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दोगुनी आय से किसानों के जीवन में आएगा व्यापक बदलाव : मुख्यमंत्री

वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखी जाएगी कृषि उपज
1.85 लाख मीट्रिक टन बढ़ेगी कृषि उपज भंडारण क्षमता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ऑनलाइन शिलान्यास

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शुरू से ही किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। इस दिशा में सरकार ने कृषि उपज के लिए सुरक्षित भंडारण की क्षमता में रिकार्ड बढ़ोत्तरी करने के लिए अहम निर्णय लिया है। प्रदेश में किसानों की उपज भंडारण की क्षमता में रिकार्ड 1.85 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि करने की योजना को जमीन पर उतारा है।
उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम 37 मंडियों में 5000-5000 मीट्रिक टन क्षमता के नए भंडारगृहों का निर्माण करेगा, जिनकी अनुमानित लागत 187.32 करोड़ रुपये है। इन गोदामों के निर्माण से गाजीपुर, बलिया, बहराइच, फतेहपुर, झांसी, जालौन, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रामपुर, जेपी नगर, बिजनौर, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, महोबा, बांदा, हमीरपुर, मिर्जापुर, संतरविदास नगर, फर्रुखाबाद, औरैया, रायबरेली और कौशाम्बी के किसानों को विशेष लाभ होगा।

उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम द्वारा बनाये जाने वाले 37 भंडारगृहों के ऑनलाइन शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मार्च 2017 में जब हमारी सरकार बनी, तो हमारे सामने भंडारगृहों की चुनौती थी। गेहूं खरीदने के बाद सुरक्षित रखने की समस्या सामने आई। कारण, स्टोरेज क्षमता नहीं थी। अप्रैल से गेहूं क्रय शुरू होना था। सबसे पहला प्रश्न स्टोरेज का था। हमने इस पर काम किया। किसान के उत्पाद को खरीदना और अगले 48 घंटे में उनके खाते में धनराशि जाना एक सपना था, लेकिन पहली ही बार में 37 लाख मीट्रिक टन अनाज खरीदने के साथ न्यूनम समर्थन मूल्य खातों में देने का कार्य किया गया। अगर स्टोरेज क्षमता नहीं होती, तो ऐसा नहीं कर सकते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल उपज को खरीदने का काम 53 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा है। ये साबित करता है कि किसान को जब उपज का उचित मूल्य मिलता है तो उसके जीवन में व्यापक बदलाव आता है। साथ ही बाजार को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अलावा कालाबाजरी पर रोक के साथ किसान का शोषण रुकता है। किसान पहले पलायन को मजबूर था, लेकिन बीते तीन वर्ष में किए गए हमारे प्रयासों से अब वह खेती-किसानों की तरफ वापस आया है। उसे विश्वास हुआ है कि खेती घाटे का सौदा नहीं है। उसे लागत का डेढ़ गुना दाम मिलना प्रारम्भ हुआ है। परम्परागत खेती-किसानी की ओर विमुख होने के बाद अब लोग फिर उस ओर बढ़ रहे हैं।

अन्नदाता की भूमिका में वापस लौटे हैं। सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने बताया कि प्रदेश के 37 जनपदों 5-5 हजार मैट्रिक टन क्षमता के गोदाम एवं अन्य सुविधाओं के निर्माण से एक ओर जहां निगम की क्षमता में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर किसानों की उपज का अधिक से अधिक भंडारण कर उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त होगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की बागडोर संभालने के साथ ही किसानों को समृद्ध बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को आत्मसात कर किसानों की आय दोगुनी करने का कार्य प्रारम्भ किया।

कृषि अर्थव्यवस्था के मुताबिक, इस क्षेत्र में सिर्फ इनपुट कास्ट और उत्पादन पर मिलने वाला मूल्य ही प्रमुख नहीं होते, बल्कि किसानों को मिलने वाले सस्ते ऋण, उचित मूल्यों पर मिलने उन्नतशील बीज और उर्वरक, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी, प्राकृतिक आपदाओं से संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति तथा उपज के रख-रखाव और बिना किसी बिचैलिए के मंडियों तक उनके उत्पादन की पहुंच बेहद अहम होती है और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने के लिए इस दिशा में संजीदगी के साथ कार्य कर रही है।

सहकारी क्षेत्र की एजेंसियां करेंगी निर्माण
राज्य सरकार द्वारा नामित सहकारी क्षेत्र की एजेंसियां उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड मंडी स्थलों पर गोदामों का निर्माण करेंगी। भारतीय खाद्य निगम के पीईजी (निजी उद्यमी गारंटी) योजना के तहत कराये जा रहे इन गोदामों के निर्माण से प्रदेश में भंडारण की समस्या से राहत मिलेगी और किसानों द्वारा उत्पादित अनाज को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखकर किसानों को लाभान्वित किया जा सकेगा।

निगम ने अर्जित किया सर्वाधिक लाभ
उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम के प्रबंध निदेशक श्रीकान्त गोस्वामी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में निगम का शुद्ध लाभ रुपये 101.76 करोड़ अनुमानित है, जो अब तक के लाभ का सर्वाधिक है। प्रदेश में 40 मंडी स्थलों पर 5000-5000 मी. टन क्षमता के गोदामों के निर्माण के लिए निगम को बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीडीटी) के आधार पर नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई है, जिनमें से हस्तांतरित की गई 37 स्थानों पर कुल 1.85 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता का विस्तार होगा, जिनमें प्रत्येक स्थल पर स्थानीय किसानों के लिए 500 से 1000 मीट्रिक टन क्षमता का भंडारण आरक्षित किया जाएगा।

इन जनपदों में निर्मित होंगे गोदाम
मंडी परिषद द्वारा गोदाम निर्माण के लिए प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 37 स्थल उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें गाजीपुर, बलिया, बहराइच, फतेहपुर, झांसी, जालौन, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रामपुर, जेपी नगर, बिजनौर, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, महोबा, बांदा, हमीरपुर, मिर्जापुर, संतरविदास नगर, फर्रुखाबाद, औरैया, रायबरेली और कौशाम्बी हैं।

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