<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Business Link &#187; औद्योगिक निवेश</title>
	<atom:link href="http://businesslinknews.com/tag/%e0%a4%94%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b6/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://businesslinknews.com</link>
	<description>Breaking News</description>
	<lastBuildDate>Sat, 15 Apr 2023 02:02:46 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=4.1.26</generator>
	<item>
		<title>CM योगी बने ढाल, कोरोना का &#8216;जीवन और जीविका&#8217; पर प्रहार नाकाम</title>
		<link>http://businesslinknews.com/cm-yogi-becomes-shield-coronas-attack-on-life-and-livelihood-fails/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/cm-yogi-becomes-shield-coronas-attack-on-life-and-livelihood-fails/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 11 May 2020 21:51:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[करियर]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[रेल सेवा]]></category>
		<category><![CDATA[औद्योगिक निवेश]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवासी श्रमिक]]></category>
		<category><![CDATA[रोजगार]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21337</guid>
		<description><![CDATA[लखनऊ। घर वापसी का हर अवसर खुशनुमा होता है, और जब वापसी कोरोना कहर के दरम्यान हो, सुरक्षित हो, सरलतापूर्वक हो, तो खुशी का अहसास, पुनः ज़िंदगी मिलने के बराबर हो जाता है। शायद तभी उ.प्र. के प्रवासी श्रमिकों/कामगारों को लेकर गुजरात से एक रेलगाड़ी जब उन्नाव के रेलवे स्टेशन पहुंचती है तो उससे उतरने &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_21179" style="width: 111px;" class="wp-caption alignleft"><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50.jpeg"><img class="  wp-image-21179" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/04/C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50.jpeg" alt="C52315B8-7F9D-4786-9ED1-BC043B00DC50" width="111" height="185" /></a><figcaption class="wp-caption-text"><strong>प्रणय विक्रम सिंह </strong></figcaption></figure>
<p><strong> लखनऊ।</strong> घर वापसी का हर अवसर खुशनुमा होता है, और जब वापसी कोरोना कहर के दरम्यान हो, सुरक्षित हो, सरलतापूर्वक हो, तो खुशी का अहसास, पुनः ज़िंदगी मिलने के बराबर हो जाता है। शायद तभी उ.प्र. के प्रवासी श्रमिकों/कामगारों को लेकर गुजरात से एक रेलगाड़ी जब उन्नाव के रेलवे स्टेशन पहुंचती है तो उससे उतरने वाले हर इंसान के चेहरे पर कयामत को फतह करने वाला गुरूर और माँ की गोद में मिलने वाला सुकून दिखाई पड़ रहा था। खुशी का आलम कुछ यूं था मानों बरसों की साधना के बाद मनचाहा वरदान मिल गया हो। सारे गिले-शिकवे, दर्द-तकलीफ, भर्राई आवाज में “योगी जी जिंदाबाद” के भावुक स्वर में गुम हो गए।</p>
<p>दीगर है कि मार्च के आखिरी हफ्ते से प्रवासी श्रमिकों को दिल्ली से वापस लाने का जो सिलसिला यूपी सरकार की निगेहबानी में शुरू हुआ था वह लगातार जारी है। अब तक कई सूबों से रेलगाड़ियों और बसों के जरिए करीब आठ लाख श्रमिक उ.प्र. वापस लौट चुके हैं। उम्मीद है कि लगभग 20 लाख प्रवासी कामगार इस दौरान अपने घरों को लौटेंगे। ऐसे अभूतपूर्व कार्य को अंजाम दे कर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने देश के अन्य सूबों की सरकारों के सम्मुख एक नजीर स्थापित कर दी है। खैर, अपने सूबे के बाशिंदों को मुसीबत से निकाल कर योगी ने एक जिम्मेदार अभिभावक होने का फर्ज तो निभाया है लेकिन अगला सवाल प्रवासी श्रमिकों के रोजगार का है।</p>
