<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Business Link &#187; बिज़नेस</title>
	<atom:link href="http://businesslinknews.com/category/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a5%9b%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b8/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://businesslinknews.com</link>
	<description>Breaking News</description>
	<lastBuildDate>Sat, 15 Apr 2023 02:02:46 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=4.1.26</generator>
	<item>
		<title>औद्योगिक कामगारों के लिये खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में कम होकर रही 5.63 प्रतिशत</title>
		<link>http://businesslinknews.com/retail-inflation-declined-to-5-63-percent-in-august-for-industrial-workers/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/retail-inflation-declined-to-5-63-percent-in-august-for-industrial-workers/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2020 11:20:32 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=22113</guid>
		<description><![CDATA[नयी दिल्ली। कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होने से औद्योगिक कामगारों के लिये खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त महीने में कम होकर 5.63 प्रतिशत रह गयी। एक साल पहले इसी महीने में यह 6.31 प्रतिशत थी। श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘सालाना आधार पर सभी जिंसों की मुद्रास्फीति इस साल अगस्त में 5.63 प्रतिशत &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<div class="fullstorydivstorycomment">
<p><strong>नयी दिल्ली।</strong> कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होने से औद्योगिक कामगारों के लिये खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त महीने में कम होकर 5.63 प्रतिशत रह गयी। एक साल पहले इसी महीने में यह 6.31 प्रतिशत थी। श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘सालाना आधार पर सभी जिंसों की मुद्रास्फीति इस साल अगस्त में 5.63 प्रतिशत रही। एक महीने पहले यानी जुलाई 2020 में यह 5.33 प्रतिशत और एक साल पहले यानी अगस्त 2019 में यह 6.31 प्रतिशत थी।’’</p>
</div>
<p id="pstory" class="fulstorytext">खाद्य समूह की महंगाई दर अगस्त महीने में 6.67 प्रतिशत रही। यह पिछले महीने जुलाई में 6.38 प्रतिशत और एक साल पहले अगस्त 2019 में 5.10 प्रतिशत थी। औद्योगिक कामगारों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आईडब्ल्यू) अगस्त 2020 में दो अंक बढ़कर 338 अंक रहा। प्रतिशत के हिसाब से पिछले माह के मुकाबले यानी जुलाई -अगस्त के बीच इसमें 0.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले इसी माह में 0.31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।</p>
<p>श्रम मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार, मौजूदा सूचकांक में सर्वाधिक तेजी खाद्य समूह से आयी है। इसका कुल बदलाव में योगदान (+) 1.14 प्रतिशत रहा।<br />
जिंसों के आधार पर चावल, सरसों तेल, दूध (भैंस), हरी मिर्च, प्याज, बैंगन, गाजर, फ्रेंच बीन्स, लौकी, हरा धनिया पत्ता, भिंडी, पालक, परवल, आलू, केला, आम (पका), चाय (रेडीमेड), फूलों की माला आदि के कारण सूचकांक में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, दूसरी तरफ गेहूं, गेहूं आटा, ताजी मछली, बकरे का मांस, पाल्ट्री (चिकेन), टमाटर, अमरूद आदि सस्ता होने से सूचकांक में तेजी पर अंकुश लगा।</p>
<p>केंद्र के स्तर पर सूचकांक में कोयंबटूर में सर्वाधिक नौ अंक की वृद्धि हुई। उसके बाद सलेम (सात अंक) और मदुरई (छह अंक) का स्थान रहा। आंकड़ों के अनुसार तीन केंद्रों में 5-5 अंक, तीन केंद्रों में 4-4 अंक, 12 केंद्रों में 3-3 अंक, 14 केंद्रों पर 2-2 अंक और 16 केंद्रों में 1-1 अंक की वृद्धि हुई। इसके विपरीत लाबाक- सिलचर में चार अंक की गिरावट आयी। इसके अलावा तीन केंद्रों में 2-2 अंक और आठ केंद्रों में 1-1 अंक की गिरावट आयी। शेष 15 केंद्रों में सूचकांक स्थिर रहे।</p>
<p>कुल 31 केंद्रों का सूचकांक आखिल भारतीय सूचकांक से अधिक है, जबकि 47 केंद्रों में यह आखिल भारतीय स्तर से नीचे है। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा, ‘‘सीपीआई-आईडब्ल्यू (रहन-सहन की लागत) में वृद्धि का संगठित क्षेत्र में काम करने वाले औद्योगिक कामगारों के अलावा सरकारी कामगारों के वेतन/मजदूरी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुख्य रूप से चावल, आलू, बैंगन, प्याज आदि के दाम बढ़ने से उपभोक्ता मूल्य का सालाना सूचकांक बढ़ा है।’’</p>
<p>सरकारी कामगारों और पेंशनभोगियों के लिये महंगाई भत्ते के निर्धारण में सीपीआई-आईडब्ल्यू मानक है। श्रम मंत्रालय से संबद्ध कार्यालय श्रम ब्यूरो देश भर में 78 औद्योगिक केंद्रों के 289 बाजारों से चुनिंदा वस्तुओं की खुदरा कीमतों के आंकड़े जमा करता है। इस आंकड़े के आधार पर हर महीने सीपीआई-आईडब्ल्यू की गणना की जाती है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/retail-inflation-declined-to-5-63-percent-in-august-for-industrial-workers/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मणिपुर की महिला ने कमल के डंठल से धागा और कपड़ा बनाया, अब बना रही मास्क</title>
		<link>http://businesslinknews.com/manipur-woman-made-thread-and-cloth-from-lotus-stalk-now-making-masks/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/manipur-woman-made-thread-and-cloth-from-lotus-stalk-now-making-masks/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2020 10:30:35 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=22074</guid>
