<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Business Link &#187; राजकीय निर्माण निगम</title>
	<atom:link href="http://businesslinknews.com/tag/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a4%ae/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://businesslinknews.com</link>
	<description>Breaking News</description>
	<lastBuildDate>Sat, 15 Apr 2023 02:02:46 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=4.1.26</generator>
	<item>
		<title>निर्माणाधीन इमारत में शिक्षित हो रहे मेडिकोज</title>
		<link>http://businesslinknews.com/educated-being-medicos-in-the-under-construction-building/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/educated-being-medicos-in-the-under-construction-building/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 24 Jun 2019 12:42:06 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Breaking News]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>
		<category><![CDATA[मेडिकल]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[जीएस इन्फ्रा]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय निर्माण निगम]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=20952</guid>
		<description><![CDATA[शैलेन्द्र यादव  जीएस इन्फ्रा ने डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के जिन फ्लोर को किया हैंडओवर वह हैं अधूरे आपूर्तिकर्ताओं  का भुगतान न होना अधर में लटकी निर्माण परियोजना का बड़ा कारण राजकीय निर्माण निगम से भुगतान न होने का दिया जा रहा तर्क उ बड़े ठेकेदारों ने आपूर्तिकर्ताओं के दबाये करोड़ों मिले आपूर्तिकर्ताओं &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong> <a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/IMG_1489.jpg"><img class="  wp-image-20956 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/IMG_1489.jpg" alt="IMG_1489" width="368" height="491" /></a>शैलेन्द्र यादव </strong></p>
<ul>
<li><strong>जीएस इन्फ्रा ने डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के जिन फ्लोर को किया हैंडओवर वह हैं अधूरे</strong></li>
<li><strong>आपूर्तिकर्ताओं  का भुगतान न होना अधर में लटकी निर्माण परियोजना का बड़ा कारण</strong></li>
<li><strong>राजकीय निर्माण निगम से भुगतान न होने का दिया जा रहा तर्क उ बड़े ठेकेदारों ने आपूर्तिकर्ताओं के दबाये करोड़ों</strong></li>
<li><strong>मिले आपूर्तिकर्ताओं का बकाया तो पूरी हों अधूरी परियोजनाएं</strong></li>
</ul>
<p><strong>लखनऊ।</strong> सूरत कोचिंग सेंटर हादसे के बाद देश-प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद के कई फरमान जारी हुये। उत्तर प्रदेश सरकार भी पीछे नहीं रही। बावजूद इसके राजधानी में कई ऐसे संस्थान हैं जो मानकों पर खरे नहीं उतरते, लेकिन यहां शिक्षण कार्य जारी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की निमार्णाधीन भव्य इमारत में हो रही मेडिकल शिक्षण कार्य इसका बड़ा उदाहरण है। कागजों पर भले ही उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को मेसर्स जीएस इन्फ्रा ने इस 12 मंजिला इमारत का भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल हैंडओवर कर दिया हो, लेकिन हकीकत यह है कि यहां अभी बहुत कार्य होना है। बावजूद इसके इस हिस्से में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान मेडिकल छात्र-छात्राओं को शिक्षित कर रहा है।</p>
<p>गौरतलब है कि तत्कालीन सपा सरकार ने गोमती नगर के विभूति खण्ड में 368 करोड़ की लागत से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एकेडमिक ब्लाक के निर्माण को हरी झण्डी दी थी। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने इस परियोजना के लिये मेसर्स जीएस इन्फ्रा को अनुबंधित किया और निर्माण कार्य वर्ष 2014-15 में प्रारम्भ हुआ। बीते वर्ष यह परियोजना हैंडओवर होनी थी। पर, यह निर्माण कार्य अब तक अधूरा है। इसका एक बड़ा कारण जीएस इन्फ्रा द्वारा विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ों का भुगतान न करना है, जिसके चलते निर्माण कार्य सुस्त पड़ा है।</p>
