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	<title>Business Link &#187; परिवाहन</title>
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	<lastBuildDate>Sat, 15 Apr 2023 02:02:46 +0000</lastBuildDate>
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		<title>मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी: प्रयागराज के लिए चार मेला स्पेशल ट्रेनें चलेंगी</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Jan 2022 07:51:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>
		<category><![CDATA[रेल सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्वोत्तर रेल]]></category>
		<category><![CDATA[प्रयागराज]]></category>
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		<category><![CDATA[बसंत पंचमी]]></category>
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		<description><![CDATA[मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर पूर्वोत्तर रेल प्रशासन की ओर से प्रयागराज के लिए अनारक्षित चार मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसमें ट्रेन संख्या 15107 बनारस-प्रयागराज रामबाग बनारस स्टेशन से 31 जनवरी के साथ चार, 15 और 28 फरवरी को रात 11.30 बजे संचालित होगी। ट्रेन संख्या 05109 बनारस-प्रयागराज रामबाग &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी पर पूर्वोत्तर रेल प्रशासन की ओर से प्रयागराज के लिए अनारक्षित चार मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इसमें ट्रेन संख्या 15107 बनारस-प्रयागराज रामबाग बनारस स्टेशन से 31 जनवरी के साथ चार, 15 और 28 फरवरी को रात 11.30 बजे संचालित होगी।</p>
<p>ट्रेन संख्या 05109 बनारस-प्रयागराज रामबाग एक, पांच, 16 फरवरी और एक मार्च को संचालित होगी। सुबह 5.30 बजे बनारस से चलकर सुबह नौ बजे प्रयागराज पहुंचेगी। ट्रेन संख्या 05117 भटनी-प्रयागराज 31 जनवरी को रात 10.35 बजे भटनी से चलकर अगले दिन तड़के में चार बजे प्रयागराज पहुंचेगी।</p>
<p>जबकि ट्रेन संख्या 05120 गोरखपुर-प्रयागराज 31 जनवरी की शाम चार बजे गोरखपुर से रवाना होकर अगले दिन देर रात दो बजे प्रयागराज पहुंचेगी।</p>
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		<title>लॉकडाउन के बाद पटरी पर आयी ड्राइविंग लाइसेंस की व्यवस्था</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 09:24:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>

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		<description><![CDATA[टीपीनगर आरटीओ कार्यालय में दिख रहा सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन का बेहतर समन्वय पंकज पांडेय लखनऊ। ट्रांसपोर्टनगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में लॉकडाउन के बाद शुरू हुई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब पटरी पर आ गई है। आरटीओ कार्यालय में थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन व सोशल डिस्टेंसिंग के बेहतर समन्वय से यह काम &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>टीपीनगर आरटीओ कार्यालय में दिख रहा सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन का बेहतर समन्वय</strong></p>
<p><strong>पंकज पांडेय </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> ट्रांसपोर्टनगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में लॉकडाउन के बाद शुरू हुई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब पटरी पर आ गई है।<br />
आरटीओ कार्यालय में थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन व सोशल डिस्टेंसिंग के बेहतर समन्वय से यह काम आसानी से हो रहा है। लॉकडाउन के बाद तीन चरणों में शुरू की गई डीएल बनवाने की व्यवस्था में सोशल डिस्टेंसिंग, आवेदकों को कोरोना से बचाव में हरसंभव मददगार साबित हो रही है। प्रत्येक शिफ्ट में 100 से अधिक डीएल आवेदकों की भीड़ के बावजूद संभागीय निरीक्षक की निगरानी में इस काम को बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। आरटीओ कार्यालय में रोजाना अच्छी खासी तादात में डीएल आवेदक पहुंच रहे हैं। ऐसे में अफसरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की सुचारू व्यवस्था बनाए रखना और आवेदकों को कोरोना से बचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। मगर, अफसरों की निगरानी में कोरोना से बचाव के मूलमंत्र सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन व थर्मल स्क्रीनिंग के बेहतर तालमेल से सुचारू व्यवस्था कायम हो सकी। बताते चलें कि कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन के बाद बीते 6 जून से आरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। इस दौरान 10 से 12, 12:30 से 2:30 और 3 से 5 बजे तक तीन शिफ्टों में आवेदकों को बुलाने की व्यवस्था बनाई गई। मौजूदा समय में प्रत्येक शिफ्ट में लर्निंग लाइसेंस के 20-20 आवेदक, रिन्यूवल के 22 और परमानेंट डीएल के 92 आवेदक कार्यालय बुलाए जा रहे हैं। ऐसे में रोजाना 60 लर्निंग लाइसेंस, 66 रिन्यूवल लाइसेंस और 276 परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>परमिट प्रकरण की जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में</strong></p>
