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	<title>Business Link &#187; प्रभू कंस्ट्रक्शन</title>
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	<description>Breaking News</description>
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		<title>बजट के अभाव में प्रोजेक्ट अधूरा, उद्घाटन पूरा</title>
		<link>http://businesslinknews.com/project-incomplete-inauguration-complete/</link>
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		<pubDate>Mon, 01 Jul 2019 13:30:39 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम]]></category>
		<category><![CDATA[प्रभू कंस्ट्रक्शन]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य आपदा मोचन बल वाहिनी]]></category>

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		<description><![CDATA[शैलेन्द्र यादव परियोजना का नाम: राज्य आपदा मोचन बल वाहिनी, उत्तर प्रदेश (मुख्यालय भवन निर्माण) प्रस्तावित परियोजना का क्षेत्रफल: 27.653 हेक्टेयर कार्य की लागत: 12102.85 लाख (9643.01 लाख अनावासीय और 2459.84 लाख आवासीय) कार्य प्रारम्भ करने की तिथि: जनवरी 2017  कार्य पूर्ण करने की तारीख: मार्च 2019 कार्यदायी संस्था: उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ठेकेदार: प्रभू &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify"><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/sdrf01.jpg"><img class="alignnone  wp-image-20971" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/07/sdrf01.jpg" alt="sdrf01" width="828" height="397" /></a>शैलेन्द्र यादव</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify"><strong>परियोजना का नाम: राज्य आपदा मोचन बल वाहिनी, उत्तर प्रदेश (मुख्यालय भवन निर्माण) </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>प्रस्तावित परियोजना का क्षेत्रफल: 27.653 हेक्टेयर</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>कार्य की लागत: 12102.85 लाख (9643.01 लाख अनावासीय और 2459.84 लाख आवासीय)</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>कार्य प्रारम्भ करने की तिथि: जनवरी 2017 </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>कार्य पूर्ण करने की तारीख: मार्च 2019</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>कार्यदायी संस्था: उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>ठेकेदार: प्रभू कंस्ट्रक्शन, गोमती नगर लखनऊ</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>लोकार्पण की तारीख: 10 मार्च 2019 </strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>लोकार्पण किसने किया: योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश</strong></li>
<li style="text-align: justify"><strong>निर्माण की वर्तमान स्थिति: निर्माण कार्य अब तक है अधूरा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align: justify"><strong>लखनऊ।</strong> बाढ़, भूकम्प और आग समेत अन्य आपदाओं में फंसे पीडि़तों को राहत पहुंचाने वाली राज्य आपदा मोचन बल वाहिनी, एसडीआरएफ अपने मुख्यालय भवन के अधूरे निर्माण की विपदा से जूझ रही है। इस निर्माण कार्य में लगे जिम्मेदार इसका कारण बजट का अभाव बता रहे हैं। परियोजना को पूरा करने की पूर्वनिर्धारित समय सीमा बीत चुकी है। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम प्रबंध तंत्र अभी तक महज परियोजना के कुछ कार्य ही हैंडओवर कर सकी है। पर, प्रशासनिक अधिकारियों ने वा-वाही लूटने के लिये इस अधूरी परियोजना का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करकमलों से संपन्न करा दिया है।</p>