<p>गौरतलब है कि कोरोना के कारण तेजी से बदल रही सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां, संभावित महामारी “बेरोजगारी” के विकराल स्वरूप में आने की मुनादी कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने &#8216;जान और जहान&#8217; दोनों को सुरक्षित रखने की अपील की थी। &#8216;जहान&#8217; स्वयं में विस्तृत अर्थों को समेटे हुए है। जहान की सुरक्षा का समेकित अर्थ &#8216;सामाजिक जीवन&#8217; की गतिविधियों का सहज संपादन भी है। लिहाज़ा प्रश्न उदित होता है कि लाखों की संख्या में जो श्रमिक अन्य प्रांतों से अपने गांव और कस्बों में वापस आए हैं, वह रोजगार के अभाव में अपनी व अपने कुटुंब की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कैसे करेंगे? कैसे सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन संभव होगा?</p>
<p>आखिर 23 करोड़ की आबादी वाले उ.प्र. में कोरोना जनित बेरोजगारी की मनहूस काली रात में रोजगार का खुशनुमा उजाला कैसे फैलेगा? क्या अनुद्योग के भंवर में रोजगार की कश्ती डूब जायेगी? ऐसा कतई नहीं है। समस्या में भी संभावना खोजने में विशेषज्ञ मुख्यमंत्री योगी के पास रोजगार के लिए असीम संभावनाओं के अनेक पिटारे हैं। आगामी 03 से 06 महीनों के भीतर कम से कम 20 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजन की ठोस कार्ययोजना विभिन्न विभागों द्वारा तैयार कर ली गई है।</p>
<p>MSME, ODOP, NRLM, मनरेगा, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, कौशल विकास मिशन, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और खादी ग्रामोद्योग आदि के माध्यम से लाखों रोजगारों के सृजन की रूपरेखा को टीम-11 के द्वारा धरातल पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इसी क्रम में प्रवासी श्रमिक/कामगार, जो उत्तर प्रदेश वापस लाए जा रहे हैं, बाकायदा उन सभी की स्क्रीनिंग कर उनके हुनर, स्किल का भी लेखा-जोखा जनपदवार-ग्रामवार तैयार किया जा रहा है ताकि इसी के अनुसार उन्हें रोजगार मुहैया कराया जा सके।</p>
<p>“जीवन और जीविका” का यह समर, पूरी व्यवस्था को “स्वदेशी” दिशा की तरफ मोड़ते हुए कुटीर उद्योगों के क्षेत्र को बड़ी उम्मीद से देख रहा है। यही नहीं गोवंश के जरिए गो आधारित जैविक खेती, गो मूत्र और गोबर से बनने वाले उत्पा<img class="  wp-image-21309 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/05/charbaag-1.jpg" alt="charbaag 1" width="411" height="277" />दों और फूलों से बनने वाले इत्र, अगरबत्ती और उसके बचे हिस्से से कंपोस्ट की संभावनाएं, रोजगार के नए आयाम विकसित करने का माध्यम बनने जा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश को रेडिमेड गारमेंट का हब बनाने की कार्य योजना पूरी तरह से तैयार हो चुकी है।</p>