		<description><![CDATA[इम्फाल। मणिपुर के बिसेनपुर जिले की 27 वर्षीय एक महिला अन्वेषक ने कमल के डंठल से धागा और कपड़ा बनाया है और अब उसी पौधे के डंठल से मास्क बनाने का अनोखा काम कर रही है। राज्य की प्रसिद्ध लोकतक झील के पास थंगा टोंगब्रम इलाके की निवासी टोंगब्रम बिजयशांति ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इम्फाल।</strong> मणिपुर के बिसेनपुर जिले की 27 वर्षीय एक महिला अन्वेषक ने कमल के डंठल से धागा और कपड़ा बनाया है और अब उसी पौधे के डंठल से मास्क बनाने का अनोखा काम कर रही है। राज्य की प्रसिद्ध लोकतक झील के पास थंगा टोंगब्रम इलाके की निवासी टोंगब्रम बिजयशांति ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वह 15 महिलाओं के साथ इस परियोजना में शामिल हैं और 20 और महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं।</p>
<p>लोकतक झील में बड़ी संख्या में कमल के फूल उगते हैं। बिजयशांति ने कहा कि उसने 2018-19 में अपने कारोबार को शुरु करने के लिए कमल के तने से धागा और कपड़ा बनाया। उसके उत्पाद को गुजरात प्रयोगशाला में भेजा गया जिसने इसके लिए हरी झंडी दे दी। वनस्पति विज्ञान में स्नातक शांति ने कहा, ‘‘मैंने ज्यादातर इंटरनेट से ही उत्पादन पद्धति के बारे में जाना और मेरे एक शिक्षक ने मुझसे इसे जीविका का स्रोत बनाने के लिए कहा तो 2017-18 में यह काम शुरु कर दिया।”</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रडियो कार्यक्रम में बिजयशांति के प्रयासों की सराहना की। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने ट्वीट कर बिजयशांति के डंठल से धागा और कपड़ा बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ट्वीट किया, “मन की बात में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमल की डंठल से धागा बनाने वाली मणिपुर की बिजयशांति की सराहना की। उनके प्रयासों ने कमल की खेती और वस्त्र उद्योग के नए आयाम खोल दिए हैं।” कमल के डंठल से बने कपड़ों की विदेशों में बहुत मांग है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/manipur-woman-made-thread-and-cloth-from-lotus-stalk-now-making-masks/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>कृष्णकुमार नटराजन, परिवार ने माइंडट्री के 4.66 लाख शेयर बेचे</title>
		<link>http://businesslinknews.com/krishnakumar-natarajan-family-sold-4-66-lakh-shares-of-mindtree/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/krishnakumar-natarajan-family-sold-4-66-lakh-shares-of-mindtree/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2020 09:55:45 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=22061</guid>
		<description><![CDATA[नयी दिल्ली।  माइंडट्री के सह-संस्थापक कृष्णकुमार नटराजन और उनके परिवार ने कंपनी के 4.66 लाख से अधिक शेयर बेच दिए हैं। इस तरह कंपनी में उनकी सामूहिक हिस्सेदारी घटकर 2.01 प्रतिशत रह गई है। शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि कृष्णकुमार एन, उनकी पत्नी अकीला कृष्णकुमार तथा पुत्र सिद्धार्थ ने 15 &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<div class="fullstorydivstorycomment">
<p><strong>नयी दिल्ली।</strong>  माइंडट्री के सह-संस्थापक कृष्णकुमार नटराजन और उनके परिवार ने कंपनी के 4.66 लाख से अधिक शेयर बेच दिए हैं। इस तरह कंपनी में उनकी सामूहिक हिस्सेदारी घटकर 2.01 प्रतिशत रह गई है। शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि कृष्णकुमार एन, उनकी पत्नी अकीला कृष्णकुमार तथा पुत्र सिद्धार्थ ने 15 से 23 सितंबर के दौरान कंपनी के शेयरों की बिक्री की। इससे कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 2.29 प्रतिशत से घटकर 2.01 प्रतिशत रह गई है।</p>
</div>
<p id="pstory" class="fulstorytext">इससे पहले इसी महीने शेयर बाजारों को दी गई एक अन्य सूचना में कहा गया था कि नटराजन और उनके परिवार ने 30 अप्रैल से 14 सितंबर के दौरान 42 लाख शेयर बेचे हैं। उस समय उनकी हिस्सेदारी घटकर 2.29 प्रतिशत रह गई थी। सूचना में कहा गया है कि कृष्णकुमार नटराजन के पास कंपनी के 1.96 प्रतिशत शेयर थे। उन्होंने इसमें से 2.85 लाख शेयर बेचे हैं। अब कंपनी में उनकी हिस्सेदारी घटकर 1.79 प्रतिशत रह गई है।</p>
<p>इसी तरह अकीला ने 1.32 लाख शेयर बेचे हैं। कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 0.19 प्रतिशत से घटकर 0.11 प्रतिशत रह गई है। सिद्धार्थ कृष्ण कुमार ने 49,405 शेयर बेचे और करीब 1,000 शेयर खरीदे। अब कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 0.10 प्रतिशत है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/krishnakumar-natarajan-family-sold-4-66-lakh-shares-of-mindtree/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>एमएसएमई चाहे स्वतंत्र स्टॉक एक्सचेंज</title>
		<link>http://businesslinknews.com/whether-msme-independent-stock-exchange/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/whether-msme-independent-stock-exchange/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2020 09:31:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=22009</guid>
		<description><![CDATA[पंकज जायसवाल एमएसएमई सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है, एमएसएमई की वर्ष 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 6.33 करोड़ हैं, और उसमें से 6.08 करोड़ लगभग 95.98 फीसदी एमएसएमई एकल व्यवसाय में हैं, यह दर्शाता है कि एमएसएमई द्वारा कॉर्पोरेट फॉर्म या अन्य संगठित रूप बहुत कम पसंद किये जा रहें &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg"><img class="alignnone  wp-image-21888" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg" alt="pankaj sir copy" width="128" height="134" /></a></p>
<p><strong>पंकज जायसवाल</strong></p>
<p>एमएसएमई सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है, एमएसएमई की वर्ष 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल 6.33 करोड़ हैं, और उसमें से 6.08 करोड़ लगभग 95.98 फीसदी एमएसएमई एकल व्यवसाय में हैं, यह दर्शाता है कि एमएसएमई द्वारा कॉर्पोरेट फॉर्म या अन्य संगठित रूप बहुत कम पसंद किये जा रहें हैं और यही कारण है की इस सेक्टर की एक बहुत बड़ी संख्या अनमैप्ड और अपंजीकृत हैं।</p>
