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	<title>Business Link &#187; हजरतगंज</title>
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	<description>Breaking News</description>
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		<title>दम तोड़ रहा एलडीए का अभियान, एक सील</title>
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		<pubDate>Mon, 11 Feb 2019 10:31:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[अवैध बेसमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ विकास प्राधिकरण]]></category>
		<category><![CDATA[हजरतगंज]]></category>

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		<description><![CDATA[विहित प्राधिकारी कार्यालय में ऐतिहासिक मार्केट हजरतगंज के अवैध बेसमेंटों की खोज जारी अभियान के प्रारम्भ में किये गये दावे साबित हो रहे हवा-हवाई एलडीए अधिकारी अब तक महज एक अवैध निर्माण कर सके सील अवैध निर्माण सीलिंग की लम्बी प्रक्रिया को बताया जा रहा कार्यवाही न होने का कारण बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। राजधानी &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>विहित प्राधिकारी कार्यालय में ऐतिहासिक मार्केट हजरतगंज के अवैध बेसमेंटों की खोज जारी </strong></li>
<li><strong>अभियान के प्रारम्भ में किये गये दावे साबित हो रहे हवा-हवाई</strong></li>
<li><strong>एलडीए अधिकारी अब तक महज एक अवैध निर्माण कर सके सील</strong></li>
<li><strong>अवैध निर्माण सीलिंग की लम्बी प्रक्रिया को बताया जा रहा कार्यवाही न होने का कारण</strong></li>
</ul>
<p><strong>बिजनेस लिंक ब्यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी की सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित तस्वीर बनाने की जिम्मेदारी जिस लखनऊ विकास प्राधिकरण पर है, अवैध निर्माण के खिलाफ शुरू किया गया उसका अभियान दम तोड़ता नजर आ रहा है। मामला, राजधानी के वीवीआईपी क्षेत्र की ऐतिहासिक मार्केट हजरतगंज में बने अवैध बेसमेंटों का है। स्थानीय व्यापारियों व शोरूम संचालकों ने कायदे-कानून को ताक पर रखकर 15 से 20 मीटर गहरे तहखाने खुदवा डाले और जिम्मेदार प्राधिकरण तंत्र, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को पता ही नहीं चला। यह अवैध निर्माण कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। बावजूद इसके विगत दिनों प्रारम्भ हुआ एलडीए का अभियान कुछ ही समय में दम तोड़ता नजर आ रहा है। अधिकारी कागजी कार्यवाही में उलझ कर रह गये हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि बीते दिनों एलडीए वीसी प्रभू एन सिंह से जब हजरतगंज निवासियों ने ने अवैध तहखानों की शिकायत की थी, तब एलडीए वीसी ने मातहतों को फटकार लगाते हुये अभियान चलाकर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। तब एलडीए प्रबंध तंत्र ने अभियान का श्रीगणेश करते हुये कहा था कि सर्वे में पता चला है कि अधिकांश शोरूम के नीचे अवैध बेसमेंट हैं, जिस व्यापारी के शोरूम का बेसमेंट सील किया गया है, उसी का मल्टीलेवल पाॄकग के पास भी शोरूम है। इसमें भी अवैध बेसमेंट बना है। यह निर्माण मेट्रों की आड़ में हुआ। ऐसे कई बेसमेंट अभी जानकारी में आये हैं। इनके खिलाफ पूर्व में हुई कार्रवाई और नये निर्माण का भी पता किया जा रहा है। साथ ही यह दावा भी किया गया था कि हजरतगंज में निर्माणाधीन मेट्रो की आड़ में व्यापारियों ने अवैध बेसमेंट बनाने के लिये रातों-रात अवैध खनन किये हैं। इतना ही नहीं हजरतगंज में अवैध बेसमेंटों की सख्या लगभग 200 से अधिक बताई गई थी।</p>
