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	<title>Business Link &#187; प्रॉपर्टी</title>
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		<title>&#8216;उत्तर प्रदेश स्टार्टअप फंड&#8217; का शुभारंभ, SIDBI को मिली 15 करोड़ की प्रथम किश्त</title>
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		<pubDate>Wed, 20 May 2020 16:20:22 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<category><![CDATA[भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[रोजगार]]></category>

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		<description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी ने कहा &#8211; बाहर से आए कामगार और श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने से उनकी समस्याओं का समाधान तो होगा ही, साथ ही उनकी प्रतिभा का लाभ उत्तर प्रदेश के माध्यम से पूरे देश को भी मिलेगा नई स्टार्टअप नीति के तहत हम अपने अधिक से अधिक युवाओं को स्टार्टअप लगाने के लिए &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>मुख्यमंत्री योगी ने कहा &#8211; बाहर से आए कामगार और श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने से उनकी समस्याओं का समाधान तो होगा ही, साथ ही उनकी प्रतिभा का लाभ उत्तर प्रदेश के माध्यम से पूरे देश को भी मिलेगा</strong></li>
<li><strong>नई स्टार्टअप नीति के तहत हम अपने अधिक से अधिक युवाओं को स्टार्टअप लगाने के लिए करेंगे प्रेरित</strong></li>
<li><strong>हमारी नीयत नेक है, लेकिन नियत के साथ-साथ निर्णय लेने की क्षमता को भी गति देनी होगी</strong></li>
<li><strong>सिडबी के साथ जो आदान-प्रदान और समझौता ज्ञापन प्रदेश में आज स्थापित हो रहा है, निश्चित रूप से उससे स्टार्टअप की स्थापना में गति आएगी</strong></li>
</ul>
<p><em><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/Press-3.jpg"><img class="  wp-image-21418 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/Press-3.jpg" alt="Press (3)" width="593" height="247" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></em></p>
<p><strong>लखनऊ। </strong>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री आवास पर उत्तर प्रदेश स्टार्टअप फंड का शुभारंभ किया और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 15 करोड़ रुपए की प्रथम किश्त सौंपी। इस दौरान उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एक नई स्टार्टअप नीति प्रदेश में बने जिससे प्रदेश का युवा जुड़ सके। इसके साथ ही जॉब की संभावनाओं को बल मिल सके। इसी क्रम में प्रदेश सरकार और सिडबी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ है।</p>
<p>सीएम योगी ने कहा कि इस समय बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार और श्रमिक उत्तर प्रदेश में आए हैं। हमें उनकी स्किल के अनुसार उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना। इससे ना सिर्फ उनकी समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि उनकी ऊर्जा और प्रतिभा का लाभ उत्तर प्रदेश के माध्यम से पूरे देश को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी नीयत नेक है, लेकिन नीयत के साथ-साथ निर्णय लेने की क्षमता को भी गति देनी होगी, तभी हम लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी अच्छे कार्य को तीव्रता के साथ आगे बढ़ाने के लिए समय पर निर्णय लेना अतिआवश्यक होता है, वरना एक बड़ा वर्ग योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाता है। यदि समय पर सही निर्णय लेकर कार्य प्रारंभ कर दिए जाएं तो बहुत सारे लोगों के जीवन को एक नई दिशा दी जा सकती है।</p>
<p>सीएम योगी ने कहा कि हमारी नई स्टार्टअप नीति आ रही है और इस नई नीति के तहत हम अपने अधिक से अधिक युवाओं को अपना स्टार्ट अप लगाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई के लिए भारत सरकार ने जिस नए पैकेज की घोषणा की है, उसके तहत प्रदेश के एमएसएमई विभाग ने पहले कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। जिसके तहत एक बड़ा ऑनलाइन लोन मेला आयोजित कर उद्यमियों को लोन देने की कार्यवाही को संपन्न किया जा चुका है। इसी तरह से कई और अन्य कार्यों को भी हमने आगे बढ़ाया है।</p>
<p><strong>अबतक युवाओं की क्षमता का उपयोग नहीं किया गया, वर्तमान सरकार ने इस ओर दिया ध्यान: डॉ. शर्मा</strong></p>
<p>उपमुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि सिडबी के साथ जो आदान-प्रदान और समझौता ज्ञापन प्रदेश में आज स्थापित हो रहा है, निश्चित रूप से उससे स्टार्टअप की स्थापना में गति आयेगी और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। उत्तर प्रदेश में तमाम संभावनाएं हैं, यहां के युवाओं के पास नए-नए आइडियास, विचार और कॉन्सेप्ट हैं, लेकिन उनका उपयोग अबतक नहीं किया गया था। वर्तमान सरकार ने इस विषय पर ध्यान दिया है।</p>
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		<title>दूर होंगी रिअल स्टेट की समस्यायें, छोटे शहरों में विकसित होंगे प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क</title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2020 11:17:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[औद्योगिक नीति में होगा 25 एकड़ की भूमि पर प्राइवेट औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रावधान : सतीश महाना औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने क्रेडाई सदस्यों से वेबिनार के तहत की चर्चा बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। कोराना महामारी से प्रभावित हुये रिअल इस्टेट कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिये उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>औद्योगिक नीति में होगा 25 एकड़ की भूमि पर प्राइवेट औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रावधान : सतीश महाना </strong></li>
<li><strong>औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने क्रेडाई सदस्यों से वेबिनार के तहत की चर्चा</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> कोराना महामारी से प्रभावित हुये रिअल इस्टेट कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिये उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने रिअल स्टेट उद्यमियों के समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये एक समिति का गठन किया है। यह समिति एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी और इसके आधार पर कार्यवाही सुनश्चित होगी। औद्योगिक विकास मंत्री ने बताया छोटे शहरों में भी प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए शीघ्र ही औद्योगिक नीति में प्राविधान भी किया जायेगा। इससे 25 एकड़ की भूमि पर प्राइवेट औद्योगिक पार्क विकसित किया जा सकेगा।</p>
<p>कंफेडेरशन आफ रिअल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन आफ इण्डिया, क्रेडाई के सदस्यों से वेबिनार के तहत चर्चा करते हुये औद्योगिक विकास मंत्री ने उद्यमियों को आवश्वत किया कि उनके द्वारा जो भी प्रस्ताव एवं सुझाव दिये गये हैं, उस पर जल्द ही निर्णय लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि रिअल स्टेट कारोबारियों से ली जाने वाली ब्याज की दर को कम करने पर विचार किया जायेगा। साथ ही प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली को उद्यमियों के सुविधानुसार और अधिक सुगम बनाया जायेगा। इसके अतिरिक्त उद्यमियों की विद्युत बिल से संबंधित समस्याओं के निराकरण के लिये प्रदेश के उर्जा मंत्री से आग्रह किया जायेगा।</p>