<p>भारत में यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है क्योंकि यह अन्त्योदय के सिद्धांतों के अनुसार अंतिम छोर के भारतीय के विकास में योगदान देती है। अपनी एक विशाल वितरित उपस्थिति के साथ यह करीब करीब 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देती है और अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में जीडीपी में 29 फीसदी का योगदान है तो जीवीए में 31.83 फीसदी का योगदान है और निर्यात में 48.10 फीसदी का योगदान देती है।</p>
<p>इतना सब होने के बावजूद भी इस सेक्टर की सबसे बड़ी चिंता इसका बड़ी संख्या अनमैप्ड और अपंजीकृत होना है. इसमें बड़ी संख्या में लोग एकल व्यवसाय में हैं और लगातार पूंजीगत नकदी संकट से जूझते रहते हैं चाहे वह कार्यशील पूँजी हो या स्थाई पूंजी हो। जबकि इनके मुकाबले बड़े उद्यम जो अर्थव्यवस्था में उतना वितरित योगदान नहीं देते हैं उनके लिए कार्यशील पूँजी एवं स्थाई पूंजी की उपलब्धता अधिक है।</p>
<p>एक बड़े संस्थागत प्रयास के रूप में इनके लिए पूँजी बाजार को आकर्षक बनाना जरुरी है जिस कारण ये व्यवसाय के अनौपचारिक फॉर्म छोड़कर औपचारिक फॉर्म में आये और जो बड़ी समस्या इनके अनमैप और अपंजीकृत होने की है वह भी दूर किया जा सके। इस समस्या को एमएसएमई के लिए समर्पित स्टॉक एक्सचेंज बनाकर दूर किया जा सकता है। आज की तारीख में देश की दो बड़ी स्टॉक एक्सचेंज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपनी व्यवस्थाओं के अधीन एमएसएमई के लिए अलग से प्रकोष्ठ खोले हुए हैं लेकिन यह बड़े बरगद के नीचे छोटे पेड़ों के न फूलने फलने लायक परिस्थिति बनती है।</p>
<p>एमएसएमई मिनिस्टर नितिन गड़करी ने भी कुछ माह पहले राष्ट्रीय एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज बनाने की बात कर रहे थे लेकिन वह एक स्वतंत्र स्टॉक एक्सचेंज के बजाय इन बड़े बरगद रूपी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के अधीन ही बात कर रहे थे। हालाँकि उनके द्वारा एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज के बारे में चिन्तन भी एक अच्छी बात है. बकौल नितिन गड़करी सरकार विचार कर रही है एमएसएमई फंड बना के एमएसएमई को 15 फीसदी इक्विटी देने की जो लिस्टिंग कराना चाहते हैं और जब वे 2 से 3 वर्षों में इन एक्सचेंजों के माध्यमों से पूंजी जुटाते हैं या जब उनके शेयर की कीमतें बढेंगी तो सरकार भी अपनी इक्विटी बेच उस पैसे को एम्एसएमई में पुनर्निवेश करेगी।</p>
<p>एमएसएमई को अगर लम्बी अवधी के हिसाब से पूंजीगत मजबूती देनी है और लेवल प्लेयर बनाना है तो उन्हें स्टॉक एक्सचेंज की मजबूती देनी पड़ेगी लेकिन यह तब तक संभव नहीं है जब तक एमएसएमई का एक स्वतंत्र स्टॉक एक्सचेंज ना हो बजाय प्रकोष्ठ बनाकर और ईसके लिए सबसे मुफीद जगह होगी कानपुर, क्योंकि पुरे देश के करीब १५% एमएसएमई यूपी से आते हैं और बिहार को जोड़ दें तो करीब एक चौथाई इसी दोनों प्रदेश से हैं। मुंबई बड़े उद्यम का प्रतिनिधि और यूपी एमएसएमई का प्रतिनिधि पूंजीबाजार में करे तो भारत का आर्थिक संतुलन बनाया जा सकता है।</p>
<p>हालाँकि वर्तमान व्यवस्था में भी छोटी कंपनियां भी स्टॉक एक्सचेंजों में खुद को सूचीबद्ध कर सकती हैं हैं, लेकिन आमतौर पर वे बीएसई और एनएसई की पात्रता मानदंडों को पूरा करने में असक्षम होती हैं। दुनिया भर के लगभग सभी प्रमुख पूंजी बाजारों ने भी एमएसएमई सेगमेंट के लिए एक अलग एक्सचेंज की आवश्यकता महसूस की है। 20 से अधिक देश अलग एसएमई बाजार संचालित करते हैं। बीएसई और एनएसई ने भी जो एमएसएमई के लिए अपना प्लेटफॉर्म लॉन्च किया उसके तहत सूचीबद्ध एमएसएमई बाद में बिना आईपीओ के ही शेयर बाजार के मेन बोर्ड में जा सकती हैं। यह सुविधा एमएसएमई आईपीओ के लिए एक नया रास्ता हैं और बड़ी कम्पनियों की तुलना में न्यूनतम अनुपालन और लागत के साथ लिस्टिंग का अवसर प्रदान करते हैं।</p>
<p>एम्एसएमई एक्सचेंज की रूपरेखा पहली बार 2008 में सेबी द्वारा सोचा गया था और इस दिशा में एक प्रमुख कदम जनवरी 2010 में एमएसएमई के लिए प्रधान मंत्री टास्क फ़ोर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट थी, जिसमें एमएसएमई एक्सचेंज की स्थापना की सिफारिश की गई थी। जिसके बाद ही 2012 में, बीएसई और एनएसई में अलग प्लेटफार्म की स्थापना की गई।</p>
<p>एमएसएमई लिस्टिंग न केवल कंपनियों को लाभ प्रदान करेंगी बल्कि निवेशकों को भी लाभ देंगी,साथ ही प्राइवेट इक्विटी निवेशकों के लिए एक निकास मार्ग प्रदान करने के साथ-साथ ESOP होल्डिंग कर्मचारियों को तरलता देंगी। इनकी लिस्टिंग ग्राहकों, आपूर्तिकर्ताओं, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और मीडिया के बीच इनकी सार्वजनिक छवि मजबूत करेंगी जिससे इन्हें कई तरह के लाभ मिलेंगे।</p>
<p>स्वतंत्र एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज के स्थापना की आवश्यकता के मध्य आइये जानते हैं ये बीएसी या एनएसई में वर्तमान व्यवस्था कैसे काम करती हैं। जैसा कि हम जानते हैं, बीएसई और एनएसई प्लेटफॉर्म, जहां कंपनियां अपने शेयर को लिस्ट करती है, आमतौर पर &#8220;मुख्य बोर्ड&#8221; के रूप में जानी जाती हैं। यह मंच प्राथमिक मंच है जहां आईपीओ होता है। और इसके लिए सख्त पात्रता मानदंड हैं, जबकि इनके एमएसएमई प्रकोष्ठ हेतु पात्रता मानदंड इतने कठिन नहीं हैं। जैसे की ट्रैक रिकॉर्ड, लागत, कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानदंड, पेड अप पूंजी, न्यूनतम आवंटी समेत रिपोर्टिंग आवश्यकताओं और लिस्टिंग के लिए समय सीमा की आवश्यकता में काफी रियायत दी गई है।</p>