<p>योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि, &#8220;रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित करने के उद्देश्य से केंद्र की मोदी सरकार ने रिवल्विंग फंड में जो बढ़ोतरी की है, उससे महिला स्वयंसेवी समूहों की विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए रोजगार सृजित किया जाएंगे। उससे महिला स्वयंसेवी समूहों को विभिन्न गतिविधियों जैसे सिलाई, अचार, मसाला बनाना इत्यादि के तहत रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे।&#8221; यही नहीं महिलाएं जिन सामग्रियों का निर्माण करेंगी, उन्हें राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने में सरकार पूरा सहयोग करेगी। देखा जाए तो, कोविड-19 कालखण्ड में &#8216;स्थानीय से राष्ट्रीय&#8217; की यात्रा का परिवहन पथ बनी ODOP योजना बहुत बड़ी संख्या में रोजगार सृजन का माध्यम बनने जा रही है। वहीं, दुग्ध समितियां तथा पौध नर्सरी भी प्रवासी कामगारों, श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने का बड़ा माध्यम बनेंगी।</p>
<p>ध्यातव्य है कि, उत्तर प्रदेश में नए कृषि सुधारों ने, “कृषक उत्थान” की बहुआयामी संभावनाओं की रूपरेखा तैयार कर दी है। यह नए संशोधन, उप्र कृषि उपज विपणन अधिनियम के दायरे से 46 कृषि वस्तुओं को मुक्ति प्रदान करते हुए, इन वस्तुओं को किसानों से सीधे खरीद की अनुमति प्रदान करते हैं। उ.प्र. किसानों से सीधी खरीद, मौजूदा वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज को नई निजी मंडी के रूप में निर्दिष्ट करने और निजी मंडियां स्थापित करने की भी सुविधा प्रदान करने वाला राज्य बन गया है। सुधारों की यह श्रंखला अब किसानों को स्थानीय एपीएमसी (मंडियों) की दया पर आश्रित रहने से मुक्ति प्रदान करती है क्योंकि उनके पास राज्य के किसी भी बाजार में अपने उत्पाद बेचने के लिए एकल लाइसेंस है।</p>
<p>यह निर्णय असमय काल-कवलित होती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और बिचौलियों के हाथों निर्धन कृषकों की प्रणालीगत लूट को समाप्त करने हेतु पूर्णतः सक्षम है। यह, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने में भी मदद करेगा जो अधिक रोजगार उत्पन्न करेगा। सुधारों की इस श्रंखला में श्रम कानूनों को शिथिल कर योगी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश व्यापार के लिए खुला है। श्रम कानूनों के निलंबन से उद्योग और विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। अब नए लघु एवं मझोले उद्योगों के विकसित होने की प्रबलता बढ़ गई है।</p>
<p>यहां एक बात और काबिल-ए-गौर है कि कोराना संक्रमण के मध्य, हजारों औद्योगिक कम्पनियों का चीन से मोह भंग हो गया है। उसमें चीन की हठधर्मी नीतियों का भी बड़ा योगदान है साथ ही वैश्विक औद्योगिक जगत, अब किसी एक स्थान के बजाए अनेक स्थानों पर निवेश कर कोरोना जैसे किसी भी अप्रत्याशित जोखिम के प्रभाव को कम करना चाहता है। इस “संक्रमण और संभावना” के संधिकाल पर योगी सरकार का बहुराष्ट्रीय कंपनियों को आकर्षित करने हेतु “विशेष पैकेज” तैयार करना, उ.प्र. को “औद्योगिक निवेश” का बड़ा हब बनाने जा रहा है। जो असीमित और गुणवत्तापरक राजगार का बड़ा जरिया बनेगा।</p>
<p>यही नहीं मुख्यमंत्री शिक्षुता (अप्रेन्टिसशिप) प्रोत्साहन योजना के तहत युवाओं को उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ-साथ ₹2500 का मासिक प्रशिक्षण भत्ता प्रदान की जाने की व्यवस्था की गई है। विदित हो कि एक वर्ष में एक लाख युवाओं को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना के तहत 02 लाख युवाओं को जोड़े जाने की संभावनाओं को तलाशा गया है। रोजगार अथवा स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन के लिए युवाओं को ‘युवा हब’ के माध्यम से भी ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी द्वारा दिए गए हैं।</p>
