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	<title>Business Link &#187; लॉकडाउन</title>
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	<description>Breaking News</description>
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		<title>वैदिक और स्मार्ट सिटी के समन्वय का मॉडल बनेगी नव्य अयोध्या</title>
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		<pubDate>Fri, 18 Sep 2020 09:16:42 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>
		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[हर राज्य, कोरिया समेत पांच देशों, आश्रमों, मठों, डॉरमेट्री के लिए आरक्षित होंगे भूखंड सूरज की किरणों जैसा नजर आएगा सड़कों का संजाल गिरीश पांडेय लखनऊ। चौड़ी सड़कें। दोनों किनारों पर लकदक हरियाली। सूर्योदय होने पर होटल की खिड़की से झांकते ही देश की पंच नदियों में से एक पवित्र सरयू नदी और रामलला के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हर राज्य, कोरिया समेत पांच देशों, आश्रमों, मठों, डॉरमेट्री के लिए आरक्षित होंगे भूखंड</strong><br />
<strong>सूरज की किरणों जैसा नजर आएगा सड़कों का संजाल</strong></p>
<p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/07/girish-ji1.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-21689" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2020/07/girish-ji1.jpg" alt="girish ji" width="100" height="137" /></a></p>
<p><strong>गिरीश पांडेय</strong></p>
<p><strong> लखनऊ।</strong> चौड़ी सड़कें। दोनों किनारों पर लकदक हरियाली। सूर्योदय होने पर होटल की खिड़की से झांकते ही देश की पंच नदियों में से एक पवित्र सरयू नदी और रामलला के भव्य मंदिर का दीदार। रात तो ऐसी दिखेगी मानों आसमान के सारे तारे सरयू में ही उतर आए हों। नव्य अयोध्या के बारे में कुछ ऐसी ही परिकल्पना है, अपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की। उत्तर प्रदेश आवास-विकास परिषद इसको प्रारंभिक स्वरूप भी दे चुका है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के सामने इसका प्रस्तुतिकरण भी हो चुका है। कुल मिलाकर नव्य अयोध्या वैदिक और स्मार्ट सिटी का मॉडल बनेगी।</p>
<p><strong>पर्यटकों की सुविधाओं को मिलेगी खास तरजीह</strong><br />
देश-दुनिया में भगवान श्रीराम की स्वीकार्यता के मद्देनजर अयोध्या में भव्य राम मंदिर और दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम की प्रतिमा बनने के साथ अयोध्या दुनिया भर के रामभक्तों और अन्य लोगों के आस्था का केंद्र बनेगा। हर कोई अपने आराध्य का दर्शन करने एक बार जरूर अयोध्या आना चाहेगा। लिहाजा नव्य अयोध्या में इनकी सुविधा का खास खयाल रखा गया है।</p>
<p><strong>पांच फाइव, 10 थ्री और 15 बजट होटल के भी प्लान</strong><br />
इसके लिए पांच फाइव स्टार, 10 थ्री स्टार और 15 अजट होटलों के लिए स्थान आरिक्षत किए जाएंगे। यह उन 20 होटलों से अलग होंगे जिनके लिए नई पर्यटन नीति के बाद पर्यटन विभाग को प्रस्ताव मिल चुके हैं। हालांकि भगवान श्रीराम की स्वीकार्यता के मद्ददेनजर मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे अधिक जमीन की मांग निकलेगी। ऐसे में कुछ बहुमंजिला भवनों को भी प्लान में शामिल करें। इसके अलावा कोरिया समेत पांच देशों और 25 राज्यों के लिए अतिथि गृह, अलग-अलग धर्मों, संप्रदायों और आश्रमों के लिए, मठों और स्वयंसेवी संगठनों के लिए भी करीब 100 भूखंड आरक्षित किए जाएंगे। सभी बुनियादी सुविधाओं से युक्त सर्विस अपार्टमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, सरयू की पवित्रता और अविरलता अप्रभावित रहे इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा।</p>
<p><strong>वैदिक शहरों की तरह धनुषाकार होगी नव्य अयोध्या</strong><br />
प्रस्ताव के मुताबिक नव्य अयोध्या वैदिक कालीन आम शहरों की तरह धनुष के आकार का होगा। इसमें करीब 80 मीटर चौड़ी सड़कों का संजाल होगा। ये सड़कें ऐसी ऊपर से सूर्य की किरणों के समान दिखेंगी। सड़कों के किनारे लकदक हरियाली के लिए ग्रीनबेल्ट विकसित की जाएगी। यह सब होगा करीब 740 एकड़ भूमि पर। इसमें माझा बरहटा में 57.64, माझा शहनवाजपुर में 293.79 और माझा तिहुरा की 388.41 एकड़ जमीन पर। यह जमीन लखनऊ-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 बी पर है। लखनऊ से गोरखपुर जाते समय दाहिने ओर सरयू के किनारे निर्मित बंधे के बीचोबीच और प्रस्तावित श्रीराम की प्रतिमा के लिए अधिसूचित भूमि से लगी हुई है।</p>
<p>अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए मैं प्रदेश सरकार की सराहना करता हूं। रामनगरी के विकास के लिए सरकार ने जो महत्वपूर्ण योजना बनाई है उस पर हम प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। इससे अयोध्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन का केंद्र बनकर उभरेगा और पर्यटन उद्योग के क्षेत्र में निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा। जिससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अयोध्या में पर्यटन उद्योग विकसित होने से एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा।<br />
<strong>आलोक रंजन, पूर्व मुख्य सचिव/मुख्य संरक्षक, स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा)</strong></p>
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		<title>राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने दी  प्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलि </title>
		<link>http://businesslinknews.com/21903president-vice-president-prime-minister-paid-tribute-to-pranab-mukherjee/</link>
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		<pubDate>Tue, 01 Sep 2020 12:23:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>