<p>विश्व स्तर पर, आईपीओ बाजार ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया और मोबाइल प्रौद्योगिकी फर्मों के साथ एक नई शुरुआत कर रहा है। जबकि भारत में ऐसा नहीं हो रहा कुछेक अपवाद को छोड़, यहाँ स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, पेटीएम और इनमोबी जैसे स्टार्टअप स्टॉक एक्सचेंज की जगह निजी इक्विटी निवेशकों के दरवाजे खटखटा रहे हैं । ये कंपनियां भारत में सूचीबद्ध नहीं है लेकिन विदेशों में सूचीबद्ध हैं। भारत में ऐसे कई स्टार्टअप और एमएसएमई हैं जिन्हें ग्रोथ कैपिटल की जरूरत है। बड़े स्टार्टअप तो आगे की पूंजी के लिए निजी इक्विटी निवेशकों को टैप कर सकते हैं, लेकिन छोटे लोगों और एमएसएमई के पास वर्तमान में पूंजी जुटाने के लिए सीमित विकल्प हैं। उनके लिए ही नहीं केवल, निवेशकों के लिए भी समर्पित एमएसएमई स्टॉक एक्सचेंज एक सकारात्मक कदम होगा, क्योंकि उन्हें भी ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बनने का अवसर मिलता है। यदि ऐसा होता है तो एसएमई प्लेटफॉर्म स्टार्टअप को पूंजी जुटाने के लिए एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरेगा और यहां तक कि स्टार्ट-अप निवेशकों को जल्दी बाहर निकलने का अधिक मौका मिलेगा।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/whether-msme-independent-stock-exchange/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>भारत की नई पहचान बनेगी ‘योगी की फिल्म सिटी&#8217;</title>
		<link>http://businesslinknews.com/indias-new-identity-will-be-yogis-film-city/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/indias-new-identity-will-be-yogis-film-city/#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 20 Sep 2020 19:24:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[झारखण्ड]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[फिल्म निर्माता]]></category>
		<category><![CDATA[फिल्म सिटी]]></category>
		<category><![CDATA[मधुर भंडारकर]]></category>
		<category><![CDATA[मध्य प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[मालिनी अवस्थी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21995</guid>
		<description><![CDATA[नौएडा, ग्रेटर नौएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे फिल्म सिटी स्थापना के प्रयास तेज फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियों में खुशी की लहर, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे अवसर, होगा क्षेत्रीय विकास प्रोत्साहित होगा निवेश, सृजित होंगे नए रोजगार अवसर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>नौएडा, ग्रेटर नौएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे फिल्म सिटी स्थापना के प्रयास तेज</strong></li>
<li><strong>फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हस्तियों में खुशी की लहर, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार</strong></li>
<li><strong>स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे अवसर, होगा क्षेत्रीय विकास</strong></li>
<li><strong>प्रोत्साहित होगा निवेश, सृजित होंगे नए रोजगार अवसर</strong></li>
<li><strong>उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को मिलेगा विशेष लाभ</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/Madhur-Bhandarkar.jpg"><img class="  wp-image-21997 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/Madhur-Bhandarkar.jpg" alt="Madhur-Bhandarkar" width="516" height="287" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> देश की सबसे खूबसूरत फिल्म सिटी का पता, अब उत्तर प्रदेश होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी की स्थापना केे निर्देश दिए हैं। इससे फिल्म निर्माताओं को एक बेहतर विकल्प मिलेगा। स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर मिलेंगे। निवेश प्रोत्साहित होगा। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह फिल्म सिटी भारत की नई पहचान बनेगी। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है।</p>
<p>फिल्म सिटी की स्थापना के इस निर्णय पर देश के विख्यात फिल्मकारों, निर्माताओं और लोकगायकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है। फिल्म सिटी के निर्माण से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों की स्थानीय प्रतिभाओं को नए अवसर मिलेंगे। स्थानीय भाषाओं में फिल्म निर्माण हो सकेगा। भोजपुरी को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस निर्णय से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों में खुशी की लहर है।</p>
<p>बीते दिनों मेरठ मण्डल की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नौएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण एवं यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में किसी एक प्राधिकरण में फिल्म सिटी के निर्माण के लिए भूमि के विकल्पों के साथ यथाशीघ्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में देश को एक अच्छी फिल्म सिटी की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश यह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है। प्रदेश में एक बेहतरीन फिल्म सिटी बनाई जाएगी। यह फिल्म सिटी फिल्म निर्माताओं को एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराएगी। साथ ही, रोजगार सृजन की दृष्टि से भी यह एक अत्यंत उपयोगी प्रयास होगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस निर्णय के बाद से ही कई फिल्मी हस्तियों ने खुशी जाहिर करते हुए प्रशंसा की है। अभिनेत्री कंगना रनोट, लोक गायिका मालिनी अवस्थी, पटकथा लेकर मनोज मुंतशिर, भजन गायक अनूप जलोटा तथा हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी तथा खूबसूरत फिल्म सिटी की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी है।</p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/malini.jpg"><img class="  wp-image-21998 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/malini.jpg" alt="malini" width="119" height="140" /></a>खासकर महिलाओं को मिलेंगे नए अवसर: मालिनी अवस्थी</strong><br />
