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	<title>Business Link &#187; इंडस्ट्री</title>
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	<description>Breaking News</description>
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		<title>और बेहतर इन्फ्रा से चमकेगा औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला</title>
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		<pubDate>Thu, 17 Sep 2020 20:35:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[इन्फ्रास्ट्रक्चर]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[कार्यपालक अधिकारी मयूर महेश्वरी]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>
		<category><![CDATA[हरदोई]]></category>

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		<description><![CDATA[सड़क, जल निकासी, मार्ग प्रकाश व्यवस्था का होगा उच्चीकरण हर हाल में कार्य प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित हुई 25 अक्टूबर 2020 औद्योगिक क्षेत्र की अवस्थापना सुविधायें और बेहतर करने के यूपीसीडा सीईओ ने दिये निर्देश उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता समर सिंह लखनऊ। यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला में निवेश को &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>सड़क, जल निकासी, मार्ग प्रकाश व्यवस्था का होगा उच्चीकरण</strong></li>
<li><strong>हर हाल में कार्य प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित हुई 25 अक्टूबर 2020 </strong></li>
<li><strong>औद्योगिक क्षेत्र की अवस्थापना सुविधायें और बेहतर करने के यूपीसीडा सीईओ ने दिये निर्देश</strong></li>
<li><strong>उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/sandeela.jpg"><img class="  wp-image-21934 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/sandeela.jpg" alt="sandeela" width="389" height="184" /></a>समर सिंह </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर किया जायेगा। बरसात में होने वाले जलभराव की तत्काल निकासी, सड़कों का सुदृढ़ीकरण और मार्ग प्रकाश की सुविधाओं का उच्चीकरण किया जायेगा। जिला प्रशासन और यूपीसीडा के मध्य समन्वय स्थापित कर यह सभी कार्य 25 अक्टूबर तक प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। औद्योगिक क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का विकास करने के लिए वाणिज्यिक, शैक्षणिक और आवासीय भूखण्डों का विपणन किया जायेगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर महेश्वरी ने स्थलीय निरीक्षण कर विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला का इन्फ्रास्ट्रक्चर और बेहतर किया जाय, ताकि इस क्षेत्र में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहित हो। क्षेत्रीय विकास के साथ ही नए रोजगार के अवसर सृजित हों। उन्होंने उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं का निर्धारित समय में प्राथमिकता पर निस्तारण करने के निर्देश दिये।</p>
<p>मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला के बाहरी एवं आन्तरिक नाले से बरसात में होने वाले जल भराव की निकासी के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए जिलाधिकारी हरदोई की अध्यक्षता में शीघ्र ही एक समिति बनेगी, जो कार्य योजना तैयार करेगी। आन्तरिक पानी की निकासी यूपीसीडा और बाहरी जल निकासी का कार्य सिंचाई विभाग करेगा। साथ ही औद्योगक क्षेत्र के फेज-1, फेज-2 एवं फेज-4 की सड़को की शीघ्र मरम्मत के लिए स्टीमेट तैयार कर कार्य प्रारम्भ होगा।</p>
<p>यूपीडा सीईओ ने औद्योगिक क्षेत्र के रख-रखाव के लिए उद्यमियों द्वारा एसपीवी माडल तैयार कराने के निर्देश दिये। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में पार्कों के लिए रिक्त पड़ी भूमि एवं फैक्ट्रियों के आगे खाली ग्रीन बेल्ट को नियमानुसार सम्बन्धित उद्यमियों द्वारा अपने संरक्षण में लेकर हरियाली विकसित करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये। इस प्रस्ताव का मेसर्स ज्ञान दूध, मेसर्स आईपीएल, मेसर्स स्वरूप केमिकल्स, मेसर्स श्रीगंग इंडस्ट्री, मेसर्स वरुन बेवरेज व सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन ने स्वागत किया है।</p>
<p><strong>बेहतर जलनिकासी के लिए चैनलाइज होंगे समोधा व बेहटा नाले</strong><br />
जानकारों की मानें तो सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र में बरसाती जलभराव का बड़ा कारण सिंचाई विभाग के समोधा एवं बेहटा नालों की वर्ष 2013 से सफाई न होना है। लेकिन अब यह कार्य भी जल्द ही होगा। बरसाती जलभराव की निकासी के लिए सिंचाई विभाग से शीघ्र नाला साफ कराकर चैनलाइज कराया जाएगा। बरसाती जलभराव से क्षतिग्रस्त हुए मास्टर नाले और सड़कों का अनुरक्षण कार्य भी कराया जायेगा। साथ ही बेहतर मार्ग प्रकाश के लिए सोडियम स्ट्रीट लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें लगेंगी। औद्योगिक क्षेत्र में उगी झडिय़ों आदि की साफ-सफाई मनरेगा के तहत कराई जायेगी।</p>
<p><strong>सरकार की नीतियों से कराया अवगत, लिये सुझाव</strong><br />
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उद्यमियों को उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण की विभिन्न नीतियों से अवगत कराया और उद्यमियों के सुझाव भी प्राप्त किये। औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला की अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण करने के लिए किये गये स्थलीय निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय प्रबन्धक, निर्माण खण्ड के वरिष्ठ अधिकारी और औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/mayur-maheshwari.jpg"><img class="  wp-image-21932 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/mayur-maheshwari.jpg" alt="mayur maheshwari" width="137" height="91" /></a>औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला के उद्यमियों ने जिस प्रतिबद्धता से वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान अपनी औद्योगिक इकाइयों को संचालित किया और अन्य राज्यों से वापस लौटे श्रमिकों व कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराया, वह प्रसंशनीय है।<br />
<strong>मयूर महेश्वरी, सीईओ, यूपीसीडा</strong></p></blockquote>
