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	<title>Business Link &#187; एक्सक्लूसिव</title>
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		<title>पुलिसिया बर्बरता के बाद सहमे छात्र</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Jan 2022 17:54:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>प्रयागराज के बघाड़ा इलाके में मंगलवार शाम प्रतियोगी छात्रों के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लॉज के कमरों में घुसकर क्रूरता से पीटा था। पुलिस की इस कार्रवाई का डर छात्रों पर तीन दिन बाद भी बना हुआ है। लॉजों के ज्यादातर कमरों में ताला लटका हुआ है। दूर-दराज के इक्का-दुक्का छात्र ही कमरों में अंदर से ताला बंद कर डर-सहमे, दुबके हुए हैं। पुलिस ने जिस क्रूरता से कमरों से छात्रों को बाहर घसीटकर पीटा था, उस मंजर को याद कर छात्रों की रूह कांप जाती है।</p>
<p>छोटा बघाड़ा मिश्रा लॉज में रहने वाले बिहार के विनीत यादव ने बताया कि टीजीटी-पीजीटी की तैयारी करते हैं। मंगलवार शाम वह कमरे में थे। अचानक बाहर शोरगुल मचा। हम डर गए। लगभग आठ-दस पुलिस वाले आए और कमरे का दरवाजा लाठी और बूटों से पीटकर तोड़ने लगे। खिड़कियों के कांच तोड़ दिए। कुछ कमरों का दरवाजा तोड़ दिया और छात्रों को बर्बर तरीके से पीटा। चीख पुकार सुनकर तख्त को दरवाजे से सटाकर हम लोग चुपचाप नीचे छिपे रहे।</p>
<p>आधे घंटे सन्नाटा पसरा रहने के बाद साथियों से फोन पर पता किया और चुपचाप सहपाठी के साथ माघ मेला क्षेत्र में निकल गए। रात भर मेले में घूमते रहे। हम लोग सुबह भी कमरे पर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। शाम को जब साथियों से पता चला कि एसएसपी आए थे और उन्होंने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि किसी छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा। तब हम लोग कमरे पर आए।</p>
<p>इसी लॉज में एसएससी की तैयारी करने वाले जौनपुर निवासी राजेश ने बताया कि जो छात्र प्रदर्शन में शामिल थे। वह तो पहले ही भाग चुके थे। कमरे में तो वहीं छात्र थे, जिनका आंदोलन से कोई लेना देना नहीं था। लेकिन पुलिस ने बेगुनाह छात्रों को पीटा। लॉज में कई छात्र इंटर की पढ़ाई करने वाले हैं। पुलिस ने उनको भी नहीं बख्शा है।</p>
<p>बिहार के कैमूर जिले के विनोद कुमार ने बताया छात्र अपनी बात जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे थे। आखिर छात्र अपनी बात किस तरह जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचाएं। हम यहां पढ़ने के लिए आए हैं। उपद्रव करने नहीं आए हैं। लेकिन पुलिस ने छात्रों के साथ उपद्रवियों सा सलूक किया। जो छात्र आसपास के जिलों के रहने वाले हैं। वह घर चले गए हैं। जो दूरदराज के हैं, वही छात्र रुके हुए हैं।</p>
<p>लॉज के कमरों में रुके हुए छात्र बाहर जरा सी भी आहट पर सहम उठते हैं। वह कमरे से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इन छात्रों का कहना है कि घर दूर होने और शहर में दूसरा कोई ठिकाना न होने के कारण लॉज में रुकने की मजबूरी है। वरना इस माहौल में वह भी ताला बंद कर चले जाते और माहौल सामान्य होने पर ही लौटते।</p>
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		<title>दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू और ऑड-ईवन का नियम खत्म</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Jan 2022 19:16:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण]]></category>

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		<description><![CDATA[दिल्ली में कोरोना नियमों को लेकर हुई डीडीएमए की समीक्षा बैठक में वीकेंड कर्फ्यू, बाजारों के लिए ऑड-ईवन नियम खत्म करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में मौजूद सूत्रों के हवाले से ये भी खबर है कि दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू तो खत्म कर दिया गया है लेकिन नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। दिल्ली में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली में कोरोना नियमों को लेकर हुई डीडीएमए की समीक्षा बैठक में वीकेंड कर्फ्यू, बाजारों के लिए ऑड-ईवन नियम खत्म करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में मौजूद सूत्रों के हवाले से ये भी खबर है कि दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू तो खत्म कर दिया गया है लेकिन नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा।</p>
<p>दिल्ली में लगातार घटते कोरोना के मामले और कम होती संक्रमण दर को ध्यान में रखते हुए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की बैठक में ये फैसले लिए गए हैं जिनका जल्द ही औपचारिक एलान हो जाएगा। डीडीएमए की इस बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने की।</p>
<p><strong>बैठक में इन नियमों में ढील देने की है सूचना</strong><br />
स्कूल व अन्य शिक्षण संस्थान अभी बंद रहेंगे, इन पर डीडीएमए की अगली बैठक में होगा फैसला।<br />
नाइट कर्फ्यू रहेगा बरकरार।<br />
ऑड-ईवन नियम खत्म होंगे।<br />
शादी समारोह में भी 200 लोगों के शामिल होने पर छूट मिलेगी। अभी सिर्फ 15 लोगों के शामिल होने की अनुमति है।<br />
बार और रेस्टोरेंट 50 प्रतिशत सीट क्षमता के साथ खुल सकेंगे।<br />
50 प्रतिशत क्षमता के साथ सिनेमा हॉल खुलेंगे। अभी सिनेमा हॉल पूरी तरह से बंद हैं।<br />
दिल्ली के सरकारी ऑफिस 50 प्रतिशत क्षमता के साथ खुलेंगे<br />
कोविड संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा।<br />
नियमों को सख्ती से लागू करवाया जाएगा।<br />
गौरतलब है कि दिल्ली में शुक्रवार रात 10.00 बजे से सोमवार सुबह 5.00 बजे तक का वीकेंड कर्फ्यू लगाया जाता था, जो अब नहीं लगेगा। लेकिन हर रोज रात 10.00 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक लगने वाला रात्रि कर्फ्यू जारी रहेगा।</p>
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		<title>एमएसएमई चाहे स्वतंत्र स्टॉक एक्सचेंज</title>
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		<pubDate>Thu, 24 Sep 2020 09:31:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[पंकज जायसवाल एमएसएमई सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है, एमएसएमई की वर्ष 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 6.33 करोड़ हैं, और उसमें से 6.08 करोड़ लगभग 95.98 फीसदी एमएसएमई एकल व्यवसाय में हैं, यह दर्शाता है कि एमएसएमई द्वारा कॉर्पोरेट फॉर्म या अन्य संगठित रूप बहुत कम पसंद किये जा रहें &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg"><img class="alignnone  wp-image-21888" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg" alt="pankaj sir copy" width="128" height="134" /></a></p>
<p><strong>पंकज जायसवाल</strong></p>
