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	<title>Business Link &#187; उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक</title>
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	<description>Breaking News</description>
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		<title>घोटाले में पूर्व एमडी दोषी, पांच साल की जेल</title>
		<link>http://businesslinknews.com/former-md-guilty-in-scam-five-year-jail/</link>
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		<pubDate>Mon, 01 Apr 2019 07:48:07 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[तत्कालीन प्रबंध निदेशक नवल किशोर]]></category>
		<category><![CDATA[बोर्ड घोटाला]]></category>

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		<description><![CDATA[उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक में हुये घोटालों में तत्कालीन एमडी नवल किशोर दोषी करार पांच साल की सजा और 31 हजार का जुर्माना आदेशों को दरकिनार कर की थी 99 कर्मचारियों की मनमानी नियुक्तियां विवेचना के दौरान सामने आया था बोर्ड घोटाला बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक में हुये घोटालों में तत्कालीन एमडी नवल किशोर दोषी करार</strong></li>
<li><strong>पांच साल की सजा और 31 हजार का जुर्माना</strong></li>
<li><strong>आदेशों को दरकिनार कर की थी 99 कर्मचारियों की मनमानी नियुक्तियां </strong></li>
<li><strong>विवेचना के दौरान सामने आया था बोर्ड घोटाला</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/naval.jpg"><img class="  wp-image-17732 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/naval.jpg" alt="naval" width="271" height="297" /></a>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड में मनमाने तरीके से फैसले लेने, लाखों रुपये के घोटाले और हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर 99 कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले में भ्रष्टाचार निवारण की विशेष अदालत ने तत्कालीन प्रबंध निदेशक नवल किशोर को दोषी ठहराया है। विशेष अदालत ने पूर्व एमडी नवल किशोर को पांच साल की सजा व 31 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।</p>
<p>बता दें कि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक में करोड़ों के घोटालों के मामलों में तत्कालीन प्रबंध निदेशक नवल किशोर को विशेष अदालत ने बीती २७ मार्च को आईपीसी की धारा 420, 384, 409, 476, 468, 471 व 120वी के साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों को जेल भेजने का आदेश देते हुए 29 मार्च को सजा सुनाने के लिए तलब किया था। भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार शुक्ला ने दोनों को सजा सुनाते हुये कहा कि नवल किशोर ने लोकसेवक रहते हुये अपराध किया है। भर्ती पर रोक के बावजूद भर्ती करना, विदेश यात्रा के दौरान गलत तरीके से टैक्सी व टेलीफोन का भुगतान लेना और अपने आवास पर बैंक के सुरक्षागार्ड तैनात करना, मनमाने तरीके से साज-सज्जा कराना और कम्प्यूटर लैब स्थापित करने में मनमाना खर्च करना और विनोद गुप्ता से सांठ-गांठ कर बैंक शाखाओं पर बोर्ड लगवाने में शाखा प्रबंधक को विवश कर धन वसूलना गंभीर अपराध हैं।</p>
<p>अदालत ने अपने 190 के विस्तृत आदेश में नवल किशोर को धोखाधड़ी, उगाही, गबन, जाली दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार सहित नौ मामलों में सजा सुनाई। वहीं विनोद गुप्ता को धोखाधड़ी, उगाही और साजिश रचने के लिये सजा सुनाई है। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि तत्कालीन महाप्रबंधक प्रशासन आलोक दीक्षित नें जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर 11 जनवरी 2013 को हुसैनगंज थाने में नवल किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि दो फरवरी 2010 से 30 मार्च 2012 के बीच नवल किशोर ने तत्कालीन बैंक प्रशासक से हाईकोर्ट के आदेश को छिपाया और गलत तरीके से प्रस्ताव पारित कराये, जबकि हाईकोर्ट ने कोई भी नीतिगत फैसला लेने पर रोक लगाई थी।</p>