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		<title>देश के आर्थिक विकास में लघु उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका : आलोक रंजन</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Aug 2020 08:53:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
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		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
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		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[&#8216;सीमा&#8217; के मुख्य संरक्षक ने दी अंतरराष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस की बधाई  सरकार को लघु उद्योगों के लिए प्रभावी आर्थिक पैकेज लाना चाहिए : शैलेन्द्र मन की बात में पीएम का खिलौना उद्योग की बात करना लाखों लोगों की संजीवनी का काम करेगा : पंकज बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा) &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><em><strong>&#8216;सीमा&#8217; के मुख्य संरक्षक ने दी अंतरराष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस की बधाई </strong></em></p>
<p><em><strong> सरकार को लघु उद्योगों के लिए प्रभावी आर्थिक पैकेज लाना चाहिए : शैलेन्द्र</strong></em></p>
<p><em><strong>मन की बात में पीएम का खिलौना उद्योग की बात करना लाखों लोगों की संजीवनी का काम करेगा : पंकज</strong></em></p>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong><br />
<strong>लखनऊ।</strong> स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा) के मुख्य संरक्षक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने अंतरराष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस (30 अगस्त) की बधाई दी है। इस बाबत अपने जारी बयान में उन्होंने कहा कि लघु उद्योग दिवस प्रत्येक वर्ष 30 अगस्त को यह दिवस लघु उद्योगों को बढ़ावा देने और बेरोजगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनाया जाता है। भारत जैसे विकासशील देश के आर्थिक विकास में लघु उद्योगों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p>संस्था के अध्यक्ष शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने इस मौके पर देश के सभी लघु उद्योगों को शुभकामना देते हुए कहा कि कोरोना संकट में लघु उद्योगों के सामने विकट समस्या आ गई है। इस दिवस के माध्यम से सरकार को लघु उद्योगों के लिए प्रभावी आर्थिक पैकेज लाना चाहिए।</p>
<p>संस्था के मुख्य आर्थिक सलाहकार एवं वरिष्ठ सीए पंकज जायसवाल ने कहा कि आज मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा खिलौना उद्योग की बात करना लाखों लोगों को इस उद्यम और रोजगार से जोडऩे में संजीवनी का काम करेगा। इससे खिलौना व्यापार में चीन का प्रभुत्व धीरे-धीरे कम होता जाएगा।</p>
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		<title>एयरोस्पेस इंजीनियरिंग क्षेत्र में इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के लिए नई साझेदारी</title>
		<link>http://businesslinknews.com/new-partnership-to-set-up-incubation-center-in-aerospace-engineering-field/</link>
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		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 10:03:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>

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		<description><![CDATA[नई दिल्ली। पिछले कुछ समय से स्टार्टअप कंपनियों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इस सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के तहत कार्यरत नेशनल रिसर्च डिवेलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी) ने सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरी (एनएएल) के साथ &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> पिछले कुछ समय से स्टार्टअप कंपनियों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इस सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के तहत कार्यरत नेशनल रिसर्च डिवेलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी) ने सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लैबोरेटरी (एनएएल) के साथ हाथ मिलाया है।</p>
<p>इस नई साझेदारी के तहत दोनों संस्थान मिलकर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के उभरते क्षेत्रों से जुड़ी स्टार्टअप कंपनियों को प्रोत्साहित करने का काम करेंगे। इस पहल के अंतर्गत एयरोस्पेस क्षेत्र से संबंधित इनोवेशन/इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। यह जानकारी एनआरडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एच. पुरुषोत्तम द्वारा दी गई है। इस संबंध में सीएसआईआर-एनएएल और एनआरडीसी के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय में इस समझौते का आदान-प्रदान करते समय डीएसआईआर के सचिव एवं सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे, डीएसआईआर के संयुक्त सचिव डॉ. आर. वैधीश्वरन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।</p>
<p>इस पहल के तहत एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के क्षेत्र में स्टार्टअप कंपनियों को इन्क्यूबेशन के साथ-साथ उत्पाद एवं प्रोटोटाइप विकसित करने तथा उसे वैधता दिलाने के लिए जरूरी सलाह और समर्थन मिल सकेगा। एनआरडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा है कि दोनों संस्थानों के बीच इस साझेदारी के बाद सीएसआईआर की अन्य घटक प्रयोगशालाओं में भी इनोवेशन/इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने के रास्ते खुल सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
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		</item>
		<item>
		<title>रक्षा उद्योग का नया मैन्यूफैक्चरिंग हब बनेगा उत्तर प्रदेश</title>
		<link>http://businesslinknews.com/uttar-pradesh-the-new-manufacturing-hub-of-the-defense-industry/</link>
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		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 09:17:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>

