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	<title>Business Link &#187; व्यपार मंडल</title>
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	<description>Breaking News</description>
	<lastBuildDate>Sat, 15 Apr 2023 02:02:46 +0000</lastBuildDate>
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		<title>भवन सामग्री सस्ती फिर भी कम हुई डिमांड</title>
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		<pubDate>Mon, 09 Sep 2019 08:22:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। दबे पांव आई मंदी का असर घर बनाने वाले सामान मौरंग, गिट्टी, सीमेंट और सरिया पर भी पड़ा है। लोगों की खरीद क्षमता कम होने से भवन समाग्री की डिमांड बेहद कम हो गई है, जबकि इस सीजन में लोग घरों का निर्माण, फिनिशिंग आमतौर पर ज्यादा कराते हैं। बाजार में मांग न होने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> दबे पांव आई मंदी का असर घर बनाने वाले सामान मौरंग, गिट्टी, सीमेंट और सरिया पर भी पड़ा है। लोगों की खरीद क्षमता कम होने से भवन समाग्री की डिमांड बेहद कम हो गई है, जबकि इस सीजन में लोग घरों का निर्माण, फिनिशिंग आमतौर पर ज्यादा कराते हैं। बाजार में मांग न होने से करीब दो हजार ट्रक खड़े हो गए हैं। इससे ट्रकों के चालक पिछले करीब 20 दिन से घर में बैठे हैं। ट्रक मालिक भी किस्त आदि को लेकर परेशान हैं।</p>
<p>मांग न होने से मौरंग, गिट्टी, सीमेंट, सरिया के भाव भी कम हो गए हैं लेकिन दूसरी चीजों में महंगाई इतनी है कि आम आदमी फिलहाल घर बनवाने की सोच नहीं पा रहा है। उप्र गिट्टी मौरंग ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीप अवस्थी की माने तो पहले मौरंग और गिट्टी के भाव तेज थे। इसके चलते मांग कम थी।</p>
<p>अब भाव गिरने के बाद भी बाजार बैठ गया है। मांग बिल्कुल नहीं है। हालत यह है कि लोड ट्रक खड़े हैं लेकिन उन्हें लेने वाला कोई नहीं है। एसोसिएशन ने शासन से मांग है कि यूपी में कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू कराएं ताकि बाजार में कुछ सुधार हो सके। उन्होंने बताया कि राजधानी के आसपास करीब १० हजार ट्रक ड्राइवर प्रतिदिन माल ढोते थे। अब यह संख्या तीन से चार हजार के आसपास ही रह गई है। बाकी चालक अपने घर चले गए।</p>
<p>कारोबारी परमजीत सलूजा ने बताया कि इस मौसम में घर आदि की फिनिशिंग का काम ज्यादा होता है। इसके चलते मौरंग आदि की मांग ज्यादा रहती है लेकिन इस बार स्थिति उलट है। भाव भी कम हो गए हैं लेकिन मांग नहीं निकल रही है। इसके चलते भाव और गिरावट आई है। मोटी मौरंग 5000 रुपये की सौ फीट बिक रही है।</p>
<p>महीन मौरंग भी 7000 से 6500 रुपये सौ फीट आ गई है। कारोबारी संजय गुप्ता ने बताया कि गिट्टी के भाव भी कम हुए हैं। 4400-4500 रुपये में बिकने वाली गिट्टी 4000-4200 रुपये में मिल रही है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/Bulding.jpg"><img class="alignnone  wp-image-21139" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/09/Bulding.jpg" alt="Bulding" width="832" height="510" /></a></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>सीमेंट कारोबारी निखिलेश दुबे ने बताया कि मौजूदा समय में सीमेंट के भाव भी कम हो गए हैं। 380 रुपये प्रति पैकेट वाली सीमेंट 365 रुपये में आ गई है।</strong></span></p></blockquote>
<p>मांग में 20 से 25 फीसदी की गिरावट आई है। सरिया और लोहा व्यापारी की माने तो सरिया की मांग इस समय 15-20 फीसदी घटी है। भाव भी इस समय सबसे कम हैं। 42-43 रुपये किलो बिकने वाली सरिया के भाव सात से आठ रुपये प्रति किलो कम हुए हैं। आमतौर पर प्रतिदिन दो से ढ़ाई हजार टन सरिया की खपत रहती है, जो गिरकर काफी कम हो गयी है।</p>
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		<title>अब सर्राफा दुकानों में पैनिक बटन की तैयारी, पुलिस रहेगी अलर्ट</title>
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		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 08:09:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[थानों से लिंक होगा पैनिक बटन, बटन दबाते ही मिनटों में पहुंच जाएगी पुलिस सर्राफा कारोबारियों संग हुई लूट की घटनाओं को देखते हुए उठाया जा रहा कदम लखनऊ। राजधानी में सर्राफा दुकानों में होने वाली लुट की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अब वहां पैनिक बटन लगाने की तैयारी चल रही है। लुटेरों &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>थानों से लिंक होगा पैनिक बटन, बटन दबाते ही मिनटों में पहुंच जाएगी पुलिस</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>सर्राफा कारोबारियों संग हुई लूट की घटनाओं को देखते हुए उठाया जा रहा कदम</strong></span></li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी में सर्राफा दुकानों में होने वाली लुट की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अब वहां पैनिक बटन लगाने की तैयारी चल रही है। लुटेरों के दुकान में दाखिल होते ही सर्राफा व्यवसाई पैनिक बटन दबाएंगे और पलक झपकते ही पुलिस मौके पर पहुंच जाएगी। इस व्यवस्था को लेकर जल्द ही पुलिस और सर्राफा कारोबारी बैठक करेंगे।</p>
<p>सर्राफा कारोबारियों के अनुसार सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें पैनिक बटन लगाने की सुविधा मिलनी चाहिए। प्रशासन भी इन व्यापारियों की मांग को गंभीरता से ले रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही यह पहल शुरू हो जाएगी। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार शहर में लुटेरों का सॉफ्ट टारगेट वे ही होते हैं। सीसीटीवी लगवाने के बाद भी उनके साथ होने वाली लूट की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं।</p>
