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	<title>Business Link &#187; बाजारों से</title>
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		<title>कोलकाता से आए पीओपी के सांचे में ढ़लेंगी गौरी-गणेश की मूर्तियां</title>
		<link>http://businesslinknews.com/sculptures-of-gauri-ganesh-will-be-molded-in-the-mold-of-pops-from-kolkata/</link>
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		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 09:13:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[अबकी दीपावली में चीन से आने वाली मूतिर्यों को मात देने की तैयारी पहले चरण में लखनऊ के 25 मूर्तिकारों को दिए गये सांचे वाराणसी और लखनऊ में भी 50-50 सांचे दिए जाएंगे लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्म निर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक और &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong><em>अबकी दीपावली में चीन से आने वाली मूतिर्यों को मात देने की तैयारी</em></strong></p>
<p><strong><em>पहले चरण में लखनऊ के 25 मूर्तिकारों को दिए गये सांचे</em></strong></p>
<p><strong><em>वाराणसी और लखनऊ में भी 50-50 सांचे दिए जाएंगे</em></strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्म निर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक और नई पहल की है। मुख्यमंत्री की पहल पर गठित माटी कला बोर्ड ने इस दीपावली पर आत्मनिर्भर भारत अभियान के जरिए स्वदेशी को लोकप्रिय बनाने और चीन से खास मुकाबले की तैयारी की है ।</p>
<p><strong>पहल छोटी संदेश बड़ा</strong></p>
<p>दीपावली में उत्तरप्रदेश में बनने वाली गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां चीन से आने वाली ऐसी ही मूर्तियों से भी खबसूरत हों, इसके लिए अपने हुनर से मिट्टी में जॉन डालने वाले 25 हुनरमंदों को अपर मुख्य सचिव खादी एवं खादी ग्रामोद्योग और माटी कला बोर्ड के महाप्रबंधक नवनीत सहगल ने कोलकाता से मंगाकर मूर्तियों के प्लास्टर ऑफ पेरिस पीओपी के सांचे दे रही है। देखने में ये पहल छोटी लग सकती है, पर इसका संदेश बड़ा है। पहले चरण में सवतंत्रा दिवस पर यहां खादी भवन में आयोजित कार्यक्रम में लखनऊ के 25 मूर्तिकारों को ये सांचे दिये गये। आगे भी गोरखपुर और वाराणसी के मूर्तिकारों को ऐसे ही सांचे दिये जाएंगे।</p>
<p>सांचा बनाने के पहले इनमें किस तरह की मूर्तियां बनेंगी, इसके लिए जाने-माने मूर्तिकारों और उप्र इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन के विशेषज्ञों से सलाह ली गयी। इन सबकी पहल पर मूर्तिकारों ने जो मूर्तियां बनाईं उनमें से सबसे अच्छी कुछ मूर्तियों का चयन किया गया। इन मूर्तियों के लिए कोलकाता से सांचा बनवाया गया। सांच आठ और 12 इंच के दो स्टैडर्ड साइज में हैं। दीपावली पर बिकने वाली लक्ष्मी-गणेश की इसी साइज की मूर्तियों की सर्वाधिक मांग भी रहती है। इन सांचों से आटोमैटिक मशीनों द्वारा कैसे बेहतरीन फिनिशिंग वाली मूर्तियां तैयार हों इसके लिए जहां जरूरत होगी वहां बोर्ड की ओर से प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी चलेगा।</p>
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		<title>अबकी दीवाली उप्र के बाजार में होगी चीन से जंग</title>
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		<pubDate>Fri, 19 Jun 2020 08:19:27 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[योगी आदित्यनाथ]]></category>

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		<description><![CDATA[जंग के केंद्र में होंगी गौरी गणेश की मूर्तियां उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने के लिए सांचे और आटो मशीन का होगा उपयोग कोलकाता से आएगा मूर्तियों का सांचा, गुजरात से दीपक बनाने की मशीन गोरखपुर, लखनऊ और वाराणसी में दिये जाएंगे 50-50 सांचे &#160; मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि अबकी दीवाली में चीन &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>जंग के केंद्र में होंगी गौरी गणेश की मूर्तियां</strong></li>
<li><strong>उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने के लिए सांचे और आटो मशीन का होगा उपयोग</strong></li>
<li><strong>कोलकाता से आएगा मूर्तियों का सांचा, गुजरात से दीपक बनाने की मशीन</strong></li>
<li><strong>गोरखपुर, लखनऊ और वाराणसी में दिये जाएंगे 50-50 सांचे</strong></li>
</ul>
<figure id="attachment_21287" style="width: 91px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/girish-ji.jpeg"><img class="  wp-image-21287" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/girish-ji.jpeg" alt="girish ji" width="91" height="135" /></a><figcaption class="wp-caption-text">गिरीश पांडेय</figcaption></figure>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि अबकी दीवाली में चीन से बनी गौरी-गणेश की मूर्तियों की जगह स्थानीय स्तर बनी मूर्तियों की ही बिक्री हो। मुख्यमंत्री की इस मंशा को साकार करने के लिए माटी कला बोर्ड ने पहल शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>ये हैं जंग के कमांडर</strong></p>
<p>फिलहाल बाजार की इस जंग में गोरखपुर के अरविंद प्रजापति, सिब्बन प्रजापति, लालमन प्रजापति, हरिओम आजाद, लखनऊ के जयकिशोर गुप्ता, अमरपाल, प्रेमसागर राजपूत, संजय कुमार, चंदन राजपूत, अमित कुमार राजपूत, आजाद कुमार (सभी मूर्तिकार) लखनऊ के ही मूर्तिकला विशेषज्ञ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, यूपीआईडी (उप्र इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन) की डिजाइनर सारिका वर्मा और वंदना प्रजापति कमांडर की भूमिका में होंगे। इनके ही निर्देशन में मॉडल तैयार होंगे। मॉडल के अनुसार सांचे, स्प्रे और ऑटोमैटिक मंगाकर इस विधा से जुड़े लोगों को दिये जाएंगे। साथ ही यह लोग स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करने वालों को प्रशिक्षण भी देंगे।</p>
<p><strong>ऐसे होगा मुकाबला</strong></p>
<p>पिछले दिनों माटी कला बोर्ड के महाप्रबंधक और प्रमुख सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) नवनीत सहगल की अध्यक्षता में इस बाबत बैठक हो चुकी है। तय हुआ कि गौरी-गणेश की मूर्तियां और डिजाइनर दीये बनाने में अगर चीन के इन उत्पादों से गुणवत्ता और दाम में मुकाबला करना है तो तीन चीजें जरूरी हैं। जिस साइज (8 से 12 इंच)की मूर्तियों की सर्वाधिक मांग रहती उनका खूबसूरत मॉडल विशेषज्ञ तैयार करें। इन मूर्तियों को लिये प्लास्टर ऑफ पेरिस का सांचा मंगाया जाय, बेहतर फिनिश के साथ उत्पादन बढ़ाने के लिए आटोमैटिक मशीन का उपयोग हो।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/06/89.jpg"><img class="  wp-image-21520 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/06/89.jpg" alt="89" width="87" height="157" /></a></p>
<p><strong>मॉडल तैयार करेंगे जाने-माने मूर्तिकार</strong></p>