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		<description><![CDATA[नयी दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व राष्ट्रपति  प्रणब मुखर्जी के निवास पर जाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। पूर्व राष्ट्रपति के 10 राजाजी मार्ग स्थित निवास पर सबसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने पहुंच कर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली।</strong> राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्व राष्ट्रपति  प्रणब मुखर्जी के निवास पर जाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। पूर्व राष्ट्रपति के 10 राजाजी मार्ग स्थित निवास पर सबसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने पहुंच कर भारत रत्न श्री मुखर्जी के चित्र पर पुष्पचक्र चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष श्री बिरला ने दिवंगत नेता को श्रद्धा सुमन अर्पित किये। बाद में प्रधानमंत्री श्री मोदी, उपराष्ट्रपति श्री नायडु और राष्ट्रपति श्री काेविंद ने भी पुष्पचक्र के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और गुलाम नबी आज़ाद, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, भाजपा के नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी 10 राजाजी मार्ग पहुंच कर पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धासुमन अर्पित किये।</p>
<p>चूंकि श्री मुखर्जी कोविड 19 से संक्रमित थे इसलिए उनके पार्थिव शरीर को अलग रखा गया था और सभी विभूतियों ने उनके चित्र पर पुष्पाजंलि अर्पित की। इस मौके पर वहां शारीरिक दूरी एवं कोविड 19 संबंधी अन्य सावधानियां बरतीं गयीं। सैन्य अस्पताल में 21 दिनों तक भर्ती रहने के बाद श्री मुखर्जी का सोमवार शाम को निधन हो गया था। उनका पार्थिव शरीर आज सुबह अस्पताल से उनके निवास पर लाया गया। उनका अंतिम संस्कार पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ आज दोपहर बाद लोदी रोड स्थित श्मशान में किया जाएगा। श्री मुखर्जी के निधन पर देश में सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गयी है।</p>
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		<title>देश के आर्थिक विकास में लघु उद्योगों की महत्वपूर्ण भूमिका : आलोक रंजन</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Aug 2020 08:53:38 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निमग]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
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		<category><![CDATA[स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफ़ैक्चर्रस एसोसिएशन]]></category>

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		<description><![CDATA[&#8216;सीमा&#8217; के मुख्य संरक्षक ने दी अंतरराष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस की बधाई  सरकार को लघु उद्योगों के लिए प्रभावी आर्थिक पैकेज लाना चाहिए : शैलेन्द्र मन की बात में पीएम का खिलौना उद्योग की बात करना लाखों लोगों की संजीवनी का काम करेगा : पंकज बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा) &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><em><strong>&#8216;सीमा&#8217; के मुख्य संरक्षक ने दी अंतरराष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस की बधाई </strong></em></p>
<p><em><strong> सरकार को लघु उद्योगों के लिए प्रभावी आर्थिक पैकेज लाना चाहिए : शैलेन्द्र</strong></em></p>
<p><em><strong>मन की बात में पीएम का खिलौना उद्योग की बात करना लाखों लोगों की संजीवनी का काम करेगा : पंकज</strong></em></p>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong><br />
<strong>लखनऊ।</strong> स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा) के मुख्य संरक्षक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने अंतरराष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस (30 अगस्त) की बधाई दी है। इस बाबत अपने जारी बयान में उन्होंने कहा कि लघु उद्योग दिवस प्रत्येक वर्ष 30 अगस्त को यह दिवस लघु उद्योगों को बढ़ावा देने और बेरोजगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनाया जाता है। भारत जैसे विकासशील देश के आर्थिक विकास में लघु उद्योगों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका है।</p>
<p>संस्था के अध्यक्ष शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने इस मौके पर देश के सभी लघु उद्योगों को शुभकामना देते हुए कहा कि कोरोना संकट में लघु उद्योगों के सामने विकट समस्या आ गई है। इस दिवस के माध्यम से सरकार को लघु उद्योगों के लिए प्रभावी आर्थिक पैकेज लाना चाहिए।</p>
<p>संस्था के मुख्य आर्थिक सलाहकार एवं वरिष्ठ सीए पंकज जायसवाल ने कहा कि आज मन की बात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा खिलौना उद्योग की बात करना लाखों लोगों को इस उद्यम और रोजगार से जोडऩे में संजीवनी का काम करेगा। इससे खिलौना व्यापार में चीन का प्रभुत्व धीरे-धीरे कम होता जाएगा।</p>
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		<item>
		<title>नमामि गंगे की योजनाओं को समयबद्ध एवं निर्धारित समय में करें पूरा : मुख्य सचिव</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 10:43:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>

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		<description><![CDATA[लखनऊ। प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में राज्य गंगा समिति एवं गवर्निंग काउंसिल की सातवीं बैठक आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित योजनाओं को समयबद्ध एवं निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाए तथा बेहतर पर्यवेक्षण के लिए निर्माणाधीन &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लखनऊ।</strong> प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी की अध्यक्षता में राज्य गंगा समिति एवं गवर्निंग काउंसिल की सातवीं बैठक आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित योजनाओं को समयबद्ध एवं निर्धारित समयावधि में पूरा किया जाए तथा बेहतर पर्यवेक्षण के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं की माहवार भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समय-सारिणी निर्धारित की जाए। प्रमुख सचिव नमामि गंगे अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में नमामि गंगे कार्यक्रम के अन्तर्गत 10078.25 करोड़ की सीवरेज सम्बंधित 44 योजनाएं स्वीकृत हैं, इनमें से 16 योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 21 योजनाओं का कार्य प्रगति पर है एवं सात योजनाएं निविदा प्रक्रिया में हैं। उन्होंने बताया कि 13 नई योजनाएं लागत 3797.81 करोड़ रुपये के डीपीआर एनएमसीजी को स्वीकृति के लिए भेजा गया है।</p>