विख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने ‘सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास, खुसरो, रैदास, निराला, महादेवी वर्मा, फिराक और जिगर की धरती उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण का स्वागत करते हुए कहा, उत्तर प्रदेश ने हिन्दी—उर्दू को आकार दिया है। मदर इण्डिया, गंगा जमुना से लेकर लगान तक फिल्मों में दिखाएं जाने वाले गांवों की परिकल्पना में उत्तर प्रदेश के गांव को ही दिखाया गया है। उन्होंने कहा, इस फिल्म सिटी के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाएं विशेषकर महिलाओं को नए अवसर मिलेंगे। देश में अभी जैसे मुम्बई है, वैसा ही विकल्प उत्तर प्रदेश में होने से सभी को नए अवसर मिलेंगे।</p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/madhur.jpg"><img class="  wp-image-21999 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/madhur.jpg" alt="madhur" width="95" height="127" /></a>मुख्यमंत्री से मिले फ़िल्म निर्माता मधुर भंडारकर</strong><br />
विख्यात फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सम्भावनाओं की इस पहल पर बहुत खुशी जाहिर की है। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, फिल्म सिटी का विकास मुख्यमंत्री का विजन है। यह प्रयास अच्छा है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से इडस्ट्री में ख़ुशी की नई लहर है। यहां बेहतर व्यवस्था से फिल्म से जुड़े लोग अपने प्रोजेक्ट पूरे कर सकेंगे। फिल्म निर्माताओं को एक विकल्प मिलेगा। मुख्यमंत्री ने मधुर भंडारकर को राममंदिर के प्रसाद के तौर पर प्रभु श्रीराम का सिक्का, रामचरित मानस, तुलसी माला और भव्य दिव्य कुम्भ की कॉफी टेबल बुक भेंट स्वरूप दी।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/indias-new-identity-will-be-yogis-film-city/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>उत्तर प्रदेश में बढ़ेगा पूंजी निवेशकों का आकर्षण : आलोक रंजन</title>
		<link>http://businesslinknews.com/capital-investors-will-increase-in-uttar-pradesh-alok-ranjan/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/capital-investors-will-increase-in-uttar-pradesh-alok-ranjan/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2020 09:27:16 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21960</guid>
		<description><![CDATA[&#8216;सीमा&#8217; के मुख्य संरक्षक ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर सरकार को दी बधाई लखनऊ। स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा) के मुख्य संरक्षक व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को बधाई दी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>&#8216;सीमा&#8217; के मुख्य संरक्षक ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर सरकार को दी बधाई</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा) के मुख्य संरक्षक व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस में दूसरा स्थान प्राप्त करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कारोबारी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश ने १२वें स्थान से छलांग लगाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। इससे प्रदेश में निवेश करने के लिए पूंजी निवेशकों का आकर्षण बढ़ेगा। सीमा के मुख्य संरक्षक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के औद्योगीकरण में पूर्व से चली आ रही मानसिकता में बदलाव आएगा। जिससे उत्तर प्रदेश में निवेश का माहौल प्रशस्त होगा और लोगों के लिए रोजगार मिलेंगे।<br />
बता दें कि बिजनेस रिफार्म एक्शन प्लान (बीआरएपी) की वर्ष 2019 के रैकिंग में यूपी ने 10 पायदान की छलांग लगाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। इससे वैश्विक स्तर पर प्रदेश निवेश के आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर सकेगा और निवेश गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने बीआरएपी पर किए गए कार्यों के आधार पर रैंकिंग जारी की। इसके बाद अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल व अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने संयुक्त रूप से प्रदेश की इस उपलब्धि पर बताया कि प्रदेश को बीआरएपी की पिछली रैंकिंग में 12वां स्थान मिला था। 2019 की रैंकिंग में 10 पायदान की सुधार करते हुए प्रदेश ने दूसरा स्थान हासिल किया है।</p>
<p>बीआरएपी-2019 में केंद्र ने 187 सुधारों पर काम का एजेंडा दिया था। इनमें एक सुधार प्रदेश पर लागू नहीं हो रहा था। राज्य ने 186 सुधारों पर काम कर क्रियान्वित किया। मूल्यांकन में 184 सुधार केंद्र की कसौटी पर खरे पाए गए। प्रदेश में पब्लिक सेवाओं को ऑनलाइन कर निवेश मित्र पोर्टल से जोडऩे व बड़े पैमाने पर श्रम सुधारों को लागू करने की पहल कारगर साबित हुई है। कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार जब अधिकाधिक निवेश को आकर्षित करने में लगी है, बीआरएपी में टॉप रैंकिंग से सरकार के प्रयासों को बल मिलने की उम्मीद है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/capital-investors-will-increase-in-uttar-pradesh-alok-ranjan/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>और बेहतर इन्फ्रा से चमकेगा औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला</title>
		<link>http://businesslinknews.com/more-better-infra-will-brighten-industrial-area-sandila/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/more-better-infra-will-brighten-industrial-area-sandila/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2020 20:35:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[इन्फ्रास्ट्रक्चर]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[कार्यपालक अधिकारी मयूर महेश्वरी]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19]]></category>