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		<description><![CDATA[घरेलू रक्षा विनिर्माण इकाईयों को मिलेंगे रु 4 लाख करोड़ के कार्य 6 जनपदों के 5,072 हेक्टेयर क्षेत्रफल में डिफ़ेंस कॉरीडोर हो रहा है स्थापित, बुंदेलखण्ड को होगा सबसे अधिक लाभ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में यूपी का होगा विशेष योगदान लखनऊ, कानपुर, आगरा और अलीगढ़ में डिफेंस कॉरीडोर बुंदेलखण्ड के झांसी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong><em>घरेलू रक्षा विनिर्माण इकाईयों को मिलेंगे रु 4 लाख करोड़ के कार्य</em></strong></li>
<li><strong><em>6 जनपदों के 5,072 हेक्टेयर क्षेत्रफल में डिफ़ेंस कॉरीडोर हो रहा है स्थापित, बुंदेलखण्ड को होगा सबसे अधिक लाभ</em></strong></li>
<li><strong><em>रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में यूपी का होगा विशेष योगदान</em></strong></li>
<li><strong><em>लखनऊ, कानपुर, आगरा और अलीगढ़ में डिफेंस कॉरीडोर</em></strong></li>
<li><strong><em>बुंदेलखण्ड के झांसी और चित्रकूट की बदलेगी तस्वीर</em></strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्र सरकार ने 101 सैन्य उपकरणों, हथियारों और वाहनों के आयात पर 2024 तक रोक लगाई है। अब इनका निर्माण घरेलू स्तर पर किया जाएगा। इस निर्णय का सबसे अधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिलेगा। प्रदेश की रक्षा विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों के प्रोत्साहन में यह मील का पत्थर साबित होगा। उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना लखनऊ, कानपुर, आगरा, झांसी, चित्रकूट और अलीगढ़ जनपदों में की जा रही है। राज्य सरकार ने इन जनपदों के सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र को डिफेन्स कॉरिडोर में समाहित किया है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में वर्तमान में अलीगढ़, कानपुर, झांसी एवं चित्रकूट जिलों में 1,289 हेक्टेयर से भी ज्यादा भूमि रक्षा कॉरिडोर की स्थापना के लिए अधिग्रहित कर ली गई है। अलीगढ़ रक्षा कॉरिडोर में अधिग्रहित भूमि निवेशकों को आंवटित कर दी गई है। साथ ही और भूमि अधिग्रहित करने के प्रयास तेज हैं। उत्तर प्रदेश सरकार बीते वर्षों से ही घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े और कड़े कदम लगातार उठा रही है। उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना 6 जनपदों के 5,072 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जा रही है। इस कॉरीडोर का सबसे अधिक लाभ बुंदेलखण्ड को होगा। झांसी में 3,025 हेक्टेयर, कानपुर में 1,000 हेक्टेयर, चित्रकूट में 500 हेक्टेयर और आगरा में 300 हेक्टेयर भूमि पर कॉरिडोर के नोड्स स्थापित किये जा रहे हैं। इसके अलावा इस डिफेंस कॉरीडोर का विशेष हिस्सा लखनऊ और अलीगढ़ जनपदों में भी स्थापित किया जा रहा है।</p>
<p>आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारतीय नौसेना ‘नेवल इनोवशन एण्ड इण्डीजनाइजेशन आर्गनाइजेशन, एनआईआईओ‘ के अन्तर्गत ‘नेवल टेक्नोलॉजी एक्सलरेशन कॉन्सिल‘ का गठन किया। साथ ही ‘टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एक्सलेशन सेल‘ का गठन किया गया है। इस योजना का ऑनलाइन उद्घाटन 13 अगस्त 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में करेंगे। इस दौरान जनरल विपिन रावत, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम, एडीसी और प्रमुख डिफेन्स स्टाफ उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>भारतीय नौसेना के उत्तर प्रदेश डिफेन्स इण्डिस्ट्रियल कॉरिडोर में प्रतिभाग करने से उद्योग, एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप उद्योगों का खरीददारों से सीधा सम्पर्क होगा। इसके परिणामस्वरूप वे भारतीय नौसेना के जरूरतों को पूर्ण करने में सुगमता होगी। इस योजना के माध्यम से स्वदेशीकरण में सुगमता के साथ ही साथ डिफेन्स उत्पादन इको सिस्टम में और भी उद्योग जुड़ेंगे। यूपीडा ने आईआईटी, बीएचयू एवं कानपुर के सहयोग से ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स‘ की स्थापना की है, जो भारतीय नौसेना के सहयोग से उद्योग-विद्या संस्थान एवं उपभोक्ताओं के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि भारत के रक्षा उद्योग क्षेत्र में बहुत ही तेजी से बदलाव आ रहे हैं। बीते दिनों रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने ऐतिहासिक लेते हुए हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मालवाहक विमान, पारंपरिक पनडुब्बियां, तोपें, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें सहित 101 विभिन्न उपकरणों व हथियारों के आयात पर पाबंदी लगाई है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस निर्णय से अगले कुछ वर्षों में घरेलू रक्षा उद्योग को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कार्य मिलेंगे।</p>
<p>इससे पूर्व ‘मेक इन इंडिया‘ योजना के तहत देष के अन्दर उत्तर प्रदेश और तमिलनाडू राज्य में रक्षा उद्योग कॉरिडोर की घोषणा इस आषय से की गयी है कि रक्षा उत्पादन की क्षमता को प्रोत्साहित कर विदेशों पर निर्भरता कम करते हुए राष्ट्र को रक्षा क्षेत्र में भी ‘आत्मनिर्भर‘ बनाया जा सके। उत्तर प्रदेश में स्थापित रक्षा उद्योग कॉरिडोर एक ‘ग्रीन फील्ड‘ परियोजना है, जिसके तहत रक्षा उत्पादन क्षेत्र की इकाइयों को और सुदृढ़ करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अनेक प्रोत्साहन एवं सब्सिडी की व्यवस्था की है।</p>
<p>बता दें कि उत्तर प्रदेश में पहली बार फरवरी 2020 में आयोजित हुए डेफ एक्सपो-2020 में 50,000 करोड़ रुपये के एमओयू हस्ताक्षरित किये। इसके अन्तर्गत विभिन्न संस्थाओं ने प्रदेश के रक्षा क्षेत्र में निवेश करने में विशेष रुचि ली है।</p>
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		<title>दोगुने मेहनत से डिप्रेशन दूर भगायें : गणेश यादव</title>
		<link>http://businesslinknews.com/remove-depression-from-double-hard-work-ganesh-yadav/</link>
