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अपने ही दांव से मात खा रहा परिवहन निगम

हाईटेक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से निगम को लगा रहे चूना

डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई के बाद शुरु किया टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग

निगम के मुकाबले यात्रियों से ले रहे कम किराया

शक न हो इसके लिए दे रहे मोबाइल पर कॉल सर्विस व एसएमएस की सुविधा

डग्गामारी में जुटी वॉल्वो, स्कैनिया जैसी सुपर लग्जरी एक हजार बसें

imagesदुर्घटना होने पर यात्रियों को नहीं मिल पाता बीमा का लाभ 

 

समय व स्थान निश्चित न होने से नहीं हो पा रही कार्रवाई

लखनऊ। सड़क से डग्गामारी समाप्त करने के अभियान के अपने ही दांव से परिवहन निगम मात खा रहा है। डग्गामार वाहनों पर की गयी कार्रवाई निगम पर ही भारी पड़ रही है। डग्गामार वाहन टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग कर डग्गामारी कर रहे हैं। इस नई व्यवस्था से उन्हें न तो कहीं बस खड़ी करनी पड़ती है और न ही यात्रियों को ढूंढना पड़ता है। परिवहन विभाग की सख्ती के बाद डग्गामार वाहन संचालकों द्वारा अपनाया गया यह तरीका उनके लिए बहुत मुफीद साबित हो रहा है। डग्गामार वाहन संचालक हाईटेक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से निगम को चूना लगा रहे हैं। परिवहन निगम की तर्ज पर बस में सीटों की बुकिंग के लिए वेबसाइट बनाकर टिकट बुक किये जा रहे हैं। यहीं नहीं यह वेबसाइट पर वॉल्वो और स्कैनिया जैसी सुपर लग्जरी बसों की सुविधा भी यात्रियों को दे रहे हैं। यात्रियों को शक न हो इसके लिए उनके मोबाइल पर कॉल सर्विस से लेकर एसएमएस तक की सुविधा भी दी जा रही है। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए परिवहन निगम के मुकाबले कम किराया भी ले रहे हैं। बताते चलें कि सड़क से डग्गामार बसों के सफाये को लेकर बीते दिनों परिवहन विभाग ने डग्गामारी पर लगाम लगाने के लिए कड़ी कार्रवाई की थी। परिवहन विभाग की सख्ती के बाद डग्गामार वाहन संचालकों ने परिवहन निगम को चूना लगाने का नया तरीका अपना लिया है। कल तक खुले आम राजधानी की सड़कों पर यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने वाली डग्गामार बसें अब निगम की तरह हाइटेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं। वॉल्वो और स्कैनिया जैसी 1000 से अधिक बसें डग्गामारी में जुटी हैं। राजधानी में आलमबाग में पिकैडली होटल के पास, गोमती नगर में शहीद पथ, पॉलीटेक्निक चौराहा, सिटी स्टेशन के पास रिफा-ए-आम क्लब, कुर्सी रोड पर स्पोट्र्स कॉलेज, क्लार्क अवध होटल के पीछे से डग्गेमारी की जा रही है। जानकारों की मानें तो डग्गामार परिवहन निगम को चूना लगाने के साथ यात्रियों को भी ठगने से नहीं चूक रहे हैं। चूंकि डग्गामार बसों के खड़े होने की जगह और उनके चलने का समय निश्चित नहीं हैं तो ऐसे में कई बार यात्रियों की बस छूट जाती है। सूत्रों की मानें तो डग्गामार कई बार बिना किसी सूचना के अपनी यात्रा भी निरस्त कर देते हैं। ऐसे में यात्रियों के टिकट पैसा डूब जाता है। यही नहीं ये वाहन यात्रियों को भ्रमित भी करते हैं। दरअसल, परिवहन निगम की तरह ऑनलाइन बुकिंग की वजह से यात्रियों को डग्गामार बस के बारे में पता नहीं चल पाता है। जिसकी वजह से सफर के दौरान दुर्घटना होने पर उन्हें परिवहन निगम की ओर से दी जाने वाली दुर्घटना बीमा की राशि भी नहीं मिल पाती है। वहीं इन बसों के संचालन का समय व स्थान तय न होने से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ऑनलाइन बुक हो रही बसें न तो निश्चित स्थान से संचालित हो रही हैं और न ही वापसी में वह यात्रियों को एक तय जगह पर छोड़ रही हैं। दिल्ली से आने वाली बसें कभी शहीद पथ के पास यात्रियों को छोड़ती हैं तो कभी अमौसी एयरपोर्ट के पास। कभी आलमबाग के पास तो कहीं चारबाग के पास। ऐसे में प्रवर्तन दस्ते यह नहीं जान पाते हैं कि आखिर यह बस अगली बार यात्रियों को कहां छोड़ेगी।

