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उपभोक्ताओं को अब नहीं सताएगी गलत रीडिंग की टेंशन

उपभोक्ता को सही रीडिंग का ही मिलेगा बिजली बिल

मध्यांचल प्रबंधन ने शुरू की नई व्यवस्था, गलत बिजली बिल की समस्या से मिलेगी राहत

दो से तीन डिवीजन में शुरू हुए ट्रायल में मिले अच्छे परिणाम

ट्रायल सफर रहा तो अन्य डिवीजनों में लागू होगी नई व्यवस्था

reading copyलखनऊ। गलत रीडिंग के चलते बिजली बिल में होने वाली गड़बड़ी से उपभोक्ताओं को छुटकारा मिलने वाला है। गलत रीडिंग के चलते आने वाले अधिक बिल से अब उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानी से राहत मिलने वाली है। मीटर रीडर उपभोक्ता के बिजली बिल में भले ही गलत रीडिंग दे लेकिन उपभोक्ता को जो बिल जाएगा, वह सही रीडिंग के आधार पर ही होगा। इससे उपभोक्ताओं को बिजली बिल ठीक कराने के लिए सब स्टेशनों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे प्रत्येक माह आने वाली गलत बिजली बिलों की शिकायतें भी बंद हो जाएंगी। मध्यांचल प्रबंध तंत्र की ओर से चौक और हुसैनगंज डिवीजन में इसका ट्रायल भी शुरू कर दिया है। शुरुआत में इस नई व्यवस्था का अच्छा परिणाम देखने को मिल रहा है। डिस्काम अधिकारियों का कहना है कि दोनों डिवीजन में एक माह तक ट्रायल के बाद इसे अन्य डिवीजनों में लागू किया जाएगा। दरअसल, हजारों उपभोक्ताओं की हर माह इस तरह की शिकायतें आती हैं कि उनके घरों में खपत से कहीं ज्यादा बिजली का बिल भेजा गया है। ऐसे उपभोक्ताओं की सुनवाई सब स्टेशनों के बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी नहीं होती। जिसके चलते विद्युत खपत न करने के बावजूद उपभोक्ताओं को गलत रीडिंग के आधार पर बने बिल का भुगतान करना पड़ता है। हैंडहेल्ड के जरिए घर-घर जाकर बिल निकालने की व्यवस्था शुरू होने के बाद गलत बिल बनने के मामले तेजी से बढ़े हैं। जिसके बाद बिल को दोबारा ठीक करने के मामले बढ़ रहे हैं। इससे जहां विद्युत विभाग की छवि तो खराब हो ही रही है, साथ ही उसे राजस्व का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं उपभोक्ताओं को बिल जमा करने का निर्धारित समय गुजरने के बाद बिल जमा करने पर लेट पेमेंट फीस भी देना पड़ता है। विभागीय जानकारों की मानें तो गलत बिल बनने के पीछे मीटर रीडरों की मनमानी है। गलत बिल बनने वाले अधिकांश मामलों में देखने में आता है कि जिसमें मीटर रीडर गलत रीडिंग ले आता है या फिर रीडिंग ही नहीं लेता है। जिसके बाद उपभोक्ता का बिजली बिल औसत रीडिंग के आधार जनरेट कर दिया जाता है। जिसका उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा असर पड़ता है। वहीं कई बार मीटर रीडर उपभोक्ता से सेटिंग कर रीडिंग में हेरफेर कर देते हैं। उपभोक्ता को उस समय तो समझ में नहीं आता है लेकिन जब दो से तीन माह बाद कोई दूसरा मीटर रीडर रीडिंग ले जाता है तो सारी गड़बड़ी सामने आ जाती है। जिसके बाद उपभोक्ता को रीडिंग गैप के हिसाब से पैसा जमा करना पड़ता है।

ये है नई व्यवस्था

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के उपभोक्ताओं को सही बिजली का बिल देने के लिए नई व्यवस्था पर काम हो रहा है। नई व्यवस्था में यह स्पष्ट है कि जब मीटर रीडर रीडिंग लेने के लिए किसी के घर जाता है और इस दौरान उपभोक्ता या मीटर रीडर को लगता है कि पिछले माह की रीडिंग से इस बार की रीडिंग अलग है तो वह उपभोक्ता को पर्ची नहीं देगा। वह पर्ची मीटर रीडर उपखंड अधिकारी अथवा अधिशासी अभियंता के डिवीजन कार्यालय में देगा। जहां पर पिछले दो से तीन महीने की औसत रीडिंग के आधार पर एक्यूरेट बिल जनरेट किया जाएगा और इसे उपभोक्ता के पास भेजा जाएगा।

नई व्यवस्था खासियत

-गलत रीडिंग पर भी मिलेगा सही बिजली का बिल
-बिल ठीक कराने के लिए नहीं लगाने होंगे उपकेंद्र के चक्कर
– मीटर रीडर की मनमानी पर लगेगा अंकुश
– उपभोक्ता की जेब पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार

फैक्ट फाइल
2 जोन में बंटा है लेसा
8 लाख से अधिक हैं उपभोक्ता
7 और 15 तारीख को बनता है बिल
2 डिवीजन में शुरू हुआ ट्रायल

बिजली बिल की गलत रीडिंग से लोग परेशान न हों, इसलिए यह कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था से उपभोक्ता के पास एक्यूरेट रीडिंग के हिसाब से ही बिल भेजा जाएगा। इसे लेकर दो डिवीजन में ट्रायल शुरू भी किया गया है।

संजय गोयल, प्रबंध निदेशक, मध्यांचल डिस्काम

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