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		<pubDate>Mon, 10 Aug 2020 12:52:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। युवा एवं उद्यमी अपना डिप्रेशन अपने मेहनत को दुगुना कर भगा सकते हैं, काम की थकान उन्हें अच्छी नींद और और दोगुनी मेहनत की दुगुनी कमाई उन्हें पुन: ऊर्जावान बनाएगी। यह कहना है जापान में गोरखपुर के भारतीय मूल के उद्यमी गणेश यादव का और मौका था स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चररस एसोसिएशन (सीमा) एवं &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> युवा एवं उद्यमी अपना डिप्रेशन अपने मेहनत को दुगुना कर भगा सकते हैं, काम की थकान उन्हें अच्छी नींद और और दोगुनी मेहनत की दुगुनी कमाई उन्हें पुन: ऊर्जावान बनाएगी। यह कहना है जापान में गोरखपुर के भारतीय मूल के उद्यमी गणेश यादव का और मौका था स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चररस एसोसिएशन (सीमा) एवं जयपुरिया इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट द्वारा आयोजित वेबिनार विदेशों में भारतीयों के सफलता की गाथा में बतौर मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में बोलने का।</p>
<p>गणेश जो की जापान में 18 एकड़ में बड़ा इंजीनियरिंग कारखाना चलाते हैं, कई देशों में कंस्ट्रक्शन मशीनरी का एक्सपोर्ट करते हैं, और इनके पांच इंडियन रेस्टोरेंट हैं, ने बताया की सिर्फ 10 वीं तक पढ़ाई कर वह जापान आ गए थे और अपनी लगन और मेहनत से ही उन्होंने सब हासिल किया। मैनेजमेंट के बच्चों से संवाद में उन्होंने बोला की मेहनत का कोई विकल्प नहीं है, अगर आप अपना बिजनेस करना चाहते हैं तो वह बिजनेस आपको खुद कर सीखना चाहिए. अपने अनुभव शेयर करते हुए उन्होंने बताया की जापान में उन्होंने अपने कारखाने में स्टाफ से पहले पहुँच कर उनके कार्य करने हेतु कई सारा माहौल पहले से बना देते थे जिस कारण समान संसाधन पर उनका उत्पादन पांच गुना हो गया।</p>
<p>भारत और जापान की कार्य संस्कृति की तुलना कर उन्होंने बताया की भारत में लोग और रिश्तेदार अपने लोगों के पास यदि ज्यादे मेहनत और काम है तो कम मेहनत वाली जगह की इच्छा रखते हैं जबकि जापान में ऐसे लोगों को आप भाग्यशाली हैं ऐसे बोला जाता है, यदि भारत में लोग खुद अपने से अपनी कार्य संस्कृति सुधार लें तो पूरी दुनिया में भारत को कोई बिजनेस में पीछे नहीं कर सकता है। इस संवाद में उन्होंने छात्रों को सफलता प्राप्त करने के लिए कई सारे गुर बताये। काला नमक चावल के जापान में उत्पादन योजना के बारे में उन्होंने बताया कि अभी तो इसे तीन एकड़ में बोया है इसकी सफलता टेस्टिंग के बाद इसे 100 एकड़ में जापान में बोने की योजना है।</p>
<p>गणेश यादव को जापान से इस कार्यक्रम में जोडऩे और संयोजन का कार्य सीमा के मुख्य आर्थिक सलाहकार सीए पंकज जायसवाल और हीरालाल यादव ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अलोक रंजन ने की। संचालन डॉ रीना अग्रवाल सेंटर फॉर एमएसएमई रिसर्च, जयपुरिया इंस्टिट्यूट एवं हरजिंदर सिंह का था। कार्यक्रम को डॉ. दीपक सिंह और टिफिन उद्यम में कई शहरों में अपने स्टार्ट अप वेंचर टिफिलो से सफलता प्राप्त करने वाले उभरते उद्यमी सूरज और जापान से गणेश के अलावा विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अस्मा सुल्ताना एवं डॉ. रणदीप रकवाल ने भी संबोधित किया।</p>
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		<title>एमएसएमई: बीते कारोबारी वर्ष की रिपोर्ट में खुलासा, सिर्फ 10 प्रतिशत महिलाओं के हाथ रही लघु उद्योगों की कमान</title>
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		<pubDate>Thu, 23 Jul 2020 08:54:51 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[नई दिल्ली। बीते कारोबारी वर्ष मेँ 10 प्रतिशत महिलाओं ने कर्ज लेकर उद्योगों की कमान अपने हाथों में रखी थी, यह जानकारी बीते शुक्रवार को जारी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आई हैं। यह सर्वेक्षण नियोग्रोथ क्रेडिट ने द्वारा कराया गया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2018 में देश में 5.85 करोड़ &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> बीते कारोबारी वर्ष मेँ 10 प्रतिशत महिलाओं ने कर्ज लेकर उद्योगों की कमान अपने हाथों में रखी थी, यह जानकारी बीते शुक्रवार को जारी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आई हैं। यह सर्वेक्षण नियोग्रोथ क्रेडिट ने द्वारा कराया गया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2018 में देश में 5.85 करोड़ उद्यमी थे। इनमें 14 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं।</p>
<p>सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ, दिल्ली एनसीआर, हैदराबाद, पुणे, बेंगलुरु और अहमदाबाद में लगभग 17,000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से पूछताछ कर जानकारी प्राप्त की गई। सर्वेक्षण मुताबिक 10.8 प्रतिशत कर्ज महिलाओं द्वारा संचालित एमएसएमई इकाइयों ने लिया। इन उद्योगों में महिला या तो अकेली मालिक थी, या पार्टनर या निदेशक थी। गौरतलब है कि उद्योग लाने के महिला उद्यमियों को कम ब्याज दर पर ऋण सरकार द्वारा दिया जाता है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कि आधे से ज्यादा उद्यमियों ने पहली बार ऋण लिया। कर्ज लेने वालों में 75 प्रतिशत से ज्यादा पहली पीढ़ी के उद्योगपति शामिल थे। ऋण लेने वाले 25 प्रतिशत से ज्यादा उद्यमियों ने कहा कि ऋण लेने के बाद हमारे उद्योग में कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।</p>
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		<title>निर्णय लेने की सर्वोच्च क्षमता जरूरी : आलोक रंजन</title>
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		<pubDate>Fri, 19 Jun 2020 20:22:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[औद्योगिक विकास]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (सीमा)]]></category>

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		<description><![CDATA[सूक्ष्म एवं मझोले उद्योग सर्वाधिक संभावना वाले क्षेत्र हैं। कम पूंजी और जोखिम में सर्वाधिक लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार इसी सेक्टर में मिला है। देश की जीडीपी में इस सेक्टर का योगदान करीब 29 फीसद है। उप्र में एमएसएमई की सर्वाधिक औद्योगिक इकाईयां हैं। कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन का सर्वाधिक असर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>सूक्ष्म एवं मझोले उद्योग सर्वाधिक संभावना वाले क्षेत्र हैं। कम पूंजी और जोखिम में सर्वाधिक लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार इसी सेक्टर में मिला है। देश की जीडीपी में इस सेक्टर का योगदान करीब 29 फीसद है। उप्र में एमएसएमई की सर्वाधिक औद्योगिक इकाईयां हैं। कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन का सर्वाधिक असर इसी सेक्टर पर पड़ा, पर यही कोरोना उनके लिए स्वर्णिम