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	<title>Business Link &#187; शिक्षा</title>
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		<title>कोरोना के चलते छह फरवरी तक बंद रहेंगे शैक्षणिक संस्थान</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Jan 2022 18:57:34 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[कोरोना संक्रमण के मद्देनजर प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थान अब छह जनवरी तक बंद रहेंगे। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं यथावत जारी रहेंगी। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी की ओर से शुक्रवार को सभी मंडलायुक्तों, एडीजी, पुलिस आयुक्तों, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारियों व पुलिस कप्तानों को पत्र भेजकर शैक्षणिक संस्थानों को छह फरवरी तक तक बंद &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>कोरोना संक्रमण के मद्देनजर प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थान अब छह जनवरी तक बंद रहेंगे। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं यथावत जारी रहेंगी।</p>
<p>अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी की ओर से शुक्रवार को सभी मंडलायुक्तों, एडीजी, पुलिस आयुक्तों, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारियों व पुलिस कप्तानों को पत्र भेजकर शैक्षणिक संस्थानों को छह फरवरी तक तक बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>इससे पहले शैक्षणिक संस्थानों को 30 जनवरी तक बंद रखने का निर्देश दिया गया था।</p>
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		<title>पुलिसिया बर्बरता के बाद सहमे छात्र</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Jan 2022 17:54:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में अंदर से ताला बंद कर डर-सहमे, दुबके हुए हैं। पुलिस ने जिस क्रूरता से कमरों से छात्रों को बाहर घसीटकर पीटा था, उस मंजर को याद कर छात्रों की रूह कांप जाती है।</p>
<p>छोटा बघाड़ा मिश्रा लॉज में रहने वाले बिहार के विनीत यादव ने बताया कि टीजीटी-पीजीटी की तैयारी करते हैं। मंगलवार शाम वह कमरे में थे। अचानक बाहर शोरगुल मचा। हम डर गए। लगभग आठ-दस पुलिस वाले आए और कमरे का दरवाजा लाठी और बूटों से पीटकर तोड़ने लगे। खिड़कियों के कांच तोड़ दिए। कुछ कमरों का दरवाजा तोड़ दिया और छात्रों को बर्बर तरीके से पीटा। चीख पुकार सुनकर तख्त को दरवाजे से सटाकर हम लोग चुपचाप नीचे छिपे रहे।</p>
<p>आधे घंटे सन्नाटा पसरा रहने के बाद साथियों से फोन पर पता किया और चुपचाप सहपाठी के साथ माघ मेला क्षेत्र में निकल गए। रात भर मेले में घूमते रहे। हम लोग सुबह भी कमरे पर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। शाम को जब साथियों से पता चला कि एसएसपी आए थे और उन्होंने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि किसी छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा। तब हम लोग कमरे पर आए।</p>
<p>इसी लॉज में एसएससी की तैयारी करने वाले जौनपुर निवासी राजेश ने बताया कि जो छात्र प्रदर्शन में शामिल थे। वह तो पहले ही भाग चुके थे। कमरे में तो वहीं छात्र थे, जिनका आंदोलन से कोई लेना देना नहीं था। लेकिन पुलिस ने बेगुनाह छात्रों को पीटा। लॉज में कई छात्र इंटर की पढ़ाई करने वाले हैं। पुलिस ने उनको भी नहीं बख्शा है।</p>
<p>बिहार के कैमूर जिले के विनोद कुमार ने बताया छात्र अपनी बात जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे थे। आखिर छात्र अपनी बात किस तरह जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाएं। हम यहां पढ़ने के लिए आए हैं। उपद्रव करने नहीं आए हैं। लेकिन पुलिस ने छात्रों के साथ उपद्रवियों सा सलूक किया। जो छात्र आसपास के जिलों के रहने वाले हैं। वह घर चले गए हैं। जो दूरदराज के हैं, वही छात्र रुके हुए हैं।</p>
<p>लॉज के कमरों में रुके हुए छात्र बाहर जरा सी भी आहट पर सहम उठते हैं। वह कमरे से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इन छात्रों का कहना है कि घर दूर होने और शहर में दूसरा कोई ठिकाना न होने के कारण लॉज में रुकने की मजबूरी है। वरना इस माहौल में वह भी ताला बंद कर चले जाते और माहौल सामान्य होने पर ही लौटते।</p>
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		<title>क्यों नहीं मिल पा रही है यूपी बोर्ड की एग्जाम डेट की आधिकारिक जानकारी</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Jan 2022 19:01:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ]]></category>
		<category><![CDATA[दसवीं]]></category>
		<category><![CDATA[बारहवीं की बोर्ड परीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[यूपी बोर्ड एग्जाम]]></category>

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		<description><![CDATA[वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की ओर से कराई जाने वाली दसवीं, बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर संशय गहराता जा रहा है। बोर्ड स्टूडेंट्स के असमंजस की स्थिति बनती जा रही है। छात्र-छात्राओं को अभी तक अपनी परीक्षा की शुरुआत और अंत होने की तिथियों की भी जानकारी नहीं मिल &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की ओर से कराई जाने वाली दसवीं, बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर संशय गहराता जा रहा है। बोर्ड स्टूडेंट्स के असमंजस की स्थिति बनती जा रही है। छात्र-छात्राओं को अभी तक अपनी परीक्षा की शुरुआत और अंत होने की तिथियों की भी जानकारी नहीं मिल पाई है। ऐसे में लाखों विद्यार्थी अपने एग्जाम की विषयवार तैयारी को लेकर काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं और तरह-तरह की कयासबाजी लगाते नजर आते हैं। यूपी बोर्ड एग्जाम से जुड़े किसी भी तरह के लेटेस्ट अपडेट के लिए छात्रों को यूपीएमएसपी की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।</p>