<p>परमिट रिन्यूवल की लेटफीस में हुए घपले की जांच का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में है। परिवहन विभाग मुख्यालय में इस प्रकरण की गोपनीय शिकायत पर अपर परिवहन आयुक्त प्रशासन मुकेश चंद्र ने मामले से संबंधित पत्रावलियां तलब कीं। मगर, अपर परिवहन आयुक्त प्रशासन के इस पत्र को भी आरटीओ कार्यालय में दबाए रखा गया। हालांकि अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में कार्रवाई की बात की गई। मगर, फिर भी हाल फिलहाल मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रकरण में आरोपित सेवानिवृत्त कर्मचारी रोजाना दफ्तर पहुंचकर पत्रावलियों में छेड़छाड़ कर रहे हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो मामले का दूसरा आरोपी आरटीओ का स्टेनोग्राफर पूर्व की भांति अपना मूल कार्य छोड़कर चार अन्य पटलों पर कार्य कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि आरटीओ का कृपा पात्र होने के नाते एनओसी, अस्थाई पंजीयन, परमिट समेत अन्य मूल कार्य से अलग काम स्टेनोग्राफर कर रहा है। बताते चलें कि परिवहन आयुक्त कार्यालय में परमिट रिन्यूवल की लेटफीस का नौ लाख रुपया हड़पने की गोपनीय शिकायत की गई थी।</p>
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		<title>लॉकडाउन में घर आने के लिये योगी की उपयोगी व्यवस्था</title>
		<link>http://businesslinknews.com/useful-arrangement-of-yogi-to-come-home-in-lockdown/</link>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2020 21:38:15 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[एनआईसी]]></category>
		<category><![CDATA[जनसुनवाई पोर्टल]]></category>
		<category><![CDATA[पंजीकरण]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[रजिस्ट्रेशन पोर्टल]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश से अन्य राज्यों में जाने और अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश आने के लिये जनसुनवाई पोर्टल पर पंजीकरण शुरू मात्र पंजीकरण नहीं होगी यात्रा की अनुमति, सक्षम स्तर से अनुमति मिलने के बाद आवेदक को किया जायेगा सूचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एनआईसी ने जनसुनवाई पोर्टल पर शुरू की पंजीकरण की &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>उत्तर प्रदेश से अन्य राज्यों में जाने और अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश आने के लिये जनसुनवाई पोर्टल पर पंजीकरण शुरू</strong></li>
<li><strong>मात्र पंजीकरण नहीं होगी यात्रा की अनुमति, सक्षम स्तर से अनुमति मिलने के बाद आवेदक को किया जायेगा सूचित </strong></li>
<li><strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एनआईसी ने जनसुनवाई पोर्टल पर शुरू की पंजीकरण की उपयोगी व्यवस्था </strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राज्य के बाहर प्रवासित उत्तर प्रदेश के ऐसे निवासी जो लॉकडाउन के कारण अपने घर नहीं आ पा रहे हैं और उत्तर प्रदेश में अन्य राज्यों के ऐसे निवासी जो लॉकडाउन के कारण संबंधित राज्यों में नहीं जा पा रहे हैं, ऐसे लाखों लोगों की सुविधा के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक रजिस्ट्रेशन पोर्टल विकसित कराया है। उत्तर प्रदेश से अन्य राज्य जाने के लिये तथा अन्य राज्य से उत्तर प्रदेश आने के लिये उत्तर प्रदेश के जनसुनवाई पोर्टल <strong><a href="http://jansunwai.up.nic.in/" target="_blank">jansunwai.up.nic.in</a> </strong>के लिंक पर पंजीकरण की सुविधा पर उपलब्ध है। यह सुविधा जनसुनवाई पोर्टल के एण्ड्रॉइड एप पर भी उपलब्ध कराई गई है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/jansunwai.jpg"><img class="  wp-image-21281 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/jansunwai.jpg" alt="jansunwai" width="507" height="269" /></a>जनसुनवाई पोर्टल पर कराया गया पंजीकरण यात्रा की अनुमति नहीं होगा। सक्षम स्तर से अनुमति मिलने पर आवेदक को सूचित किया जायेगा। पंजीकरण प्रक्रिया में गलत जानकारी देने पर महामारी अधिनियम या आपदा प्रबन्धन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जायेगी। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार एनआईसी ने उत्तर प्रदेश के जनसुनवाई पोर्टल <strong><a href="http://jansunwai.up.nic.in/" target="_blank">jansunwai.up.nic.in</a> </strong>पर पंजीकरण की यह सुविधा शुरू की है। इनके माध्यम से प्रवासी व्यक्ति अपना पंजीकरण कर सकते हैं। आवेदकों को इसका विशेष ख्याल रखना है कि जनसुनवाई पोर्टल पर किए गए पंजीकरण को यात्रा की अनुमति न समझे। पंजीकरण के पश्चात सक्षम स्तर से अनुमति मिलने पर आवेदक को सूचित किया जायेगा।</p>