अवसर भी लेकर आ रहा है। निवेशकों का भरोसा चीन से उठा है। कई निवेशक थाइलैंड, बांग्लादेश और भारत में निवेश की संभावना तलाश रहे हैं। उप्र के लिए इनको आकर्षित करने का एक सुनहरा अवसर हो सकता है। यह कहना है <strong><em>उत्तर</em> </strong><em><strong>प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन</strong> </em>का। यूपी कैडर से 1978 बैच के आईएएस अधिकारी आलोक रंजन उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव का पद संभालने के बाद 1 जुलाई 2016 को सेवानिवृत्त हुए। मुख्य सचिव रहते अपने कुशल नेतृत्व में प्रदेश के विकास को गति देने वाले आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का रिकार्ड समय में निर्माण पूरा कराया। सिविल सेवा रैंकिंग में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले श्री रंजन ने औद्योगिक विकास आयुक्त रहते हुए उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। साथ ही कृषि उत्पादन आयुक्त सहित प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन सफलता पूर्वक किया। आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए और दिल्ली विश्वविद्यालय से इकोनॉमिक्स की शिक्षा ग्रहण कर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में अपनी अनुकरणीय सेवायें दी हैं। <em><strong>स्माल इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, सीमा</strong> </em>के मुख्य संरक्षक का दायित्व संभाल रहे पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का मानना है कि प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि प्रशासनिक अमला त्वरित निर्णय ले। <em><strong>बिजनेस लिंक </strong></em>के<em> <strong>वरिष्ठ संवाददाता</strong> </em>ने औद्योगिक विकास के कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश है वार्ता के महत्वपूर्ण बिंदु।<br />
<strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/06/Alok_Ranjan-ji.gif"><img class="  wp-image-21541 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/06/Alok_Ranjan-ji.gif" alt="Alok_Ranjan ji" width="349" height="306" /></a>प्रश्न : लघु उद्योगों की बेहतरी के लिए केंद्र सरकार के विशेष वित्तीय पैकेज को आप कैसे देखते हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> हमारा औद्योगिक वातावरण पूरी तरह से स्माल और मध्यम इंडस्ट्री पर निर्भर है। उत्तर प्रदेश में इनकी सर्वाधिक संख्या है। देश की जीडीपी का करीब 29 प्रतिशत इस सेक्टर से मिलता है। ये सेक्टर रोजगार देने में सबसे आगे है। कोविड-19 महामारी की वजह से लॉकडाउन में ये उद्योग बंद हुए। अनलॉक-1.0 में अब धीरे-धीरे यह शुरू हो रहे हैं। इनके सामने समस्या प्रतिस्पद्र्धी बनकर आगे बढऩे और सुचारू संचालन की है। इसी मकसद से केंद्र सरकार ने पिछले दिनों इस सेक्टर के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत केंद्र ने लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए तीन लाख करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी दी है। यानी कि इतना क्रेडिट बैंकों या अन्य वित्तीय संस्थाओं के जरिए एमएसएमई सेक्टर की इकाईयों को मिलेगा। खुद में यह बहुत बड़ा कदम है।</p>
<p><strong>प्रश्न :चाइना से जो कंपनियां अपनी औद्योगिक इकाईयां हटा रही हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश में कैसे लाया जा सकता है?</strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> उम्मीद है कि कोरोना के बाद चीन से इन्वेस्टमेंट हटेगा। निवेशक अपना पूरा निवेश चीन में रखने को इच्छुक नहीं हैं। वे वियतनाम, थाइलैंड, बांग्लादेश और भारत में विकल्प तलाश रहे हैं। इनमें से अधिकांश निवेश उप्र में आएं इसके लिए सरकार के पास यह सुनहरा मौका है। निर्भर करता है कि तुलनात्मक रूप से प्रदेश सरकार उनको कैसा वातावरण दे रही है, राजनीतिक स्थिरता कितनी है? बुनियादी सुविधाएं और नीतियां क्या हैं। इसको देखते हुए ही वह निवेश करते हैं। इसके लिए शासन-प्रशासन में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता सर्वाधिक जरूरी है। औद्योगिक भूमि की अनुपलब्धता उप्र की बड़ी समस्या रही है। नोएडा की जमीन हो या यूपीएसआईडीसी की, वह औरों के मुकाबले महंगी पड़ती है। औद्योगिक भूमि सस्ती कैसे की जाय, इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।</p>
<p><strong>प्रश्न : उत्तर प्रदेश में बड़ा निवेश लाने में आपका कोई अनुभव?</strong></p>
<p><strong>उत्तर :</strong> जब सैमसंग को उप्र में लाने का प्रयास हो रहा था, तब उसके प्रबंधतंत्र ने बताया कि हमें तेलंगाना और तमिलनाडु भी बुला रहे हैं और वह जमीन भी बहुत सस्ती दे रहे हैं। ऐसे में त्वरित निर्णय लेकर एक रास्ता निकाला गया था और उसे कैबिनेट से मंजूर कराया गया था, जिस कारण सैमसंग का 15 हजार करोड़ का निवेश उत्तर प्रदेश में हुआ था। हमें इसी प्रकार की रणनीति अपनानी होगी। हर बड़े निवेशक से अलग-अलग बात करनी होगी। उन्हें क्या वातावरण चाहिए? क्या पॉलिसी चाहिए? ऐसे में प्रशासनिक निर्णय लेने की क्षमता बहुत आवश्यक होगी, क्योंकि पॉलिसी देने की बात आती है तो प्रशासनिक अधिकारी बाद में अपने ऊपर उंगली उठने या जांच से घबराने लगते हैं। अगर हालात ऐसे ही रहे तो हम चीन से हटने वाले निवेशकों को उप्र में नहीं ला पाएंगे। खुले मन से निर्णय लेकर निवेशकों को रियायतें और सहूलियतें देनी होंगी, जिससे वह उत्तर प्रदेश में अपना उद्योग स्थापित करें।</p>
<p><strong>प्रश्न : एमएसएमई के लिए घोषित तीन लाख करोड़ के पैकेज को कैसे देखते हैं? </strong></p>
<p><strong>उत्तर :</strong> यह पैकेज अच्छा है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में विशेष सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि अभी भी बैंकों में लोगों के प्रोजेक्ट लोन की मंजूरी के लिए लटके रहते हैं। ऐसा हुआ तो पैकेज का अधिकांश हिस्सा कागजों में ही रह जाएगा। भारत सरकार क्रेडिट गारंटी के लिए कह रही है। पर, मेरा प्रशासनिक अनुभव कहता है कि ऐसा नहीं है कि कोई लोन एनपीए हो जाएगा तो भारत सरकार उसका भुगतान करेगी। ऐसे में सरकार पड़ताल करवाती है कि लोन एनपीए क्यों हुआ? क्या बैंकों ने सही तरीके से प्रोजेक्ट रिपोर्ट का मूल्यांकन नहीं किया? अगर उसमें कोई कमी रह गई है तो यह बैंकों और उनके अधिकरियों पर सवाल खड़े करेगा। ऐसे में भरोसा कायम करना होगा। अधिकारियों को विश्वास दिलाना पड़ेगा। ये वातावरण पैदा करना पड़ेगा। तभी बैंक लोन स्वीकृत करेंगे। यदि वे घबराए हुए तरीके से काम करेंगे तो लोन मंजूर नहीं करेंगे। खासतौर से छोटे उद्योगों को तो बिल्कुल नहीं करेंगे। हमारे यहां 99 प्रतिशत माइक्रो इंडस्ट्रीज में 25 लाख से एक करोड़ की इन्वेस्टमेंट करते हैं, उन्हीं को पूंजी की सर्वाधिक जरूरत भी है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनवाने से लेकर लोन मंजूर कराने में इनको ही सर्वाधिक दिक्कत होती है। सरकार और बैंकों के सामने ये चुनौती है कि ऐसी कार्यप्रणाली बनाएं और उसे सही तरीके से लागू करें, जिससे भारत सरकार द्वारा घोषित विशेष वित्तीय पैकेज का उदï्देश्य पूरा हो सके।</p>