<p>कई बार तो लुटेरे सीसीटीवी तक अपने साथ उखाड़कर ले जाते हैं। पुलिस का भी ध्यान उनकी सुरक्षा पर तभी जाता है, जब कोई लूट की घटना हो जाती है। ऐसे में कोई ऐसा उपाय करने की आवश्यकता है जिससे जैसे ही उनके साथ वारदात हो, तुरंत पुलिस तक इसकी सूचना पहुंच जाए और उन्हें मदद मिले।</p>
<p>सर्राफा कारोबारी डिमांड कर रहे हैं कि राजधानी की सभी सर्राफा दुकानों में सीसीटीवी और शटल सायरन के साथ पैनिक बटन लगवाए। पैनिक बटन डायल 100 के साथ ही संबंधित क्षेत्र के थाने और चौकियों से भी लिंक किए जाएं, जिससे पल भर में पुलिस वहां तक पहुंच सके। व्यापारियों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो निश्ििचत रूप से उनके साथ होने वाली लूट की घटनाओं में कमी आएगी।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/shopping-in-aminabad-lucknow.jpg"><img class="alignnone wp-image-20913 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/shopping-in-aminabad-lucknow.jpg" alt="shopping-in-aminabad-lucknow" width="833" height="623" /></a></p>
<h3><span style="color: #0000ff;">    ये उपकरण लगेंगे</span></h3>
<ul>
<li><span style="color: #0000ff;">पैनिक बटन</span></li>
<li><span style="color: #0000ff;">शटल वाले सायरन</span></li>
<li><span style="color: #0000ff;">सीसीटीवी</span></li>
</ul>
<h3><span style="color: #ff0000;">प्रमुख सर्राफा बाजार</span></h3>
<h3><span style="color: #ff0000;">चौक सर्राफा बाजार</span><br />
<span style="color: #ff0000;">आलमबाग सर्राफा बाजार</span><br />
<span style="color: #ff0000;">निशातगंज सर्राफा बाजार</span><br />
<span style="color: #ff0000;">गोल मार्केट सर्राफा बाजार</span><br />
<span style="color: #ff0000;">डंडइया सर्राफा बाजार</span><br />
<span style="color: #ff0000;">भूतनाथ सर्राफा बाजार</span><br />
<span style="color: #ff0000;">हजरतगंज सर्राफा बाजार</span><br />
<span style="color: #ff0000;">गोमती नगर सर्राफा बाजार</span></h3>
]]></content:encoded>
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		<title>राजनीति में रहना है तो चर्चा और पर्चा में बने रहें नेता: नरेश</title>
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		<pubDate>Mon, 29 Jul 2019 08:34:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। पूर्व मंत्री व भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि केन्द्र व राज्य में पहली बार ऐसी सरकार बनी है जो व्यापरियों के हितों की चिन्ता कर रही है। व्यापारी आयोग के गठन पर सरकार गम्भीरता से विचार कर रही है। इसके अलावा व्यापारी पेंशन व व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना का &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> पूर्व मंत्री व भाजपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि केन्द्र व राज्य में पहली बार ऐसी सरकार बनी है जो व्यापरियों के हितों की चिन्ता कर रही है। व्यापारी आयोग के गठन पर सरकार गम्भीरता से विचार कर रही है। इसके अलावा व्यापारी पेंशन व व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना का लाभ भी वर्तमान में मिल रहा है या जल्द मिलने वाला है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन की ओर से आयोजित पदाधिकारियों के सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। विधान सभा मार्ग स्थित मैरियाड बैंकट्स हॉल में आयोजित इस सम्मेलन में नरेश अग्रवाल ने कहा कि देश के विकास में व्यापारियों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और न ही नजरअंदाज किया जा सकता है। उन्होंने संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को भी राजनीति में आने की नसीहत दी और कहा कि प्रयास यहीं करों की आप हमेशा चर्चाओं में बने रहो क्योंकि चर्चा में रहोगे तो पर्चा में रहोगे और पर्चा में रहोगे तो राजनीति में रहोगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मंत्री स्वाती सिंह ने कभी नहीं सोचा होगा कि वो राजनीति में जाएंगी लेकिन परिस्थितियों कुछ ऐसी अनुकुल हो गई कि वो आज सरकार में मंत्री हैं। राजनीति में कभी-कभी निर्णय जल्दी ले लिए जाते हैं। आपको ऐसे झंडे को भांप कर अपने आप को प्रदर्शित करने की बात कही।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सत्ता की कुंजी के नजदीक पहुंचने के लिए हम प्रयास नहीं करेंगे तो हमे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमे यह सुनकर काफी अच्छा लगा कि यूपी में होने वाले उपचुनाव में संगठन से जुड़े दो लोग टिकट की मांग कर रहे हैं।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/IMG-20190721-WA0006.jpg"><img class="alignnone wp-image-21032 size-large" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/IMG-20190721-WA0006-1024x768.jpg" alt="IMG-20190721-WA0006" width="618" height="464" /></a></p>
<p>मौके पर उन्होंने सपा, बसपा व कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सपा दो जातियों की पार्टी है जबकि बसपा एक जाति की और कांग्रेस तो जातिविहीन पार्टी है। उन्होंने कहा कि जब सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था तब मैने कहा कि था कि चुनाव परिणाम के बाद मायावती सपा को लात मारेगी और वहीं हुआ मायावती ने सपा से कुटनीति के तहत बदला लिया है।</p>
