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	<title>Business Link &#187; करियर</title>
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		<title>मेट्रो व सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Jan 2022 09:21:10 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[मेट्रो व सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले कोचिंग संचालक को पीजीआई पुलिस ने दबोच लिया है। पुलिस ने उसके पास से कई कूटरचित दस्तावेज बरामद किये हैं। वहीं, उसके अन्य साथियों व गिरोह के सदस्यों की तलाश में दबिश दी जा रही है। पकड़ा गया जालसाज मूलरूप से प्रयागराज &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>मेट्रो व सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले कोचिंग संचालक को पीजीआई पुलिस ने दबोच लिया है। पुलिस ने उसके पास से कई कूटरचित दस्तावेज बरामद किये हैं। वहीं, उसके अन्य साथियों व गिरोह के सदस्यों की तलाश में दबिश दी जा रही है। पकड़ा गया जालसाज मूलरूप से प्रयागराज के अल्लापुर तिलक नगर का रहने वाला है।</p>
<p>प्रभारी निरीक्षक पीजीआइ धर्मपाल सिंह के मुताबिक जालसाज अवनीश चंद्र श्रीवास्तव को वृंदावन सेक्टर आठ अंडरपास से डीसीपी पूर्वी की क्राइम के संयुक्त प्रयास से पकड़ा गया। अवनीश के पास से एक मोबाइल और फर्जी नियुक्तिपत्र मिले हैं। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक पीजीआई थाने में मध्य प्रदेश के सिंगरौली नवानगर में रहने वाले राकेश कुमार ने अवनीश चंद्र और उसके साथी संजय मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।</p>
<p>पीड़ित राकेश ने आरोप लगाया था कि प्रयागराज में कोचिंग पढ़ने के दौरान अवनीश से उनकी मुलाकात हुई। अवनीश ने उससे कहा कि मेट्रो कार्पोरेशन में भर्ती निकली है। उसकी मेट्रो के बड़े अधिकारियों से अच्छी जान पहचान है। वह आसानी से नौकरी दिलवा देगा। राकेश के मुताबिक अवनीश के बातों में आने के बाद उसने और साथी कीर्ति के अलावा करीब अन्य 20-25 लोगों ने परीक्षा भी दी थी।</p>
<p>अवनीश ने प्रति व्यक्ति साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की। बेरोजगारों ने रुपये अवनीश को दे भी दिया। अवनीश ने हाल में ही कहा कि तुम सबकी नौकरी लग गई है। जब ज्वाइन करने पहुंचे तो पता चला कि वहां परीक्षा परिणाम में उनका नाम ही नहीं है। विरोध किया तो अवनीश और उसके साथियों ने गाली-गलौज की।</p>
<p>राकेश ने पुलिस को बताया कि अवनीश ने उन्हें और अन्य लोगों को नियुक्ति पत्र देकर नौकरी ज्वाइन करने के लिए कहा था। जब वह और कुछ अन्य लोग मेट्रो कार्पोरेशन के दफ्तर पहुंचे तो पता चला कि ज्वाइनिंग लेटर फर्जी है। पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।</p>
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		<title>पीईटी आवेदनकर्ताओं को जल्द ही शॉर्टलिस्ट कर सकता है आयोग</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Jan 2022 19:24:18 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में लेखपाल की नौकरी सरकारी नौकरियों में से काफी शानदार नौकरी मानी जाती है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवार राजस्व लेखपाल भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द सम्पन्न कराए जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यूपी सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन कमीशन (UPSSSC) की ओर से प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा पूरी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश में लेखपाल की नौकरी सरकारी नौकरियों में से काफी शानदार नौकरी मानी जाती है। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवार राजस्व लेखपाल भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द सम्पन्न कराए जाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p>यूपी सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन कमीशन (UPSSSC) की ओर से प्रारम्भिक अर्हता परीक्षा पूरी कराए जाने के बाद लेखपाल के पदों की संख्या से जुड़े पत्ते तो खोल दिए गए हैं लेकिन कितना स्कोर हासिल करने वाले कैंडिडेट्स इसकी मुख्य परीक्षा में शामिल हो पाएंगे, इस बात को लेकर अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, आयोग द्वारा 28 जनवरी तक पीईटी देने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में अपनी दावेदारी दर्ज कराने का मौका दे रखा है।</p>
<p>ऐसे में जो उम्मीदवार अभी तक किसी कारणवश आवेदन नहीं कर पाए हैं वह अंतिम तिथि से पहले यूपीएसएसएससी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। यूपीएसएसएससी द्वारा राजस्व लेखपाल भर्ती के अंतगर्त कुल 80,85 पदों को भरा जाना है। आयोग के जरिए निकाली गई इस भर्ती में शॉर्टलिस्ट किए जाने वाले कैंडिडेट्स को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा।</p>
<p>हालांकि, मुख्य परीक्षा का आयोजन कब तक किया जाना है इस संबंध में अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आयी है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च अंत में यह परीक्षा आयोजित कराई जा सकती है। इसलिए अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी तेज कर देनी चाहिए। इसके लिए सफलता डॉट कॉम के जरिए चलाए जा रहे कोर्स की भी मदद ली जा सकती है।</p>
<p>राजस्व लेखपाल की परीक्षा में सामान्य हिन्दी, सामान्य ज्ञान, गणित, व ग्राम्य समाज एवं विकास से प्रश्न पूछे जाने हैं। इन सभी विषयों से कुल 100 अंकों की परीक्षा के लिए 100 सवाल पूछे जाएंगे, प्रत्येक गलत उत्तर के लिए एक चौथाई अंक की निगेटिव मार्किंग की प्रक्रिया भी लागू की गई है। ऐसे में अभ्यर्थी सफलता डॉट कॉम के खास राजस्व लेखपाल बैच को ज्वॉइन कर अपने लेखपाल बनने के सपने को साकार बना सकते हैं।</p>
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		<title>पुलिसिया बर्बरता के बाद सहमे छात्र</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Jan 2022 17:54:53 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में अंदर से ताला बंद कर डर-सहमे, दुबके हुए हैं। पुलिस ने जिस क्रूरता से कमरों से छात्रों को बाहर घसीटकर पीटा था, उस मंजर को याद कर छात्रों की रूह कांप जाती है।</p>
