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वित्तीय तरलता की गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहा उद्योग जगत

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पवन तिवारी 
  • मांग वाले क्षेत्र ग्रीन जोन में, पर आपूर्ति वाले क्षेत्र रेड जोन में होने से भी हो रही समस्या
  • औद्योगिक दृष्टिकोण से, वर्तमान स्थिति में व्यवसायों के लिए डिजिटल परिवर्तन तेज करना आवश्यक
  • अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रही आपूर्ति श्रृंखला 

लखनऊ। कोविड-19 के प्रकोप की वजह से दुनिया के कारोबार को पूरी तरह से बाधित किया है, जिसके प्रमुख कारण मांग और आपूर्ति का असंतुलित होना है। इसी कारण से आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो गयी है और आपूर्ति श्रृंखला अभूतपूर्व चुनौतियों से जूझ रही है। अगर देखा जाए तो जीडीपी की वृद्धि सात साल के निचले स्तर 1.9 प्रतिशत पर आ गई है और आने वाले समय मे यह और भी प्रभावित रहेगा। कोविड-19 महामारी के साथ बाजार मे हलचल आपूर्ति पक्ष को तनावपूर्ण कर रहा है और साथ ही अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है।

उद्योग वित्तीय तरलता की गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहा है जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी हो सकती है। उद्योग का नकदी प्रवाह एक ठहराव पर आ गया है, जबकि निश्चित परिचालन लागत बरकरार है। उपभोक्ता पक्ष पर, आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, स्टॉकिंग और ओवर-द-काउंटर दवाओं ने आपूॢत श्रृंखलाओं पर असामान्य तनाव पैदा कर दिया है। इस सम्बन्ध में सूचना तकनीकी सम्बन्धित अभिकरणों का प्रयोग वर्तमान स्थिति को बेहतर कर सकता है।

भारत में, कुछ उद्योग विशेषकर दवाइयों के निर्माता जो 50 प्रतिशत कच्चा माल चीन से आयात करने की वजह से अधिक निर्भर हो गए थे। ये उद्योग महत्वपूर्ण जोखिम में हैं। चीन विश्व के उत्पादन का एक बड़ा भाग निर्यात करता है जिसकी वजह से वहा अगर कोई आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है तब दुनिया भर में भी आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है। करोना के कारण उत्पादन और वितरण का नेटवर्क इसी कारण से गड़बड़ा गया हैं। स्थानीय स्तर पर भी आपूर्ति श्रृंखला नई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। रेड, ऑरेंज तथा ग्रीन जोन के वर्गीकरण में ऐसे कई उदाहरण है जहां मांग वाले क्षेत्र तो ग्रीन जोन में है पर आपूर्ति वाले क्षेत्र रेड जोन में आ रहे है।

भविष्य में भी इस प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। दूसरा, धीमी आर्थिक गतिविधि ने भारत और वैश्विक स्तर पर औद्योगिक उत्पादों की मांग को कम कर दिया है। पैकेजिंग उद्योग भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। देशव्यापी लॉकडाउन ने पूरी पैकेजिंग आपूर्ति श्रृंखला को अंतिम पड़ाव में ला दिया है। यह ध्यान रहे की पैकेजिंग उद्योग उपभोग के लिए तैयार माल, पैकेजिंग उपकरणों की उपलब्धता तथा बाजार में मांग पर चलता है। इस प्रकार के उद्योगों के लिए विशेष प्रयत्न करने की आवश्यकता है। पैकेजिंग उद्योग थोड़ी सी मदद से पटरी पर आ सकता है क्योंकि अधिकतर औद्यिगिक उत्पादों के लिए लगभग समान पैकेजिंग की आवश्यकता होती है।

सरकार 1.3 बिलियन भारतीय आबादी के लिए आवश्यक वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति जारी रखने के लिए सभी प्रयास कर रही है। हमें इस असाधारण स्थिति का सामना करने के लिए असाधारण चरणों की आवश्यकता होगी। उद्योग, सरकार के साथ काम कर रहा है ताकि वे इन आवश्यक चीजों को प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा सकें। इस बीच, सभी के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि हम इस मुश्किल दौर में एक दूसरे का साथ देते हुए गुजरें और न घबराएं। इस बिंदु पर वित्तीय संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। खुदरा लागत का 85 प्रतिशत (किराया, विद्युत आपूर्ति की लागत, कर्मचारियों का वेतन, कर की देनदारी) तय लागत है, जो खुदरा विक्रेताओं पर कई प्रकार से वित्तीय दबाव डाल रहा है।

उद्योग वित्तीय तरलता की गम्भीर चुनौतियों का सामना कर रहा है जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी हो सकती है। उद्योग का नकदी प्रवाह एक ठहराव पर आ गया है, जबकि निश्चित परिचालन लागत बरकरार है। उपभोक्ता पक्ष पर, आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी, स्टॉकिंग और ओवर-द-काउंटर दवाओं ने आपूॢत श्रृंखलाओं पर असामान्य तनाव पैदा कर दिया है। इस सम्बन्ध में सूचना तकनीकी सम्बन्धित अभिकरणों का प्रयोग वर्तमान स्थिति को बेहतर कर सकता है।

एक औद्योगिक दृष्टिकोण से, वर्तमान स्थिति दुनिया भर के व्यवसायों के लिए डिजिटल परिवर्तन की पहल को तेज करने की संभावना है, क्योंकि वे अपनी कमजोरियों का सामना करने के लिए मजबूर हैं। खुदरा क्षेत्र को डिजिटल माध्यमो को आत्मसात करके खुद को बनाये रखने की चुनौती है। यह वास्तव में एक अवसर भी है जहां स्मार्टफोन जैसे सामान्य उपकरण बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। विनिर्माण क्षमता के मामले में उद्योग में अपार संभावनाएं हैं। एक स्वचालित आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली के साथ संयुक्त एक स्थायी पारिस्थिति की तंत्र बना सकता है जिसका उपयोग आने वाली पीढिय़ों द्वारा किया जा सकता है। आपूर्ति श्रृंखला का डिजिटलीकरण, पैकेजिंग उद्योग को पूरी क्षमता से संचालित करने में सक्षम करेगा।

कोविड-19 ने कॉर्पोरेट निर्णय लेने वालों को सिखाया है कि भविष्य की आपूर्ति श्रृंखला डिजाइन तैयार करने में, लागत, गुणवत्ता और वितरण के अलावा उन्हें नए प्रदर्शन उपायों पर श्रृंखलाओं का तनाव-परीक्षण करने की भी आवश्यकता होगी। यह समय वास्तव में खुद को और ज्यादा चुनौतियों के लिए तैयार करने का है। उद्योग, समाज तथा सरकार मिलके इस समस्या से पार पा सकते है, ज़रूरत एक दुसरे के साथ परस्पर सामंजस्य बैठा के चलने की है।

@लेखक, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं और औद्योगिक संगठन स्माल इंडस्ट्रीज एण्ड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैं।

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