होने पर अधीक्षण अभियंता यह तय करके ही शटडाउन लेंगे कि उक्त क्षेत्र में पिछले काफी दिनों से बेहतर बिजली आपूॢत हो रही। उनकी अनुमति के बिना शटडाउन नहीं लिए जाएंगे। 11केवी फीडर पर एक दिन में अधिकतम एक घंटे का ही शटडाउन लिया जा सकेगा। खराब ट्रांसफार्मरों के समय से ठीक न होने और बदले न जाने की शिकायतों पर प्रमुख सचिव ने एमडी पूर्वांचल और निदेशक तकनीकी से नाराजगी जताई। उन्होंने पूर्वांचल के सभी जिलों की बिजली आपूॢत की रिपोर्ट तलब की है। इसमें तय शेड्यूल, की गई बिजली कटौती, फाल्ट, फाल्ट के कारण जैसे सभी ब्यौरे मांगे हैं। ताकि बिजली कटौती की असली वजह पता चल सके।</p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>एक महीने बाद भी नहीं लागू हुआ आयोग का आदेश</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 08:41:14 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। राजधानी की नवविकसित कालोनियों में अब बिजली कनेक्शन लेना आसान होगा। ऐसे इलाकों में अब दो लोगों के आवेदन पर भी 40 मीटर के दायरे में लेसा बिजली के खंभे लगाएगा और तार भी खींचेगा। इससे पूर्व यह व्यवस्था तीन लोगों के आवेदन पर लागू थी। इसके तहत तीन लोगों के कनेक्शन के लिए &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/green-urja-copy.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-17457" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/green-urja-copy.jpg" alt="green urja copy" width="630" height="472" /></a><br />
<strong>लखनऊ।</strong> राजधानी की नवविकसित कालोनियों में अब बिजली कनेक्शन लेना आसान होगा। ऐसे इलाकों में अब दो लोगों के आवेदन पर भी 40 मीटर के दायरे में लेसा बिजली के खंभे लगाएगा और तार भी खींचेगा। इससे पूर्व यह व्यवस्था तीन लोगों के आवेदन पर लागू थी। इसके तहत तीन लोगों के कनेक्शन के लिए आवेदन करने पर खंभा लगाने का नियम था। वहीं अब उपभोक्ताओं को इस सुविधा के लिए सिस्टम लोडिंग चार्ज भी नहीं देना पड़ेगा। पहले 50 रुपये प्रति किलोवॉट के हिसाब से उपभोक्ता से सिस्टम लोडिंग चार्ज भी वसूला जाता था। पूर्व में नवविकसित कालोनियों में 25 मकान बने होने पर ही नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा सकता था। साथ ही तीन मकानों से बिजली कनेक्शन का आवेदन आने पर ही लेसा बिजली का खंभा लगवाता था। नए नियमों के तहत अब दो बिजली कनेक्शन के आवेदन पर ही लेसा को बिजली का खंभा लगवाना होगा। साथ ही तार भी खिंचवाने होंगे। हालांकि यह नियम 40 मीटर के दायरे में ही लागू होगा। दो आवेदन पर भी खंभा लगवाने से जुड़ा आदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 18 जुलाई को दिया था, लेकिन एक महीने बाद भी इसे लागू नहीं किया जा सका है। आलम यह है कि लेसा के कई एक्सईएन को भी इस नए नियम की जानकारी नहीं है। ऐसे में अभी तक किसी भी इलाके में दो आवेदनों पर खंभे लगाकर और तार खींचकर नए कनेक्शन नहीं दिए जा सके हैं। जिसका नतीजा है कि शहर की कई नवविकसित कालोनियों में अभी भी बांस बल्ली के सहारे बिजली कनेक्शन चल रहे हैं। यही नहीं, सिस्टम लोडिंग चार्ज समाप्त होने के बाद भी उपभोक्ताओं को इससे राहत नहीं दी जा रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का आरोप है कि उपभोक्ता हित का हर फैसला लागू करने में बिजली कंपनियां देरी क्यों करती हैं। जबकि उपभोक्ताओं पर किसी तरह के चार्ज लगाने संबंधी आदेश पर तत्काल बिजली कंपनियां अमल कर लेती हैं।</p>