<p>उपरोक्त विवरणों की बुनियाद पुख्ता तरीके से इस बात की तस्दीक करती है कि यूपी में हर हाथ में काम का स्वप्न अधूरा नहीं रहेगा। बल्कि उ.प्र. सरकार का नियोजन और उसके सापेक्ष सक्रियता, यह बता रही है कि द्वापर युग के बाद फिर एक “राजयोगी” का परिश्रम, पाण्डव रूपी जनता को “रोजगार रूपी पथ” के माध्यम से बेरोजगारी के “लाक्षागृह” की आग से अवश्य बचा लेगा।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/cm-yogi-becomes-shield-coronas-attack-on-life-and-livelihood-fails/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>सूरत की घटना : उद्यम बनाम मजदूर संघर्ष की प्रस्तावना</title>
		<link>http://businesslinknews.com/surat-incident-prelude-to-enterprise-versus-labor-struggle/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/surat-incident-prelude-to-enterprise-versus-labor-struggle/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2020 08:06:25 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[विचार मंच]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[उद्योग]]></category>
		<category><![CDATA[औद्योगिक निवेश]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=21162</guid>
		<description><![CDATA[पंकज जायसवाल सूरत में मजदूरों का मिल मालिक के खिलाफ विद्रोह कोरोना की तरह ही पहली चिंगारी है जिसे सभी सरकारों को ध्यान देने की जरूरत है। समय के साथ वेतन न मिलने की घटनाएं बढ़ती जाएंगी। अप्रैल माह में बिक्री कुछ अत्यावश्यक वस्तुवों को छोड़ बिक्री शून्य है, मई में वेतन समेत अन्य स्थाई &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li style="font-weight: 400"><strong>पंकज जायसवाल</strong></li>
</ul>
<h3 style="font-weight: 400">सूरत में मजदूरों का मिल मालिक के खिलाफ विद्रोह कोरोना की तरह ही पहली चिंगारी है जिसे सभी सरकारों को ध्यान देने की जरूरत है। समय के साथ वेतन न मिलने की घटनाएं बढ़ती जाएंगी। अप्रैल माह में बिक्री कुछ अत्यावश्यक वस्तुवों को छोड़ बिक्री शून्य है, मई में वेतन समेत अन्य स्थाई खर्चों के भुगतान का वक़्त आ रहा है. जून माह में भयंकर संकट और भयंकर विद्रोह की भी आशंका है, जब मिल मालिकों को जून माह में मार्च से लेकर जून माह मतलब 4 माह का इकट्ठे कॅश क्रेडिट ऋण का एवं ओवरड्राफ्ट ऋण का ब्याज देना है, और लगभग सारे टैक्स की तारीख जून कर दी गई है। न तो  सरकार ने टैक्स माफ किया है और ना ही ब्याज सिर्फ उसे  स्थगित किया गया है, जिस पर ब्याज की लागत भी उद्यमी को वहन करना है। मार्च माह से अति जीवनावश्यक चीजों को छोड़ लगभग 95% उद्योगों की बिक्री शून्य है,एक पैसा खाते में नहीं आया है, मई तक भी आने की उम्मीद नहीं है, पुराना बकाया भी नही मिल रहा, जून की बिक्री का पैसा भी तुरन्त नहीं मिलने वाला, क्यों कि ज्यादेतर खरीददार खुद नगदी संकट में होंगे, ऐसे में मासिक वेतन व मजदूरी का भुगतान, मार्च में एक साथ 4 माह का कार्यशील ऋण का ब्याज, ज्यादेतर टैक्स और कंप्लायंस का इकट्ठा बोझ उद्यमियों की कमर तोड़ेंगे, अगर रोका नहीं गया इसे तो हो सकता है कि मजदूरों कर्मचारियों और उद्यमियों के बीच भी संघर्ष के पटकथा की  ज़मीन तैयार हो जाए।</h3>