<p>बोर्ड परीक्षा की तारीख नहीं जारी होने की वजह से छात्र दुविधा में हैं, इसकी वजह से उनकी तैयारी भी प्रभावित हो रही है। वहीं, कई छात्रों को यह भी लग रहा है कि कहीं कोरोना के चलते इस बार भी परीक्षाओं को रद्द न कर दिया जाए। हालांकि इस बार परीक्षाओं के रद्द होने की उम्मीद बहुत ही कम है। ऐसे में स्टूडेंट्स को अपनी तैयारी जारी रखनी चाहिए।</p>
<p>अगर आप भी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो तुरंत सफलता ऐप को डाउनलोड कर लीजिए। अब तक इस ऐप से सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं जुड़ चुके हैं और यहां पर दिल्ली के एक्सपर्ट टीचर्स द्वारा एनसीआरटी पैटर्न पर चलाई जा रही कक्षाओं का फ्री में पूरा लाभ उठा रहे हैं।</p>
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		<title>उत्तर प्रदेश में अभी स्कूल खुलने के आसार कम</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Jan 2022 18:52:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>

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		<description><![CDATA[कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश में अभी स्कूलों के शुरू होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। खबरों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार स्कूलों को खोलने की तारीख अब 15 फरवरी, 2022 तक बढ़ा सकती है। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक ऐसी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश में अभी स्कूलों के शुरू होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। खबरों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार स्कूलों को खोलने की तारीख अब 15 फरवरी, 2022 तक बढ़ा सकती है। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक ऐसी कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं जारी की है।</p>
<p>सरकार के फैसले के अनुसार राज्य में स्कूल 30 जनवरी से शुरू किए जाने हैं। इससे पहले स्कूलों को 23 जनवरी, 2022 से शुरू किया जाना था। हालांकि, राज्य में कोरोना और इसके नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामलों को देखते हुए तारीखों को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बुधवार को राज्यभर से 10, 937 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। वहीं, इस दौरान 17,074 मरीज ठीक भी हुए हैं। प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या 80342 है।</p>
<p>एक ओर जहां उत्तर प्रदेश में स्कूलों को बंद रखने की खबर सामने आ रही है। वहीं, कई राज्य ऐसे भी है जहां स्कूलों को दोबारा से खोला जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने 24 जनवरी से राज्य में स्कूलों को खोलने के आदेश जारी कर दिए थे। वहीं, हरियाणा में भी 1 फरवरी से ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हो जाएंगी।</p>
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		<title>शिक्षा में समानता से समरस होगा समाज: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</title>
		<link>http://businesslinknews.com/equality-in-education-will-bring-harmony-to-society-chief-minister-yogi-adityanath/</link>
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		<pubDate>Thu, 24 Sep 2020 09:37:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[पढ़ाई से तैयारी, कॅरियर काउंसिलिंग से नौकरी तक का रास्ता दिखायेगा &#8216;यू राइज&#8217; मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने किया एकीकृत पुनर्जागरण नवाचार पोर्टल &#8216;यू राइज&#8217; का लोकार्पण लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि शिक्षा क्षेत्र में समानता से ही समरस समाज का सपना साकार होगा। भविष्य की जरूरतों के लिहाज से शिक्षण संस्थानों &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पढ़ाई से तैयारी, कॅरियर काउंसिलिंग से नौकरी तक का रास्ता दिखायेगा &#8216;यू राइज&#8217;</strong></p>
<p><strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने किया एकीकृत पुनर्जागरण नवाचार पोर्टल &#8216;यू राइज&#8217; का लोकार्पण</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि शिक्षा क्षेत्र में समानता से ही समरस समाज का सपना साकार होगा। भविष्य की जरूरतों के लिहाज से शिक्षण संस्थानों में और शिक्षा के सभी चरणों में एक सहज एकीकरण और समन्वय होना चाहिए। इससे विद्यार्थियों को उनके सीखने की क्षमता के अनुसार विकल्पों को चुनने का अवसर मिलेगा। वे अपनी प्रतिभा और रुचियों के अनुसार सफलता हासिल कर सकेंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बातें गुरुवार को लोकभवन में युवाओं के सशक्तीकरण के लिए एकीकृत पुनर्जागरण नवाचार &#8216;यू राइज&#8217; पोर्टल का लोकार्पण करते हुए कहीं। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि &#8216;यू राइज&#8217; पोर्टल अभिनव है। &#8216;यू राइज&#8217; यानी &#8216;यूनिफाइड री-इमेजिंड इनोवेशन फ़ॉर स्टूडेंट एमपॉवरमेन्ट&#8217; पोर्टल में विद्यार्थी जीवन के सम्पूर्ण चक्र जैसे संस्थान में प्रवेश, शुल्क, शिक्षण, प्रशिक्षण, प्रयोग, परीक्षा इत्यादि के साथ-साथ रोजगार की प्राप्ति तक का पूरा चक्र दर्ज होगा। कोई भी सेवायोजक छात्र के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर सकता है। यह छात्रों के लिए बहुत मददगार साबित होगा।</p>
<p><strong>विकल्पों की उपलब्धता से संवरेगा जीवन</strong><br />
