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नई तबादला नीति से… खतरे में मलाईदार कुर्सी

लेसा के 16 डिवीजन में चार साल से अधिक समय से तैनात हैं अधिशासी अभियंता

कई अभियंता शहर में ही नौकरी के पूरे कर चुके हैं 10 साल से अधिक का समय

bijli-pलखनऊ। योगी सरकार की नई तबादला नीति से लेसा में व्हाइटवॉश जैसी स्थिति बन रही है। वर्षों से मलाईदार कुर्सियों पर बैठे अधिकारियों की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। लेसा के 16 डिवीजनों में तैनात अधिशासी अभियंता ऐसे हैं जिनकी तैनाती को चार से पांच साल हो गए हैं। इनमें से 6 अभियंता ऐसे हैं जो शहर में ही 10 साल से अधिक समय से नौकरी कर कर रहे हैं। एक ही जनपद में कई सालों से नौकरी करने में सहायक अभियंता व अवर अभियंता भी पीछे नहीं हैं। लेसा में तैनात दो सहायक अभियंता व चार अवर अभियंता ऐसे हैं जो डेढ़ दशक से जमे हैं। लंबे समय से डिवीजन में तैनात कुछ अभियंता ऐसे हैं जिन्हें कॉरपोरेशन के पूर्व प्रबंध निदेशक का संरक्षण प्राप्त था। मलाईदार डिवीजनों में तैनात इन अभियंताओं को कमाऊ पूत की संज्ञा दी गयी थी। ये अभियंता पूर्व एमडी के नौ रत्नों में भी गिने जाते हैं। दबंग अभियंताओं का तबादला भी हुआ लेकिन रसूख व सेटिंग के बल पर दबाव में तबादला निरस्त हो गया। बताते चलें कि प्रदेश सरकार ने बीते दिनों स्थानांतरण सत्र 2017-18 के लिए सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्थानांतरण नीति को लागू कर दिया। नई व्यवस्था के तहत शासन, विभागाध्यक्ष, मंडल व जिला स्तर के सभी स्थानांतरण 30 जून 2017 तक पूरे कर लिए जाएंगे। लेसा में रहीमनगर, बीकेटी, डालीगंज, राजभवन, अमीनाबाद, चिनहट, वृंदावन, कानपुर रोड सहित 18 विद्युत खंड ऐसे हैं जहां तीन साल या इससे अधिक समय से अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता तैनात हैं। विभागीय स्तर पर जल्द तबादला नीति का पालन किए जाने की बात कही जा रही है।

इन डिवीजनों में लंबे समय से तैनात हैं अभियंता
अधिशासी अभि. तैनात कब से
अनिल जायसवाल रहीमनगर 24 मई 2012
राम प्रकाश बीकेटी 01 अक्टूबर 2012
अशोक कुमार वर्मा डालीगंज 25 अक्टूबर 2012
आनंद प्रकाश राजभवन 20 मई 2013
अनिल कुमार अमीनाबाद 06 जुलाई 2013
शैलेष गुप्ता चिनहट 08 जून 2013
रवि चन्द्र श्रीवास्तव परीक्षण खंड 03 जून 2013
उजैर अहमद परीक्षण खंड 01 मार्च 2013
अनूप सक्सेना सेस-2 29 जुलाई 2013
पंकज अग्रवाल निर्माण खंड 12 जुलाई 2013
ब्रजेश कुमार विश्वविद्यालय 06 जुलाई 2013
आशु कालिया कानपुर रोड जुलाई 2013
नंद किशोर मिश्र वृंदावन 05 जून 2013
राम बरन परीक्षण खंड 19 अक्टूबर 2013
अजय कुमार चौक 17 जनवरी 2013
पीके सिंह मुंशीपुलिया 08 जुलाई 2013
संजय शर्मा (एसडीओ) कैंट 01 जनवरी 2013
आरके मिश्र(एसडीओ) क्लाइड रोड 31 दिसम्बर 2013

अधिशासी अभि. तैनाती वर्ष कब से
ेअसलम हुसैन 2001 से 16 वर्ष
राम प्रकाश 2001 से 16 वर्ष
विनीत रस्तोगी 2003 से 13 वर्ष
एनके मिश्र 2005 से 11 वर्ष
एके जायसवाल 2005 से 11 वर्ष
आनंद प्रकाश 2005 से 11 वर्ष
सहायक अभि. तैनाती वर्ष कब से
दूधनाथ यादव 2000 से 17 वर्ष
संजय शर्मा 2001 से 16 वर्ष
अवर अभि. तैनाती वर्ष कब से
बिजेन्द्र कुमार 1998 से 20 वर्ष
डीके मिश्र 1999 से 19 वर्ष
गेनुराम 2000 से 17 वर्ष
धरमदेव 2000 से 17 वर्ष