<p>वहीं मुख्य सचिव ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की योजनाओं की भी समीक्षा की और बताया गया कि लखनऊ, बिजनौर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, कानपुर, रायबरेली, प्रयागराज एवं वाराणसी में प्रयोगशाला के सुदृढ़ीकरण के लिए 38.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गए हैं तथा सभी स्थानों पर समयबद्ध रूप से कार्य किये जा रहे हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि गंगा बेल्ट में आठ प्रयोगशालाएं स्थापित हैं तथा 34 जगहों पर जल गुणता की मॉनिटरिंग हो रही है और गतवर्ष की तुलना में जल की गुणवत्ता में बहुत सुधार आया है। गंगा में मिलने वाले नालों के संबंध में बताया गया कि गंगा के किनारे स्थित 144 नाले नदी में मिल रहे हैं, इनमे ंसे 93 नाले एसटीपी से टैप हैं तथा 51 नालों पर जाली लगी हुई है। इसके अलावा गंगा के किनारे शहरों के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए वर्तमान में 2650 टन क्षमता के संयंत्र संचालित हैं तथा जनपद बलिया, मीरजापुर, फर्रुखाबाद तथा गंगाघाट में संयंत्रों का निर्माण प्रगति पर है, इनके पूरा हो जाने पर कुल क्षमता 2950 टन प्रतिदिन की हो जाएगी।</p>
<p>बैठक में यह भी बताया गया कि जनपद कानपुर में विकास प्राधिकरण की फंडिंग से सिंचाई विभाग द्वारा गंगा बैराज के पास बोट क्लब का निर्माण कराया जा रहा है, सिविल कार्य पूरा हो चुका है तथा अन्य शेष कार्य माह दिसम्बर, 2020 तक पूरा हो जाएगा। जनपद प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे बोट क्लब अधिष्ठापित है और प्राधिकरण द्वारा संचालित है। बरेली सीवरेज योजना के लिए भूमि अधिग्रहण के सम्बंध में बताया कि नगर विकास विभाग द्वारा कुल अपेक्षित धनराशि 243.89 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई तथा अग्रेत्तर कार्यवाही प्रगति पर है।</p>
<p>इससे पूर्व बैठक में उप्र जल निगम द्वारा सीवरेज सम्बंधी योजनाओं, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा अन्य कम्पोनेंट से सम्बंधी योजनाओं, वन विभाग द्वारा वनीकरण एवं वन विभाग से सम्बन्धी योजनाओं तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदूषण नियंत्रण से सम्बंधित योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया। बैठक में नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति, पर्यावरण एवं वन, नगर विकास, वित्त, सिंचाई एवं जल संसाधन, आवास एवं शहरी नियोजन, औद्योगिक विकास, एमएसएमई, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, कृषि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम सहित अन्य सम्बंधित विभागों के अधिकारी आदि उपस्थित थे।</p>
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		<item>
		<title>लॉकडाउन के बाद पटरी पर आयी ड्राइविंग लाइसेंस की व्यवस्था</title>
		<link>http://businesslinknews.com/arrangement-for-driving-license-on-track-after-lockdown/</link>
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		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 09:24:57 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[परिवाहन]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>

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		<description><![CDATA[टीपीनगर आरटीओ कार्यालय में दिख रहा सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन का बेहतर समन्वय पंकज पांडेय लखनऊ। ट्रांसपोर्टनगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में लॉकडाउन के बाद शुरू हुई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब पटरी पर आ गई है। आरटीओ कार्यालय में थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन व सोशल डिस्टेंसिंग के बेहतर समन्वय से यह काम &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>टीपीनगर आरटीओ कार्यालय में दिख रहा सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन का बेहतर समन्वय</strong></p>
<p><strong>पंकज पांडेय </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> ट्रांसपोर्टनगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में लॉकडाउन के बाद शुरू हुई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब पटरी पर आ गई है।<br />
आरटीओ कार्यालय में थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन व सोशल डिस्टेंसिंग के बेहतर समन्वय से यह काम आसानी से हो रहा है। लॉकडाउन के बाद तीन चरणों में शुरू की गई डीएल बनवाने की व्यवस्था में सोशल डिस्टेंसिंग, आवेदकों को कोरोना से बचाव में हरसंभव मददगार साबित हो रही है। प्रत्येक शिफ्ट में 100 से अधिक डीएल आवेदकों की भीड़ के बावजूद संभागीय निरीक्षक की निगरानी में इस काम को बेहतर तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। आरटीओ कार्यालय में रोजाना अच्छी खासी तादात में डीएल आवेदक पहुंच रहे हैं। ऐसे में अफसरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की सुचारू व्यवस्था बनाए रखना और आवेदकों को कोरोना से बचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। मगर, अफसरों की निगरानी में कोरोना से बचाव के मूलमंत्र सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन व थर्मल स्क्रीनिंग के बेहतर तालमेल से सुचारू व्यवस्था कायम हो सकी। बताते चलें कि कोरोना के चलते लगाए गए लॉकडाउन के बाद बीते 6 जून से आरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। इस दौरान 10 से 12, 12:30 से 2:30 और 3 से 5 बजे तक तीन शिफ्टों में आवेदकों को बुलाने की व्यवस्था बनाई गई। मौजूदा समय में प्रत्येक शिफ्ट में लर्निंग लाइसेंस के 20-20 आवेदक, रिन्यूवल के 22 और परमानेंट डीएल के 92 आवेदक कार्यालय बुलाए जा रहे हैं। ऐसे में रोजाना 60 लर्निंग लाइसेंस, 66 रिन्यूवल लाइसेंस और 276 परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>परमिट प्रकरण की जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में</strong></p>