मुख्यमंत्री ने कहा कि &#8216;यू राइज&#8217; पोर्टल शिक्षाविदों, सेवायोजकों, शोधार्थियों आदि के सहयोग से लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने में सफल होगा। विद्यार्थी जीवन के सम्पूर्ण चक्र के विभिन्न स्तरों को यह पोर्टल, उपलब्ध सेवाओं और सूचनाओं के माध्यम से उन्हें सशक्त करेगा। इन सेवाओं में ऑनलाइन शुल्क, ऑनलाइन परीक्षा, आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन कक्षाएँ तथा वेबिनार, डिजिटल प्रश्नपत्र, डिजिटल मूल्यांकन, डिजिटल कन्टेन्ट, ई-लाईब्रेरी, विषय वस्तु पर रिकार्डेड वीडियो कन्टेन्ट, उद्योग, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, रोजगार इत्यादि के लिए विशाल नेटवर्क से युक्त यह पोर्टल विद्यार्थी को हर उस रूप से सशक्त कर सकेगा जैसा विद्यार्थी का स्वप्न है, उसका उद्देश्य है। इस पोर्टल के माध्यम से व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे लगभग 20 लाख विद्यार्थियों को लाभ पहुंचेगा। ई-कंटेंट, ई-लाइब्रेरी, ऑनलाइन कोर्स जैसे प्रयास को सुदूर क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचा सकेंगे।</p>
<p><strong>शिक्षा के विविध रूप, पर उद्देश्य है एक</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पनाओं को मूर्त रूप देने वाली नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 यह बताती है कि शिक्षण संस्थानों में और शिक्षा के सभी चरणों में एक सहज एकीकरण और समन्वय होना चाहिए, जिससे शिक्षार्थियों को उनके सीखने की क्षमता के अनुसार उन्हें कई विकल्पों को चुनने का अवसर प्राप्त हो। ताकि, वे अपनी प्रतिभा और रुचियों के अनुसार जीवन में सफलता का मार्ग चुन सकें। कला और विज्ञान, व्यावसायिक और अकादमिक शिक्षाओं, पाठ्यक्रम गतिविधियां तथा अतिरिक्त पाठयक्रम गतिविधियों के बीच कोई बहुत अलगाव नहीं है। इस कारण से ऐसे अलगावों को समाप्त करने के लिए तथा अध्ययन और सीखने के विभिन्न क्षेत्रों के मध्य एकीकरण को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, मानविकी, अभियांत्रिकी तथा खेल-कूद विषयों की एक समग्र और बहु-विषयक शिक्षा आवश्यक है। उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में सतत प्रयासरत है।</p>
<p><strong>तकनीक ने आसान बनाई पहुंच</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आभारी हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति, जिन्होंने 2014 में ही हमें डिजिटल होने का महत्व समझा दिया था। उन्होंने कहा कि फर्जी शिक्षकों के षड़यंत्र का पर्दाफाश हमने तकनीकी की मदद से ही किया। कोरोना काल खंड में हमने तकनीक की मदद से जनता को अधिकाधिक सुविधा पहुंचाने में सफलता हासिल की है। कोरोना काल में शिक्षा व्यवस्था ऑनलाईन माध्यमों से ही संचालित हो सकी। यह सब तकनीक की मदद से ही संभव हो सका। पोर्टल लोकार्पण के मौके पर एकेटीयू के कुलपति ने मुख्यमंत्री को यू राइज पोर्टल की गतिविधियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में विभिन्न तकनीकी संस्थानों के निदेशक, शिक्षक, विद्यार्थी आदि भी डिजिटल माध्यम से उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए दिए 100 करोड़ रुपये</strong></p>
<p>पोर्टल लांचिंग के मौके पर मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के दूसरे चरण में 100 करोड़ रुपये भी जारी किए।कोविड-19 महामारी के दूरगामी प्रभावों को ध्यान में रखते हुए दीनदयाल उपाध्याय गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम अंतर्गत द्वितीय चरण में जारी यह राशि प्रदेश के विभिन्न तकनीकी संस्थानों में डिजिटल और फिजिकल इन्फ्रा के विकास पर खर्च होगी। इस धनराशि से छात्रावासों का निर्माण, क्लास रूम, लैब, नवनिर्मित भवन के फर्नीचर, पुस्तकालय का विस्तार , कोविड के दृष्टिगत अवस्थापना सुविधाओं का विनिर्माण एवं ऑनलाइन क्लासेज, स्मार्ट क्लास रूम,वर्चुअल लैब आदि खरीदे जाएंगे।</p>
<p><strong>छात्रों के स्वावलंबन के लिए अभिनव प्रयास है यू राइज</strong></p>
<p>&#8216;यू राइज&#8217; यानी यूनिफाइड री-इमेजिंड इनोवेशन फ़ॉर सस्टूडेंट एमपॉवरमेन्ट प्राविधिक शिक्षा विभाग, प्रशिक्षण सेवायोजन एवं कौशल विकास मिशन की संयुक्त परिकल्पना है। इस परिकल्पना को तकनीकी शिक्षा विभाग के निर्देशन में मूर्त रूप प्रदान किया है डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने।</p>
<ul>
<li>इस पोर्टल के माध्यम से तकनीकी शिक्षा, आईटीआई एवं कौशल विकास से जुड़े हुए सभी छात्र, शिक्षक, प्रशिक्षक, रोजगार देने वाली संस्थाएँ न केवल एक ही स्थान पर जुड़े हैं, बल्कि छात्रों के छात्र जीवन-चक्र से जुड़ी हुई समस्त सुविधाएँ और सूचनाएँ भी यहाँ पर उपलब्ध होंगी।</li>
<li>इन उपलब्ध सुविधाओं और सूचनाओं के साथ छात्र न केवल अपने आप को सशक्त कर सकेंगे अपितु वे पूरे विश्व के साथ भी जुड़ सकेंगे।</li>
<li>पोर्टल का लक्ष्य राज्य के सभी छात्रों को समान रूप से गुणवत्तापरक शिक्षा और सीखने की प्रक्रिया एवं अनुभव को बेहतर बनाना हैं।</li>
<li>पोर्टल पर पंजीकरण के उपरान्त छात्र आजीवन यहाँ उपलब्ध कन्टेन्ट व सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।</li>
<li>पोर्टल उनके लिए उद्योग, प्रशिक्षकों और फैकल्टी का एक वृहद नेटवर्क तैयार कर रहा है, जिसका लाभ उन्हें जीवनपर्यन्त मिलता रहेगा।</li>
<li>पोर्टल पर छात्र के ट्रैक रिकार्ड का डिजिटल संग्रह करने की सतत प्रक्रिया चलती रहेगी , जो रोजगार के उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण है।</li>
</ul>
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		<title>31,661 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने की शुरुआत करेंगे सीएम योगी</title>
		<link>http://businesslinknews.com/cm-yogi-will-start-giving-appointment-letters-to-31661-teachers/</link>
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		<pubDate>Sun, 20 Sep 2020 17:58:50 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[सहायक अध्यापक]]></category>