<p>इस दौरान क्रेडाई के यूपी चैप्टर के अध्यक्ष रमन दीप सिंह ने बरेली जनपद में बंद रबर फैक्ट्री की निष्प्रयोज्य भूमि को औद्योगिक पार्क के लिए निजी डवलपर्स को आवंटित करने का अनुरोध किया। इसके अलाव संगठन के पदाधिकारियों ने लॉक-डाउन खत्म होने के बाद प्राधिकरण से संबंधित सभी बकाया राशि बिना किसी ब्याज के एक साल के लिए बढ़ाये जाने, सभी स्वीकृतियों का सत्यापन एक वर्ष के लिए स्थगित रखने, लीज रेंट को लीज डीड के अनुसार वसूली करने तथा लॉकडाउन अवधि के लिए विद्युत शुल्क वास्तविक खपत के अनुसार लिये जाने आदि मुद्दो पर चर्चा की और शीघ्र इसके समाधान का आग्रह किया। साथ ही प्रोजेक्ट के निर्माण की अवधि को बढ़ाये जाने की अपेक्षा भी की गई। वेबिनार में विभागीय अधिकारियों के अलावा क्रेडाई के एनसीआर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उद्यमियों सहित एटीएस लिमिटेड के सीएमडी गीताम्बर आनन्द, अर्फोडेबल हाउसिंग कमेटी के चेयरमैन मनोज गौड़ तथा सुशान्त गुप्ता आदि लोगों ने भी हिस्सा लिया।</p>
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		<title>कोरोनामिक्स: उम्मीद का नया अर्थशास्त्र</title>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2020 21:11:08 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[कोरोना महामारी केवल कुछ समय के लिए अर्थशास्त्र की दशा को बदलने नहीं जा रही है, कोरोना नया इकोनोमिक्स बनाने जा रही है कोरोनामिक्स। यह कोरोनामिक्स अर्थव्यवस्था पर तब तक शासन करेगा जब तक कि इसके लिए दवा न विकसित हो जाए हो और लोगों के दिल में जैविक युद्ध की आशंका न खत्म हो &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21163" style="width: 152px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg"><img class="  wp-image-21163" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB.jpeg" alt="B1EEBA13-936B-4B0D-9625-A07A647926FB" width="152" height="231" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>पंकज जायसवाल</strong></figcaption></figure>
<p>कोरोना महामारी केवल कुछ समय के लिए अर्थशास्त्र की दशा को बदलने नहीं जा रही है, कोरोना नया इकोनोमिक्स बनाने जा रही है कोरोनामिक्स। यह कोरोनामिक्स अर्थव्यवस्था पर तब तक शासन करेगा जब तक कि इसके लिए दवा न विकसित हो जाए हो और लोगों के दिल में जैविक युद्ध की आशंका न खत्म हो जाए। इस कोरोनामिक्स को जानने के लिए आइए कोरोना महामारी के कुछ तथ्य पर चर्चा करते हैं । आज आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री नहीं के बराबर है, इसलिए जीडीपी लगभग शून्य और विकास नकारात्मक है। लगभग सभी व्यवसाय आवश्यक सामान के उद्योग को छोड़कर सकल हानि का सामना कर रहे हैं। आपूर्ति श्रृंखला अंतिम छोर तक प्रभावित है।</p>
<p>विश्व बैंक ने भी कह दिया कि जीडीपी भारत और संपूर्ण एशिया के लिए शून्य होगा। अगले साल की विकास दर 1.8 प्रतिशत आंकी गई और यदि 7 प्रतिशत की विकास दर चाहिए तो लगातार तीन वर्ष तक 8.5 प्रतिशत की उच्च विकास दर चाहिए होंगे। दुनिया भर में 160 करोड़ लोगों के बेरोजगारी का अनुमान लगाया जा रहा है। भारत में 11 करोड़ एमएसएमई प्रभावित हैं। सभी सरकारी लक्ष्य और रेटिंग समाप्त हो गए हैं। सभी बजट आवंटन पूरे नहीं किए जा पा रहे हैं सारा फोकस स्वास्थ्य इन्फ्रा पर आ गया है। भारत में प्रति दिन नुकसान 4.5 बिलियन डॉलर हो गया है और लॉकडाउन एक में जहाँ उच्च स्तर के बिजनेस एविएशन और हॉस्पिटैलिटी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं तो अंतिम स्तर पर नाई और सैलून बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालाँकि ये तथ्य हमें नकारात्मक संकेत देते हैं लेकिन फिर भी, भारत के लिए बहुत सारी उम्मीदें और सकारात्मक संकेत हैं।</p>
<p>शेष विश्व की तुलना में भारत में आबादी के आकार और जटिल संरचना के अनुपात में प्रसार और मृत्यु की दर धीमी है। हालांकि संक्रमण का सम्पूर्ण स्तर पर परीक्षण और मापन नहीं हो पाया है तिस पर भी मृत्यु औसत दर से बहुत कम और नियंत्रण में है, शेष विश्व के मुकाबले। भारत में परीक्षण की कमी के कारण एक बड़ी आबादी बड़े पैमाने पर संक्रमण से अनजान हैं, टेस्ट नहीं हो पा रहें हैं लेकिन लगभग हर शहरी मृत्यु रिकॉर्ड में हैं और फिर भी कोरोना से मृत्यु बहुत कम है, कारण भारतीयों की प्रतिरक्षा प्रणाली अच्छी तरह से लड़ रही है।</p>
<p>अर्थव्यवस्था और समाज के लिए, यह उछाल लेकर वापसी करने का समय है विशेषकर उनके लिए जो विकास की दौड़ से वंचित और पिछड़ गए थे। इस संकट ने नए नेतृत्व विकास को उभरने के लिए भी एक जगह बनाई है, यह व्यक्तिगत स्तर पर भी लागू है और वैश्विक स्तर पर भी। पृथ्वी और अर्थव्यवस्था दोनों रीसेट मोड में हैं, यह परिवर्तन विकास की दौड़ में पिछड़ गए और वंचित रह गए आबादी को अधिक संभावना देगी, यह उनके लिए अवसर हो सकता है। कौशल के विकेंद्रीकरण से क़स्बे के स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और पूरे भारत में समान गति और स्तर से विकास संभव होगा और आर्थिक तानाबाना मजबूत होगा। नौकरी से निकाल दिए गए लोग स्वरोजगार शुरू करेंगे और वे सलाहकार पेशेवरों जैसे की सीए,अधिवक्ताओं और अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए अवसर पैदा करेंगे।</p>
<p>बैंक और वित्तीय संस्थान और ऋण देने के लिए मजबूर होंगी, क्योंकि इस अवधि के दौरान ऋण वितरण नहीं हो पाया है। सरकार एमएसएमई और प्रभावित क्षेत्र को कई पैकेज देगी। सरकारी खरीद और व्यय में वृद्धि होगी। भारत विश्व में पुनः आउटसोर्सिंग हब हो सकता है। आउटसोर्सिंग के लिए लिस्टिंग पहले से ही इस प्रक्रिया में है जिसमें कौन सा काम काम घर से और कौन सा हाइब्रिड सिस्टम में हो सकता है इसपर मंथन चालू हो गया है, यह बदलाव ऑपरेटिंग लागत को कम करेगा और लाभ बढ़ाएगा। लॉकडाउन में घटे वेतन और आय ने बचत की आदत और फालतू खर्चों में कमी की आदत डाल दी है।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर, खरीदार पहले से ही भारत से चीनी मिट्टी के बरतन, घर, फैशन और जीवन शैली के सामानों की खरीददारी कर रहें हैं और अब यह गति बढ़ेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकल्प के रूप में भारत कच्चे माल और निर्मित वस्तुओं के आपूर्तिकर्ता के रूप में कई व्यापार चैनलों में प्रवेश कर सकता है। बदलती विश्व अर्थगति और नई अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला मॉडल में, भारत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत चीन से निकल रहे और लगभग एक हजार विदेशी निर्माताओं को भारत में उत्पादन संयत्र को स्थानांतरित करने के लिए आमंत्रित करने में लगा है। वे भारत को चीन के विकल्प के रूप में देख भी रहें हैं। कथित तौर पर, कम से कम 300 कंपनिया पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा और कपड़ा सहित कई क्षेत्रों में उत्पादन के लिए भारत सरकार के साथ बात कर रहीं हैं।</p>
<p>विनिर्माण सुविधाओं के वृद्धि होने पर आसपास ढांचागत विकास , स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। इस वर्ष, सरकार 300 से अधिक उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने का सोच रही है, और ऐसे देशों को चिन्हित कर रही है जो करीब 1000 वस्तुओं की आपूर्ति के लिए चीन से इतर सोच रहें हैं । महामारी ने उपभोक्ता मनोविज्ञान में भी बदलाव किया है, और यह बाजार के प्रति, विशेष रूप से चीन और उसके उत्पादों के प्रति एक परिवर्तित व्यवहार सामने लायेगा । इससे कोई इनकार नहीं कर रहा है कि, महामारी को देखते हुए, आपूर्ति श्रृंखला पर सबसे बड़ी मार पड़ी है और भारत को इस वैश्विक शून्य को भरने के लिए छलांग लगाने से पहले अपनी निर्भरता को चीन पर से काफी कम करना होगा क्यों कि लंबे समय से, चीन विभिन्न वस्तुवों के लिए भारत की आयात सूची में सबसे ऊपर है।</p>
<p>कोरोना काल के बाद कैसे सेक्टरों के विकास पहले से स्थापित कई नकारात्मकताओं को प्रतिस्थापित करेंगे और पूर्व निर्मित विकास के अंतर को भरेंगे । इस दौर के बाद एग्रो इकोनॉमी ही विश्व स्तर पर लीड करेगी, इस दौर में लोगों ने आवश्यक खाद्य पदार्थों, प्रिवेंटिव स्वास्थ्य बाजार (आयुर्वेद, योग और होमियोपैथ) को महसूस किया है और यह इस सेगमेंट के लिए एक अवसर होगा। आर्थिक गतिविधियों के विकेंद्रीकरण से माइक्रो सेक्टर बढ़ेगा और नए और पहले से अधिक मजबूत आर्थिक ताने-बाने का निर्माण होगा। हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक सेक्टर में वृद्धि होगी। एविएशन हॉस्पिटैलिटी एवं एंटरटेनमेंट सेक्टर प्रभावित होगा जहां भीड़ ज्यादे होती है लेकिन पोजिटिव यह है की लोग मनोरंजन के अन्य माध्यमों की ओर रुख करेंगे और उद्योग उस ओर बढ़ेगा। हां, एविएशन और हाई-क्लास हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को कोरोना के बाद संभलने और पुनः पूर्व आकार लेने में समय लगेगा।</p>