<p>बीते दिनों एलडीए प्रबंध तंत्र ने ऐसे ही कई और भी दावे किये थे। पर, महज कुछ ही दिनों बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के वही अधिकारी अब कागजी कार्रवाई में उलझे दिख रहे हैं। जानकारों की मानें तो अवैध बेसमेंटों का भौैतक सत्यापन करने के बजाय अब इस अभियान के कप्तान की नजर विहित प्राधिकारी कार्यालय की फाइलों पर टिक गई है। फाइलों के पन्ने पलटे जा रहे हैं, यह जानने के लिये कि हजरतगंज में बने किस अवैध बेसमेंट के खिलाफ पूर्व में क्या कार्रवाई की गई है। महज कुछ ही दिनों में सख्त एलडीए वीसी की टीम के अधिकारी बड़े व्यापारियों के अवैध बेसमेंटों के सामने हांफने लगे हैं।</p>
<blockquote><p>हजरतगंज क्षेत्र में अवैध बेसमेंटों के निर्माण पर विहित प्राधिकारी के स्तर से हुई कार्रवाई को देखा जा रहा है। अब तक हुई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज एकत्र किये जा रहे हैं। एक शोरूम का निर्माणाधीन अवैध बेसमेंट सील किया गया है। एक अवैध बेसमेंट की जानकारी और मिली है। विहित प्राधिकारी कार्यालय से हुई कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।<br />
<strong>ओपी मिश्रा, प्रभारी प्रवर्तन -6 एलडीए</strong></p></blockquote>
<p><strong>एलडीए वीसी-सचिव के खिलाफ वारंट जारी</strong><br />
लखनऊ। वर्ष 2005 से लंबित वाद में एलडीए वीसी और सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी हुये हैं। जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजश्री शुक्ला ने नबीउल्लाह रोड के विस्थापितों को प्रियदर्शनी योजना में भूखण्ड नहीं मिल पाने के मामले में यह आदेश दिये हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी प्रभु एन सिंह और सचिव एमपी सिंह को 28 फरवरी को सुनवाई में मौजूद रहना होगा। विस्थापित चांद खां, बल्देव सिंह आदि ने फोरम में एलडीए के खिलाफ शिकायत की थी। राजश्री शुक्ला ने आदेश में कहा कि 2003 में जिला उपभोक्ता फोरम ने आवंटियों को राहत देने के लिये लखनऊ विकास प्राधिकरण को कहा था। इसके खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्टï्रीय उपभोक्ता आयोग में भी अपील की गई। दोनों ही जगह एलडीए को राहत नहीं मिली। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं की गई। ऐसे में अभी जिला उपभोक्ता फोरम का पूर्व का आदेश लागू होता है। हालांकि, इसे लागू करने में प्राधिकरण विफल रहा। वहीं एलडीए का कोई भी प्रतिनिधि 30 जनवरी की सुनवाई और उसके बाद भी फोरम में उपस्थिति नहीं हुआ। इसके बाद एलडीए वीसी और सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>मेट्रो निर्माण की आड़ में व्यापारियों ने खोदा हजरतगंज</title>
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		<pubDate>Wed, 06 Feb 2019 11:27:53 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[अवैध खनन]]></category>
		<category><![CDATA[अवैध बेसमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[एलडीए]]></category>
		<category><![CDATA[हजरतगंज]]></category>

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		<description><![CDATA[शोरूम मालिको ने दशकों पुरानी इमारतों में 15 से 20 मीटर गहरे बनवा डाले अवैध बेसमेंट हजरतगंज के अवैध बेसमेंट कभी भी बन सकते हैं बड़े हादसों का सबब  गंज के 70 प्रतिशत शोरूमों में हैं अवैध बेसमेंट शैलेन्द्र यादव लखनऊ। विभिन्न जांच एजेंसियां जिस समय प्रदेश के राजनीतिक एवं प्रशासनिक तंत्र की अवैध खनन &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>शोरूम मालिको ने दशकों पुरानी इमारतों में 15 से 20 मीटर गहरे बनवा डाले अवैध बेसमेंट </strong></li>
<li><strong>हजरतगंज के अवैध बेसमेंट कभी भी बन सकते हैं बड़े हादसों का सबब </strong></li>
<li><strong>गंज के 70 प्रतिशत शोरूमों में हैं अवैध बेसमेंट</strong></li>