<p>एमएसएमई सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है, एमएसएमई की वर्ष 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 6.33 करोड़ हैं, और उसमें से 6.08 करोड़ लगभग 95.98 फीसदी एमएसएमई एकल व्यवसाय में हैं, यह दर्शाता है कि एमएसएमई द्वारा कॉर्पोरेट फॉर्म या अन्य संगठित रूप बहुत कम पसंद किये जा रहें हैं और यही कारण है की इस सेक्टर की एक बहुत बड़ी संख्या अनमैप्ड और अपंजीकृत हैं।</p>
<p>भारत में यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है क्योंकि यह अन्त्योदय के सिद्धांतों के अनुसार अंतिम छोर के भारतीय के विकास में योगदान देती है। अपनी एक विशाल वितरित उपस्थिति के साथ यह करीब करीब 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देती है और अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में जीडीपी में 29 फीसदी का योगदान है तो जीवीए में 31.83 फीसदी का योगदान है और निर्यात में 48.10 फीसदी का योगदान देती है।</p>
<p>इतना सब होने के बावजूद भी इस सेक्टर की सबसे बड़ी चिंता इसका बड़ी संख्या अनमैप्ड और अपंजीकृत होना है. इसमें बड़ी संख्या में लोग एकल व्यवसाय में हैं और लगातार पूंजीगत नकदी संकट से जूझते रहते हैं चाहे वह कार्यशील पूँजी हो या स्थाई पूंजी हो। जबकि इनके मुकाबले बड़े उद्यम जो अर्थव्यवस्था में उतना वितरित योगदान नहीं देते हैं उनके लिए कार्यशील पूँजी एवं स्थाई पूंजी की उपलब्धता अधिक है।</p>
<p>एक बड़े संस्थागत प्रयास के रूप में इनके लिए पूँजी बाजार को आकर्षक बनाना जरुरी है जिस कारण ये व्यवसाय के अनौपचारिक फॉर्म छोड़कर औपचारिक फॉर्म में आये और जो बड़ी समस्या इनके अनमैप और अपंजीकृत होने की है वह भी दूर किया जा सके। इस समस्या को एमएसएमई के लिए समर्पित स्टॉक एक्सचेंज बनाकर दूर किया जा सकता है। आज की तारीख में देश की दो बड़ी स्टॉक एक्सचेंज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपनी व्यवस्थाओं के अधीन एमएसएमई के लिए अलग से प्रकोष्ठ खोले हुए हैं लेकिन यह बड़े बरगद के नीचे छोटे पेड़ों के न फूलने फलने लायक परिस्थिति बनती है।</p>
<p>एमएसएमई मिनिस्टर नितिन गड़करी ने भी कुछ माह पहले राष्ट्रीय एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज बनाने की बात कर रहे थे लेकिन वह एक स्वतंत्र स्टॉक एक्सचेंज के बजाय इन बड़े बरगद रूपी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के अधीन ही बात कर रहे थे। हालाँकि उनके द्वारा एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज के बारे में चिन्तन भी एक अच्छी बात है. बकौल नितिन गड़करी सरकार विचार कर रही है एमएसएमई फंड बना के एमएसएमई को 15 फीसदी इक्विटी देने की जो लिस्टिंग कराना चाहते हैं और जब वे 2 से 3 वर्षों में इन एक्सचेंजों के माध्यमों से पूंजी जुटाते हैं या जब उनके शेयर की कीमतें बढेंगी तो सरकार भी अपनी इक्विटी बेच उस पैसे को एम्एसएमई में पुनर्निवेश करेगी।</p>
<p>एमएसएमई को अगर लम्बी अवधी के हिसाब से पूंजीगत मजबूती देनी है और लेवल प्लेयर बनाना है तो उन्हें स्टॉक एक्सचेंज की मजबूती देनी पड़ेगी लेकिन यह तब तक संभव नहीं है जब तक एमएसएमई का एक स्वतंत्र स्टॉक एक्सचेंज ना हो बजाय प्रकोष्ठ बनाकर और ईसके लिए सबसे मुफीद जगह होगी कानपुर, क्योंकि पुरे देश के करीब १५% एमएसएमई यूपी से आते हैं और बिहार को जोड़ दें तो करीब एक चौथाई इसी दोनों प्रदेश से हैं। मुंबई बड़े उद्यम का प्रतिनिधि और यूपी एमएसएमई का प्रतिनिधि पूंजीबाजार में करे तो भारत का आर्थिक संतुलन बनाया जा सकता है।</p>
<p>हालाँकि वर्तमान व्यवस्था में भी छोटी कंपनियां भी स्टॉक एक्सचेंजों में खुद को सूचीबद्ध कर सकती हैं हैं, लेकिन आमतौर पर वे बीएसई और एनएसई की पात्रता मानदंडों को पूरा करने में असक्षम होती हैं। दुनिया भर के लगभग सभी प्रमुख पूंजी बाजारों ने भी एमएसएमई सेगमेंट के लिए एक अलग एक्सचेंज की आवश्यकता महसूस की है। 20 से अधिक देश अलग एसएमई बाजार संचालित करते हैं। बीएसई और एनएसई ने भी जो एमएसएमई के लिए अपना प्लेटफॉर्म लॉन्च किया उसके तहत सूचीबद्ध एमएसएमई बाद में बिना आईपीओ के ही शेयर बाजार के मेन बोर्ड में जा सकती हैं। यह सुविधा एमएसएमई आईपीओ के लिए एक नया रास्ता हैं और बड़ी कम्पनियों की तुलना में न्यूनतम अनुपालन और लागत के साथ लिस्टिंग का अवसर प्रदान करते हैं।</p>
<p>एम्एसएमई एक्सचेंज की रूपरेखा पहली बार 2008 में सेबी द्वारा सोचा गया था और इस दिशा में एक प्रमुख कदम जनवरी 2010 में एमएसएमई के लिए प्रधान मंत्री टास्क फ़ोर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट थी, जिसमें एमएसएमई एक्सचेंज की स्थापना की सिफारिश की गई थी। जिसके बाद ही 2012 में, बीएसई और एनएसई में अलग प्लेटफार्म की स्थापना की गई।</p>
<p>एमएसएमई लिस्टिंग न केवल कंपनियों को लाभ प्रदान करेंगी बल्कि निवेशकों को भी लाभ देंगी,साथ ही प्राइवेट इक्विटी निवेशकों के लिए एक निकास मार्ग प्रदान करने के साथ-साथ ESOP होल्डिंग कर्मचारियों को तरलता देंगी। इनकी लिस्टिंग ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और मीडिया के बीच इनकी सार्वजनिक छवि मजबूत करेंगी जिससे इन्हें कई तरह के लाभ मिलेंगे।</p>
<p>स्वतंत्र एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज के स्थापना की आवश्यकता के मध्य आइये जानते हैं ये बीएसी या एनएसई में वर्तमान व्यवस्था कैसे काम करती हैं। जैसा कि हम जानते हैं, बीएसई और एनएसई प्लेटफॉर्म, जहां कंपनियां अपने शेयर को लिस्ट करती है, आमतौर पर &#8220;मुख्य बोर्ड&#8221; के रूप में जानी जाती हैं। यह मंच प्राथमिक मंच है जहां आईपीओ होता है। और इसके लिए सख्त पात्रता मानदंड हैं, जबकि इनके एमएसएमई प्रकोष्ठ हेतु पात्रता मानदंड इतने कठिन नहीं हैं। जैसे की ट्रैक रिकॉर्ड, लागत, कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानदंड, पेड अप पूंजी, न्यूनतम आवंटी समेत रिपोर्टिंग आवश्यकताओं और लिस्टिंग के लिए समय सीमा की आवश्यकता में काफी रियायत दी गई है।</p>
<p>विश्व स्तर पर, आईपीओ बाजार ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया और मोबाइल प्रौद्योगिकी फर्मों के साथ एक नई शुरुआत कर रहा है। जबकि भारत में ऐसा नहीं हो रहा कुछेक अपवाद को छोड़, यहाँ स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, पेटीएम और इनमोबी जैसे स्टार्टअप स्टॉक एक्सचेंज की जगह निजी इक्विटी निवेशकों के दरवाजे खटखटा रहे हैं । ये कंपनियां भारत में सूचीबद्ध नहीं है लेकिन विदेशों में सूचीबद्ध हैं। भारत में ऐसे कई स्टार्टअप और एमएसएमई हैं जिन्हें ग्रोथ कैपिटल की जरूरत है। बड़े स्टार्टअप तो आगे की पूंजी के लिए निजी इक्विटी निवेशकों को टैप कर सकते हैं, लेकिन छोटे लोगों और एमएसएमई के पास वर्तमान में पूंजी जुटाने के लिए सीमित विकल्प हैं। उनके लिए ही नहीं केवल, निवेशकों के लिए भी समर्पित एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज एक सकारात्मक कदम होगा, क्योंकि उन्हें भी ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बनने का अवसर मिलता है। यदि ऐसा होता है तो एसएमई प्लेटफॉर्म स्टार्टअप को पूंजी जुटाने के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरेगा और यहां तक कि स्टार्ट-अप निवेशकों को जल्दी बाहर निकलने का अधिक मौका मिलेगा।</p>