<p>जानकारों की मानें तो डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एकेडमिक ब्लाक निर्माण परियोजना में निर्माण सामग्री की सप्लाई करने वाले सूचीबद्ध आपूर्तिकर्ताओं सहित अन्य छोटे-छोटे सप्लायर बेहाल हैं। इन आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है। तगादा कर रहे पीडि़त आपूर्तिकर्ताओं की मानें तो लम्बे समय से भुगतान न होने के चलते हमें तो विभिन्न समस्याओं से जूझना ही पड़ रहा है। साथ ही निर्धारित समय निकलने के बावजूद भी यह परियोजना अब तक अधूरी पड़ी है। प्रभावित आपूर्तिकर्ताओं की मानें तो इसके कई कारण हैं।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/sandeep-singh.jpg"><img class="  wp-image-20953 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/sandeep-singh.jpg" alt="sandeep singh" width="89" height="118" /></a>एकेडमिक ब्लाक के तीन फ्लोर जीएस इन्फ्रा ने हैंडओवर कर दिये हैं, जिनमें मेडिकल के छात्र-छात्राओं की कक्षायें भी संचालित हो रही हैं। शेष कार्य तीव्र गति से कराया जा रहा है। जल्द ही इस परियोजना का निर्माण कार्य पूरा करा लिया जायेगा। जीएस इन्फ्रा द्वारा संबंधित आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान न करने के लिये प्रत्यक्षरूप से निर्माण निगम उत्तरदायी नहीं है।<br />
<strong>इं. संदीप सिंह, परियोजना प्रबंधक, यूपीआरएनएन</strong></p></blockquote>
<p>पहला, कार्यदायी संस्था द्वारा किये गये भुगतान का उपयोग दूसरी परियोजनाओं में करना। दूसरा, जब मैन पावर, शीशा सहित अन्य निर्माण सामग्रियों की आपूॢत करने वाले विभिन्न आपूॢतकर्ताओं का भुगतान रुकने से आपूर्ति रुकना। तीसरा, गैर पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री की आपूर्ति कराना। इसके अलावा भी इस परियोजना में देरी के अन्य कारण हैं। जानकारों की मानें तो इसकी तस्दीक निष्पक्ष जांच में की जा सकती है। कार्यदायी संस्था द्वारा भुगतान किये गये मोबिलाइजेशन फण्ड का उपयोग संबंधित परियोजनाओं में न करके अन्य ठेके-पट्ट को लेने, दूसरी परियोजना में प्रयोग करने सहित व्यक्तिगत कार्यों में कर लिया गया।</p>
<p>गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न निर्माण कार्यदायी संस्थाओं में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम प्रमुख है। उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिये राजकीय निर्माण निगम ने जिन ठेकेदार फर्मों को अनुबंधित किया है, उनमें कई फर्मों ने विभिन्न परियोजनाओं में दर्जनों आपूर्तिकर्ताओं से विभिन्न निर्माण सामग्री आपूर्ति करायी। पर, इसके सापेक्ष आपूर्तिकर्ताओं को बीते कर्ई वर्षों से करोड़ों का भुगतान नहीं किया। ठेकेदारों की इस मनमानी का दंश आपूर्तिकर्ता झेल रहे हैं और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एकेडमिक ब्लाक जैसी आधी-अधूरी परियोजनाओं को उपयोग में लाने जैसी तस्वीर सामने हैं।</p>
<p>ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि उपयोग में लाई जा रही इस अधूरी निर्माण परियोजना के लिये जिम्मेदार कौन है? यदि यहां कोई हादसा होता है, तो उत्तरदायी कौन होगा? राज्य सरकार, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम या फिर जीएस इन्फ्रा? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि शासकीय कार्यदायी संस्थाओं द्वारा अनुबंधित किये गये ठेकेदारों द्वारा आपूॢतकर्ताओं के बकाया धन का भुगतान कराने के लिये कौन हस्तक्षेप करेगा?</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/Saurabh.jpg"><img class="  wp-image-20954 alignright" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/06/Saurabh.jpg" alt="Saurabh" width="97" height="113" /></a>बीते काफी समय से भुगतान न होने के चलते विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान में विलम्ब जरूर हुआ। परए ऐसा नहीं है कि किसी आपूर्तिकर्ता का भुगतान नहीं हुआ है। जिन आपूॢतकर्ताओं का भुगतान रुका है, उन्हें जल्द ही भुगतान कर दिया जायेगा। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के इस निर्माण को हैंडओवर कर दिया जायेगा।<br />