</ul>
<p><strong>शैलेन्द्र यादव</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> विभिन्न जांच एजेंसियां जिस समय प्रदेश के राजनीतिक एवं प्रशासनिक तंत्र की अवैध खनन में संलिप्तता के सबूत जुटा रही हैं, उसी दरमियान राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़ से हुआ एक और अवैध खनन का मामला बेपर्दा हुआ है। अवैध खनन का यह मामला प्रदेश के दूर-दराज स्थित मौरंग-बालू खदानों से नहीं, बल्कि लखनऊ की ऐतिहासिक मार्केट हजरतगंज से जुड़ा है। स्थानीय व्यापारियों ने राजधानी का दिल कहे जाने वाले हजरतगंज को अवैध खनन से खोखला कर 15-20 मीटर गहरे बेसमेंट बना डाले हैं। विधानसभा से चन्द कदमों की दूरी पर अवैध खनन होता रहा और किसी को खबर क्यों नहीं हुई, यह समझा जा सकता है।</p>
<p>जानकारों की मानें तो हजरतगंज क्षेत्र में शायद ही कोई इमारत, दुकान या गोदाम ऐसे हो, जिसमें अवैध बेसमेंट न हो। यह इमारतें दशकों पुरानी हैं। बावजूद इसके स्थानीय व्यापारियों और एलडीए सहित अन्य जिम्मेदार विभागीय लोगों की सांठ-गांठ से हजरतगंज खोखला कर दिया गया। बीते दिनों लखनऊ विकास प्राधिकरण तंत्र द्वारा हजरतगंज में अवैध बेसमेंट ढूढने का अभियान शुरू किया है। इस अभियान में कुछ व्यापारियों के अवैध बेसमेंट सीज भी हुये हैं। एलडीए प्रवर्तन जोन-६ के प्रभारी ओपी मिश्रा के मुताबिक, इस अवैध खनन में मेट्रो निर्माण को ढाल बनाया गया है।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>‘हजरतगंज बना अवैध बेसमेंटगंज’</title>
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		<pubDate>Wed, 06 Feb 2019 11:19:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator><![CDATA[Editor]]></dc:creator>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बाजारों से]]></category>
		<category><![CDATA[बिज़नेस]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीती प्रशासन]]></category>
		<category><![CDATA[अवैध बेसमेंट]]></category>
		<category><![CDATA[मंडलायुक्त] एलडीए वीसी]]></category>
		<category><![CDATA[हजरतगंज]]></category>

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		<description><![CDATA[सोता रहा जिला प्रशासन-एलडीए तंत्र, शोरूम मालिकों ने मेट्रो से ज्यादा खुदवा डाला गंज दशकों पुरानी इमारतों के नीचे बन गये दो से तीन मंजिला बेसमेंट, अब जागे जिम्मेदार एलडीए ने 200 से अधिक बड़े शोरूमों में शुरू किया सर्वे, मिले लगभग तीन दर्जन से अधिक अवैध बेसमेंट गंज चौराहे से डीएम आवास और मल्टीलेवल &#8230;]]></description>
				<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>सोता रहा जिला प्रशासन-एलडीए तंत्र, शोरूम मालिकों ने मेट्रो से ज्यादा खुदवा डाला गंज </strong></li>
<li><strong>दशकों पुरानी इमारतों के नीचे बन गये दो से तीन मंजिला बेसमेंट, अब जागे जिम्मेदार </strong></li>
<li><strong>एलडीए ने 200 से अधिक बड़े शोरूमों में शुरू किया सर्वे, मिले लगभग तीन दर्जन से अधिक अवैध बेसमेंट </strong></li>
<li><strong>गंज चौराहे से डीएम आवास और मल्टीलेवल पाॢकंग के पीछे है अवैध बेसमेंट की भरमार </strong></li>
<li><strong>शत्रु संपत्तियों में भी हुआ अवैध निर्माण, मिट्टी-बालू भरकर बंद कराये जा सकते हैं बेसमेंट</strong></li>
</ul>
<p>शैलेन्द्र यादव</p>
<p>लखनऊ। राजधानी का दिल कहा जाने वाला हजरतगंज खोखला हो चुका है। ऐतिहासिक हजरतगंज मार्केट की दशकों पुरानी इमारतों के नीचे शोरूम मालिको ने 15 से 20 मीटर गहराई तक अवैध बेंसमेंट बनवा लिये हैं। यह कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं, पर इससे इनका कोई लेना-देना नहीं। जानकारों की मानें तो हजरतगंज मार्केट में 70 प्रतिशत व्यापारियों के शोरूमों में अवैध बेसमेंट हैं। दो से तीन मंजिले इन बेसमेंटों का निर्माण पलक झपकते नहीं हुआ, बल्कि सुनियोजित रूट से यह अवैध निर्माण जिला प्रशासन और एलडीए के आला हुक्मरानों की नाक के नीचे अंजाम तक पहुंचे हैं।</p>