<p>परमिट रिन्यूवल की लेटफीस में हुए घपले की जांच का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में है। परिवहन विभाग मुख्यालय में इस प्रकरण की गोपनीय शिकायत पर अपर परिवहन आयुक्त प्रशासन मुकेश चंद्र ने मामले से संबंधित पत्रावलियां तलब कीं। मगर, अपर परिवहन आयुक्त प्रशासन के इस पत्र को भी आरटीओ कार्यालय में दबाए रखा गया। हालांकि अखबारों में खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में कार्रवाई की बात की गई। मगर, फिर भी हाल फिलहाल मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रकरण में आरोपित सेवानिवृत्त कर्मचारी रोजाना दफ्तर पहुंचकर पत्रावलियों में छेड़छाड़ कर रहे हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो मामले का दूसरा आरोपी आरटीओ का स्टेनोग्राफर पूर्व की भांति अपना मूल कार्य छोड़कर चार अन्य पटलों पर कार्य कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि आरटीओ का कृपा पात्र होने के नाते एनओसी, अस्थाई पंजीयन, परमिट समेत अन्य मूल कार्य से अलग काम स्टेनोग्राफर कर रहा है। बताते चलें कि परिवहन आयुक्त कार्यालय में परमिट रिन्यूवल की लेटफीस का नौ लाख रुपया हड़पने की गोपनीय शिकायत की गई थी।</p>
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		<title>रक्षा उद्योग का नया मैन्यूफैक्चरिंग हब बनेगा उत्तर प्रदेश</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Aug 2020 09:17:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
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		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
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		<description><![CDATA[घरेलू रक्षा विनिर्माण इकाईयों को मिलेंगे रु 4 लाख करोड़ के कार्य 6 जनपदों के 5,072 हेक्टेयर क्षेत्रफल में डिफ़ेंस कॉरीडोर हो रहा है स्थापित, बुंदेलखण्ड को होगा सबसे अधिक लाभ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में यूपी का होगा विशेष योगदान लखनऊ, कानपुर, आगरा और अलीगढ़ में डिफेंस कॉरीडोर बुंदेलखण्ड के झांसी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong><em>घरेलू रक्षा विनिर्माण इकाईयों को मिलेंगे रु 4 लाख करोड़ के कार्य</em></strong></li>
<li><strong><em>6 जनपदों के 5,072 हेक्टेयर क्षेत्रफल में डिफ़ेंस कॉरीडोर हो रहा है स्थापित, बुंदेलखण्ड को होगा सबसे अधिक लाभ</em></strong></li>
<li><strong><em>रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में यूपी का होगा विशेष योगदान</em></strong></li>
<li><strong><em>लखनऊ, कानपुर, आगरा और अलीगढ़ में डिफेंस कॉरीडोर</em></strong></li>
<li><strong><em>बुंदेलखण्ड के झांसी और चित्रकूट की बदलेगी तस्वीर</em></strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्र सरकार ने 101 सैन्य उपकरणों, हथियारों और वाहनों के आयात पर 2024 तक रोक लगाई है। अब इनका निर्माण घरेलू स्तर पर किया जाएगा। इस निर्णय का सबसे अधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिलेगा। प्रदेश की रक्षा विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों के प्रोत्साहन में यह मील का पत्थर साबित होगा। उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना लखनऊ, कानपुर, आगरा, झांसी, चित्रकूट और अलीगढ़ जनपदों में की जा रही है। राज्य सरकार ने इन जनपदों के सम्पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र को डिफेन्स कॉरिडोर में समाहित किया है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में वर्तमान में अलीगढ़, कानपुर, झांसी एवं चित्रकूट जिलों में 1,289 हेक्टेयर से भी ज्यादा भूमि रक्षा कॉरिडोर की स्थापना के लिए अधिग्रहित कर ली गई है। अलीगढ़ रक्षा कॉरिडोर में अधिग्रहित भूमि निवेशकों को आंवटित कर दी गई है। साथ ही और भूमि अधिग्रहित करने के प्रयास तेज हैं। उत्तर प्रदेश सरकार बीते वर्षों से ही घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े और कड़े कदम लगातार उठा रही है। उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना 6 जनपदों के 5,072 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जा रही है। इस कॉरीडोर का सबसे अधिक लाभ बुंदेलखण्ड को होगा। झांसी में 3,025 हेक्टेयर, कानपुर में 1,000 हेक्टेयर, चित्रकूट में 500 हेक्टेयर और आगरा में 300 हेक्टेयर भूमि पर कॉरिडोर के नोड्स स्थापित किये जा रहे हैं। इसके अलावा इस डिफेंस कॉरीडोर का विशेष हिस्सा लखनऊ और अलीगढ़ जनपदों में भी स्थापित किया जा रहा है।</p>
<p>आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारतीय नौसेना ‘नेवल इनोवशन एण्ड इण्डीजनाइजेशन आर्गनाइजेशन, एनआईआईओ‘ के अन्तर्गत ‘नेवल टेक्नोलॉजी एक्सलरेशन कॉन्सिल‘ का गठन किया। साथ ही ‘टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एक्सलेशन सेल‘ का गठन किया गया है। इस योजना का ऑनलाइन उद्घाटन 13 अगस्त 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में करेंगे। इस दौरान जनरल विपिन रावत, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम, एडीसी और प्रमुख डिफेन्स स्टाफ उपस्थित रहेंगे।</p>