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		<title>31,661 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने की शुरुआत करेंगे सीएम योगी</title>
		<link>http://businesslinknews.com/cm-yogi-will-start-giving-appointment-letters-to-31661-teachers/</link>
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		<pubDate>Sun, 20 Sep 2020 17:58:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[शिक्षकों पर मेहरबान सीएम योगी सरकार विभिन्न जिलों में चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र बांटने की शुरू होगी प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी होगी नियुक्ति पत्र बांटने की प्रक्रिया अब तक 54,706 शिक्षकों की भर्ती कर चुकी है सरकार समर सिंह लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>शिक्षकों पर मेहरबान सीएम योगी सरकार</strong></li>
<li><strong>विभिन्न जिलों में चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र बांटने की शुरू होगी प्रक्रिया</strong></li>
<li><strong>एक सप्ताह के भीतर पूरी होगी नियुक्ति पत्र बांटने की प्रक्रिया</strong></li>
<li><strong>अब तक 54,706 शिक्षकों की भर्ती कर चुकी है सरकार</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/job.jpg"><img class="  wp-image-21976 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/job.jpg" alt="job" width="475" height="267" /></a>समर सिंह<br />
</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत रोजगार उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। सरकार ने बेसिक शिक्षा विभाग में 31,661 शिक्षकों को एक सप्ताह में नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया का शुभारंभ करेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने नियुक्तियों की तैयारी तेज कर दी है। साथ ही सभी विभागों के रिक्त पदों पर आगामी 6 माह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जायेगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को पर्याप्त सरकारी नौकरी और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये हैं। तमाम व्यवधानों के बावजूद बीते 15 वर्षों के दौरान सबसे अधिक 54,706 शिक्षकों की भर्ती पिछले 3 वर्षों में की हैं। साथ ही पूर्ववती सरकार के कार्यकाल वर्ष 2012-17 की तुलना में पद भी बढ़ाये हैं। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलते ही बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक व उच्च प्रा​थमिक विद्यालयों में 31,661 शिक्षकों की नियुक्ति एक सप्ताह में करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इससे भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों आवेदकों में खुशी की लहर है।</p>
<p>बेसिक शिक्षा विभाग में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में से शिक्षामित्रों के पदों को छोड़कर 31,661 चयनित आवेदकों को नियुक्ति पत्र देने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं करेंगे। इसके लिए विभिन्न जनपदों से चयनित आवेदकों को बुलाया जायेगा। अब तक वर्तमान प्रदेश सरकार ने महज 3 वर्षों में युवाओं को सबसे अधिक 3,00,526 सरकारी नौकरियां दी हैं। वहीं 85,629 नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं।</p>
<p>योगी सरकार ने पूर्ववती सरकारों (सपा-बसपा) के पूरे कार्यकालों की तुलना में कहीं अधिक 3,00,526 सरकारी नौकरियां 3 वर्षों में दी हैं। बसपा सरकार ने पांच साल में कुल 91,000 सरकारी नौकरियां दी। तो वहीं सपा सरकार ने पांच साल के दौरान 2.05 लाख सरकारी नौकरियों पर नियुक्तियां की। जबकि 3 वर्षों में योगी सरकार ने 3,00,526 सरकारी नौकरियां दी हैं। इनका औसत निकाला जाय तो प्रतिवर्ष 1 लाख युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरी मिली हैं।</p>
<p><strong>पारदर्शी प्रक्रिया से खुश और संतुष्ट हैं अभ्यर्थी</strong><br />
वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में हुई भर्तियों में अपनाई गई निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया से अभ्यर्थी खुश और संतुष्ट हैं। जबकि पूर्ववती सरकारों के कार्यकाल की भर्तियों में भाई-भतीजावाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद और भ्रष्टाचार हावी रहा। सभी भर्तियों में अपनाई गई मनमानी प्रक्रिया के खिलाफ अभ्यर्थी न्यायालय पहुंचे। साथ ही हजारों आक्रोषित अभ्यर्थी सड़कों पर भी उतरे।</p>
<p><strong>45,000 शिक्षकों को मिलेगा लाभ</strong><br />
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सप्ताह में शिक्षकों की भर्ती के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों तथा सहायक अध्यापकों के अंतरजनपदीय तबादलों की अनुमति दे दी है। इससे सूबे के करीब 45,000 शिक्षकों को लाभ मिलेगा। तबादलों में महिला, दिव्यांग और सैनिक परिवारों को वरीयता दी जाएगी।</p>
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		<title>आजादी के बाद पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से दी सबसे ज्यादा नौकरी</title>
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		<pubDate>Sat, 19 Sep 2020 19:08:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[3 लाख से अधिक नौकरियां]]></category>
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		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
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		<category><![CDATA[सरकारी नौकरियां]]></category>

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		<description><![CDATA[सपा-बसपा शासनकाल में हर भर्ती चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट बिजनेस लिंक ब्यूरो  लखनऊ। आजादी के बाद से अब तक योगी सरकार ने युवाओं को सबसे अधिक सरकारी नौकरियां अपने तीन वर्षों के कार्यकाल में दी हैं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग सहित सभी विभागीय भर्तियों में पारदर्शी और निष्पक्ष &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/Adityanath.jpg"><img class="  wp-image-21977 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/Adityanath.jpg" alt="Adityanath" width="458" height="258" /></a>सपा-बसपा शासनकाल में हर भर्ती चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> आजादी के बाद से अब तक योगी सरकार ने युवाओं को सबसे अधिक सरकारी नौकरियां अपने तीन वर्षों के कार्यकाल में दी हैं। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग सहित सभी विभागीय भर्तियों में पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई है। इसी का नतीजा है कि युवाओं को योग्यता के आधार पर 3 लाख से अधिक नौकरियां मिली हैं। भर्तियों में अपनाई गई पारदर्शी प्रक्रिया से अभ्यर्थियों की विश्वसनीयता बढ़ी है।</p>
