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निर्माणाधीन इमारत में शिक्षित हो रहे मेडिकोज

IMG_1489शैलेन्द्र यादव 

  • जीएस इन्फ्रा ने डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के जिन फ्लोर को किया हैंडओवर वह हैं अधूरे
  • आपूर्तिकर्ताओं  का भुगतान न होना अधर में लटकी निर्माण परियोजना का बड़ा कारण
  • राजकीय निर्माण निगम से भुगतान न होने का दिया जा रहा तर्क उ बड़े ठेकेदारों ने आपूर्तिकर्ताओं के दबाये करोड़ों
  • मिले आपूर्तिकर्ताओं का बकाया तो पूरी हों अधूरी परियोजनाएं

लखनऊ। सूरत कोचिंग सेंटर हादसे के बाद देश-प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद के कई फरमान जारी हुये। उत्तर प्रदेश सरकार भी पीछे नहीं रही। बावजूद इसके राजधानी में कई ऐसे संस्थान हैं जो मानकों पर खरे नहीं उतरते, लेकिन यहां शिक्षण कार्य जारी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की निमार्णाधीन भव्य इमारत में हो रही मेडिकल शिक्षण कार्य इसका बड़ा उदाहरण है। कागजों पर भले ही उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को मेसर्स जीएस इन्फ्रा ने इस 12 मंजिला इमारत का भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल हैंडओवर कर दिया हो, लेकिन हकीकत यह है कि यहां अभी बहुत कार्य होना है। बावजूद इसके इस हिस्से में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान मेडिकल छात्र-छात्राओं को शिक्षित कर रहा है।

गौरतलब है कि तत्कालीन सपा सरकार ने गोमती नगर के विभूति खण्ड में 368 करोड़ की लागत से डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एकेडमिक ब्लाक के निर्माण को हरी झण्डी दी थी। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने इस परियोजना के लिये मेसर्स जीएस इन्फ्रा को अनुबंधित किया और निर्माण कार्य वर्ष 2014-15 में प्रारम्भ हुआ। बीते वर्ष यह परियोजना हैंडओवर होनी थी। पर, यह निर्माण कार्य अब तक अधूरा है। इसका एक बड़ा कारण जीएस इन्फ्रा द्वारा विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ों का भुगतान न करना है, जिसके चलते निर्माण कार्य सुस्त पड़ा है।

जानकारों की मानें तो डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एकेडमिक ब्लाक निर्माण परियोजना में निर्माण सामग्री की सप्लाई करने वाले सूचीबद्ध आपूर्तिकर्ताओं सहित अन्य छोटे-छोटे सप्लायर बेहाल हैं। इन आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ों रुपये का भुगतान बकाया है। तगादा कर रहे पीडि़त आपूर्तिकर्ताओं की मानें तो लम्बे समय से भुगतान न होने के चलते हमें तो विभिन्न समस्याओं से जूझना ही पड़ रहा है। साथ ही निर्धारित समय निकलने के बावजूद भी यह परियोजना अब तक अधूरी पड़ी है। प्रभावित आपूर्तिकर्ताओं की मानें तो इसके कई कारण हैं।

sandeep singhएकेडमिक ब्लाक के तीन फ्लोर जीएस इन्फ्रा ने हैंडओवर कर दिये हैं, जिनमें मेडिकल के छात्र-छात्राओं की कक्षायें भी संचालित हो रही हैं। शेष कार्य तीव्र गति से कराया जा रहा है। जल्द ही इस परियोजना का निर्माण कार्य पूरा करा लिया जायेगा। जीएस इन्फ्रा द्वारा संबंधित आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान न करने के लिये प्रत्यक्षरूप से निर्माण निगम उत्तरदायी नहीं है।
इं. संदीप सिंह, परियोजना प्रबंधक, यूपीआरएनएन

पहला, कार्यदायी संस्था द्वारा किये गये भुगतान का उपयोग दूसरी परियोजनाओं में करना। दूसरा, जब मैन पावर, शीशा सहित अन्य निर्माण सामग्रियों की आपूॢत करने वाले विभिन्न आपूॢतकर्ताओं का भुगतान रुकने से आपूर्ति रुकना। तीसरा, गैर पंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से दोयम दर्जे की निर्माण सामग्री की आपूर्ति कराना। इसके अलावा भी इस परियोजना में देरी के अन्य कारण हैं। जानकारों की मानें तो इसकी तस्दीक निष्पक्ष जांच में की जा सकती है। कार्यदायी संस्था द्वारा भुगतान किये गये मोबिलाइजेशन फण्ड का उपयोग संबंधित परियोजनाओं में न करके अन्य ठेके-पट्ट को लेने, दूसरी परियोजना में प्रयोग करने सहित व्यक्तिगत कार्यों में कर लिया गया।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न निर्माण कार्यदायी संस्थाओं में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम प्रमुख है। उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिये राजकीय निर्माण निगम ने जिन ठेकेदार फर्मों को अनुबंधित किया है, उनमें कई फर्मों ने विभिन्न परियोजनाओं में दर्जनों आपूर्तिकर्ताओं से विभिन्न निर्माण सामग्री आपूर्ति करायी। पर, इसके सापेक्ष आपूर्तिकर्ताओं को बीते कर्ई वर्षों से करोड़ों का भुगतान नहीं किया। ठेकेदारों की इस मनमानी का दंश आपूर्तिकर्ता झेल रहे हैं और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एकेडमिक ब्लाक जैसी आधी-अधूरी परियोजनाओं को उपयोग में लाने जैसी तस्वीर सामने हैं।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि उपयोग में लाई जा रही इस अधूरी निर्माण परियोजना के लिये जिम्मेदार कौन है? यदि यहां कोई हादसा होता है, तो उत्तरदायी कौन होगा? राज्य सरकार, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम या फिर जीएस इन्फ्रा? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि शासकीय कार्यदायी संस्थाओं द्वारा अनुबंधित किये गये ठेकेदारों द्वारा आपूॢतकर्ताओं के बकाया धन का भुगतान कराने के लिये कौन हस्तक्षेप करेगा?

Saurabhबीते काफी समय से भुगतान न होने के चलते विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान में विलम्ब जरूर हुआ। परए ऐसा नहीं है कि किसी आपूर्तिकर्ता का भुगतान नहीं हुआ है। जिन आपूॢतकर्ताओं का भुगतान रुका है, उन्हें जल्द ही भुगतान कर दिया जायेगा। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के इस निर्माण को हैंडओवर कर दिया जायेगा।
सौरभ सिंह, जीएस इन्फ्रा

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