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वैदिक और स्मार्ट सिटी के समन्वय का मॉडल बनेगी नव्य अयोध्या

हर राज्य, कोरिया समेत पांच देशों, आश्रमों, मठों, डॉरमेट्री के लिए आरक्षित होंगे भूखंड
सूरज की किरणों जैसा नजर आएगा सड़कों का संजाल

girish ji

गिरीश पांडेय

लखनऊ। चौड़ी सड़कें। दोनों किनारों पर लकदक हरियाली। सूर्योदय होने पर होटल की खिड़की से झांकते ही देश की पंच नदियों में से एक पवित्र सरयू नदी और रामलला के भव्य मंदिर का दीदार। रात तो ऐसी दिखेगी मानों आसमान के सारे तारे सरयू में ही उतर आए हों। नव्य अयोध्या के बारे में कुछ ऐसी ही परिकल्पना है, अपने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की। उत्तर प्रदेश आवास-विकास परिषद इसको प्रारंभिक स्वरूप भी दे चुका है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के सामने इसका प्रस्तुतिकरण भी हो चुका है। कुल मिलाकर नव्य अयोध्या वैदिक और स्मार्ट सिटी का मॉडल बनेगी।

पर्यटकों की सुविधाओं को मिलेगी खास तरजीह
देश-दुनिया में भगवान श्रीराम की स्वीकार्यता के मद्देनजर अयोध्या में भव्य राम मंदिर और दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम की प्रतिमा बनने के साथ अयोध्या दुनिया भर के रामभक्तों और अन्य लोगों के आस्था का केंद्र बनेगा। हर कोई अपने आराध्य का दर्शन करने एक बार जरूर अयोध्या आना चाहेगा। लिहाजा नव्य अयोध्या में इनकी सुविधा का खास खयाल रखा गया है।

पांच फाइव, 10 थ्री और 15 बजट होटल के भी प्लान
इसके लिए पांच फाइव स्टार, 10 थ्री स्टार और 15 अजट होटलों के लिए स्थान आरिक्षत किए जाएंगे। यह उन 20 होटलों से अलग होंगे जिनके लिए नई पर्यटन नीति के बाद पर्यटन विभाग को प्रस्ताव मिल चुके हैं। हालांकि भगवान श्रीराम की स्वीकार्यता के मद्ददेनजर मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे अधिक जमीन की मांग निकलेगी। ऐसे में कुछ बहुमंजिला भवनों को भी प्लान में शामिल करें। इसके अलावा कोरिया समेत पांच देशों और 25 राज्यों के लिए अतिथि गृह, अलग-अलग धर्मों, संप्रदायों और आश्रमों के लिए, मठों और स्वयंसेवी संगठनों के लिए भी करीब 100 भूखंड आरक्षित किए जाएंगे। सभी बुनियादी सुविधाओं से युक्त सर्विस अपार्टमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, सरयू की पवित्रता और अविरलता अप्रभावित रहे इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा।

वैदिक शहरों की तरह धनुषाकार होगी नव्य अयोध्या
प्रस्ताव के मुताबिक नव्य अयोध्या वैदिक कालीन आम शहरों की तरह धनुष के आकार का होगा। इसमें करीब 80 मीटर चौड़ी सड़कों का संजाल होगा। ये सड़कें ऐसी ऊपर से सूर्य की किरणों के समान दिखेंगी। सड़कों के किनारे लकदक हरियाली के लिए ग्रीनबेल्ट विकसित की जाएगी। यह सब होगा करीब 740 एकड़ भूमि पर। इसमें माझा बरहटा में 57.64, माझा शहनवाजपुर में 293.79 और माझा तिहुरा की 388.41 एकड़ जमीन पर। यह जमीन लखनऊ-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 बी पर है। लखनऊ से गोरखपुर जाते समय दाहिने ओर सरयू के किनारे निर्मित बंधे के बीचोबीच और प्रस्तावित श्रीराम की प्रतिमा के लिए अधिसूचित भूमि से लगी हुई है।

अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए मैं प्रदेश सरकार की सराहना करता हूं। रामनगरी के विकास के लिए सरकार ने जो महत्वपूर्ण योजना बनाई है उस पर हम प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। इससे अयोध्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन का केंद्र बनकर उभरेगा और पर्यटन उद्योग के क्षेत्र में निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा। जिससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अयोध्या में पर्यटन उद्योग विकसित होने से एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा।
आलोक रंजन, पूर्व मुख्य सचिव/मुख्य संरक्षक, स्माल इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीमा)

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