<p>भारतीय नौसेना के उत्तर प्रदेश डिफेन्स इण्डिस्ट्रियल कॉरिडोर में प्रतिभाग करने से उद्योग, एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप उद्योगों का खरीददारों से सीधा सम्पर्क होगा। इसके परिणामस्वरूप वे भारतीय नौसेना के जरूरतों को पूर्ण करने में सुगमता होगी। इस योजना के माध्यम से स्वदेशीकरण में सुगमता के साथ ही साथ डिफेन्स उत्पादन इको सिस्टम में और भी उद्योग जुड़ेंगे। यूपीडा ने आईआईटी, बीएचयू एवं कानपुर के सहयोग से ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स‘ की स्थापना की है, जो भारतीय नौसेना के सहयोग से उद्योग-विद्या संस्थान एवं उपभोक्ताओं के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि भारत के रक्षा उद्योग क्षेत्र में बहुत ही तेजी से बदलाव आ रहे हैं। बीते दिनों रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने ऐतिहासिक लेते हुए हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मालवाहक विमान, पारंपरिक पनडुब्बियां, तोपें, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें सहित 101 विभिन्न उपकरणों व हथियारों के आयात पर पाबंदी लगाई है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस निर्णय से अगले कुछ वर्षों में घरेलू रक्षा उद्योग को लगभग 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कार्य मिलेंगे।</p>
<p>इससे पूर्व ‘मेक इन इंडिया‘ योजना के तहत देष के अन्दर उत्तर प्रदेश और तमिलनाडू राज्य में रक्षा उद्योग कॉरिडोर की घोषणा इस आषय से की गयी है कि रक्षा उत्पादन की क्षमता को प्रोत्साहित कर विदेशों पर निर्भरता कम करते हुए राष्ट्र को रक्षा क्षेत्र में भी ‘आत्मनिर्भर‘ बनाया जा सके। उत्तर प्रदेश में स्थापित रक्षा उद्योग कॉरिडोर एक ‘ग्रीन फील्ड‘ परियोजना है, जिसके तहत रक्षा उत्पादन क्षेत्र की इकाइयों को और सुदृढ़ करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अनेक प्रोत्साहन एवं सब्सिडी की व्यवस्था की है।</p>
<p>बता दें कि उत्तर प्रदेश में पहली बार फरवरी 2020 में आयोजित हुए डेफ एक्सपो-2020 में 50,000 करोड़ रुपये के एमओयू हस्ताक्षरित किये। इसके अन्तर्गत विभिन्न संस्थाओं ने प्रदेश के रक्षा क्षेत्र में निवेश करने में विशेष रुचि ली है।</p>
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		<title>नई शिक्षा नीति से रखी जाएगी नए भारत की नींव : पीएम मोदी</title>
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		<pubDate>Fri, 07 Aug 2020 09:16:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि तीन-चार साल के विचार-मंथन और लाखों सुझावों के बाद नई शिक्षा नीति को मूर्त रूप दिया गया है और यह नए भारत की नींव रखने का काम करेगा। श्री मोदी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में होने वाले परिवर्तनकारी सुधारों पर आयोजित राष्ट्रीय &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि तीन-चार साल के विचार-मंथन और लाखों सुझावों के बाद नई शिक्षा नीति को मूर्त रूप दिया गया है और यह नए भारत की नींव रखने का काम करेगा। श्री मोदी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में होने वाले परिवर्तनकारी सुधारों पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज हर विचारधारा के लोग इस नयी शिक्षा नीति पर मंथन कर रहे हैं। इस नीति का कोई विरोध नहीं कर रहा है क्योंकि इसमें कुछ भी एकतरफा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कोई सर्कुलर नहीं बल्कि एक महायज्ञ है, जो नए देश की नींव रखेगा और एक सदी तैयार करेगा।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा नीति में देश के लक्ष्यों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि भविष्य के लिए पीढ़ी को तैयार किया जा सके। कई दशकों से शिक्षा नीति में बदलाव नहीं हुआ था इसलिए समाज में भेड़चाल को प्रोत्साहन मिल रहा था। कभी डॉक्टर, कभी इंजीनियर कभी वकील बनाने की होड़ लगी हुई थी लेकिन अब युवा क्रिएटिव विचारों को आगे बढ़ा सकेगा, अब सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि वर्किंग कल्चर को विकसित किया गया है। युवाओं में क्रिटिकल सोच विकसित करना होगा। उन्होंने कहा, “ हमारे सामने सवाल था कि क्या हमारी नीति युवाओं को अपने सपने पूरा करने का मौका देती है। क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था युवा को सक्षम बनाती है। नई शिक्षा नीति को बनाते समय इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया है। दुनिया में आज एक नई व्यवस्था खड़ी हो रही है, ऐसे में उसके हिसाब से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। नयी शिक्षा नीति में ऐसा प्रावधान किया गया है कि छात्रों को &#8216;ग्लोबल सिटीजन&#8217; बनाने के साथ साथ उनको अपने जड़ों से भी जोड़कर रखना है।”<br />
श्री मोदी ने कहा कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में सीखने की भाषा एक ही होनी चाहिए ताकि बच्चों को सीखने में आसानी हो। पांचवीं कक्षा तक बच्चों को जहां तक संभव हो उनकी मातृभाषा में ही शिक्षा देने की व्यवस्था हो। अभी तक शिक्षा नीति &#8216;व्हाट टू थिंक के साथ आगे बढ़ रही थी, अब हम लोगों को हाउ टू थिंक पर जोर देंगे। बच्चों पर किताबों का बोझ कम करना होगा। उच्च शिक्षा को स्ट्रीम से मुक्त करना होगा। श्री मोदी ने कहा देश में ऊंच-नीच का भाव, मजदूरों के प्रति हीन भाव क्यों पैदा हुआ। इसके पीछे बड़ी वजह शिक्षा का समाज से लगाव नहीं होना रहा है। इस नयी शिक्षा नीति में इस पर भी विशेष जोर दिया गया है। छात्र जब तक किसानों को खेतों में काम करते नहीं देखेंगे तब तक श्रम की महत्ता को कैसे समझेंगे।</p>
<p>इस सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और शिक्षा मंत्रालय ने मिलकर किया है। इसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल&#8221; निशंक &#8220;और शिक्षा राज्य मंत्री डॉ संजय धोत्रे तथा अन्य अधिकारीगण भी मौजूद थे। इस सम्मेलन में देश के एक हजार से भी अधिक विश्वविद्यालय, 45 हजार से अधिक डिग्री कॉलेज, आईआईटी, आईआईआईटी, आईआईएम, एनआईटी सहित देश के लगभग 150 से भी अधिक राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों ने हिस्सा लिया। देशभर के कुलपति और संस्थानों के प्रमुख भी शामिल हुए।</p>
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		<title>टैक्स वैलेट योजना लाये सरकार</title>
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		<pubDate>Thu, 30 Jul 2020 08:53:55 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[विचार मंच]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