		<category><![CDATA[हरदोई]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21930</guid>
		<description><![CDATA[सड़क, जल निकासी, मार्ग प्रकाश व्यवस्था का होगा उच्चीकरण हर हाल में कार्य प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित हुई 25 अक्टूबर 2020 औद्योगिक क्षेत्र की अवस्थापना सुविधायें और बेहतर करने के यूपीसीडा सीईओ ने दिये निर्देश उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता समर सिंह लखनऊ। यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला में निवेश को &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>सड़क, जल निकासी, मार्ग प्रकाश व्यवस्था का होगा उच्चीकरण</strong></li>
<li><strong>हर हाल में कार्य प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित हुई 25 अक्टूबर 2020 </strong></li>
<li><strong>औद्योगिक क्षेत्र की अवस्थापना सुविधायें और बेहतर करने के यूपीसीडा सीईओ ने दिये निर्देश</strong></li>
<li><strong>उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण प्राथमिकता</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/sandeela.jpg"><img class="  wp-image-21934 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/sandeela.jpg" alt="sandeela" width="389" height="184" /></a>समर सिंह </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर किया जायेगा। बरसात में होने वाले जलभराव की तत्काल निकासी, सड़कों का सुदृढ़ीकरण और मार्ग प्रकाश की सुविधाओं का उच्चीकरण किया जायेगा। जिला प्रशासन और यूपीसीडा के मध्य समन्वय स्थापित कर यह सभी कार्य 25 अक्टूबर तक प्रारम्भ करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। औद्योगिक क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं का विकास करने के लिए वाणिज्यिक, शैक्षणिक और आवासीय भूखण्डों का विपणन किया जायेगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मयूर महेश्वरी ने स्थलीय निरीक्षण कर विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला का इन्फ्रास्ट्रक्चर और बेहतर किया जाय, ताकि इस क्षेत्र में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहित हो। क्षेत्रीय विकास के साथ ही नए रोजगार के अवसर सृजित हों। उन्होंने उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं का निर्धारित समय में प्राथमिकता पर निस्तारण करने के निर्देश दिये।</p>
<p>मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला के बाहरी एवं आन्तरिक नाले से बरसात में होने वाले जल भराव की निकासी के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए जिलाधिकारी हरदोई की अध्यक्षता में शीघ्र ही एक समिति बनेगी, जो कार्य योजना तैयार करेगी। आन्तरिक पानी की निकासी यूपीसीडा और बाहरी जल निकासी का कार्य सिंचाई विभाग करेगा। साथ ही औद्योगक क्षेत्र के फेज-1, फेज-2 एवं फेज-4 की सड़को की शीघ्र मरम्मत के लिए स्टीमेट तैयार कर कार्य प्रारम्भ होगा।</p>
<p>यूपीडा सीईओ ने औद्योगिक क्षेत्र के रख-रखाव के लिए उद्यमियों द्वारा एसपीवी माडल तैयार कराने के निर्देश दिये। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में पार्कों के लिए रिक्त पड़ी भूमि एवं फैक्ट्रियों के आगे खाली ग्रीन बेल्ट को नियमानुसार सम्बन्धित उद्यमियों द्वारा अपने संरक्षण में लेकर हरियाली विकसित करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये। इस प्रस्ताव का मेसर्स ज्ञान दूध, मेसर्स आईपीएल, मेसर्स स्वरूप केमिकल्स, मेसर्स श्रीगंग इंडस्ट्री, मेसर्स वरुन बेवरेज व सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन ने स्वागत किया है।</p>
<p><strong>बेहतर जलनिकासी के लिए चैनलाइज होंगे समोधा व बेहटा नाले</strong><br />
जानकारों की मानें तो सण्डीला औद्योगिक क्षेत्र में बरसाती जलभराव का बड़ा कारण सिंचाई विभाग के समोधा एवं बेहटा नालों की वर्ष 2013 से सफाई न होना है। लेकिन अब यह कार्य भी जल्द ही होगा। बरसाती जलभराव की निकासी के लिए सिंचाई विभाग से शीघ्र नाला साफ कराकर चैनलाइज कराया जाएगा। बरसाती जलभराव से क्षतिग्रस्त हुए मास्टर नाले और सड़कों का अनुरक्षण कार्य भी कराया जायेगा। साथ ही बेहतर मार्ग प्रकाश के लिए सोडियम स्ट्रीट लाइटों के स्थान पर एलईडी लाइटें लगेंगी। औद्योगिक क्षेत्र में उगी झडिय़ों आदि की साफ-सफाई मनरेगा के तहत कराई जायेगी।</p>
<p><strong>सरकार की नीतियों से कराया अवगत, लिये सुझाव</strong><br />
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने उद्यमियों को उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण की विभिन्न नीतियों से अवगत कराया और उद्यमियों के सुझाव भी प्राप्त किये। औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला की अवस्थापना सुविधाओं का उच्चीकरण करने के लिए किये गये स्थलीय निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय प्रबन्धक, निर्माण खण्ड के वरिष्ठ अधिकारी और औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/mayur-maheshwari.jpg"><img class="  wp-image-21932 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/09/mayur-maheshwari.jpg" alt="mayur maheshwari" width="137" height="91" /></a>औद्योगिक क्षेत्र सण्डीला के उद्यमियों ने जिस प्रतिबद्धता से वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान अपनी औद्योगिक इकाइयों को संचालित किया और अन्य राज्यों से वापस लौटे श्रमिकों व कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराया, वह प्रसंशनीय है।<br />
<strong>मयूर महेश्वरी, सीईओ, यूपीसीडा</strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/more-better-infra-will-brighten-industrial-area-sandila/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>जीडीपी नहीं जीवन के आंकड़े अनमोल</title>