<p>यह भी स्पष्ट है की विश्व स्तर पर बदल रही गतिशीलता में चीन पर निर्भरता शायद खत्म हो रही है, आशंका है की उसका दबदबा खत्म करने या कोरोना के दंड के रूप में चीन पर परमाणु बम से हमला हो जाए या चीन को तोड़ने के लिए साइलेंट हमला हो या शीत युद्ध जैसी परिस्थितियां हो जाए, हालाँकि ये सब अतिवाद संभावनाएं हैं फिर भी दुनिया की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्था की लिस्ट बदलेगी और कुछ नए देश आयंगे और पुराने जायेंगे । संयुक्त राष्ट्र और डब्ल्यूएचओ की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी<br />
उपरोक्त सभी सकारात्मक आशाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। एमएसएमई से सरकारी खरीद को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए और इसमें से भी 50 प्रतिशत माइक्रो सेक्टर से खरीदना चाहिए। एमएसएमई को तीन-भाग सूक्ष्म, लघु और मध्यम में अलग-अलग तीन प्रकोष्ठ के नेतृत्व में विभाजित करना चाहिए ताकि माइक्रो के साथ न्याय हो सके।</p>
<p>सरकार को अंतिम स्तर पर बिक्री संभव बनाने और खपत बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। बैंक के लाभ की समीक्षा की आवश्यकता है और बैंक ब्याज और बैंक शुल्क में कमी इस समय की मांग है। कम ब्याज दर के साथ अधिस्थगन की अवधि और सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ाए जाने चाहिए । बजट की बात करें तो कोरोना के कारण अधिकांश बजट आवंटन बदल जायेगा और यह अब मानव संसाधन के बचाव, विकास एवं स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे के विकास पर स्थानांतरित हो जाएगा। पारित किए गए सभी बजट और सरकारी खर्चों की समीक्षा, पुनर्गणना और फिर से नवीन आवंटन किया जाना चाहिए क्यूँ की इस कोरोना ने बजट के खर्चों की प्राथमिकता और उनकी अवधि मटेरियल रूप से बदल दी है।</p>
<p><span lang="HI">व्यक्तिगत स्तर पर भी हमारे पास करने को कई चीजें हैं और अवसर भी हैं ।</span> <span lang="HI">हम अपने लंबे समय से लंबित स्वास्थ्य योजना को पूरा कर सकते हैं।</span> <span lang="HI">हम उन सभी कार्यों को पूरा कर सकते हैं जो कार्यालय जाने या काम में व्यस्त रहने के कारण टालते आये थे।</span> <span lang="HI">अब हम व्यय पुनर्गठन और लागत में कमी को संभव कर सकते हैं ।</span> <span lang="HI">मध्यम वर्ग कोरोना के बहाने ही भव्य और अनावश्यक खर्च को कम कर सकता है। लगातार लॉकडाउन ने हमें अनुशासन सीखा दिया है हम लॉकडाउन के दिशानिर्देशों और कोरोना के बाद आने वाले आर्थिक पर्यावरण के अनुसार काम का पुनर्गठन कर सकते हैं।</span> <span lang="HI">इस कोरोनामिक्स से लड़ने के लिए हमें अपने</span> <span lang="HI">व्यावसायिक रणनीति में</span> <span lang="HI">सभी सीमाओं</span>, <span lang="HI">शर्म</span> <span lang="HI">और अहंकार</span> <span lang="HI">को भी खोलना चाहिए</span> <span lang="HI">।</span> <span lang="HI">कोरोनामिक्स के इन अनुप्रयोगों  से हम अर्थव्यवस्था और मानव जीवन के दुश्मन कोविड </span>19 <span lang="HI">को हरा सकते हैं।</span></p>
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		<title>रेरा करायेगा रियल एस्टेट योजनाओं की ग्रेडिंग</title>
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		<pubDate>Fri, 24 Apr 2020 11:32:42 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[ग्रेडिंग से घर खरीदना व निवेश करना होगा आसान वेबसाइट पर दस्तावेज अपलोड कर मांगे गए सुझाव बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। प्रदेश के किसी भी शहर में रियल एस्टेट की योजनाओं में निवेश करना आसान होगा। प्रोजेक्ट की रेटिंग देखकर यह तय कर सकेंगे कि प्रोजेक्ट निवेश करने के लिए सही है या नहीं। घर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>ग्रेडिंग से घर खरीदना व निवेश करना होगा आसान</strong></li>
<li><strong>वेबसाइट पर दस्तावेज अपलोड कर मांगे गए सुझाव</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> प्रदेश के किसी भी शहर में रियल एस्टेट की योजनाओं में निवेश करना आसान होगा। प्रोजेक्ट की रेटिंग देखकर यह तय कर सकेंगे कि प्रोजेक्ट निवेश करने के लिए सही है या नहीं। घर लेने की सोचने वाले अब फ्रिज या एसी की तरह प्रोजेक्ट की रेटिंग देखकर तय निर्णय ले सकेंगे। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट अथॉरिटी (रेरा) अब बिल्डर के प्रोजेक्ट की ग्रेडिंग कराने जा रही है। इसके लिए प्रारूप भी उसने अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। रेरा ने लोगों से इस प्रारूप को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मांगे हैं। लोग‚ 13 मई तक सुझाव दे सकते हैं‚ जिसे अगर उपयोगी माना गया तो शामिल किया जा सकता है।</p>
<p>रेरा अध्यक्ष राजीव कुमार के मुताबिक, आम तौर पर इन्वेस्टमेंट से पहले सभी लोग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस प्रॉजेक्ट में इनवेस्ट करना कितना सही होगा। क्या उनका पैसा सुरक्षित होगा और समय से प्रोजेक्ट पूरा होने की क्या संभावनाएं हैं। रेरा में इस तरह का कोई विकल्प मौजूद नहीं था। इसलिए हमने इस व्यवस्था पर काम करने का फैसला लिया है। ग्रेडिंग से एक तरह का आकलन होगा बायर्स को और वे आसानी से फैसला ले सकेंगे।<span class="Apple-converted-space"> </span></p>
<p>यूपी रेरा के सचिव अबरार अहमद ने बताया कि हम रेरा में पंजीकृत योजनाओं और प्रमोटरों की ग्रेडिंग करने जा रहे हैं। यह ग्रेडिंग विपकास प्राधिकरण‚ औद्योगिक विकास प्राधिकरण‚ होमबायर्स एसोसिएशन‚ प्रमोटर्स असोसिएशन और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के इन्पुट्स के आधार पर होंगे।<span class="Apple-converted-space"> </span></p>
<p>सचिव ने बताया कि सरकारी प्रॉजेक्ट्स की ग्रेडिंग एक से पांच के बीच में की जाएगी। एक न्यूनतम ग्रेडिंग होगी‚ जबकि पांच उच्चतम। हर साल एक नई ग्रेडिंग जारी की जाएगी‚ जिससे खरीदारों को यह समझने में आसानी होगी कि आखिर वे क्या करें। कहां इनवेस्ट करें ताकि उनका पैसा भी सुरक्षित रहे और समय से बेहतर क्वालिटी के घर भी उन्हें मिल सकें। इस तरह की ग्रेडिंग से प्रमोटरों का ट्रैक रेकॉर्ड भी रखने में आसानी होगी। प्रमोटर की ग्रेडिंग के लिए उसकी फाइनेंशियल क्वालिटी‚ सांगठनिक ढांचा‚ प्रमाणपत्र‚ ट्रैक रेकॉर्ड का आकलन किया जाएगा। निर्देशों के पालन का रेकॉर्ड और कस्टमर के फीडबैक को आधार बनाया है।</p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>बोला बिल्डर ‘मुख्यमंत्री के निर्देश पर हो रहा कब्जा’</title>
		<link>http://businesslinknews.com/said-builder-capture-on-the-instructions-of-chief-minister/</link>
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		<pubDate>Mon, 14 Jan 2019 10:05:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[एसएसपी कार्यालय]]></category>
		<category><![CDATA[कायस्थ छात्रावास]]></category>
		<category><![CDATA[जिलाधिकारी आवास]]></category>
		<category><![CDATA[थाना वजीरगंज]]></category>
		<category><![CDATA[दयाल पैराडाइज]]></category>
		<category><![CDATA[भू-माफिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[रीवर बैंक चौकी]]></category>