<strong>सौरभ सिंह, जीएस इन्फ्रा</strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/educated-being-medicos-in-the-under-construction-building/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>पदोन्नति में अनदेखी से अभियंता आक्रोशित</title>
		<link>http://businesslinknews.com/ignoring-promotion-engineer-angry/</link>
		<comments>http://businesslinknews.com/ignoring-promotion-engineer-angry/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 04 Mar 2019 11:03:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[निगमों से]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय निर्माण निगम]]></category>
		<category><![CDATA[संयुक्त इंजीनियर्स समिति]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://businesslinknews.com/?p=16735</guid>
		<description><![CDATA[राजकीय निर्माण निगम के अभियंताओं को किया जा रहा नजरअंदाज पैक्सफेड, संस्कृत विश्वविद्यालय के कनिष्ठ अभियंताओं को प्रतिनियुक्ति के बाद रेवडिय़ों की तरह बांटी जा रही पदोन्नति संयुक्त इंजीनियर समिति वर्षों से लड़ रही न्याय की लड़ाई प्रोन्नति की अर्हता में शिथिलता का लम्बे समय से इंतजार बिजनेस लिंक ब्यूरो  लखनऊ। राजकीय निर्माण निगम में &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>राजकीय निर्माण निगम के अभियंताओं को किया जा रहा नजरअंदाज </strong></li>
<li><strong>पैक्सफेड, संस्कृत विश्वविद्यालय के कनिष्ठ अभियंताओं को प्रतिनियुक्ति के बाद रेवडिय़ों की तरह बांटी जा रही पदोन्नति </strong></li>
<li><strong>संयुक्त इंजीनियर समिति वर्षों से लड़ रही न्याय की लड़ाई </strong></li>
<li><strong>प्रोन्नति की अर्हता में शिथिलता का लम्बे समय से इंतजार</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजकीय निर्माण निगम में इंजीनियङ्क्षरग संवर्ग की विभिन्न समस्याओं एवं उनके निराकरण के लिये प्रबंध तंत्र से लम्बे समय से चल रही वार्ता का वर्षों बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। निगम प्रबंध तंत्र और संयुक्त इंजीनियर्स समिति के मध्य वार्ताओं, पत्राचारों और बैठकों के मैराथन दौर के बावजूद समस्यायें और मांगे वहीं खड़ी हैं, जहां वर्षों पूर्व थी। मुख्य सचिव द्वारा सभी विभागों के रिक्त पदों पर अविलम्ब पदोन्नति की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले आदेश राजकीय निर्माण निगम के अभियंताओं के लिये बेमानी साबित हो रहे हैं। इन्हें नजरअंदाज कर पैक्सफेड और संस्कृत विश्वविद्यालय के कनिष्ठ अभियंताओं को प्रतिनियुक्ति के बाद पदोन्नति की सौगात दी जा रही है।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/rajan-mittal-Md-setu-nigam.jpg"><img class="  wp-image-16741 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/rajan-mittal-Md-setu-nigam-215x300.jpg" alt="rajan mittal (Md) setu nigam" width="81" height="113" /></a>पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है, जो लोग भी पदोन्नति अहर्ताओं को पूरा कर रहे हैं उसकी सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही पदोन्नति की जायेगी। यह सही नहीं है कि प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कनिष्ठ अभियंताओं को प्रोन्नत किया गया है।<br />
<strong>इं. राजन मित्तल, एमडी, राजकीय निर्माण निगम</strong></p></blockquote>