<p>जानकारों की मानें तो इतनी खुदाई तो मेट्रो ने अपने भूमिगत रूट और स्टेशन निर्माण के लिये भी नहीं की, हजरतगंज को जितना यहां संचालित शोरूम के व्यापारियों ने खुदवा डाला है। यहां दशकों पुरानी इमारतों के नीचे खुदाई का आलम यह है कि 70 प्रतिशत शोरूमों में अवैध बेसमेंट हैं। बीते दिनों हजरतगंज मार्केट के ही कुछ लोगों ने मंडलायुक्त और एलडीए वीसी को अवगत कराया था कि हजरतगंज में अवैध रूप से 16 मीटर तक गहरे बेसमेंट बना लिये गये हैं। इसकी वजह से 100 साल से अधिक पुरानी इमारतों के ढहने का खतरा है। भविष्य में मेट्रो ट्रेन संचालन के कंपन से यह इमारतें ढह सकती हैं। अधिकतर इमारतों में आवासीय भवन हैं, यहां रहने वाले परिवारों की जान को खतरा है।</p>
<p>एलडीए की प्रवर्तन टीम का भी मानना है कि जिस तेजी से हजरतगंज में अवैध बेसमेंट सामने आ रहे हैं, उससे यकीन है कि हजरतगंज में 70 प्रतिशत तक शोरूमों के अंदर अवैध बेसमेंट बना लिये गये हैं। इनमें से कुछ तो पांच साल से अधिक तक पुराने हैं। इन अवैध निर्माण पर क्या कार्यवाई हो सकती है। अब एलडीए भी विकल्प तलाश रहा है। सूत्रों की मानें तो एलडीए अब जिला प्रशासन को भी इस अवैध निर्माण में कार्रवाई के लिए शामिल करने की कागजी कसरत कर रहा है। एलडीए अधिकारियों का कहना है कि हजरतगंज में अधिकांश शत्रु संपत्तियां हैं। इन इमारतों में बेसमेंट बनाये जाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति ली जानी चाहिए थी। ऐसे में कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को भी आगे आना चाहिये। एलडीए अधिकारियों ने मौखिक रूप से मंडलायुक्त को इसकी जानकारी दे दी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि ऐतिहासिक मार्केट हजरतगंज की नई पहचान ‘अवैध बेसमेंटगंज‘ बनाने वालों की मंषा से जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी अंजान बने रहे और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई? या फिर हजरतगंज को खोखला करने के एवज में इन्होंने सुविधा शुल्क वसूला? यह जांच का विषय है।</p>
<p><strong>मिट्टी-बालू भरकर बंद कराये जा सकते हैं बेसमेंट</strong><br />
एलडीए प्रबंध तंत्र का कहना है कि बेसमेंट का अवैध निर्माण आम इमारतों की तरह नहीं होता। इसे हम जेसीबी लगाकर तोड़ भी नहीं सकते हैं। इसका एक ही विकल्प है कि बेसमेंट को दोबारा मिट्टी या बालू से भर दिया जाय। बेसमेंट को बंद कराने का यही एकमात्र विकल्प होता है। बड़ी संख्या में बेसमेंट होने पर हमें अधिक संसाधनों की जरूरत भी होगी।</p>
<p><strong>सर्वे में मिली चौकानें वाली तस्वीर</strong><br />
शिकायत मिलने पर एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह ने जब मातहतों को फटकार की डोज पिलाई, तब जोन-6 के अधिकारियों ने शोरूमों का सर्वे करने का निर्णय लिया। प्रवर्तन टीम को अब तक लगभग तीन दर्जन से अधिक अवैध बेसमेंट मिल चुके हैं। सर्वे जारी है।</p>
<blockquote><p>सर्वे में पता चला है कि अधिकांश शोरूम के नीचे अवैध बेसमेंट हैं। जिस व्यापारी विनोद पंजाबी का शोरूम का बेसमेंट सील किया गया है, उसी का मल्टीलेवल पाॄकग के पास भी शोरूम है। इसमें भी अवैध बेसमेंट बना है। यह निर्माण मेट्रो की आड़ में हुआ। ऐसे कई बेसमेंट अभी जानकारी में आये हैं। इनके खिलाफ पूर्व में हुई कार्रवाई और नये निर्माण का भी पता किया जा रहा है।<br />
ओपी मिश्रा, प्रभारी प्रवर्तन -6 एलडीए</p></blockquote>
]]></content:encoded>
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