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		<description><![CDATA[दयाल पैराडाइज के राजीव सिंह ने छात्रों से कहा, ये मुख्यमंत्री के निर्देश पर हो रहा है बोला बिल्डर&#8230; खाली करो हॉस्टल&#8230; नहीं तो चौथे दिन गिरवा दूंगा कमरे&#8230;.और गिरवा भी दिये बड़ा सवाल, भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान चलाने के लिए क्या सरकार ने दयाल पैराडाइज के राजीव को किया है अधिकृत? शैलेन्द्र यादव लखनऊ। &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li style="text-align: justify"><strong>दयाल पैराडाइज के राजीव सिंह ने छात्रों से कहा, ये मुख्यमंत्री के निर्देश पर हो रहा है</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>बोला बिल्डर&#8230; खाली करो हॉस्टल&#8230; नहीं तो चौथे दिन गिरवा दूंगा कमरे&#8230;.और गिरवा भी दिये</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>बड़ा सवाल, भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान चलाने के लिए क्या सरकार ने दयाल पैराडाइज के राजीव को किया है अधिकृत? </strong></li>
</ul>
<p style="text-align: justify"><strong>शैलेन्द्र यादव </strong></p>
<p style="text-align: justify"><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/01/mafia2-copy.jpg"><img class="  wp-image-13224 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/01/mafia2-copy-300x82.jpg" alt="mafia2 copy" width="666" height="182" /></a>लखनऊ।</strong> शासन-प्रशासन एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री की मंशानुरूप भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चला रहा है। वहीं दूसरी ओर राजधानी के एसएसपी कार्यालय के निकट स्थित कायस्थ छात्रावास की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने के लिए एक बिल्डर मुख्यमंत्री का नाम खुलेआम बदनाम कर रहा है। यह बिल्डर है दयाल पैराडाइज का राजीव सिंह। बीते दिनों छात्रावास से छात्रों को बाहर निकालने के लिए यह बिल्डर अपने गुर्गों के साथ हास्टल पहुंचा और छात्रों को अर्दब में लेते हुए कहा, तुम्हें जहां आना-जाना हो आओ-जाओ, पर होगा कुछ नहीं&#8230; क्योंकि यह मुख्यमंत्री के निर्देश पर हो रहा है। जिला और पुलिस प्रशासन इस बिल्डर के समक्ष नतमस्तक है और मुख्यमंत्री की बदनामी में बराबर का साझेदार भी।</p>
<p style="text-align: justify">बीते दिनों सिटी मजिस्ट्रेट ने छात्रावास से संबंधित दोनों समितियों का पक्ष सुनने के बाद आगामी एक माह में सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। लेकिन, इस दौरान छात्रावास की जमीन पर बने 10 कमरे तोड़े जा रहे हैं। संबंधित थाना वजीरगंज पुलिस और जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। बता दें कि राजधानी के नवीउल्ला रोड स्थित कायस्थ छात्रावास की अरबों की जमीन पर भू-माफिया जब टीनशेड लगाकर अवैध कब्जा कर रहे थे, उस दौरान मौके पर मौजूद मित्र पुलिस के सिपहसलार मजदूरों को जल्द काम निपटाने का निर्देश दे रहे थे। देखते ही देखते एसएसपी कार्यालय के निकट स्थित छात्रावास की जमीन पर रीवर बैंक चौकी प्रभारी की मौजूदगी में टीनशेड की चाहरदीवारी बनाकर अवैध कब्जा कर लिया गया और अब उस टीनशेड के पीछे चाहरदीवारी का निर्माण भी गुपचुप कराया जा रहा है और पुलिस प्रशासन तमाशा देख रहा है।</p>
<p style="text-align: justify">जानकारों की मानें तो कायस्थ छात्रावास की अरबों की जमीन पर दो समितियां अपना दावा कर रही हैं। इन दोनों ही समितियों में दयाल पैराडाइज के राजीव सिंह न पदाधिकारी है और न ही सदस्य। फिर भी छात्रावास की जमीन पर कब्जे को लेकर पर्दे के पीछे से मुख्य भूमिका में है। छात्रों की मानें तो कानून-व्यवस्था को अपनी जेब में रखने का दावा करने वाला बिल्डर राजीव सिंह बीते दिनों छात्रावास आया था और छात्रों को खुलेआम धमकी भी दी थी। यह सिलसिला अब तक जारी है। कायस्थ छात्रावास में रहने वाले छात्रों द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो क्लिप में राजीव सिंह अपनी ऊंची पहुंच का गुणगान और पूर्व में पुलिस के सामने गोली चलाने का जिक्र करते हुए सुना जा सकता है। साथ ही वह कह रहा है कि तुम लोगों को डीएम-एसएसपी-थाना आदि जिसके पास जाना है, जाओ। पर, होगा कुछ नहीं। क्योंकि यह मुख्यमंत्री के निर्देश पर हो रहा है? कहना गलत न होगा कि यह मामला सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि से जुड़ा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रशासन छात्रों के बीच मुख्यमंत्री को बदनाम करने वाले मनबढ़ बिल्डर पर लगाम लगायेगा या फिर थाना पुलिस यूं ही बचपन वाली दोस्ती निभाती रहेगी?</p>
<p style="text-align: justify"><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/01/mafia-copy.jpg"><img class="  wp-image-13225 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/01/mafia-copy-300x155.jpg" alt="mafia copy" width="486" height="251" /></a>सडक़ों पर उतरे छात्र, किया डीएम आवास पर प्रदर्शन</strong><br />
न्याय की उम्मीद में बीते दिनों सडक़ों पर उतरे छात्रों ने जिलाधिकारी आवास पर नारेबाजी की। हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। शांतिपूर्वक कैंडिल मार्च भी निकाला। बावजूद इसके अभी भी छात्रावास की भूमि पर भू-माफियाओं के गुर्गों का कब्जा है। सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों को एक माह में संबंधित सभी पेपर उपलब्ध कराने का समय दिया है। पर, छात्रावास की जमीन पर किये गये अस्थाई कब्जे के पीछे स्थाई निर्माण जारी है।</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify">
<a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/01/rajiv-singh-copy.jpg"><img class="  wp-image-13223 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/01/rajiv-singh-copy-248x300.jpg" alt="rajiv singh copy" width="81" height="98" /></a>कायस्थ छात्रावास में जो छात्र रह रहे हैं वह लगत तरीके से रह रहे हैं। छात्रावास का न बिजली का बिल जमा हो रहा है और न ही गृहकर। मैं छात्रावास कभी नहीं गया, तो छात्रों को धमकाने का सवाल ही नहीं उठता। आप जिस रिकार्डिंग की बात कर रहे हैं उसमें मेरी आवाज नहीं है। छात्र झूठ बोल रहे हैं कि मैंने उन्हें धमकाया।<br />
<strong>राजीव सिंह, बिल्डर (दयाल पैराडाइज) </strong></p>
</blockquote>
]]></content:encoded>
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		<title>अवैध निर्माण की लहलहाती खेती</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Dec 2018 11:35:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<description><![CDATA[शैलेन्द्र यादव कृष्णानगर पुलिस और एलडीए तंत्र की सरपरस्ती में चल रहा अवैध प्लाटिंग का धंधा! एलडीए ने वर्ष 2015 में अलीनगर सुनहरा की न्यू शुभम सिटी, द्वारिकापुरी आवासीय योजना और कृष्ण विहार को घोषित किया था अवैध, पर प्लाटिंग अब तक जारी लखनऊ। शहर के सुनियोजित विकास में लगी अवैध निर्माण की दीमक उत्तर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शैलेन्द्र यादव</strong></p>
<ul>
<li><strong>कृष्णानगर पुलिस और एलडीए तंत्र की सरपरस्ती में चल रहा अवैध प्लाटिंग का धंधा!</strong></li>
<li><strong>एलडीए ने वर्ष 2015 में अलीनगर सुनहरा की न्यू शुभम सिटी, द्वारिकापुरी आवासीय योजना और कृष्ण विहार को घोषित किया था अवैध, पर प्लाटिंग अब तक जारी</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/LDA01-copy.jpg"><img class="  wp-image-11664 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/LDA01-copy-300x156.jpg" alt="LDA01 copy" width="435" height="226" /></a>लखनऊ।</strong> शहर के सुनियोजित विकास में लगी अवैध निर्माण की दीमक उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की व्यवस्था को हजम कर रही है और जिम्मेदार अधिकारी कागजी कसरत में जुटे हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रबंध तंत्र ने जनवरी 2015 में शहर में सैकड़ों अवैध निर्माण चिन्हित किये थे। अधिनियम की व्यवस्था के मुताबिक, मानचित्र स्वीकृत कराये बिना निर्माण और अवैध प्लाटिंग में चिन्हित किए इन सभी निर्माणों पर पूर्णतय: पाबंदी लगनी चाहिए थी, लेकिन कानपुर रोड के कृष्णानगर थाना क्षेत्र स्थित अलीनगर सुनहरा में अवैध प्लाटिंग की यह दुकानें अब तक गुलजार हैं।</p>