<p><strong>भर्ती-प्रमोशन में मनमानी उजागर</strong><br />
उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक नवल किशोर ने हाईकोर्ट के निर्देश के विपरीत 99 कॢमयों की सीधी भर्ती कर ली गई। यही नहीं 385 नियम विरुद्ध प्रोन्नतिया भी की। इतना ही नहीं अपने मनमाने फैसलों से बैंक को नुकसान भी पहुंचाया। इसके अलावा मामला दर्ज होने के साथ ही बैंक की शाखाओं में 400 बोर्ड लगाने संबंधी घोटाला भी सामने आया था।</p>
<p><strong>बैंक शाखाओं पर बोर्ड लगाने वाले ठेकेदार पर भी चला चाबुक</strong><br />
उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक नवल किशोर से सांठगांठ कर नियमों को धता बताते हुये बैंक की शाखाओं पर बोर्ड लगाने वाले ठेकेदार विनोद गुप्ता को भी अदालत ने चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। गुप्ता पर सात हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही अदालत ने इस मामले में आरोपी रही विनोद गुप्ता की पत्नी सीमा गुप्ता को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज त्रिपाठी, उनके सहयोगी नवीन त्रिपाठी और प्रतिभा राय ने नवल किशोर और विनोद गुप्ता को अधिकतम सजा देने की मांग करते हुये दलील दी थी कि लोक सेवक रहते हुये उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के पूर्व एमडी नवल किशोर ने गंभीर अपराध किये हैं। वहीं बचाव पक्ष की ओर से कम से कम सजा देने की मांग करते हुये कहा गया कि दोनों का पहला अपराध है। साथ ही यह भी कहा गया कि नवल किशोर बुजुर्ग हैं और उनकी बाईपास सर्जरी हुई है।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/aashi-jamal.jpg"><img class="  wp-image-17733 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/04/aashi-jamal.jpg" alt="aashi jamal" width="123" height="135" /></a>मेरा मानना है कि वर्तमान दौर की नौकरशाही की तुलना में उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक के पूर्व एमडी नवल किशोर कुछ हद तक ईमानदार थे। उन पर जो भी आरोप है उन्होंने ये सारे कार्य बैंक हित में किए हैं। जिला शाखाओं पर कम्पयूटर लगाना या उनके कार्यकाल मे जेष्ठता एवं लम्बित स्कोरकार्ड ठीक कर पदोन्नतियां की गयी। सेवानिवृत कॢमयों के देयो के भुगतान को सुगम बनाया गया। शाखाओं पर बोर्ड भी लगाये गये, पर ये सारे कार्य न्यायालय के नीतिगत एवं व्ययभार पर लगी रोक के बावजूद किये गये&#8230; जिस कारण वह कानून के शिकंजे में फंस गये। आज की नौकरशाही को इससे सबक लेना चाहिए।<br />
<strong>मो0 आसिफ जमाल, महामंत्री, कर्मचारी संयुक्त परिषद</strong></p></blockquote>
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		<title>जारी हुए बकाया 11 करोड़</title>
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		<pubDate>Tue, 12 Mar 2019 11:36:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[ईपीएफ]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रेच्युटी]]></category>

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		<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक प्रबंध तंत्र ने जारी किये ईपीएफ-ग्रेच्युटी के 11 करोड़ रुपये अभी भी ईपीएफ का सात करोड़ और ग्रेच्युटी का लगभग 35 करोड़ बकाया कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से नियमित कट रहा है पैसा माली हालत खस्ता होने के चलते ईपीएफ खाते में नहीं करा पा रहे जमा बिजनेस लिंक ब्यूरो  &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक प्रबंध तंत्र ने जारी किये ईपीएफ-ग्रेच्युटी के 11 करोड़ रुपये </strong></li>