<p>इस मौके पर बृजेश शुक्ला, अचल अग्रवाल, अमित अग्रवाल, सतनाम सेठी, पुष्पेन्द्र अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, डा. एसके जैन, नरेश गोयल, कृष्ण गोपाल मित्तल, डा. वीरेन्द्र गुप्ता, विजय सिंह, सहित बड़ी संख्या में व्यापारी नेता मौजूद थे।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>बंपर तबादले, 681 अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल</title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jul 2019 07:22:25 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[एडिशनल कमिश्नर स्तर के 31 व 33 ज्वाइंट कमिश्नर इधर से उधर 112 डिप्टी कमिश्नर, 505 सीटीओ समेत 37 सांख्यिकी अधिकारी भी बदले लखनऊ। सरकार की ओर से घोषित स्थानांतरण की समय सीमा बीतने के दो दिन बाद बीते 2 जुलाई को वाणिज्यकर विभाग ने अधिकारियों के बंपर तबादले किए हैं। हालांकि इसकी सूची बीते &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<ul>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>एडिशनल कमिश्नर स्तर के 31 व 33 ज्वाइंट कमिश्नर इधर से उधर</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff0000;"><strong>112 डिप्टी कमिश्नर, 505 सीटीओ समेत 37 सांख्यिकी अधिकारी भी बदले</strong></span></li>
</ul>
</blockquote>
<p><strong>लखनऊ।</strong> सरकार की ओर से घोषित स्थानांतरण की समय सीमा बीतने के दो दिन बाद बीते 2 जुलाई को वाणिज्यकर विभाग ने अधिकारियों के बंपर तबादले किए हैं। हालांकि इसकी सूची बीते बुधवार को जारी की गई है। विभाग के कुल 681 अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है।</p>
<p>इनमें एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 के 8 और ग्रेड-2 के 23 अधिकारियों के साथ ही 33 ज्वाइंट कमिश्नर शामिल हैं। जबकि 112 डिप्टी कमिश्नर, 505 वाणिज्यकर अधिकारियों (सीटीओ) के भी तबादले किए गए हैं। इनके अलावा 22 सांख्यिकी अधिकारी और 15 अपर सांख्यिकी अधिकारियों के भी कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया गया है।</p>
<p>एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 के अधिकारियों में संपूर्णानंद पांडेय को आगरा से मेरठ जबकि विजय नंदन सिन्हा को मेरठ से अलीगढ़ में तैनाती दी गई है। इनके अलावा गाजियाबाद जोन-2 में तैनात राकेश कुमार-तृतीय को आगरा और मुरादाबाद अपील में तैनात प्रदीप कुमार सिंह-प्रथम को झांसी का एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 बनाया गया है।</p>
<p>संजीव कुमार को बरेली से गाजियाबाद जोन-2, अरविंद कुमार- द्वित्तीय को गाजियाबाद जोन-1, शेषमणि शर्मा को गोरखपुर और मुक्तिनाथ वर्मा को बरेली स्थानांतरित किया गया है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>ज्वाइंट कमिश्नर को यहां मिली नई तैनाती</strong></span></h3>
<p>एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 बृजेश कुमार त्रिपाठी को विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईटी) लखनऊ के जोन-1 और नव पदोन्नत राम सनेही विद्यार्थी को एसआईटी जोन-2 में स्थानांतरित किया गया है। ये अब तक बांदा में तैनात थे। इसी तरह एसआईटी प्रयागराज में तैनात रामप्रसाद-प्रथम को लखनऊ में उच्च न्यायालय कार्य और राम नवग्रह को एसआईटी मेरठ से सचिवालय में तैनात किया गया है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/07/salestax.jpg"><img class="alignnone wp-image-4166 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/07/salestax.jpg" alt="salestax" width="621" height="529" /></a></p>
<p>अरविंद कुमार-द्वितीय को (अपील) मथुरा से मुख्यालय लखनऊ, इंद्र प्रकाश को अपील-चतुर्थ लखनऊ से एसआईटी गाजियाबाद जोन-1, राजीव मणि त्रिपाठी को अपील-प्रथम अयोध्या से एसआईटी वाराणसी जोन-2, सूर्य नारायण को अपील-चतुर्थ गाजियाबाद से एसआईटी अयोध्या, डॉ. रवीन्द्र नाथ शुक्ला एसआईटी अयोध्या से अपील-पंचम कानपुर भेजा गया है।</p>
<p>इसी तरह अनंजय कुमार राय को एसआईटी जोन-1 लखनऊ से अपील अलीगढ़, संतोष कुमार-प्रथम को एसआईटी जोन-1 लखनऊ से उप्र शासन, शशि भूषण सिंह-प्रथम को जीएसटी से एसआईटी मेरठ, दिग्विजय नाथ सिंह को एसआईटी कानपुर से एसआईटी आगर में तैनात किया गया है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>डीसी की लिस्ट जारी होने से पहले ही वायरल हो गई थी</strong></span></h3>
<p>एडीशनल व ज्वाइंट कमिश्नरों के तबादले की सूची बीते बुधवार को सुबह जारी तो कर दी गई, लेकिन डिप्टी व असिस्टेंट कमिश्नर की सूची जारी नहीं हो सकी थी। इसके बावजूद डिप्टी कमिश्नरों के तबादले की सूची सुबह से ही सोशल मीडिया पर घूम रही थी। हालांकि देर शाम 112 डिप्टी कमिश्नरों के तबादले की सूची जारी कर दी गई।</p>
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		<title>आलमबाग को हजरतगंज बनाने की तैयारी</title>
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		<pubDate>Mon, 24 Jun 2019 08:32:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[जिलाधिकारी ने बनायी असरों की टोली, हर महीने होगी समीक्षा बैठक बाजार बनेगा नो वेंडिंग जोन, बाजार को मिलेगी 2 पार्किंग  महापौर के साथ अधिकारियों ने खींचा खाका लखनऊ। आलमबाग बाजार को स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पहले बाजार एरिया को नो वेंडिंग जोन घोषित किया जाएगा फिर यहां मल्टीलेवल पार्किंग समेत &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>
<h3><strong>जिलाधिकारी ने बनायी असरों की टोली, हर महीने होगी समीक्षा बैठक</strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>बाजार बनेगा नो वेंडिंग जोन, बाजार को मिलेगी 2 पार्किंग </strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>महापौर के साथ अधिकारियों ने खींचा खाका</strong></h3>
</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> आलमबाग बाजार को स्मार्ट बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पहले बाजार एरिया को नो वेंडिंग जोन घोषित किया जाएगा फिर यहां मल्टीलेवल पार्किंग समेत सभी हाईटेक सुविधाएं मिलेंगी।</p>
