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	<title>Business Link &#187; सरोजनी नगर</title>
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		<title>अवैध निर्माण की लहलहाती खेती</title>
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		<pubDate>Mon, 10 Dec 2018 11:35:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
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		<description><![CDATA[शैलेन्द्र यादव कृष्णानगर पुलिस और एलडीए तंत्र की सरपरस्ती में चल रहा अवैध प्लाटिंग का धंधा! एलडीए ने वर्ष 2015 में अलीनगर सुनहरा की न्यू शुभम सिटी, द्वारिकापुरी आवासीय योजना और कृष्ण विहार को घोषित किया था अवैध, पर प्लाटिंग अब तक जारी लखनऊ। शहर के सुनियोजित विकास में लगी अवैध निर्माण की दीमक उत्तर &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शैलेन्द्र यादव</strong></p>
<ul>
<li><strong>कृष्णानगर पुलिस और एलडीए तंत्र की सरपरस्ती में चल रहा अवैध प्लाटिंग का धंधा!</strong></li>
<li><strong>एलडीए ने वर्ष 2015 में अलीनगर सुनहरा की न्यू शुभम सिटी, द्वारिकापुरी आवासीय योजना और कृष्ण विहार को घोषित किया था अवैध, पर प्लाटिंग अब तक जारी</strong></li>
</ul>
<p><strong><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/LDA01-copy.jpg"><img class="  wp-image-11664 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/LDA01-copy-300x156.jpg" alt="LDA01 copy" width="435" height="226" /></a>लखनऊ।</strong> शहर के सुनियोजित विकास में लगी अवैध निर्माण की दीमक उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 की व्यवस्था को हजम कर रही है और जिम्मेदार अधिकारी कागजी कसरत में जुटे हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रबंध तंत्र ने जनवरी 2015 में शहर में सैकड़ों अवैध निर्माण चिन्हित किये थे। अधिनियम की व्यवस्था के मुताबिक, मानचित्र स्वीकृत कराये बिना निर्माण और अवैध प्लाटिंग में चिन्हित किए इन सभी निर्माणों पर पूर्णतय: पाबंदी लगनी चाहिए थी, लेकिन कानपुर रोड के कृष्णानगर थाना क्षेत्र स्थित अलीनगर सुनहरा में अवैध प्लाटिंग की यह दुकानें अब तक गुलजार हैं।</p>
<p>बता दें कि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2015 के जनवरी माह में कानपुर रोड, सरोजनी नगर, आलमबाग, गोमती नगर, सीतापुर रोड, हरदोई रोड, सुल्तानपुर रोड, रायबरेली रोड, जानकीपुरम विस्तार, दुबग्गा, फैजाबाद रोड, टेढ़ी पुलिया, कुर्सी रोड, अलीगंज और पारा आदि क्षेत्रों में सैकड़ों निर्माण अवैध चिन्हित किए थे। इनमें कृष्णानगर कोतवाली क्षेत्र स्थित अलीनगर सुनहरा की न्यू शुभम सिटी, द्वारिकापुरी आवासीय योजना और कृष्ण विहार में बिना मानचित्र स्वीकृत कराये प्लाटिंग हो रही थी।</p>
<p>तब वर्ष 2015 में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इन तीनों निर्माण स्थलों को अवैध करार देते हुए प्राधिकरण की वेबसाइट पर यह सूचना अपलोड की थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एलडीए तंत्र ने कृष्णानगर कोतवाली क्षेत्र स्थित अलीनगर सुनहरा में छह जनवरी 2015 को प्रबंधक न्यू शुभम सिटी द्वारा लगभग 20,000 मीटर में बिना मानचित्र स्वीकृत कराये अवैध कालोनी का नियोजन करने में चिन्हित किया था। वहीं नौ जनवरी 2015 को लगभग 15,000 वर्गमीटर क्षेत्र में बिना मानचित्र स्वीकृत कराये प्रबंधक द्वारिकापुरी आवासीय योजना, फेज-3 को अवैध प्लाटिंग में चिन्हित किया था, जबकि 12 जनवरी 2015 को लगभग 15,000 वर्गमीटर क्षेत्र में प्रबंधक कृष्ण विहार द्वारा अवैध प्लाटिंग की जा रही थी। इन तीनों विकासकर्ताओं का प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत नहीं था।</p>
<p>जानकारों की मानें तो एलडीए ने इस क्षेत्र की जमीन अपनी मोहान रोड आवासीय परियोजना के लिए अधिग्रहित कर रखी है। अवैध निर्माण चिन्हित हुए तीन वर्ष बीत गये। बावजूद इसके यहां अवैध प्लाटिंग की खेती लहलहा रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिम्मेदार किसी दबाव में खामोश हैं या फिर वह इस खेती की उपज में हिस्सेदार हैं? हालांकि, सूत्रों की मानें तो एलडीए तंत्र और कृष्णा नगर पुलिस अवैध प्लाटिंग के इस धंधे से अनजान नहीं है।</p>
<blockquote><p><a href="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/suresh-pasi-copy.jpg"><img class="  wp-image-11662 alignleft" src="http://businesslinknews.com/wp-content/uploads/2018/12/suresh-pasi-copy-300x298.jpg" alt="suresh pasi copy" width="116" height="115" /></a>शिकायत मिलने पर होगी सख्त कार्यवाही : राज्यमंत्री आवास<br />
इस संबंध में जब उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री आवास सुरेश पासी से जानकारी की गई तो उन्होंने इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया न देने की बात कहते हुए कहा कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, इसलिए कोई बयान नहीं दे सकता। हां, यदि कोई शिकायत मिलती है तो गंभीरता से जांच कराकर अवैध निर्माण पर पाबंदी लगायी जायेगी।</p></blockquote>