<p>छोटा बघाड़ा मिश्रा लॉज में रहने वाले बिहार के विनीत यादव ने बताया कि टीजीटी-पीजीटी की तैयारी करते हैं। मंगलवार शाम वह कमरे में थे। अचानक बाहर शोरगुल मचा। हम डर गए। लगभग आठ-दस पुलिस वाले आए और कमरे का दरवाजा लाठी और बूटों से पीटकर तोड़ने लगे। खिड़कियों के कांच तोड़ दिए। कुछ कमरों का दरवाजा तोड़ दिया और छात्रों को बर्बर तरीके से पीटा। चीख पुकार सुनकर तख्त को दरवाजे से सटाकर हम लोग चुपचाप नीचे छिपे रहे।</p>
<p>आधे घंटे सन्नाटा पसरा रहने के बाद साथियों से फोन पर पता किया और चुपचाप सहपाठी के साथ माघ मेला क्षेत्र में निकल गए। रात भर मेले में घूमते रहे। हम लोग सुबह भी कमरे पर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। शाम को जब साथियों से पता चला कि एसएसपी आए थे और उन्होंने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि किसी छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा। तब हम लोग कमरे पर आए।</p>
<p>इसी लॉज में एसएससी की तैयारी करने वाले जौनपुर निवासी राजेश ने बताया कि जो छात्र प्रदर्शन में शामिल थे। वह तो पहले ही भाग चुके थे। कमरे में तो वहीं छात्र थे, जिनका आंदोलन से कोई लेना देना नहीं था। लेकिन पुलिस ने बेगुनाह छात्रों को पीटा। लॉज में कई छात्र इंटर की पढ़ाई करने वाले हैं। पुलिस ने उनको भी नहीं बख्शा है।</p>
<p>बिहार के कैमूर जिले के विनोद कुमार ने बताया छात्र अपनी बात जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे थे। आखिर छात्र अपनी बात किस तरह जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाएं। हम यहां पढ़ने के लिए आए हैं। उपद्रव करने नहीं आए हैं। लेकिन पुलिस ने छात्रों के साथ उपद्रवियों सा सलूक किया। जो छात्र आसपास के जिलों के रहने वाले हैं। वह घर चले गए हैं। जो दूरदराज के हैं, वही छात्र रुके हुए हैं।</p>
<p>लॉज के कमरों में रुके हुए छात्र बाहर जरा सी भी आहट पर सहम उठते हैं। वह कमरे से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इन छात्रों का कहना है कि घर दूर होने और शहर में दूसरा कोई ठिकाना न होने के कारण लॉज में रुकने की मजबूरी है। वरना इस माहौल में वह भी ताला बंद कर चले जाते और माहौल सामान्य होने पर ही लौटते।</p>
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		<title>उत्तर प्रदेश में अभी स्कूल खुलने के आसार कम</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Jan 2022 18:52:07 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश में अभी स्कूलों के शुरू होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। खबरों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार स्कूलों को खोलने की तारीख अब 15 फरवरी, 2022 तक बढ़ा सकती है। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक ऐसी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश में अभी स्कूलों के शुरू होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। खबरों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार स्कूलों को खोलने की तारीख अब 15 फरवरी, 2022 तक बढ़ा सकती है। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। हालांकि, राज्य सरकार ने अब तक ऐसी कोई भी आधिकारिक सूचना नहीं जारी की है।</p>
<p>सरकार के फैसले के अनुसार राज्य में स्कूल 30 जनवरी से शुरू किए जाने हैं। इससे पहले स्कूलों को 23 जनवरी, 2022 से शुरू किया जाना था। हालांकि, राज्य में कोरोना और इसके नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामलों को देखते हुए तारीखों को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बुधवार को राज्यभर से 10, 937 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। वहीं, इस दौरान 17,074 मरीज ठीक भी हुए हैं। प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या 80342 है।</p>
<p>एक ओर जहां उत्तर प्रदेश में स्कूलों को बंद रखने की खबर सामने आ रही है। वहीं, कई राज्य ऐसे भी है जहां स्कूलों को दोबारा से खोला जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने 24 जनवरी से राज्य में स्कूलों को खोलने के आदेश जारी कर दिए थे। वहीं, हरियाणा में भी 1 फरवरी से ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हो जाएंगी।</p>
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		<title>CM योगी बने ढाल, कोरोना का &#8216;जीवन और जीविका&#8217; पर प्रहार नाकाम</title>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2020 21:51:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[लखनऊ। घर वापसी का हर अवसर खुशनुमा होता है, और जब वापसी कोरोना कहर के दरम्यान हो, सुरक्षित हो, सरलतापूर्वक हो, तो खुशी का अहसास, पुनः ज़िंदगी मिलने के बराबर हो जाता है। शायद तभी उ.प्र. के प्रवासी श्रमिकों/कामगारों को लेकर गुजरात से एक रेलगाड़ी जब उन्नाव के रेलवे स्टेशन पहुंचती है तो उससे उतरने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21179" style="width: 111px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50.jpeg"><img class="  wp-image-21179" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50.jpeg" alt="C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50" width="111" height="185" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>प्रणय विक्रम सिंह </strong></figcaption></figure>
<p><strong> लखनऊ।</strong> घर वापसी का हर अवसर खुशनुमा होता है, और जब वापसी कोरोना कहर के दरम्यान हो, सुरक्षित हो, सरलतापूर्वक हो, तो खुशी का अहसास, पुनः ज़िंदगी मिलने के बराबर हो जाता है। शायद तभी उ.प्र. के प्रवासी श्रमिकों/कामगारों को लेकर गुजरात से एक रेलगाड़ी जब उन्नाव के रेलवे स्टेशन पहुंचती है तो उससे उतरने वाले हर इंसान के चेहरे पर कयामत को फतह करने वाला गुरूर और माँ की गोद में मिलने वाला सुकून दिखाई पड़ रहा था। खुशी का आलम कुछ यूं था मानों बरसों की साधना के बाद मनचाहा वरदान मिल गया हो। सारे गिले-शिकवे, दर्द-तकलीफ, भर्राई आवाज में “योगी जी जिंदाबाद” के भावुक स्वर में गुम हो गए।</p>