<p>बता दें कि कतिपय कारणों से उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम संवर्ग के अभियंताओं की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जाती रही है। यहां तक कि सर्वोच्च प्राथमिकता वाले मुख्य सचिव के प्रोन्नति संबंधी आदेशों की अनदेखी भी निर्माण निगम में जारी है। संयुक्त इंजीनियर्स समिति के अध्यक्ष मिर्जा फिरोज शाह ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम संवर्ग के अभियंताओं की प्रोन्नति की अर्हता में शिथिलता न करते हुये अज्ञात कारणों से पैक्सफेड, संस्कृत विश्वविद्यालय आदि जैसे विभागों के कनिष्ठ अभियंताओं और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लिया जा रहा है। इतना ही नहीं नियम विरुद्ध प्रोन्नति कर परियोजना प्रबंधक और महाप्रबंधक भी बनाया जा रहा है, जबकि इन्हें उच्च गुणवत्ता वाले बड़े भवनों के निर्माण का नाम मात्र भी अनुभव नहीं है। साथ ही बीते वर्ष निगम प्रबंध तंत्र और संयुक्त इंजीनियर्स समिति पदाधिकारियों के मध्य हुई बैठक के कार्यवृत्त में लिये गये निर्णयों पर भी अत तक कोई प्रगति नहीं हुई है। निगम प्रबंध तंत्र के इस आचरण से इंजीनियङ्क्षरग संवर्ग में रोष व असंतोष व्याप्त है। निगम के सभी संघ इस निगम प्रबंध तंत्र की इस कार्यशैली की घोर निंदा करते हैं। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम प्रबंध तंत्र की इस उपेक्षित कार्यशैली से राजकीय निर्माण निगम के अभियंता आहत और आक्रोशित हैं।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/firoz-shah-copy.jpg"><img class="  wp-image-16742 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/firoz-shah-copy-274x300.jpg" alt="firoz shah copy" width="97" height="106" /></a>11 सूत्रीय मांग पत्र पर जनवरी 2018 में प्रोन्नतियों एवं नियुक्तियों हेतु रिक्त पदों को तत्काल भरे जाने का निर्णय हुआ, लेकिन अभी तक इस पर अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है। निगम के अभियंताओं की उपेक्षा कर विभिन्न विभागों व संस्थानों के कनिष्ठï अभियंताओं को प्रतिनियुक्ति एवं पदोन्नति दी जा रही है।<br />
<strong>इं. मिर्जा फिरोज शाह, अध्यक्ष, संयुक्त इंजीनियर्स समिति</strong></p></blockquote>
<p><strong>&#8230;ताकि निगम में बनी रहे औद्योगिक शान्ति</strong></p>
<p>संयुक्त समिति के महामंत्री एसडी द्विवेदी ने बताया कि बीते दिनों निगम अभियंताओं और कर्मचारियों के हित में प्रबंध तंत्र को 11 सूत्रीय मांग पत्र दिया गया था, जिस पर हुये समझौते के अनुसार तत्काल कार्यवाही अपेक्षित थी, लेकिन अभी तक ऐसा संभव नहीं हुआ है। निगम में रिक्त पदों पर तत्काल अर्हता में शिथिलता एवं पदोन्निति की जाय जिससे निगम में औद्योगिक शान्ति बनी रहे। इन 11 सूत्रीय मांगों में निगम में विभाग की भांति प्रोन्नति की व्यवस्था लागू करने, स्वीकृत जनशक्ति नियोजन के अनुसार प्रतिनियुक्ति के लिये स्वीकृत पदों पर भवन निर्माण में दक्ष अभियंताओं को ही लेने, प्रतिनियुक्ति पर आये अभियंताओं का निगम में संविलियन न करने, निगम हित में सीधी भर्ती के रिक्त सभी पदों पर तत्काल भॢतयां प्रारम्भ करने, अभियंताओं का लम्बित विनियमितीकरण तत्काल करने, निगमकॢमयों को पंचम एवं छठे वेतनमान के बकाया एरियर का भुगतान अविलम्ब कराने और राज्यकॢमयों की भांति निगमकॢमयों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने आदि मांगे प्रमुख हैं।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/sd-divedi-copy.jpg"><img class="  wp-image-16744 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2019/03/sd-divedi-copy-268x300.jpg" alt="sd divedi copy" width="88" height="99" /></a>बीते वर्ष निगम प्रबंध तंत्र और समिति पदाधिकारियों के मध्य वार्ता के में हुये निर्णय के अनुरुप न निगम में रिक्त पदों पर प्रोन्नतियां की गई और न ही नवीन नियुक्तियां। निगम प्रबंध तंत्र की उपेक्षित कार्यशैली से अभियंताओं में अत्यंत रोष एवं कुंठा व्याप्त है।</p>
<p><strong>इं. एसडी द्विवेदी, महामंत्री, संयुक्त इंजीनियर्स समिति</strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://businesslinknews.com/ignoring-promotion-engineer-angry/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