<p>यह भी तय हुआ कि मूर्तियों का मॉडल मूर्तिकला विशेषज्ञ कृष्ण कुमार श्रीवास्तव तैयार करेंगे। इसका सांचा कोलकाता से आएगा। मॉडल जिले के रूप में चयनित गोरखपुर, वाराणसी और लखनऊ के मूर्तिकारों को 50-50 सांचे माटी कला बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी तरह दीपक बनाने और उस पर स्प्रे करने की मशीन गुजरात के पानगढ़ से मंगाने का निर्णय लिया गया।</p>
<p><strong>स्थानीय स्तर पर मिलेगा प्रशिक्षण</strong></p>
<p>चूंकि मिट्टी बनाने का काम क्लस्टर में होता है। मिट्टी लाने से लेकर उसकी तैयारी, उत्पादन बनाने और उसकी प्रोसेसिंग से लेकर बाजार तक पहुंचाने में परिवार के अन्य सदस्यों का भी योगदान होता है। लिहाजा विशेष स्थानीय स्तर पर उनको प्रशिक्षण देंगे। जहां पर पग मि<img class="  wp-image-21519 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/06/90.jpg" alt="90" width="120" height="158" />ल, इलेट्रिक चॉक और गैस चालित <a class="hin_dict_span" href="https://dict.hinkhoj.com/%E0%A4%AD%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A5%80-meaning-in-english.words">भट्ठी</a> की जरूरत हो उसको भी मुहैया कराने का आदेश भी महाप्रबंधक ने दिया।</p>
<p>मूर्तिकला में विशेषज्ञता के साथ फाइन आर्ट से एमए करने वाले केके श्रीवास्तव के मुताबिक हम चीन से बेहतर कर सकते हैं। चीन का नजरिया सिर्फ व्यवसायिक है, हम जो करेंगे वह दिल से करेंगे। इसकी वजहें हैं। मसलन दीपावली हमारा पर्व है। इस दिन पूजे जाने वाले गौरी-गणेश हमारे आराध्य हैं। इसीलिए हम जो करेंगे वह दिल से करेंगे। स्वाभाविक है कि हमारे काम में उनसे कहीं अधिक परफेक्शन रहेगा।</p>
<p>मूर्तिकला में विशेषज्ञता के साथ फाइन आर्ट से ही एमए करने वाले अमरपाल का कहना है कि पहली बार सूबे के किसी मुखिया ने मिट्टी से जुड़े कलाकारों के बारे में इतना सोचा है। ऐसे में उनकी मंशा पर खरा उतरना हमारा फर्ज है। हम शुरुआत भी कर चुके हैं। तय साइज में गौरी-गणेश की मूर्तियों के चार-पांच मॉडल जल्दी ही तैयार हो जाएंगे।</p>
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		<title>विलुप्त होता लखनवी खरबूजा</title>
		<link>http://businesslinknews.com/the-extinct-lucknow-melon/</link>
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		<pubDate>Thu, 21 May 2020 21:52:15 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[लखनवी खरबूजे]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ अपने बेहतरीन आमों के लिए ही नहीं जाना जाता है वरन यहां के लाजवाब खरबूजे  को चखने के लिए गर्मी के मौसम का इंतजार रहता है &#124; आमतौर पर लोग नहीं जानते हैं की यह खुशबूदार लजीज और मिठास से भरा  फल धीरे-धीरे लुप्त हो रहा है&#124; निकट भविष्य में लखनऊ की यह खासियत शायद बाजारों में नजर ना आए  क्योंकि लखनऊ का &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21327" style="width: 128px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/shailendra-ranjan.jpg"><img class="  wp-image-21327" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/shailendra-ranjan.jpg" alt="shailendra ranjan" width="128" height="128" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>शैलेंद्र राजन</strong></figcaption></figure>
<p style="font-weight: 400">लखनऊ अपने बेहतरीन आमों के लिए ही नहीं जाना जाता है वरन यहां के लाजवाब खरबूजे  को चखने के लिए गर्मी के मौसम का इंतजार रहता है | आमतौर पर लोग नहीं जानते हैं की यह खुशबूदार लजीज और मिठास से भरा  फल धीरे-धीरे लुप्त हो रहा है| निकट भविष्य में लखनऊ की यह खासियत शायद बाजारों में नजर ना आए  क्योंकि लखनऊ का यह विशेष  फल बाजार से ही नहीं खेतों से भी गायब हो रही है| बहुत से ऐसी किस्में बाज़ार में  आसानी से उपलब्ध हो रही हैं जो कि खाने में ज्यादा स्वादिष्ट है |</p>
<p style="font-weight: 400">किसानों को सब्जियों से होने वाली कमाई पर कोरोना वायरस का प्रभाव पड़ा और लखनवी खरबूजा भी अछूता न रहा | इस  खरबूजे को उगाने वाले कम ही किसान हैं और इसे बेचकर थोड़ी बहुत आमदनी करते थे लेकिन लॉक डाउन के चलते बेचने वालों का उन जगह पर पहुंचना नामुमकिन हो गया जहां इस विशेष खरबूजे के खरीदार है | पुराने लखनऊ के मोहल्लों में इसे ले जाना कठिन होने के कारण किसान खेतों के पास रोड के किनारे ही औने पौने दाम में बेच रहे हैं | कोरोनावायरस के अतिरिक्त मौसम की मार ने भी इन खरबूजे को ना छोड़ा | असमय बारिश और बड़े-बड़े ओलो ने रही सही कसर निकाल दी | बड़े-बड़े ओलो की चोट से फलों पर दाग पड़े और वहां से फल ख़राब हो गया  फल स्वरुप फसल लगभग चौपट हो गई |</p>
<p style="font-weight: 400">लगभग दो दशक पहले लखनवी खरबूजे के बहुत मांग थी क्योंकि बाजार में अन्य खरबूजे नहीं आते थे और  स्थानीय खरबूजा खुशबू और मिठास दोनों ही लाजवाब था | धीरे धीरे कानपुर और जौनपुर से खरबूजे ने लखनऊ के मार्केट में कब्जा जमाना शुरू कर दिया | यह खरबूजे लखनवी खरबूजे से थोड़े ज्यादा मीठे हैं और बाजार में प्रचलित किस्मों की शक्ल सूरत में ज्यादा मिलते हैं | बाहर से आए हुए खरबूजे की बढ़ती मांग ने किसानों को भी नई किस्में उगाने के लिए प्रेरित किया | अब तो मार्केट में तरह-तरह थे खरबूजे आने लगे हैं | अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियां नई किस्में निकालने में जुट गई है क्योंकि खरबूजा उत्पादन एक अच्छा व्यवसाय होने के कारण अच्छी किस्मों की बीज  की मांग बढ़ चुकी है | किसानों को भी समझ में आ गया है कि अधिक आमदनी के लिए अच्छी किस्मों  के खरबूजो का उत्पादन करें |</p>
<p style="font-weight: 400">लखनऊ के विशेष खरबूजे नए जमाने के खरबूजो से मुकाबला तो नहीं कर सकते लेकिन इनमें भी कुछ खासियत थी | बुजुर्गों से अगर आप उनका अनुभव पूछें तो बताते हैं की खुशबू और मिठास में बेमिसाल  लखनवी खरबूजे देखने को नहीं मिलते हैं | ऐसा होना लाजमी था क्योंकि कभी लखनवी खरबूजे से अच्छी किस्म निकालने की कोशिश नहीं की गई, धीरे धीरे किसानों को जो भी बीज उपलब्ध था उस पर निर्भर होने के कारण गुणवत्ता का ह्रास हुआ | कहीं कहीं लखनवी खरबूजे बेमिसाल गुणवत्ता वाले भी हैं और उन्हें संरक्षण देने की आवश्यकता है|</p>
<p style="text-align: right"><em>लेखक केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमानखेड़ा, लखनऊ के निदेशक है|</em></p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>वित्तीय तरलता की गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहा उद्योग जगत</title>
		<link>http://businesslinknews.com/industry-facing-serious-challenges-of-financial-liquidity/</link>
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		<pubDate>Thu, 07 May 2020 08:59:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>
		<category><![CDATA[जमाखोरी]]></category>
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		<category><![CDATA[बेरोजगारी]]></category>
		<category><![CDATA[स्टॉकिंग]]></category>