<p>दीगर है कि मार्च के आखिरी हफ्ते से प्रवासी श्रमिकों को दिल्ली से वापस लाने का जो सिलसिला यूपी सरकार की निगेहबानी में शुरू हुआ था वह लगातार जारी है। अब तक कई सूबों से रेलगाड़ियों और बसों के जरिए करीब आठ लाख श्रमिक उ.प्र. वापस लौट चुके हैं। उम्मीद है कि लगभग 20 लाख प्रवासी कामगार इस दौरान अपने घरों को लौटेंगे। ऐसे अभूतपूर्व कार्य को अंजाम दे कर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने देश के अन्य सूबों की सरकारों के सम्मुख एक नजीर स्थापित कर दी है। खैर, अपने सूबे के बाशिंदों को मुसीबत से निकाल कर योगी ने एक जिम्मेदार अभिभावक होने का फर्ज तो निभाया है लेकिन अगला सवाल प्रवासी श्रमिकों के रोजगार का है।</p>
<p>गौरतलब है कि कोरोना के कारण तेजी से बदल रही सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां, संभावित महामारी “बेरोजगारी” के विकराल स्वरूप में आने की मुनादी कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने &#8216;जान और जहान&#8217; दोनों को सुरक्षित रखने की अपील की थी। &#8216;जहान&#8217; स्वयं में विस्तृत अर्थों को समेटे हुए है। जहान की सुरक्षा का समेकित अर्थ &#8216;सामाजिक जीवन&#8217; की गतिविधियों का सहज संपादन भी है। लिहाज़ा प्रश्न उदित होता है कि लाखों की संख्या में जो श्रमिक अन्य प्रांतों से अपने गांव और कस्बों में वापस आए हैं, वह रोजगार के अभाव में अपनी व अपने कुटुंब की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कैसे करेंगे? कैसे सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन संभव होगा?</p>
<p>आखिर 23 करोड़ की आबादी वाले उ.प्र. में कोरोना जनित बेरोजगारी की मनहूस काली रात में रोजगार का खुशनुमा उजाला कैसे फैलेगा? क्या अनुद्योग के भंवर में रोजगार की कश्ती डूब जायेगी? ऐसा कतई नहीं है। समस्या में भी संभावना खोजने में विशेषज्ञ मुख्यमंत्री योगी के पास रोजगार के लिए असीम संभावनाओं के अनेक पिटारे हैं। आगामी 03 से 06 महीनों के भीतर कम से कम 20 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजन की ठोस कार्ययोजना विभिन्न विभागों द्वारा तैयार कर ली गई है।</p>
<p>MSME, ODOP, NRLM, मनरेगा, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास मिशन, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और खादी ग्रामोद्योग आदि के माध्यम से लाखों रोजगारों के सृजन की रूपरेखा को टीम-11 के द्वारा धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इसी क्रम में प्रवासी श्रमिक/कामगार, जो उत्तर प्रदेश वापस लाए जा रहे हैं, बाकायदा उन सभी की स्क्रीनिंग कर उनके हुनर, स्किल का भी लेखा-जोखा जनपदवार-ग्रामवार तैयार किया जा रहा है ताकि इसी के अनुसार उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा सके।</p>
<p>“जीवन और जीविका” का यह समर, पूरी व्यवस्था को “स्वदेशी” दिशा की तरफ मोड़ते हुए कुटीर उद्योगों के क्षेत्र को बड़ी उम्मीद से देख रहा है। यही नहीं गोवंश के जरिए गो आधारित जैविक खेती, गो मूत्र और गोबर से बनने वाले उत्पा<img class="  wp-image-21309 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/charbaag-1.jpg" alt="charbaag 1" width="411" height="277" />दों और फूलों से बनने वाले इत्र, अगरबत्ती और उसके बचे हिस्से से कंपोस्ट की संभावनाएं, रोजगार के नए आयाम विकसित करने का माध्यम बनने जा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश को रेडिमेड गारमेंट का हब बनाने की कार्य योजना पूरी तरह से तैयार हो चुकी है।</p>
<p>योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि, &#8220;रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र की मोदी सरकार ने रिवल्विंग फंड में जो बढ़ोतरी की है, उससे महिला स्वयंसेवी समूहों की विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए रोजगार सृजित किया जाएंगे। उससे महिला स्वयंसेवी समूहों को विभिन्न गतिविधियों जैसे सिलाई, अचार, मसाला बनाना इत्यादि के तहत रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे।&#8221; यही नहीं महिलाएं जिन सामग्रियों का निर्माण करेंगी, उन्हें राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने में सरकार पूरा सहयोग करेगी। देखा जाए तो, कोविड-19 कालखण्ड में &#8216;स्थानीय से राष्ट्रीय&#8217; की यात्रा का परिवहन पथ बनी ODOP योजना बहुत बड़ी संख्या में रोजगार सृजन का माध्यम बनने जा रही है। वहीं, दुग्ध समितियां तथा पौध नर्सरी भी प्रवासी कामगारों, श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने का बड़ा माध्यम बनेंगी।</p>
<p>ध्यातव्य है कि, उत्तर प्रदेश में नए कृषि सुधारों ने, “कृषक उत्थान” की बहुआयामी संभावनाओं की रूपरेखा तैयार कर दी है। यह नए संशोधन, उप्र कृषि उपज विपणन अधिनियम के दायरे से 46 कृषि वस्तुओं को मुक्ति प्रदान करते हुए, इन वस्तुओं को किसानों से सीधे खरीद की अनुमति प्रदान करते हैं। उ.प्र. किसानों से सीधी खरीद, मौजूदा वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज को नई निजी मंडी के रूप में निर्दिष्ट करने और निजी मंडियां स्थापित करने की भी सुविधा प्रदान करने वाला राज्य बन गया है। सुधारों की यह श्रंखला अब किसानों को स्थानीय एपीएमसी (मंडियों) की दया पर आश्रित रहने से मुक्ति प्रदान करती है क्योंकि उनके पास राज्य के किसी भी बाजार में अपने उत्पाद बेचने के लिए एकल लाइसेंस है।</p>
<p>यह निर्णय असमय काल-कवलित होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और बिचौलियों के हाथों निर्धन कृषकों की प्रणालीगत लूट को समाप्त करने हेतु पूर्णतः सक्षम है। यह, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने में भी मदद करेगा जो अधिक रोजगार उत्पन्न करेगा। सुधारों की इस श्रंखला में श्रम कानूनों को शिथिल कर योगी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश व्यापार के लिए खुला है। श्रम कानूनों के निलंबन से उद्योग और विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। अब नए लघु एवं मझोले उद्योगों के विकसित होने की प्रबलता बढ़ गई है।</p>