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		<title>कहीं एलईडी बल्ब की तर्ज पर स्मार्ट मीटर भी न निकलें खराब</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 08:38:20 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[देश में बांटे गये एलईडी बल्बों में सबसे अधिक 1.90 प्रतिशत यूपी में खराब हुए एलईडी बल्ब केंद्र की उजाला योजना के तहत ईईएसएल कंपनी ने बांटे एलईडी बल्ब प्रदेश में ईईएसएल कंपनी ही लगा रही स्मार्ट मीटर उपभोक्ता पुरानी टेक्नोलॉजी व मीटर तेज चलने की कर रहे बड़ी संख्या में शिकायत एलईडी के हश्र &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>देश में बांटे गये एलईडी बल्बों में सबसे अधिक 1.90 प्रतिशत यूपी में खराब हुए एलईडी बल्ब </strong></p>
<p><strong>केंद्र की उजाला योजना के तहत ईईएसएल कंपनी ने बांटे एलईडी बल्ब </strong></p>
<p><strong>प्रदेश में ईईएसएल कंपनी ही लगा रही स्मार्ट मीटर </strong></p>
<p><strong>उपभोक्ता पुरानी टेक्नोलॉजी व मीटर तेज चलने की कर रहे बड़ी संख्या में शिकायत </strong></p>
<p><strong>एलईडी के हश्र को देखते हुए स्मार्ट मीटर को लेकर भी उठ रहे सवाल </strong></p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/download.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-21099" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/download.jpg" alt="download" width="225" height="225" /></a></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> बिजली बचत के मकसद से ऊर्जा मंत्रालय के अधीन ईईएसएल कंपनी द्वारा बांटे गये एलईडी बल्बों में सबसे अधिक 1.90 प्रतिशत एलईडी उत्तर प्रदेश में खराब हो रही है। एलईडी बल्बों के लगातार खराब होने की बढ़ती शिकायतों पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इस मामले की पारदर्शी तरीके से जांच करायी जाय तो यह संख्या और अधिक होगी। उन्होंने यह भी सवाल खड़ा किया कि जिस कंपनी ने एलईडी बल्ब बांटे हैं, उसी कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर भी लगाए जा रहे हैं। इसलिए स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान लगना निश्चित है। विद्युत मंत्रालय के अधीन संयुक्त उद्यम कंपनी एनर्जी एफिशियंसी सर्विसेज लि.(ईईएसएल) द्वारा प्रदेश में लगाये जा रहे पुराने टेक्नोलॉजी 2जी व 3जी के 40 लाख स्मार्ट मीटर का मामला अभी चल ही रहा था कि अब ईईएसएल द्वारा बांटे गये एलईडी बल्बों के खराब होने का मामला सामने आ गया। केंद्र सरकार की उजाला स्कीम के तहत वितरित किये गये एलईडी बल्बों का हाल बुरा है। बीते दिनों राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में चर्चा उठी तो उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक तय मानक मूल्यांकित दोष एक प्रतिशत से ज्यादा 1.90 प्रतिशत निकला। उपभोक्ता परिषद का मानना है कि भारत सरकार ने यह अध्ययन एक निजी कंसल्टेंट कंपनी पीडब्लूसी से कराया है, इसकी तकनीकी आडिट करा ली जाय तो स्वत: चौंकाने वाला मामला सामने आएगा और यदि पारदर्शी तरीके से किसी उच्च स्तरीय सरकारी एजेंसी से कराया होता तो उत्तर प्रदेश में खराब एलईडी बल्बों का प्रतिशत कहीं ज्यादा निकलता। फिर भी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा एलईडी बल्बों के खराब होने की घटना चिंताजनक है, और वह भी इसलिए क्योंकि उत्तर प्रदेश में इसी कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं और उपभोक्ता अभी से उसमें तेज चलने की शिकायत करने लगे। उपभोक्ता परिषद ने केंद्र व प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि ईईएसएल कंपनी द्वारा वितरित किये एलईडी बल्ब व लगवाये जा रहे स्मार्ट मीटर की सीएजी से तकनीकी ऑडिट करायी जाय। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पूरे देश के 35 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 28 जून तक 35 करोड़ 16 लाख से अधिक एलईडी बल्ब ईईएसएल कंपनी द्वारा लगाये गये हैं, उसमें देश के उन राज्यों में जिसमें एक प्रतिशत से अधिक एलईडी बल्व खराब हुये उनकी स्थिति चौंकाने वाली है। अब खराब एलईडी बल्बों को बांटने वाली कंपनी ही उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर भी खरीद कर लगवा रही है। ऐसे में आने वाले समय में यदि इसमें कोई बड़ी गड़बड़ी व विफलता साबित होती है तो इसकी गारंटी कौन लेगा। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि पूरे प्रदेश में गारंटी पीरिएड में खराब हो रहे एलईडी बल्बों को बदलने के लिए उपभोक्ता बल्बों को बदलने के लिए चक्कर काट रहे हैं और कोई सुनने वाला नहीं है।</p>
<p><strong>35 करोड़ से अधिक बांटे गये एलईडी बल्ब</strong></p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/Smart-meter.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-21050" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/Smart-meter.jpg" alt="Smart meter" width="1800" height="999" /></a>आंकड़ों की मानें तो पूरे देश में 35.16 करोड़ एलईडी बल्ब ईईएसएल द्वारा बांटे गये हैं। इसमें कई बड़े राज्यों में एक प्रतिशत से अधिक एलईडी बल्ब खराब होने की रिपोर्ट है। सबसे ज्यादा उप्र और मप्र में 1.90 प्रतिशत एलईडी बल्ब खराब हुए हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर, बिहार और झारखंड में 1.70 प्रतिशत एलईडी बल्ब खराब हुए। इसका खुलासा हाल ही में राज्यसभा में रखी गई एक रिपोर्ट में हुआ है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इन आंकड़ों को जारी करते हुए सवाल उठाया है कि भारत सरकार ने यह अध्ययन एक निजी कंसल्टेंट कंपनी से करवाया है। अगर बांटे गये बल्बों की तकनीकी जांच करवाई जाए तो प्रदेश में खराब होने वाले एलईडी बल्बों की संख्या अधिक निकलेगी।</p>
<p><strong>यूपी में खराब हो रहे सबसे अधिक बल्ब </strong><br />
<strong>राज्य विफलता दर</strong><br />
उत्तर प्रदेश 1.90<br />
मध्य प्रदेश 1.90<br />
जम्मू-कश्मीर 1.70<br />
बिहार 1.70<br />
झारखंड 1.70<br />
गुजरात 1.60<br />
छत्तीसगढ़ 1.40<br />
हरियाणा 1.20<br />
संघशासित क्षेत्र 1.00</p>
]]></content:encoded>
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		<title>उपभोक्ताओं को बढ़ती बिजली दरों से राहत दिला रहा सोलर पैनल</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 08:34:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>

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		<description><![CDATA[सोलर पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं को 40 प्रतिशत कम हुआ बिजली बिल लेसा में अब तक 1800 उपभोक्ताओं ने घरों में लगवाए सोलर पैनल सोलर पैनल लगे घरों में नेट मीटर के साथ लगाए गए हैं स्मार्ट मीटर नेट के साथ स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को मिल रहा एक्यूरेट रीडिंग का बिल लखनऊ। बिजली &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सोलर पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं को 40 प्रतिशत कम हुआ बिजली बिल </strong></p>
<p><strong>लेसा में अब तक 1800 उपभोक्ताओं ने घरों में लगवाए सोलर पैनल </strong></p>
<p><strong>सोलर पैनल लगे घरों में नेट मीटर के साथ लगाए गए हैं स्मार्ट मीटर </strong></p>
