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कश्मीर के नेताओं ने परिसीमन संबंधी रिपोर्टों पर जताई चिंता

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, नेशनल कांफ्रेंस उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन और पीपुल्स मूवमेंट के अध्यक्ष शाह फैसल ने इन रिपोर्टों पर चिंता जताई है जिनमें कहा गया है कि केन्द्र सरकार राज्य में विधानसभा सीटों के ताजा परिसीमन पर विचार कर रही है।

इन क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया की है जिनमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर में विधानसभा सीटों के ताजा परिसीमन पर विचार कर रहे हैं। मुफ्ती का कहना है कि जबरन परिसीमन निसंदेह राज्य का सांप्रदायिक आधार पर एक और भावुक विभाजन होगा।

उन्होंने एक ट्वीट कर कहा, ‘‘राज्य में विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्मापन की केन्द्र सरकार की योजना के बारे में सुनकर काफी पीड़ा हुई है और जबरन किया गया परिसीमन निसंदेह सांप्रदायिक आधार पर एक और भावुक विभाजन होगा। पुराने जख्मों को भरने के बजाय अब वे कश्मीरियों को दर्द दे रहे हैं।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि देश में 2026 तक परिसीमन पर रोक लगी है और जब तक यह रोक है तब तक उनकी पार्टी इसका जोरदार विरोध करती रहेगी। यह कानूनी फैसला राज्य पर भी लागू है।

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लोन ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘उम्मीद है कि परिसीमन संबंधी रिपोर्टें सच नहीं हों और समझ नहीं आता है कि आखिर धरती को तबाह करने की उन्हें ऐसी भी क्या जल्दी है। अगर कश्मीर में हजारों लोगों की कब्रों का होना उन्हें गलत नहीं लगता तो इस बात को लेकर आश्चर्य है कि गलत की आखिर परिभाषा क्या है।’’

इस बीच फैसल ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन कर प्रस्तावित परिसीमन कार्रवाई के बारे में लोगों के तनाव को दूर करें।

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