<p>यहां एक बात और काबिल-ए-गौर है कि कोराना संक्रमण के मध्य, हजारों औद्योगिक कम्पनियों का चीन से मोह भंग हो गया है। उसमें चीन की हठधर्मी नीतियों का भी बड़ा योगदान है साथ ही वैश्विक औद्योगिक जगत, अब किसी एक स्थान के बजाए अनेक स्थानों पर निवेश कर कोरोना जैसे किसी भी अप्रत्याशित जोखिम के प्रभाव को कम करना चाहता है। इस “संक्रमण और संभावना” के संधिकाल पर योगी सरकार का बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने हेतु “विशेष पैकेज” तैयार करना, उ.प्र. को “औद्योगिक निवेश” का बड़ा हब बनाने जा रहा है। जो असीमित और गुणवत्तापरक राजगार का बड़ा जरिया बनेगा।</p>
<p>यही नहीं मुख्यमंत्री शिक्षुता (अप्रेन्टिसशिप) प्रोत्साहन योजना के तहत युवाओं को उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ-साथ ₹2500 का मासिक प्रशिक्षण भत्ता प्रदान की जाने की व्यवस्था की गई है। विदित हो कि एक वर्ष में एक लाख युवाओं को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के तहत 02 लाख युवाओं को जोड़े जाने की संभावनाओं को तलाशा गया है। रोजगार अथवा स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन के लिए युवाओं को ‘युवा हब’ के माध्यम से भी ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी द्वारा दिए गए हैं।</p>
<p>उपरोक्त विवरणों की बुनियाद पुख्ता तरीके से इस बात की तस्दीक करती है कि यूपी में हर हाथ में काम का स्वप्न अधूरा नहीं रहेगा। बल्कि उ.प्र. सरकार का नियोजन और उसके सापेक्ष सक्रियता, यह बता रही है कि द्वापर युग के बाद फिर एक “राजयोगी” का परिश्रम, पाण्डव रूपी जनता को “रोजगार रूपी पथ” के माध्यम से बेरोजगारी के “लाक्षागृह” की आग से अवश्य बचा लेगा।</p>
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		<title>कोरोनामिक्स: उम्मीद का नया अर्थशास्त्र</title>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2020 21:11:08 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[कोरोना महामारी केवल कुछ समय के लिए अर्थशास्त्र की दशा को बदलने नहीं जा रही है, कोरोना नया इकोनोमिक्स बनाने जा रही है कोरोनामिक्स। यह कोरोनामिक्स अर्थव्यवस्था पर तब तक शासन करेगा जब तक कि इसके लिए दवा न विकसित हो जाए हो और लोगों के दिल में जैविक युद्ध की आशंका न खत्म हो &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21163" style="width: 152px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg"><img class="  wp-image-21163" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg" alt="B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB" width="152" height="231" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>पंकज जायसवाल</strong></figcaption></figure>
<p>कोरोना महामारी केवल कुछ समय के लिए अर्थशास्त्र की दशा को बदलने नहीं जा रही है, कोरोना नया इकोनोमिक्स बनाने जा रही है कोरोनामिक्स। यह कोरोनामिक्स अर्थव्यवस्था पर तब तक शासन करेगा जब तक कि इसके लिए दवा न विकसित हो जाए हो और लोगों के दिल में जैविक युद्ध की आशंका न खत्म हो जाए। इस कोरोनामिक्स को जानने के लिए आइए कोरोना महामारी के कुछ तथ्य पर चर्चा करते हैं । आज आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री नहीं के बराबर है, इसलिए जीडीपी लगभग शून्य और विकास नकारात्मक है। लगभग सभी व्यवसाय आवश्यक सामान के उद्योग को छोड़कर सकल हानि का सामना कर रहे हैं। आपूर्ति श्रृंखला अंतिम छोर तक प्रभावित है।</p>
<p>विश्व बैंक ने भी कह दिया कि जीडीपी भारत और संपूर्ण एशिया के लिए शून्य होगा। अगले साल की विकास दर 1.8 प्रतिशत आंकी गई और यदि 7 प्रतिशत की विकास दर चाहिए तो लगातार तीन वर्ष तक 8.5 प्रतिशत की उच्च विकास दर चाहिए होंगे। दुनिया भर में 160 करोड़ लोगों के बेरोजगारी का अनुमान लगाया जा रहा है। भारत में 11 करोड़ एमएसएमई प्रभावित हैं। सभी सरकारी लक्ष्य और रेटिंग समाप्त हो गए हैं। सभी बजट आवंटन पूरे नहीं किए जा पा रहे हैं सारा फोकस स्वास्थ्य इन्फ्रा पर आ गया है। भारत में प्रति दिन नुकसान 4.5 बिलियन डॉलर हो गया है और लॉकडाउन एक में जहाँ उच्च स्तर के बिजनेस एविएशन और हॉस्पिटैलिटी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं तो अंतिम स्तर पर नाई और सैलून बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालाँकि ये तथ्य हमें नकारात्मक संकेत देते हैं लेकिन फिर भी, भारत के लिए बहुत सारी उम्मीदें और सकारात्मक संकेत हैं।</p>
<p>शेष विश्व की तुलना में भारत में आबादी के आकार और जटिल संरचना के अनुपात में प्रसार और मृत्यु की दर धीमी है। हालांकि संक्रमण का सम्पूर्ण स्तर पर परीक्षण और मापन नहीं हो पाया है तिस पर भी मृत्यु औसत दर से बहुत कम और नियंत्रण में है, शेष विश्व के मुकाबले। भारत में परीक्षण की कमी के कारण एक बड़ी आबादी बड़े पैमाने पर संक्रमण से अनजान हैं, टेस्ट नहीं हो पा रहें हैं लेकिन लगभग हर शहरी मृत्यु रिकॉर्ड में हैं और फिर भी कोरोना से मृत्यु बहुत कम है, कारण भारतीयों की प्रतिरक्षा प्रणाली अच्छी तरह से लड़ रही है।</p>
<p>अर्थव्यवस्था और समाज के लिए, यह उछाल लेकर वापसी करने का समय है विशेषकर उनके लिए जो विकास की दौड़ से वंचित और पिछड़ गए थे। इस संकट ने नए नेतृत्व विकास को उभरने के लिए भी एक जगह बनाई है, यह व्यक्तिगत स्तर पर भी लागू है और वैश्विक स्तर पर भी। पृथ्वी और अर्थव्यवस्था दोनों रीसेट मोड में हैं, यह परिवर्तन विकास की दौड़ में पिछड़ गए और वंचित रह गए आबादी को अधिक संभावना देगी, यह उनके लिए अवसर हो सकता है। कौशल के विकेंद्रीकरण से क़स्बे के स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और पूरे भारत में समान गति और स्तर से विकास संभव होगा और आर्थिक तानाबाना मजबूत होगा। नौकरी से निकाल दिए गए लोग स्वरोजगार शुरू करेंगे और वे सलाहकार पेशेवरों जैसे की सीए,अधिवक्ताओं और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए अवसर पैदा करेंगे।</p>