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		<description><![CDATA[मांग वाले क्षेत्र ग्रीन जोन में, पर आपूर्ति वाले क्षेत्र रेड जोन में होने से भी हो रही समस्या औद्योगिक दृष्टिकोण से, वर्तमान स्थिति में व्यवसायों के लिए डिजिटल परिवर्तन तेज करना आवश्यक अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रही आपूर्ति श्रृंखला  लखनऊ। कोविड-19 के प्रकोप की वजह से दुनिया के कारोबार को पूरी तरह से बाधित &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21295" style="width: 140px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/pawan-tiwari.jpeg.jpg"><img class="  wp-image-21295" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/pawan-tiwari.jpeg.jpg" alt="pawan tiwari.jpeg" width="140" height="202" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>पवन तिवारी</strong> </figcaption></figure>
<ul>
<li><strong>मांग वाले क्षेत्र ग्रीन जोन में, पर आपूर्ति वाले क्षेत्र रेड जोन में होने से भी हो रही समस्या </strong></li>
<li><strong>औद्योगिक दृष्टिकोण से, वर्तमान स्थिति में व्यवसायों के लिए डिजिटल परिवर्तन तेज करना आवश्यक</strong></li>
<li><strong>अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रही आपूर्ति श्रृंखला </strong></li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> कोविड-19 के प्रकोप की वजह से दुनिया के कारोबार को पूरी तरह से बाधित किया है, जिसके प्रमुख कारण मांग और आपूर्ति का असंतुलित होना है। इसी कारण से आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो गयी है और आपूर्ति श्रृंखला अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रही है। अगर देखा जाए तो जीडीपी की वृद्धि सात साल के निचले स्तर 1.9 प्रतिशत पर आ गई है और आने वाले समय मे यह और भी प्रभावित रहेगा। कोविड-19 महामारी के साथ बाजार मे हलचल आपूर्ति पक्ष को तनावपूर्ण कर रहा है और साथ ही अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है।</p>
<p>उद्योग वित्तीय तरलता की गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहा है जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी हो सकती है। उद्योग का नकदी प्रवाह एक ठहराव पर आ गया है, जबकि निश्चित परिचालन लागत बरकरार है। उपभोक्ता पक्ष पर, आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, स्टॉकिंग और ओवर-द-काउंटर दवाओं ने आपूॢत श्रृंखलाओं पर असामान्य तनाव पैदा कर दिया है। इस सम्बन्ध में सूचना तकनीकी सम्बन्धित अभिकरणों का प्रयोग वर्तमान स्थिति को बेहतर कर सकता है।</p>
<p>भारत में, कुछ उद्योग विशेषकर दवाइयों के निर्माता जो 50 प्रतिशत कच्चा माल चीन से आयात करने की वजह से अधिक निर्भर हो गए थे। ये उद्योग महत्वपूर्ण जोखिम में हैं। चीन विश्व के उत्पादन का एक बड़ा भाग निर्यात करता है जिसकी वजह से वहा अगर कोई आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है तब दुनिया भर में भी आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है। करोना के कारण उत्पादन और वितरण का नेटवर्क इसी कारण से गड़बड़ा गया हैं। स्थानीय स्तर पर भी आपूर्ति श्रृंखला नई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। रेड, ऑरेंज तथा ग्रीन जोन के वर्गीकरण में ऐसे कई उदाहरण है जहां मांग वाले क्षेत्र तो ग्रीन जोन में है पर आपूर्ति वाले क्षेत्र रेड जोन में आ रहे है।</p>
<p>भविष्य में भी इस प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। दूसरा, धीमी आर्थिक गतिविधि ने भारत और वैश्विक स्तर पर औद्योगिक उत्पादों की मांग को कम कर दिया है। पैकेजिंग उद्योग भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। देशव्यापी लॉकडाउन ने पूरी पैकेजिंग आपूर्ति श्रृंखला को अंतिम पड़ाव में ला दिया है। यह ध्यान रहे की पैकेजिंग उद्योग उपभोग के लिए तैयार माल, पैकेजिंग उपकरणों की उपलब्धता तथा बाजार में मांग पर चलता है। इस प्रकार के उद्योगों के लिए विशेष प्रयत्न करने की आवश्यकता है। पैकेजिंग उद्योग थोड़ी सी मदद से पटरी पर आ सकता है क्योंकि अधिकतर औद्यिगिक उत्पादों के लिए लगभग समान पैकेजिंग की आवश्यकता होती है।</p>
<p>सरकार 1.3 बिलियन भारतीय आबादी के लिए आवश्यक वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति जारी रखने के लिए सभी प्रयास कर रही है। हमें इस असाधारण स्थिति का सामना करने के लिए असाधारण चरणों की आवश्यकता होगी। उद्योग, सरकार के साथ काम कर रहा है ताकि वे इन आवश्यक चीजों को प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा सकें। इस बीच, सभी के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि हम इस मुश्किल दौर में एक दूसरे का साथ देते हुए गुजरें और न घबराएं। इस बिंदु पर वित्तीय संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। खुदरा लागत का 85 प्रतिशत (किराया, विद्युत आपूर्ति की लागत, कर्मचारियों का वेतन, कर की देनदारी) तय लागत है, जो खुदरा विक्रेताओं पर कई प्रकार से वित्तीय दबाव डाल रहा है।</p>
<p>उद्योग वित्तीय तरलता की गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहा है जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी हो सकती है। उद्योग का नकदी प्रवाह एक ठहराव पर आ गया है, जबकि निश्चित परिचालन लागत बरकरार है। उपभोक्ता पक्ष पर, आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, स्टॉकिंग और ओवर-द-काउंटर दवाओं ने आपूॢत श्रृंखलाओं पर असामान्य तनाव पैदा कर दिया है। इस सम्बन्ध में सूचना तकनीकी सम्बन्धित अभिकरणों का प्रयोग वर्तमान स्थिति को बेहतर कर सकता है।</p>
<p>एक औद्योगिक दृष्टिकोण से, वर्तमान स्थिति दुनिया भर के व्यवसायों के लिए डिजिटल परिवर्तन की पहल को तेज करने की संभावना है, क्योंकि वे अपनी कमजोरियों का सामना करने के लिए मजबूर हैं। खुदरा क्षेत्र को डिजिटल माध्यमो को आत्मसात करके खुद को बनाये रखने की चुनौती है। यह वास्तव में एक अवसर भी है जहां स्मार्टफोन जैसे सामान्य उपकरण बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। विनिर्माण क्षमता के मामले में उद्योग में अपार संभावनाएं हैं। एक स्वचालित आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली के साथ संयुक्त एक स्थायी पारिस्थिति की तंत्र बना सकता है जिसका उपयोग आने वाली पीढिय़ों द्वारा किया जा सकता है। आपूर्ति श्रृंखला का डिजिटलीकरण, पैकेजिंग उद्योग को पूरी क्षमता से संचालित करने में सक्षम करेगा।</p>
<p>कोविड-19 ने कॉर्पोरेट निर्णय लेने वालों को सिखाया है कि भविष्य की आपूर्ति श्रृंखला डिजाइन तैयार करने में, लागत, गुणवत्ता और वितरण के अलावा उन्हें नए प्रदर्शन उपायों पर श्रृंखलाओं का तनाव-परीक्षण करने की भी आवश्यकता होगी। यह समय वास्तव में खुद को और ज्यादा चुनौतियों के लिए तैयार करने का है। उद्योग, समाज तथा सरकार मिलके इस समस्या से पार पा सकते है, ज़रूरत एक दुसरे के साथ परस्पर सामंजस्य बैठा के चलने की है।</p>
