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सडक़ें उखड़ीं, नालियां लापता

शैलेन्द्र यादव

  • सामग्री खरीद में घपले की शिकायत पर राज्य सतर्कता आयोग ने मांगी सभी टेंडरों की जानकारी
  • निर्माण में अनियमितता के चलते सरकार ने रोके 90 करोड़
  • निर्माण में गड़बडिय़ों की शिकायत मिलने पर उठाया कदम

लखनऊ। नाली-खड़ंजे और सडक़ का निर्माण हो या फिर आश्रम पद्वति विद्यालय सहित अन्य निर्माण, उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम की कार्य प्रणाली कटघरे में है। टेंडर प्रक्रिया में घपले की शिकायतों पर राज्य सतर्कता आयोग ने शिकंजा कसा है। तो वहीं शासन ने प्रबंध निदेशक को जांच पूरी होने तक किसी भी ठेकेदार को कोई भी भुगतान न करने के आदेश दिये हैं। वहीं यूपी सिडको के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश भी दिये गये हैं। सतर्कता आयोग ने सभी टेण्डरों के संबंध में शासनादेश से लेकर अतिंम आवंटन तक की सूचना तलब की है।

गौरतलब है कि यूपी सिडको को ग्राम पंचायतों में खड़ंजों-सडक़ों और नालियों के निर्माण के लिये चालू वित्तीय वर्ष में 90 करोड़ रुपये दिये गये हैं। जानकारों की मानें तो सभी जनपदों में इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब होने की शिकायतें मिल रही हैं। महिने-दो महिनें में सडक़ें उखड़ गई हैं। नालियों का अता-पता नहीं मिल रहा है। इसलिये शासन ने अब तक हुये सभी कामों और उनकी गुणवत्ता का सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। जानकारों की मानें तो ई-टेंडर के बाद निर्माण कार्य करने की पूरी जिम्मेदारी ठेका लेने वाली फर्मों की होती है, लेकिन निगम के कुछ अफसर कमीशन के फेर में सामग्री खरीद में दखल दे रहे हैं। बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ों की शिकायत मिली है। सूत्रों की मानें तो सर्तकता आयोग ने निगम से जो जानकारियां तलब की हैं, वह मिलने पर आयोग उसका परीक्षण करेगा, जिसमें बहुत कुछ सही नहीं मिलेगा।

इसमें बड़ी खामियां मिलना तय मानी जा रही है। बता दें कि बीते फरवरी माह में भदोही जनपद के बीरमपुर गांव में निर्माणाधीन आश्रम पद्धति विद्यालय के भवन निर्माण में एक करोड़ का घोटाला सामने आया। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम के मैनेङ्क्षजग डायरेक्टर विष्णु वाष्र्णेय ने तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सरोज श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता डीएन ङ्क्षसह और अवर अभियंता एनपी ङ्क्षसह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश भी दिया था। शासन की ओर से वाराणसी मंडल के अधीक्षण अभियंता हरिशंकर तिवारी के नेतृत्व में गठित टीम ने मूल्यांकन कर शासन को रिपोर्ट सौंपी थी। आरोप है कि तत्कालीन अभियंताओं ने फर्जी मेजरमेंट बुॅक, एमवी बनाकर भुगतान कर दिया। गौरतलब है कि रीब परिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिए बीरमपुर में वित्तीय वर्ष 2010-11 में 13 करोड़ 55 लाख की लागत से आवासीय आश्रम पद्धति विद्यालय के भवन का निर्माण कराया जा रहा है। भवन निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निगम को दी गई थी। तत्कालीन अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता और ठेकेदार की मिलीभगत से फर्जी एमवी बनाकर काम से अधिक बजट का भुगतान कर दिया गया था।

शिकायत मिलने पर शासन की ओर से अधीक्षण अभियंता वाराणसी मंडल हरिशंकर तिवारी, अधिशासी अभियंता दीपचंद यादव गाजीपुर, अधिशासी अभियंता भदोही अनिरुद्ध प्रसाद की टीम ने निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी। जांच में फर्जी एमवी बुॅक बनाकर एक करोड़ रुपये का घोटाला करने का मामला सामने आया था। अधिकारियों की टीम की जांच रिपोर्ट मिलते ही एमडी समाज कल्याण विभाग ने आरोपित अभियंताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। अधिशासी अभियंता अनिरुद्ध प्रसाद ने बताया कि एमडी के निर्देश पर सुरियावां थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने गए थे लेकिन जांच रिपोर्ट न होने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी है। लखनऊ से रिपोर्ट मंगाई गई है। इसके पश्चात आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
13 बिन्दुओं पर मांगी जानकारी
सतर्कता आयोग के अध्यक्ष ने वर्ष 2018-19 में हुये सभी टेंडर के संबंध में तत्काल 13 बिन्दुओं पर रिपोर्ट तलब की है। इसमें पूंछा गया है कि टेंडर के संबंध में किस तिथि को शासनादेश हुआ। स्वीकृत लागत, निविदा खोलने की तिथि, प्रतिभागी फर्मों के नाम-पते, न्यूनतम निविदादाता फर्म का नाम, निविदा स्वीकृति व कार्य प्रारंभ होने की तिथि और ई-टेंडङ्क्षरग प्रक्रिया के लिये अधिकृत अधिकारी का नाम व पदनाम के संबंध में जानकारी मांगी गई है। साथ ही यह भी पूंछा गया है कि यदि तकनीकि स्वीकृति के सापेक्ष लागत की निविदा का प्रकाशन नहीं हुआ तो कारण स्पष्टï करें।

प्रतिवर्र्ष कराता है 800 करोड़ के काम
बता दें कि उत्तर प्रदेश राज्य समाज कल्याण निर्माण निगम प्रति वर्ष औसतन 800 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराता है। वर्तमान में निगम के पास मेडिकल कालेज, केन्द्रीय विद्यालय और आश्रम पद्वति विद्यालयों के निर्माण समेत अन्य कार्य हैं। हालही में उच्च स्तर पर शिकायत मिली थी कि निगम में टेंडर प्रक्रिया में पारदॢशता नहीं बरती जा रही है।

यूपी सिडको द्वारा कराये गये निर्माण को लेकर शिकायतें मिली हैं। जांच के आदेश दे दिये गये हैं। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
चन्द्रप्रकाश, आयुक्त, समाज कल्याण विभाग

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