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		<description><![CDATA[जिस प्रकार कोरोना ने आम आदमी और व्यापारियों के आय को बुरी तरह से प्रभावित किया है, उसी तरह से इस कोरोना ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। हम इस परेशानी को ऐसे समझ सकते हैं कि जब हमारे परिवार में पांच लोग हैं तो हम एक तरफ &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p>जिस प्रकार कोरोना ने आम आदमी और व्यापारियों के आय को बुरी तरह से प्रभावित किया है, उसी तरह से इस कोरोना ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। हम इस परेशानी को ऐसे समझ सकते हैं कि जब हमारे परिवार में पांच लोग हैं तो हम एक तरफ अपनी खत्म या कम हो रही आय और दूसरी तरफ उनके स्वास्थ्य और भोजन की चिंता को लेकर चिंतित हैं तो सरकार के पास तो 130 करोड़ का परिवार है उनकी चिंता कितनी बड़ी होगी, और ऐसे समय में जब उन्होंने अपने लगभग सारे टैक्स संग्रह को आगे कई महीनों तक सरका दिया है, मतलब जब तक कोई स्वेच्छा से एडवांस टैक्स ना भरे तो सरकार को आय होने वाली नहीं है और जब सरकार को आय होगी नहीं तो वह इतना बड़ा स्वास्थ्य इन्फ्रा को कब तक खींच पाएगी। अत: यह जरूरी है कि सरकार में इस पर मंथन हो की सरकार अपने राजस्व की व्यवस्था कैसे करे। इस सम्बंध में सरकार को कुछ सुझाव है जिस पर अमल कर सरकार पाने लिए वित्त की व्यवस्था कर सकती है।<br />
पहला सरकार को सबसे पहली अपने घोषित बजट का पुनर्गठन करना चाहिए। बजट 2020-21 देश में सामान्य परिस्थितियों के लिए पारित हुआ था और वित्त वर्ष शुरू होते ही देश असामान्य परिस्थितियों से घिर गया है अब तक एक तिहाई वर्ष बीत चुका है और आगे भी स्पष्ट नहीं है की असामान्य परिस्थिति का माह कितना लम्बा चलेगा। मोटा-मोटी अनुमान है कि दिसम्बर से हालात सामान्य होंगे और फिर पहले जैसी पटरी पर शायद 2021-22 से देश चले। ऐसे में बजट 2020-21 में घोषित सभी अनुमान, संग्रह लक्ष्य एवं योजनागत एवं गैर योजनागत खर्च सबकी राशि बदलनी वाली है। सबकी प्राथमिकताएं बदलने वाली हैं।</p>
<p>अत: बजट का पुनर्गठन किया जाए, बजाये वित्त वर्ष के अंत में न प्रयोग किये गए राशि को सरकार को वापस कर, उससे पहले जिस विभाग को उस फंड की सबसे अधिक जरूरत है। जैसे कि स्वास्थ्य में अधिक बजट आवंटित हो और जिस मंत्रालय या विभाग का खर्च इस कोरोना के कारण सिकुड़ गया हो वहां के लिये आवंटित बजट को निरस्त कर उसे जरूरतमंद विभाग को दिया जाय। इस प्रकार सभी बजट मदों का निरीक्षण कर इसका पुनर्गठन किया जाय ताकि इस लड़ाई से लडऩे के लिये सरकार के पास कर संग्रह नगण्य होने की दशा में वित्त का कुछ मद आ सके।</p>
<p>सरकार को कुछ लोग लिकर पर बिक्री की छूट देकर राजस्व संग्रह के लिए बोल रहे हैं उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि इस कदम का सिर्फ आर्थिक प्रभाव ही नहीं सामाजिक प्रभाव भी हैं। अत: लिकर पर कोरोना सेस 100 प्रतिशत लगा, इसे नियंत्रित रूप में आधार लिंक कोटे के तहत सिर्फ एडवांस आर्डर या ऑनलाइन आर्डर के द्वारा बेंचा जाना चाहिए, जिससे राजस्व संग्रह के साथ सोशल डिस्टेंसिंग और अत्यधिक उपभोग से होने वाले सामाजिक अपराध, पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य खतरों से भी लोग बच सकें।</p>
<p>इसके अलावा सरकार सबसे अधिक परेशान इसलिए है कि उसने आयकर जीएसटी सबके डेट बढ़ा दिए हैं, टीडीएस की दर भी कम कर दी है। सौदों की साइज भी कम हो गई है। अत: सरकार का राजस्व संग्रह नहीं के बराबर हो गया। बजट में अनुमानित कर की अपेक्षा, अत: इसके लिय सरकार को एडवांस आयकर एवं जीएसटी की एक टैक्स वैलेट स्कीम प्रोत्साहन रूप में लानी चाहिए, जिसके तहत यह लाभ देना चाहिए कि इस संकट के समय लडऩे के लिए जो कोई आयकर या जीएसटी इस वैलेट में देगा उसे इसका क्रेडिट आगे आने वाले अवधियों में चरणबद्ध तरीके से उसके उस कर विशेष के भुगतान में दी जाएगी और यदि किसी ने अपनी भविष्य की कर देयता से ज्यादा टैक्स का भुगतान इस टैक्स वैलेट में कर दिया है तो उसे स्वेच्छा से इस अधिक भुगतान की गई राशि को सरकारी बांड में बदलने का विकल्प देना चाहिए।</p>
<p>सरकार यदि यह विकल्प और टैक्स वैलेट प्रोत्साहन योजना लाती है तो बहुत सी बड़ी कंपनियां जिन्हें कुछ देश के लिए करने के लिए इच्छा है या कॅश रिच हैं, वह इस योजना को अपना सकती हैं, क्योंकि एक तो टैक्स का टैक्स पेमेंट हो जायेगा और देश की सेवा भी हो जायेगी, सरकार चाहे तो जब तक इस वैलेट में पड़ी राशि पर टैक्स पेमेंट या बांड परिवर्तन विकल्प का समायोजन नहीं होता है प्रोत्साहन के रूप में कुछ ब्याज भी दे सकती ताकि लोग करेंट, फिक्स्ड डिपॉजिट या सेविंग की जगह इच्छित राशि को इस वैलेट में रखने के लिए प्रोत्साहित हों। यहां सरकार को करना क्या है, उसे बस इस टैक्स भुगतान को प्री पुल करना है। पोस्टपोन की जगह और इसे प्रोत्साहन योजना से जोड़ देना है। आय का यह एडवांस संग्रह सरकार को आपदा के लिए ऋण लेने और उसके ब्याज के दबाब से भी मुक्त करेगा, और जो थोड़ा बहुत ब्याज देगा भी वह डीबीटी की तरह सीधे पब्लिक को ही मिलेगा। यह योजना केंद्र सरकार अपने सरकारी के लिए और राज्य सरकार अपने अन्य करों की लिए भी ला सकती है।</p>
<p>सरकार ऐसे मुश्किल हालत और असामान्य परिस्थितियों में पुन: छुपाये हुए आय, बेनामी संपत्ति या काले धन की स्वैच्छिक घोषणा की स्कीम ला सकती है जो उसने कुछ वर्ष पूर्व लाया था और पचास प्रतिशत टैक्स के भुगतान के रूप में बड़ी मात्रा में टैक्स का संग्रह कर सकती है, चूंकि यह असामान्य हालात हैं अत: सरकार को ऐसे असामान्य और विशेष निर्णय और आउट ऑफ द बॉक्स जाकर सोचना और लेना चाहिए।</p>
<p>स्वास्थ्य बजट पर पडऩे वाले दबाब को देखते हुए सरकार चाहे तो स्वास्थ्य बजट को टैक्स विवेकाधिकार योजना के तहत डायरेक्ट फंडिंग की भी योजना ला सकती है, जिसके तहत नागरिक, कंपनियां या फर्में डायरेक्ट स्वास्थ्य बजट अकाउंट में टैक्स का भुगतान करें और यदि इस अकाउंट में बजट से ज्यादा पैसे आ जाते हैं तो सरकार का विवेकाधिकार लागू हो जाए। चूंकि भारत का मूल चरित्र लोकोपकार का है। अत: चाहे टैक्स की उपरोक्त वैलेट स्कीम हो या स्वास्थ्य बजट को डायरेक्ट टैक्स फंडिंग की योजना हो जनता हाथों हाथ लेगी और हां इस स्वास्थ्य बजट के डायरेक्ट टैक्स फंडिंग टैक्स विवेकाधिकार स्कीम योजना के तहत आये राशि को आयकर की धारा 80 सी के तहत नहीं सीधे टैक्स पेमेंट ही मान लेना चाहिए, क्योंकि टैक्स का पेमेंट तो घूम कर इस कोरोना काल में स्वास्थ्य बजट में ही प्रयोग होने वाला था।</p>