<p style="text-align: right"><strong><em>@लेखक, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं और औद्योगिक संगठन स्माल इंडस्ट्रीज एण्ड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैं।</em></strong></p>
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		<title>पुनर्जीवित होंगे प्रदेश के ढाई लाख सूक्ष्म एवं कुटीर उद्योग</title>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2020 13:59:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साधेंगे छोटे उद्योगों से बड़ा लक्ष्य  अन्य प्रदेशों से यूपी लौट रहे कामगारों को राज्य में मिलेगा रोजगार कच्चे माल के लिए स्थापित होगा रॉ मटीरियल बैंक, तुरंत होगी भुगतान की व्यवस्था प्रोडक्ट डेवलपमेंट एवं मार्केटिंग के लिए बनेगी एक अलग संस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दिये निर्देश अविलम्ब बनाये &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B38DBB2B-E093-479B-8CD3-0B38E5D8D17C.jpeg"><img class="  wp-image-21237 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B38DBB2B-E093-479B-8CD3-0B38E5D8D17C.jpeg" alt="B38DBB2B-E093-479B-8CD3-0B38E5D8D17C" width="448" height="234" /></a>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साधेंगे छोटे उद्योगों से बड़ा लक्ष्य </strong></li>
<li><strong>अन्य प्रदेशों से यूपी लौट रहे कामगारों को राज्य में मिलेगा रोजगार</strong></li>
<li><strong>कच्चे माल के लिए स्थापित होगा रॉ मटीरियल बैंक, तुरंत होगी भुगतान की व्यवस्था </strong></li>
<li><strong>प्रोडक्ट डेवलपमेंट एवं मार्केटिंग के लिए बनेगी एक अलग संस्था</strong></li>
<li><strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दिये निर्देश अविलम्ब बनाये कार्ययोजना </strong></li>
<li><strong>बोले स्मॉल इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन सीमा के अध्यक्ष कुटीर उद्योगों के लिये यह शुभ संकेत</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> लॉकडाउन के चलते अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश वापस आ रहे प्रवासी कामगारों और श्रमिकों के लिये खुशखबरी है। राज्य सरकार ने इन कामगारों को राज्य में ही रोजगार देने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में शीर्ष अधिकारियों को निर्देशित करते हुये संजीदगी से अमल करने को कहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के बाद प्रदेश में बंद पड़े लगभग ढाई लाख सूक्ष्म एवं कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवन देने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निर्देश मिलने के बाद अधिकारी एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने में जुट गए हैं। योगी सरकार पहले चरण में पांच लाख लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के जरिए काम-धंधे में लगाने की तैयारी कर रही है। बाहर से यूपी आने वाले कुशल कामगारों को उनकी रुचि के हिसाब से ट्रेड का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। कच्चे माल के लिए रॉ मटीरियल बैंक की स्थापना होगी। उनके उत्पाद के तुरंत भुगतान की व्यवस्था होगी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट एवं मार्केटिंग के लिए एक अलग संस्था बनेगी।</p>
<p>लॉकडाउन लागू होते ही भारी उद्योग तो बंद हो गए थे और इनके मजदूरों का पलायन शुरू हो गया था। इसके बाद लघु मध्यम और सूक्ष्म उद्योग संचालकों ने योगी सरकार से बात की, सरकार ने इन उद्योगों के लिए कच्चा माल की व्यवस्था की। मजदूरों को इन्हीं छोटे उद्योगों में रुकने का इंतजाम किया गया। नतीजा यह हुआ कि लॉकडाउन का दूसरा फेज आते-आते प्रदेश में लघु उद्योगों की करीब चार हजार यूनिट चालू हो गईं। अब लॉकडाउन के तीसरे फेज में लघु उद्योगों को और विस्तार देने की योजना तैयार हो रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री के निर्देश मिलने के बाद प्रदेश में बंद पड़े लगभग ढाई लाख सूक्ष्म एवं कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवन देने की कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण अंचलों में 100 से अधिक तरह के काम शुरू करने के लिये 10 लाख रुपये का लोन मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार योजना के तहत दिया गया था। खादी ग्रामोद्योग विभाग द्वारा संचालित इस योजना में सामान्य जाति के आवेदक को लाख रुपये तक के ऋण पर महज चार प्रतिशत बयाज देय था। इससे ऊपर बैंक की जो भी बयाज दर हो, उसमें अधिकतम दस फीसद तक का भुगतान बैंक शाखा को सीधे प्रदेश सरकार की ओर से करने की व्यवस्था थी। इस व्यवस्था के तहत चल रहे लगभग ढाई लाख सूक्ष्म एवं कुटीर उद्योग घोषित सुविधाओं के न मिलने से बंद हो गये। एसोचैम के सदस्य संदीप सक्सेना का कहना है कि अगर इस व्यवस्था में शामिल उद्योगों को एक बार ष्बूस्ट डोजश् दी जाए तो प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था में कुटीर एवं सूक्ष्म उद्यम अहम योगदान देगा।</p>
<blockquote>
<figure id="attachment_21271" style="width: 130px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/Shailendra-sir.jpeg"><img class="  wp-image-21271" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/Shailendra-sir.jpeg" alt="shailendra sir " width="130" height="155" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>शैलेन्द्र श्रीवास्तव </strong>अध्यक्ष, स्मॉल इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन</figcaption></figure>
<p>मुंबई और गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से आने वाले प्रवासी श्रमिक स्किल्ड हैं। उनके पास कौशल के साथ अनुभव भी है। उनका प्रदेश में इस समय आना शुभ संकेत कहा जा सकता है। इन श्रमिकों की स्किल और अनुभव की जानकारी पर आधारित एक डेटा शीट जिलेवार तैयार की जानी चाहिए। यह डेटा शीट इनके लिए रोजगार नीति बनानेए चल रहे उद्यमों में उन्हें समायोजित करने या इनके स्वरोजगार की नीति बनाते समय काम आएगी। यह डेटा प्रदेश के लिए बहुमूल्य बौद्धिक एवं श्रम संपदा साबित होगी। इससे ग्राम एवं कस्बे स्तर तक आॢथक गतिविधियों की गति बढ़ेगी।</p>
<p>&nbsp;</p></blockquote>
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		<title>उद्यमियों का दर्द ‘उत्पादन शून्य, कैसे दें वेतन’</title>
		<link>http://businesslinknews.com/the-pain-of-entrepreneurs-production-zero-how-to-pay/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/the-pain-of-entrepreneurs-production-zero-how-to-pay/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2020 08:56:15 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<category><![CDATA[श्रमिकों का भुगतान]]></category>