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		<description><![CDATA[शिक्षकों पर मेहरबान सीएम योगी सरकार विभिन्न जिलों में चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र बांटने की शुरू होगी प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी होगी नियुक्ति पत्र बांटने की प्रक्रिया अब तक 54,706 शिक्षकों की भर्ती कर चुकी है सरकार समर सिंह लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>शिक्षकों पर मेहरबान सीएम योगी सरकार</strong></li>
<li><strong>विभिन्न जिलों में चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र बांटने की शुरू होगी प्रक्रिया</strong></li>
<li><strong>एक सप्ताह के भीतर पूरी होगी नियुक्ति पत्र बांटने की प्रक्रिया</strong></li>
<li><strong>अब तक 54,706 शिक्षकों की भर्ती कर चुकी है सरकार</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/job.jpg"><img class="  wp-image-21976 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/job.jpg" alt="job" width="475" height="267" /></a>समर सिंह<br />
</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग में 31,661 शिक्षकों को एक सप्ताह में नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया का शुभारंभ करेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने नियुक्तियों की तैयारी तेज कर दी है। साथ ही सभी विभागों के रिक्त पदों पर आगामी 6 माह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जायेगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को पर्याप्त सरकारी नौकरी और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये हैं। तमाम व्यवधानों के बावजूद बीते 15 वर्षों के दौरान सबसे अधिक 54,706 शिक्षकों की भर्ती पिछले 3 वर्षों में की हैं। साथ ही पूर्ववती सरकार के कार्यकाल वर्ष 2012-17 की तुलना में पद भी बढ़ाये हैं। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलते ही बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक व उच्च प्रा​थमिक विद्यालयों में 31,661 शिक्षकों की नियुक्ति एक सप्ताह में करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इससे भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों आवेदकों में खुशी की लहर है।</p>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में से शिक्षामित्रों के पदों को छोड़कर 31,661 चयनित आवेदकों को नियुक्ति पत्र देने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं करेंगे। इसके लिए विभिन्न जनपदों से चयनित आवेदकों को बुलाया जायेगा। अब तक वर्तमान प्रदेश सरकार ने महज 3 वर्षों में युवाओं को सबसे अधिक 3,00,526 सरकारी नौकरियां दी हैं। वहीं 85,629 नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं।</p>
<p>योगी सरकार ने पूर्ववती सरकारों (सपा-बसपा) के पूरे कार्यकालों की तुलना में कहीं अधिक 3,00,526 सरकारी नौकरियां 3 वर्षों में दी हैं। बसपा सरकार ने पांच साल में कुल 91,000 सरकारी नौकरियां दी। तो वहीं सपा सरकार ने पांच साल के दौरान 2.05 लाख सरकारी नौकरियों पर नियुक्तियां की। जबकि 3 वर्षों में योगी सरकार ने 3,00,526 सरकारी नौकरियां दी हैं। इनका औसत निकाला जाय तो प्रतिवर्ष 1 लाख युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरी मिली हैं।</p>
<p><strong>पारदर्शी प्रक्रिया से खुश और संतुष्ट हैं अभ्यर्थी</strong><br />
वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में हुई भर्तियों में अपनाई गई निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया से अभ्यर्थी खुश और संतुष्ट हैं। जबकि पूर्ववती सरकारों के कार्यकाल की भर्तियों में भाई-भतीजावाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद और भ्रष्टाचार हावी रहा। सभी भर्तियों में अपनाई गई मनमानी प्रक्रिया के खिलाफ अभ्यर्थी न्यायालय पहुंचे। साथ ही हजारों आक्रोषित अभ्यर्थी सड़कों पर भी उतरे।</p>
<p><strong>45,000 शिक्षकों को मिलेगा लाभ</strong><br />
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सप्ताह में शिक्षकों की भर्ती के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों तथा सहायक अध्यापकों के अंतरजनपदीय तबादलों की अनुमति दे दी है। इससे सूबे के करीब 45,000 शिक्षकों को लाभ मिलेगा। तबादलों में महिला, दिव्यांग और सैनिक परिवारों को वरीयता दी जाएगी।</p>
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		</item>
		<item>
		<title>कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात करेगा बुंदेलखण्ड</title>
		<link>http://businesslinknews.com/bundelkhand-will-herald-a-new-revolution-in-agriculture-send-feedback-his/</link>
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		<pubDate>Sat, 29 Aug 2020 18:40:02 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[झांसी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश को उन्नति की सौग़ात देगा केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का किया प्रधानमंत्री ने वर्चुअल लोकार्पण कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र बनेंगे नालेज पार्टनर: मुख्यमंत्री बिजनेस लिंक ब्यूरो  लखनऊ। वीरभूमि बुन्देलखण्ड कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात करने को तैयार है। किसानों की आय दूनी करने के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>उत्तर प्रदेश को उन्नति की सौग़ात देगा केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय</strong></li>
<li><strong>रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का किया प्रधानमंत्री ने वर्चुअल लोकार्पण</strong></li>