<li><strong>अभी भी ईपीएफ का सात करोड़ और ग्रेच्युटी का लगभग 35 करोड़ बकाया </strong></li>
<li><strong>कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से नियमित कट रहा है पैसा</strong></li>
<li><strong> माली हालत खस्ता होने के चलते ईपीएफ खाते में नहीं करा पा रहे जमा</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Page-1-copy.jpg"><img class="  wp-image-16887 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/Page-1-copy-300x186.jpg" alt="Page 1 copy" width="342" height="212" /></a>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राज्य की शीर्ष सहकारी संस्था उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक में कार्यरत कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से प्रति माह ईपीएफ और ग्रेच्युटी के मद का पैसा काटा तो जा रहा था, लेकिन सितम्बर 2018 से यह पैसा ईपीएफ ट्रस्ट के खाते में जमा नहीं कराई गई। यह प्रकरण <strong>बिजनेस लिंक</strong> ने अपने बीते अंक में प्रमुखता से उठाया, तो बैंक प्रबंध तंत्र ने ईपीएफ की कुल बकाया राशि 13 करोड़ में सात करोड़ रुपये ईपीएफ खाते में जमा करा दिये हैं। वहीं गे्रच्युटी की कुल बकाया राशि लगभग 40 करोड़ में चार करोड़ रुपये जारी कर दिये हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक प्रबंध तंत्र ने भविष्य निधि और ग्रेच्युटी के लगभग 53 करोड़ रुपये बीते कई माह से जमा नहीं कराये हैं। सितम्बर 2018 से ईपीएफ के लगभग 13 करोड़ रुपये और बीते तीन माह से ग्रेच्युटी के लगभग 40 करोड़ रुपये जमा नहीं हुये हैं। ईपीएफ ट्रस्ट के खाते में कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से काटी गई धनराशि जमा न होने से ट्रस्ट के सदस्यों को निरंतर ब्याज की क्षति हो रही है। वहीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के क्लेम का भुगतान नहीं हो रहा है।</p>
<p>बता दें कि कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से भविष्य निधि कटौती तो प्रतिमाह हो रही है, लेकिन यह राशि ट्रस्ट के खाते में जमा नहीं करार्ई जा रही है। ईपीएफ ट्रस्ट ने सितम्बर 2018 से बकाया राशि जमा न कराने की शिकायत सहायक महा प्रबंधक, ईपीएफ से की है। जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक कर्मचारियों के वेतन से सितम्बर 2018 में 2,69,30,792 रुपये, अक्टूबर 2018 में 2,58,58,540 रुपये, नवम्बर 2018 में 3,04,60,373 रुपये, दिसम्बर 2018 में 2,78,63,352 रुपये और जनवरी 2019 में लगभग तीन करोड़ रुपये ईपीएफ मद में काटे गये। नियमत: यह राशि प्रति माह बैंक प्रबंध तंत्र को ईपीएफ ट्रस्ट के खाते में जमा करानी चाहिये। पर, महिनों बाद भी ट्रस्ट खाते में जमा नहीं कराई गई थी।</p>
<blockquote><p>कर्मचारियों के हित में संस्थान सदैव तत्पर है। कर्मचारियों की भविष्य निधि, ईपीएफ सात करोड़ रुपये ईपीएफ ट्रस्ट के खाते में जमा करा दिये गये हैं। वहीं गे्रच्युटी के मद में चार करोड़ रुपये जारी हुये हैं। गे्रच्युटी का पैसा किश्तों में समय-समय पर जारी किया जाता है।<br />
<strong>केपी सिंह, एमडी, उप्र सहकारी ग्राम विकास बैंक</strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
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		<title>ईपीएफ-ग्रेच्युटी के 53 करोड़ बकाया</title>
		<link>http://businesslinknews.com/53-million-dues-of-epf-gratuity-2/</link>
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		<pubDate>Mon, 04 Mar 2019 10:53:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक]]></category>
		<category><![CDATA[एमडी केपी सिंह]]></category>
		<category><![CDATA[भविष्य निधि]]></category>

