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बांड फंसा, निवेशक मिले नहीं… क्या खाक पूरे होंगे सपने

लखनऊ। एक तरफ निवेशकों को लाने के दावे ठोकने वाली सरकार ने करोड़ों रुपये उन्हें लुभाने में डुबो दिये तो दूसरी तरफ लखनऊ नगर निगम को निवेशकों के ना मिलने से लोगों के सपनों की फाइल अब धूंल फांकने के लिए अलमारी में दबा दी गई है। लखनऊ वासियों को उम्मीद थी कि उन्हें भी नगर निगम के फ्लैट मिलेंगे, लेकिन हर बार की तरह इस बार फिर शहरवासियों की उम्मीदों पर निगम खरा नहीं उतरा है, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा जायज है।

आपको बता दें कि २१-२२ फरवरी २०१८ को लखनऊ में यूपी इन्वेस्टर समिट के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को निवेश कराने के लिए भव्य आयोजन किया, निवेशकों ने वादों की बौछार कर दी, लेकिन जमीन पर कितने आये ये किसी से छिपा नहीं है। यूपी की राजधानी के लोगों को उम्मीद थी कि निवेश का रास्ता खुलेगा तो शहर का विकास होगा, लेकिन लखनऊ नगर निगम को तो निवेशक ढूढ़े ही नहीं मिले। निवेशकों के न मिलने से फ्लैट्स का निर्माण शुरू ही नहीं किया जा सका। ये निगम का पहला रियल एस्टेट प्रोजेक्ट था, जो फाइल में सिमटता हुआ दिखाई दे रहा है।

आप यदि अभी भी नगर निगम के फ्लैट्स लेने का सपना देख रहे हैं तो आपको ये जानकर और भी ज्यादा हैरानी होने वाली है कि अभी इसके लिए कितना लंबा इंतजार करना होगा, ये खुद निगम अधिकारियों को भी नहीं पता है। इसकी वजह यह है कि सिटी बांड के वित्तीय पेंच में फंसने के कारण फिलहाल इसे जारी नहीं किया जा सका है। जिसकी वजह से निवेशक सामने नहीं आएंगे और इसका सीधा असर निगम की ओर से तैयार कराए जा रहे फ्लैट्स पर पड़ेगा।

फिलहाल, निगम प्रशासन की ओर से बांड जारी करने के लिए अन्य विकल्पों पर केवल विचार ही किया जा रहा है। ऐसे घरौंदे का सपना संजोने वाले लोगों को अभी कोई खुशखबरी नहीं मिलने वाली है। गौरतलब है कि निगम प्रशासन की ओर से निवेशकों को लुभाने के लिए मुंबई में इंवेस्टर्स समिट का आयोजन भी करवाया गया था। हालांकि कोई बेहतर परिणाम सामने नहीं आया। इसके बाद अगला इंवेस्टर्स समिट दिल्ली में आयोजित किया जाना था, जो अभी तक नहीं हो सका।

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आखिर कब तक रहेगा वित्तीय पेंच

मिली जानकारी के अनुसार, सिटी बांड पर वित्तीय पेंच फंस गया है। इसकी वजह से फिलहाल इसे जारी नहीं किया जा सकता है। जिससे साफ है कि निवेशकों को लुभाने के लिए कोई कवायद नहीं की जाएगी। जब तक सिटी बांड में निवेश नहीं होगा, तब तक निगम की योजनाओं में भी वित्तीय निवेश होना संभव नहीं है।

700 फ्लैट पर संकट

नगर निगम की ओर से करीब दो सौ करोड़ का सिटी बांड जारी किया जाना था। निगम प्रशासन को उम्मीद थी कि सिटी बांड जारी करने से कई योजनाओं को रफ्तार मिल सकती है, जिसमें मुख्य रूप से पीजीआई के पीछे तैयार कराए जा रहे फ्लैट्स शामिल हैं। यहां 43.58 वर्गमीटर से लेकर 153 वर्ग मीटर के फ्लैट उपलब्ध होंगे। इनकी कीमत 10.50 लाख से शुरू होकर 64.00 लाख तक है।

फिलहाल अभी सिटी बांड जारी नहीं किया जा सका है, जिसकी वजह से निगम की अन्य योजनाओं में निवेश की संभावना शून्य है। चुनाव के बाद जून में कुछ सकारात्मक खबर मिलेगी।
डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त

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