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आतंकवाद काे पालने वाले आतंकियों जितना ही खतरनाक- मोदी

गोवा. ब्रिक्स समिट रविवार को खत्म हो गई। इससे पहले, नरेंद्र मोदी ने चारों देशों (ब्राजील, रूस, चीन और साउथ अफ्रीका) के प्रमुखों के साथ मीटिंग की। बाद में मीडिया को एड्रेस करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘जो हिंसा और आतंक की ताकतों को सपोर्ट देते हैं, शरण देते हैं, उन्हें मदद करते हैं वह हमारे लिए आतंकवादियों जितना ही खतरनाक हैं।’ उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पार आतंकवाद और उसके मददगारों से मुकाबला ब्रिक्स देशों की प्राॅयोरिटी होगी। ब्रिक्स देश टैक्स चोरी, काला धन और भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मिलकर काम करेंगे।’ आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा…
- मोदी ने कहा, ‘आज आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है। भारत का पड़ोसी देश उसे पालने-पोसने में लगा है। ये केवल आतंकियों को अपनी जमीन पर शरण ही नहीं देता बल्कि उस विचारधारा को बढ़ावा देता है। हमें इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा।’
- ‘दुनियाभर में जितने टेरर मॉड्यूल्स हैं, वे उस देश से जुड़े हुए हैं। ये केवल आतंकियों को अपनी जमीन पर शरण ही नहीं देता बल्कि उन्हें पोषित करता है और उस विचारधारा को बढ़ावा देता है। आतंकवाद को सपोर्ट करने वालों को सबक सिखाना होगा।’
– ‘आतंकवाद को राजनीतिक फायदा हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हम इस मानसिकता का विरोध करते हैं।’
– मोदी ने कहा, ‘आतंकवाद से पूरा पश्चिम एशिया, यूरोप और साउथ एशिया प्रभावित है।’
– उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स दिशा देने में अहम रोल निभा सकता है। ये सदस्य देशों को टारगेट पूरा करने में मददगार साबित होगा।’
– ‘अभी दुनिया के सामने सिक्युरिटी, साइबर के क्षेत्र और मानव तस्करी की चुनौतियां हैं। इसके लिए हमें रोडमैप तैयार करना होगा।’
– ‘ग्रोथ कैसे हासिल करनी है, इसके लिए हमें जड़ तक जाना होगा। इसके लिए हमें स्किल्ड टैलेंट, आइडियाज, टेक्नोलॉजी और पैसे का फ्लो बनाए रखना होगा।’
– ‘भारत ने हाल ही में पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट पर साइन किए हैं। हम डेवलपमेंट और क्लाइमेट चेंज के बीच बैलेंस बनाकर रखना चाहते हैं।’
- इससे पहले, मोदी ने सुबह श्रीलंका के प्रेसिडेंट मैत्रीपाला सिरिसेना और भूटान के पीएम त्शेरिंग टोबगे से भी मुलाकात की।
चीनी प्रेसिडेंट से मुलाकात में कहा था- टेररिज्म पर मतभेद नहीं
- मोदी-जिनपिंग की मुलाकात के बाद फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन विकास स्वरूप ने इसकी जानकारी दी।
– विकास स्वरूप ने बताया, ‘दोनों नेताओं ने आतंकवाद पर अहम चर्चा की और इस बात पर राजी हुए कि इससे मुकाबले के लिए साझा कोशिशें बढ़ाने की जरूरत है।’
– ‘पीएम मोदी ने जिनपिंग से कहा कि दोनों ही देश आतंकवाद के शिकार हैं और इससे पूरे रीजन में मुश्किल खड़ी हो सकती है।’
– ‘चीनी प्रेसिडेंट ने कहा कि दोनों देशों को सिक्युरिटी डायलॉग और पार्टनरशिप को मजबूत करना चाहिए। दोनों देशों के बीच की समानताएं हमारे मतभेदों को कम कर सकती हैं।’
– स्वरूप ने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के बीच एनएसजी में भारत की मेंबरशिप को लेकर भी बातचीत हुई। भारत जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर यूएन में बैन के लिए चीन के साथ बातचीत जारी रखेगा।
रूस से हुए थे अहम समझौते
– भारत-रूस के बीच शनिवार को ब्रिक्स 2016 समिट से पहले 16 करार हुए। इनमें 43 हजार करोड़ रुपए की 3 बड़ी डिफेंस डील भी शामिल हैं। – पहली डील, S-400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, दूसरी- कामोव केए 226 टी हेलिकॉप्टर और तीसरी- स्टील्थ फ्रिगेट को लेकर हुई।
– S-400 रूस का सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है, भारत ऐसे 5 सिस्टम खरीदेगा। रूस ने अपने इस सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को सीरिया में तैनात कर रखा है। जबकि 200 कामोव केए 226 टी हेलिकॉप्टर भी भारत को मिलेंगे, इनमें 40 रूस से आएंगे और बाकी देश में ही बनेंगे।
– S-400 ट्रायम्फ एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम में 400 किमी दूर से आ रहे टारगेट को ट्रैक करने की कैपेसिटी है।
– यह पाकिस्तान या चीन की 36 न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों को एक वक्त में एक साथ टारगेट कर सकेगा।
– रोसोबोरोन एक्सपोर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 से अब तक भारत ने 45 अरब डॉलर यानी करीब 2.50 लाख करोड़ रुपए के हथियार और मिलिट्री इक्विपमेंट्स खरीदे हैं।
– रूस जितना भी आर्म्स एक्सपोर्ट करता है, उसका 30% भारत खरीद लेता है।

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