<p>बता दें कि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2015 के जनवरी माह में कानपुर रोड, सरोजनी नगर, आलमबाग, गोमती नगर, सीतापुर रोड, हरदोई रोड, सुल्तानपुर रोड, रायबरेली रोड, जानकीपुरम विस्तार, दुबग्गा, फैजाबाद रोड, टेढ़ी पुलिया, कुर्सी रोड, अलीगंज और पारा आदि क्षेत्रों में सैकड़ों निर्माण अवैध चिन्हित किए थे। इनमें कृष्णानगर कोतवाली क्षेत्र स्थित अलीनगर सुनहरा की न्यू शुभम सिटी, द्वारिकापुरी आवासीय योजना और कृष्ण विहार में बिना मानचित्र स्वीकृत कराये प्लाटिंग हो रही थी।</p>
<p>तब वर्ष 2015 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इन तीनों निर्माण स्थलों को अवैध करार देते हुए प्राधिकरण की वेबसाइट पर यह सूचना अपलोड की थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एलडीए तंत्र ने कृष्णानगर कोतवाली क्षेत्र स्थित अलीनगर सुनहरा में छह जनवरी 2015 को प्रबंधक न्यू शुभम सिटी द्वारा लगभग 20,000 मीटर में बिना मानचित्र स्वीकृत कराये अवैध कालोनी का नियोजन करने में चिन्हित किया था। वहीं नौ जनवरी 2015 को लगभग 15,000 वर्गमीटर क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृत कराये प्रबंधक द्वारिकापुरी आवासीय योजना, फेज-3 को अवैध प्लाटिंग में चिन्हित किया था, जबकि 12 जनवरी 2015 को लगभग 15,000 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रबंधक कृष्ण विहार द्वारा अवैध प्लाटिंग की जा रही थी। इन तीनों विकासकर्ताओं का प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत नहीं था।</p>
<p>जानकारों की मानें तो एलडीए ने इस क्षेत्र की जमीन अपनी मोहान रोड आवासीय परियोजना के लिए अधिग्रहित कर रखी है। अवैध निर्माण चिन्हित हुए तीन वर्ष बीत गये। बावजूद इसके यहां अवैध प्लाटिंग की खेती लहलहा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिम्मेदार किसी दबाव में खामोश हैं या फिर वह इस खेती की उपज में हिस्सेदार हैं? हालांकि, सूत्रों की मानें तो एलडीए तंत्र और कृष्णा नगर पुलिस अवैध प्लाटिंग के इस धंधे से अनजान नहीं है।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/suresh-pasi-copy.jpg"><img class="  wp-image-11662 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/suresh-pasi-copy-300x298.jpg" alt="suresh pasi copy" width="116" height="115" /></a>शिकायत मिलने पर होगी सख्त कार्यवाही : राज्यमंत्री आवास<br />
इस संबंध में जब उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री आवास सुरेश पासी से जानकारी की गई तो उन्होंने इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया न देने की बात कहते हुए कहा कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, इसलिए कोई बयान नहीं दे सकता। हां, यदि कोई शिकायत मिलती है तो गंभीरता से जांच कराकर अवैध निर्माण पर पाबंदी लगायी जायेगी।</p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>उद्यमियों से नहीं होगी अवैध वसूली : महाना</title>
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		<pubDate>Tue, 26 Sep 2017 12:53:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रॉपर्टी]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>

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		<description><![CDATA[बोले औद्योगिक मंत्री, औद्योगिक नीति के शासनादेश शीघ्र होंगे जारी सूबे में उद्योगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये उद्योग बन्धु का सुदृढ़ होना आवश्यक : सुनील वैश्य मेक इन यूपी की सफलता के लिये प्रदेश की औद्योगिक इकाईयों के उत्पादन को सरकारी खरीद में मिले वरीयता बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। सूबे के औद्योगिक &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li style="text-align: justify"><strong>बोले औद्योगिक मंत्री, औद्योगिक नीति के शासनादेश शीघ्र होंगे जारी </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>सूबे में उद्योगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये उद्योग बन्धु का सुदृढ़ होना आवश्यक : सुनील वैश्य</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>मेक इन यूपी की सफलता के लिये प्रदेश की औद्योगिक इकाईयों के उत्पादन को सरकारी खरीद में मिले वरीयता </strong></li>
</ul>
<p style="text-align: justify"><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/IIA-2.jpg"><img class="  wp-image-2373 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/IIA-2-300x196.jpg" alt="IIA 2" width="432" height="282" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p style="text-align: justify"><strong>लखनऊ।</strong> सूबे के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने कहा कि विगत 6 महीनों में प्रदेश में बीजेपी सरकार एवं मेरे मंत्रालय ने उद्यमियों के मन में एक विश्वास जगाया है। प्रदेश में औद्योगिक विकास में आ रही बाधायें शीघ्र दूर होंगी। उद्यमियों का सरकार के प्रति भरोसा बढ़ा है। वर्तमान सरकार को विरासत में बहुत खराब औद्योगिक वातावरण मिला है। इसे वर्तमान सरकार स्वच्छ करेगी जिससे न केवल प्रदेश में स्थित उद्योग पनपेंगे अपितु प्रदेश के बाहर से भी निवेश में वृद्वि होगी।</p>
<p style="text-align: justify">उन्होंने कहा मैं प्रदेश के उद्यमियों को सलाम करता हूं जिन्होनें विषम परिस्थितियों में भी अपने उद्योग जीवित रखे है। मुझे ज्ञात है कि कुछ असमाजिक तत्व प्रदेश के उद्यमियों से अवैध वसूली में लिप्त हैं। इन आसामाजिक तत्वों सख्त कार्यवाही की जाएग, जिससे प्रदेश में उद्यमी किसी भी भय के बिना अपनी एवं प्रदेश की प्रगति में योगदान दे सके। उद्योग मंत्री ने उद्यमियों को आश्वस्त किया कि उनकी प्राथमिकता उद्योगो से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान की है और उसके लिये वे हर सम्भव प्रयास कर रहे है। उन्होंने कहा नई औद्योगिक नीति से सम्बन्धित शासनादेश लगभग तैयार है और उन्हे शीघ्र ही जारी किये जायेगे जिससे औद्योगिक नीति में सरकार की घोषणाओं पर अनुपालन सुनिश्चित होगा।</p>
<ul>
<li class="other-news">
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #ff0000"><a style="color: #ff0000" href="http://businesslinknews.com/%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c/" rel="bookmark">कर्ज बनेगा मर्ज</a></span></h3>
</li>
<li class="other-news">
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #ff0000"><a style="color: #ff0000" href="http://businesslinknews.com/%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a4-4-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a5%87/" rel="bookmark">सीएम योगी समेत 4 सदस्यों ने ली MLC पद की शपथ</a></span></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align: justify">इस दौरान आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य ने प्रदेश में औद्योगिक विकास की स्थिति, लघु उद्योगो की स्थिति एवं औद्योगिक विकास से सम्बन्धित मुख्य मुद्दों पर प्रस्तुतिकरण देते हुये अपने सुझाव रखे। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश देश में महाराष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा आॢथक सम्पदा वाला प्रदेश है। पर, विगत 30 वर्षों से सूबे में औद्योगिक विकास की वृद्वि दर संतोषजनक नहीं रही है। हमेे वर्तमान सरकार से बहुत आशायें हैं। आने वाले वर्षों में प्रदेश का न केवल औद्योगिक विकास तीव्र होगा अपितु उत्तर प्रदेश देश के सभी प्रदेशो की तुलना में सबसे बड़ी इकोनॉमी के रूप में अपना स्थान ग्रहण करेगा। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश में लगभग 35 प्रतिशत जनसंख्या का भरण पोषण सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग सेक्टर द्वारा किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सेक्टर के विकास पर अधिक ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है।</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify">हमें वर्तमान सरकार से बहुत आशायें हैं। आने वाले वर्षों में प्रदेश का न केवल औद्योगिक विकास तीव्र होगा अपितु देश के सभी प्रदेशो की तुलना में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ी इकोनॉमी के रूप में अपना स्थान ग्रहण करेगा।<br />
