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कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात करेगा बुंदेलखण्ड

  • उत्तर प्रदेश को उन्नति की सौग़ात देगा केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय
  • रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का किया प्रधानमंत्री ने वर्चुअल लोकार्पण
  • कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र बनेंगे नालेज पार्टनर: मुख्यमंत्री

बिजनेस लिंक ब्यूरो 

rani.gif2लखनऊ। वीरभूमि बुन्देलखण्ड कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात करने को तैयार है। किसानों की आय दूनी करने के लिए गुणवत्तायुक्त कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों को तकनीकि प्रशिक्षण उपलब्ध कराना केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झांसी में रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का वर्चुअल लोकार्पण कर कृषि क्षेत्र को नया आयाम दिया है। दतिया में इसी विश्वविद्यालय से संबंधित पशु चिकित्सा एवं मत्स्य महाविद्यालय भी स्थापित किया जाएगा।

रानी लक्ष्मी बाई कृषि विश्वविद्यालय, कम वर्षा वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा आत्मनिर्भर भारत अभियान को सफल बनाने के लिए यह कृषि विश्वविद्यालय एक नया अध्याय लिखेगा। कृषि में स्टार्ट अप के नये-नये रास्ते खुल रहे हैं। अब तो बीज से लेकर बाजार भी तकनीक पर आधारित हैं। कृषि क्षेत्र में भी अब तकनीक के प्रयोग से फसल में इजाफा होने से किसान भी पहले से बेहतर की स्थिति में हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, कृषि क्षेत्र को अग्रणी भूमिका में लाने और कृषि शिक्षा में नये आयाम स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का लोकार्पण एवं उसके शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवनों का उद्घाटन किया है। यह विश्वविद्यालय कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात करेगा। कृषि क्षेत्र को अग्रणी भूमिका में लाकर किसानों की आय दोगुनी करने के लिए आवश्यक सभी अहम बिन्दुओं पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकार प्राथमिकता पर कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र नालेज पार्टनर बनाये जायेंगे। सरकार ने कृषि छात्रों को 31,000 रुपये की स्कालरशिप देने की व्यवस्था की है, पहले यह 15,000 रुपये थी। साथ ही सरकार ने किसान हितैषी नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं को प्राथमिकता पर लागू किया है। कृषि क्षेत्र और किसानों के कल्याण व प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर कृषक उत्पादन संगठन, एफपीओ नीति-2020 का गठन हुआ है। एफपीओ से एमएसएमई, ओडीओपी, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन व डेयरी उद्योगों को सुदृढ़ बनाया जा रहा है।

Press (4)उत्तर प्रदेश कृषक उत्पादक संगठन नीति-2020
योगी आदित्यनाथ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को अग्रणी भूमिका में लाने के लिए प्रारम्भ से ही कार्य कर रही है। इसी के तहत सरकार कृषक उत्पादक संगठन नीति-2020 ला रही है। इस नीति से कृषक उत्पादक संगठन बेहतर ढंग से संचालित होंगे और यह ग्रामीण समृद्धि का आधार बनेंगे। कृषक उत्पादक संगठनों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हुए व्यावसायिक गतिविधियों को सुचारू रूप से सम्पादित किया जाएगा। प्रदेश की कृषि व आर्थिक उन्नति में एफपीओ की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लघु एवं सीमान्त श्रेणी के कृषकों को कम लागत में कृषि निवेशों की व्यवस्था, नवीनतम तकनीक अपनाकर उच्च उत्पादन, बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए समुचित विपणन व्यवस्था तथा कृषकों की आय में वृद्धि करने में उत्तर प्रदेश कृषक उत्पादक संगठन नीति कारगर होगी।

एफपीओ को मिलेगा बढ़ावा
इस नीति से एफपीओ को बढ़ावा मिलेगा। कृषि उत्पादों के विपणन में आ रही बाधाओं का समुचित निदान होगा। साथ ही, कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र के उत्पादों का भण्डारण, प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन कर बेहतर कीमत मिलेगी। कृषक उत्पादक संगठनों के गठन उनके क्रिया-कलापों में आ रही चुनौतियां दूर होंगी। एमएसएमई, ओडीओपी, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, डेयरी उद्योग आदि से भी कृषक उत्पादक संगठनों से जोड़ा जाएगा।

प्रधानमंत्री ने छात्रों से की बात
प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ बातचीत की और खाद्य तेल के आयात को कम करने और खाद्य प्रसंस्करण, विशेष रूप से फलों और सब्जियों के प्रसंस्करण को बढ़ाने जैसी कुछ चुनौतियों के समाधान के तरीकों के बारे में उनकी राय मांगी। मोदी ने एक छात्र से पूछा कि क्या सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सूक्ष्म, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के बारे में किसानों में जागरूकता पैदा की जा सकती है।बातचीत के दौरान, प्रधान मंत्री ने इस क्षेत्र में जल के पुनचक्रीकरण तथा नवीन और कम लागत वाली प्रौद्योगिकी के माध्यम से जल और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

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