<li><strong>कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र बनेंगे नालेज पार्टनर: मुख्यमंत्री</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/rani.gif2_.jpg"><img class="  wp-image-21876 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/rani.gif2_.jpg" alt="rani.gif2" width="541" height="180" /></a>लखनऊ।</strong> वीरभूमि बुन्देलखण्ड कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात करने को तैयार है। किसानों की आय दूनी करने के लिए गुणवत्तायुक्त कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों को तकनीकि प्रशिक्षण उपलब्ध कराना केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झांसी में रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का वर्चुअल लोकार्पण कर कृषि क्षेत्र को नया आयाम दिया है। दतिया में इसी विश्वविद्यालय से संबंधित पशु चिकित्सा एवं मत्स्य महाविद्यालय भी स्थापित किया जाएगा।</p>
<p>रानी लक्ष्मी बाई कृषि विश्वविद्यालय, कम वर्षा वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने के लिए यह कृषि विश्वविद्यालय एक नया अध्याय लिखेगा। कृषि में स्टार्ट अप के नये-नये रास्ते खुल रहे हैं। अब तो बीज से लेकर बाजार भी तकनीक पर आधारित हैं। कृषि क्षेत्र में भी अब तकनीक के प्रयोग से फसल में इजाफा होने से किसान भी पहले से बेहतर की स्थिति में हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, कृषि क्षेत्र को अग्रणी भूमिका में लाने और कृषि शिक्षा में नये आयाम स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का लोकार्पण एवं उसके शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवनों का उद्घाटन किया है। यह विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात करेगा। कृषि क्षेत्र को अग्रणी भूमिका में लाकर किसानों की आय दोगुनी करने के लिए आवश्यक सभी अहम बिन्दुओं पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकार प्राथमिकता पर कार्य कर रही हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र नालेज पार्टनर बनाये जायेंगे। सरकार ने कृषि छात्रों को 31,000 रुपये की स्कालरशिप देने की व्यवस्था की है, पहले यह 15,000 रुपये थी। साथ ही सरकार ने किसान हितैषी नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं को प्राथमिकता पर लागू किया है। कृषि क्षेत्र और किसानों के कल्याण व प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर कृषक उत्पादन संगठन, एफपीओ नीति-2020 का गठन हुआ है। एफपीओ से एमएसएमई, ओडीओपी, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन व डेयरी उद्योगों को सुदृढ़ बनाया जा रहा है।</p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/Press-4.jpg"><img class="  wp-image-21877 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/Press-4.jpg" alt="Press (4)" width="480" height="200" /></a>उत्तर प्रदेश कृषक उत्पादक संगठन नीति-2020</strong><br />
योगी आदित्यनाथ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को अग्रणी भूमिका में लाने के लिए प्रारम्भ से ही कार्य कर रही है। इसी के तहत सरकार कृषक उत्पादक संगठन नीति-2020 ला रही है। इस नीति से कृषक उत्पादक संगठन बेहतर ढंग से संचालित होंगे और यह ग्रामीण समृद्धि का आधार बनेंगे। कृषक उत्पादक संगठनों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हुए व्यावसायिक गतिविधियों को सुचारू रूप से सम्पादित किया जाएगा। प्रदेश की कृषि व आर्थिक उन्नति में एफपीओ की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लघु एवं सीमान्त श्रेणी के कृषकों को कम लागत में कृषि निवेशों की व्यवस्था, नवीनतम तकनीक अपनाकर उच्च उत्पादन, बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए समुचित विपणन व्यवस्था तथा कृषकों की आय में वृद्धि करने में उत्तर प्रदेश कृषक उत्पादक संगठन नीति कारगर होगी।</p>
<p><strong>एफपीओ को मिलेगा बढ़ावा</strong><br />
इस नीति से एफपीओ को बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादों के विपणन में आ रही बाधाओं का समुचित निदान होगा। साथ ही, कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र के उत्पादों का भण्डारण, प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन कर बेहतर कीमत मिलेगी। कृषक उत्पादक संगठनों के गठन उनके क्रिया-कलापों में आ रही चुनौतियां दूर होंगी। एमएसएमई, ओडीओपी, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, डेयरी उद्योग आदि से भी कृषक उत्पादक संगठनों से जोड़ा जाएगा।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री ने छात्रों से की बात</strong><br />
प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ बातचीत की और खाद्य तेल के आयात को कम करने और खाद्य प्रसंस्करण, विशेष रूप से फलों और सब्जियों के प्रसंस्करण को बढ़ाने जैसी कुछ चुनौतियों के समाधान के तरीकों के बारे में उनकी राय मांगी। मोदी ने एक छात्र से पूछा कि क्या सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सूक्ष्म, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के बारे में किसानों में जागरूकता पैदा की जा सकती है।बातचीत के दौरान, प्रधान मंत्री ने इस क्षेत्र में जल के पुनचक्रीकरण तथा नवीन और कम लागत वाली प्रौद्योगिकी के माध्यम से जल और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।</p>
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		<item>
		<title>मानव संसाधन विकास मंत्री ने लांच किया  ‘मनोदर्पण’ डिजिटल प्लेटफॉर्म</title>
		<link>http://businesslinknews.com/human-resource-development-minister-launches-surrender-digital-platform/</link>
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		<pubDate>Tue, 21 Jul 2020 08:20:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>