<strong>सुनील वैश्य, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify">प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिये आईआईए अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये उद्योग बन्धु फोरम को सुदृढ़ किया जाये, उद्योगो को स्थापित करने के लिये प्रर्याप्त भूमि उपलब्ध करायी जाये और मेक इन यूपी को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश में उत्पादित वस्तुओं को सरकारी खरीद में वरीयता प्रदान की जाये। साथ ही मेड इन यूपी प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाये तथा बन्द या बीमार उद्योगो को पुनर्जीवित किया जाये।</p>
<ul>
<li class="other-news">
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #ff00ff"><a style="color: #ff00ff" href="http://businesslinknews.com/%e0%a4%a0%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/" rel="bookmark">ठेकेदारों पर सितम, अधिकारियों पर करम</a></span></h3>
</li>
<li class="other-news">
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #ff00ff"><a style="color: #ff00ff" href="http://businesslinknews.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d/" rel="bookmark">विवादित ‘केके’ पर शासन-प्रशासन मेहरबान</a></span></h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align: justify"><strong>पश्चिमी यूपी की समस्याओं का प्रस्तुतीकरण</strong><br />
इस दौरान उद्यमियों ने औद्योगिक मंत्री के समक्ष अपनी समस्यायें व सुझाव रखे। खासतौर पर पश्चिमी, मध्य एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में उद्योगों की स्थिति एवं इन क्षेत्रो में औद्योगिक विकास पर क्रमश: केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य संजीव गुप्ता, आईआईए के पूर्व अध्यक्ष तरुण खेत्रपाल एवं वाराणसी के मण्डलाध्यक्ष आरके चौधरी ने प्रस्तुतिकरण दिये।</p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>एशिया ब्रांड पुरस्कार से आईआईए सदस्य सम्मानित</title>
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		<pubDate>Tue, 19 Sep 2017 12:43:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रॉपर्टी]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>

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		<description><![CDATA[हांगकांग में चार आईआईए सदस्यों को मिला एशिया ब्रांड पुरस्कार आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किया 12वीं एशिया ब्रांड पुरस्कार समारोह के पुरस्कार विजेताओं का प्रतिनिधित्व बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सुझावों के आधार पर चार कंपनियां मैसर्स मैक्सम क्लोथिंग प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स निर्मल ओवरसीज लिमिटेड, मैसर्स नवैर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li style="text-align: justify"><strong>हांगकांग में चार आईआईए सदस्यों को मिला एशिया ब्रांड पुरस्कार </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किया 12वीं एशिया ब्रांड पुरस्कार समारोह के पुरस्कार विजेताओं का प्रतिनिधित्व </strong></li>
</ul>
<p style="text-align: justify"><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/IIA.jpg"><img class="  wp-image-2348 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/09/IIA-300x225.jpg" alt="IIA" width="348" height="261" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p style="text-align: justify"><strong>लखनऊ।</strong> इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सुझावों के आधार पर चार कंपनियां मैसर्स मैक्सम क्लोथिंग प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स निर्मल ओवरसीज लिमिटेड, मैसर्स नवैर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स ऑटोफॉर्म विन कॉरपोरेशन को इस प्रतिष्ठित एशिया ब्रांड अवार्ड के लिए चुना गया। भारतीय उद्योगों के प्रतिनिधि शैली अग्रवाल, आरके अग्रवाल एवं सिद्धार्थ गांधी ने अवार्ड प्राप्त किया।</p>
<p style="text-align: justify">हांगकांग में आयोजित एशिया ब्रांड पुरस्कार समारोह हर साल आयोजित किया जाता है जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, भारत, चीन, कंबोडिया और ताइवान जैसे एशियाई देशों के प्रसिद्ध ब्रांड और उद्यमों को समारोह में सम्मानित किया जाता है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सुनील वैष ने इस समारोह के उद्घाटन समारोह के विशिष्ठ अतिथि बने।</p>
<p style="text-align: justify">उन्होंने इस दौरान ब्रांड इनोवेशन पर बोलते हुये कहा आज की तारीख में पूरी दुनिया एक बाजार है, उपभोक्ताओं के जागरूक होने के साथ ही उनके पास उत्पादों और सेवाओं के लिए बहुत विकल्प मौजूद हैं। डिजिटल मार्केङ्क्षटग के तेहत उपभोक्ताओं की पंसंद में भी बहुत परिवर्तन आ गया है।</p>
<p style="text-align: justify">आईआईए अध्यक्ष ने कहा, एक ब्रांड क्या कहता है, इसके मुकाबले उपभोक्ताओं की अधिक रुचि ब्रांड क्या करता है इसमें है। आज ब्रांड में इनोवेशन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। आज, ब्रांड सिर्फ एक छवि या प्रतीक चिन्ह नहीं हैं बल्कि यह उपभोक्ताओं के लिए अवधारणा, समाधान, उद्देश्य, अनुभव, संबंध और मूल्य के बारे में अधिक है। इसलिए ब्रांड में इनोवेशन की उत्पाद और सेवा में इनोवेशन से अधिक आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align: justify">आईआईए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समारोह में अन्य एशियाई देशों के प्रतिनिधियों के साथ मेक इन इंडिया ब्रांड के बारे में अपने विचार साझा किये। इस दौरान उन्होंने कहा भारत में देश के बाहर से निवेश को आकर्षित करने तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनस के लिए अनेक एवं प्रभावी सुधार शुरू किए गए हैं।</p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>ठेकेदारों पर सितम, अधिकारियों पर करम</title>
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		<pubDate>Mon, 28 Aug 2017 14:05:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>
		<category><![CDATA[प्रॉपर्टी]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>

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		<description><![CDATA[शैलेन्द्र यादव बालाजी-गणपति के बाद अब अहलूवालिया पर दर्ज होगा मुकदमा निविदा में हेरा-फेरी के आरोप में यूपीएसआईडीसी प्रबंध निदेशक ने मुकदमा लिखाने के दिये निर्देश राजधानी के सरोजनी नगर थाने में जल्द दर्ज होगा मुकदमा अनुबंध होने के बाद जोड़ दी गई अलग से चार प्रतिशत वैट व सॢवस टैक्स की शर्त अधिकारियों का &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शैलेन्द्र यादव</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify"><strong>बालाजी-गणपति के बाद अब अहलूवालिया पर दर्ज होगा मुकदमा </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>निविदा में हेरा-फेरी के आरोप में यूपीएसआईडीसी प्रबंध निदेशक ने मुकदमा लिखाने के दिये निर्देश </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>राजधानी के सरोजनी नगर थाने में जल्द दर्ज होगा मुकदमा </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>अनुबंध होने के बाद जोड़ दी गई अलग से चार प्रतिशत वैट व सॢवस टैक्स की शर्त</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>अधिकारियों का दावा निविदा खुलने तक नहीं थी यह शर्त </strong></li>
</ul>