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		<description><![CDATA[कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से नियमित कट रहा पैसा, ईपीएफ खाते में नहीं हुआ जमा सितम्बर 2018 से बैंक प्रबंध तंत्र ने जमा नहीं कराये ईपीएफ के 13 करोड़, ग्रेच्युटी का लगभग 40 करोड़ बकाया शीर्ष सहकारी क्षेत्र के बैंक की माली हालत खस्ता, ईपीएफ- गे्रच्युटी से कर रहा व्यापार शैलेन्द्र यादव लखनऊ। उत्तर प्रदेश सहकारी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से नियमित कट रहा पैसा, ईपीएफ खाते में नहीं हुआ जमा </strong></li>
<li><strong>सितम्बर 2018 से बैंक प्रबंध तंत्र ने जमा नहीं कराये ईपीएफ के 13 करोड़, ग्रेच्युटी का लगभग 40 करोड़ बकाया </strong></li>
<li><strong>शीर्ष सहकारी क्षेत्र के बैंक की माली हालत खस्ता, ईपीएफ- गे्रच्युटी से कर रहा व्यापार</strong></li>
</ul>
<p><strong>शैलेन्द्र यादव </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक प्रबंध तंत्र ने भविष्य निधि और ग्रेच्युटी के लगभग 53 करोड़ रुपये बीते कई माह से जमा नहीं कराये हैं। सितम्बर 2018 से ईपीएफ के लगभग 13 करोड़ रुपये और बीते तीन माह से ग्रेच्युटी के लगभग ४० करोड़ रुपये जमा नहीं हुये हैं। ईपीएफ ट्रस्ट के खाते में कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से काटी गई धनराशि जमा न होने से ट्रस्ट के सदस्यों को निरंतर ब्याज की क्षति हो रही है। वहीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के क्लेम का भुगतान नहीं हो रहा है। बता दें कि कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन से भविष्य निधि कटौती तो प्रतिमाह हो रही है, लेकिन यह राशि ट्रस्ट के खाते में जमा नहीं करार्ई जा रही है। ईपीएफ ट्रस्ट ने सितम्बर 2018 से बकाया राशि जमा न कराने की शिकायत सहायक महा प्रबंधक, ईपीएफ से की है।</p>
<p>जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक कर्मचारियों के वेतन से सितम्बर 2018 में 2,69,30,792 रुपये, अक्टूबर 2018 में 2,58,58,540 रुपये, नवम्बर 2018 में 3,04,60,373 रुपये, दिसम्बर 2018 में 2,78,63,352 रुपये और जनवरी 2019 में लगभग तीन करोड़ रुपये ईपीएफ मद में काटे गये। नियमत: यह राशि प्रति माह बैंक प्रबंध तंत्र को ईपीएफ ट्रस्ट के खाते में जमा करानी चाहिये। पर, महिनों बाद भी ईपीएफ मद के लगभग 13 करोड़ रुपये ट्रस्ट खाते में जमा नहीं कराये गये। ईपीएफ ट्रस्ट समय से पहले एफडी तोड़वा कर कर्मचारियों के भुगतान कर रहा है।</p>
<p><strong>एमडी का नहीं उठा फोन, आनंद में बोले मुख्य लेखाधिकारी शैलेश ‘कभी-कभी हो जाती है देर’</strong><br />
भविष्य निधि, नियोजक अशंदान और स्वैच्छिक अंशदान की धनराशि का समय से भुगतान न होने के बाबत जब उत्तर प्रदेश ग्राम विकास बैंक के मुख्य लेखाधिकारी शैलेश आनंद से सम्पर्क किया गया, तो उन्होंने बताया ईपीएफ की धनराशि का भुगतान कैश फ्लो पर आधारित है, कभी-कभी देर हो जाती है। बैंक अधिकारियों- कर्मचारियों के वेतन से काटी गई 12 प्रतिशत ईपीएफ राशि का क्या किया गया? इस पर मुख्य लेखाधिकारी ने कहा कि बिना एमडी साहब की अनुमति के कोई जानकारी नहीं दे सकता। वहीं इस बाबत जानकारी के लिये एमडी केपी सिंह के सीयूजी नम्बर पर कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।</p>
<p><strong>कब कटा कितना पैसा</strong></p>
<p><strong>माह                                  ईपीएफ राशि करोड़ में</strong><br />
सितम्बर 2018                 2,69,30,792<br />
अक्टूबर 2018                  2,58,58,540<br />
नवम्बर 2018                   3,04,60,373<br />
दिसम्बर 2018                  2,78,63,352<br />
जनवरी 2019                    ३,00,00,000</p>
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