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तबादले में भ्रष्टïाचार-मनमानी

जेवर से विधायक धीरेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

शिकायती पत्र में विधायक ने तबादले में हर स्तर पर मनमानी व भ्रष्टïाचार का लगाया आरोप

Niyojanलखनऊ। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और शुचिता पर जोर दे रहे हैं, लेकिन सरकारी विभाग मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं के इतर काम करने में जुटे हैं। सरकारी विभागों में तबादले में अनियमितता करने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री की सरकारी विभागों में पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की नसीहतें रास नहीं आ रही हैं। जिसका नतीजा लगातार सरकारी विभागों में किए गए तबादलों में भ्रष्टïाचार और मनमानी के रूप में सामने आ रहा है। स्थानांतरण में अनियमितता की शिकायत पर गत दिनों ही मुख्यमंत्री ने निबंधन विभाग के 350 से अधिक तबादलों को निरस्त कर दिया। मुख्यमंत्री की पारदर्शी व्यवस्था के उलट नियोजन विभाग का अर्थ एवं संख्या प्रभाग भी काम करने में जुटा है। नियोजन विभाग के अर्थ एवं संख्या प्रभाग में बीते वर्ष हुए तबादले में भ्रष्टïाचार व मनमानी को लेकर तत्कालीन निदेशक को निलंबित करने की कार्रवाई से सबक न लेते हुए इस बार भी तबादलों में मनमानी व भ्रष्टïाचार के कारनामों को अंजाम दिया गया। तबादलों में मनमानी और भ्रष्टïाचार की शिकायत मुख्यमंत्री से की गयी है। गत 26 जुलाई को जेवर से विधायक धीरेंद्र सिंह ने अर्थ एवं संख्या प्रभाग में स्थानांतरण की गयी मनमानी की शिकायत को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि नियोजन विभाग के अर्थ एवं संख्या विभाग में बीते वर्ष तबादले में किए गए भ्रष्टïाचार को लेकर निदेशक को निलंबित कर जांच बैठायी गयी थी। बावजूद इसके सबक न लेते हुए वर्तमान निदेशक अरविंद कुमार पांडेय ने अपर संख्याधिकारी के तबादले में शासन की नीतियों के खिलाफ मनमाने तरीके से भ्रष्टïाचार के मकसद से स्थानांतरण किये गये हैं। पत्र में वर्तमान निदेशक पर भ्रष्टïाचार को लेकर विवादित रहने का भी आरोप लगाया गया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि खुद के अनुरोध पर चाहे गये तबादले को जनहित में करते हुए शासकीय धन की हानि की गयी है। दरअसल, खुद के अनुरोध पर किये गये तबादले में यात्रा व्यय नहीं मिलता जबकि जनहित में किए गए स्थानांतरण में यात्रा व्यय दिया जाता है। खंड विकास अधिकारी के पद पर चयनित ऐसे अधिकारी जिनके नियुक्ति पत्र या पदोन्नति आदेश जुलाई महीने में जारी किया जाना संभावित था उनमें से कई अधिकारियों को इच्छुक जगह पर जनहित में स्थानांतरित कर शासकीय धन की हानि की गयी है। यह भी कहा गया है कि शासकीय नीति के अनुसार तबादले के दायरे में आने वाले मुख्यालय व जिलों के कई सारे अपर संख्याधिकारियों का स्थानांतरण न करके नियमों का उल्लंघन किया गया है। स्थानांतरण में एक ही जगह पर निर्धारित अवधि पूरी कर चुके कर्मियों को हटाने की प्रक्रिया न अपनाते हुए कम अवधि के लिए तैनात कर्मियों का तबादला जहां पर किया गया वहां पर अधिक समय से तैनात कर्मियों का स्थानांतरण नहीं किया गया है। इससे साफ है कि तबादले में मनमानी की गयी है। पत्र में अपील की गयी है कि न्यायप्रिय व भ्रष्टïाचार मुक्त प्रशासन सुलभ करने की दृढ़ संकल्पता व मुहिम को इस प्रकार के अधिकारियों के कृत्य विफल कर रहे हैं। साथ ही ऐसे अधिकारियों के इस प्रकार के कार्यों से सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। पत्र में उक्त प्रकरण के अभिलेख जब्त करते हुए शासन से जांच बैठाने और जांच पूरी होने तक अरविंद पांडेय निदेशक को दायित्वों से अलग रखने का आदेश देने की मांग की गयी है।

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