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दम तोड़ रहा एलडीए का अभियान, एक सील

  • विहित प्राधिकारी कार्यालय में ऐतिहासिक मार्केट हजरतगंज के अवैध बेसमेंटों की खोज जारी
  • अभियान के प्रारम्भ में किये गये दावे साबित हो रहे हवा-हवाई
  • एलडीए अधिकारी अब तक महज एक अवैध निर्माण कर सके सील
  • अवैध निर्माण सीलिंग की लम्बी प्रक्रिया को बताया जा रहा कार्यवाही न होने का कारण

बिजनेस लिंक ब्यूरो

लखनऊ। राजधानी की सुनियोजित एवं सुव्यवस्थित तस्वीर बनाने की जिम्मेदारी जिस लखनऊ विकास प्राधिकरण पर है, अवैध निर्माण के खिलाफ शुरू किया गया उसका अभियान दम तोड़ता नजर आ रहा है। मामला, राजधानी के वीवीआईपी क्षेत्र की ऐतिहासिक मार्केट हजरतगंज में बने अवैध बेसमेंटों का है। स्थानीय व्यापारियों व शोरूम संचालकों ने कायदे-कानून को ताक पर रखकर 15 से 20 मीटर गहरे तहखाने खुदवा डाले और जिम्मेदार प्राधिकरण तंत्र, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को पता ही नहीं चला। यह अवैध निर्माण कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। बावजूद इसके विगत दिनों प्रारम्भ हुआ एलडीए का अभियान कुछ ही समय में दम तोड़ता नजर आ रहा है। अधिकारी कागजी कार्यवाही में उलझ कर रह गये हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों एलडीए वीसी प्रभू एन सिंह से जब हजरतगंज निवासियों ने ने अवैध तहखानों की शिकायत की थी, तब एलडीए वीसी ने मातहतों को फटकार लगाते हुये अभियान चलाकर कार्यवाही करने के निर्देश दिये थे। तब एलडीए प्रबंध तंत्र ने अभियान का श्रीगणेश करते हुये कहा था कि सर्वे में पता चला है कि अधिकांश शोरूम के नीचे अवैध बेसमेंट हैं, जिस व्यापारी के शोरूम का बेसमेंट सील किया गया है, उसी का मल्टीलेवल पाॄकग के पास भी शोरूम है। इसमें भी अवैध बेसमेंट बना है। यह निर्माण मेट्रों की आड़ में हुआ। ऐसे कई बेसमेंट अभी जानकारी में आये हैं। इनके खिलाफ पूर्व में हुई कार्रवाई और नये निर्माण का भी पता किया जा रहा है। साथ ही यह दावा भी किया गया था कि हजरतगंज में निर्माणाधीन मेट्रो की आड़ में व्यापारियों ने अवैध बेसमेंट बनाने के लिये रातों-रात अवैध खनन किये हैं। इतना ही नहीं हजरतगंज में अवैध बेसमेंटों की सख्या लगभग 200 से अधिक बताई गई थी।

बीते दिनों एलडीए प्रबंध तंत्र ने ऐसे ही कई और भी दावे किये थे। पर, महज कुछ ही दिनों बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के वही अधिकारी अब कागजी कार्रवाई में उलझे दिख रहे हैं। जानकारों की मानें तो अवैध बेसमेंटों का भौैतक सत्यापन करने के बजाय अब इस अभियान के कप्तान की नजर विहित प्राधिकारी कार्यालय की फाइलों पर टिक गई है। फाइलों के पन्ने पलटे जा रहे हैं, यह जानने के लिये कि हजरतगंज में बने किस अवैध बेसमेंट के खिलाफ पूर्व में क्या कार्रवाई की गई है। महज कुछ ही दिनों में सख्त एलडीए वीसी की टीम के अधिकारी बड़े व्यापारियों के अवैध बेसमेंटों के सामने हांफने लगे हैं।

हजरतगंज क्षेत्र में अवैध बेसमेंटों के निर्माण पर विहित प्राधिकारी के स्तर से हुई कार्रवाई को देखा जा रहा है। अब तक हुई कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज एकत्र किये जा रहे हैं। एक शोरूम का निर्माणाधीन अवैध बेसमेंट सील किया गया है। एक अवैध बेसमेंट की जानकारी और मिली है। विहित प्राधिकारी कार्यालय से हुई कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।
ओपी मिश्रा, प्रभारी प्रवर्तन -6 एलडीए

एलडीए वीसी-सचिव के खिलाफ वारंट जारी
लखनऊ। वर्ष 2005 से लंबित वाद में एलडीए वीसी और सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी हुये हैं। जिला उपभोक्ता फोरम के सदस्य राजश्री शुक्ला ने नबीउल्लाह रोड के विस्थापितों को प्रियदर्शनी योजना में भूखण्ड नहीं मिल पाने के मामले में यह आदेश दिये हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण के वीसी प्रभु एन सिंह और सचिव एमपी सिंह को 28 फरवरी को सुनवाई में मौजूद रहना होगा। विस्थापित चांद खां, बल्देव सिंह आदि ने फोरम में एलडीए के खिलाफ शिकायत की थी। राजश्री शुक्ला ने आदेश में कहा कि 2003 में जिला उपभोक्ता फोरम ने आवंटियों को राहत देने के लिये लखनऊ विकास प्राधिकरण को कहा था। इसके खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्टï्रीय उपभोक्ता आयोग में भी अपील की गई। दोनों ही जगह एलडीए को राहत नहीं मिली। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं की गई। ऐसे में अभी जिला उपभोक्ता फोरम का पूर्व का आदेश लागू होता है। हालांकि, इसे लागू करने में प्राधिकरण विफल रहा। वहीं एलडीए का कोई भी प्रतिनिधि 30 जनवरी की सुनवाई और उसके बाद भी फोरम में उपस्थिति नहीं हुआ। इसके बाद एलडीए वीसी और सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया।

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