<p>बैंक और वित्तीय संस्थान और ऋण देने के लिए मजबूर होंगी, क्योंकि इस अवधि के दौरान ऋण वितरण नहीं हो पाया है। सरकार एमएसएमई और प्रभावित क्षेत्र को कई पैकेज देगी। सरकारी खरीद और व्यय में वृद्धि होगी। भारत विश्व में पुनः आउटसोर्सिंग हब हो सकता है। आउटसोर्सिंग के लिए लिस्टिंग पहले से ही इस प्रक्रिया में है जिसमें कौन सा काम काम घर से और कौन सा हाइब्रिड सिस्टम में हो सकता है इसपर मंथन चालू हो गया है, यह बदलाव ऑपरेटिंग लागत को कम करेगा और लाभ बढ़ाएगा। लॉकडाउन में घटे वेतन और आय ने बचत की आदत और फालतू खर्चों में कमी की आदत डाल दी है।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर, खरीदार पहले से ही भारत से चीनी मिट्टी के बरतन, घर, फैशन और जीवन शैली के सामानों की खरीददारी कर रहें हैं और अब यह गति बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकल्प के रूप में भारत कच्चे माल और निर्मित वस्तुओं के आपूर्तिकर्ता के रूप में कई व्यापार चैनलों में प्रवेश कर सकता है। बदलती विश्व अर्थगति और नई अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला मॉडल में, भारत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत चीन से निकल रहे और लगभग एक हजार विदेशी निर्माताओं को भारत में उत्पादन संयत्र को स्थानांतरित करने के लिए आमंत्रित करने में लगा है। वे भारत को चीन के विकल्प के रूप में देख भी रहें हैं। कथित तौर पर, कम से कम 300 कंपनिया पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा और कपड़ा सहित कई क्षेत्रों में उत्पादन के लिए भारत सरकार के साथ बात कर रहीं हैं।</p>
<p>विनिर्माण सुविधाओं के वृद्धि होने पर आसपास ढांचागत विकास , स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। इस वर्ष, सरकार 300 से अधिक उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने का सोच रही है, और ऐसे देशों को चिन्हित कर रही है जो करीब 1000 वस्तुओं की आपूर्ति के लिए चीन से इतर सोच रहें हैं । महामारी ने उपभोक्ता मनोविज्ञान में भी बदलाव किया है, और यह बाजार के प्रति, विशेष रूप से चीन और उसके उत्पादों के प्रति एक परिवर्तित व्यवहार सामने लायेगा । इससे कोई इनकार नहीं कर रहा है कि, महामारी को देखते हुए, आपूर्ति श्रृंखला पर सबसे बड़ी मार पड़ी है और भारत को इस वैश्विक शून्य को भरने के लिए छलांग लगाने से पहले अपनी निर्भरता को चीन पर से काफी कम करना होगा क्यों कि लंबे समय से, चीन विभिन्न वस्तुवों के लिए भारत की आयात सूची में सबसे ऊपर है।</p>
<p>कोरोना काल के बाद कैसे सेक्टरों के विकास पहले से स्थापित कई नकारात्मकताओं को प्रतिस्थापित करेंगे और पूर्व निर्मित विकास के अंतर को भरेंगे । इस दौर के बाद एग्रो इकोनॉमी ही विश्व स्तर पर लीड करेगी, इस दौर में लोगों ने आवश्यक खाद्य पदार्थों, प्रिवेंटिव स्वास्थ्य बाजार (आयुर्वेद, योग और होमियोपैथ) को महसूस किया है और यह इस सेगमेंट के लिए एक अवसर होगा। आर्थिक गतिविधियों के विकेंद्रीकरण से माइक्रो सेक्टर बढ़ेगा और नए और पहले से अधिक मजबूत आर्थिक ताने-बाने का निर्माण होगा। हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक सेक्टर में वृद्धि होगी। एविएशन हॉस्पिटैलिटी एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर प्रभावित होगा जहां भीड़ ज्यादे होती है लेकिन पोजिटिव यह है की लोग मनोरंजन के अन्य माध्यमों की ओर रुख करेंगे और उद्योग उस ओर बढ़ेगा। हां, एविएशन और हाई-क्लास हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को कोरोना के बाद संभलने और पुनः पूर्व आकार लेने में समय लगेगा।</p>
<p>यह भी स्पष्ट है की विश्व स्तर पर बदल रही गतिशीलता में चीन पर निर्भरता शायद खत्म हो रही है, आशंका है की उसका दबदबा खत्म करने या कोरोना के दंड के रूप में चीन पर परमाणु बम से हमला हो जाए या चीन को तोड़ने के लिए साइलेंट हमला हो या शीत युद्ध जैसी परिस्थितियां हो जाए, हालाँकि ये सब अतिवाद संभावनाएं हैं फिर भी दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्था की लिस्ट बदलेगी और कुछ नए देश आयंगे और पुराने जायेंगे । संयुक्त राष्ट्र और डब्ल्यूएचओ की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी<br />
उपरोक्त सभी सकारात्मक आशाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। एमएसएमई से सरकारी खरीद को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए और इसमें से भी 50 प्रतिशत माइक्रो सेक्टर से खरीदना चाहिए। एमएसएमई को तीन-भाग सूक्ष्म, लघु और मध्यम में अलग-अलग तीन प्रकोष्ठ के नेतृत्व में विभाजित करना चाहिए ताकि माइक्रो के साथ न्याय हो सके।</p>
<p>सरकार को अंतिम स्तर पर बिक्री संभव बनाने और खपत बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। बैंक के लाभ की समीक्षा की आवश्यकता है और बैंक ब्याज और बैंक शुल्क में कमी इस समय की मांग है। कम ब्याज दर के साथ अधिस्थगन की अवधि और सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ाए जाने चाहिए । बजट की बात करें तो कोरोना के कारण अधिकांश बजट आवंटन बदल जायेगा और यह अब मानव संसाधन के बचाव, विकास एवं स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विकास पर स्थानांतरित हो जाएगा। पारित किए गए सभी बजट और सरकारी खर्चों की समीक्षा, पुनर्गणना और फिर से नवीन आवंटन किया जाना चाहिए क्यूँ की इस कोरोना ने बजट के खर्चों की प्राथमिकता और उनकी अवधि मटेरियल रूप से बदल दी है।</p>
<p><span lang="HI">व्यक्तिगत स्तर पर भी हमारे पास करने को कई चीजें हैं और अवसर भी हैं ।</span> <span lang="HI">हम अपने लंबे समय से लंबित स्वास्थ्य योजना को पूरा कर सकते हैं।</span> <span lang="HI">हम उन सभी कार्यों को पूरा कर सकते हैं जो कार्यालय जाने या काम में व्यस्त रहने के कारण टालते आये थे।</span> <span lang="HI">अब हम व्यय पुनर्गठन और लागत में कमी को संभव कर सकते हैं ।</span> <span lang="HI">मध्यम वर्ग कोरोना के बहाने ही भव्य और अनावश्यक खर्च को कम कर सकता है। लगातार लॉकडाउन ने हमें अनुशासन सीखा दिया है हम लॉकडाउन के दिशानिर्देशों और कोरोना के बाद आने वाले आर्थिक पर्यावरण के अनुसार काम का पुनर्गठन कर सकते हैं।</span> <span lang="HI">इस कोरोनामिक्स से लड़ने के लिए हमें अपने</span> <span lang="HI">व्यावसायिक रणनीति में</span> <span lang="HI">सभी सीमाओं</span>, <span lang="HI">शर्म</span> <span lang="HI">और अहंकार</span> <span lang="HI">को भी खोलना चाहिए</span> <span lang="HI">।</span> <span lang="HI">कोरोनामिक्स के इन अनुप्रयोगों  से हम अर्थव्यवस्था और मानव जीवन के दुश्मन कोविड </span>19 <span lang="HI">को हरा सकते हैं।</span></p>