<p>अन्य प्रदेशों से उत्तर प्रदेश में आने वाले आवेदक पंजीकरण के लिए अपना नाम, आयु, यात्री की श्रेणी, लिंग, मोबाइल नम्बर, ई-मेल, पहचान पत्र एवं संख्या, परिवार के साथ यात्रा करने के बारे में, यात्रा का तरीका, आवेदक अथवा परिवार के किसी अन्य सदस्य को सर्दी-खांसी या बुखार या सम्बन्धित लक्षण, आवेदक-परिवार हाल के दिनों में 14 दिवस के लिये क्वारण्टीन किया गया अथवा नहीं, यदि हां तो कब से कब तक, आवेदक का वर्तमान पता, उत्तर प्रदेश में जिस पते पर आवेदक जाना चाहता है, उक्त पते के सम्पर्क व्यक्ति का नाम व उसका मोबाइल नम्बर उपलब्ध कराना होगा। साथ ही, इस विवरण के सही होने के सम्बन्ध में घोषणा भी करनी होगी। आवेदक को यह भी घोषणा करनी होगी कि जब आवेदक उत्तर प्रदेश पहुंचेगा तो उसे आवश्यक क्वारण्टीन में रहना पड़ सकता है। यह भी घोषित करना होगा कि आवेदक ने अपने शहर, जनपद के किसी कन्टेन्मेण्ट जोन में पिछले दो माह से निवास नहीं किया है। यदि जानकारी गलत पायी जाती है, तो महामारी अधिनियम या आपदा प्रबन्धन अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p>वहीं उत्तर प्रदेश से अन्य प्रदेश में जाने के आवेदन पंजीकरण में आवेदक को नाम, आयु, लिंग, मोबाइल नम्बर, ई-मेलए यात्री की श्रेणी, पहचान पत्र एवं संख्या, क्या आवेदक अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहा है, परिवार के सदस्यों की संख्या, आवेदक के साथ उनका सम्बन्ध, यात्रा का माध्यम, वाहन का प्रकार, वाहन संख्या, क्या आवेदक, परिवार के किसी अन्य सदस्य को सर्दी, खांसी या बुखार या सम्बन्धित लक्षण हैं या आवेदक, परिवार हाल के दिनों में 14 दिवस हेतु क्वारण्टीन किया गया है, यदि हां तो कब से कब तक, उत्तर प्रदेश में वर्तमान पते का विवरण, जिस पते पर आवेदक जाना चाहते हैं, इस पते के सम्पर्क व्यक्ति का नाम व मोबाइल नम्बर उपलब्ध कराना होगा। आवेदक को यह घोषणा भी करनी होगी कि उसे यह जानकारी है कि जब वह अन्य प्रदेश पहुंचेगा तो उसे आवश्यक क्वारण्टीन में रहना पड़ सकता है। यह भी घोषित करना होगा कि आवेदक ने अपने शहर-जनपद के किसी कन्टेन्मेण्ट जोन में पिछले दो माह से निवास नहीं किया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जानकारी गलत पायी जाती है, तो महामारी अधिनियम या आपदा प्रबन्धन अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की जा सकती है।</p>
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		<title>इलेक्ट्रिक बसें करेंगी प्रदूषण पर वार</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 08:47:52 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>

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		<description><![CDATA[&#160;  नगर विकास विभाग ने केंद्र को भेजा है 11 प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का प्रस्ताव लखनऊ। शहरों में फैले प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के अति प्रदूषित 11 शहरों में इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। अति प्रदूषित शहरों &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong> नगर विकास विभाग ने केंद्र को भेजा है 11 प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का प्रस्ताव</strong><br />
<strong>लखनऊ।</strong> शहरों में फैले प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के अति प्रदूषित 11 शहरों में इले<a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/electric-bus.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-20974" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/electric-bus.jpg" alt="electric bus" width="1600" height="1200" /></a>क्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। अति प्रदूषित शहरों में प्रदूषण किस प्रकार कम हो, इसके लिए प्रदेश सरकार भी चिंतित है। इसको लेकर नगर विकास विभाग ने प्रदेश के 11 प्रमुख शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। केंद्र सरकार इन शहरों में से जिनका चयन करेगी, उनको इलेक्ट्रिक बसों की सौगात देगी। खास बात यह है कि केंद्र सरकार फेम-2 योजना के तहत प्रत्येक इलेक्ट्रिक सिटी बस पर 45 लाख की सब्सिडी देगी। नगर विकास विभाग ने प्रदेश के नौ शहरों लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ व शाहजहांपुर में 630 इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए प्रक्रिया शुरू करायी थी। इसके लिए टेंडर भी हुआ, लेकिन अधिक कीमतों के चलते बाद में टेंडर निरस्त कर दिया गया। बीते एक अप्रैल से भारत सरकार ने फेम-2 (फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) योजना लागू की। इस योजना के तहत सौ करोड रुपये की राशि निर्धारित की गयी है, जिसे विभिन्न मोटर वाहन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक कार, हाइब्रिड कार, इलेक्ट्रिक बस, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और ई-रिक्शा शामिल हैं। इनके लिए अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विकास किया जाएगा। देशभर में 2,700 इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन लगाने का प्रावधान है। केंद्र सरकार के फेम-2 योजना के लागू होने के बाद नगर विकास विभाग ने एक बार फिर से नये सिरे से प्रदेश में जनता को बेहतर शहरी परिवहन सुविधा मुहैया कराने की योजना बनायी है। इसके तहत पांच और शहरों में प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसें चलाने का निर्णय लिया। पहले नौ शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बनी थी। बाद में मुरादाबाद, अलीगढ़, बरेली, झांसी व सहारनपुर को इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए शामिल किया गया। नगर विकास विभाग ने सभी 14 शहरों में 100-100 इलेक्ट्रिक बसों के चलाने का प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय को भेजा है।</p>