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		<description><![CDATA[नई दिल्ली। देश के स्कूली और कॉलेज के छात्रों में कोरोना काल में अवसाद और तनाव को दूर करने के लिए मंगलवार को पहली बार ‘मनोदर्पण’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत इस प्लेटफार्म को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये लांच किया। इसमें &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> देश के स्कूली और कॉलेज के छात्रों में कोरोना काल में अवसाद और तनाव को दूर करने के लिए मंगलवार को पहली बार ‘मनोदर्पण’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया। मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत इस प्लेटफार्म को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये लांच किया। इसमें मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री संजय धोत्रे, स्कूली शिक्षा सचिव आनिता भटनागर और उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे भी उपस्थित थे।</p>
<p>इस प्लेटफार्म के तहत एक हेल्पलाइन शुरू की गई है जिसके तहत कोई भी छात्र देशभर में सुबह 8:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक टेलीफोन पर अपने तनाव और अवसाद से संबंधित कोई जानकारी और सलाह प्राप्त कर सकता है। इस हेल्पलाइन का नंबर 844 840 6 32 है । इस हेल्पलाइन पर अभी 100 काउंसलर रहेंगे और धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ाकर 500 कर दी जाएगी। यह प्लेटफॉर्म कोविड- 19 महामारी के समाप्त होने के बाद भी काम करता रहेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा आज दिये गये रिप्रेजेंटेशन के अनुसार देश भर में हर दिन कोई न कोई छात्र इस तनाव के कारण आत्महत्या कर रहा है। इस तरह हर महीने करीब 28 या 29 छात्र आत्महत्या करते हैं। देश में 12 करोड़ स्कूली बच्चे हैं।<br />
सरकार ने छात्रों में बढ़ते अवसाद और तनाव को दूर करने के लिए नौ अप्रैल को एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था जिसकी सिफारिशों के आधार पर यह प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया ।</p>
<p>इस प्लेटफार्म पर छात्र अपने अवसाद और तनाव के बारे में काउंसलरों से ऑनलाइन चैट भी कर सकते हैं और इस प्लेटफाॅर्म पर छात्रों के लिए लिखित दिशा-निर्देश भी होंगे जो उनके लिए तनाव को दूर करने में सहायक साबित होगा। इसके साथ ही इस प्लेटफाॅर्म पर एक वेब पेज भी होगा और इस पर वेबिनार भी होंगे। इसके अतिरिक्त एक काउंसलर की डायरेक्टरी भी होगी ताकि कोई छात्र उनसे संपर्क कर अपने तनाव दूर करने के बारे में बातचीत कर सकता है। भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद, डब्ल्यूएचओ और अन्य रिपोर्ट के अनुसार 10 से 13 साल के बच्चों में तनाव और अवसाद की समस्या काफी गंभीर है इसकी रोकथाम करना बहुत जरूरी है इस वेबसाइट पर रिसोर्स सेंटर भी होंगे।</p>
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		</item>
		<item>
		<title>कोरोना काल और स्कूल फीस</title>
		<link>http://businesslinknews.com/corona-period-and-school-fees/</link>
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		<pubDate>Fri, 17 Jul 2020 11:00:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[विचार मंच]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>

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		<description><![CDATA[पंकज जायसवाल मुंबई। तमाम अन्य बदलावों और परेशानियों के साथ इस कोरोना काल ने पढ़ने, पढ़ाने, निजी या गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के तौर तरीकों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस पर बहस करने से पूर्व आइये इसके कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को जान लेते हैं। इन निजी स्कूलों में पढने वाले बच्चों &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p style="font-weight: 400"><strong>पंकज जायसवाल</strong></p>
<p style="font-weight: 400"><strong>मुंबई।</strong> तमाम अन्य बदलावों और परेशानियों के साथ इस कोरोना काल ने पढ़ने, पढ़ाने, निजी या गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के तौर तरीकों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इस पर बहस करने से पूर्व आइये इसके कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को जान लेते हैं। इन निजी स्कूलों में पढने वाले बच्चों के अधिकांश माता-पिता मध्य वर्ग से आते हैं जो इस कोरोना काल से ज्यादे प्रभावित हैं क्योंकि इनकी एक बड़ी संख्या प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत नहीं आती है अतः यह सरकार के कोरोना काल में प्रत्यक्ष सहायता हेतु उसके जन चिंतन दर्शन में नहीं आते हैं। इसमें से जो माता-पिता नौकरी वाले हैं उनमें से कईयों को वेतन कटौती कर के मिल रहें हैं और कुछ को नौकरी से छंटनी किया जा रहा है और कोरोना काल में कम्पनियां जहां अपने आप को सिकोड़ रहीं हैं  वहां अब इन निकाले गए लोगों को नौकरी की संभावनाएं नगण्य हैं। इसी प्रकार जो लोग स्वव्यवसाय में हैं उनके भी आय का मीटर बहुत डाउन है और वह अपने घर के किराये किश्त और दवाई के खर्चे से ही परेशान हैं ऐसे में उनके बच्चों को जो शिक्षण सेवा स्कूलों से मिलती थी उसकी मात्रा में भारी कमी होने के बावजूद भी यदि इन मुश्किल परिस्थितियों में फीस देना पड़ रहा है तो यह उनके लिए कष्टप्रद है।</p>
<p style="font-weight: 400">इसी बीच और भी कुछ घटनाएँ हुईं, महाराष्ट्र सरकार ने फीस नहीं बढ़ाने का नोटिफिकेशन लाया था जिसपर बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया, हालाँकि यह स्टे तकनीकी और नोटिफिकेशन लाये जाने के तरीकों के कारण है इसमें फीस लेने नहीं लेने या कम लेने के गुण दोष की मीमांसा नहीं है। इसी बीच दिल्ली के निजी स्कूलों के संगठन ने कहा कि चूँकि लॉकडाउन ख़त्म हो गया है अतः जो रोक फीस वसूलने में लगी थी वह लॉकडाउन ख़त्म होने से रोक स्वतः ही हट गई हालाँकि दिल्ली सरकार ने कहा कि यह अनलॉक का मतलब लॉकडाउन हटना नहीं है यह आंशिक रूप से छूट है, स्कूल ट्यूशन शुल्क के अलावा कुछ भी चार्ज नहीं कर सकते हैं। यह एक अलग विमर्श है कि कानूनी तौर पर जो छूटें लॉकडाउन के कारण मिली थीं तो क्या अब अनलॉक का नामकरण हुआ है तो क्या वह छूटें ख़त्म हो गईं।</p>