<p>कोरोना से उपजे इस आर्थिक दिवालियेपन से लडऩे के लिए सरकार को इन उपायों के साथ-साथ आउट ऑफ द बॉक्स चिंतन करने के लिए अर्थ चिंतकों का एक मंडल बनाना चाहिए जिसमें ब्यूरोक्रेट के अतिरिक्त लोग हों जो सरकार को ब्यूरोक्रेट की सोच के अलावा वाले विकल्पों पर प्रकाश डाल सकें और सरकार को दोनों सोच का अध्ययन कर श्रेष्ठ निर्णय लेने का लाभ मिले।</p>
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		<title>कोरोना : दुनियाभर में 1.66 करोड़ से ज्यादा संक्रमित, 6.59 लाख से अधिक की मौत</title>
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		<pubDate>Wed, 29 Jul 2020 07:15:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मेडिकल]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[लॉकडाउन]]></category>

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		<description><![CDATA[बीजिंग/जिनेवा/नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसके दुनियाभर में अब तक 1.66 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, वहीं 6.59 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कोविड-19 के संक्रमितों के मामले में अमेरिका दुनिया भर में पहले, ब्राजील दूसरे और भारत &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीजिंग/जिनेवा/नई दिल्ली।</strong> वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसके दुनियाभर में अब तक 1.66 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, वहीं 6.59 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कोविड-19 के संक्रमितों के मामले में अमेरिका दुनिया भर में पहले, ब्राजील दूसरे और भारत तीसरे स्थान पर है। वहीं इस महामारी से हुई मौतों के आंकड़ों के मामले में अमेरिका पहले, ब्राजील दूसरे और ब्रिटेन तीसरे स्थान पर है जबकि भारत मृतकों की संख्या के मामले में छठे स्थान पर है।</p>
<p>अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार विश्वभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1,66,67,130 हो गयी है जबकि अब तक इस महामारी के कारण 6,59,045 लोगों ने जान गंवाई है। विश्व महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका में कोरोना से अब तक 43,49313 लोग संक्रमित हो चुके हैं तथा 1,49235 लोगों की मौत हो चुकी है। ब्राजील में अब तक 2483191 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं जबकि 88539 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में कोरोना से संक्रमितों की संख्या 15.31 के पार पहुंच गयी है। अब तक कुल 988029 मरीज स्वस्थ हुए हैं जबकि 34193 लोगों की इस महामारी से मौत हो चुकी है। देश में इस समय कोरोना के 509447 सक्रिय मामले हैं।</p>
<p>रूस कोविड-19 संक्रमित मामलों में चौथे नंबर पर है और यहां इसके संक्रमण से अब तक 822060 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 13,483 लोगों ने जान गंवाई है। दक्षिण अफ्रीका में कोरोना महामारी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है जिसके कारण कोरोना से संक्रमित होने के मामले में दक्षिण अफ्रीका पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। यहां इससे अब तक 459761 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 7257 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं मेक्सिको में कोरोना से अब तक 402697 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 44876 लोगों की मौत हुई है। पेरू में भी लगातार हालात खराब होते जा रहे है। यहां संक्रमितों की संख्या 3,89,717 हो गई तथा 18418 लोगों की मौत हो चुकी है। कोविड-19 से संक्रमित होने के मामले चिली अब आठवें नंबर पर पहुंच गया है। यहां इससे अब तक 349800 लोग संक्रमित हुए हैं और मृतकों की संख्या 9240 है।</p>
<p>ब्रिटेन संक्रमण के मामले में नौवें नंबर पर है। यहां अब तक इस महामारी से 302293 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 45,963 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। वहीं खाड़ी देश ईरान में संक्रमितों की संख्या 296273 हो गई है और 16147 लोगों की इसके कारण मौत हुई है। वहीं स्पेन में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2,80610 है जबकि 28,436 लोगों की मौत हो चुकी है।पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना से अब तक 2,75225 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 5,865 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं सऊदी अरब में कोरोना संक्रमण से अब तक 270831 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 2,789 लोगों की मौत हो चुकी है।</p>
<p>वहीं कोलंबिया में इससे अब तक 257101 लोग प्रभावित हुए हैं तथा 8777 लोगों की मृत्यु हुई है। यूरोपीय देश इटली में इस जानलेवा विषाणु से 2,46,488 लोग संक्रमित हुए हैं तथा 35,123 लोगों की मौत हुई है। <span style="line-height: 1.5">वहीं बंगलादेश में 2,29185 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं जबकि 3000 लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। तुर्की में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2,27982 हो गयी है और 5,645 लोगों की मौत हो चुकी है। फ्रांस में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2,21077 हैं और 30,226 लाेगों की मौत हो चुकी है। जर्मनी में 2,07707 लोग संक्रमित हुए हैं और 9,131 लोगों की मौत हुई है। </span></p>
<p>कोरोना वायरस से बेल्जियम में 9,822, कनाडा में 8,957, नीदरलैंड में 6,164, स्वीडन में 5702, इक्वाडोर में 5,584, इंडोनेशिया में 4901, चीन में 4,657, मिस्र में 4,691, इराक में 4,435, अर्जेंटीना में 3179, बोलीविया में 2720, रोमानिया में 2239, स्विट्जरलैंड में 1,978, फिलीपींस में 1,947, आयरलैंड में 1,764, ग्वाटेमाला में 1,782, पुर्तगाल में 1,722, पोलैंड 1,682, यूक्रेन में 1,650, पनामा 1339, किर्गिजस्तान 1329 और अफगानिस्तान 1,270 लोगों की मौत हो चुकी है।</p>