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		<title>आरटीओ की छूट, वाहन डीलरों ने मचायी लूट</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 08:30:20 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>

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		<description><![CDATA[खरीदारों से पंजीकरण शुल्क के नाम पर मनमाना पैसा वसूल रहे वाहन डीलर खरीदारों से चार पहिया के लिए 1500 जबकि दो पहिया के लिए 600-1000 रुपये वसूला जा रहा अतिरिक्त शुल्क वाहन डीलरों के एजेंटों की सुविधा के लिए की गयी व्यवस्था को बना लिया गया कमाई का जरिया वाहन डीलरों के जरिए बैक &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>खरीदारों से पंजीकरण शुल्क के नाम पर मनमाना पैसा वसूल रहे वाहन डीलर </strong></p>
<p><strong>खरीदारों से चार पहिया के लिए 1500 जबकि दो पहिया के लिए 600-1000 रुपये वसूला जा रहा अतिरिक्त शुल्क </strong></p>
<p><strong>वाहन डीलरों के एजेंटों की सुविधा के लिए की गयी व्यवस्था को बना लिया गया कमाई का जरिया </strong></p>
<p><strong>वाहन डीलरों के जरिए बैक डोर से हो रही कमाई पर मौन धारण किए रहता है आरटीओ कार्यालय </strong></p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Rto-1.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-16846" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Rto-1.jpg" alt="Rto (1)" width="3000" height="2000" /></a>वाहन पंजीकरण के लिए आरटीओ कार्यालय में होने वाले खर्च को राउंड फीगर में दिखाकर खरीदारों को किया जाता है गुमराह </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहनों के पंजीकरण के नाम पर वाहन डीलरों ने लूट मचायी हुई है। डीलर, वाहन खरीदारों से आरटीओ में पंजीकरण कार्य के बदले लिए जाने वाले शुल्क से कई गुना अधिक की वसूली कर रहे हैं। आरटीओ व वाहन डीलरों की खरीदारों से वसूली का यह धंधा सालों से चल रहा है। वाहन डीलर संभागीय परिवहन कार्यालय की सरपरस्ती में इस खेल को बखूबी अंजाम दे रहे हैं। जिसके चलते आरटीओ कार्यालय और वाहन डीलरों की मिलीभगत से की जा रही वसूली का शिकार वाहन खरीदार बन रहे हैं। वाहन खरीदारों से पंजीकरण शुल्क के नाम पर कई गुना अधिक वसूली के बाद भी किसी डीलर के खिलाफ कार्रवाई न होना इसका बड़ा उदाहरण है। दरअसल, वाहनों के पंजीकरण कार्य के बदले खरीदारों से लिया जा रहा शुल्क संभागीय परिवहन कार्यालय के लिए मोटी कमाई का जरिया है। इसलिए सब कुछ जानते हुए भी संभागीय परिवहन कार्यालय अनजान बना हुआ है। सूत्रों की मानें तो इसकी खास वजह यह भी है कि वाहन डीलरों द्वारा खरीदारों से पंजीकरण के नाम पर लिए जा रहे ज्यादा पैसे का अधिकांश हिस्सा कार्यालय को भी जाता है। ऐसे में वाहन डीलरों द्वारा खरीदारों से की जा रही वसूली में बराबर का हिस्सेदार आरटीओ कार्यालय भी है। इसका नतीजा है कि मनमानी के बाद भी एक भी वाहन डीलर पर कार्रवाई का जज्बा संभागीय परिवहन कार्यालय का कोई भी अधिकारी नहीं दिखा पाया। जानकारों की मानें तो आरटीओ में वाहनों के पंजीकरण के नाम पर डीलरों को खरीदारों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लिया जाना निर्धारित नहीं किया गया है। हालांकि 1996-97 में परिवहन विभाग मुख्यालय की ओर से एक सर्कुलर जारी कर दो पहिया वाहन के लिए 50 रुपये व चार पहिया वाहन के लिए 200 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिए जाना सुनिश्चित किया गया था। वाहनों के पंजीकरण के संबंध में आरटीओ कार्यालय जाने वाले डीलरों के एजेंट की सुविधा के लिए शुरू की गयी अतिरिक्त शुल्क की व्यवस्था को ही कमाई का जरिया बना लिया गया। आलम यह है कि आरटीओ कार्यालय की मिलीभगत से वाहन खरीदारों से डीलर मनमाना पैसा ले रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि मौजूदा समय में डीलर जैसा वाहन खरीदार उससे वैसे ही अतिरिक्त शुल्क की वसूली कर ले रहे हैं। चार पहिया के लिए 1500-1800 रुपए और दो पहिया वाहन के लिए 600 से 1000 रुपए लिए जा रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि वाहन खरीदार को डीलर आरटीओ में होने वाले खर्च का ब्यौरा राउंड फीगर में बताते हैं। डीलर द्वारा वाहन खरीदार को गाड़ी के वास्तविक मूल्य व टैक्स के ब्यौरे वाली जो रसीद दी जाती है उसमें वाहन पंजीकरण के लिए आरटीओ में होने वाले खर्च को भी दर्ज किया जाता है। लेकिन यह खर्च डीलर रोड टैक्स, फार्म सहित अलग-अलग न लिखकर राउंड फीगर में रसीद पर दर्ज कर देते हैं। जिसके चलते वाहन खरीदारों को भी पता नहीं चल पाता कि आखिरकार डीलर हमसे अतिरिक्त शुल्क के रूप में कितना पैसा ले रहा है।</p>
<p><strong>जानकर भी बने अनजान</strong></p>