<p>जिससे व्यापारियों और लोगों को राहत मिलेगी। बीते बुधवार को व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने मेयर संयुक्ता भाटिया, डीएम कौशलराज शर्मा, नगर आयुक्त डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी के साथ बैठक की और विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। आलमबाग व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया ने पहले तो बाजार में व्याप्त असुविधाएं गिनाईं फिर उन्हें दूर करने के लिए डीएम को 17 सूत्रीय सुझावों का ज्ञापन भी सौंपा।</p>
<p>जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कार्ययोजना बनानी पड़ेगी लेकिन आलमबाग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया के नेतृत्व में जो ज्ञापन व्यापारियों ने सौपा है उसमें पहले से ही कार्ययोजना बनाकर दी गयी है। उन्होंने आगे कहा कि जिन्होंने बाजार में सारे विभागों के समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की मांग की है, इस पर बैठक कर के नोडल अधिकारी तय किये जाएंगे। महापौर ने भी व्यापार मण्डल की स्थापना पर प्रकाश डाला।</p>
<p>आलमबाग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष प्रशांत भाटिया, कार्यकारिणी अध्यक्ष विजय सेहता, संसदीय महामंत्री अतुल राजपाल, महामंत्री हसीब बबलू, सतेंद्र भवनानी, सतीश अठवानी, चंदर नगर व्यापार मण्डल से निर्मल सिंह, राज कुमार, तालकटोरा व्यापार मण्डल से संदीप कुमार राजन, आरके कन्नौजिया, परमजीत सिंह, नाटखेड़ा रोड व्यापार मण्डल से गोल्डी, एलडीए व्यापार मंडल से शौकत अली, आशियाना व्यापार मण्डल से ओपी आहूजा, आलमबाग सर्राफा एसोसिएशन से बद्री नारायण गुप्ता, सहित अन्य व्यापारी नेता, आलमबाग व्यापार मण्डल व अन्य आलमबाग परिक्षेत्र व्यापार मंडलों के पदाधिकारी व सैकड़ो व्यापारी उपस्थित रहें।</p>
<p>अध्यक्ष प्रशांत भाटिया ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित व्यावसायिक बाजार होने के कारण वेन्डिग जोन पॉलिसी के तहत आलमबाग बाजार को नो वेन्डिग जोन घोषित किया जाये। जिसपर नगर आयुक्त ने कहा कि वेंडिंग जोन के लिए 12,000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके है जल्दी ही हम इन्हें जगह एलॉट कर देंगे, फिर यह समस्या समाप्त हो जाएगी।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/alambagh.jpg"><img class="alignnone wp-image-20939 size-large" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/alambagh-1024x766.jpg" alt="alambagh" width="618" height="462" /></a></p>
<p>आलमबाग व्यापार मंडल की ओर से प्रशान्त भाटिया ने कहा कि आलमबाग बाजार की 2 किलोमीटर दूरी को देखते हुए यहां 3 पार्किंग स्थलों की आवश्यकता है। आलमबाग बाजार के उत्तरी छोर पर बंद पड़ी पार्किंग को पूर्व की तरह संचालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही पश्चिमी छोर पर भी एक अन्य पार्किंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। जिसके लिए अवध चौराहे के निकट हरदोई रोड़ बाईपास पर जगह भी उपलब्ध है।</p>
<p>इसी तरह आलगबाग बाजार के बीचों बीच लगभग 8000 स्क्वॉयर फीट नगर निगम की जमीन का उपयोग एक मल्टीलेवल पार्किंग बनाने के लिए किया जा सकता है। यदि इन तीनों पार्किंग की व्यवस्था कर दी जाती है तो आलमबाग बाजार में लगने वाले यातायात जाम की समस्या से पूरी तरह से निजात मिल जायेगी। जिसपर जिलाधिकारी ने बताया कि पार्किंग को व्यवस्थित करने के लिए एलडीए और नगर निगम का समन्वय कर उसकी व्यवस्था बनाएंगे।</p>
<p><strong>सुबह उठते ही साफ सुथरा दिखेगा बाजार</strong></p>
<p>महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि 10 यूरिनल बनाए जाएंगे जिसमे 2 पिंक टॉयलेट भी शामिल होंगे, जिसकी जगह व्यापार मंडल चिन्हित करेगा और बना कर हम देंगे। नगर निगम द्वारा बाजार को साफ सुथरा रखने के लिए समुचित संख्या में सफाई कर्मियो एवं कूड़ेदानों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। नगर आयुक्त ने बताया कि पूर्व में नाईट स्वीपिंग आलमबाग बाजार में हुई थी। उसे पुन: चालू किया जाएगा, जिससे सुबह दुकान खोलते ही बाजार साफ सुथरा नजर आए।</p>
<p><strong>अवध चौराहा बने स्मार्ट</strong></p>
<p>व्यापार मंडल ने सुझाव दिया कि अवध चौराहा को स्मार्ट बनाया जाए साथ ही इस बाजार को नो वेंडिंग जोन घोषित किया जाए। नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p><strong>ये मिलेंगी सुविधाएं</strong></p>
<p>आलमबाग बाजार को दो पार्किंग मिलेंगी<br />
एक मल्टीलेवल पार्किंग भी बनाई जाएगी<br />
10 यूरिनल बनेंगे, दो पिंक टॉयलेट भी<br />
कई स्थानों पर सीसीटीवी लगेंगे<br />
कई प्वाइंट्स पर स्ट्रीट लाइट<br />
नाइट स्वीपिंग का कार्य होगा शुरू<br />
एक पट्टी खींची जाएगी, जिसके अंदर ही दुकानें लगेंगी<br />
जेब्रा क्रॉसिंग की सुविधा, नो स्टॉप जोन<br />
फ्री लेफ्ट टर्न की सुविधा<br />
हजरतगंज की तरह सौंदर्यीकरण<br />
डीएम ने बनाई टीम, हर महीने होगी समीक्षा</p>
]]></content:encoded>
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		<title>घनी बाजारों में किसका खौफ!</title>
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		<pubDate>Mon, 17 Jun 2019 08:05:16 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[राजनीति की आड़ में व्यापारी लगाते हैं राजस्व को चूना वाणिज्य कर अधिकारी खाौफ में नहीं मारते छापा व्यापारी राजनीति को फं्रट में रखकर अधिकारियों को लेते हैं रौब में  व्यापार मंडल के कई धुरंधर नेता कराते है टैक्स चोरी कुछ बड़ेे व्यापारियों ने अधिकारियों से पूरे बाजार की कर रखी है सेटिंग लखनऊ। राजधानी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>