<p>सपा-बसपा शासनकाल में हुई सभी भर्तियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी। नौकरियों के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गये। भर्तियों में भाई-भतीजावाद, क्षेत्रवाद और जातिवाद हावी रहा। सपा शासनकाल(वर्ष 2012 से 2017 तक) में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के इतिहास में पहली बार पीसीएस-2015 की प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। वर्ष 2016 की आरओ व एआरओ प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ। वर्तमान सरकार ने यह परीक्षा निरस्त कराकर पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लेकर अभ्यर्थियों को राहत दी।</p>
<p>इतना ही नहीं सपा सरकार में हुई उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की विभिन्न भर्तियों में लगभग 26,000 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि वर्तमान सरकार ने पारदर्शी तरीके से महज 3 वर्षों में 26,103 अभ्यर्थियों का चयन किया है। इस अवधि में काफी समय कोरोना से भी प्रभावित रहा। साथ ही इस अवधि में 6,566 अधिकारियों का पदोन्नति के माध्यम से चयन हुआ। वहीं पूर्ववती सरकार के कार्यकाल में महज 1,588 अधिकारियों का ही पदोन्नति से चयन हुआ था।</p>
<p>पूर्ववती सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पदाधिकारियों की मनमानी और भ्रष्ट कार्यशैली से संबंधित कई गम्भीर शिकायतें हुई, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। इतना ही नहीं आयोग की भर्तियों को लेकर विवाद किस कदर है, इसका अंदाजा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में दाखिल मुकदमों की संख्या से लगाया जा सकता है। जानकारों की मानें तो हाई कोर्ट में लगभग 500 और सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मुकदमे लंबित हैं। कोर्ट ने कई नियुक्तियों को अवैध करार दिया है, जिन भर्तियों को लेकर आरोप लगे उनमें अधिकांश अनिल यादव के कार्यकाल की हैं।</p>
<p><strong>सपा शासन में गिरी ‘आयोग की गरिमा&#8217;</strong><br />
मार्च 2017 से पूर्व की सरकारों के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग सहित विभिन्न विभागीय भर्तियों में अपनाई गई प्रक्रिया की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा कटघरे में रही। सपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष आपराधिक इतिहास के व्यक्ति डा0 अनिल यादव को बनाया गया। साथ ही अयोग्य विभागीय अधिकारी रिजवानुर्रहमान को सचिव नियुक्त किया गया। इन दोनों ही अधिकारियों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पद से बर्खास्त किया। तत्कालीन सपा सरकार में अध्यक्ष और सदस्यों को मनमानी करने की पूरी आजादी थी। यही वजह थी कि डॉ. अनिल यादव के कार्यकाल में मनमाने फैसले लिए गए और हजारों छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ा।</p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/13_09_2018-uppsc_18422404.jpg"><img class="  wp-image-21978 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/13_09_2018-uppsc_18422404.jpg" alt="13_09_2018-uppsc_18422404" width="286" height="238" /></a>आयोग में नियुक्त किए गए ईमानदार व योग्य पदाधिकारी </strong><br />
योगी सरकार ने लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के पद पर ईमानदार, योग्य व कर्मठ पदाधिकारियों को नियुक्ति कर आयोग की खोई हुई प्रतिष्ठा, विश्वसनीयता, पारदर्शिता और इन्टीग्रिटी पुनः स्थापित की है। साथ ही आयोग में समयबद्ध विज्ञापन, परीक्षा की स्कीम तथा परीक्षा परिणाम घोषित करने की कार्य संस्कृति बनी है। परीक्षा कैलेण्डर वर्ष के पूर्व जारी करने से अभ्यर्थियों को तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल रहा है। अभ्यर्थियों की शिकायतों के निवारण के लिए नई व्यवस्था प्रारम्भ की गई है। लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रत्येक बुधवार को अभ्यर्थियों से मिलकर उनकी शिकायतों का निवारण कर रहे हैं। आयोग की विभिन्न परिक्षाओं के कई अभ्यर्थियों ने इस नई कार्य संस्कृति के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया है।</p>
<p><strong>आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान के तहत रिकार्ड रोजगार</strong><br />
आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोजगार अभियान के तहत 1.25 करोड़ से अधिक रोजगार उपलब्ध कराये गये हैं। 50 लाख से अधिक कामगारों को क्रियाशील औद्योगिक इकाइयों में रोजगार दिया गया। 11 से अधिक कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न औद्योगिक संस्थानों से एमओयू हस्ताक्षरित किया गया। अन्य राज्यों से वापस लौटे 2.57 लाख और आत्मनिर्भर ईसीजीएलएस योजना के तहत 4,31,571 कामगारों को रोजगार मिला। मनरेगा के अंतर्गत 24.45 करोड़ मानव दिवस सृजित कर 11 सितम्बर 2020 तक 94 लाख से अधिक मजूदरों को रोजगार देकर 4681.97 करोड़ रुपये से अधिक मानदेय का का भुगतान किया गया।</p>
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		<title>यूपी बने भोजपुरी फिल्म उद्योग का केंद्र</title>
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		<pubDate>Sat, 19 Sep 2020 12:21:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[विचार मंच]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[तेलगू फिल्मों का केंद्र तेलंगाना, तमिल फिल्मों का केंद्र तमिलनाडु, मलयाली फिल्मों का केंद्र केरला तो बंगाली फिल्मों का केंद्र कोलकाता है। भाषा आधारित इन फिल्मों और इस पर आधारित फिल्म उद्योग का केंद्र वही राज्य है जहाँ इनकी राज्य की आधिकारिक भाषा वही भाषा है जो वहां की फिल्मों का भाषा है। सिर्फ हिंदी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21888" style="width: 135px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg"><img class="  wp-image-21888" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg" alt="pankaj sir copy" width="135" height="141" /></a><figcaption class="wp-caption-text">पंकज जायसवाल</figcaption></figure>