<p>आरटीओ कार्यालय की मिलीभगत से वाहन खरीदारों से डीलरों द्वारा वसूली किए जाने का सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। लेकिन वाहन खरीदारों द्वारा शिकायत न करने की आड़ में जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। आरटीओ कार्यालय में दलालों पर अंकुश और दलाली पर रोक लगाने का दावा सभी करते हैं, लेकिन बैक डोर से की जा रही इस दलाली पर अंकुश लगाने का नाम कोई नहीं लेता है। आरटीओ कार्यालय की मोटी कमाई का जरिया बने वाहन डीलरों को मनमानी की खुली छूट दी गयी है। वाहन डीलरों की इस मनमानी पर परिवहन मंत्री, प्रमुख सचिव से लेकर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सख्त कदम उठाने से परहेज करता है। जिसका नतीजा वाहन खरीदारों से मनमानी वसूली के रूप में सामने आ रहा है।</p>
<p>1996-97 में परिवहन विभाग मुख्यालय की ओर से वाहन डीलरों के लिए सर्कुलर जारी कर गाडिय़ों के पंजीकरण के लिए 200 रुपये निर्धारित किया गया था। उसी सर्कुलर के आधार पर काम चल रहा है। डीलरों द्वारा ज्यादा पैसा लिए जाने की शिकायत मिलती है तो उनका पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। वाहन खरीदने वाले अवैध वसूली करने की एफआईआर करावें तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि डीलर वाहन खरीदारों को दी जाने वाली रसीद पर आरटीओ में होने वाले खर्च को राउंड फीगर में लिखते हैं, इसलिए मैचिंग नहीं हो पाती है।</p>
<p><strong>संजय तिवारी</strong><br />
<strong>एआरटीओ, प्रशासन, लखनऊ आरटीओ </strong></p>
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		<title>पता गलत या सही, आरटीओ में होगी पड़ताल</title>
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		<pubDate>Mon, 12 Aug 2019 12:00:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। पता गलत होने अथवा अन्य किन्हीं कारणों से प्रदेश भर में बड़ी संख्या में ड्राइविंग लाइसेंस आवेदकों तक नहीं पहुंच रहे हैं। आवेदकों तक नहीं पहुंचने वाले डीएल वापस परिवहन विभाग मुख्यालय पहुंच रहे हैं। डीएल वितरण की केंद्रीयकृत व्यवस्था के बाद भी आ रही अड़चन को लेकर परिवहन विभाग ने योजना तैयार की &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> पता गलत होने अथवा अन्य किन्हीं कारणों से प्रदेश भर में बड़ी संख्या में ड्राइविंग लाइसेंस आवेदकों तक नहीं पहुंच रहे हैं। आवेदकों तक नहीं पहुंचने वाले डीएल वापस परिवहन विभाग मुख्यालय पहुंच रहे हैं। डीएल वितरण की केंद्रीयकृत व्यवस्था के बाद भी आ रही अड़चन को लेकर परिवहन विभाग ने योजना तैयार की है। इसके तहत जिन आवेदकों के डीएल नहीं पहुंचे हैं उनके पते की जांच पड़ताल संबंधित आरटीओ कार्यालय में होगी। ऐसे आवेदक जिनका ड्राइविंग लाइसेंस उन तक नहीं पहुंचा है वे आरटीओ कार्यालय जाकर अपने पते को वेरिफाई करा सकते हैं। लखनऊ आरटीओ कार्यालय में एआरटीओ आवेदकों के पते को वेरिफाई कर रहे हैं। हालांकि परिवहन विभाग की ओर से वापस लौटे डीएल की लिस्ट आरटीओ कार्यालय नहीं भेजी है। इसके बाद भी आवेदकों की सुविधा के लिए यह कार्य किया जा रहा है। वहीं जिन आवेदकों के पते गलत हैं उन्हें निर्धारित फीस जमा कर अपने पते को बदलवाने का निर्देश दिया गया है। लखनऊ आरटीओ की बात की जाए तो यहां के करीब 1100 डीएल आवेदकों तक नहीं पहुंचकर वापस लौट आये हैं। वहीं पूरे प्रदेश में वापस लौटे डीएल की संख्या 10 हजार के पार है। केंद्रीयकृत व्यवस्था के बाद भी आ रही यह समस्या विभाग के लिए सिरदर्द बनी हुई है।</p>
<p><strong>फिर भी आरटीओ से नहीं मिलेगा डीएल</strong> <a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Rto-1.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-16846" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Rto-1.jpg" alt="Rto (1)" width="3000" height="2000" /></a></p>
<p>आवेदकों के पते का वेरिफिकेशन भले ही आरटीओ कार्यालय में होगा, लेकिन उन्हें डीएल परिवहन विभाग मुख्यालय से ही डाक द्वारा प्राप्त होगा। परिवहन विभाग मुख्यालय ने पते का वेरिफिकेशन कराने का निर्देश दिया है। इसके तहत आवेदक डीएल न पहुंचने पर आरटीओ कार्यालय पहुंचकर अपने पते का वेरिफिकेशन कराए और पता गलत होने पर निर्धारित फीस जमा कर पता बदलवाएं। इन सबके बाद भी आवेदकों को आरटीओ कार्यालय से डीएल नहीं मिलेगा। सही पते की जानकारी होने के वापस ऐसे आवेदकों की लिस्ट वापस परिवहन विभाग मुख्यालय जाएगी और उनका डीएल मुख्यालय से दोबारा डाक विभाग से भेजा जाएगा। अब सवाल यह है कि पते का वेरिफिकेशन अगर आरटीओ कार्यालय में किया जा रहा है तो फिर आवेदकों को डीएल के लिए फिर क्यूं इंतजार कराया जा रहा है? आवेदकों को आरटीओ कार्यालय से ही डीएल क्यों नहीं दिया जा रहा।</p>
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		<title>ड्राइवर ही नहीं तो कैसे संचालित हो इंटरसेप्टर</title>
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		<pubDate>Mon, 12 Aug 2019 11:57:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>

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		<description><![CDATA[परिवहन विभाग के 6 जोनों में दी गयी है एक-एक इंटरसेप्टर ओवरस्पीडिंग, ड्रंकन ड्राइविंग करने वालों की जाती है जांच लखनऊ मंडल में निजी चालक का इंतजाम कर इंटरसेप्टर से होती जांच लखनऊ। सरकारी विभाग व्यवस्था सुधारने के दावे तो तमाम करते हैं, लेकिन जब बात संसाधनों की आती है तो विभागों के दावे धरे &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>परिवहन विभाग के 6 जोनों में दी गयी है एक-एक इंटरसेप्टर </strong></p>