<h3><strong>राजनीति की आड़ में व्यापारी लगाते हैं राजस्व को चूना</strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>वाणिज्य कर अधिकारी खाौफ में नहीं मारते छापा</strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>व्यापारी राजनीति को फं्रट में रखकर अधिकारियों को लेते हैं रौब में </strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>व्यापार मंडल के कई धुरंधर नेता कराते है टैक्स चोरी</strong></h3>
</li>
<li>
<h3><strong>कुछ बड़ेे व्यापारियों ने अधिकारियों से पूरे बाजार की कर रखी है सेटिंग</strong></h3>
</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी में ७00 व्यापार मंडल की पूरी सेना है। जो व्यापारी उत्पीडऩ और समस्याओं के लिए हमेशा कार्य करने का दावा करते रहे हैं। पर व्यापारियों की इस फौज का डर कुछ ऐसा है कि वाणिज्य कर अधिकारी शहर की कुछ खास बाजारों में सिर्फ जागरूकता के लिए ही पहुंच पाते है।</p>
<p>उनकी इतनी हिम्मत नहीं हो पाती है कि वे इन व्यापारियों की फौज का सामना कर पाये। ये बात किसी से छिपी हुई नहीं है कि व्यापारी नेता सियासी दलों को चमका रहे हैं और वे दल उनको पूरा संरक्षण देते है।</p>
<p>अब दूसरे पहलू को देखें तो आए दिन व्यापारी उत्पीडऩ के मामले सामने आते हैं। लेकिन उनके पीछे उत्पीडऩ का आरोप वाणिज्य कर अधिकारियों पर ही थोपा जाता है, हालांकि इसमें कोई गुरेज नहीं है। लेकिन मजे की बात ये है कि वाणिज्य कर विभाग के आलाधिकारी शहर की कई पुरानी बाजारों तक जांच या छापा मारने आखिर क्यों नहीं पहुंंचते है।</p>
<p>इस सवाल के जवाब में अनौपचारिक रूप से कई अधिकारी मानते हैं कि उन्होंने यदि प्राचीन बाजारों में छापा मारा तो उन्हें भारी विरोध या मारपीट का सामना करना पड़ सकता है। इस डर के चलते अधिकारी अमीनाबाद, नक्खास, पांडेयगंज, यहियागंज, चारबाग, चौक, लाटूश रोड, रकाबगंज आदि प्राचीन बाजारों में जाने से कतराते है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/shopping-in-aminabad-lucknow.jpg"><img class="alignnone  wp-image-20913" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/shopping-in-aminabad-lucknow-300x224.jpg" alt="shopping-in-aminabad-lucknow" width="544" height="406" /></a></p>
<p>बताया जाता है कि इन क्षेत्रों में कई व्यापारी नेताओं की धमक के आगे वाणिज्य कर अधिकारी अपने को बौना समझते है। करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाले बड़े कारोबारियों का गढ़ कहलाये जाने वाले इन बाजारों में करोड़ों की टैक्स चोरी भले ही हो जाए लेकिन यहां जांच करने की हिम्मत जुटा पाना अधिकारियों के लिए आसान नहीं है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>व्यापार मंडल की फौज के आगे अधिकारी बौने साबित</strong></span></p>
<p>शहर में चलने वाली वाणिज्यकर विभाग की जांच टीम शहर की प्राचीन बाजारों में छापे डालने व जांच करने में असमर्थ रही है। पिछले कई सालों में इन प्राचीन बाजारों में डर के चलते या व्यापारी नेताओं के दबाव की वजह से अधिकारी जांच करने नहीं जाते है। हर बड़ी बाजार में व्यापारियों की फौज के आगे अधिकारी बौने साबित होते रहे है, यही वजह है कि बाजारों में करोड़ों की टैक्स चोरी प्रतिदिन की जा रही है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>रौब इतना कि नहीं बनाते बिल</strong></span></p>
<p>इन बड़ी बाजारों के बड़े शो-रूम को छोड़ दिया जाए तो किसी भी दुकान में ग्राहकों को पक्का बिल नहीं दिया जाता है, जिसकी आड़ में कारोबार जीएसटी में खूब खेल करते है। क्योंकि कच्चे मॉल के हिसाब के बजाए वह अपने हिसाब से तय करते है और उन पर जीएसटी देनी है या नहीं उसके मालिक वे खुद होते हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>पहले ही हो जाती है सेङ्क्षटग</strong></span></p>
<p>यदि कारोबारियों को जांच या छापे की खबर लगती है तो पहले ही संबंधित अधिकारी से सेङ्क्षटग हो जाती है ताकि दुकान पर छापा न पड़े। मजे की बात तो ये भी पता चली है कि छापे की सूचना व्यापारियों को वाणिज्यकर स्टॉफ के लोग ही पहुंचाते है। इसके बदले उनको भी मुंह दिखाई कारोबारियों की तरफ से मिलती है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>छापा पड़े तो खुलेेंगे कई दबे राज</strong></span></p>
<p>सूत्र बताते है कि यदि कारोबारियों और वाणिज्य कर अधिकारियों की पोल खोलनी हो तो प्राचीन बाजारों में छापेमारी की जाएं, जिससे इन बाजारों में दबे हुए राज सामने आ सके और टैक्सचोरी का पर्दाफाश हो। हालांकि इन इलाकों के कारोबारियों ने अधिकारियों से सेटिंग ऐसी बैठा रखी है कि अधिकारी वहां तक पहुंचते ही नहीं है।</p>
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		<item>
		<title>टेंट कारोबारियों में अवैध वसूली को लेकर गुस्सा बढ़ा</title>
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		<pubDate>Tue, 11 Jun 2019 07:12:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता के नेतृत्व में एलडीए सचिव को ज्ञापन सौंपकर ठेका व्यवस्था वापस लेने तथा गेटपास के नाम पर हो रही वसूली तथा एकाधिकार खत्म करने की मांग की। एलडीए सचिव ने व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है। उत्तर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता के नेतृत्व में एलडीए सचिव को ज्ञापन सौंपकर ठेका व्यवस्था वापस लेने तथा गेटपास के नाम पर हो रही वसूली तथा एकाधिकार खत्म करने की मांग की। एलडीए सचिव ने व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल से संबद्ध लखनऊ आदर्श टेंट एसोसिएशन के तत्वाधान में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय गुप्ता के नेतृत्व में राजधानी के टेंट एवं कैटरिंग व्यापारियों का 25 सदसयीय प्रतिनिधि मंडल एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कन्नौजिया के साथ लखनऊ विकास प्राधिकरण के सचिव मंगला प्रसाद सिंह से मिला।</p>
