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नो-ट्रिपिंग जोन के लिए खर्च होंगे 97.15 करोड़

bijli-pराजधानी में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए बनवाए गए आधा दर्जन से अधिक सब स्टेशन 

 

सभी उपकेंद्रों को दो सोर्स से मिलेगी बिजली, 12 करोड़ से लगेंगे एरियल बंच कंडक्टर

बिजनेस लिंक ब्यूरो
लखनऊ। निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए राजधानी को नो-ट्रिपिंग जोन बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत अब राजधानी में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में सुधार और ट्रिपिंग की समस्या से निजात के लिए बेहतर कार्ययोजना तैयार की गयी है। मध्यांचल प्रबंध निदेशक संजय गोयल द्वारा तैयार कराई गयी कार्ययोजना के तहत शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 97.15 करोड़ की धनराशि खर्च की जाएगी। विद्युत आपूर्ति व्यवधानों को मानकों के अनुसार कम से कम लाए जाने को लेकर सभी उपकेंद्रों को दो सोर्स से बिजली मिलेगी। प्रबंध निदेशक ने बताया कि राजधानी की विद्युत आपूर्ति को बाधित करने वाले कारणों का गहन अध्ययन किया गया है।
पड़ताल में पाया गया कि अधिकतर उपकेंद्रों को बिजली एक ही सोर्स से मिल रही है। ऐसे में ट्रांसमिशन सब स्टेशन से विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर वितरण उपकेंद्र से जुड़े इलाकों में बिजली गुल हो जाती है। इसके लिए बिजली की खपत बढऩे की दशा में ओवर लोड विद्युत उपकेंद्रों को डबल सोर्स से जोडऩे के साथ ही ट्रिपिंग की समस्या को दूर कराने में भी सफलता हासिल की गयी। एमडी ने बताया कि राजधानी की बिजली आपूर्ति में सुधार संबंधी कार्यों के तहत हरिहरपुर, लौलाई, निगोहां, आशियाना, न्यू जानकीपुरम सेक्टर एफ व रैथा रोड पर नये बिजली उपकेंद्रों का निर्माण कराया जा चुका है। कानपुर रोड की तरफ 33 केवी विद्युत आपूर्ति की समस्याओं से निपटने के लिए पारेषण उपकेंद्रों से खुर्रमपुर, नादरगंज ओल्ड, नादरगंज न्यू व आशियाना न्यू का निर्माण कराया गया है। राजधानी में 30 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ायी गयी। ट्रांसमिशन पारेषण उपसंस्थानों से ट्रिपिंग की समस्या को दूर कराने के लिए ट्रिपिंग रिले की सेटिंग ठीक की गयी। 11 केवी ट्रिपिंग की कैसकेडिंग कर प्रभाव को सीमित करने के लिए अधिकारियों कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर संवेदनशील बनाया गया है। उन्होंने बताया कि राजधानी को ट्रिपिंग की समस्या से निजात दिलाने के लिए तीन विद्युत उपकेंद्रों मेहताबबाग, पूरनपुर व सम्पूर्णानंद जेल परिसर में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
कल्याणपुर, सेक्टर 25, सर्वोदयनगर व कमता में पूर्व में स्थापित 33/11 केवी उपकेंद्रों के लिए स्वतंत्र दूसरे सोर्स उपलब्ध कराये जाने के लिए 25.65 करोड़ की लागत से कुल 38 किलोमीटर 33 केवी भूमिगत केबिल का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं लेसा के 12 खंडों में कुल 12 करोड़ की लागत से एरियल बंच केबिल लगाये जाने का कार्य कराया जा रहा है।

अधिकतर उपकेंद्र, ट्रांसफार्मर ओवरलोड

स्मार्ट सिटी के अंतर्गत राजधानी को नो-ट्रिपिंग जोन बनाए जाने की घोषणा के बीच शहर की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की मौजूदा हकीकत कुछ अलग ही तस्वीर बयां करती है। वीवीआईपी इलाकों को छोड़कर शहर के लगभग सभी उपकेंद्र व ट्रांसफार्मर ओवरलोड हैं। नतीजा जैसे ही बिजली की मांग बढ़ती है, व्यवधान तत्काल आपूर्ति बाधित कर देते हैं। शहर के आउटर इलाकों की हालत तो और भी दयनीय है। यहां पर लंबे समय तक बिजली आपूर्ति व्यवस्था ओवरलोडिंग और आपूर्ति सिस्टम के मिसमैच होने की वजह से बाधित रहती है। फिलहाल मध्यांचल प्रबंधन नो ट्रिपिंग जोन बनाने में कितना सफल होगा यह देखने वाली बात होगी।

आपूर्ति की बेहतर गुणवत्ता के लिए 400 करोड़

लखनऊ, झांसी, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर, बरेली, इलाहाबाद और वाराणसी में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और बेहतर करने व ट्रिपिंग में कमी करने के उद्देश्य से करीब 400 करोड़ रुपये के स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा, एक्यूजिशन) प्रणाली की स्थापना होगी। इसके लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उप्र पॉवर कारपोरेशन अध्यक्ष आलोक कुमार ने कदम आगे बढ़ाए हैं। उन्होंने इस संबंध में उक्त शहरों के मंडलायुक्तों को पत्र लिखा है कि इन शहरों में स्मार्ट सिटी परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। किसी भी नगर को स्मार्ट सिटी के स्तर तक ले जाने के लिए गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति जरूरी है। ट्रिपिंग में कमी के लिए स्काडा प्रणाली की स्थापना आवश्यक है।

यह है स्काडा प्रणाली

स्काडा में कंट्रोल रूम के माध्यम से विद्युत प्रणाली को नियंत्रित किया जाता है। किसी भी क्षेत्र में विद्युत व्यवधान होने पर प्रणाली में उपलब्ध आंकड़ों व स्रोतों के आधार पर जल्द किसी अन्य स्रोत से बाधित क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जा सकती है। इस प्रणाली में उपकेंद्र पूरी तरह से आटोमेटेड होते हैं, जिसका परिचालन रिमोट द्वारा कंट्रोल रूम से किया जाता है। विदेशों में यह तकनीक उपयोग की जाती है। स्काडा प्रणाली के अंतर्गत उपकेंद्र पर आरटीयू, एफआरटीयू उपकरणों की स्थापना, कंट्रोल रूम व उपकेंद्रों के बीच संचार प्रणाली की स्थापना और आधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा।

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