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		<title>कोरोना : टेस्टिंग क्षमता में दिल्ली, महाराष्ट्र से आगे उत्तर प्रदेश</title>
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		<pubDate>Mon, 27 Jul 2020 09:12:21 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[• प्रतिदिन 71 हजार से अधिक टेस्टिंग करने वाला राज्य • दिल्ली का पॉजिटिविटी रेट 14.9 और उत्तर प्रदेश का 3.4 प्रतिशत • डब्ल्यूएचओ के मानक के तहत 18 लाख से अधिक टेस्टिंग • 1.51 लाख कोविड बेड वाला पहला राज्य • आबादी के लिहाज से संक्रमितों की संख्या बेहद कम लखनऊ। विश्व के कई &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><em><strong>• प्रतिदिन 71 हजार से अधिक टेस्टिंग करने वाला राज्य</strong></em></p>
<p><em><strong>• दिल्ली का पॉजिटिविटी रेट 14.9 और उत्तर प्रदेश का 3.4 प्रतिशत</strong></em></p>
<p><em><strong> • डब्ल्यूएचओ के मानक के तहत 18 लाख से अधिक टेस्टिंग</strong></em></p>
<p><em><strong>• 1.51 लाख कोविड बेड वाला पहला राज्य</strong></em></p>
<p><em><strong>• आबादी के लिहाज से संक्रमितों की संख्या बेहद कम</strong></em></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> विश्व के कई देशों से अधिक आबादी वाले उत्तर प्रदेश में ‘कोविड-19’ के संक्रमण का प्रसार देश के कई राज्यों से अत्यधिक कम है। जबकि प्रतिदिन सैम्पल्स के टेस्ट सहित कुल टेस्टिंग की संख्या कई राज्यों से अधिक है। दिल्ली और महाराष्ट्र की कुल जनसंख्या से कहीं अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्रफल भी दिल्ली की तुलना में कई गुना अधिक है। पर, वैश्विक महामारी के संक्रमितों का पॉजिटिविटी रेट, कुल पॉजिटिव संख्या व मृत्यु दर में अत्यधिक कम और रिकवरी रेट में कई राज्यों से बेहतर स्थिति में है उत्तर प्रदेश। यह संभव हुआ है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संकल्पशक्ति, समर्पण और सेवाभाव से।</p>
<p>कोविड-19 की टेस्टिंग में महाराष्ट्र और दिल्ली सहित कई राज्यों से उत्तर प्रदेश आगे है। पिछले सात हफ्तों में सबसे ज्यादा परीक्षण करने वाले शीर्ष सात राज्यों में उत्तर प्रदेश के अलावा तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और दिल्ली शामिल हैं। उत्तर प्रदेश ने प्रत्येक सप्ताह टेस्टिंग क्षमता में निरन्तर बढ़ोत्तरी करते हुए प्रतिदिन रिकार्ड 71 हजार से अधिक टेस्ट किए हैं। उत्तर प्रदेश में 2 से 15 जुलाई के मध्य रिकार्ड 6.03 लाख से अधिक सैम्पल्स के परीक्षण किए गए। अब तक 18.54 लाख से अधिक टेस्ट में पाॅजिटिविटी रेट 4 प्रतिशत से कम और पुष्ट मामलों की संख्या लगभग 50 हजार दर्ज हुई है।</p>
<p>देश के अन्य राज्यों में पिछले दो सप्ताह के दौरान तमिलनाडु में पांच लाख, महाराष्ट्र में 3.89 लाख, आन्ध्र प्रदेश में 2.85 लाख, राजस्थान में 2.69 लाख, कर्नाटक में 2.48 लाख और दिल्ली में 1.63 लाख सैम्पल्स के परीक्षण किए गए हैं। कोविड-19 के कुल पुष्ट मामलों में महाराष्ट्र में 3,27,031, तमिलनाडु में 1,80,643, दिल्ली में 1,25,096, कर्नाटक में 71,069, आन्ध्र प्रदेश में 58,668 और गुजरात में 47,476 मामले रिकार्ड किए गए हैं। कोविड-19 के संक्रमण से प्रभावित शीर्ष राज्यों में उत्तर प्रदेश अत्यधिक सुरक्षित जोन में है। इन राज्यों का पाॅजिटिविटी रेट 7 से 23 प्रतिशत तक है। राजस्थान 2.4 प्रतिशत को छोड़कर उत्तर प्रदेश का पाॅजिटिविटी रेट सबसे कम 3.4 प्रतिशत है। जबकि महाराष्ट्र का 19.9 प्रतिशत, तेलंगाना का 16.8 प्रतिशत, दिल्ली का 30 प्रतिशत से घटकर 14.9 प्रतिशत, तमिलनाडु का 8.9 प्रतिशत और कर्नाटक का पाॅजिटिविटी रेट 7.6 प्रतिशत है। टेस्टिंग के यह आंकड़े उत्तर प्रदेश में कोविड-19 संक्रमण के प्रभावी रोकथाम की गवाही स्वयं देते हैं।</p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्ल्यूएचओ के निर्धारित मानकों के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक 14 लाख से अधिक टेस्ट हुए हैं। प्रतिदिन 71 हजार से अधिक सैम्पल्स की टेस्टिंग करने का रिकॉर्ड उत्तर प्रदेश के नाम है। भौगोलिक क्षेत्रफल और आबादी की द्रष्टि से अत्यधिक विशाल राज्य में महामारी के दौरान 35 लाख से अधिक श्रमिकों और कामगारों की अन्य राज्यों से वापसी के बावजूद संक्रमण के प्रसार पर प्रभावी रोकथाम शासन-प्रशासन की कारगर कार्य संस्क्रति का परिचायक है। डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच को तेजी से बढ़ाते हुए प्रतिदिन 50 हजार से बढ़ाते हुए 1 लाख का लक्ष्य निर्धारित किया है, प्रतिदिन 71,881 से अधिक सैम्पल्स की जांच का रिकार्ड बनाकर उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों के समक्ष अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। साथ ही 1.51 लाख कोविड बेड वाला पहला राज्य है।</p>
<p>ध्यातव्य है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कोविड-19 की जांच के लिए चलाए गए घर-घर स्क्रीनिंग अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई है। इतना ही नहीं अधिक जोखिम ग्रस्त आबादी को निरंतर निगरानी में रखने की व्यवस्था से संक्रमण के प्रसार पर प्रभावी रोकथाम लगाई है। समय पर चिकित्सकीय उपचार मुहैया कराकर लगभग 25 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के संक्रमितों की संख्या और मृत्यु दर को कम किया है। इतना ही नहीं लाॅकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक लगभग 35 लाख श्रमिक और कामगार वापस लौटे हैं। प्रदेश सरकार ने इनकी सुरक्षित व सकुशल घरवापसी के लिए पर्याप्त परिवहन व्यवस्था (देश में सर्वाधिक 1660 ट्रेन और 15 हजार बसें), चिकित्सकीय परीक्षण और इलाज की सटीक व्यवस्था, भरण-पोषण के लिए पर्याप्त राशन और आर्थिक सहयोग के साथ ही ‘घर-ऑंगन’ में ही हर हाथ को रोजगार उपलब्ध कराया है। इस महामारी के दौरान आमजन के साथ उत्तर प्रदेश सरकार मज़बूती से खड़ी है, जिसकी तुलना अन्य किसी राज्य से करना तर्कहीन है।</p>
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