<p style="text-align: justify"><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/08/aaaaaaaaaaa.jpg"><img class="  wp-image-2269 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/08/aaaaaaaaaaa-300x200.jpg" alt="aaaaaaaaaaa" width="414" height="276" /></a></strong></p>
<p style="text-align: justify"><strong>लखनऊ।</strong> साहब, ये यूपीएसआईडीसी है। यहां बदनाम लड्डुओं का भोग चट करने वाले चर्चित अधिकारी कौन सा खेल कब खेल जाय, यह समझना आसान नहीं। राजधानी के अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में निर्माणाधीन प्रदर्शनी एवं कार्यालय भवन की आमंत्रित निविदा खुलने और अनुबंध होने के बाद कमाई का कारनामा सुनियोजित रूट से अंजाम दिया गया। शातिराना अंदाज से निगम की अभिरक्षा में रखे 112 करोड़ के अनुबंध की फाइलों में शर्तों को बदल दिया गया। निगम को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के अभियान में जुटे प्रबंध तन्त्र ने बेपर्दा हुये इस नये प्रकरण में भी महज ठेकेदार पर एफआईआर कराने का निर्देश देकर इस जालसाजी में शामिल निगम के मुलाजिमों को आक्सीजन दे दी है।</p>
<p style="text-align: justify">तत्कालीन प्रबंध निदेशक अमित घोष ने औद्योगिक क्षेत्र अमौसी के भूखण्ड संख्या-बी 9 में बनाये जा रहे भवन की निविदा और ठेकेदार को किये गये भुगतान की जांच के लिये फरवरी 2017 में एक कमेटी गठित की थी। इस समिति में वित्त नियंत्रक, अधिशासी अभियन्ता मुख्यालय, मुख्य प्रबंधक औद्योगिक क्षेत्र और अधिशासी अभियंता निर्माण खण्ड-7 को नामित किया गया। कमेटी की रपट में कई चौकाने वाले खुलासे हुये हैं।</p>
<p style="text-align: justify">यह रिपोर्ट तस्दीक करती हैं कि मेसर्स अहलूवालिया को 112 करोड़ का कार्य देने वाले इस प्रकरण की दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। कमेटी के मुताबिक, इस निविदा में नई दिल्ली की चार फर्मों ने हिस्सा लिया। मेसर्स अहलूवालिया की दरें निम्न होने पर सहमति के बाद 16 अक्टूबर 2015 को अनुबंध संपन्न हुआ। इस समय तक मेसर्स अहलूवालिया ने अलग से चार प्रतिशत वैट व सॢवस टैक्स का कोई उल्लेख नहीं किया। पर, बाद में मेसर्स अहलूवालिया ने इसका जिक्र करते हुये लगभग नौ प्रतिशत अधिक धनराशि का दावा कर दिया।</p>
<p style="text-align: justify">ठेकेदार ने इसका तर्क दिया कि उसने प्राइस बिड में इसका उल्लेख पहले ही कर दिया था। जबकि निविदा से जुड़े संबंधित अधिकारियों का कहना है कि इसका उल्लेख निविदा खुलने के समय तक नहीं किया गया था। समिति का मानना है कि इस प्रकरण में दो ही संभावनायें हो सकती हैं। पहली, ठेकेदार ने प्राइस बिड में दरों के साथ चार प्रतिशत वैट व सॢवस टैक्स की शर्त भी अंकित की हो, लेकिन टेण्डर खोलने वाले तत्कालीन अधिशासी अभियंता मुख्यालय ने इसको संज्ञान में न लिया हो।</p>
<p style="text-align: justify">दूसरी, संभावना यह हो सकती है कि निविदा प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ठेकेदार ने चार प्रतिशत वैट व सर्विस टैक्स की शर्त अलग से जोड़ दी हो। समिति ने सिफारिश करते हुये आगे लिखा है, इन दोनों ही परिस्थितियों में तत्कालीन अधिशासी अभियंता मुख्यालय एवं तत्कालीन उप प्रबंधक लेखा से स्पष्टीकरण लिया जाना उचित होगा, जिसके बाद ही अग्रिम कार्यवाही करना संभव हो सकेगा। बीते दिनों प्रबंध निदेशक रणवीर प्रसाद ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिये।</p>
<p style="text-align: justify">अधिशासी अभियंता एमएल सोनकर के अपने स्पष्टीकरण में लिखा है, प्राइस बिड खोले जाते समय निविदा प्रपत्र पर चार प्रतिशत वैट व सर्विस टैक्स अलग से दिये जाने की कोई भी टिप्पणी अंकित नहीं थी। इसे बाद में किसी समय बढ़ाया गया है। क्योंकि मेरे द्वारा निविदा खोले जाते समय दी गई दरों को घेरे में घेरकर हस्ताक्षर किये गये थे, जो वर्तमान में लिखी शर्तों पर नहीं हैं। मात्र 17.65 प्रतिशत अधिक पर ही मेरे द्वारा घेरा करके हस्ताक्षर किये गये थे।</p>
<p style="text-align: justify">उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम प्रबंध तंत्र ने लगभग 250 करोड़ के टेण्डर लेने में हुई हेरा-फेरी में बालाजी और गणपति पर जालसाजी की धाराओं में कानपुर के कल्याणपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। अब इसी फेहरिस्त में मेसर्स अहलूवालिया पर राजधानी के सरोजनी नगर थाने में जल्द ही मुकदमा दर्ज होने वाला है। इस निविदा में हुई हेरा-फेरी पर निगम तंत्र और ठेकेदार के अपने-अपने दावे हैं।</p>
<p style="text-align: justify">निविदा से संबंधित अधिकारियों का यह दावा कि ठेकेदार ने बाद में यह शर्त जोड़ दी निगम की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहा है। ऐसे में सवाल उठने लाजिमी हैं कि क्या निगम में 112 करोड़ की निविदा से संबंधित फाइलों की सुरक्षा तारामण्डल के भरोसे है? आखिर वो शख्स कौन है जो खाता तो यूपीएसआईडीसी की है, पर बजाता अहलूवालिया की है। पर्दे के पीछे छिपे उस शख्स पर कार्रवाई कब होगी? क्योंकि जब तक भ्रष्टाचार की गर्भनाल पर चोट नहीं की जायेगी, तब तक वह रावण की तरह अमर रहेगा और विकास कार्य पाण्डवों की भांति अज्ञातवास काटते रहेंगे&#8230; एमडी साहब।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>कौन है इस हेरा-फेरी का मास्टर माइंड?</strong><br />
जानकारों की मानें तो यदि अलग से चार प्रतिशत वैट व सॢवस टैक्स की शर्त को कम्परेटिव स्टेटमेंट में शामिल किया गया होता तो मेसर्स अहलूवालिया की निविदा प्रथम न्यूनतम नहीं होती। ऐसे में इस फर्म को यह कार्य मिल ही नहीं सकता। यहां यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब निविदा खोली गई तो इसका जिक्र नहीं था, तो बाद में यह कैसे दर्ज हो गया। इसके पीछे किस मास्टर का मांइड है? सभी को पता है। पर, शासन-प्रशासन में बैठे जिम्मेदार भ्रष्टाचार की इस गर्भनाल पर प्रहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>निगम हित में पूरा कराया जाये कार्य</strong><br />
समिति का मानना है कि ठेकेदार ने निर्माणाधीन भवन का जो निर्माण किया है। इसमें निगम का लगभग 28 करोड़ रुपये व्यय हो चुका है। ऐसी स्थिति में निर्माणाधीन भवन के भूमिगत, भूतल एवं प्रथम तल के अवशेष कार्यों को निगमहित में पूरा करा लिया जाय, जिससे इस परियोजना में व्यय हुई धनराशि का सदुपयोग हो सके।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>यह भुगतान तर्कसंगत नहीं</strong><br />
निविदा से जुड़े विभागीय अधिकारियों का कहना है, इस भुगतान की देयता नहीं बनती है। निगम द्वारा चार प्रतिशत वैट व सॢवस टैक्स के भुगतान का कोई तर्कसंगत औचित्य नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>महालूट की रिकवरी पर खामोशी क्यों</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Jul 2017 13:22:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[प्रॉपर्टी]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>

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		<description><![CDATA[महालूट को रफा-दफा करने की योजना कई पेट्रोल पंपों की डीलरशिप हुई निरस्त रिकवरी की धनराशि विकास कार्यों पर खर्च करें सरकार शैलेन्द्र यादव लखनऊ। वाहनों के कम माइलेज से बेहाल आम आदमी कभी मैकेनिकों को, तो कभी वाहन निर्माता कंपनियों को कोसता रहा। पर, कम माइलेज का कारण लुटेरे पेट्रोल पम्प संचालकों की काली &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li style="text-align: justify"><strong>महालूट को रफा-दफा करने की योजना </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>कई पेट्रोल पंपों की डीलरशिप हुई निरस्त </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>रिकवरी की धनराशि विकास कार्यों पर खर्च करें सरकार </strong></li>
</ul>
<p style="text-align: justify"><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/07/petrol.jpg"><img class="  wp-image-2186 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2017/07/petrol-300x169.jpg" alt="petrol" width="385" height="217" /></a>शैलेन्द्र यादव</strong></p>