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		<title>विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन</title>
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		<pubDate>Tue, 28 Apr 2020 22:46:02 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[करियर]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>

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		<description><![CDATA[डॉ. दिलीप अग्निहोत्री यह समय है अपने ‘कम्फर्ट ज़ोन’ से बाहर निकल कर, ‘फियर ज़ोन’ से आगे जाकर ‘ग्रोथ जोन’ की संभावनाओं को साकार करने का  लखनऊ विश्वविद्यालय की बेबीनार में छात्रों का किया गया उत्साहवर्धन  कॉर्पोरेट ट्रेनर और स्किल इंजीनियर अमित सिन्हा ने दिए कई टिप्स  लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left"><strong>डॉ. दिलीप अग्निहोत्री</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: left"><strong>यह समय है अपने ‘कम्फर्ट ज़ोन’ से बाहर निकल कर, ‘फियर ज़ोन’ से आगे जाकर ‘ग्रोथ जोन’ की संभावनाओं को साकार करने का </strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>लखनऊ विश्वविद्यालय की बेबीनार में छात्रों का किया गया उत्साहवर्धन </strong></li>
<li style="text-align: left"><strong>कॉर्पोरेट ट्रेनर और स्किल इंजीनियर अमित सिन्हा ने दिए कई टिप्स </strong></li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट में भी अवसर की ओर इशारा किया था। वस्तुतः कठिनाई में इस प्रकार का सकारात्मक चिन्तन भी मनोबल बढ़ाने में सहायक होता है। लॉक डाउन के समय का भी बेहतर उपयोग किया जा सकता है। यह भी कठिनाई में एक अवसर की भांति है।<br />
लखनऊ विश्वविद्यालय की बेबीनार में भी इसी प्रकार के विचार रेखांकित किये गए। इसमें बताया गया कि लॉक डाउन में अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकले ग्रोथ जोन की संभावनाओं को साकार करना चाहिए।</p>
<p>लखनऊ विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संकाय के ट्रेनिंग ऐंड प्लेसमेंट सेल के अंतर्गत आयोजित कॅरियर परामर्श सत्र में विद्यर्थियो का उत्साहवर्धन किया गया। कहा गया सकारात्मक चिंतन से अपने कॅरियर को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा सकता हैं। इस संदर्भ में कॉर्पोरेट ट्रेनर और स्किल इंजीनियर अमित सिन्हा ने कई टिप्स दिए। उन्होने बताया कि कोविड नाइन्टीन के कारण जॉब मार्केट में होने वाले बदलाव के अनुरूप ख़ुद को तैयार करने का ये सर्वोत्तम समय है। कुछ इंडस्ट्रीज़ में ग्राहकों की मांग गिरने से जॉब की संभावनाएं कम हो सकती है। इनमें पर्यटन, टूर एंड ट्रैवल, होटल, ऑटो, मोबाइल, कार, बाइक रियलइस्टेट फाइनेंशियल सर्विसेस शामिल है।</p>
<p>दूसरी तरफ ई कामर्स, आई.टी इंडस्ट्री, हेल्थकेयर, रीटेल, मेडिकल सेर्विसेस आदि में व्यवसाय बढ़ने की संभावना है। इस कारण अधिकतर जॉब इन्ही इंडस्ट्री में मिलेंगी। छात्र जॉब मार्केट के संदर्भ में विभिन्न सूत्रों से आती हुयी निराशाजनक खबरों से हताश ना हों। बल्कि आत्मविश्वास बनाये रखे। स्वयं को सक्षम बनाने का प्रयास करें। लॉकडाउन का सदुपयोग कर मनचाही इंडस्ट्री में मनचाहा जॉब पा सकते हैं।</p>
<p>छात्र इस लॉक डाउन के दौरान अपने प्रोफेशनल स्किल्स, प्रोफेशनल इमेज, टाइम मैनेजमेंट और इमोश्नल कोशन्ट को बेहतर कर न सिर्फ पहली जॉब पा सकते अपितु अपने पहले प्रमोशन को भी शीघ्र प्राप्त कर सकते हैं। उन्होने उदाहरण के साथ समझाया कि कैसे विश्व की अग्रणी कंपनिया सदैव कुछ नया करने में प्रयासरत रहती है ताकि मार्केट में उनकी उपयोगिता बनी रहे। इसी प्रकार छात्रों को अपने यूएसपी अर्थात यूनीक सेलिंग प्रोपोज़िशन पर काम करना होगा। यह लॉक डाउन का समय अपने यूनीक सेलिंग प्रोपोज़िशन को बढ़ाने हेतु अपने ‘कम्फर्ट ज़ोन’ से बाहर निकल कर, अपने ‘फियर ज़ोन’ से आगे जाकर ‘ग्रोथ जोन’ की संभावनाओं को साकार करने का है।</p>
<p>सेल के संयोजक डॉ हिमांशु पांडेय ने कहा कि छात्र अभी से अपनी इंडस्ट्री का चुनाव कर उसके संदर्भ में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करें और खुद को अन्य प्रतिभागियों से बेहतर बनाने हेतु स्वयं में आवश्यक गुणो को और बढ़ाएँ । आने वाला समय डबल स्पेशलाइजेशन का होगा। डबल स्पेशलाइजेशन एवं अच्छी प्रोफेशनल स्किल्स होने पर छात्रों को बड़ी कंपनियों में अच्छे पद मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।</p>
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		<title>लघु वित्त बैंकों के लिए ‘ऑन टैप’ लाइसेंस की व्यवस्था जल्द</title>
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		<pubDate>Thu, 06 Jun 2019 08:25:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[करियर]]></category>

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		<description><![CDATA[मुंबई। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि लघु वित्त बैंकों के पहले बैच का प्रयोग सफल रहने के बाद उन्हें ‘ऑन टैप’ लाइसेंस देने की व्यवस्था की जायेगी और इस साल अगस्त तक इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किये जायेंगे। ‘ऑन टैप’ लाइसेंस का मतलब है कि दिशा-निर्देशों में दी गयी अर्हता को पूरा करने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p class="storyheadline"><strong>मुंबई।</strong> रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि लघु वित्त बैंकों के पहले बैच का प्रयोग सफल रहने के बाद उन्हें ‘ऑन टैप’ लाइसेंस देने की व्यवस्था की जायेगी और इस साल अगस्त तक इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किये जायेंगे।</p>
<p class="storyheadline">‘ऑन टैप’ लाइसेंस का मतलब है कि दिशा-निर्देशों में दी गयी अर्हता को पूरा करने वाली इकाइयों को आवेदन करने के बाद किसी अतिरिक्त मंजूरी के बिना लाइसेंस जारी किया जायेगा।</p>
<p class="storyheadline">रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक के बाद गुरुवार को जारी ‘विकासशील एवं नियमाक नीति बयान’ में यह बात कही गयी है। केंद्रीय बैंक ने कहा “लघु वित्तीय बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा में यह बात सामने आयी है कि उन्होंने प्राथमिक क्षेत्र का अपना लक्ष्य पूरा किया है और इस प्रकार वित्तीय समावेशन के अपने उद्देश्य को हासिल करने में सफल रहे हैं।</p>