		<link>http://businesslinknews.com/price-figures-not-gdp-are-precious/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/price-figures-not-gdp-are-precious/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2020 10:58:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[विचार मंच]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21927</guid>
		<description><![CDATA[पंकज जायसवाल जीवन है तो सब है। मृत्यु के बाद सब कुछ यहीं छोड़ के जाना है, चिता के साथ कुछ भी नहीं जाता है। जीवन है तो अर्थ का मूल्य है अन्यथा निर्मूल्य। अर्थशास्त्र का भी अंतिम उद्देश्य है सुख एवं संतुष्टि। सनातन अर्थशास्त्र का उद्देश्य पारिस्थितिकीय तंत्र सुखी रहे, मानव सुखी रहे, राज्य &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg"><img class="alignnone  wp-image-21888" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/08/pankaj-sir-copy.jpg" alt="pankaj sir copy" width="111" height="116" /></a></p>
<p><strong>पंकज जायसवाल</strong></p>
<p>जीवन है तो सब है। मृत्यु के बाद सब कुछ यहीं छोड़ के जाना है, चिता के साथ कुछ भी नहीं जाता है। जीवन है तो अर्थ का मूल्य है अन्यथा निर्मूल्य। अर्थशास्त्र का भी अंतिम उद्देश्य है सुख एवं संतुष्टि। सनातन अर्थशास्त्र का उद्देश्य पारिस्थितिकीय तंत्र सुखी रहे, मानव सुखी रहे, राज्य सुखी रहे, समाज सुखी रहे और परिवार सुखी रहे एवं पृथ्वी या ऐसे किसी अन्य ग्रह पर जहां जीवन है या इस जीवन वाले ग्रह जैसे की पृथ्वी पर जीवन निर्बाध गति से चलता रहे और ब्रह्माण्ड में खगोलीय संतुलन बना रहे।</p>
<p>ऐसे किसी भी समृद्धि सम्पन्नता या कार्य का कोई महत्व नहीं है यदि वह ग्रह पर जीवन को सुरक्षित न रख पाए। इसलिये जो सबसे बड़ी पूंजी है वह है जीवन, जीवन है तो अर्थ का मोल है, सारे व्यापार, उद्योग एवं राज्य है, पृथ्वी का आस्तित्व है, जीवन नहीं है तो कुछ भी नहीं है। अर्थशास्त्र वहीं आकर खत्म हो जाता है जहां इसके कारण किसी व्यक्ति का, मानव मात्र का, पृथ्वी का, ब्रह्माण्ड का, इसके खगोलीय संतुलन का आस्तित्व खतरे में आ जाये।</p>
<p>सनातन अर्थशास्त्र ऐसे किसी भी विकास को अपनी श्रेणी में शामिल नहीं करता। सनातन अर्थशास्त्र का सूत्र वाक्य ही सनातन है अर्थात नश्वर कभी न समाप्त होने वाला। ऐसा कोई भी कार्य उद्यम या व्यापार जो पारिस्थितिकीय तंत्र, मानव, राज्य, समाज, परिवार, पृथ्वी या ऐसे किसी अन्य ग्रह पर जहां जीवन है कि खुशी के लिए उसकी नश्वरता और उसकी निरंतरता की गति बरकरार रखने के लिए किया जाय वह सनातन अर्थशास्त्र के दायरे में आता है।</p>
<p>एक उदाहरण बताता हूं, मेरे एक मित्र थे, उनकी विकास की गति बहुत तेज थी और लगातार विकास करते करते और विकास करने की धुन में वो अपने खुद के और अपने परिवार दोनों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते थे और एक दिन पता चला कि उन्हें कैंसर की बीमारी हो गई है और इसके पता चलने के तीन माह के अन्दर उनकी मृत्यु हो गई। इस कहानी के द्वारा मैं यह बताना चाहता हूं कि विकास जरुरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरुरी है विकास की गति क्या हो। इसको समझना, लगातार तेज गति से दौडऩे से हार्ट अटैक भी आ सकता है, विकास की दौड़ यदि छोटी हो तो बहुत तेज दौडऩा न्यायसंगत हो सकता है, लेकिन यदि विकास की दौड़ लम्बी हो तो बीच बीच में आराम और सांस लेने के लिए रुकना भी पड़ सकता है, कभी कभी धीमा भी चलना पड़ता है। दौड़ाने की जगह तब जाकर आब विकास की दौड़ यदि मैराथन हो तो जीत सकते हैं।</p>
<p>ठीक यही नियम देश के विकास की दौड़ पर लागू होती है, ठीक है यह जरुरी है कि देश विकास करे लेकिन यह जनमानस की सहूलियत और अनुकूलन के हिसाब से होना चाहिए। कई बार ऐसा लगे कि जनमानस कुछ निर्णयों से परेशान हो रहा है या उसका सांस फूल रहा है तो कुछ समय के लिए रूक कर ठहर कर माहौल के अध्ययन के लिए ही सही विकास के आगे सरवाईवल को प्राथमिक कर देना चाहिए।</p>
<p>आज चारों ओर कोरोना का कहर जारी है। यह देश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य दोनों को चोट पहुंचा रही है, सरकार को और जन को इन दोनों के बीच चुनाव करना पड़ेगा कि इन दोनों के बीच सबसे कीमती क्या है? फिर उसे प्राथमिकता में लेना पड़ेगा, लाजिमी है कि जीवन सबसे कीमती है, अनमोल है, जीवन ही नहीं बचेगा तो विकास को प्राप्त कर क्या करेंगे।</p>
<p>आज चारों तरफ आलोचना हो रही है। जीडीपी के गिरने को लेकर, लेकिन यह तो प्रत्याशित और स्वाभाविक था और वैश्विक भी होगा, जब सब कुछ बंद रहेगा तो माल और सेवा में सौदे कहां से होंगे और जब नहीं होंगे तो जीडीपी के आंकड़े तो गिरेंगे ही न, इसलिए जीडीपी के गिरने से चिंतित होने की जरुरत नहीं है, क्योंकि अभी घर बचाने से ज्यादे जरुरी जीवन बचाना है। जब 300 केस थे तो लॉकडाउन लग गया और आज जब 36 लाख से ज्यादा केस हैं तो लॉकडाउन की आज सर्वाधिक जरुरत है, लोग अब इस बीमारी को समझ चुके हैं मजदूर अपनी-अपनी जगह सेटल हो चुके हैं अब लगता है कि व्यवस्थित और नियोजित लॉकडाउन एक बार लगा कर इस चेन को तोडऩा चाहिए।</p>
<p>इस कोरोना काल में एक चीज और दुखदाई है वह है कोरोना की चेन तोडऩे के चक्कर में मेडिकल चेन ब्रेक हो गई है और लोगों की अन्य बीमारियों में ट्रीटमेंट टाइम से नहीं मिलने और अस्पताल में जगह न मिलने से मृत्यु हो रही है। सरकार को देखना चाहिये कि यह मेडिकल चेन ब्रेक न हो वह इसकी व्यवस्था करे और फोकस जल्दी से और तुरंत परिणाम वाले टेस्टिंग जांच को बढ़ावा दे, जब तक वैक्सीन नहीं आ जाता है।</p>
<p>साथ में सरकार को बजट की समस्या यदि आती है तो घोषित बजट मदों को पुनर्गठित कर दोबारा बजट बनाये ताकि अन्य मदों के खर्च को कम कर उस मद को स्वास्थ्य एवं जनता के ऋण किश्त की राहत में लगाये अन्यथा सितम्बर से जनता को कोरोना से तगड़ी चोट लगने वाली है। चूंकि कोरोना से लड़ाई के लिए अब राज्य सरकार को जिम्मेदार बनाया गया है। अत: राज्यों को बकाये जीएसटी की राशि को इसे देना चाहिए, ताकि वह इसे कोरोना की लड़ाई में लगा सके और चंूकि जनता को भी आत्मनिर्भर बनाने की अपील की गई है तो उसे भी सरकार को इस लड़ाई में लडऩे के लिए सक्षम और आत्मनिर्भर बनने लायक बनाना पड़ेगा।</p>