<p>तेलगू फिल्मों का केंद्र तेलंगाना, तमिल फिल्मों का केंद्र तमिलनाडु, मलयाली फिल्मों का केंद्र केरला तो बंगाली फिल्मों का केंद्र कोलकाता है। भाषा आधारित इन फिल्मों और इस पर आधारित फिल्म उद्योग का केंद्र वही राज्य है जहाँ इनकी राज्य की आधिकारिक भाषा वही भाषा है जो वहां की फिल्मों का भाषा है। सिर्फ हिंदी फिल्म और उसकी छाया में विकसित भोजपुरी फिल्म उद्योग ही ऐसा है जो उस राज्य में हैं जिसकी आधिकारिक राज्यभाषा मराठी प्रथम है।</p>
<p>एक जगह विशेष पर फिल्म उद्योग एवं उसके इकोसिस्टम विकसित होने के कई कारण होते हैं जिसमें प्रमुख रूप से फिल्म उद्योग में प्रयोग होने वाले कैमरा, लाइट, परिवहन साधन, सेट बनाने वाली फर्में और सामग्री, क्राफ्ट एवं आर्ट आपूर्ति की फर्में, संगीत रिकॉर्डिंग स्टूडियो, फिल्म सेट स्टूडियो, एडिटिंग लैब, प्रीमियर थिएटर, सिनेमा हाल वितरकों का जमावड़ा और आजकल के हिसाब से डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध कराने वाले कम्पनियों का ऑफिस और अनुकूल फिल्म नीति और यह सब जहाँ रहता है वहां फिल्म उद्योग फलफूल पाता है और इस कारण जो इसके मानवीय संसाधन हैं जैसे की फिल्म कलाकार, निर्माता, निर्देशक वितरक एवं अन्य सहायक लोग ऐसी जगह पर इक_ा होते हैं और यही कारण है कि इन सब इकोसिस्टम की उपलब्धता के कारण मुंबई में फिल्म उद्योग फला फूला।</p>
<p>एक और बड़ा कारण मुंबई सहित दक्षिण भारत में फिल्म उद्योग की स्थापना का रहा है वह है सूर्य के प्रकाश और मौसम की अनुकूलता, उत्तर भारत में जहां अत्यधिक सर्दी और अत्यधिक गर्मी और कुहासे का मौसम रहता है ऐसे में शूटिंग लायक मौसम सितम्बर से लेकर मार्च तक ही रहता है जो कुल मिला के 6 माह की होती है जबकि ऊपर के अन्य जगहों में कम से कम 9 माह तक सूर्य का प्रकाश और मौसम की अनुकूलता रहती है बाकी बचे 3 महीने में ये इनडोर काम करते रहते हैं।</p>
<p>नोएडा में नई फिल्मसिटी की घोषणा और कोरोना काल दोनों ने एक ऐसा अवसर पैदा किया है जिससे उत्तर प्रदेश में भोजपुरी फिल्म उद्योग की शिफ्ट किया जा सकता है, इससे फिल्मों की उत्पादन लागत भी कम आएगी स्वत: उपस्थित फिल्म की लोकेशन के कारण उन्हें अलग से कृत्रिम सेट बनाने की जरुरत और महंगा किराया और बड़े लोजिस्टिक खर्च नहीं देने पड़ेंगे। कोरोना काल के कारण भोजपुरी फिल्म उद्योग के कई कलाकार यूपी को रिवर्स पलायन कर चुके हैं जिसका प्रमाण आप उधर खुल रहे कई म्यूजिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो के रूप में देख रहे होंगे, कई तो अब मुंबई वापस भी आना नहीं चाहते हैं क्यों की कुछ फिल्मों की शूटिंग यूपी में होनी है तो उन्हें शूटिंग शुरू होने का इन्तेजार है।</p>
<p>यही सही मौका है भोजपुरी फिल्म उद्योग को यूपी में खासकर मध्य यूपी एवं पूर्वांचल में फिर से खड़ा किया जा सकेगा क्यों की बहुमत में इस उद्योग के मानवीय संसाधन यूपी में ही कोरोना के कारण पलायित हो आ चुके हैं, दूसरा यह संयोग ही है की गोरखपुर के सांसद रविकिशन भी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के अगुवा हैं और वर्षों से फिल्मसिटी निर्माण के लिए प्रयासरत थे, इनकी पहल और नेतृत्व इस उद्योग को यहाँ खड़े करने में महती भूमिका निभाएगा।</p>
<p>अब सरकार को इन संयोग से मिले संसाधनों का संयोजन कर उनमे जान फूंक कर इस उद्योग को खड़ा करने में लगने वाले पूंजीगत खर्चों जैसे की प्राइवेट फिल्म सिटी का निर्माण, स्टूडियो का निर्माण, डिजिटल एवं एडिटिंग लैब आदि की स्थापना इक्विपमेंट एवं प्लांट की खरीद आदि में सब्सिडी दे ताकि फिल्मों का इकोसिस्टम विकसित हो और उसके इर्दगिर्द फिल्म जगत के सारे कारक आकर इकठ्ठा हो जाएँ, जैसे की वितरक निर्माता और वितरण डिजिटल से जुडी कम्पनियां भी। फिल्मों की सब्सिसी तो पहले से ही जारी है।</p>
<p>साथ ही सरकार को नॉएडा फिल्म सिटी के उन कारणों से सीख लेनी पड़ेगी की क्यों इतना बड़ा फिल्मसिटी बहुत पहले से ही नॉएडा में बनने के बाद उत्तर भारत के फिल्मकारों की पहली पसंद न बन सका और आज भी पहली पसंद मुंबई ही है, फिल्म का बाजार मुंबई से शिफ्ट नहीं हुआ है। इस मामले में कंगना रानावत का सुझाव भी काफी अच्छा है जिसमें उन्होंने कहा था की लोगों की धारणा है कि भारत में शीर्ष फिल्म उद्योग हिंदी फिल्म उद्योग ही है ये धारणा गलत है।</p>
<p>फिल्म उद्योग में तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री शीर्ष स्थान पर पहुंची है और अब कई भाषाओं में फिल्में बनाकर पूरे भारत को कवर कर रही है, कई हिंदी फिल्मों को रामोजी हैदराबाद में शूट किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ जी की पहल का सराहना करते हुए कंगना का सुझाव भी काफी अच्छा है जिसमें उन्होंने कहा की हमें फिल्म उद्योग में कई सुधारों की आवश्यकता है।</p>
<p>सबसे पहले हमें भारतीय फिल्म उद्योग नामक एक बड़ी एकीकृत फिल्म उद्योग के स्थापना की आवश्यकता है, हम आज कई कारकों के आधार पर विभाजित हैं, जबकि एकीकृत फिल्म उद्योग के रूप में हॉलीवुड फिल्मों को इसका लाभ मिलता है जैसे की एक एकीकृत राष्ट्रीय उद्योग लेकिन कई जगहों पर फिल्मसिटी, नि:संदेह यह सलाह उचित है और सही दिशा है इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंतन करना चाहिए ताकि एकीकृत फिल्म उद्योग की स्थापना हो।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद् को इसके लिए सक्रिय भूमिका निभानी पड़ेगी और सबसे पहले इसके चेयरमैन को स्थायी तौर पर लगातार लखनऊ में बैठना पड़ेगा और प्रतिदिन कार्यालय जाना पड़ेगा ताकि उनका चिंतन और फोकस प्रतिदिन इस विषय पर हो तभी परिणाम निकल पायेगा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन सम्पूर्ण हो पायेगा।</p>
<p>दूसरा तुरंत भोजपुरी फिल्म उद्योग के जितने भी स्टेक होल्डर हैं। उनकी एक बैठक लखनऊ में आयोजित कर या वर्चुअल मीटिंग आयोजित कर उनसे एक इनपुट लिया जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश को भोजपुरी फिल्म उद्योग का केंद्र बनाने के लिए उनके क्या सुझाव हैं। तीसरा फिल्म ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट पुणे की तर्ज पर एक इंस्टीट्यूट की स्थापना हो। यह एक चलता हुआ उद्योग है इसको एक हल्का सा पुश प्रदेश में रोजगार और देश के फिल्म उद्योग में एक बड़ा केंद्र हो सकता है।</p>
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		<title>वैदिक और स्मार्ट सिटी के समन्वय का मॉडल बनेगी नव्य अयोध्या</title>
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		<pubDate>Fri, 18 Sep 2020 09:16:42 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[हर राज्य, कोरिया समेत पांच देशों, आश्रमों, मठों, डॉरमेट्री के लिए आरक्षित होंगे भूखंड सूरज की किरणों जैसा नजर आएगा सड़कों का संजाल गिरीश पांडेय लखनऊ। चौड़ी सड़कें। दोनों किनारों पर लकदक हरियाली। सूर्योदय होने पर होटल की खिड़की से झांकते ही देश की पंच नदियों में से एक पवित्र सरयू नदी और रामलला के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हर राज्य, कोरिया समेत पांच देशों, आश्रमों, मठों, डॉरमेट्री के लिए आरक्षित होंगे भूखंड</strong><br />
