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कागजों में स्पॉट फाइन शहर में गंदगी की भरमार

  • बाजारों में चलना था विशेष अभियान, सड़क पर पान मसाला थूकने वालों पर नहीं होता कोई एक्शन

  • खुले आम लोग सड़क पर ही पॉलीथिन व अन्य कूड़ा भी फेंक रहे हैं

लखनऊ। नगर निगम की ओर से शहर को स्वच्छ रखने के लिए भले ही कई योजनाएं बनाई जा रही हों लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक एक भी योजनाएं सफल होती नजर नहीं आ रही है। ऐसे ही एक कवायद हुई थी स्पॉट फाइन को लेकर।

इस योजना के अंतर्गत सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी करने वालों से मौके पर ही जुर्माना वसूल किया जाना था लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक स्पॉट फाइन की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

नगर निगम प्रशासन की ओर से स्वच्छता सर्वेक्षण 19 के दौरान स्पॉट फाइन का खाका तो खींचा गया था, लेकिन वो भी कागजों तक ही सिमट कर रह गया। इसके अंतर्गत सड़क पर पान मसाला थूकने वालों से जुर्माना वसूल किया जाना था, वो अब तक संभव नहीं हो सका है। चौंकाने वाली बात ये है कि अभी तक एक व्यक्ति पर भी इस बिंदु पर जुर्माना नहीं हुआ है। यही स्थिति सड़क पर कूड़ा फेंकने वालों की भी है। निगम प्रशासन की ओर से इस दिशा में भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

जोनल को दी गयी थी जिम्मेदारी

स्पॉट फाइन की जिम्मेदारी जोनल अधिकारियों को दी गई थी। जिम्मेदार अधिकारियों ने इस व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया। दो से तीन जोन में तो कुछ रफ्तार पकड़ी गई लेकिन बाद में स्थिति कागजों में ही सिमट कर रह गई।

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1 हजार तक जुर्माना

निगम प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया था कि सड़क पर गंदगी फैलाने और पान मसाला थूकने वालों से 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक जुर्माना वसूल किया जाएगा। लेकिन ये संभव ही नहीं हो सका।

नए सिरे से स्पॉट फाइन व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। इस बार हर सप्ताह स्पॉट फाइन के आंकड़े की समीक्षा की जाएगी।
डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त

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