ऑनलाइन बुकिंग का ऐसे होता है खेल

परिवहन निगम की तरह कई कंपनियां ऐसी हैं जो अपनी बसों में ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा यात्रियों को देती हैं। बुकिंग करने के बाद यात्री के मोबाइल पर एसएमएस आता है कि बस उसे कहां से मिलेगी। ज्यादातर मामलों में इस तरह की बसें लंबे रूट के साथ रात में मिलती हैं। यह बसें शहर के आउटर पर ही यात्रियों को उतार देती हैं। जिसकी वजह से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। इस तरह की डग्गेमारी में वॉल्वो और स्कैनिया का भी इस्तेमाल हो रहा है। परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्ते ने बीते दिनों ही शहीद पथ के पास दिल्ली से आयी एक ऐसी ही वॉल्वो को पकड़ा था। जिसे जुर्माना वसूलने के बाद छोड़ दिया गया था।

वेबसाइट पर फर्जी नाम से कई टूरिस्ट कंपनियां

ऑनलाइन बसों की डग्गामारी का खेल प्रदेश के हर शहर में चल रहा है। लेकिन राजधानी होने के नाते यहां पर कुछ ज्यादा ही डग्गामारी हो रही है। इसमें सबसे अधिक बसें लखनऊ से दिल्ली रूट पर चल रही हैं। इस रूट पर चलने वाली डग्गामार बसों में सीटों की बुकिंग के लिए वेबसाइट पर फर्जी नाम से कई टूरिस्ट कंपनियां मौजूद हैं। इनमें साहिल ट्रेवल, इंडो नेपाल टूरिज्म सर्विस, आईटीसी (इंटरनेशनल टूरिस्ट), ई बस इंडिया जैसी तमाम कंपनियां बसों में यात्रियों की बुकिंग करने में जुटी हैं। वहीं परिवहन निगम की बसों की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। इनमें ट्रिक, रेड बस, ट्रेवल यारी, बस इंडिया, बुक ऑनस्पाट और हॅार्स सीट ट्रैवेल कंपनी शामिल हैंं।

निगम यात्रियों को देता है यह सुविधाएं

रोडवेज बस से सफर करने पर यात्रियों को कई सुविधाएं मिलती हैं। बस अड्डे पर ही यात्रियों को पानी और बैठने की सुविधा मिलती है। बस के टिकट के साथ यात्री का बीमा हो जाता है। यात्री को पांच लाख रुपए का दुर्घटना बीमा का लाभ मिलता है। यदि बीच सफर में बस खराब हो गई तो यात्रियों को अन्य बस की व्यवस्था कर आगे का सफर जारी रखा जाता है। यात्रियों की समस्याओं का तत्काल प्रभाव से निस्तारण किया जाता है और बसें अपने निर्धारित समय से ही छूटती हैं। एक बस निरस्त होने पर दूसरी बस की व्यवस्था की जाती है।

-विभिन्न रूटों के लिए अब ऑनलाइन बुकिंग हो रही है। यह बुकिंग परिवहन निगम की बसों के लिए नहीं बल्कि कई अन्य बसों के लिए हो रही है, जिन्हें इस तरह संचालन का अधिकार नहीं है। इस मामले में रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही साइबर सेल को दी जाएगी।

के. रविन्द्र नायक, प्रबंध निदेशक परिवहन निगम

-राजधानी में डग्गामारी पर प्रतिबंध लगने के बाद अब निजी संचालक दूसरे तरीके अपना रहे हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है। इसके लिए परिवहन विभाग से भी मदद ली जा रही है। साथ ही सड़क पर ऐसे वाहनों की जांच के लिए विशेष चेकिंग दस्ते तैयार किये हैं।

एचएस गाबा, मुख्य प्रधान प्रबंधक संचालन परिवहन निगम

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