<strong>सूरज की किरणों जैसा नजर आएगा सड़कों का संजाल</strong></p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/07/girish-ji1.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-21689" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/07/girish-ji1.jpg" alt="girish ji" width="100" height="137" /></a></p>
<p><strong>गिरीश पांडेय</strong></p>
<p><strong> लखनऊ।</strong> चौड़ी सड़कें। दोनों किनारों पर लकदक हरियाली। सूर्योदय होने पर होटल की खिड़की से झांकते ही देश की पंच नदियों में से एक पवित्र सरयू नदी और रामलला के भव्य मंदिर का दीदार। रात तो ऐसी दिखेगी मानों आसमान के सारे तारे सरयू में ही उतर आए हों। नव्य अयोध्या के बारे में कुछ ऐसी ही परिकल्पना है, अपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की। उत्तर प्रदेश आवास-विकास परिषद इसको प्रारंभिक स्वरूप भी दे चुका है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के सामने इसका प्रस्तुतिकरण भी हो चुका है। कुल मिलाकर नव्य अयोध्या वैदिक और स्मार्ट सिटी का मॉडल बनेगी।</p>
<p><strong>पर्यटकों की सुविधाओं को मिलेगी खास तरजीह</strong><br />
देश-दुनिया में भगवान श्रीराम की स्वीकार्यता के मद्देनजर अयोध्या में भव्य राम मंदिर और दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम की प्रतिमा बनने के साथ अयोध्या दुनिया भर के रामभक्तों और अन्य लोगों के आस्था का केंद्र बनेगा। हर कोई अपने आराध्य का दर्शन करने एक बार जरूर अयोध्या आना चाहेगा। लिहाजा नव्य अयोध्या में इनकी सुविधा का खास खयाल रखा गया है।</p>
<p><strong>पांच फाइव, 10 थ्री और 15 बजट होटल के भी प्लान</strong><br />
इसके लिए पांच फाइव स्टार, 10 थ्री स्टार और 15 अजट होटलों के लिए स्थान आरिक्षत किए जाएंगे। यह उन 20 होटलों से अलग होंगे जिनके लिए नई पर्यटन नीति के बाद पर्यटन विभाग को प्रस्ताव मिल चुके हैं। हालांकि भगवान श्रीराम की स्वीकार्यता के मद्ददेनजर मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे अधिक जमीन की मांग निकलेगी। ऐसे में कुछ बहुमंजिला भवनों को भी प्लान में शामिल करें। इसके अलावा कोरिया समेत पांच देशों और 25 राज्यों के लिए अतिथि गृह, अलग-अलग धर्मों, संप्रदायों और आश्रमों के लिए, मठों और स्वयंसेवी संगठनों के लिए भी करीब 100 भूखंड आरक्षित किए जाएंगे। सभी बुनियादी सुविधाओं से युक्त सर्विस अपार्टमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, सरयू की पवित्रता और अविरलता अप्रभावित रहे इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा।</p>
<p><strong>वैदिक शहरों की तरह धनुषाकार होगी नव्य अयोध्या</strong><br />
प्रस्ताव के मुताबिक नव्य अयोध्या वैदिक कालीन आम शहरों की तरह धनुष के आकार का होगा। इसमें करीब 80 मीटर चौड़ी सड़कों का संजाल होगा। ये सड़कें ऐसी ऊपर से सूर्य की किरणों के समान दिखेंगी। सड़कों के किनारे लकदक हरियाली के लिए ग्रीनबेल्ट विकसित की जाएगी। यह सब होगा करीब 740 एकड़ भूमि पर। इसमें माझा बरहटा में 57.64, माझा शहनवाजपुर में 293.79 और माझा तिहुरा की 388.41 एकड़ जमीन पर। यह जमीन लखनऊ-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 बी पर है। लखनऊ से गोरखपुर जाते समय दाहिने ओर सरयू के किनारे निर्मित बंधे के बीचोबीच और प्रस्तावित श्रीराम की प्रतिमा के लिए अधिसूचित भूमि से लगी हुई है।</p>
<p>अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए मैं प्रदेश सरकार की सराहना करता हूं। रामनगरी के विकास के लिए सरकार ने जो महत्वपूर्ण योजना बनाई है उस पर हम प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। इससे अयोध्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन का केंद्र बनकर उभरेगा और पर्यटन उद्योग के क्षेत्र में निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा। जिससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अयोध्या में पर्यटन उद्योग विकसित होने से एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा।<br />
<strong>आलोक रंजन, पूर्व मुख्य सचिव/मुख्य संरक्षक, स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा)</strong></p>
]]></content:encoded>
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		<item>
		<title>सेतु निगम प्रबंध तंत्र की लापरवाही से करोड़ों की मशीनें नदियों में डूबी</title>
		<link>http://businesslinknews.com/millions-of-machines-drowned-in-rivers-due-to-negligence-of-setu-nigam-management-system/</link>
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		<pubDate>Fri, 18 Sep 2020 09:13:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[अयोध्या, आजमगढ़ और देवरिया में डूबी सेतु निर्माण में लगी लगभग पांच करोड़ रुपये की मशीनें व क्रेन मानसून आने से पूर्व मशीनें हटाने की व्यवस्था जिम्मेदारों को नहीं याद समर सिंह लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम प्रबंध तंत्र की लापरवाह कार्यशैली से बरसात की बाढ़ में निर्माणाधीन सेतुओं की साइटों पर लगभग 5 &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/setu-nigam.jpg"><img class="  wp-image-21988 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/setu-nigam.jpg" alt="setu nigam" width="422" height="238" /></a>अयोध्या, आजमगढ़ और देवरिया में डूबी सेतु निर्माण में लगी लगभग पांच करोड़ रुपये की मशीनें व क्रेन</strong></li>
<li><strong> मानसून आने से पूर्व मशीनें हटाने की व्यवस्था जिम्मेदारों को नहीं याद</strong></li>
</ul>
<p><strong>समर सिंह</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम प्रबंध तंत्र की लापरवाह कार्यशैली से बरसात की बाढ़ में निर्माणाधीन सेतुओं की साइटों पर लगभग 5 करोड़ रुपये की मशीनें डूब गई हैं। अयोध्या, बरहज देवरिया, आजमगढ़ और बलिया जनपदों की विभिन्न नदियों पर कीमती मशीनों ने जल समाधि ले ली है। इस लापरवाही से राजकीय खजाने पर बोझ बढऩा तय है। विभागीय जानकारों की मानें तो स्पष्ट निर्देश हैं कि मानसून आने से पूर्व नदियों पर निर्माणाधीन सेतुओं की साइटों से निर्माण सामग्री और समस्त मशीनें आदि समय रहते हटा ली जाएं, जिससे आर्थिक क्षति से बचा जा सके। पर, वर्तमान सेतु निगम प्रबंध तंत्र इस व्यवस्था का पालन कराने में पूरी तरह फेल रहा। नतीजतन, एक के बाद एक नदियों में करोड़ों की मशीनें लगातार डूबती रहीं। इन साइटों पर डूबती मशीनों के वीडियो सेतु निगम के प्रबंध निदेशक से लेकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल की गैलरी में कैद हैं।</p>
<p><strong>मेंटीनेंस में खर्च होगी मोटी रकम</strong><br />