<p><strong>प्रश्न : निवेशकों की दृष्टिï से क्या आवश्यक है? </strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> निवेशक देखते हैं कि जिस जगह वह निवेश करने जा रहे हैं वहां इज ऑफ डूइंग बिजनेस का स्तर क्या है? स्वीकृतियां मिलने में कितना समय लगेगा। ये ऑनलाइन हैं या इनके लिए विभाग-विभाग चक्कर लगाना होगा। सिंगल विंडो सिस्टम है कि नहीं? सरकार कौन-कौन सी रियायतें दे रही है। इन्वेस्टर के मन में सबसे बड़ा डर ये होता है कि आज जिस नीति के तहत सहूलियत मिली हैं, कल को दूसरी सरकार आने पर वह नीति बदल देती है तो उसको वह सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। इससे लोग बहुत घबराते हैं। ऐसा उत्तर प्रदेश में ही नहीं, कई अन्य प्रदेशों में भी हुआ है कि एक सरकार ने किसी विशेष नीति के तहत निवेशकों को कुछ रियायतें देकर इन्वेस्टमेंट कराया। बाद में दूसरी सरकार ने वह सुविधाएं रोक दी। निवेशक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते रह गए। ये समस्या अत्यधिक गंभीर है।</p>
<p><strong>प्रश्न : आपने कई सरकारों में कार्य किया है, आप वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया की कार्यशैली को कैसे देखते हैं? </strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> जब से उत्तर प्रदेश में वर्तमान सरकार आई है, वह प्रदेश के विकास के लिए नित नए कदम उठा रही है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश अनुकूल नीतियों को लागू करने के साथ ही विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया जा रहा है। इन्वेस्टर समिट-2018 में हुए 4.68 लाख करोड़ रुपये के एमओयू और ग्राउंड बे्रकिंग सेरेमनी के दोनों संस्करणों के माध्यम से इसमें से आधे से अधिक निवेश को जमीन पर उतारना प्रदेश के विकास को और आगे ले जाएगा। उत्तर प्रदेश में पहली बार आयोजित हुए डिफेंस एक्सपो से रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगी हैं।</p>
<p><strong>प्रश्न : वैश्विक महामारी के इस दौर में उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों को आप कैसे देखते हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> नि:संदेह उत्तर प्रदेश सरकार के नेतृत्व ने कर्मयोग का अनुकरणीय उदाहरण देश ही नहीं विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया है। प्रवासी कामगारों की सुरक्षित घर वापसी हो या उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी। श्रमिकों की स्किल मैपिंग कराकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास हो या फिर प्रदेश के 25 करोड़ निवासियों को चिकित्सकीय सुविधाएं मुहैया कराने की पहल, इन सभी में उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार का प्रयास प्रसंशनीय एवं अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है।</p>
<p><strong>प्रश्न : औद्योगिक निवेश के महाकुंभ इन्वेस्टर समिट-2018 को कैसे देखते हैं?</strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> सरकार ने 4.68 लाख करोड़ के एमओयू किए हैं। अब उसकी सही स्थिति के लिए प्रशासनिक अमले को निर्णय लेना पड़ेगा। शीघ्रता से एक-एक एमओयू को अप्रूव करना होगा। तब ये पूरा इन्वेस्टमेंट धरातल पर उतरेगा। अगर ये फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग जाती रहेंगी। अनिर्णय की स्थिति होगी, तो ये फाइलों पर ही लम्बा चलता रहेगा। मैंने अपने प्रशासनिक अनुभव में देखा है कि नई पॉलिसी के बाद जब कोई प्रपोजल आता है तो विभाग अपनी-अपनी आपत्तियां करना शुरू कर देते हैं। वित्त विभाग अपनी बात कहता है, कोई दूसरा विभाग अपनी। ऐसी स्थितियों में त्वरित और प्रभावी निर्णयों से ही यह पूरा इन्वेस्टमेंट जमीन पर उतरेगा। एमओयू होना तो बहुत आसान है। पर, उनको जमीन पर उतारना उतना ही मुश्किल। ऐसे में एक समेकित निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।</p>
<p><strong>प्रश्न : स्माल इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन में आपकी नई भूमिका क्या है? </strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> ये मेरा सौभाग्य है कि प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के लिए कार्य करने वाले औद्योगिक संगठन स्माल इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (सीमा) ने मुझे अपना चीफ पैटर्न बनाया है। मेरा इसमें ये रोल रहेगा कि इनको मार्गदर्शन देता रहूं। सलाह देता रहूं। किस प्रकार उद्योगों को प्रोत्साहित किया जाए। खासतौर से लघु उद्योगों को। किस प्रकार सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ इन लघु उद्योगों तक पहुंचाया जाय? और विभिन्न औद्योगिक समस्याओं का समाधान कराने के लिए उन्हें सरकार तक पहुंचाया जाए। एक तरीके से हम पुल का काम करेंगे।</p>
<p><strong>प्रश्न : उप्र में अधिक से अधिक निवेश आए इसके लिए कोई सुझाव? </strong><br />
<strong>उत्तर :</strong> निवेश के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक पूरी प्रक्रिया त्वरित गति से पूरी करनी होगी। इसके लिए प्रशासनिक क्षमता, दक्षता व इच्छाशक्ति की अत्यधिक आवश्यकता है।</p>
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		<title>उपभोक्ता पर्यावरण पसंद, तो उद्योग अपने आप होंगे : अलोक रंजन</title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2020 20:17:37 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण]]></category>
		<category><![CDATA[पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश अलोक रंजन]]></category>
		<category><![CDATA[पृथ्वी इनोवेशन]]></category>