<p>कोरोना का यह संक्रमण अगर लम्बा चला तो सबसे अधिक मार खायेगा मध्य वर्ग और एमएसएमई सेक्टर, उच्च आय वर्ग के पास तो खुद का धन है, गरीबों का राशन और ख्याल सरकार रख रही है लेकिन मध्य वर्ग ना तो राशन के लिए कतार में लग सकता है ना ही खुले तौर पर अपनी व्यथा कह सकता है, अपने दिल में दर्द की चिंगारी वह लेकर बैठा है, और तब तक बैठा है जब तक पानी सर से ऊपर नहीं चला जाता है, सरकार को चाहिए की वह इस स्थिति को भांपे और पानी को सर के ऊपर से नहीं जाने दे, कोरोना के इस जंग में सब सरकार के साथ हैं सबको सरकार पर भरोसा है और सबको सरकार के द्वारा लिए गए कदम से संतोष है, चिंता है तो बस यही की इकॉनमी का क्या होगा जब यह बंदी पूरी तरह से खुलेगा, क्यूँ की इस प्राकृतिक आपदा पर तो विश्व के किसी भी सरकार का वश नहीं चल रहा, ऐसे में इकॉनमी तो सिर्फ एक हिस्सा है.</p>
<p>एमएसएमई सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर एवं ट्रेडिंग सेक्टर के पास उतना शॉक अब्जोर्बेर नहीं होता की लगातार इस झटके से  उबर ले. इनके आयार्जन की क्षमता काफी घट गई है, कुछ स्थाई खर्चे ऐसे हैं जिन्हें आय हो न हो खर्च करना ही है. इस वर्ग के सामने सबसे बड़ी चिंता है की इस लॉक डाउन में और आगे भी अपने स्टाफ एवं मजदूरों को वेतन कहाँ से दे, सरकारों का फरमान आ रहा है की वेतन देना है, लेकिन एमएसएमई के पास यदि पैसा ही न हो, बिक्री शून्य हो, ऋण मिलने वाला नहीं है साइकिल रुकी हुई है तो वह दें तो दें कहाँ से . जितने भी एमएसएमई हैं कहीं न कहीं वह बड़े इंटरप्राइजेज पर ही निर्भर हैं और बड़े इंटरप्राइजेज के ऊपर पड़ी मार का भार आज भी और आगे भी इनके उपर ही आने वाला है, देनदारी वसूली के साथ साथ एमएसएमई के कॉन्ट्रैक्ट की साइज़ या मूल्य कम होने की सम्भावना है .</p>
<p>लॉक डाउन में मजदूरों और सप्लाई चेन की समस्या तो है ही, लॉक डाउन के बाद मटेरियल और मजदूरों की अनुउपलब्धता, ग्राहक व्यवहार में परिवर्तन, रेट कट का दबाब, उत्पादन बंद करने की नौबत, नकदी संकट,एक साथ ब्याज और टैक्स पेमेंट का संकट, सप्लाई चेन का संकट आदि से दो चार होना है. एमएसएमई का धंधा कम होने पर अंत में मार मध्य वर्ग के  वेतनभोगियों पर ही पड़ेगी. और एक बार जब यह मार पड़ेगी तो सूरत की तरह उद्यमी और मजदूर आमने सामने भी खड़े हो सकते हैं. ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जितने भी औद्योगिक संगठन है जिसमें असोचैम, फिक्की, पीएचडी चैम्बर और खासकर के एमएसएमई के लिए कार्य कर रही संस्था लघु उद्योग भारती और  स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ( सीमा) हो सबको आगे आकर इन चिंताओं का समाधान ढूंढने में सरकार की मदद करनी पड़ेगी. इस संकट की घडी में यह अब सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, यह इन संगठनों की भी जिम्मेदारी हो गई है की अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करें और हल ढूंढने में मदद करें.</p>
<p>मेरा मत है कि सरकार को वेज सब्सिडी, बिजली फिक्स्ड चार्ज की ६ माह तक माफ़ी, सिर्फ प्रयोग में लाये गए बिजली पर ही बिल, भरे गए टैक्स के बराबर प्रतिभूति रहित ऋण, एनपीए नियमों में राहत, एन सी एल टी में राहत, एमएसएमई से सरकारी खरीद की सीमा को 50 प्रतिशत तक किया जाए, पुराने सरकारी बकायों का भुगतान निर्गत , कंप्लायंस में राहत सितम्बर तक बढाया जाए. ऋण लेना सुगम बनाया जाय, मोरेटेरियम 6 माह तक , ब्याज का भार सिर्फ ईएमआई राशि पर बजाय पूरे बकाये राशि के, कर्जमाफी की जगह ब्याजमाफी का विकल्प या सभी तरह के ऋणों पर ब्याज दर कम करने का प्रस्ताव, बैंकों द्वारा अनावश्यक कई तरह के चार्ज एवं पेनल ब्याज हटाने जैसे कदम लेने चाहिए. सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर टूरिस्ट, एविएशन, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक, इन्फ्रा, निर्माण, सप्लाई चेन आदि पर विशेष पैकेज या इंडस्ट्री के हिसाब से टैक्स हॉलिडे भी लाया जा सकता है. मेरा यह भी मत है की सरकार का भी राजस्व प्रभावित होगा, ऐसे में राजकोषीय घाटा कम करने हेतु पीएम केयर फंड फंड को टैक्स पेमेंट या सरकारी बांड से लिंक कर टैक्स कलेक्शन का अग्रिम संग्रह कर लेना चाहिए.</p>