<p style="text-align: justify">प्रदेश में किसी भी प्राकृतिक व मानवजनित आपदा के समय तत्काल राहत और बचाव कार्यों को त्वरित एवं प्रभावी ढंग से सम्पादित करने के उद्देश्य से गठित राज्य आपदा मोचन बल, उत्तर प्रदेश के इस मुख्यालय भवन में आवासीय एवं अनावासीय निर्माण 12102.85 लाख रुपये से होने हैं। एसडीआरएफ की इस निर्माण परियोजना के लिये प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप जिलाधिकारी लखनऊ ने 16 फरवरी 2016 को ग्राम नूरनगर, भदरसा, परगना-बिजनौर, तहसील सरोजनीनगर में 27.653 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी। इस भूमि पर एसडीआरएफ वाहिनी के आवासीय एवं अनावासीय भवनों का निर्माण के लिये कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम नामित किया गया।</p>
<p style="text-align: justify">कार्यदायी संस्था ने इसके लिये ठेकेदार प्रभू कंस्ट्रक्शन को अनुबंधित किया। इस परियोजना में कुल 12102.85  लाख रुपये की लागत से आवासीय भवनों में श्रेणी-2 के 22 आवास एवं श्रेणी-3 में कुल 72 आवासों के निर्माण होने हैं। तो वहीं अनावसीय भवनों में 500 जवानों के रहने के लिये बैरक, प्रशासनिक भवन, परिवहन शाखा, ओवर हैड टैंक, वेयर हाउस, सब स्टेशन सहित कुल 35 निर्माण कार्य कराने की योजना थी। पर, इनमें से अभी तक महज नौ कार्यों पर ही निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सका है। एसडीआरएफ मुख्यालय भवन के यह निर्माण कार्य जनवरी 2017 में प्रारम्भ हुये, जिसे मार्च 2019 में पूरे कराये जाने थे।</p>
<blockquote>
<p style="text-align: justify">निर्माण कार्य बजट के अभाव में अधूरे हैं। इस कार्य के लिये संबंधित विभाग ने तीन किश्तों में अभी तक 42 करोड़ रुपये जारी किये हैं। चौथी किस्त के तहत 13 करोड़ रुपये जारी होने की प्रक्रिया प्रचलित है। संबंधित विभाग ने जितना धन जारी किया है, उसके सापेक्ष यूपीआरएनएन ने निर्माण कार्य कराये हैं।<br />
<strong>संजय वर्मा, पीएम, यूपीआरएनएन</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify">गौरतलब है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने वा-वाही लूटने के फेर में राज्य आपदा मोचन बल वाहिनी के मुख्यालय भवन (आवासीय एवं अनावासीय) निर्माण परियोजना का लोकार्पण 10 मार्च 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों करा दिया। उम्मीद थी कि लोकार्पण होने के पश्चात इस परियोजना के अधूरे कार्यों की गति तेज होगी। पर, उद्घाटन के बाद निर्माण की गति और सुस्त हो चली है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक, अवर अभियंता सहित अन्य स्टाफ इसका कारण बजट का अभाव बता रहा है। साथ ही निर्धारित समय सीमा निकलने के बावजूद इस परियोजना के अधूरे निर्माण कार्यों के अन्य कारण भी चर्चा का विषय हैं। इनमें ठेकेदार द्वारा परियोजना पर विभिन्न निर्माण सामग्री की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं का बकाया भुगतान न करना भी एक कारण चर्चित है।</p>
<p style="text-align: justify">निर्धारित समय निकलने के बावजूद इस अधूरे निर्माण पर कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक संजय वर्मा का कहना है कि राज्य आपदा मोचन बल वाहिनी के निर्माण कार्य बजट के अभाव में अधूरे हैं। इस कार्य के लिये संबंधित विभाग ने तीन किश्तों में अभी तक 42 करोड़ रुपये जारी किये हैं। चौथी किस्त के तहत 13 करोड़ रुपये जारी होने की प्रक्रिया प्रचलित है। संबंधित विभाग ने जितना धन जारी किया है, उसके सापेक्ष यूपीआरएनएन ने निर्माण कार्य कराये हैं। परियोजना प्रबंधक ने बताया कि एसडीआरएफ प्रबंध तंत्र की प्राथमिकता वाले निर्माण कार्य पहले कराये गये हैं। वहीं संबंधित ठेकेदार द्वारा आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान न करने पर कहा, मुझे इसकी जानकारी नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify">राज्य आपदा मोचन बल वाहिनी के लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नसीहत देते हुये कहा था कि ‘बहुत से अवसर अपनी नई पहचान बनाने का मौका देते हैं, उसमें जो संस्था चूकती है उसके सामने स्वयं की पहचान का संकट खड़ा हो जाता है।’ ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कार्य पूर्ण करने के निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही जनहित की तमाम बड़ी परियोजनाओं की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम क्या अपनी जिम्मेदारी से चूक रही है? या कारण कुछ और है?</p>
<blockquote><p>प्राप्त बजट के सापेक्ष प्राथमिकता पर एसडीआरएफ के निर्माण कार्य कराये जा रहे हैं।<br />
<strong>अभिमन्यू सोनकर, जेई, यूपीआरएनएन</strong></p></blockquote>
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		<title>कमीशन में गए आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ों!</title>
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		<pubDate>Thu, 13 Jun 2019 13:04:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[कौन सुने आपूर्तिकर्ताओं की फरियाद कलम्बे समय से लटके भुगतान को पाने में बेहाल हो रहे आपूर्तिकर्ता  भुगतान न करना पड़े इसके लिये आपूर्तिकर्ताओं पर बनवा रहे पुलिसिया दबाव  बड़े ठेकेदार राजकीय निर्माण निगम से भुगतान न होने का बना रहे बहाना  राजकीय निर्माण निगम के बड़े ठेकेदारों ने आपूर्तिकर्ताओं के दबाये करोड़ों शैलेन्द्र यादव लखनऊ। राजकीय निर्माण &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>कौन सुने आपूर्तिकर्ताओं की फरियाद कलम्बे समय से लटके भुगतान को पाने में बेहाल हो रहे आपूर्तिकर्ता </strong></li>
<li><strong>भुगतान न करना पड़े इसके लिये आपूर्तिकर्ताओं पर बनवा रहे पुलिसिया दबाव </strong></li>
<li><strong>बड़े ठेकेदार राजकीय निर्माण निगम से भुगतान न होने का बना रहे बहाना </strong></li>
<li><strong>राजकीय निर्माण निगम के बड़े ठेकेदारों ने आपूर्तिकर्ताओं के दबाये करोड़ों</strong></li>
</ul>
<p><strong>शैलेन्द्र यादव</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजकीय निर्माण परियोजनाओं में विभिन्न निर्माण सामग्री की सप्लाई करने वाले सूचीबद्ध आपूर्तिकर्ता बेहाल हैं। सरकार की कार्यदायी संस्थाओं द्वारा अनुबंधित बड़े ठेकेदार इन आपूर्तिकर्ताओं का करोड़ों रुपये का भुगतान वर्षों से दबाये बैठे हैं। लम्बे समय से तगादा कर रहे पीडि़त आपूर्तिकर्ताओं की मानें तो इन ठेकेदारों ने संबंधित कार्यदायी संस्था द्वारा भुगतान किये गये मोबिलाइजेशन फण्ड का उपयोग संबंधित परियोजनाओं में न करके अन्य ठेकों को लेने सहित दूसरे व्यक्तिगत कार्यों में कर लिया। साथ ही हमारा भुगतान न करने के पीछे तर्क देतेे हैं कि निगम ने जो भुगतान किया वह आला अधिकारियों और शासन में बैठे हुक्मरानों में बंट गया, अब निगम जब भुगतान करेगा, तब मिलेगा।</p>
<blockquote><p><strong>इनसे परेशान आपूर्तिकर्ता</strong><br />
राजकीय निर्माण निगम द्वारा अनुबंधित जीएस इन्फ्रा, जीएस एक्सप्रेस, एसकेसी इन्फ्रा, सिद्धेश्वर, सन इन्फ्रा और प्रभू कंस्ट्रक्शन आदि बड़े ठेकेदार फर्मों सहित शासन की अन्य कार्यदायी संस्थाओं द्वारा अनुबंधित किये गये ठेकेदारों ने आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ो रुपये का भुगतान लटका रखा है।</p></blockquote>