		<category><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरण फेन्डली बनाने के लिए साथ आये सीमा और पृथ्वी इनोवेशन्स सीमा और पृथ्वी इनोवेशन संयुक्तरूप से आयोजित कर रहा ऑनलाइन नेचुरल कार्निवॉल 04-10 जून तक सीमा और पृथ्वी मनाएंगे कार्निवॉल मनाएंगे- शैलेन्द्र श्रीवास्तव बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऑनलाइन वेबिनार में स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चररस एसोसिएशन (सीमा) एवं &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरण फेन्डली बनाने के लिए साथ आये सीमा और पृथ्वी इनोवेशन्स</strong></li>
<li><strong>सीमा और पृथ्वी इनोवेशन संयुक्तरूप से आयोजित कर रहा ऑनलाइन नेचुरल कार्निवॉल </strong></li>
<li><strong>04-10 जून तक सीमा और पृथ्वी मनाएंगे कार्निवॉल मनाएंगे- शैलेन्द्र श्रीवास्तव</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/06/seema.jpg"><img class="  wp-image-21486 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/06/seema.jpg" alt="seema" width="419" height="237" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऑनलाइन वेबिनार में स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चररस एसोसिएशन (सीमा) एवं पृथ्वी इनोवेशन ने उद्यमियों, छात्रों एवं शिक्षकों के बीच पर्यावरण को लेकर संवेदनशीलता विकसित करने के लिए एक एमओयू किया और आगामी पांच दिनों के कार्निवॉल महोत्सव की शुरुआत की। इस कार्निवॉल का उद्देश्य कम से कम 500 लोगों को पर्यावरण सुरक्षा को लेकर ट्रेनिंग देना है, आज पहले दिन पृथ्वी इनोवेशन की तरफ से 100 लोगों को ट्रेनिंग दी गई।</p>
<p>कार्निवॉल के पहले दिन इसके प्रमुख अतिथि सीमा के सरंक्षक एवं पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश अलोक रंजन और मुख्य वक्ता पीके सेठ एवं व्यंकटेश दत्ता रहे। इस अवसर पर सीमा के संरक्षक अलोक रंजन ने कहा, जब तक उद्योग एवं विकास का मॉडल सतत विकास की अवधारणा पर आधारित नहीं होगा, तब तक हम प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते रहेंगे। इसलिए यह आवश्यक है कि उद्योग एवं औद्योगिक संगठन सतत विकास के सिद्धांतों को अपने व्यवहार में लायें। आज के मौजूदा बाजार आधारित इकॉनमी में यह तभी संभव होगा जब उपभोक्ता पर्यावरण प्रेमी हो, उद्यम खुद उसका अनुकरण करते हुए नेचर फे्रंडली हो जायेंगे क्योंकि मौजूदा बाजार का नियम है जहां ग्राहक वहां उद्यम।</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा) एवं पृथ्वी इनोवेशन के एमओयू हस्ताक्षर से हुई जिसे सीमा की तरफ से महासचिव हरजिंदर सिंह एवं उपाध्यक्ष सीए पवन तिवारी ने किया तथा पृथ्वी इनोवेशन की तरफ से अनुराधा गुप्ता ने किया। इस मौके पर सीमा के अध्यक्ष शैलेन्द्र श्रीवास्तव एवं टीम पृथ्वी ने पांच दिनों तक लगातार चलने वाले कार्निवॉल महोत्सव के उद्देश्यों की रूप रेखा प्रस्तुत किया और कैसे इसे उत्तर प्रदेश के सभी औद्योगिक मंडलों में उसे ग्रीन औद्योगिक मंडल में बदला जा सकता है उसकी रूप रेखा प्रस्तुत की जिसमें प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण पर काम करने वाली संस्था पृथ्वी इनोवेशन की प्रमुख भूमिका रहेगी।</p>
<p>कार्यक्रम में बोलते हुए वायु एवं जल के प्रदूषण के कारण एवं निवारण पर चर्चा की गई और खासकर इस बात को रेखांकित किया गया कि नदियों के हजारों साल के अस्तित्व पर संकट इन्ही 200 सालों में आया है जबसे औद्योगिक क्रांति का युग शुरू हुआ, अंधाधुंध औद्योगिक विकास में हम वायु एवं जल से समझौता कर बैठे और अपने हजारों साल के आस्तित्व को संकट में दिया। कोरोना तो अभी एक प्राकृतिक आपदा का एक प्रकार है जो पारिस्थितिकीय संतुलन के छेड़छाड़ का नतीजा है, हम नहीं सुधरे तो ऐसी ही प्राकृतिक आपदाएं पृथ्वी पर जीवन के आस्तित्व को खतरे में डाल देंगी। कार्यक्रम को पीके सेठ एवं व्यंकटेश दत्ता ने भी संबोधित किया।</p>
<p>कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 12 लोगों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सीएमए नेन्सी गुप्ता ने एवं आयोजन स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चररस एसोसिएशन (सीमा) एवं पृथ्वी इनोवेशन ने किया।</p>
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		<title>दो दशक में 97 फीसद पलायन का जिम्मेदार कौन?</title>
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		<pubDate>Thu, 21 May 2020 21:22:50 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[जिम्मेदार हैं तो कांग्रेस, सपा और बसपा के ये घडिय़ाली आंसू क्यों योगी सरकार प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित, ससम्मान वापसी के साथ उनके रोजगार को लेकर भी फिक्रमंद कोरोना के इस अभूतपूर्व संकट के दौरान प्रवासी श्रमिकों एवं कामगारों को लेकर राजनीति चरम पर है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में लॉकडाउन &#8230;]]></description>
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<li><strong>जिम्मेदार हैं तो कांग्रेस, सपा और बसपा के ये घडिय़ाली आंसू क्यों</strong></li>
<li><strong>योगी सरकार प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित, ससम्मान वापसी के साथ उनके रोजगार को लेकर भी फिक्रमंद</strong></li>
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<figure id="attachment_21287" style="width: 108px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/girish-ji.jpeg"><img class="  wp-image-21287" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/girish-ji.jpeg" alt="girish ji" width="108" height="158" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>गिरीश पांडेय</strong></figcaption></figure>
<p>कोरोना के इस अभूतपूर्व संकट के दौरान प्रवासी श्रमिकों एवं कामगारों को लेकर राजनीति चरम पर है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुआई में लॉकडाउन के पहले चरण से ही श्रमिकों के ससम्मान और सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहें हैं वहीं कुछ दिनों से अपनी असली-नकली बसों के जरिए कांग्रेस प्रदेश इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। सपा और बसपा कमोबेश यही काम ट्वीटर पर कर रहे हैं।</p>
<p>इस आरोप-प्रत्यारोप से दीगर पलायन से जुड़ी समस्या का एक और पहलू भी है। क्या वजह है कि उप्र के लोग इतनी बड़ी संख्या में घर-परिवार, नाते-रिश्तेदार को छोड़ अपनी जवानी खपाने दूसरे प्रदेशों के बड़े शहरों में जाते हैं? आजादी के इतने वर्षों के बाद भी देश की सबसे उर्वर भूमि (इंडो गंगेटिक बेल्ट) गंगा, यमुना और घाघरा जैसी बड़ी नदियों, वैविध्यपूर्ण जलवायु और प्रचुर मानव संसाधन होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर क्यों नहीं उपलब्ध हैं? इसके लिए दोषी कौन है? कुछ आंकड़ों से यह तस्वीर साफ हो जाएगी।</p>