<p>सरकार को एक अध्ययन कमेटी बनानी चाहिए जो एक निष्कर्ष रिपोर्ट दे की लॉक डाउन की स्थिति में कैसे और किन विधियों का पालन करते हुए  उद्योग एवं सरकारी विभाग काम कर सकते हैं, उनके कार्य करने के तरीके और संस्कृति क्या हो, हो सकता है हम ऐसी कार्य संस्कृति इस महामारी में विकसित कर लें की वह औद्योगिक, सामाजिक, पारिवारिक और प्रकृति सब के अनुकूल हो. लॉक डाउन एक अवस्था है, और ऐसा नहीं है की विश्व में मानव का दिमाग यह विधि न विकसित कर ले की ऐसी परिस्थिति में उद्यम कैसे करें. जब मानव अन्तरिक्ष में भी कार्य करने की विधि विकसित कर चुका है तो यह तो एक लॉक डाउन है, और यदि इस डर के आगे हमने विधि विकसित कर लें तो डर के आगे जीत है.</p>
<p>साथ में सरकार को ध्यान देना चाहिए कि मजदूरों के पलायन के बाद उच्च वेतन और पेशेवरवर्ग का भी पलायन हो सकता है, कॉर्पोरेट अपने हानि का बहुत सा भार इनके खर्चे को कम करके करना चाहेंगे ऐसे में हो सकता है की मजदूरों के बाद कर्मचारी और बाद में पेशेवर का पलायन शुरू हो. हालांकि मजदूर या पेशेवर पलायन का दूसरा पहलू ये भी है कि तब उद्यम और रोजगार का केन्द्रीयकरण नहीं विकेंद्रीकरण होगा और कस्बों का विकास देखने को मिलेगा, जो शहरीकरण से कहीं बेहतर हो और गांवो के विकास में सहायक होंगे.</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/surat-incident-prelude-to-enterprise-versus-labor-struggle/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>औद्योगिक क्षेत्रों में चलेगा गड्ढा मुक्त अभियान</title>
		<link>http://businesslinknews.com/draft-free-campaign-to-be-run-in-industrial-areas/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/draft-free-campaign-to-be-run-in-industrial-areas/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 30 Oct 2018 13:08:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[अमौसी औद्योगिक क्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[औद्योगिक निवेश]]></category>
		<category><![CDATA[गड्ढा मुक्त अभियान]]></category>
		<category><![CDATA[सरोजनी नगर]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=9276</guid>
		<description><![CDATA[तमाम दावों के बावजूद राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र बदहाल, नाली -नाला-जलनिकासी की समस्याओं से जूझ रहे उद्यमी उप्र औद्योगिक विकास निगम तंत्र का दावा बजट के लिये मुख्यालय भेजा गया प्रस्ताव बजट मिलते ही दूर होंगी औद्योगिक क्षेत्रों की समस्यायें बिजनेस लिंक ब्यूरो  लखनऊ। सूबे के औद्योगिक क्षेत्रों की खस्ताहाल सडक़ों पर पैबन्द लगाने के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>तमाम दावों के बावजूद राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र बदहाल, नाली -नाला-जलनिकासी की समस्याओं से जूझ रहे उद्यमी </strong></li>
<li><strong>उप्र औद्योगिक विकास निगम तंत्र का दावा बजट के लिये मुख्यालय भेजा गया प्रस्ताव</strong></li>