<p>पीडि़त आपूर्तिकर्ताओं का कहना है कि देश और प्रदेश की बात छोडिय़े, राजधानी लखनऊ में ही करोड़ों की निर्माण परियोजनाओं का कार्य जिन ठेकेदारों को मिला है, उनमें से कईयों ने आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान नहीं किया है। लिहाजा, निगम में सूचीबद्ध आपूर्तिकर्ता इन ठेकेदारों को निर्माण सामग्री की सप्लाई करने से पीछे हट रहे हैं। ऐसे में यह ठेकेदार गैर पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री की आपूर्ति ले रहे हैं। जिस कारण आपूर्तित निर्माण सामग्री की गुणवत्ता रामभरोसे है। साथ ही इससे कई सरकारी निर्माण परियोजनायें अधूरी पड़ी हैं और कई ऐसी भी हैं जिनका निर्धारित समय पर पूरा होना दूर की कौड़ी है।</p>
<p>गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न निर्माण कार्यदायी संस्थाओं में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम प्रमुख है। उत्तर प्रदेश और राज्य के बाहर कई निर्माण परियोजनाओं की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम पर है। उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिये राजकीय निर्माण निगम ने जिन ठेकेदार फर्मों को अनुबंधित किया है, उनमें कई फर्मों ने विभिन्न परियोजनाओं में दर्जनों आपूर्तिकर्ताओं से विभिन्न निर्माण सामग्री आपूर्ति करायी। पर, इसके सापेक्ष आपूर्तिकर्ताओं को बीते कर्ई वर्षों से करोड़ों का भुगतान नहीं किया। ठेकेदारों की इस मनमानी का यह दंश आपूर्तिकर्ता झेल रहे हैं।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/rajan-mittal-Md-setu-nigam.jpg"><img class="  wp-image-16741 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/rajan-mittal-Md-setu-nigam.jpg" alt="rajan mittal (Md) setu nigam" width="102" height="141" /></a>राजकीय निर्माण निगम जिन शर्तों के तहत संबंधित ठेकेदारों को अनुबंधित करता है, उसके तहत निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं द्वारा ली गई निर्माण सामग्री आदि की गुणवत्ता का परीक्षण करने के उपरान्त ही भुगतान किया जाता है। संबंधित ठेकेदार द्वारा आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान न करने के लिये प्रत्यक्षरूप से निर्माण निगम उत्तरदायी नहीं है। फिर भी यदि ऐसा कोई प्रकरण संज्ञान में आता है, तो एक स्वस्थ्य माहौल बनाने की कोशिश रहती है जिससे निर्माण निगम का कोई कार्य प्रभावित न हो।<br />
<strong>इं. राजन मित्तल, एमडी, यूपीआरएनएन</strong></p></blockquote>
<p>इस संबंध में राजकीय निर्माण निगम प्रबंध तंत्र का तर्क है कि जिन शर्तों के तहत ठेकेदार फर्मों को अनुबंधित किया गया है, उसमें निर्माण की गुणवत्ता और सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण करने के बाद ही संबंधित ठेकेदार को भुगतान किया जाता है। अनुबंध की शर्तों के मुताबिक, संबंधित ठेकेदारों को विभिन्न निर्माण सामग्री की सप्लाई करने वाले आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की नहीं है। फिर भी प्रयास रहता है कि एक स्वस्थ्य माहौल का वातावरण निर्मित हो, जिससे शासन की कोई भी महत्वपूर्ण निर्माण परियोजना का कार्य बाधित न हो।</p>
<p>राज्य सरकार ने आमजन के खून पसीने की कमाई हजम करने वाले धंधेबाज बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिये उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण, यूपी रेरा का गठन किया है। इसका असर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह प्रयोग राजकीय निर्माण निगम या अन्य शासकीय कार्यदायी संस्थाओं द्वारा सरकार की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं के लिये अनुबंधित किये जाने वाले बड़े ठेकेदारों को आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं के धन और व्यवसाय की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार कब निभायेगी?</p>
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