<p style="font-weight: 400">इसके अलावा आठ राज्यों में विभिन्न स्कूलों में पढ़ रहें बच्चों के माता-पिता ने याचिका के माध्यम से माननीय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें माननीय कोर्ट से कोरोनो वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों में फीस के लिए नियामक तंत्र लाने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया था कि निजी गैर-सहायता प्राप्त / सहायता प्राप्त स्कूलों को यह निर्देश दिया जाय कि अप्रैल से शुरू होने वाली तीन महीने की अवधि या भौतिक रूप से कक्षाएं शुरू होने तक किसी भी नामांकित छात्रों से कोई शुल्क नहीं लिया जाए। इनके तर्क थे की ऑनलाइन कक्षाओं के लिए पूरी फीस नहीं ली जानी चाहिए और दावा किया गया था कि कुछ स्कूल ऑनलाइन कक्षाओं के लिए भी अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं। याचिका में यह भी सुनिश्चित करने की मांग की गई थी कि केंद्र और राज्य सरकारें निजी गैर-सहायता प्राप्त और सहायता प्राप्त स्कूलों को निर्देश दें कि वे छात्रों को कक्षा से न निकालें या इस दौरान कोई फीस नहीं दे पाता है तो उसके ऊपर कोई  कोई दंड या अधिभार न लगाया जाय । इनके दलील में कहा गया था कि तालाबंदी के दौरान माता-पिता को लगातार वित्तीय और भावनात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और यह उनमें से हो सकता है की फीस न भर पाने की परिस्थिति में अपने बच्चों को स्कूल से निकलने के अल्वा कोई और विकल्प ना हो। याचिका में कहा गया था  कि निजी स्कूल प्रशासन बिना किसी सेवाओं के रेंडर किए बिना शुल्क और अन्य शुल्क की मांग कर रहे हैं और अथॉरिटी ने भारत के विभिन्न हिस्सों में माता-पिता और छात्र के विरोध के बावजूद इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं की है।</p>
<p style="font-weight: 400">याचिका में कहा गया कि शुल्क वसूली को सही ठहराने के लिए कुछ स्कूलों ने तालाबंदी की अवधि के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की हैं, ताकि वे यह तर्क दे सकें कि वे अपने छात्रों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं जबकि ऑनलाइन कक्षाएं शैक्षणिक संस्थानों को चलाने के दायरे में नहीं आती हैं। याचिका में कहा गया था कि भौतिक कक्षा और ऑनलाइन कक्षा में अंतर होता है और महामारी या देशव्यापी तालाबंदी में, स्कूल प्रशासन ऑनलाइन कक्षाएं के लिए भौतिक कक्षाओं की तरह समान शुल्क और खर्च नहीं वसूल सकता । ऑनलाइन कक्षाओं के कई दुष्प्रभाव और अवगुण हैं जो स्कूली शिक्षा की मूल अवधारणा से बिल्कुल अलग है। छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से समझने में बहुत समस्या होती है। याचिका में कहा गया है कि महामारी के कारण और प्रवेश फॉर्म में आपदाकाल क्लॉज के अभाव में, अथॉरिटी को छूट के संबंध में एक निर्णय लेना चाहिये और लॉकडाउन की अवधि के लिए शुल्क में राहत प्रदान करनी चाहिए। याचिका में और भी बहुत से बिंदु कहे गए थे। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और राहत के लिए उच्च न्यायालयों से संपर्क करने को कहा। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह एक गहन तथ्य का विषयवस्तु है और चूँकि प्रत्येक राज्य में समस्याएं एवं तथ्य अलग-अलग हैं अतः बेहतर है यह याचिका राज्यों के हाई कोर्ट में दाखिल किये जाएँ। हालाँकि इस ख़ारिज में भी तकनीकी कारण है इसमें फीस लेने नहीं लेने या कम लेने के गुण दोष की मीमांसा नहीं है।</p>
<p><span style="font-weight: 400">आइये इसके गुण दोष की मीमांसा करते हैं। भारत में स्कूल की अवधारणा में लाभ हानि का सिद्धांत नहीं है यह हमेशा से गैर लाभ की संस्था जैसे की ट्रस्ट एवं सोसाइटी को ही चलाना है अतः कोई स्कूल लाभ हानि की बात करता है तो वह नियमतः गलत कहता है और उसका ट्रस्ट एवं सोसाइटी का पंजीयन रद्द भी किया जाना चाहिए इस आधार पर। साथ में स्कूल की अवधारणा लाभार्थियों की सेवा आधारित है और यदि वह सेवा नहीं या कम दे रहें है तो शुल्क भी उसी अनुसार लेना चाहिए और शुल्क में यदि कोई कमी आती है तो हानि के नाम पर इसे लाभार्थियों से वसूल नहीं किया जाना चाहिए  इसके लिए उन्हें किसी अन्य से डोनेशन लेना चाहिए और यदि इसमें वह समर्थ नहीं पाते तो इस संस्था को उसे हस्तांतरण कर दे जो इनके स्थापना के उद्देश्यों के तहत इस संस्था को चलाने में अपने आपको सक्षम पायें और रही बात सेवा के उचित मूल्य प्राप्त करने के तो भौतिक शिक्षा और ऑनलाइन शिक्षा सेवा में जमीन आसमान का अंतर है</span><span style="font-weight: 400">, बच्चो को वह शिक्षा बिलकुल नहीं मिलती जो भौतिक शिक्षा में मिलती, इस सेवा की मात्रा में भारी कमी है क्यों की उन्हें ना तो साउंड इफ़ेक्ट, ना विजुअल इफ़ेक्ट ना क्लास का वातावरण और ना व्यक्तित्व विकास का मौका मिलता है जिसका वादा निजी स्कूल किये होते हैं उसकी जगह ईमला की तर्ज पर पढाई होती है ऑनलाइन में. अतः जब सेवा का प्रारूप बदल गया तो फीस उस हिसाब से ही होनी चाहिए क्योंकि  जैसी सेवा वैसा शुल्क। साथ में इस ऑनलाइन माध्यम में माता-पिता का खर्च, उनका समय और उनके संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है जबकि स्कूल के इन घंटों के लिए यह सब स्कूल की जिम्मेदारी थी। स्कूल ने भी अपने इन्फ्रा खर्च जैसे की बिजली, यूटिलिटी में भी भारी कमी पाई है वह वेतन और किराये में भी कमी पा रहें हैं कई जगह ऐसे में जो बचत उन्होंने की है कम से कम वह तो फीस घटा कर इस राहत को माता-पिता को दे सकते हैं।</span></p>