<p>कोरोना का डाटा जिस तेजी से बढ़ रहा है लग रहा है कि इस कहर में हम दुनिया में दूसरे नम्बर पर आ जायेंगे, जबकि अन्य देशों के मुकाबले यहां पर दिए गए वित्तीय पैकेज उतने प्रभावी नहीं थे। बैंकों की मनमानी चल ही रही थी, रिजर्व बैंक ने अपने आदेश को प्रभावी रूप में लागू करने में सफल नहीं रहा था और उसके मोरेटेरियम की अवधि भी 31 अगस्त को खत्म हो रही है। मतलब सितम्बर में आय तो कोई खास बढ़ी नहीं। मास्क-सेनिटाइजर और अन्य इम्यून सिस्टम से सम्बंधित खर्चे बढ़ गए, बिक्री व्यापार लगभग नगण्य है, हर व्यक्ति हानि में चल रहा है यहां तक कि सरकार भी हानि में चल रही है, ऐसे में यदि बैंकों के आय मीटर पर लगाम नहीं लगाई गई तो सितम्बर का महीना भारत के लिए दुखदाई होगा और अगर किश्त में राहत नहीं मिली तो हो सकता है कि जनता त्राहिमाम-त्राहिमाम करे।</p>
<p>अत: सरकार को अपनी प्राथमिकता सूची में अर्थव्यवस्था से ऊपर स्वास्थ्य और जनता की वित्तीय परेशानी देखनी पड़ेगी और उसके बाद अर्थव्यवस्था, जीडीपी के गिरते आंकड़े। सरकार को आर्थिक आंकड़े से चिंता की उतनी जरुरत नहीं है, जितना कोरोना के बढ़ते आंकड़े से चिंतित होने की जरुरत है, क्योंकि जान है तो जहान है और 2020 का शुद्ध लाभ जीवन है और कुछ नहीं।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/price-figures-not-gdp-are-precious/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>एमईआईएस में तुरंत बदलाव से निर्यात कारोबारी होंगे प्रभावित : फियो</title>
		<link>http://businesslinknews.com/export-business-will-be-affected-by-immediate-change-in-meis-fio/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/export-business-will-be-affected-by-immediate-change-in-meis-fio/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 02 Sep 2020 10:01:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21920</guid>
		<description><![CDATA[नई दिल्ली। निर्यात कारोबारियों के संगठन भारतीय निर्यातक महासंघ (फियो) ने निर्यात कारोबारियों के लिए मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) में अचानक बदलाव पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा है कि इससे निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले कारोबारी प्रभावित होंगे। फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने बुधवार को यहां कहा &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> निर्यात कारोबारियों के संगठन भारतीय निर्यातक महासंघ (फियो) ने निर्यात कारोबारियों के लिए मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) में अचानक बदलाव पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा है कि इससे निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले कारोबारी प्रभावित होंगे।</p>
<p>फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने बुधवार को यहां कहा कि योजना में दो करोड़ रुपए लाभ की सीमा तय कर दी गयी है। इससे निर्यात कारोबारी बुरी तरह से प्रभावित होंगे। हालांकि उनकी संख्या बहुत ज्यादा नहीं होगी लेकिन ये कुल निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को दो करोड़ रुपए की सीमा पर पुनर्विचार करना चाहिए।</p>
<p>श्री सराफ ने कहा कि सितंबर और दिसंबर २०२० के दौरान पूरे किये जाने वाले निर्यात आर्डर बहुत पहले तय हो चुके हैं। इनकी कीमतें इस योजना को ध्यान में रखकर तय की गयी है। इसलिए सरकार के लाभ सीमा तय करने से निर्यातकों को वित्तीय नुकसान होगा।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/export-business-will-be-affected-by-immediate-change-in-meis-fio/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>सरकार ने असंगठित क्षेत्र की कमर तोड़ कर अर्थव्यवस्था को किया तबाह : राहुल</title>
		<link>http://businesslinknews.com/government-destroyed-economy-by-breaking-back-of-unorganized-sector-rahul/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/government-destroyed-economy-by-breaking-back-of-unorganized-sector-rahul/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2020 09:08:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21896</guid>
		<description><![CDATA[नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि उसने असंगठित पर प्रहार कर देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। श्री गांधी ने सोमवार को यहां जारी एक वीडियो सन्देश में कहा &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि उसने असंगठित पर प्रहार कर देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। श्री गांधी ने सोमवार को यहां जारी एक वीडियो सन्देश में कहा कि अर्थव्यवस्था पर यह आक्रमण सोची समझी रणनीति के तहत किया गया है और इसका मकसद असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली डेज़ह की बड़ी आबादी को गुलाम बनाना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र देश में 90 फ़ीसदी से ज्यादा आबादी को रोजगार देता है लेकिन मोदी सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र को जानबूझकर तबाह कर रही है। उन्होंने इसे एक साजिश बताया और कहा कि यह देश के लीगो को गुलाम बनाने की कोशिश है और इसकी पहचान कर सबको इसके खिलाफ लड़ना पड़ेगा।</p>
<p>भारत के संदर्भ में असंगठित क्षेत्र के महत्व को समझाते हुए उन्होंने 2008 की जबरदस्त आर्थिक तूफान का हवाला दिया और कहा कि उस दौर में अमेरिका, जापान, चीन सहित पूरी दुनिया के बैंक गिर गए, बन्द होने में एक के बाद एक कंपनियों की लाइन लग गई, यूरोप के बैंक गिरे लेकिन भारत मे इस मंदी का असर नही हुआ।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/government-destroyed-economy-by-breaking-back-of-unorganized-sector-rahul/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