<p class="storyheadline">इसलिए, छोटे ऋण की जरूरत वाले लोगों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने और प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में ज्यादा बैंकों को होना चाहिये। इसके मद्देनजर अगस्त 2019 के अंत तक लघु वित्त बैंकों के लिए ‘ऑन टैप’ लाइसेंस के बारे में दिशा-निर्देश जारी कर दिये जायेंगे।”</p>
<p><span class="storydetails">केंद्रीय बैंक ने प्रयोग के तौर पर 10 लघु बचत बैंकों को लाइसेंस जारी किये थे जिनमें आठ को आरबीआई एक्ट, 1934 की दूसरी अनुसूचि में शामिल किया जा चुका है। लघु बचत बैंकों और भुगतान बैंकों के लिए 27 नवंबर 2014 को दिशा-निर्देश जारी किये गये थे।</span></p>
<p><img src="http://img.newsdog.today/origin_808c870c9cd8b189afb69e5a0a259cef" alt="लघु वित्त बैंकों के लिए इमेज परिणाम" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span class="storydetails">उसी में कहा गया था कि बाद में इनके लिए ‘ऑन टैप’ लाइसेंस व्यवस्था पर भी विचार किया जायेगा। आरबीआई ने कहा है कि </span>भुगतान बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा में अभी और समय लगेगा।</p>
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		<title>शिक्षा की आड़ में लुट रहे अभिभावक</title>
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		<pubDate>Mon, 15 Apr 2019 05:45:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[करियर]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। शिक्षा दिनों- दिन कारोबार का रूप ले रही है बल्कि ये कहे तो बेहतर होगा कि लग्जरी कारोबार। इस लग्जरी कारोबार में शिक्षा देने के बदले अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। नये सत्र की शुरूआत हो गयी है। घर- घर में चिंताओं की तरह- तरह की कहानी सुनने को मिल &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> शिक्षा दिनों- दिन कारोबार का रूप ले रही है बल्कि ये कहे तो बेहतर होगा कि लग्जरी कारोबार। इस लग्जरी कारोबार में शिक्षा देने के बदले अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। नये सत्र की शुरूआत हो गयी है। घर- घर में चिंताओं की तरह- तरह की कहानी सुनने को मिल रही है।</p>
<p>कोई अपनी दवा रोककर तो कोई मोबाइल- केबल जैसे छोटे-मोटे खर्चों में कटौती करके बच्चों का दाखिला करवाने में तमाम तरह के जतन कर रहे है। हर साल शिक्षा सत्र शुरू होते ही शिक्षा माफिया सक्रिय हो जाते हैं।</p>
<p>किताब, ड्रेस, स्टेशनरी और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर अभिभावकों को लूटा जाता है और इसमें निजी स्कूलों की भूमिका बड़ी होती है। इसके अलावा एनसीईआरटी किताबों के बजाए निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावकों को खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। बाकायदा निजी प्रकाशकों की किताबों के लिए ठेका दिया जाता है।</p>
<p>स्कूलों की मनमानी की शिकायत अभिभावक आखिर किससे करें? आज हर स्कूल में कमीशन के नाम पर अभिभावकों के साथ खुली लूट हो रही है और अभिभावक बेबस होकर अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिये जानते- समझते लुट रहे हैं।</p>
<p>केवल यूपी में नहीं बल्कि पूरे देश में आज हर घर की अगर कोई समस्या है तो वो है बच्चों की शिक्षा की। आज हर घर का अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का ख्वाब संजोए हुए है, लेकिन प्राइवेट स्कूलों की लूटखोरी के आगे आज अभिभावक बेबस है।</p>
<p>देश में बेटी- बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे हर मिनट नेताओं की जुबां पर रहते है, लेकिन इसका जवाब कौन देगा और कब देगा कि आखिर बेटी को पढ़ाने के लिए इतनी मोटी रकम का इंतजाम अभिभावक कहां से करें। जिनकी कमाई का आधा से ज्यादा हिस्सा शिक्षा माफिया खुलेआम लूट रहे हैं।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/cms-copy.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-18022" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/cms-copy.jpg" alt="cms copy" width="1181" height="564" /></a></p>
<p>इस शैक्षिक सत्र में अभिभावकों की जेब पहले से ज्यादा ढीली हो रही है, जिससे अभिभाावक न केवल परेशान है बल्कि बीमारी की चपेट में जा रहे है। शहर के तमाम बड़े स्कूलों ने फीस में बेतहासा बढ़ोतरी कर दस फीसद तक की बढ़ोतरी की है। मजे की बात ये है कि ये ऑफीसियल बढ़ोतरी है, बाकी ऊपर के खर्चे आने वाला समय बताएगा।</p>
<p>अप्रैल माह से अभिभावकों से बढ़ी हुई फीस की वसूली भी शुरू कर दी गयी है। बात कॉपी- किताबों की कीमतों की जाए तो भला ऐसा कैसे हो सकता है, जब स्कूल फीस बढ़ाए और स्टेशनरी आइटम न बढ़े। इसमें 20 फीसद तक और यूनिफॉर्म में 10 फीसद तक की वृद्घि सामने आ रही है। इस बार अधिकांश स्कूल कंपोजिट फीस वसूल रहे हैं। दरअसल, शुल्क विनियम-2018 के अनुसार कंपोजिट फीस लेने का प्रावधान है।</p>
<p>इससे पहले स्कूल ट्यूशन फीस अलग से वसूलते थे और बाकी स्पोटर््स, लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास, एनुअल आदि शुल्क अलग से लेते थे। कुल मिलाकर सीधा मतलब है स्कूलों की लूट की दुकानें सज गयी हैं। शिक्षा के मंदिर में सजी लूट की इन दुकान का खेल सरकार से छिपा नहीं है। यदि सरकार की सख्ती इन प्राइवेट स्कूलों पर होती तो शायद आज अभिभावकों की जेब पर खुलेआम ये स्कूल डाका न डाल पाते।</p>
<p>एक स्कूल संचालक से जब इस विषय पर पूछा गया तो वे बोले कि इस बार अधिकांश स्कूल सभी शुल्कों को समाहित कर फीस वसूलेंगे। स्कूल संचालक बढ़ती महंगाई और शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी को इसका कारण बता रहे है। ज्यादातर स्कूलों ने अपनी नई फीस वेबसाइट पर जारी की है।</p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/school.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-18023" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/school.jpg" alt="school" width="1084" height="665" /></a></p>
<h3><strong>ये स्कूल अभिभावकों से वसूल रहे मनमानी फीस</strong></h3>