जानकारों की मानें तो सेतु निगम के जिम्मेदार अधिकारी नदियों में डूबी इन मशीनों के मेंटीनेंस के नाम पर निगम कोष से बड़ी राशि खर्च करने की कार्य योजना बनाने में जुट गए हैं।</p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/6179e269-8462-4fff-87e2-dea51cbdf639.jpg"><img class="  wp-image-21942 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/6179e269-8462-4fff-87e2-dea51cbdf639.jpg" alt="6179e269-8462-4fff-87e2-dea51cbdf639" width="426" height="240" /></a>आजमगढ़ में सीपीएम, एई और जेई की लापरवाही जगजाहिर</strong><br />
आजमगढ़ जनपद में सरयू नदी पर निर्माणाधीन सेतु गोलाघाट पर बीते दिनों दो क्रेन, दो एल्बा मिक्स प्लांट, जनरेटर, गार्डन विकी, कॉलम सरिया स्टील, शटरिंग प्लेट एवं स्टोर के कई बरजा जिस पर मटेरियल रखकर नदी में काम करते हैं वह नदी में डूब गया। जानकारों की मानें तो राजकीय धन की इस बर्बादी के गुनहगार प्रत्यक्षरूप से मुख्य परियोजना प्रबंधक गोरखपुर जोन सुनील कुमार व परियोजना से संबंधित अवर अभियंता और सहायक अभियंता हैं।</p>
<p><strong>यह है व्यवस्था</strong><br />
शासन का आदेश है कि बरसात से पहले नदी में पड़े हुए सामान को बाहर सुरक्षित निकाल लिया जाए।</p>
<p><strong>देवरिया में क्रेन, जनरेटर और आइब्रो मशीन पानी में डूबी</strong><br />
इस घटना के कुछ दिन पूर्व ही देवरिया यूनिट भी इसी तरह की घटना की गवाह बनी। पर, इससे कोई सीख नहीं ली गई। यहां बरजा सहित क्रेन नदी में बह गई थी। साथ जनरेटर एवं स्टील आइब्रो मशीन भी नदी में समा गई।</p>
<p><strong>बनारस में बेंच दी गई मशीनें!</strong><br />
जानकारों की मानें तो प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में मुख्य परियोजना प्रबंधक दीपक गोविल की सांठ-गांठ से कई मशीन जो विभाग में काम कर रही थीं उसे बेंच दिया गया है। इस संबंध में जानकारी के लिए मुख्य परियोजना प्रबंधक के मोबाइल पर कई बार सम्पर्क किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।</p>
<p><strong>मीटिगों में बात खर्च कम करने की, हकीकत कुछ और</strong><br />
गौरतलब है कि बीते दिनों सेतु निगम निदेशक मंडल की 178वीं बैठक में सेतुओं के निर्माण में समय की बचत, बेहतर गुणवत्ता और रख-रखाव के खर्च में कमी लाने की योजना बनी थी। पर, हकीकत इसके उलट है। भ्रष्टाचार और लापरवाह कार्यशैली को बदल कर प्रदेश के विकास में नई कार्य संस्कृति और नई ऊर्जा के साथ प्रदेश के विकास में योगदान करने वाले संजीदा प्रयासों का अभाव बरकरार है।</p>
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		<title>अब रानी लक्ष्मी बाई की धरती से मिलेगा चीन को जवाब</title>
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		<pubDate>Fri, 18 Sep 2020 09:08:00 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[ बाजार से चीनी खिलौनों का वर्चस्व खत्म करने के लिए योगी सरकार ने बनाई रणनीति गिरीश पांडेय लखनऊ। सीएम सिटी गोरखपुर की गौरी-गणेश टेरोकोटा की मूर्तियों के बाद अब शौर्य एवं संस्कार की धरती बुंदेलखंड भी चीन को जवाब देने की तैयारी में है। जवाब करारा होगा, क्योंकि यह जंग-ए-आजादी में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><em><strong> बाजार से चीनी खिलौनों का वर्चस्व खत्म करने के लिए योगी सरकार ने बनाई रणनीति</strong></em></p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/07/girish-ji1.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-21689" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/07/girish-ji1.jpg" alt="girish ji" width="100" height="137" /></a></p>
<p><strong>गिरीश पांडेय</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> सीएम सिटी गोरखपुर की गौरी-गणेश टेरोकोटा की मूर्तियों के बाद अब शौर्य एवं संस्कार की धरती बुंदेलखंड भी चीन को जवाब देने की तैयारी में है। जवाब करारा होगा, क्योंकि यह जंग-ए-आजादी में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली रानी लक्ष्मी बाई की धरती झांसी से मिलेगा। हथियार होंगे साफ्ट ट्वाय। इस तरह के खिलौने झांसी की पहचान हैं। इसी नाते वर्ष 2018 में इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फ्लैगशिप योजना एक जिला, एक उत्पाद ओडीओपी में शामिल किया गया।</p>
<p>इस उद्योग की बेहतरी के लिए काम भी शुरू हो चुका है। उद्योग की मौजूदा स्थति क्या है? इससे जुड़े लोगों की समस्याएं और उनके समाधान क्या हैं? इन समस्याओं का अगर समाधान कर दिया जाए तो इसके नतीजे क्या होंगे? इस सबकी जानकारी के लिए डायग्ननोस्टि स्टडी रीपोर्ट डीएसआर तैयार कर उस पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम विभाग एमएसएमई अमल भी कर रहा है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आत्म निर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद उनके वोकल फार लोकल के सपने को साकार करने के लिए मई में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित पहले मेगा ऑनलाइन लोन मेले इसी उद्योग से जुड़ी झांसी की उदिता गुप्ता को कारोबार के विस्तार के लिए 50 लाख रुपये का चेक भी दिया गया। प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में खिलौना उद्योग की चर्चा करने के बाद इसमें और तेजी आनी तय है।</p>
<p>मालूम हो झांसी अपने साफ्ट ट्वायज के लिए जाना जाता है। अधिकांश खिलौने दीनदयाल नगर में बनते हैं। खिलौने बनने के बाद बची चीजों से बच्चों के जूते और अन्य छोटे सामान बनते हैं। कटिंग से लेकर सिलाई, भराई, धुलाई चेकिंग और परिवहन का अधिकांश काम परम्परागत तरीके से हाथ से होता है। प्रयुक्त होने वाला कच्चा माल सिंथेटिक फाइबर, कपड़े, बटन, आंख और पॉली क्लाथ आदि दिल्ली से आता है। तैयार माल का अधिकांश बाजार भी दिल्ली ही है। अगर कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो तो लगात 20 से 25 फीसद तक घट सकती है। झांसी के खिलौनों को ब्रांड बनाकर अगर आक्रामक मार्केटिंग करने से भी इस उद्योग से जुड़े हजारों लोग को लाभ होगा।</p>
<p>सरकार की मंशा यहां ओडीओपी के तहत कॉमन फैसिलटी सेंटर सीएफसी बनाने की है। इसमें एक ही छत के नीचे डिजाइन स्टूडियो, गुणवत्ता जांचने के लिए लैब, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर होंगे। इसके अलावा इस उद्योग से जुड़े लोगों की उत्पादन क्षमता बढ़े, तैयार माल की फिनिशिंग बेहतर हो और वे गुणवत्ता और दाम में प्रतिस्पद्र्धी हों इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए उनको लेजर कटिंग मशीन, कंप्रेसर, कारडिंग फर को संवारने मशीन और आटोमेटिक टेलरिंग मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी। बाजार में किस तरह और किस डिजाइन के खिलौनों की मांग है इसके लिए उनको प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्ननोलॉजी-आईआईटी, निफ्ड और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन एंड टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी।<br />