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		<title>संक्रमण के दौर में उद्यमिता विकास</title>
		<link>http://businesslinknews.com/entrepreneurship-development-in-transition/</link>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2020 14:44:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<description><![CDATA[यह संक्रमण का समय है। एक तरफ कोरोना संकट व लॉक डाउन ने उद्यम संबन्धी गतिविधियों को बाधित किया है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य को संवारने की मंसूबा भी है। इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ विचार विमर्श भी चल रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय के काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट सेल द्वारा कोविड-19 संक्रमण के दौर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21267" style="width: 118px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/ddddddd.jpg"><img class="  wp-image-21267" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/ddddddd.jpg" alt="ddddddd" width="118" height="186" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>डॉ दिलीप अग्निहोत्री</strong></figcaption></figure>
<p>यह संक्रमण का समय है। एक तरफ कोरोना संकट व लॉक डाउन ने उद्यम संबन्धी गतिविधियों को बाधित किया है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य को संवारने की मंसूबा भी है। इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ विचार विमर्श भी चल रहा है।</p>
<p>लखनऊ विश्वविद्यालय के काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट सेल द्वारा कोविड-19 संक्रमण के दौर में उद्यमिता विकास के अभिनव तकनीक विषय पर तीन दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ दिनेश शर्मा थे, तथा सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो०आलोक कुमार राय द्वारा की गयी। डॉ दिनेश शर्मा इस संकट काल में सकारात्मक चिंतन को सराहनीय बताया। यह विश्वास दिलाया कि एकजुट प्रयास से कोरोना के खिलाफ जंग में भारत को सफलता अवश्य मिलेगी।</p>
<p>उन्होंने कुलपति एवं शिक्षकों द्वारा संक्रमण काल में किए जा रहे बहु आयामी प्रयासों को सराहनीय बताया। कहा कि जब उन्हें अन्य स्रोतों से विश्वविद्यालय के उच्चतम उपलब्धियों एवं नव-विचारों के बारे में प्रशंसा सुनने को मिलती है,अत्यंत संतुष्टि एवं प्रसन्नता प्राप्त होती है। लखनऊ विश्वविद्यालय ई-लर्निंग, ई-कंटेंट, विद्यार्थी ओपीडी, सामुदायिक सेवा तथा विश्वविद्यालय प्रशासन कार्यप्रणाली के क्षेत्र में राज्य स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। डॉ शर्मा शताब्दी वर्ष में लखनऊ विश्वविद्यालय के उन्नयन हेतु केंद्र सरकार स्तर पर भी प्रयासरत है।</p>
<p>कुलपति प्रो०आलोक कुमार राय ने कहा कि उप मुख्यमंत्री के स्नेह एवं विश्वविद्यालय उच्चीकरण हेतु प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि उचित दिशा निर्देशन एवं विभिन्न गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त होती रहती है। बताया कि ऑनलाइन मॉडल्स, ई-न्यूज़लेटर, वेबसाइट पुनर्गठन, कम्युनिटी किचन, प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण इत्यादि पर लखनऊ विश्वविद्यालय अपनी पहल कर रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय में इन्क्यूबेशन सेण्टर, वीमेन इंटरप्रेन्योरशिप सेल स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया। वेबिनार की संयोजक सी.पी.सी. की निदेशिका एवं डीन कॉलेज डेवलपमेंट कॉउंसिल प्रो०मधुरिमा लाल ने वेबिनार के मुख्य अतिथि तथा अध्यक्ष सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया। वेबिनार के विषय का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति में उप मुख्यमंत्री का सहयोग प्रेरणादायक है।</p>
<p>कुलपति भी इसके प्रति प्रयास कर रहे है। सीपीसी ने अपने लगभग दो वर्ष के कार्यकाल में दस हजार से अधिक विद्यार्थियों को क्षमता निर्माण एवं रोज़गार योग्य बनाने हेतु प्रशिक्षित किये है तथा एक हजार से अधिक लोगों को रोज़गार दिलाया है। डॉ दिनेश शर्मा के प्रयास के फलस्वरुप इस सेल में महात्मा गाँधी रोज़गार पीठ की भी स्थापना हुई है।वेबिनार के प्रथम सत्र में प्रो एके सेनगुप्ता,पूर्व प्रति कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था एवं विशेषतया उद्यमिता विकास पर कोविड-19 के प्रभावों की विस्तृत चर्चा की गयी। उन्होंने बताया कि इस महामारी के परिणामस्वरूप जी डी पी दर में 1 से 1.5 प्रतिशत कम होने सम्भावना है तथा अर्थव्यवस्था थ्री ट्रिलियन से कम होकर लगभग टू ट्रिलियन USD तक आ सकती है। चीन से अपना व्यवसाय समाप्त कर उद्यमियों को भारत में आकर्षित करने का सुनेहरा अवसर है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान के डा०आशीष भटनागर ने कोविड संक्रमण के पश्चात उद्यमिता सम्भन्धी चुनौतियों विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किया। एक अन्य विशिष्ट वक्ता डॉ०अपर्णा मिश्रा ने CWEHUB की समस्याओं एवं संभावनाओं पर अपना ज्ञानवर्धक वक्तव्य प्रस्तुत किया| वेबिनार में दो हजार से अधिक सहभगियो ने अपना पंजीकरण कराया तथा अधिकांश लोगों ने पूरे समय अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की। वेबिनार में डीन कॉमर्स एवं साइंस प्रो०एस०के०शुक्ला,डीन विधि संकाय प्रो सीपी सिंह डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो०पूनम टंडन तथा विश्विद्यालय के सम्मानित शिक्षको ने भी सहभागिता की। वेबिनार के आयोजन मंडल में प्रो एम् के अग्रवाल, प्रो गौरी सक्सेना, प्रो मधुरिमा प्रधान, प्रो श्रुति, संजय मेधावी, डॉ०वैशाली, डॉ०सुनीता एवं डॉ०ए०के०सिंह प्रमुख थे।</p>
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