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शहर की फिजा में ओला ने घोला जहर…

  • सीएनजी की आड़ में डीजल वाहनों का संचालन करा रही ओला कम्पनीola-cab-sms_2016105_113327_05_10_2016
    शहर की सीमा में डीजल वाहनों के संचालन पर है प्रतिबंध
    प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर एनजीटी ने जताई चिंता, डीजल वाहनों पर रोक

लखनऊ। एक ओर जहां नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण पर गंभीरता दिखाते हुए परिवहन विभाग को शहर में डीजल वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लगाने की हिदायत दी है, वहीं ओला कम्पनी प्रतिबंध के बावजूद शहर के अंदर धड़ल्ले से डीजल वाहनों का संचालन कर रही है। शहर में एक या दो नहीं बल्कि दर्जनों की संख्या में ओला कम्पनी की डीजल गाडिय़ां सीएनजी वाहनों की आड़ में दौड़ रही हैं। राजधानी में कम्पनी का कामकाज संभाल रहे अफसर अनुबंध पर डीजल वाहनों को कम्पनी में लगा रहे हैं। ओला की वजह से शहर की फिजाओं में जहर घुल रहा है। वहीं इन वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने की बजाय परिवहन विभाग मुख्यालय पर बैठे जिम्मेदार अफसर मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। डीजल से संचालित टेम्पो के खिलाफ परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्ते अभियान चलाते हैं। अभियान के दौरान अन्य जनपदों से आकर शहर के अंदर संचालित हो रहे डीजल टेम्पो को पकड़कर बंद भी किया जाता है। डीजल टेम्पो पर तो परिवहन विभाग के अधिकारी कार्रवाई करते हैं, लेकिन शहर की सीमा में प्रतिबंध के बावजूद संचालित हो रहीं ओला कम्पनी की गाडिय़ों पर अधिकारी मेहरबान है। ओला कम्पनी की शहर में ६०० से ७०० गाडिय़ां चल रही हैं, वहीं डीजल के रूप में शहर से बाहर जाने वाली करीब ६० से ७० गाडिय़ों का परमिट है। इन गाडिय़ों में से अधिकतर को शहर में ही संचालित किया जा रहा है। इसका खुलासा तब हुआ जब ओला कम्पनी में ही लगी एक गाड़ी का हाल ही में जांच के दौरान चालान हो गया और इसकी शिकायत परिवहन आयुक्त तक पहुंच गई। वाहन मालिक ने कम्पनी पर नियमों का उल्लंघन कर वाहनों का संचालन कराने का आरोप लगाते हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर से अपने वाहन का अनुबंध बीच में ही समाप्त कराने का अनुरोध किया। हालांकि कम्पनी के जिम्मेदारों की मानें तो शहर के अंदर डीजल गाडिय़ों का संचालन नहीं कराया जा रहा है। लेकिन शिकायतकर्ता की बात से यह जाहिर है कि कम्पनी अधिकारियों की मेहरबानी से सीएनजी गाडिय़ों के साथ-साथ डीजल गाडिय़ों का संचालन करा रही है। कम्पनी खेल इस तरह करती है कि डीजल वाहनों पर अपनी कम्पनी के स्टीकर लगा देती है, जिससे इसकी पहचान छिप सके। अपने निजी स्वार्थ के लिए कम्पनी शहरवासियों की जान से खेल रही है और शहर की आबोहवा को प्रदूषित कर रही है।

  • 37 जनपदों में प्रदूषण का स्तर खतरे से ऊपर
    नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने पर्यावरण के मानकों का अध्ययन करने के दौरान पाया कि उत्तर प्रदेश में ३७ ऐसे जिले हैं जहां पर प्रदूषण का स्तर खतरे से ऊपर है। ऐसे में एनजीटी ने परिवहन विभाग को इन शहरों में संचालित हो रहे डीजल वाहनों पर तत्काल रोक लगाने और १० से १५ साल पुराने डीजल व पेट्रोल संचालित वाहनों को बाहर करने का आदेश दिया है। इन ३७ जिलों में लखनऊ का भी नाम है, जहां की हवा प्रदूषित हो चुकी है। यहां पर डीजल वाहनों का संचालन पूरी तरह से प्रतिबंधित होना चाहिए।
    पकड़े जा चुके हैं प्रतिबंधित वाहन
    बीते एक से दो साल में जब परिहवन विभाग के प्रवर्तन दस्तों की ओर से अभियान चलाया गया तो चारबाग में चार और अन्य रूटों पर दो गाडिय़ां पकड़ी गईं। बावजूद इसके फिर से इन गाडिय़ों के खिलाफ अभियान ठप पड़ गया। जबकि परिवहन विभाग के प्रवर्तन दस्ते ने ओला कम्पनी के सीएनजी गाडिय़ों के साथ ही प्रतिबंधित डीजल गाडिय़ों के संचलान की भनक लगने के बाद यह अभियान चलाया था। लेकिन फिर से सुस्ती के बाद कम्पनी अब मनमाने तरीके से डीजल गाडिय़ों को शहर के अंदर संचालित करा रही है।
    निर्धारित किराए से ज्यादा की वसूली
    ओला कम्पनी ग्राहकों से किराए के नाम पर जमकर वसूली कर रही है। राज्य परिवहन प्राधिकरण की ओर से जो किराया तय किया गया है उससे ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। इसके भुक्तभोगी खुद परिवहन विभाग के एक वरिष्ठï अधिकारी हैं। उन्होंने ओला कम्पनी से जानकीपुरम से आईनॉक्स के लिए गाड़ी बुक कराई थी, जिस पर कम्पनी ने एक ही दूरी के लिए दोनों तरफ का अलग-अलग किराया वसूला।
    कम्पनी के अधिकारियों का है कहना
    ओला कम्पनी का राजधानी लखनऊ में काम देख रहे मैनेजर फिरोज आलम का कहना है कि उन्हें इस बात की खबर नहीं है कि यहां डीजल वाहन संचालित हो रहे हैं। बंगलौर से ही कम्पनी का कोई निर्णय होगा। वाहन सप्लाई की जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारी सचिन का कहना है कि डीजल वाहन तो संचलित हो रहे हैं लेकिन शहर की सीमा के बाहर। हालांकि दोनों अधिकारियों को इस बात की खबर जरूर है कि शहर में भी डीजल गाडिय़ों का संचालन वही करा रहे हैं।

-ऐसी शिकायत मिली है कि शहर में डीजल वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध के बावजूद ओला कम्पनी डीजल गाडिय़ों का संचालन कर रही है। अगर ऐसा है तो कम्पनी से जवाब तलब किया जाएगा, साथ ही ऐसी गाडिय़ों को बंद कराया जाएगा।
के. रविंद्र नायक, परिवहन आयुक्त

-राज्य परिवहन प्राधिकरण की ओर से कम्पनी को शहर से बाहर डीजल वाहनों और शहर के अंदर सीएनजी वाहनों का ही संचालन करने का परमिट है। अगर कम्पनी शहर के अंदर डीजल वाहन संचालित कर रही है तो कार्रवाई की जाएगी।
नरेंद्र राय, सचिव, राज्य परिवहन प्राधिकरण

-पहले भी यह शिकायत आई है कि शहर के अंदर प्रतिबंध के बावजूद ओला कम्पनी डीजल गाडिय़ां संचालित करा रही है। अभियान चलाकर ऐसी सभी डीजल गाडिय़ों को बंद कराया जाएगा। जल्द ही विशेष अभियान चलेगा।
विदिशा सिंह, आरटीओ प्रवर्तन

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