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		<description><![CDATA[चेम्बर आफ इण्डस्ट्रीज ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त को लिखा पत्र औद्योगिक संगठनों की मांग, बिजली के फिक्स चार्ज, बैंक ब्याज को चार महीने तक माफ करने सहित जीएसटी में सरकार दे राहत बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उद्योगपतियों ने अपने कारखानों में कार्य करने वाले श्रमिकों को अप्रैल माह का वेतन देने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>चेम्बर आफ इण्डस्ट्रीज ने अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त को लिखा पत्र</strong></li>
<li><strong>औद्योगिक संगठनों की मांग, बिजली के फिक्स चार्ज, बैंक ब्याज को चार महीने तक माफ करने सहित जीएसटी में सरकार दे राहत</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के उद्योगपतियों ने अपने कारखानों में कार्य करने वाले श्रमिकों को अप्रैल माह का वेतन देने में असमर्थता जतायी है। उद्योगपतियों ने कहा है कि उनके कारखानों में उत्पादन शून्य है, इस कारण वे वेतन नहीं दे पाएंगें।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/0B70F0F6-98D8-4A9F-832E-533041D7F69E.jpeg"><img class="alignnone size-full wp-image-21170" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/0B70F0F6-98D8-4A9F-832E-533041D7F69E.jpeg" alt="0B70F0F6-98D8-4A9F-832E-533041D7F69E" width="768" height="1024" /></a>उद्योगपतियों की संस्था चेम्बर आफ इण्डस्ट्रीज ने इस संबंध में 12 अप्रैल को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त को पत्र लिखा है और बिजली के फिक्स चार्ज, बैंक ब्याज को चार महीने तक माफ करने सहित जीएसटी में राहत देने की मांग की है। कमिश्नर से हुई मुलाक़ात में चेम्बर आफ इंडस्टीज के पदाधिकारियों ने यह बात कही है।</p>
<p>जानकारों की मानें तो गोरखपुर औद्याोगिक विकास प्राधिकारण गीडा में 400 औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इसके अलावा गोरखपुर के बरगदवां औद्योगिक क्षेत्र व अन्य स्थानों पर करीब 150 औद्योगिक इकाइयां है। लाॅकडाउन के बाद अधिकतर औद्योगिक इकाइयां बंद है। गीडा की ओर से आवश्यक वस्तुओं को उत्पादित करने वाली 44 इकाइयों को उत्पादन शुरू करने की स्वीकृति दी गई है लेकिन इनमें से कुछ इकाइयां ही उत्पादन शुरू कर पायी हैं। यहां तक गीडा क्षेत्र में स्थापित फार्मा की नौ इकाइयों में भी उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है। अभी तक चार फ्लोर मिलों, दो दाल मिलों के अलावा ब्रेड व पैकेजिंग की कुछ इकाइयों में ही काम शुरू हो पाया है।</p>
<p>चेम्बर आफ इण्डस्ट्रीज के महासचिव द्वारा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि लाॅकडाउन से 95 फीसदी से अधिक उद्योगों का उत्पादन शून्य हो गया है। साथ ही उद्योगों को कई अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उद्योगों के न चलने से उनका कच्चा माल खराब हो रहा है। उत्पादित माल डम्प है और बाजार से भुगतान नहीं मिल रहा है। ऐसी स्थिति में उत्पादन न करने वाली औद्योगिक इकायां फैक्ट्री कर्मचारियों/श्रमिकों का अप्रैल माह का भुगतान नहीं कर पाएंगी। उत्पादन करने वाली इकाइयां उत्पादन होने वाली पाली के श्रमिकों का ही भुगतान करेंगी।</p>
<p>चेम्बर आफ इण्डस्ट्रीज ने इस पत्र में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त से लाॅकडाउन अवधि को शून्य मानते हुए बिजली के फिक्स चार्ज, बैंक ब्याज को चार महीने तक माफ करने और जीएसटी में राहत देने की मांग की है। चेम्बर के महासचिव प्रवीण मोदी और उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने बताया औद्योगिक इकाइयों ने मार्च माह का वेतन श्रमिकों को सात अप्रैल तक दे दिया है, जिन औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन शुरू करने की अनुमति मिली है, वे भी उत्पादन नहीं शुरू कर पा रहे हैं क्योंकि श्रमिकों को फैक्ट्री तक आने-जाने का पास नहीं मिला है। कमिश्नर ने फैक्ट्री मजदूरों का पास देने का आश्वासन दिया और कहा कि वे उद्योगपतियों की समस्या को सरकार तक पहूंचाएंगें।</p>
<p>उन्होंने बताया कि गीडा क्षेत्र में कारखानों में श्रमिकों के आवास नहीं है। सिर्फ गार्डों व उनके सहयोगियों के ही आवास हैं। पूर्व में जब कई फैक्ट्रियों में श्रमिकों के लिए आवास बनवाने की कोशिश हुई तो गीडा प्रशासन द्वारा नोटिस देकर मना कर दिया गया। गीडा के फैक्ट्रियों के अधिकतर श्रमिक सहजनवां और आस-पास किराए के मकानों में रहते हैं। लाॅकडाउन होते ही 50 फीसदी से अधिक श्रमिक अपने गांव वापस चले गए हैं और उनका लौटना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। सरकार द्वारा श्रमिकों को फैक्टियो के बंदी अवधि का भी वेतन दिये जाने की घोषणा के कारण श्रमिकों का जल्द वापस लौटना संभव भी नहीं है। ऐसे में कारखानों में जल्द उत्पादन होने की संभावना नहीं है। दूसरे जगहों से कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, उत्पादित माल की सप्लाई, बाजार से पेमेंट का चेन टूट गया है जिसको जोड़े बिना फैक्टियों का चल पाना मुश्किल लग रहा है।</p>
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		<title>सूरत की घटना : उद्यम बनाम मजदूर संघर्ष की प्रस्तावना</title>
		<link>http://businesslinknews.com/surat-incident-prelude-to-enterprise-versus-labor-struggle/</link>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2020 08:06:25 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[पंकज जायसवाल सूरत में मजदूरों का मिल मालिक के खिलाफ विद्रोह कोरोना की तरह ही पहली चिंगारी है जिसे सभी सरकारों को ध्यान देने की जरूरत है। समय के साथ वेतन न मिलने की घटनाएं बढ़ती जाएंगी। अप्रैल माह में बिक्री कुछ अत्यावश्यक वस्तुवों को छोड़ बिक्री शून्य है, मई में वेतन समेत अन्य स्थाई &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li style="font-weight: 400"><strong>पंकज जायसवाल</strong></li>
</ul>
<h3 style="font-weight: 400">सूरत में मजदूरों का मिल मालिक के खिलाफ विद्रोह कोरोना की तरह ही पहली चिंगारी है जिसे सभी सरकारों को ध्यान देने की जरूरत है। समय के साथ वेतन न मिलने की घटनाएं बढ़ती जाएंगी। अप्रैल माह में बिक्री कुछ अत्यावश्यक वस्तुवों को छोड़ बिक्री शून्य है, मई में वेतन समेत अन्य स्थाई खर्चों के भुगतान का वक़्त आ रहा है. जून माह में भयंकर संकट और भयंकर विद्रोह की भी आशंका है, जब मिल मालिकों को जून माह में मार्च से लेकर जून माह मतलब 4 माह का इकट्ठे कॅश क्रेडिट ऋण का एवं ओवरड्राफ्ट ऋण का ब्याज देना है, और लगभग सारे टैक्स की तारीख जून कर दी गई है। न तो  सरकार ने टैक्स माफ किया है और ना ही ब्याज सिर्फ उसे  स्थगित किया गया है, जिस पर ब्याज की लागत भी उद्यमी को वहन करना है। मार्च माह से अति जीवनावश्यक चीजों को छोड़ लगभग 95% उद्योगों की बिक्री शून्य है,एक पैसा खाते में नहीं आया है, मई तक भी आने की उम्मीद नहीं है, पुराना बकाया भी नही मिल रहा, जून की बिक्री का पैसा भी तुरन्त नहीं मिलने वाला, क्यों कि ज्यादेतर खरीददार खुद नगदी संकट में होंगे, ऐसे में मासिक वेतन व मजदूरी का भुगतान, मार्च में एक साथ 4 माह का कार्यशील ऋण का ब्याज, ज्यादेतर टैक्स और कंप्लायंस का इकट्ठा बोझ उद्यमियों की कमर तोड़ेंगे, अगर रोका नहीं गया इसे तो हो सकता है कि मजदूरों कर्मचारियों और उद्यमियों के बीच भी संघर्ष के पटकथा की  ज़मीन तैयार हो जाए।</h3>