<li><strong>बजट मिलते ही दूर होंगी औद्योगिक क्षेत्रों की समस्यायें</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> सूबे के औद्योगिक क्षेत्रों की खस्ताहाल सडक़ों पर पैबन्द लगाने के लिये अब गड्ढा मुक्त अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में फौरी तौर पर उद्यमियों को राहत दिलाने की योजना है। यूपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक आरके सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर जल्द से जल्द औद्योगिक क्षेत्रों की सडक़ें दुरुस्त करने को कहा है।</p>
<p>प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये उद्यमियों व निवेशकों को कई सहूलियतें मुहैया कराने वाले तमाम सरकारी दावों के बावजूद अधिकतर औद्योगिक क्षेत्र बदहाल हैं। औद्योगिक क्षेत्रों की खस्ताहाल सडक़ें, बजबजाती नाली-नाला, बदहाल पार्क और रामभरोसे जलनिकासी आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी उद्यमी जूझ रहे हैं। प्रदेश की राजधानी स्थित औद्योगिक क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम तंत्र का दावा है कि बजट के अभाव में औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित है। ऐसे में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार सिंह ने मातहतों को औद्योगिक क्षेत्रों की सडक़ों के गढ्ढों को भरने के लिये अभियान चलाने के निर्देश दिये हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि राजधानी के सरोजनी नगर और अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। यहां जगह-जगह जलभराव, बदहाल सडक़ें और गंदगी का अंबार दिखाई देता है। अमौसी औद्योगिक क्षेत्र की मुख्य सडक़ जगह-जगह गड्ढïों में खो चुकी है। औद्योगिक क्षेत्र की जलनिकासी रामभरोसे है। ओवरफ्लों नालों को देख सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते लम्बे समय से इन बजबजाते नालों की सफाई नहीं हुई है। अमौसी औद्योगिक क्षेत्र के पार्कों की सूरत देखने योग्य नहीं है। यहां के पार्क सीवेज, ड्रेनेज और बरसाती पानी के ‘पूल’ में परिवॢतत हो चुके हैं, जिसमें शासन-प्रशासन के दावे गोते लगा रहे हैं। वैसे औद्योगिक क्षेत्रों का उद्धार करने वाले दावों और वादों का राग नया नहीं है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम प्रबंध तंत्र समय-समय पर नई-नई योजनायें व कार्यक्रम बनाकर औद्योगिक क्षेत्रों की स्वच्छता और बेहतरी की ढपली जोर-शोर से पीटता रहा है। पर, यह सभी दावे प्रारंभिक काल में ही दम तोड़ते रहे हैं। नतीजतन, औद्योगिक क्षेत्रों की सडक़ें, नाले-नालियों सहित पार्कों व हरित पट्टियों पर बदहाली का ग्रहण लगता रहा है। सूबे के औद्योगिक क्षेत्रों की सूरत बदलने के लिये निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने जिस स्वच्छ औद्योगिक क्षेत्र योजना की शुरुआत की थी, उनके जाते ही वह दम तोड़ गई। इस योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्रों को स्वच्छ बनाकर बेहतर वातावरण, आॢथक समृद्धि एवं स्वास्थ्य के लिये अनुकूल परिस्थितियों में उद्योग संचालन को प्रोत्साहित किया जाना था। एक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित होना था। बहरहाल, सूबे की बात छोडिय़े राजधानी के औद्योगिक क्षेत्रों में सडक़ों, नालियों, पार्कों और हरित पट्टियों की बदहाली कब तक दूर होगी, उद्यमियों को अब यह यक्ष प्रश्न लगने लगा है, जिसके जवाब का उन्हें बेसब्री से इंतजार है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/draft-free-campaign-to-be-run-in-industrial-areas/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