<p><strong>नेट के साथ स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को मिल रहा एक्यूरेट रीडिंग का बिल </strong></p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/solar-pannel.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-21096" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/solar-pannel.jpg" alt="solar pannel" width="1800" height="1800" /></a>लखनऊ।</strong> बिजली के बढ़ते रेट के चलते लेसा में अब उपभोक्ता सोलर एनर्जी की ओर रुख कर रहे हैं। सोलर पैनल के जरिए उपभोक्ताओं को खुद उपभोग की जाने वाली बिजली भी मिल रही है और उन्हें बढ़ी बिजली दर से राहत भी मिल रही है। बिजली बचत को लेकर उपभोक्ता सोलर पैनल की तरफ धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर लेसा प्रबंधन की ओर से सोलर पैनल उपभोक्ताओं को समय से बिजली बिल देने के लिए नेट मीटरिंग पर खासा फोकस किया गया है। खास बात यह है कि इस मीटरिंग से उपभोक्ताओं को बिलकुल सही बिजली बिल मिल रहा है। लेसा क्षेत्र की बात की जाए तो सिस और ट्रांसगोमती मिलाकर करीब 1800 घरों में सोलर पैनल लगवाए गए हैं। वहीं जिन घरों में सोलर पैनल लगे हैं वहां स्मार्ट मीटर के साथ-साथ नेट मीटर भी स्थापित किया गया है, ताकि एक्यूरेट रीडिंग का बिजली बिल उपभोक्ताओं को मिल सके। जिन घरों में सोलर पैनल लगे हैं, उन घरों के बिजली बिल में खासी कमी दर्ज की गयी है। अगर किसी उपभोक्ता का बिल महीने में 8 से 10 हजार रुपये आता था, तो सोलर पैनल लगने के बाद यह आंकड़ा 5 से 6 हजार रुपये तक पहुंच गया है। वहीं बात अगर मध्यांचल डिस्कॉम की बात की जाए तो करीब छह से सात हजार घरों में सोलर पैनल लगवाए गए हैं। खास बात यह है कि सोलर पैनल के लिए आवेदन खुद उपभोक्ताओं की ओर से किया गया है। साथ ही सोलर पैनल लगने से बिजली की अच्छी बचत भी हो रही है। लेसा प्रबंधन ने जिन उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर के साथ-साथ नेट मीटर लगवाए गए हैं, उन सभी का अध्ययन शुरू कर दिया गया है। जिससे यह पता लग सके कि उपभोक्ताओं की ओर से जो बिजली, विभाग को शिफ्ट की जा रही है उसका एक्यूरेट आंकड़ा कितना है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि एक घर में औसतन बिजली की कितनी बचत हो रही है। बिजली विभाग की ओर से उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 1912 हेल्पलाइन सेवा को ट्विटर से भी अटैच कर दिया गया है। हेल्पलाइन सेवा पर कोई भी व्यक्ति बिजली से जुड़ी कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है। दरअसल, अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें हेल्पलाइन सेवा 1912 पर उपभोक्ता को अपनी शिकायत का सही रिस्पांस नहीं मिल पाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। उपभोक्ताओं का रूझान सोलर पैनल की ओर तेजी से बढ़ा है। उपभोक्ता अधिकतर आवेदन दो किलोवॉट, तीन किलोवॉट और पांच किलोवॉट के लिए कर रहे हैं। हालांकि कॉमर्शियल सेक्टर में सोलर पैनल का अभी बहुत बड़ा रोल सामने नहीं आ रहा है।</p>
<p><strong>एक नजर</strong></p>
<p>1800 उपभोक्ताओं ने लेसा में घरों में लगवाए सोलर पैनल<br />
6 हजार के करीब उपभोक्ताओं ने सोलर पैनल लगवाए डिस्कॉम में<br />
2 किलोवॉट से लेकर 5 किलोवॉट के पैनल रहे लगवा<br />
40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गयी बिजली बिल में</p>
<p>बढ़े बिजली बिल को लेकर उपभोक्ता जागरुक हो रहे हैं, इसलिए घरों में सोलर पैनल लगवा रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं की समम से बिलिंग हो, इसके लिए स्मार्ट मीटर के साथ नेट मीटर लगवाया जा रहा है।</p>
<p><strong>संजय गोयल, प्रबंध निदेशक, मध्यांचल डिस्कॉम</strong></p>
]]></content:encoded>
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