<p>व्यापारी नेता संजय गुप्ता ने सचिव को एलडीए के सामुदायिक केंद्रों में टेंट व्यवसायियों से गेट पास के नाम पर की जा रही वसूली की जानकारी देते हुए उनसे इस विषय पर हस्तक्षेप करते हुए इसे रोकने की बात कहीं।</p>
<p>लखनऊ आदर्श टेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कन्नौजिया ने एलडीए सचिव को ज्ञापन देते हुए कहा कि सामुदायिक केंद्रों को ठेके पर उठाने से आम जनता एवं टेन्ट कैटरिंग, फ्लावर डेकोरेशन, लाइट साउंड सभी क्षेत्रों के व्यापारियों का गेट पास के नाम पर वसूली कर के आर्थिक शोषण किया जा रहा है जो कि सर्वथा अनुचित है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/qoo_1494547958.jpg"><img class="alignnone  wp-image-20888" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/qoo_1494547958-300x233.jpg" alt="qoo_1494547958" width="543" height="422" /></a></p>
<p>विजय कनौजिया ने कहा ठेके पर सामुदायिक केंद्रों को दिए जाने के कारण एकाधिकार व्यवस्था शुरू हो गई है, जिससे आम जनता के भी हित प्रभावित हो रहे हैं तथा उन्हें मनमाने दामों पर बाध्यकारी रूप से उन्हीं लोगों से महंगी दरों पर कार्य कराने हेतु विवश होना पड़ रहा है। जिसे ठेकेदार ने अधिकृत किया है। सचिव मंगला प्रसाद ने व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए परीक्षण के बाद समुचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता, लखनऊ आदर्श टेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कन्नौजिया, ऋत्विक जयसवाल, शिव अजवानी, सोनू शुक्ला, मनोज यादव, काका, अभिषेक वोहरा, राजेश कंधारी, विनय चौधरी, उदय शंकर मेहरोत्रा, सुधांशु दीक्षित, अनूप सोनकर, अफजल, विवेक गुप्ता, विक्की बोहरा सहित अनेक पदाधिकारी शामिल थे।</p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>छापा पड़ते ही जमा हुआ तीन करोड़ टैक्स</title>
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		<pubDate>Mon, 18 Mar 2019 06:20:20 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[एसआईबी टीम ने रिटर्न न फाइल करने वाली बड़ी फर्मों पर कसा शिकंजा सेवाकर क्षेत्र में पंजीकृत हैं सभी फर्में लखनऊ। वाणिज्य कर विभाग की विशेष जांच टीम (एसआईबी) ने सेवाकर में पंजीकृत तीन फर्मो पर छापा- मारकर करीब तीन करोड़ का भारी भरकम टैक्स जमा कराया है। हालांकि इस कार्रवाई को टैक्सचोरी की संज्ञा &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000">एसआईबी टीम ने रिटर्न न फाइल करने वाली बड़ी फर्मों पर कसा शिकंजा</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000">सेवाकर क्षेत्र में पंजीकृत हैं सभी फर्में</span></strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> वाणिज्य कर विभाग की विशेष जांच टीम (एसआईबी) ने सेवाकर में पंजीकृत तीन फर्मो पर छापा- मारकर करीब तीन करोड़ का भारी भरकम टैक्स जमा कराया है। हालांकि इस कार्रवाई को टैक्सचोरी की संज्ञा तो नहीं दी जा सकती, लेकिन सरकारी राजस्व को दबाकर रखने का मामला जरूर बनता है। इस मामले की खास बात ये है कि लखनऊ जोन प्रथम के अधिकारियों ने जिन फर्मो पर कार्रवाई की है, ये सभी सेवाकर में पंजीकृत हैं, जिनसे टैक्स वसूल करने की पहली जिम्मेदारी सेन्ट्रल एक्साइज विभाग की बनती है। अब इन फर्मो से वसूला गया कर एवं जुर्माना दोनों ही विभागों के मद में जाएगा।</p>
<p>दरअसल लखनऊ जोन प्रथम की विशेष जांच टीम (एसआईबी) के चीफ अनंजय कुमार राय ऐसी बड़ी फर्मो के ऑनलाइन रिटर्न की जांच करा रहे हैं, जो कारोबार करने के बाद भी रिटर्न नहीं फाइल कर रहे हैं। इसमें विशेष कर कंस्ट्रक्श्न कम्पनियां व सरकारी विभागों की ठेकेदारी फर्मे हैं, जिनका करोड़ों का कारोबार उनको रडार पर रखा गया है। इसी रिसर्च के दौरान एसएस कंस्ट्रक्शन कम्पनी जो औरंगाबाद लखनऊ के पते पर पंजीकृत है। नजर में आयी एसआईबी चीफ ने फर्म के रिटर्न के जांच की जिम्मेदारी ज्वाइंट कमिश्नर राजेश सिंह को सौंपी। जांच आगे बढऩे पर पता चला कि फर्म द्वारा ई-वे बिल के माध्यम से भारी मात्रा में भवन निर्माण की सामाग्री तो मंगायी जा रही है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2018-19 का रिटर्न नहीं दाखिल किया गया है। इसके बाद फर्म पर ज्वाइंट कमिश्नर राजेश सिंह व डिप्टी कमिश्नर डा. मुकेश व वाणिज्य कर अधिकारी अभिषेक निगम ने छापा-मार दिया। प्रपत्रों की जांच करने पर पता चला कि फर्म ने केवल अप्रैल 2018 में जीएसटीआर-3 बी दाखिल किया था इसके बाद कोई रिटर्न दाखिल ही नहीं किया।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/ddd.jpg"><img class="alignnone wp-image-16818 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/ddd.jpg" alt="ddd" width="832" height="709" /></a></p>
<p>बताते चलें कि टैक्स प्रणाली का ये वह प्रारूप होता है, जिसमें कारोबारी को हर माह की खरीद/ बिक्री पिछले व्यापारी को दिया गया टैक्स (इनपुट क्रेडिट टैक्स) को समायोजित करने के बाद खुद पर बनी टैक्स की देनदारी का विवरण देना होता है। इसके अलावा फर्म द्वारा जीएसटीआर-1 भी नहीं दाखिल किया गया था, जिसमें कारोबारी को यह बताना होता है, उसने किस बिल नम्बर से किस व्यापारी को माल बेचा, क्योंकि जीएसटी में माल बेचने वाले व खरीदने वाले दोनों ही व्यापारियों की इनवाइज का मिलान होना जरूरी है, इसके आधार पर व्यापारी को इनपुट के्रडिट टैक्स का लाभ मिलता है।</p>
<p>जांच में खुलासा हुआ है की फर्म का अप्रैल 2018 से जनवरी 2019 तक कुल दस माह का कोई रिटर्न तो दाखिल नहीं किया गया जबकि फर्म को 34 करोड़ 87 लाख का भुगतान प्राप्त किया गया। फर्म पर शिकंजा कसते ही 2 करोड़ 12 लाख का स्वीकृत टैक्स वसूल किया गया। विभाग अब इस धनराशि पर ब्याज की वसूली का भी प्रयास कर रहा है। इसी तरह सीपेल कंस्ट्रक्शन कंपनी की भी जांच इसी टीम द्वारा की गयी, इस फर्म ने नवम्बर 2018 की जीएसटीआर-3 नहीं दाखिल किया, जबकि फर्म की वित्तीय वर्ष 2017-18 की घोषित सप्लाई 23 करोड़ थी, लेकिन फर्म ने कोई टैक्स नहीं जमा किया।</p>