<p><strong>ओवरस्पीडिंग, ड्रंकन ड्राइविंग करने वालों की जाती है जांच </strong></p>
<p><strong>लखनऊ मंडल में निजी चालक का इंतजाम कर इंटरसेप्टर से होती जांच </strong></p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/kbn-10-nesw-CHEKING.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-21064" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/08/kbn-10-nesw-CHEKING.jpg" alt="kbn-10-nesw-CHEKING" width="990" height="460" /></a>लखनऊ।</strong> सरकारी विभाग व्यवस्था सुधारने के दावे तो तमाम करते हैं, लेकिन जब बात संसाधनों की आती है तो विभागों के दावे धरे के धरे रह जाते हैं। परिवहन विभाग भी इससे अछूता नहीं है। विभाग में ओवरस्पीडिंग, नशे की हालत में वाहनों का संचालन करने वालों की जांच पड़ताल के लिए रखे गये इंटरसेप्टर को चलाने के लिए ड्राइवर ही नहीं है। जिस अधिकारी को अपने जनपद में इंटरसेप्टर से जांच करनी है वह पहले निजी चालक का इंतजाम करते हैं और फिर इंटरसेप्टर ले जाते हैं। ऐसी व्यवस्था में इंटरसेप्टर का कितना उपयोग किया जा रहा होगा, इसकी हकीकत खुद समझी जा सकती है। उल्लेखनीय है कि परिवहन विभाग के प्रदेश में कुल 6 जोन हैं। इन सभी जोनों में ओवरस्पीडिंग, ड्रंकन ड्राइविंग की जांच के लिए एक-एक इंटरसेप्टर दिये गये हैं। लखनऊ जोन में 3 मंडल हैं जहां पर बिना चालक के एक इंटरसेप्टर से काम चलाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो लखनऊ मंडल में ही इंटरसेप्टर के जरिए जांच की जाती है। वह भी तब जब अधिकारी खुद निजी चालक का इंतजाम कर इंटरसेप्टर ले जाते हैं। सूत्रों की मानें तो इंटरसेप्टर लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरुक करने के लिए है। लेकिन इसका उपयोग सुरक्षित वाहन चलाने के लिए लोगों को जागरुक करने की बजाय चालान जैसे दूसरे कामों में किया जा रहा है।</p>
<p><strong>खर्च हो रहा एक लाख रुपये</strong></p>
<p>चालक के अभाव में इंटरसेप्टर का उपयोग आरटीओ चेकिंग दल नियमित तरीके से नहीं कर पा रहा है। वहीं इंटरसेप्टर में निजी कंपनी के लगे उपकरणों का खर्च परिवहन विभाग को हर महीने देना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक इंटरसेप्टर में लगे उपकरण का हर महीने एक लाख रुपये किराया कंपनी को जाता है। विभाग चालक का इंतजाम नहीं कर रहा है और निजी कंपनी को किराये के रूप में एक लाख रुपये का भुगतान कर रहा है।</p>
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		<title>बस दुर्घटना की पलक झपकते ही मिलेगी सूचना, रोडवेज बसों में लगेंगे पैनिक बटन</title>
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		<pubDate>Mon, 12 Aug 2019 11:48:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>

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		<description><![CDATA[परिवहन निगम की 12500 बसों में पैनिक बटन लगाने की तैयारी पैनिक बटन व जीपीएस ट्रैकर लगाने में खर्च होगा 15 करोड़ रुपये का बजट परिवहन निगम प्रस्ताव भेजकर केंद्र सरकार से करेगा 9.20 करोड़ रुपये के बजट की मांग डायल 100 से जुड़ेगें रोडवेज बसों में लगने वाले पैनिक बटन लखनऊ। महिला यात्रियों के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>परिवहन निगम की 12500 बसों में पैनिक बटन लगाने की तैयारी </strong></p>
<p><strong>पैनिक बटन व जीपीएस ट्रैकर लगाने में खर्च होगा 15 करोड़ रुपये का बजट </strong></p>
<p><strong>परिवहन निगम प्रस्ताव भेजकर केंद्र सरकार से करेगा 9.20 करोड़ रुपये के बजट की मांग </strong></p>
<p><strong>डायल 100 से जुड़ेगें रोडवेज बसों में लगने वाले पैनिक बटन </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> महिला यात्रियों के साथ सभी मुसाफिरों की सुरक्षा के लिए परिवहन निगम सभी बसों में पैनिक बटन लगाएगा। इसके लिए परिवहन निगम प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार को भेजेगा। हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। सुरक्षित और आरामदायक सफर के लिए रोडवेज की 12500 बसों में पैनिक बटन लगाए जाएंगे। साथ ही सभी बसों में जीपीएस ट्रैकर भी लगेंगे। केंद्र सरकार की निर्भया योजना के तहत यह कवायद की जाएगी। पैनिक बटन और जीपीएस ट्रैकर लगाने में करीब 15 करोड़ का बजट खर्च होगा। इसके लिए जल्द ही केंद्र सरकार से 9.20 करोड़ रुपए के बजट की मांग की जाएगी। परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर के अनुसार पैनिक बटन को डायल 100 से जोड़ा जाएगा, ताकि यात्रियों को समय से सहायता मिल सके। पैनिक बटन से जहां यात्रियों को सहूलियत मिलेगी तो वहीं दुर्घटना की सूचना भी समय से मिल सकेगी। दुर्घटना की सूचना डायल 100 के माध्यम से यूपीएसआरटीसी के कंट्रोल रूम को पहुंच जाएगी। सूचना मिलते ही परिवहन निगम की विभिन्न मार्गों पर तैनात इंटरसेप्टर तत्काल मौके पर पहुंचेगी और सारी सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी बसों में पैनिक बटन के साथ जीपीएस ट्रैकर इंस्टाल किए जाने का काम साल के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पैनिक बटन और जीपीएस के चलते बसों से होने वाली दुर्घटना या बस में आग लगने की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को मिल जाएगी। इससे चालक पर भी नजर रखी जा सकेगी कि वे किस रूट से आ जा रहे हैं और सफर के दौरान उन्हें कितना समय लग रहा है।</p>