<p>कोरोना का यह संक्रमण अगर लम्बा चला तो सबसे अधिक मार खायेगा मध्य वर्ग और एमएसएमई सेक्टर, उच्च आय वर्ग के पास तो खुद का धन है, गरीबों का राशन और ख्याल सरकार रख रही है लेकिन मध्य वर्ग ना तो राशन के लिए कतार में लग सकता है ना ही खुले तौर पर अपनी व्यथा कह सकता है, अपने दिल में दर्द की चिंगारी वह लेकर बैठा है, और तब तक बैठा है जब तक पानी सर से ऊपर नहीं चला जाता है, सरकार को चाहिए की वह इस स्थिति को भांपे और पानी को सर के ऊपर से नहीं जाने दे, कोरोना के इस जंग में सब सरकार के साथ हैं सबको सरकार पर भरोसा है और सबको सरकार के द्वारा लिए गए कदम से संतोष है, चिंता है तो बस यही की इकॉनमी का क्या होगा जब यह बंदी पूरी तरह से खुलेगा, क्यूँ की इस प्राकृतिक आपदा पर तो विश्व के किसी भी सरकार का वश नहीं चल रहा, ऐसे में इकॉनमी तो सिर्फ एक हिस्सा है.</p>
<p>एमएसएमई सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर एवं ट्रेडिंग सेक्टर के पास उतना शॉक अब्जोर्बेर नहीं होता की लगातार इस झटके से  उबर ले. इनके आयार्जन की क्षमता काफी घट गई है, कुछ स्थाई खर्चे ऐसे हैं जिन्हें आय हो न हो खर्च करना ही है. इस वर्ग के सामने सबसे बड़ी चिंता है की इस लॉक डाउन में और आगे भी अपने स्टाफ एवं मजदूरों को वेतन कहाँ से दे, सरकारों का फरमान आ रहा है की वेतन देना है, लेकिन एमएसएमई के पास यदि पैसा ही न हो, बिक्री शून्य हो, ऋण मिलने वाला नहीं है साइकिल रुकी हुई है तो वह दें तो दें कहाँ से . जितने भी एमएसएमई हैं कहीं न कहीं वह बड़े इंटरप्राइजेज पर ही निर्भर हैं और बड़े इंटरप्राइजेज के ऊपर पड़ी मार का भार आज भी और आगे भी इनके उपर ही आने वाला है, देनदारी वसूली के साथ साथ एमएसएमई के कॉन्ट्रैक्ट की साइज़ या मूल्य कम होने की सम्भावना है .</p>
<p>लॉक डाउन में मजदूरों और सप्लाई चेन की समस्या तो है ही, लॉक डाउन के बाद मटेरियल और मजदूरों की अनुउपलब्धता, ग्राहक व्यवहार में परिवर्तन, रेट कट का दबाब, उत्पादन बंद करने की नौबत, नकदी संकट,एक साथ ब्याज और टैक्स पेमेंट का संकट, सप्लाई चेन का संकट आदि से दो चार होना है. एमएसएमई का धंधा कम होने पर अंत में मार मध्य वर्ग के  वेतनभोगियों पर ही पड़ेगी. और एक बार जब यह मार पड़ेगी तो सूरत की तरह उद्यमी और मजदूर आमने सामने भी खड़े हो सकते हैं. ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जितने भी औद्योगिक संगठन है जिसमें असोचैम, फिक्की, पीएचडी चैम्बर और खासकर के एमएसएमई के लिए कार्य कर रही संस्था लघु उद्योग भारती और  स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ( सीमा) हो सबको आगे आकर इन चिंताओं का समाधान ढूंढने में सरकार की मदद करनी पड़ेगी. इस संकट की घडी में यह अब सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, यह इन संगठनों की भी जिम्मेदारी हो गई है की अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करें और हल ढूंढने में मदद करें.</p>
<p>मेरा मत है कि सरकार को वेज सब्सिडी, बिजली फिक्स्ड चार्ज की ६ माह तक माफ़ी, सिर्फ प्रयोग में लाये गए बिजली पर ही बिल, भरे गए टैक्स के बराबर प्रतिभूति रहित ऋण, एनपीए नियमों में राहत, एन सी एल टी में राहत, एमएसएमई से सरकारी खरीद की सीमा को 50 प्रतिशत तक किया जाए, पुराने सरकारी बकायों का भुगतान निर्गत , कंप्लायंस में राहत सितम्बर तक बढाया जाए. ऋण लेना सुगम बनाया जाय, मोरेटेरियम 6 माह तक , ब्याज का भार सिर्फ ईएमआई राशि पर बजाय पूरे बकाये राशि के, कर्जमाफी की जगह ब्याजमाफी का विकल्प या सभी तरह के ऋणों पर ब्याज दर कम करने का प्रस्ताव, बैंकों द्वारा अनावश्यक कई तरह के चार्ज एवं पेनल ब्याज हटाने जैसे कदम लेने चाहिए. सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर टूरिस्ट, एविएशन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक, इन्फ्रा, निर्माण, सप्लाई चेन आदि पर विशेष पैकेज या इंडस्ट्री के हिसाब से टैक्स हॉलिडे भी लाया जा सकता है. मेरा यह भी मत है की सरकार का भी राजस्व प्रभावित होगा, ऐसे में राजकोषीय घाटा कम करने हेतु पीएम केयर फंड फंड को टैक्स पेमेंट या सरकारी बांड से लिंक कर टैक्स कलेक्शन का अग्रिम संग्रह कर लेना चाहिए.</p>
<p>सरकार को एक अध्ययन कमेटी बनानी चाहिए जो एक निष्कर्ष रिपोर्ट दे की लॉक डाउन की स्थिति में कैसे और किन विधियों का पालन करते हुए  उद्योग एवं सरकारी विभाग काम कर सकते हैं, उनके कार्य करने के तरीके और संस्कृति क्या हो, हो सकता है हम ऐसी कार्य संस्कृति इस महामारी में विकसित कर लें की वह औद्योगिक, सामाजिक, पारिवारिक और प्रकृति सब के अनुकूल हो. लॉक डाउन एक अवस्था है, और ऐसा नहीं है की विश्व में मानव का दिमाग यह विधि न विकसित कर ले की ऐसी परिस्थिति में उद्यम कैसे करें. जब मानव अन्तरिक्ष में भी कार्य करने की विधि विकसित कर चुका है तो यह तो एक लॉक डाउन है, और यदि इस डर के आगे हमने विधि विकसित कर लें तो डर के आगे जीत है.</p>
<p>साथ में सरकार को ध्यान देना चाहिए कि मजदूरों के पलायन के बाद उच्च वेतन और पेशेवरवर्ग का भी पलायन हो सकता है, कॉर्पोरेट अपने हानि का बहुत सा भार इनके खर्चे को कम करके करना चाहेंगे ऐसे में हो सकता है की मजदूरों के बाद कर्मचारी और बाद में पेशेवर का पलायन शुरू हो. हालांकि मजदूर या पेशेवर पलायन का दूसरा पहलू ये भी है कि तब उद्यम और रोजगार का केन्द्रीयकरण नहीं विकेंद्रीकरण होगा और कस्बों का विकास देखने को मिलेगा, जो शहरीकरण से कहीं बेहतर हो और गांवो के विकास में सहायक होंगे.</p>
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		<title>वेंडर्स के घोटाले पर जांच की आंच</title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jul 2019 07:27:09 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>

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		<description><![CDATA[वेंडिंग जोन के लिए अपने साथ ही पत्नी, बच्चों के नाम पर भी कर दिया था आवेदन अब लॉटरी सिस्टम से वेंडर्स को चुना गया, जोन- 4 और 4 में सबसे ज्यादा डिमांड लखनऊ। वेंडिंग जोन में जगह पाने के लिए ज्यादातर वेंडर्स ने आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया में बड़ा खेल किया। इसके सामने आने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>वेंडिंग जोन के लिए अपने साथ ही पत्नी, बच्चों के नाम पर भी कर दिया था आवेदन</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>अब लॉटरी सिस्टम से वेंडर्स को चुना गया, जोन- 4 और 4 में सबसे ज्यादा डिमांड</strong></span></li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> वेंडिंग जोन में जगह पाने के लिए ज्यादातर वेंडर्स ने आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया में बड़ा खेल किया। इसके सामने आने के बाद निगम प्रशासन के अधिकारी हैरान हैं। फिलहाल फर्जी आवेदनों को निरस्त करने के साथ ही आवेदन फॉर्म में भरे गए नामों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है।</p>
