Breaking News
Home / Breaking News / बिना कुछ बदले बीत गया जीएसटी का एक साल

बिना कुछ बदले बीत गया जीएसटी का एक साल

  • जीएसटी का एक साल पूरा हो गया लेकिन व्यापारी, जनता सब बेहालsalestax
  • जीएसटी की कमियों को लेकर व्यापारियों के साथ अधिकारियों में भी रोष
  • जीएसटी के स्वरूप में नहीं आ सका वाणिज्यकर विभाग
  • जीएसटी लागू होने के बाद भी अब तक कैडर के साथ विभाग का नाम तक नहीं बदला गया

बिजनेस लिंक ब्यूरो
लखनऊ। जीएसटी लागू हुए भले ही पहली जुलाई को एक साल पूरा हो जाएगा लेकिन, इसको लागू करवाने वाला वाणिज्यकर विभाग ही इसके वस्ताविक स्वरूप में नहीं आ सका है। हैरनी इस बात की है कि यूपी देश का सबसे बड़ा व पहला ऐसा राज्य है, जिसमें अभी तक न तो वाणिज्यकर विभाग का दस्तावेज पर नाम बदला है और न ही इसके मूल स्वरूप के अनुसार पदों का पुर्नगठन ही किया जा सकता है। जबकि विभाग का अधिकारी संघ लगातार कैडर पुर्नगठन की मांग करता आ रहा है। अधिकारी सड़कों पर भी उतरे, आश्वासन भी दिया गया लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। परिणाम यह हुआ कि पिछले दिनों जारी हुई वाणिज्यकर अधिकारियों की तबादला सूची में तमाम अधिकारियों की तैनाती पंजीयन प्रकोष्ठ में कर दी गयी, जबकि जीएसटी में इसकी कोई व्यवस्था ही नहीं है।
जीएसटी लागू हुए बीते एक जुलाई को एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन अभी तक दस्तावेजों में इसका औपचारिक नाम वाणिज्यकर विभाग ही है। जबकि देश के अन्य राज्यों में इसका नाम भी बदल चुका है और जीएसटी के मुताबिक कैडर पुर्नगठन करके आवश्यकता के मुताबिक अधिकारियों की तैनाती भी कर दी गयी है, लेकिन यूपी में अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं की जा सकी है। वाणिज्य कर अधिकारियों के सबसे बड़े संघ ने कैडर पुर्नगठन को लेकर सरकार को जगाने के लिए मीराबाई मार्ग स्थित कार्यालय से हजरतगंज तक मार्च भी निकाला, प्रदेश भर में धरना-प्रदर्शन हुआ तो मुख्यालय स्तर पर कैडर पुर्नगठन के लिए कमेटी का गठन किया गया लेकिन बाद भी सब ठंडे बस्ते में चला गया। विभाग के अधिकारियों को छटका तब लगा जब मुख्यालय प्रशासन ने यह तय किया कि मौजूद मानव सम्पदा के अनुपात में कैडर पुर्नगठन के लिए वाह्य संस्था की राय लेनी की बात कही। आपको बता दे कि पिछले दिनों विभाग के अन्य वर्गों के कर्मचारियों ने भी तमाम मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।
गौरतलब है कि देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स कानून लागू हुए एक वर्ष पूरा होने के मौके पर सेवा एंव वस्तुकर विभाग द्वारा मार्च निकाला गया और कमिश्नर वाणिज्यकर मुख्यालय में विचार गोष्ठी भी की गयी, लेकिन एक साल के लम्बे समय में व्यापारी, जनता ही नहीं विभाग के अधिकारियों की समस्या में कोई कमी आयी तो जवाब न में ही मिलेगा। जीएसटी को लेकर अलग- अलग वर्ग के लोगों की इस पर राय जानी तो परिणाम निराशा जनक ही सामने आये। 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के दौरान सरकार ने इसे आम जनता व व्यापारियों के लिए सुविधा जनक होने के दावे किये थे, शुरुआती दिनों में आने वाली समस्याओं का भी जल्द समाधान किये जाने के तमाम दावे किये गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इसमें कोई आपेक्षित सुधार लोगों को नजर नही आ रहा है। वे व्यापार मंडल जो कि जीएसटी लागू होने के दौरान इसकी सफलता के लिए विचार गोष्ठी कराते रहे, पंजीकरण के लिए बाजारों में विभाग द्वारा लगाए गए कैम्प में व्यापारियों को पंजीकरण के लिए प्रेरित कर रहे थे, आधार वर्ष आते- आते उनके भी हौसले परस्त होते नजर आए। लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्रा की माने तो जीएसटी में काम कम हुआ लेकिन प्रयोग अधिक हुए हैं। ईमानदार व्यापारी प्रयोगशाला का जानवर बनकर रह गया, जिसके ऊपर दवाओं का अलग- अलग तरह से प्रयोग करके देखा जाता रहा। वस्तुओं पर टैक्स की दरें बढऩे से आम जनता बेहल है, रिटर्न दाखिल करने की अन्तिम तिथि पर पोर्टल ठप हो जाने से व्यापारियों पर जुर्माने की तलवार लटकी रही। एक तरफ पंजीकृत कारोबारी पर विभाग की तलवार लटकी रही, वहीं करापंचकों के लिए बेहतर समय रहा।
विभाग भले ही रिफंड पखवाड़ा मना रहा हो लेकिन व्यापारियों के सामने समस्या तो बनी ही रही, व्यापार मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि एक तरफ प्रधानमंत्री डीजिटल इंडिया की बात कह रहे हैं, सारी व्यवस्था ऑनलाइन हो रही है वहीं जीएसटी में एक बार रिफंड के लिए ऑनलाइन आवेदन करना और फिर एक दस्तावेज लेकर करनिर्धारण अधिकारी के चक्कर लगाना न्याय संगत नहीं है। व्यापारी द्वारा रिटर्न दाखिल करने को लेकर विभाग के मुख्यालय व मंडल के अधिकारियों के बीच में ही विवाद चलता रहा। इस पूरे घटनाक्रम के बीच में सबसे बधाई के पात्र है, कमिश्नर वाणिज्यकर कार्यालय के वे एडीशनल कमिश्नर (जीएसटी) जो अपने स्तर पर समस्या का समाधान तो नहीं करवा सके, लेकिन व्यापारियों की बैठक में वे जनता व व्यापारियों को झूठा साबित करने की जिम्मेदारी पूरी मजबूती से निभाते रहे।

About Editor

Check Also

vinay

सपा के प्रदेश सचिव बनें विनय श्रीवास्तव

बिजनेस लिंक ब्यूरो लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>