<p><strong>बिना वजह पैनिक बटन दबाने पर 250 रुपए जुर्माना</strong></p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/bus-copy.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-18055" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/bus-copy.jpg" alt="bus copy" width="1417" height="968" /></a>उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 50 महिला स्पेशल पिंक बसों में पैनिक बटन लगाया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठïान में आयोजित समारोह में इन 50 पिंक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। परिवहन निगम के मुख्य प्रधान प्रबंधक प्राविधिक जयदीप वर्मा ने बताया कि पिंक बसों में पैनिक बटन लगाने से महिलाओं की यात्रा और सुरक्षित होगी। पिंक बसों में लगा पैनिक बटन डायल-100 से जुड़ा हुआ है। पैनिक बटन दबते ही पुलिस को सूचना मिलती है और तत्काल पुलिस पिंक बस के पास पहुंच जाती है। उन्होंने बताया कि पिंक बसों में लगे पैनिक बटन को लोग बिना कारण दबा देते थे। इसके बाद मौके पर पुलिस पहुंच जाती थी। इससे परेशान होकर अब परिवहन निगम ने बेवजह पैनिक बटन दबाने पर 250 रुपये का जुर्माना तय कर दिया है।</p>
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		<title>ऐतिहासिक स्थलों का सफर अब होगा आसान</title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jul 2019 12:45:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>

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		<description><![CDATA[राजधानी के पर्यटन स्थलों के चलेंगी 14 इलेक्ट्रिक बसें कोनेश्वर मंदिर, घंटाघर, रूमी गेट, छोटा व बड़ा इमामबाड़ा, रेजीडेंसी, मोती महल के साथ कई पार्कों तक की पर्यटक कर सकेंगे सैर अधिकतम 30 के किराये में मिलेगी वातानुकूलित बसों में सफर की सुविधा लखनऊ। राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों का सफर अब आसान होगा। पर्यटक शहर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>राजधानी के पर्यटन स्थलों के चलेंगी 14 इलेक्ट्रिक बसें </strong></p>
<p><strong>कोनेश्वर मंदिर, घंटाघर, रूमी गेट, छोटा व बड़ा इमामबाड़ा, रेजीडेंसी, मोती महल के साथ कई पार्कों तक की पर्यटक कर सकेंगे सैर </strong></p>
<p><strong>अधिकतम 30 के किराये में मिलेगी वातानुकूलित बसों में सफर की सुविधा </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों का सफर अब आसान होगा। पर्यटक शहर के पर्यटन स्थलों पर आसानी से पहुंच सकेंगे। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड ने शहर के पर्यटन स्थलों तक इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की तैयारी की है। ऐतिहासिक धरोहरों के रूट पर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पर्यटकों को साधनों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इस रूट पर बस का संचालन होने से लखनऊ दर्शन के लिए आने वाले पर्यटकों को खासा लाभ होगा। 18.6 किमी के इस रूट पर अधिकतम किराया 30 रुपए निर्धारित किया गया है। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड राजधानी में 40 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करेगा। मौजूदा समय में मार्ग संख्या ई-01 दुबग्गा से ग्रीनवुड अपार्टमेंट तक 14 बसों का संचालन किया जा रहा है। एक जुलाई से पर्यटकों के लिए 14 बसों का संचालन मार्ग संख्या ई-03 दुबग्गा से जनेश्वर मिश्र पार्क तक किया जाएगा। लखनऊ दर्शन के नाम से संचालित इन बसों का संचालन हर आधे घंटे पर किया जाएगा। इस मार्ग की कुल दूरी 18.6 किमी है। इस रूट पर इलेक्ट्रिक वातानुकूलित सिटी बस में सफर करने पर यात्रियों को न्यूनतम किराया दस रूपये और अधिकतम किराया 30 रूपये देना होगा।</p>
<p><strong>इन स्थलों की कर सकेंगे सैर</strong></p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/electric-bus.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-20974" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/electric-bus.jpg" alt="electric bus" width="1600" height="1200" /></a>ई-03 मार्ग पर लखनऊ की धरोहर कोनेश्वर मंदिर, घंटाघर, रूमी गेट, छोटा इमामबाड़ा, बड़ा इमामबाड़ा, रेजीडेंसी, मोती महल के साथ ही सहारागंज, अम्बेडकर नगर पार्क, सहारा इंडिया परिवार गेट और जनेश्वर मिश्र पार्क तक जाने की सुविधा यात्रियों को मिलेगी। सिटी बस प्रबंधन के अधिकारियों के मुताबिक आगामी दिनों में इन बसों के मिलने वाले प्वाइंट भी जारी कर दिए जाएंगे।</p>
<p><strong>कहां से कहां तक दूरी किमी में किराया रूपए में</strong></p>
<p>दुबग्गा-बालागंज 3.5 15<br />
दुबग्गा- घंटाघर 6.4 20<br />
दुबग्गा &#8211; बड़ा इमामबाड़ा 7.0 20<br />