<p>हाल में ही निगम की ओर से वेंडिंग जोन के लिए वेंडर्स से आवेदन मांगे गए थे। करीब 12 हजार वेंडर्स ने आवेदन भरे। निगम प्रशासन की ओर से एक- एक आवेदन का सत्यापन कराया गया। जैसे- जैसे सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होती गई, फर्जीवाड़े का सच सामने आता गया। सत्यापन के दौरान यह सामने आया कि वेंडर्स ने अपने नाम से तो आवेदन किया था ही साथ में पत्नी और बच्चों के नाम से भी आवेदन कर दिया। जिससे आवेदनों की संख्या का आंकड़ा दस हजार के पार पहुंच गया।</p>
<p>जबकि निगम को उम्मीद सात से आठ हजार की ही थी। गौरतलब है कि निगम प्रशासन की ओर से वेंडर्स को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने के लिए जोन चार से शुरूआत कर दी गई है। यहां भी लॉटरी सिस्टम से वेंडर्स को चुना गया है। इसके बाद जोन एक, तीन और दो में वेंडर्स को शिफ्ट करने की तैयारी शुरू होगी।</p>
<h3><strong><span style="color: #ff0000;">जहां लगती 3 दुकानें, वहां से आवेदन 40</span></strong></h3>
<p>आवेदन मंगाए जाने से पहले निगम की ओर से पहले ही ऐसे वेंडर्स की लिस्ट तैयार की गई थी, जो पिछले कई सालों से सड़क किनारे दुकानें लगा रहे थे। निगम प्रशासन की ओर से वो प्वाइंट भी चिन्हित किए गए थे, जहां दुकानें लगती थीं। खास बात यह रही कि दुकानों की गिनती तक कर ली गई। जब आवेदन आए तो पता चला कि जिस प्वाइंट पर तीन या चार दुकानें लगती थीं, वहां से 40 से अधिक आवेदन आए हैं। इसके बाद ही इनकी जांच के आदेश दिए गए।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg"><img class="alignnone wp-image-11217 size-full" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/nagar-nigam-lucknow.jpg" alt="nagar-nigam-lucknow" width="759" height="422" /></a></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>पहली बार लॉटरी सिस्टम</strong></span></h3>
<p>निगम की ओर से आवेदनों का सत्यापन कराने के बाद करीब साढ़े आठ हजार वेंडर्स के नामों पर मुहर लगी हैं। इन्हें वेंडिंग जोन में शिफ्ट किया जाएगा। चूंकि कई प्वाइंट्स पर वेंडिंग जोन में जगह कम है, इसकी वजह से निगम प्रशासन की ओर से पहली बार लॉटरी सिस्टम की मदद ली जा रही है। जिन वेंडर्स के नाम लॉटरी में निकलेंगे, उन्हें संबंधित जोन में शिफ्ट कर दिया जाएगा, बाकी को दूसरे जोन में शिफ्ट किया जाएगा।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>माइकिंग से जानकारी</strong></span></h3>
<p>जिस जोन में वेंडर्स को वेंडिंग जोन में शिफ्ट करने की तैयारी की जाएगी, उस जोन में दो या तीन दिन पहले माइकिंग से वेंडर्स को लॉटरी सिस्टम के बारे में जानकारी दी जाएगी।</p>
<blockquote><p>जो आवेदन फर्जी मिले, उन्हें निरस्त कर दिया गया है। जोन चार से वेंडिंग जोन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगले सात दिन में हर जोन में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।<br />
<strong>डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त</strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		<title>प्रमोशन फाइल बनी फुटबाल</title>
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		<pubDate>Mon, 01 Jul 2019 08:00:03 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>

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		<description><![CDATA[एक अधिकारी की आपत्ति पर फंसा 61 अधिकारियों का प्रमोशन पहली जुलाई को सात साल की सेवाएं पूरी होने के बाद भी प्रमोशन मिलने के कोई आसार नहीं  अधिकारियों में आक्रोश, न्याय की मांग को लेकर कोर्ट में जाएंगे अधिकारी लखनऊ। प्रदेश सरकार के वाणिज्य कर विभाग में एक जुलाई 2019 को 61 असिस्टेन्ट कमिश्नर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;">एक अधिकारी की आपत्ति पर फंसा 61 अधिकारियों का प्रमोशन</span></li>
<li><span style="color: #ff0000;">पहली जुलाई को सात साल की सेवाएं पूरी होने के बाद भी प्रमोशन मिलने के कोई आसार नहीं </span></li>
<li><span style="color: #ff0000;">अधिकारियों में आक्रोश, न्याय की मांग को लेकर कोर्ट में जाएंगे अधिकारी</span></li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> प्रदेश सरकार के वाणिज्य कर विभाग में एक जुलाई 2019 को 61 असिस्टेन्ट कमिश्नर विभाग में अपनी सात साल की सेवाएं पूरी करके डिप्टी कमिश्नर बनने के सभी मानकों को पूरा कर लेंगे। विभाग में इसके सापेक्ष अभी तक कुल 58 डिप्टी कमिश्नरों के पद खाली भी है, लेकिन इन अधिकारियों की प्रमोशन फाइल शासन में फुटबाल बन गयी है।</p>
<p>शीर्ष पदो पर बैठे अधिकारी पिछले करीब छह माह से इस मुद्दे पर फैसला लेने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। जिससे अधिकारियों का मनोबल लगातार टूट रहा और इनके साथ उन अधिकारियों का भी मनोबल टूट रहा है, जिनकी बारी इन अधिकारियों के ठीक बाद असिस्टेन्ट कमिश्नर बनाने की है।</p>
<p>ये मामला विभाग में उन असिस्टेन्ट कमिश्नरों का है, जिन्हे प्रमोशन मिलने के बाद डिप्टी कमिश्नर बनना है। वैसे तो विभागीय भाषा में ये मामला बेहत तकनीकी है, लेकिन अगर सरल शब्दों में इसकी व्याख्या की जाए तो विभाग में दिसम्बर माह में खाली डिप्टी कमिश्नरों के 27 पदो के सापेक्ष लगभग 42 अधिकारियों की डीपीसी हुई। मालूम हो कि डीपीसी कुल खाली पदों से अधिक की होती है, जिसका कारण ये होता है कि अगर बीच में किसी अधिकारी का प्रमोशन प्रशासनिक आधार पर रोका जाए तो प्रतीक्षा सूची में शामिल उसके बाद के अधिकारी का नाम शामिल किया जा सके।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/07/salestax.jpg"><img class="alignnone wp-image-4166 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/07/salestax.jpg" alt="salestax" width="827" height="705" /></a></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस डीपीसी की सूची जारी होती, इससे पहले क्रम संख्या 10 पर जो अधिकारी महोदय थे, चूंकि उनकी कुल सेवा साढ़े चार साल की पूरी नहीं हो रही थी इसलिए उनको सरकार ने शिथिलिता प्रदान नहीं की, इसलिए उनके प्रमोशन का लिफाफा नहीं खुला। लिहाजा अधिकारी ने यह आपत्ति लगा दी कि सूची में शामिल क्रम संख्या में जिन अधिकारियों का प्रमोशन होने जा रहा है, वे उनसे कनिष्ठ है, इसलिए सरकार ने क्रम संख्या 2284 से लेकर 2337 तक के अधिकारियों का प्रमोशन रोक दिया।</p>
<p>गौर करने वाली बात ये है कि जिस अधिकारी की आपत्ति पर उसके बाद के अधिकारियों का प्रमोशन रोका गया है, उनकी संख्या 61 हो गयी है और इन सभी अधिकारियों की 1 जुलाई 2019 को सात साल की सेवाएं पूरी भी हो जाएंगी और अब इन अधिकारियों को सरकार की शिथिलता की कोई जरूरत नही है, इसके बाद भी इनका प्रमोशन केवल एक अधिकारी की आपत्ति पर रूका है, जिस पर फैसला नहीं लिया जा पा रहा है। सवाल ये खड़ा होता है कि उस एक अधिकारी का कार्यकाल पूरा क्यों नहीं हो रहा जबकि उनके बाद के अधिकारियों का सात साल पूरा होने जा रहा है।</p>