<p>एसआईबी चीफ अनंजय कुमार राय के निर्देश पर फर्म पर भी छापा- मारा इसके बाद 60 लाख का देय टैक्स वसूल कर लिया गया है, जबकि 12 लाख ब्याज के रूप में वसूल करने की कार्रवाई चल रही है। इसी तरह एक अन्य मामले में मेसर्स नाइट डिडेक्टिव एंड सिक्योरिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड पर भी छापा मारा गया। इस फर्म द्वारा अप्रैल 2018-19 का जीएसटीआर-3 बी नहीं दाखिल किया गया था। इस फर्म ने सितम्बर 2018 में जीएसटीआर-3 बी दाखिल किया था, जिसमें 2 करोड़ 80 लाख का टर्नओवर घोषित किया गया था। इस फर्म से 29 लाख का टैक्स जमा कराया गया है, जबकि 20 लाख का टैक्स जमा होना है। इस तरह से इन तीनों मामलों को मिलाकर कुल 3 करोड़ का टैक्स वसूला गया है।</p>
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		<title>वाणिज्यकर के आगे जीएसटी फेल!</title>
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		<pubDate>Mon, 11 Mar 2019 08:48:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[आठ माह तक होता रहा व्यापारियों का उत्पीडऩ अधिकारियों को जारी हुई नोटिस, संघ ने दिया ज्ञापन वाणिज्य कर मुख्यालय के अधिकारियों ने जीएसटी से इतर बना दिये अपने नियम बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। सूबे के मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों वाणिज्य कर सेवा संघ के अधिवेशन में अधिकारियों को प्रदेश का राजस्व बढ़ाने की नसीहत &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>आठ माह तक होता रहा व्यापारियों का उत्पीडऩ </strong></li>
<li><strong>अधिकारियों को जारी हुई नोटिस, संघ ने दिया ज्ञापन</strong></li>
<li><strong>वाणिज्य कर मुख्यालय के अधिकारियों ने जीएसटी से इतर बना दिये अपने नियम</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong><br />
<strong>लखनऊ।</strong> सूबे के मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों वाणिज्य कर सेवा संघ के अधिवेशन में अधिकारियों को प्रदेश का राजस्व बढ़ाने की नसीहत तो दी थी, इसका वाणिज्य कर मुख्यालय में तैनात अधिकारियों पर ऐसा असर पड़ा कि उन्होंने जीएसटी नियमों को दर किनार कर अपने एक अलग ही नियम की संरचना कर डाली है। नियम के इन वैज्ञानिकों की मंशा भले ही विभाग का राजस्व बढ़ाने की हो, लेकिन इस नियम से प्रदेश ही नहीं देश भर के व्यापारियों का इतना उत्पीडऩ हुआ कि मामला जीएसटी काउन्सिल तक पहुंच चुका है, काउन्सिल की दखल के बाद ये नियम तो खारिज हो गया लेकिन विभाग की सचल दल यूनिटों में तैनात असिस्टेन्ट कमिश्नर इस &#8216;वायरसÓ की जद में आ गये और नतीजा ये रहा कि दर्जनों अधिकारियों को नोटिस जारी हो गये। हैरत की बात ये है कि इन अधिकारियों को नोटिस इसलिए जारी हुई कि उन्होंने जीएसटी काउन्सिल द्वारा आदेश को खारिज किये जाने से पहले उस आदेश का पालन प्रवर्तन कार्यों में क्यों नहीं किया। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश भर में घमासान मच गया है और अधिकारी संघ के अध्यक्ष सुनील कुमार वर्मा मोर्चा संभालते हुए कमिश्नर अमृता सोनी को ज्ञापन देकर इस कार्रवाई को उत्पीडऩ करार दिया है। सवाल ये है कि जीएसटी काउन्सिल ने करनिर्धारण की जो व्याख्या की है उसमें सचल दल अधिकारियों को निर्णय लिए जाने की शक्ति प्रदान की गयी है और हर विषय के लिए नियम भी तय है, तो मुख्यालय के अधिकारी खुद किस अधिकार से नियम बना रहे है और अधिकारियों पर कार्रवाई कर रहे हैं। इसकी जांच के लिए कमेटी का अभी तक गठन क्यों नहीं किया है, जिसका संघ मांग भी कर रहा है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/ddd.jpg"><img class="alignnone wp-image-16818 " src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/ddd.jpg" alt="ddd" width="832" height="709" /></a><br />
विभाग में शुरू होने जा रही इस नयी महाभारत की संरचना करने के लिए उन्हीं वैज्ञानिक अधिकारियों को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिन्होंने मुख्यालय से सम्बद्ध होते ही 8 मई 2018 को एक आदेश जारी करके सचल दल अधिकारियों द्वारा टैक्सचोरी के मामलों में पकड़े गये माल पर स्वामित्व की परिभाषा सन 1930 के सेल्स एंड गुड्स एक्ट निकाल कर बदल डाली है। इससे प्रदेश ही नहीं देश के सबसे बड़े राज्य यूपी जहां सबसे अधिक माल की आवक होती है, इस अविधिक परिपत्र की आड़ में व्यापारियों का उत्पीडऩ किया जाता रहा। इनके नियम के अनुसार टैक्सचोरी में पकड़ा गये माल को छुड़ाने का पहला अधिकार माल के खरीददार को होगा जो कि जीएसटी एक्ट की मंशा के विपरीत है। व्यापारियों के माध्यम से जब ये मामला जीएसटी काउन्सिल के संज्ञान में आया तो जीएसटी काउन्सिल ने 30 दिसम्बर को माल के स्वामित्व को लेकर व्याख्या जारी की जिसके बिन्दु संख्या-6 में माल के सम्बंध में स्पष्ट किया गया है कि माल के प्रपत्रों में दर्ज के्रता या विक्रेता को भी माल पकडऩे जाने पर स्वामी के रूप में उपस्थित हो सकते हैं, उनसे टैक्स व इसके बराबर अर्थ दंड जमा कराकर माल अवमुक्त किया जा सकता है, इसके अलावा माल का कोई भी प्रपत्र न होने पर सचल दल अधिकारी को माल के स्वामी के सम्बंध में निर्णय लेने की शक्ति प्रदत्त है। जीएसटी काउन्सिल द्वारा माल के स्वामी के स्वामी की व्याख्या किये जाने के बाद मुख्यालय द्वारा पूर्व में जारी किये गये आदेश को निरस्त माल लिया गया और कार्रवाई जीएसटी एक्ट के तहत होने लगी। नया संग्राम तक शुरू हो गया जब मुख्यालय के सचल दल ने जीएसटी काउन्सिल द्वारा परिपत्र जारी किये जाने से पूर्व जो माल मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुपालन के आधार पर नही छोड़ा उसे राजस्व हानि मानते हुए नोटिस जारी कर दी।</p>