<p>राजधानी के शिक्षा माफिया कहलाये जाने वाले स्कूल सीएमएस का हाल तो किसी से छिपा नहीं है। प्लेगु्रप में लाखों सालाना कमाने वाले सीएमएस की पोल न खुले इसके लिए उसने अपनी ऑफिसियल वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर ही शो नहीं किया है। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल ने अपनी फीस में सात से आठ प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। वित्तीय वर्ष के पहले महीने में अभिभावकों को नर्सरी में दाखिले के लिए 64,333 रुपये देने पड़ेंगे, जिसमें फीस प्रतिमाह सम्मिलित होगी। यदि स्कूल तिमाही चार्ज करेगा, तो उनको ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। गोमती नगर स्थित सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल ने भी आठ प्रतिशत तक फीस में बढ़ोतरी की है। स्कूल प्रशासन ने अपनी वेबसाइट पर फीस जारी कर इसका दावा किया है। हालांकि स्कूल ने इस बार एडमिशन फीस में दो हजार रुपये की बढ़ोतरी की है। पिछले साल 2500 रुपये थी जो बढ़ाकर 3000 रुपये कर दी गई है। मिलेनियम स्कूल ने अपनी फीस में छह से सात प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। स्कूल के एडमिशन फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं है। स्कूल का दावा है कि एडमिशन फीस केवल नए छात्रों से ही वसूली जाएगी।</p>
<h3><strong>ऐसे कर रहे खेल</strong></h3>
<p>उप्र पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनिमय) अधिनियम-2018 के अनुसार स्कूल हर साल एडमिशन फीस नहीं ले सकते हैं। एडमिशन नर्सरी में होने के बाद पांचवीं क्लास में ही दोबारा ऐडमिशन फीस ली जा सकती है। हालांकि अभिभावकों का आरोप है कि प्रति वर्ष एडमिशन फीस वसूली जा रही है। इतना ही नहीं एडमिशन फीस की कोई सीमा न होने से भी स्कूल मनमानी वसूली करते हैं। कुछ प्राइवेट स्कूल 20 हजार से 50 हजार तक एडमिशन फीस वसूल रहे हैं।</p>
<h3><strong>स्टेशनरी के नाम पर चल रही दुकान</strong></h3>
<p>नियमों के अनुसार अभिभावक कॉपी-किताब सहित अन्य स्टेशनरी कहीं से भी ले सकते हैं। जबकि ज्यादातर स्कूलों ने बुक लिस्ट के साथ ही दुकान भी तय कर रखी है। इसी तरह पांच सालों तक ड्रेस में बदलाव न करने के नियम को ठेंगा दिखा मनमाने तरीके से बदलाव किया गया है। यदि प्रशासन को स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसनी है तो उनके पूरे सिंडिंकेट को खत्म करना होगा।</p>
<h3><strong>अभिभावकों के सवाल?</strong></h3>
<p><strong>पहला सवाल:</strong> मेरा बेटा सेंट जोसफ में पढ़ रहा है। चौथी क्लास में उसकी फीस 1900 थी, इस बार पांचवी क्लास में 2600 कर दी गई। किस आधार पर इतनी फीस बढ़ाई गई।<br />
<strong>दूसरा सवाल:</strong> मेरा बेटा डीपीएस एल्डिको में पांचवी क्लास में पढ़ रहा है। स्कूल द्वारा एक निश्चित दुकान से ही कॉपी किताब खरीदे जाने के लिए कहा जा रहा है। किताबें भी ऐसी हैं, जो कहीं और नहीं मिल रही। स्कूल किसी की सुन भी नहीं रहे।<br />
<strong>तीसरा सवाल:</strong> मेरी बेटी सेंट्रल एकेडमी इंदिरा नगर में पढ़ रही थी। इसी बार उसका दाखिला सेंट डोमिक इंदिरा नगर में कराया है। यहां 20 हजार रुपये एडमीशन फीस जमा कराया गया है। क्या स्कूल छोडऩे पर स्कूल एडमीशन फीस वापस करेगा।<br />
<strong>चौथा सवाल:</strong> कुछ स्कूल दिसंबर तक दो- दो महीने की फीस लेते हैं, उसके बाद एक-एक महीने की। इसके लिए क्या नियम है।</p>
<h3><strong>सीएम और डिप्टी सीएम की जुबान की क्या नहीं कोई कीमत!</strong></h3>
<p>मुख्यमंत्री बनते ही सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा ने कहा था कि प्राइ वेट स्कूलों के साथ बैठकर ऐसी नीति तय की जाएगी, जिससे अभिभावकों की परेशानी का हल निकाला जा सके। लेकिन ये केवल मात्र एक बयान था इस मुद्दे पर कागजी कार्यवाही शून्य ही है। यदि यूपी के सीएम ही चुप्पी साधे रहेंगे तो जनता तो परेशान होगी ही।</p>
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		<title>एक लाख नौकरियां देने का लक्ष्य : खट्टर</title>
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		<pubDate>Mon, 04 Jun 2018 13:02:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[करियर]]></category>

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		<description><![CDATA[मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हमारे अगले एजेंडा में यह प्रयास है कि एक लाख लोगों को सरकारी भर्तियों में स्थान मिले। उन्होंने कहा, प्रदेश की सरकारी नौकरियों में 24,500 पदों पर उम्मीदवार ज्वाइन कर चुके हैं, जिनकी भर्ती में किसी को कोई कठिनाई नहीं हुई। अभी 13,000 पद ऐसे हैं जिनका अदालत में अभी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हमारे अ<img class=" size-medium wp-image-2823 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/06/manohar-lal-khattar_2018016078-300x225.jpg" alt="manohar-lal-khattar_2018016078" width="300" height="225" />गले एजेंडा में यह प्रयास है कि एक लाख लोगों को सरकारी भर्तियों में स्थान मिले। उन्होंने कहा, प्रदेश की सरकारी नौकरियों में 24,500 पदों पर उम्मीदवार ज्वाइन कर चुके हैं, जिनकी भर्ती में किसी को कोई कठिनाई नहीं हुई। अभी 13,000 पद ऐसे हैं जिनका अदालत में अभी स्टे है। कुछ प्रक्रियाधीन हैं।</p>
<p>कुल मिलाकर 54,000 पदों की मांग है। इसके अतिरिक्त, 38,000 पद ऐसे हैं, जिनकी मांग आ रही है, उन्हें भरने के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री रविवार को रोहतक एमडी यूनिवर्सटी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, राज्य सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में मामले की अच्छे ढंग से पैरवी की, लेकिन अदालत ने नीतियों की कमियों को देखते हुए उन्हें रद्द कर दिया। हम नहीं चाहते कि भर्तियां रद्द हों।</p>
<p>अदालत के निर्णय से प्रभावित लोगों से भी कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय में जाकर इसका जो भी निवारण होता है, करेंगे। अपनी तरफ से कोशिश करेंगे कि नियुक्तियां बची रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में 24,000 से अधिक भर्तियां बिल्कुल साफ-सुथरी हुई हैं।</p>
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