<p style="text-align: justify"><strong>लखनऊ।</strong> वाहनों के कम माइलेज से बेहाल आम आदमी कभी मैकेनिकों को, तो कभी वाहन निर्माता कंपनियों को कोसता रहा। पर, कम माइलेज का कारण लुटेरे पेट्रोल पम्प संचालकों की काली करतूत निकली। स्पेशल टास्क फोर्स ने जब पेट्रोल-डीजल के चोर पंप संचालकों के सफेद पोश चेहरों से नकाब नोचा तो मामला ईंधन की महालूट का निकला। एसटीएफ ने इस रैकेट का भंडाफोड़ा। तो पुलिस थोक के भाव लगातार मुकदमें दर्ज कर रही है। ऑयल कंपनियां चोर पेट्रोल पंपों के लाइसेंस निरस्त करने में जुटी हैं। पर, इन सबके बीच आम आदमी के जेहन में एक सवाल शूल की तरह चुभ रहा है कि जब महालूट हुई, मुकदमें दर्ज किये गये। तो, आम जनता से लूटी गई रकम की रिकवरी करने में जिम्मेदार अब तक चुप्पी क्यों साधे हैं? कहीं इस महालूट के मामले को रफा-दफा करने की योजना तो नहीं है?</p>
<p style="text-align: justify">बता दें कि बीते २७ अप्रैल को एसटीएफ, आपूॢत विभाग व बांट-माप विभाग की संयुक्त टीम ने राजधानी के सात पंपों पर छापा मार पेट्रोल-डीजल वितरण में सुनियोजित तरीके से हो रही लूट का खुलासा किया। इसके बाद जिला प्रशासन ने राजधानी के सभी २०२ पंपों की जांच करायी। इसमें ५१ पंपों पर पेट्रोल-डीजल चोरी पकड़ी गई। ४३ पंपों पर मशीन अथवा नोजल में टैंपङ्क्षरग व डिवाइस लगाकर चोरी का मामला प्रकाश में आया। इन पंपों के डीलरों के खिलाफ संबंधित थानों में धोखाधड़ी के मुकदमा दर्ज किये गये। इतना ही नहीं इस महालूट पर इंडियन आयल ने राजधानी के तीन पेट्रोल पंपों का लाइसेंस भी निरस्त किया। इंडियन ऑयल के मुख्य प्रबंधक एमके अवस्थी के मुताबिक, राजधानी के अलीगंज फिलिंग स्टेशन, साहनी फिलिंग, गोमती नगर और मिश्र फिलिंग स्टेशन अलीगंज और बाराबंकी जनपद में आदर्श गौरी फिलिंग स्टेशन और किसान फिलिंग स्टेशन में डिवाइस लगा कर घटतौली के चलते डीलरशिप निरस्त की गई है।</p>
<p style="text-align: justify">एसटीएफ की कामयाबी के बाद सरकार ने जिला प्रशासन की देखरेख में एसआइटी गठित कर घटतौली रोकने का अभियान शुरू किया। इलेक्ट्रानिक डिवाइस के जरिये पेट्रोल पंपों में हुई महालूट में 120 पंप मालिकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर लगभग 37 लोगों की गिरफ्तारी भी की गई हैं। पर, इन लुटेरे पेट्रोल पंप संचालकों ने जिस आमजन के खून-पसीने की कमाई पर खुलेआम डाका डाला, उस रकम की रिकवरी करने की दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अब तक जारी किये गये किसी भी सरकारी आंकड़ें में यह नहीं बताया गया कि इन महालुटेरों से आमजन के खून-पसीने की कितनी कमाई वसूली गई है। जानकारों की मानें तो लुटेरे पंप संचालकों से अरबों की यह रकम यदि संजीदगी से वसूली जाय, तो यह किसान ऋण मांफी बजट के विकल्प में राज्य सरकार को बड़ी राहत दे सकती है। इससे राज्य सरकार सूबे में विकास की नई इबारत लिख सकती है।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>दर्ज हो रहे सिर्फ मुकदमें</strong><br />
राजधानी में पेट्रोल-डीजल की घटतौली में पकड़े गये ५१ में से तीन पम्पों की जांच पूरी हो गई है। पुलिस की विवेचना पूरी होने के बाद रिर्पोट डीएम को सौंप दी गई है। जिला प्रशासन के मुताबिक, केजीएमयू और डालीगंज स्थित लालता प्रसाद एंड संस एवं अलीगंज स्थित मान फिलिंग स्टेशन से संबंधित विवेचना पुलिस ने पूरी कर ली है। कुल १३ लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इसमें लालता प्रसाद एंड संस के दोनों पम्पों में पांच-पांच और मान फिलिंग स्टेशन में तेल चोरी के लिये तीन को अभियुक्त बनाया है। विवेचना में बांट-माप विज्ञान विभाग, एसटीएफ को मिले सबूत और स्टाक रजिस्टरों में अनियमितता को आधार बनाया गया है। वहीं क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी भानु भाष्कर कौल ने बक्शी का तालाब थाने में स्टैंडर्ड पेट्रोल पंप संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>हो सकती है 10 साल की सजा</strong><br />
चिप लगाकर पेट्रोल-डीजल चुराने वाले पंप मालिकों की सजा बढ़वाने के लिये जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। राजधानी के जिलाधिकारी ने निर्देश दिये हैं कि एक से अधिक डिस्पेंसर यूनिट में गड़बड़ी करने वाले पेट्रोल पंप मालिकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु वितरण अधिनियम की व्यवस्था के तहत भी कार्रवाई की जाय। मुकदमें में यह जुड़ जाने पर लुटेरे पंप मालिकों की सजा दस वर्षों तक बढ़ सकती है। धोखाधड़ी में अधिकतम पांच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>प्रदेश में दर्ज हुये सैकड़ों मुकदमें, रिकवरी अब तक किसी से नहीं</strong><br />
पेट्रोल पंपों पर चिप लगाकर घटतौली के मामले में पूरे प्रदेश में अब तक लगभग 120 मुकदमें दर्ज हुये हैं। इस मामले में अब तक 37 आरोपी गिरफ्तार भी किये जा चुके हैं। पुलिस विभाग के प्रवक्ता आईजी एचआर शर्मा के मुताबिक, पेट्रोल पंपों पर चिप लगाकर घटतौली का पहला मामला लखनऊ में 27 अप्रैल को पकड़ा गया था। दर्ज मुकदमों में कुल 115 लोग नामजद हैं और 15 नाम विवेचना में प्रकाश में आये। इस तरह कुल 215 आरोपियों में से 37 गिरफ्तार कर लिये गये हैं।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>कहां कितनी एफआईआर</strong><br />
लखनऊ जोन      391<br />
वाराणसी जोन     211<br />
आगरा जोन         181<br />
बरेली जोन           161<br />
मेरठ जोन             141<br />
कानपुर जोन        061<br />
गोरखपुर जोन      011</p>
<p style="text-align: justify"><strong>जांच के तथ्य</strong><br />
120 एफआईआर दर्ज हुई।  210 लोग  नामजद हुए। 37 लोग गिरफ्तार किये गए। सात पेट्रोल पंप के लाइसेंस रद। सात पेट्रोल पंप के लाइसेंस निलंबित। 21 के विरुद्ध कार्रवाई प्रचलित।</p>
<p style="text-align: justify"><strong>कंपनी                     संख्या         घटतौली   चिप    खामियां    सील पंप</strong><br />
आईओसीएल               3,433 पंप     170             98          268            18<br />
बीपीसीएल                   1,280 पंप        66             26            92             12<br />
एचपीसीएल                 1,367 पंप          76            56          132             10<br />
एस्सार                             537 पंप          29            14            43                4<br />
रिलायंस                           117 पंप           3                0              3                0<br />
अन्य कंपनियां                  11 पंप            1                0              1                 0</p>
<p style="text-align: justify">
<strong>मुख्य सचिव ने दिये गिरफ्तारी के निर्देश</strong><br />
बीते दिनों राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के अन्तर्गत पेट्रोल पंपों की जांच प्रगति की समीक्षा करते हुये मुख्य सचिव ने पेट्रोल पंपों की जांच में चिप, टेंपङ्क्षरग के ऐसे प्रकरण जहां अभी भी कानूनी कार्रवाई लंबित हैं, में तेजी लाने के निर्देश दिए। ऐसे मामलों में सूचना उपलब्ध कराने को कहा और जिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है, उन्हें प्राथमिकता पर गिरफ्तार करने के निर्देश भी दिये। पर, लूट की रकम रिकवर करने पर कुछ नहीं बोले।</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify">फ्यूल पंपों की जांच पूरी हो चुकी है। आगे की कार्रवाई के लिए गृह विभाग के अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।<br />
अजय चौहान, खाद्य एवं रसद कमिश्नर</p>
<p style="text-align: justify">अब तक 120 लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गयी है। 37 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अभियान के दौरान 15 चिप, 33 रिमोट बरामद किये गये हैं।<br />
हरि राम शर्मा, आईजी कानून व्यवस्था, पुलिस प्रवक्ता</p>
</blockquote>
]]></content:encoded>
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