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		<title>औद्योगिक क्षेत्रों में चलेगा गड्ढा मुक्त अभियान</title>
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		<pubDate>Tue, 30 Oct 2018 13:08:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[इंडस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[गड्ढा मुक्त अभियान]]></category>
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		<description><![CDATA[तमाम दावों के बावजूद राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र बदहाल, नाली -नाला-जलनिकासी की समस्याओं से जूझ रहे उद्यमी उप्र औद्योगिक विकास निगम तंत्र का दावा बजट के लिये मुख्यालय भेजा गया प्रस्ताव बजट मिलते ही दूर होंगी औद्योगिक क्षेत्रों की समस्यायें बिजनेस लिंक ब्यूरो  लखनऊ। सूबे के औद्योगिक क्षेत्रों की खस्ताहाल सडक़ों पर पैबन्द लगाने के &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>तमाम दावों के बावजूद राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र बदहाल, नाली -नाला-जलनिकासी की समस्याओं से जूझ रहे उद्यमी </strong></li>
<li><strong>उप्र औद्योगिक विकास निगम तंत्र का दावा बजट के लिये मुख्यालय भेजा गया प्रस्ताव</strong></li>
<li><strong>बजट मिलते ही दूर होंगी औद्योगिक क्षेत्रों की समस्यायें</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> सूबे के औद्योगिक क्षेत्रों की खस्ताहाल सडक़ों पर पैबन्द लगाने के लिये अब गड्ढा मुक्त अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में फौरी तौर पर उद्यमियों को राहत दिलाने की योजना है। यूपीएसआईडीसी के प्रबंध निदेशक आरके सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी कर जल्द से जल्द औद्योगिक क्षेत्रों की सडक़ें दुरुस्त करने को कहा है।</p>
<p>प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये उद्यमियों व निवेशकों को कई सहूलियतें मुहैया कराने वाले तमाम सरकारी दावों के बावजूद अधिकतर औद्योगिक क्षेत्र बदहाल हैं। औद्योगिक क्षेत्रों की खस्ताहाल सडक़ें, बजबजाती नाली-नाला, बदहाल पार्क और रामभरोसे जलनिकासी आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी उद्यमी जूझ रहे हैं। प्रदेश की राजधानी स्थित औद्योगिक क्षेत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम तंत्र का दावा है कि बजट के अभाव में औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित है। ऐसे में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार सिंह ने मातहतों को औद्योगिक क्षेत्रों की सडक़ों के गढ्ढों को भरने के लिये अभियान चलाने के निर्देश दिये हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि राजधानी के सरोजनी नगर और अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का टोटा है। यहां जगह-जगह जलभराव, बदहाल सडक़ें और गंदगी का अंबार दिखाई देता है। अमौसी औद्योगिक क्षेत्र की मुख्य सडक़ जगह-जगह गड्ढïों में खो चुकी है। औद्योगिक क्षेत्र की जलनिकासी रामभरोसे है। ओवरफ्लों नालों को देख सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते लम्बे समय से इन बजबजाते नालों की सफाई नहीं हुई है। अमौसी औद्योगिक क्षेत्र के पार्कों की सूरत देखने योग्य नहीं है। यहां के पार्क सीवेज, ड्रेनेज और बरसाती पानी के ‘पूल’ में परिवॢतत हो चुके हैं, जिसमें शासन-प्रशासन के दावे गोते लगा रहे हैं। वैसे औद्योगिक क्षेत्रों का उद्धार करने वाले दावों और वादों का राग नया नहीं है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम प्रबंध तंत्र समय-समय पर नई-नई योजनायें व कार्यक्रम बनाकर औद्योगिक क्षेत्रों की स्वच्छता और बेहतरी की ढपली जोर-शोर से पीटता रहा है। पर, यह सभी दावे प्रारंभिक काल में ही दम तोड़ते रहे हैं। नतीजतन, औद्योगिक क्षेत्रों की सडक़ें, नाले-नालियों सहित पार्कों व हरित पट्टियों पर बदहाली का ग्रहण लगता रहा है। सूबे के औद्योगिक क्षेत्रों की सूरत बदलने के लिये निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने जिस स्वच्छ औद्योगिक क्षेत्र योजना की शुरुआत की थी, उनके जाते ही वह दम तोड़ गई। इस योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्रों को स्वच्छ बनाकर बेहतर वातावरण, आॢथक समृद्धि एवं स्वास्थ्य के लिये अनुकूल परिस्थितियों में उद्योग संचालन को प्रोत्साहित किया जाना था। एक मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित होना था। बहरहाल, सूबे की बात छोडिय़े राजधानी के औद्योगिक क्षेत्रों में सडक़ों, नालियों, पार्कों और हरित पट्टियों की बदहाली कब तक दूर होगी, उद्यमियों को अब यह यक्ष प्रश्न लगने लगा है, जिसके जवाब का उन्हें बेसब्री से इंतजार है।</p>
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