झांसी भौगोलिक रूप से देश के बीचोबीच है। यह बुंदेलखंड का गेटवे है। रेल और सड़क से यह पूरे देश से बेहतर तरीके से जुड़ा है। झांसी में हवाईअड्डा बन जाने और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के बन जाने पर यह कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुंदेलखंड के विकास को लेकर बेहद संजीदा हैं। ऐसे में झांसी के परम्परागत खिलौना उद्योग को अगर तकनीक से जोड़ दें तो कारोबार और रोजगार की दृष्टि से इसकी संभावना बहुत बेहतर है।<br />
<strong>नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग</strong></p>
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		<title>और बेहतर इन्फ्रा से चमकेगा औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला</title>
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		<pubDate>Thu, 17 Sep 2020 20:35:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[इन्फ्रास्ट्रक्चर]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[कार्यपालक अधिकारी मयूर महेश्वरी]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>
		<category><![CDATA[हरदोई]]></category>

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		<description><![CDATA[सड़क, जल निकासी, मार्ग प्रकाश व्यवस्था का होगा उच्चीकरण हर हाल में कार्य प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित हुई 25 अक्टूबर 2020 औद्योगिक क्षेत्र की अवस्थापना सुविधायें और बेहतर करने के यूपीसीडा सीईओ ने दिये निर्देश उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता समर सिंह लखनऊ। यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला में निवेश को &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>सड़क, जल निकासी, मार्ग प्रकाश व्यवस्था का होगा उच्चीकरण</strong></li>
<li><strong>हर हाल में कार्य प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित हुई 25 अक्टूबर 2020 </strong></li>
<li><strong>औद्योगिक क्षेत्र की अवस्थापना सुविधायें और बेहतर करने के यूपीसीडा सीईओ ने दिये निर्देश</strong></li>
<li><strong>उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/sandeela.jpg"><img class="  wp-image-21934 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/sandeela.jpg" alt="sandeela" width="389" height="184" /></a>समर सिंह </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर किया जायेगा। बरसात में होने वाले जलभराव की तत्काल निकासी, सड़कों का सुदृढ़ीकरण और मार्ग प्रकाश की सुविधाओं का उच्चीकरण किया जायेगा। जिला प्रशासन और यूपीसीडा के मध्य समन्वय स्थापित कर यह सभी कार्य 25 अक्टूबर तक प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। औद्योगिक क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का विकास करने के लिए वाणिज्यिक, शैक्षणिक और आवासीय भूखण्डों का विपणन किया जायेगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर महेश्वरी ने स्थलीय निरीक्षण कर विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला का इन्फ्रास्ट्रक्चर और बेहतर किया जाय, ताकि इस क्षेत्र में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहित हो। क्षेत्रीय विकास के साथ ही नए रोजगार के अवसर सृजित हों। उन्होंने उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं का निर्धारित समय में प्राथमिकता पर निस्तारण करने के निर्देश दिये।</p>
<p>मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला के बाहरी एवं आन्तरिक नाले से बरसात में होने वाले जल भराव की निकासी के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए जिलाधिकारी हरदोई की अध्यक्षता में शीघ्र ही एक समिति बनेगी, जो कार्य योजना तैयार करेगी। आन्तरिक पानी की निकासी यूपीसीडा और बाहरी जल निकासी का कार्य सिंचाई विभाग करेगा। साथ ही औद्योगक क्षेत्र के फेज-1, फेज-2 एवं फेज-4 की सड़को की शीघ्र मरम्मत के लिए स्टीमेट तैयार कर कार्य प्रारम्भ होगा।</p>
<p>यूपीडा सीईओ ने औद्योगिक क्षेत्र के रख-रखाव के लिए उद्यमियों द्वारा एसपीवी माडल तैयार कराने के निर्देश दिये। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में पार्कों के लिए रिक्त पड़ी भूमि एवं फैक्ट्रियों के आगे खाली ग्रीन बेल्ट को नियमानुसार सम्बन्धित उद्यमियों द्वारा अपने संरक्षण में लेकर हरियाली विकसित करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये। इस प्रस्ताव का मेसर्स ज्ञान दूध, मेसर्स आईपीएल, मेसर्स स्वरूप केमिकल्स, मेसर्स श्रीगंग इंडस्ट्री, मेसर्स वरुन बेवरेज व सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन ने स्वागत किया है।</p>
<p><strong>बेहतर जलनिकासी के लिए चैनलाइज होंगे समोधा व बेहटा नाले</strong><br />
जानकारों की मानें तो सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र में बरसाती जलभराव का बड़ा कारण सिंचाई विभाग के समोधा एवं बेहटा नालों की वर्ष 2013 से सफाई न होना है। लेकिन अब यह कार्य भी जल्द ही होगा। बरसाती जलभराव की निकासी के लिए सिंचाई विभाग से शीघ्र नाला साफ कराकर चैनलाइज कराया जाएगा। बरसाती जलभराव से क्षतिग्रस्त हुए मास्टर नाले और सड़कों का अनुरक्षण कार्य भी कराया जायेगा। साथ ही बेहतर मार्ग प्रकाश के लिए सोडियम स्ट्रीट लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें लगेंगी। औद्योगिक क्षेत्र में उगी झडिय़ों आदि की साफ-सफाई मनरेगा के तहत कराई जायेगी।</p>
<p><strong>सरकार की नीतियों से कराया अवगत, लिये सुझाव</strong><br />
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उद्यमियों को उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण की विभिन्न नीतियों से अवगत कराया और उद्यमियों के सुझाव भी प्राप्त किये। औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला की अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण करने के लिए किये गये स्थलीय निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय प्रबन्धक, निर्माण खण्ड के वरिष्ठ अधिकारी और औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/mayur-maheshwari.jpg"><img class="  wp-image-21932 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/mayur-maheshwari.jpg" alt="mayur maheshwari" width="137" height="91" /></a>औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला के उद्यमियों ने जिस प्रतिबद्धता से वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान अपनी औद्योगिक इकाइयों को संचालित किया और अन्य राज्यों से वापस लौटे श्रमिकों व कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराया, वह प्रसंशनीय है।<br />
<strong>मयूर महेश्वरी, सीईओ, यूपीसीडा</strong></p></blockquote>
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