एलडीए में 50 प्रतिशत तबादले की जद में
एलडीए में 50 प्रतिशत इंजीनियर और अधिकारी इस जद में आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार कुछ इंजीनियर तो 30 साल से यही पर काम कर रहे हैं। संयुक्त सचिव भी लंबे समय से प्राधिकरण में काम कर रहे हैं। नीति को मंजूरी मिलने के बाद एलडीए में सूची बनाने का काम शुरू हो गया है। सूची में दो दर्जन अधिशासी अभियंताओं के साथ ही अधिकारियों के नाम शामिल हैं। अधीक्षण अभियंता पद पर पदोन्नति हुए दुर्गेश श्रीवास्तव, डीसी श्रीवास्तव और योगेश श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिक डीपी सिंह, उप सचिव केके सिंह, संयुक्त सचिव एनएन सिंह, संतोष मुर्डिया के अलावा बड़ी संख्या में अधिकारी और इंजीनियर शामिल हैं। लंबे समय से लखनऊ विकास प्राधिकरण में ही कार्य करने से अवैध निर्माणों पर रोक नहीं लग पा रही है जबकि मिलीभगत से शहर में अनियोजित विकास फल-फूल रहा है। अगर स्थानांतरण नीति लागू होती है तो प्राधिकरण में 50 प्रतिशत नए अधिकारी और इंजीनियर काम करेंगे। एलडीए में स्वीकृत पदों के सापेक्ष भी दो दर्जन इंजीनियर काम कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार मुख्य अभियंता का एक पद एलडीए में है। लेकिन यहां एक मुख्य अभियंता सिविल और एक विद्युत यांत्रिक से है। इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के दो पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनात हैं तीन। वहीं प्राधिकरण केंद्रीय सेवा के अधिशासी अभियंता के 10 पद स्वीकृत के सापेक्ष 14 तैनात हैं।

25 सालों से जमे हैं डाक्टर, अफसर व इंजीनियर
नगर निगम में सबसे अधिक लंबे समय लगभग 25 वर्षो से चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि गर्ग तैनात हैं। नगर निगम में कार्यरत केंद्रीयत संवर्ग के अधिकारी कई सालों से जमे हैं। जिन अधिकारियों का स्थानांतरण हुआ उन्होंने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर फिर से तैनाती करा ली। हालांकि नगर निगम में तैनात ऐसे अफसरों का शासकीय दबाव अब नहीं चल सकेगा। सरकार के नई स्थानातंरण नीति के अंतर्गत 30 जून तक तबादला किया जाना है। हालांकि इससे पहले कोर्ट के आदेश पर शासन को 13 अक्टूबर तक छह वर्ष से अधिक तैनात अधिकारियों का तबादला करना था। लेकिन बाद में इस मामले में स्टे मिलने के बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई थी। शासनादेश जारी होने के बाद नगर निगम में दर्जन से अधिक अधिकारियों का स्थानांतरण हो जाएगा। नगर निगम में चौपड़ अस्पताल में कार्यरत चिकित्साधिकारी ग्रेड 1 डॉ. रश्मि गर्ग 25 वर्ष से तैनात हैं। वहीं वैद्य गेड वन श्रेणी टू रामनरेश नौ साल से नगर निगम की डिस्पेंसरी में कार्यरत हैं। उप नगर आयुक्त से अपर नगर आयुक्त प्रमोशन होने के बाद पीके श्रीवास्तव यही रह गए। हालांकि बीते साल स्थनांतरण हुआ था लेकिन जुगाड़ के चलते बच गए। इसी प्रकार अवर अभियंताओं में महेश्वरी प्रसाद श्रीवास्तव, धीरेंद्र प्रसाद पांडेय, किशोरी लाल, कर एंव राजस्व निरीक्षक में नकुल सोनकर, प्रीतम सिंह वर्मा, चिकित्साधिकारी ग्रेड-1 डॉ. रश्मि गर्ग 1990 से, वैद्य ग्रेड-1 डॉ. रामनरेश 2006 , सहायक अभियंता से पदोन्नति होकर अधिशासी अभियंता के पद पर सै. फरीद अ?तर जैदी, कर अधीक्षकों में अखिलेश कुमार नायक, नरेंद्र देव वर्मा व बृजेश कुमार वमा नगर निगम में काम कर रहे हैं।

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