दुबग्गा &#8211; रेजीडेंसी 8.8 20<br />
दुबग्गा &#8211; सहारागंज 11 20<br />
दुबग्गा- दैनिक जागरण चौराहा 12.1 25 रुपए<br />
दुबग्गा -अम्बेडकर पार्क 15.1 30<br />
दुबग्गा- जनेश्वर मिश्र पार्क 18.6 30<br />
घंटाघर- सहारागंज 4.6 15<br />
घंटाघर &#8211; जनेश्वर मिश्र पार्क 12.2 25<br />
बड़ा इमामबाड़ा- जनेश्वर मिश्र पार्क 11.6 25<br />
सहारागंज- जनेश्वर मिश्र पार्क 7.6 20</p>
<p>एक जुलाई से लखनऊ दर्शन बस सेवा का संचालन शुरू हो जाएगा। इलेक्ट्रिक बसों का किराया भी कम किया जा चुका है। ऐसे में पर्यटकों के साथ ही राजधानीवासियों को भी बेहतर सफर की सुविधा मिल सकेगी। लखनऊ दर्शन के लिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होने के साथ 28 इलेक्ट्रिक बसें ऑन रोड हो जाएंगी।</p>
<p><strong>सतीश पाल, एआरएम, लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड</strong></p>
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		<title>वाहनों की चेकिंग के दौरान डिजिटल पेपर माने जाएंगे वैध</title>
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		<pubDate>Tue, 02 Jul 2019 12:42:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>

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		<description><![CDATA[जांच के समय जबरन कागजात जब्त करने की शिकायत के बाद परिवहन विभाग ने शुरू की नई व्यवस्था डिजी लॉकर एप में वाहनों को कागजात रखने की दी गयी मंजूरी, संबंधित विभागों को जारी किया निर्देश लखनऊ। वाहनों की चेकिंग के अभियान के दौरान वाहन स्वामी के अपने मोबाइल पर सेव डिजिटल पेपर को दिखाने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जांच के समय जबरन कागजात जब्त करने की शिकायत के बाद परिवहन विभाग ने शुरू की नई व्यवस्था </strong></p>
<p><strong>डिजी लॉकर एप में वाहनों को कागजात रखने की दी गयी मंजूरी, संबंधित विभागों को जारी किया निर्देश </strong></p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Rto-1.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-16846" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Rto-1.jpg" alt="Rto (1)" width="3000" height="2000" /></a>लखनऊ।</strong> वाहनों की चेकिंग के अभियान के दौरान वाहन स्वामी के अपने मोबाइल पर सेव डिजिटल पेपर को दिखाने पर परिवहन विभाग और पुलिस अधिकारी मना नहीं कर पाएंगे। परिवहन विभाग ने इस संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। दरअसल, परिवहन विभाग को यह निर्देश इसलिए भी जारी करना पड़ा, क्योंकि ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी डिजिटल पेपर को मान्यता नहीं दे रहे हैं और उन्हें वैध नहीं मानते। इसको लेकर जहां प्रमुख सचिव परिवहन की तरफ से पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजा गया है तो वहीं परिवहन विभाग की ओर से परिवहन अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए हैं कि वह मोबाइल पर इलेक्ट्रॉनिक्स ई-पेपर दिखाए जाने पर उन्हें वैध मानें। वाहन चलाते समय अब उनके कागजात साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं है। वाहन स्वामी इन्हें डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रख सकेंगे और वाहनों की जांच के दौरान लॉकर में रखे कागजात चेकिंग टीम को दिखा सकेंगे। वाहनों की जांच के दौरान जबरन कागजात जब्त करने की शिकायत के बाद परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था के तहत डिजी लॉकर एप में वाहनों के कागजात रखने की मंजूरी दे दी है। दो व चार पहिया वाहनों से जुड़े कागजात ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, इन्श्योरेंश, प्रदूषण प्रमाण पत्र व सीएनजी लीकेज प्रमाण पत्र आदि को अब डीजी लॉकर में रखने की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए वाहन मालिक को अपने मोबाइल पर डीजी लॉकर एप डाउन लोड करना होगा, जहां सभी कागजातों की फोटो खींचकर अथवा कागजातों के यूनिक आईडी नंबर दर्ज करके प्रपत्रों का ब्यौरा डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रख सकते हैं। इस संबंध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। इसके बाद सड़क सुरक्षा सेल ने यह आदेश प्रदेश भर के आरटीओ, पुलिस व यातायात विभाग के अधिकारियों को दे दिया है। इस संबंध में अपर परिवहन आयुक्त रोड सेफ्टी गंगाफल ने बताया कि अब जांच के दौरान वाहनों के प्रपत्र ऑनलाइन चेक किए जाएंगे। वाहन मालिक डीजी लॉकर पर अपने प्रपत्र का ब्यौरा रख सकेंगे। चेकिंग अधिकारी एम परिवहन एप डाउनलोड कर डीएल समेत वाहनों के तमाम प्रपत्रों की जांच ऑनलाइन करेंगे।</p>
<p>वाहन स्वामी गाड़ी से संबंधित प्रमाण पत्र, पंजीयन प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और सीएनजी लीकेज प्रमाणपत्र आदि दस्तावेजों को इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड में रख सकता है। डीजी लॉकर में सुरक्षित रखकर इन कागजों को चेकिंग अभियान के दौरान संबंधित अधिकारी को दिखाया जा सकता है, अब इसे मान्यता दे दी गई है।</p>
<p><strong>गंगाफल, अपर परिवहन आयुक्त, सड़क सुरक्षा</strong></p>
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