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		<title>गिनती में खर्च हो रहे 69 लाख</title>
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		<pubDate>Mon, 25 Feb 2019 05:02:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[व्यपार मंडल]]></category>

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		<description><![CDATA[वाणिज्य कर सेवासंघ ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन घर बैठे रिपोर्ट तैयार किये जाने पर खड़े हुए सवाल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ ने सीएम को भेजा शिकायती पत्र लखनऊ। वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी के अनुरूप पदों की संरचना के लिए प्रबंधन संस्था आईआईएम को दिये गए 69 लाख के बजट जिसका आधा भुगतान होने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>वाणिज्य कर सेवासंघ ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन</li>
<li>घर बैठे रिपोर्ट तैयार किये जाने पर खड़े हुए सवाल</li>
<li>चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ ने सीएम को भेजा शिकायती पत्र</li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी के अनुरूप पदों की संरचना के लिए प्रबंधन संस्था आईआईएम को दिये गए 69 लाख के बजट जिसका आधा भुगतान होने के बाद आईआईएम के प्रतिनिधि विभाग में तैनात अधिकारियों- कर्मचारियों की गिनती ही शुरू कर पाए हैं, विभाग की कार्य प्रणाली के कई ऐसे पहलू हैं, जिनका अध्यन किये बिना कैडर पुनर्गठन किया गया तो यूपी में जीएसटी प्रभावित हो जाएगी। उत्तर प्रदेश वाणिज्य कर सेवासंघ के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह ने कमिश्नर वाणिज्य कर को ज्ञापन सौपकर पुर्नगठन प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश सिंह यादव पहले ही सरकार से मांग कर चुके हैं कि कैडर पुनर्गठन की प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों या शासकीय सुधार विभाग से करायी जाए। सवाल ये है कि जिन अधिकारियों ने 69 लाख का बजट दिये जाने की सिफारिश की है क्या वे विभाग की कार्य प्रणाली से वाकिब नहीं थे क्योंकि आईआईएम एक प्रबन्धन संस्था है और जीएसटी कर संग्रह का विभाग।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/02/28_05_2018-sels-tax_18012351.jpg"><img class=" size-medium wp-image-16464 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/02/28_05_2018-sels-tax_18012351-300x249.jpg" alt="28_05_2018-sels-tax_18012351" width="300" height="249" /></a>कमिश्नर अमृता सोनी को दिए गए ज्ञापन में अध्यक्ष ने तल्ख सवाल उठाए हैं कि क्या अभी तक किसी भी सरकारी विभाग में कैडर पुनर्गठन का कार्य आईआईएम से कराया गया है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है कि देश के सबसे बड़े राज्य यूपी के जीएसटी विभाग का कैडर पुनर्गठन होना है लेकिन आईआईएम के किसी भी प्रतिनिधि ने लखनऊ छोड़ किसी भी जिले में जाकर अध्ययन नहीं किया है जबकि अन्य जिलों की भौगोलिक स्थिति एवं कार्य प्रणाली में काफी अन्तर है। इसके अलावा जीएसटी में सबसे महत्वपूर्ण मासिक रिर्टन देने वाले डीलर्स, रिटर्न नॉन फाइलर्स, ई-वे बिल की रिपोर्ट के आधार पर रिटर्न स्क्रूटनी, ऑडिट का पूर्णता नया स्वरूप, प्रवर्तन कार्याें में बदलाव प्रथम एवं द्वितीय अपील के संबंध में हुए बदलाव एवं जीएसटी अधिनियम में उल्लेखित कार्यांे का अध्ययन किये बिना ही आईआईएम के प्रतिनिधि मानव सम्पदा का आकलन कैसे करेंगे? शासन को इस पर भी विचार करना चाहिए कि जीएसटी अधिनियम में वाणिज्य कर व केन्द्र सरकार के सेवा कार्य दोनों ही विभागों की कार्य प्रणाली में समानता होने के बाद ही सेवाकर विभाग ने अपना कैडर्र पुनर्गठन खुद कर लिया जबकि वाणिज्य कर विभाग में यह कार्य 69 लाख की धनराशि खर्च करके आईआईएम से कराया जा रहा है। कर संग्राह व इससे जुड़े कार्य तो वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी करते ही है, इसके अलावा इसका भी अध्ययन जरूरी है कि विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी निर्वाचन कार्य में लगायी जाती है। कमिश्नर वाणिज्य कर इस प्रकरण भर भले ही खुलकर नहीं बोल रही है लेकिन प्रबंधन संस्थान को कैडर पुनर्गठन का कार्य दिए जाने पर वे भी हैरत में जरूर हैं।</p>
<p><strong>सीएम ने दिये कैडर पुनर्गठन मामले की जांच के आदेश</strong><br />
वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी के अनुरूप विभागीय ढांचे (कैडर्र पुनर्गठन) के लिए आईआईएम संस्था को दिए गए 59 लाख के ठेके काम मामला जनता दर्शन व समाचार पत्रों के माध्यम से मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने पर सीएम ने एक सप्ताह में मामले की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किये के आदेश उप्र चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार यादव व राजकीय वाहन चालक संघ वाणिज्य कर का ज्ञापन जो की सीएम को जनता दर्शन कार्यक्रम में सौपा गया था, उस पर दिये हैं। वहीं उप्र वाणिज्य कर सेवासंघ के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह ने भी कमिश्नर को ज्ञापन सौपकर कैडर्र पुनर्गठन का काम प्रबन्धन संस्था को दिये जाने पर सवाल खड़े किये हैं। सरकारी कोश से इतनी बड़ी धनराशि आवंटित किये जाने को लेकर बन रहे दबाव को देखते हुए अब ये आंकलन लगाया जा रहा है कि कैडर्र पुनर्गठन का काम आईआईएम से वापस लेकर शासकीय सुधार विभाग से यह काम कराया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
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