<p>इसका जवाब ये बताया जा रहा है कि प्रशासनिक आधार पर उनकी सेवाओं को रोका गया था, जिसके कारण कार्यकाल न पूरा हो पाने के कारण शिथिलता ही प्रदान नही की जा सकी तो सामान्य कार्यकाल पूरा हो पाना दूर की बात है, जो अधिकारी इससे प्रभावित है, उनका यह कहना है कि अगर उस अधिकारी का प्रमोशन प्रशासनिक आधार पर रूक है तो उनके लिफाफे को निर्णय आने तक बंद रखकर बाद के उन दूसरे अधिकारियों के प्रमोशन पर फैसला आना चाहिए, जिनका सामान्य कार्यकाल पूरा हो चुका है, क्योंकि ये उनके नैसगिंक न्याय से जुड़ा मुद्दा है। माना जा रहा है अगर प्रभावित अधिकारियों के मामले में शासन में फुटबाल की तरह खेली जा रही उनकी फाइल पर निर्णय नहीं आया तो अधिकारी कोर्ट में जाएंगे।</p>
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		</item>
		<item>
		<title>आलमबाग को हजरतगंज बनाने की तैयारी</title>
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		<pubDate>Mon, 24 Jun 2019 08:32:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[जिलाधिकारी ने बनायी असरों की टोली, हर महीने होगी समीक्षा बैठक बाजार बनेगा नो वेंडिंग जोन, बाजार को मिलेगी 2 पार्किंग  महापौर के साथ अधिकारियों ने खींचा खाका लखनऊ। आलमबाग बाजार को स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पहले बाजार एरिया को नो वेंडिंग जोन घोषित किया जाएगा फिर यहां मल्टीलेवल पार्किंग समेत &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>
<h3><strong>जिलाधिकारी ने बनायी असरों की टोली, हर महीने होगी समीक्षा बैठक</strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>बाजार बनेगा नो वेंडिंग जोन, बाजार को मिलेगी 2 पार्किंग </strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>महापौर के साथ अधिकारियों ने खींचा खाका</strong></h3>
</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> आलमबाग बाजार को स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पहले बाजार एरिया को नो वेंडिंग जोन घोषित किया जाएगा फिर यहां मल्टीलेवल पार्किंग समेत सभी हाईटेक सुविधाएं मिलेंगी।</p>
<p>जिससे व्यापारियों और लोगों को राहत मिलेगी। बीते बुधवार को व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने मेयर संयुक्ता भाटिया, डीएम कौशलराज शर्मा, नगर आयुक्त डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के साथ बैठक की और विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। आलमबाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया ने पहले तो बाजार में व्याप्त असुविधाएं गिनाईं फिर उन्हें दूर करने के लिए डीएम को 17 सूत्रीय सुझावों का ज्ञापन भी सौंपा।</p>
<p>जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कार्ययोजना बनानी पड़ेगी लेकिन आलमबाग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया के नेतृत्व में जो ज्ञापन व्यापारियों ने सौपा है उसमें पहले से ही कार्ययोजना बनाकर दी गयी है। उन्होंने आगे कहा कि जिन्होंने बाजार में सारे विभागों के समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की मांग की है, इस पर बैठक कर के नोडल अधिकारी तय किये जाएंगे। महापौर ने भी व्यापार मण्डल की स्थापना पर प्रकाश डाला।</p>
<p>आलमबाग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया, कार्यकारिणी अध्यक्ष विजय सेहता, संसदीय महामंत्री अतुल राजपाल, महामंत्री हसीब बबलू, सतेंद्र भवनानी, सतीश अठवानी, चंदर नगर व्यापार मण्डल से निर्मल सिंह, राज कुमार, तालकटोरा व्यापार मण्डल से संदीप कुमार राजन, आरके कन्नौजिया, परमजीत सिंह, नाटखेड़ा रोड व्यापार मण्डल से गोल्डी, एलडीए व्यापार मंडल से शौकत अली, आशियाना व्यापार मण्डल से ओपी आहूजा, आलमबाग सर्राफा एसोसिएशन से बद्री नारायण गुप्ता, सहित अन्य व्यापारी नेता, आलमबाग व्यापार मण्डल व अन्य आलमबाग परिक्षेत्र व्यापार मंडलों के पदाधिकारी व सैकड़ो व्यापारी उपस्थित रहें।</p>
<p>अध्यक्ष प्रशांत भाटिया ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित व्यावसायिक बाजार होने के कारण वेन्डिग जोन पॉलिसी के तहत आलमबाग बाजार को नो वेन्डिग जोन घोषित किया जाये। जिसपर नगर आयुक्त ने कहा कि वेंडिंग जोन के लिए 12,000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके है जल्दी ही हम इन्हें जगह एलॉट कर देंगे, फिर यह समस्या समाप्त हो जाएगी।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/alambagh.jpg"><img class="alignnone wp-image-20939 size-large" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/alambagh-1024x766.jpg" alt="alambagh" width="618" height="462" /></a></p>
<p>आलमबाग व्यापार मंडल की ओर से प्रशान्त भाटिया ने कहा कि आलमबाग बाजार की 2 किलोमीटर दूरी को देखते हुए यहां 3 पार्किंग स्थलों की आवश्यकता है। आलमबाग बाजार के उत्तरी छोर पर बंद पड़ी पार्किंग को पूर्व की तरह संचालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही पश्चिमी छोर पर भी एक अन्य पार्किंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। जिसके लिए अवध चौराहे के निकट हरदोई रोड़ बाईपास पर जगह भी उपलब्ध है।</p>
<p>इसी तरह आलगबाग बाजार के बीचों बीच लगभग 8000 स्क्वॉयर फीट नगर निगम की जमीन का उपयोग एक मल्टीलेवल पार्किंग बनाने के लिए किया जा सकता है। यदि इन तीनों पार्किंग की व्यवस्था कर दी जाती है तो आलमबाग बाजार में लगने वाले यातायात जाम की समस्या से पूरी तरह से निजात मिल जायेगी। जिसपर जिलाधिकारी ने बताया कि पार्किंग को व्यवस्थित करने के लिए एलडीए और नगर निगम का समन्वय कर उसकी व्यवस्था बनाएंगे।</p>
<p><strong>सुबह उठते ही साफ सुथरा दिखेगा बाजार</strong></p>
<p>महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि 10 यूरिनल बनाए जाएंगे जिसमे 2 पिंक टॉयलेट भी शामिल होंगे, जिसकी जगह व्यापार मंडल चिन्हित करेगा और बना कर हम देंगे। नगर निगम द्वारा बाजार को साफ सुथरा रखने के लिए समुचित संख्या में सफाई कर्मियो एवं कूड़ेदानों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। नगर आयुक्त ने बताया कि पूर्व में नाईट स्वीपिंग आलमबाग बाजार में हुई थी। उसे पुन: चालू किया जाएगा, जिससे सुबह दुकान खोलते ही बाजार साफ सुथरा नजर आए।</p>
<p><strong>अवध चौराहा बने स्मार्ट</strong></p>
<p>व्यापार मंडल ने सुझाव दिया कि अवध चौराहा को स्मार्ट बनाया जाए साथ ही इस बाजार को नो वेंडिंग जोन घोषित किया जाए। नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p><strong>ये मिलेंगी सुविधाएं</strong></p>
<p>आलमबाग बाजार को दो पार्किंग मिलेंगी<br />
एक मल्टीलेवल पार्किंग भी बनाई जाएगी<br />
10 यूरिनल बनेंगे, दो पिंक टॉयलेट भी<br />
कई स्थानों पर सीसीटीवी लगेंगे<br />
कई प्वाइंट्स पर स्ट्रीट लाइट<br />
नाइट स्वीपिंग का कार्य होगा शुरू<br />
एक पट्टी खींची जाएगी, जिसके अंदर ही दुकानें लगेंगी<br />
जेब्रा क्रॉसिंग की सुविधा, नो स्टॉप जोन<br />
फ्री लेफ्ट टर्न की सुविधा<br />
हजरतगंज की तरह सौंदर्यीकरण<br />
डीएम ने बनाई टीम, हर महीने होगी समीक्षा</p>
]]></content:encoded>
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