<p>उप्र से पिछले दो दशकों में 20 से 29 वर्ष की उम्र के लोगों का पलायन 97 फीसद बढ़ा है। यही किसी व्यक्ति की सर्वाधिक उत्पादक उम्र होती है। इसी उम्र में वह घर-परिवार, समाज, प्रदेश और देश को अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकता है। त्रासदी यह कि इसी समयावधि में उप्र से पलायन की यह दर पड़ोसी राज्य बिहार की तुलना में दोगुनी है। आंकड़े खेतीबाड़ी से जुड़ी देश की सबसे बड़ी संस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के हैं।</p>
<p>आईसीएआर द्वारा प्रकाशित रिसर्च जनरल डबलिंग फार्मर इनकम स्ट्रेटजी ऑफ उत्तर प्रदेश में इसका जिक्र है। गौर करने लायक है कि पिछले दो दशकों के दौरान प्रदेश में किनकी सत्ता थी। साथ ही आजादी के बाद प्रदेश में सर्वाधिक समय तक कौन सत्ता में रहा। हर कोई जानता है कि सर्वाधिक समय तक प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस रही है और पिछले दो दशकों में अधिकांश समय तक सपा और बसपा ही सत्ता पर काबिज रहीं। फिर भी अगर यहां से लोग रोजी-रोटी की तलाश में बाहर जाते रहे तो इसका दोषी कौन?</p>
<p>संबंधित दलों के प्रबुद्ध लोग जरूर इस आंकड़े से वाकिफ होंगे। अगर नहीं है तो ये उनके लिए शर्म की बात है। शर्त यह है कि अगर उनके पास शर्म बची हो। ऐसे में कोरोना के संकट के कारण महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा के बड़े शहरों में अपने सपनों को पूरा करने के लिए जो लोग गये हैं उनके संकट से भी जरूर वाकिफ होंगे। फिर पहले लॉकडाउन के समय से ही उनको इसका आभास क्यों नहीं हुआ? क्यों वे शुतुरमुर्ग की तरह इस संकट को बढऩे की प्रतीक्षा कर रहे थे? दिल्ली को छोड़ इनमें से सभी राज्यों में कांग्रेस सत्ता में साझीदार है। सवाल उठता है कि कांग्रेस ने तब तक का इंतजार क्यों किया जब प्रवासी सडक पर आ गये। जेठ की तपती धूप में वे भूख-प्यास से बेहाल होने लगे। सडकों पर कुचलकर वे मरने लगे। क्या कांग्रेस अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए इसी समय की प्रतीक्षा कर रही थी।</p>
<p>लॉकडाउन के पहले ही चरण में राजधानी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लाखों की संख्या में श्रमिक सडक पर आ गये तो कांग्रेस सहित अन्य दल क्या कर रहे थे? कोटा और राजस्थान की समृद्धि में योगदान देने वाले हजारों बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने क्या किया? जब पानी सर के ऊपर से गुजर गया तो सोचा कि बहती गंगा में डुबकी लगा कर पुण्य कमा लिया जाये। आने वाले समय में जनता उससे ये सवाल जरूर पूछेगी।</p>
<p>जहां तक भाजपा खास कर उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात है तो वह पहले दिन से ही प्रवासी मजदूरों से होने वाली इस समस्या और इससे उत्पन्न समस्याओं एवं चुनौतियों के प्रति संजीदा थे। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से अप्रैल के अंत में दिन-रात एक कर चार दिनों में चार लाख से अधिक श्रमिकों की वापसी, कोटा से 12 हजार बच्चों और प्रयागराज से 10 हजार बच्चों की वापसी इसका सबूत है। यही नहीं अब तक 1000 से अधिक ट्रेनों और बसों के जरिये करीब 22 लाख से अधिक लोगों की घर वापसी हो चुकी है। वह भी पूरी सुरक्षा और सम्मान से। हर आने वाले को उसकी दक्षता के अनुसार वह स्थानीय स्तर पर रोजी-रोटी की भी चिंता कर रहे हैं। बावजूद इसके इतनी घटिया राजनीति का कोई औचित्य नहीं।</p>
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		<title>&#8216;सीमा&#8217; के मुख्य संरक्षक बनें पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन</title>
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		<pubDate>Wed, 20 May 2020 20:47:21 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव ने दी स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चर्रस एसोसिएशन, सीमा से जुडऩे की स्वीकृति कुटीर एवं लघु उद्योगों के उत्थान में &#8216;सीमा&#8217; अब पहले से और अधिक प्रभावी भूमिका निभायेगा : शैलेन्द्र श्रीवास्तव बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चर्रस एसोसिएशन, सीमा के मुख्य संरक्षक &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव ने दी स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चर्रस एसोसिएशन, सीमा से जुडऩे की स्वीकृति</strong></li>
<li><strong> कुटीर एवं लघु उद्योगों के उत्थान में &#8216;सीमा&#8217; अब पहले से और अधिक प्रभावी भूमिका निभायेगा : शैलेन्द्र श्रीवास्तव</strong></li>
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<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/alok-ranjan.jpg"><img class=" size-full wp-image-21427 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/alok-ranjan.jpg" alt="alok ranjan" width="258" height="264" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चर्रस एसोसिएशन, सीमा के मुख्य संरक्षक के रूप में संगठन से जुड़े हैं। पूर्व मुख्य सचिव की स्वीकृति मिलने के बाद एसोसिएशन के सदस्यों और पदाधिकारियों में खुशी और उत्साह की लहर है।</p>
<p>सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के उत्थान के लिये प्रयत्नशील स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चर्रस एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि उत् तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव का मुख्य संरक्षक बनने से एसोसिएशन अब और प्रभावी रूप से कार्य कर सकेगा। संगठन के सदस्य औद्योगिक इकाईयों सहित प्रदेश सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग की विभिन्न समस्याओं को दूर करने में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन जी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।</p>
<p>उन्होंने बताया उनके लम्बे प्रशासनिक अनुभव से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों का उत्थान करने वाली विभिन्न योजनायें, कार्यक्रम और नीतियों आदि से देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इस क्षेत्र के उत्थान में क्रान्तिकारी परिवर्तन देखने को मिलेंगे।</p>
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